Rajasthan News: राजस्थान में महिलाओं की सुरक्षा पर यूपी के मुख्यमंत्री का सवालिया निशान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का चित्तौड़गढ़ में दिया गया बयान राजस्थान की राजनीति में नई चर्चा छेड़ गया है। उन्होंने मेवाड़ की शौर्य परंपरा को नमन करते हुए चित्तौड़गढ़ के किले को भारत की अस्मिता का प्रहरी बताया, लेकिन उनके भाषण का सबसे चर्चित हिस्सा वह रहा जहां उन्होंने यूपी में महिलाओं की सुरक्षा को ‘गारंटी’ के तौर पर पेश किया। राजस्थान की धरती पर खड़े होकर योगी का यह कहना कि “आज उत्तर प्रदेश में महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं,” पड़ोसी राज्य की भजनलाल सरकार के लिए एक असहज स्थिति पैदा करता है। भजनलाल सरकार के लिए चुभने वाले मायने— योगी आदित्यनाथ का यह बयान सीधे तौर पर राजस्थान की कानून-व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है। एक ही विचारधारा की सरकार होने के बावजूद, जब एक मुख्यमंत्री दूसरे राज्य में जाकर अपने प्रदेश के ‘सुरक्षा मॉडल’ का बखान करता है, तो यह संकेत जाता है कि मेजबान राज्य में स्थिति वैसी नहीं है जैसी होनी चाहिए। राजस्थान में भाजपा ने कांग्रेस शासन के दौरान ‘महिला अपराध’ को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद भी जमीनी हकीकत में कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं दिख रहा है। योगी का बयान राजस्थान सरकार को आईना दिखाने जैसा है कि सुरक्षा केवल वादों से नहीं, बल्कि ‘यूपी मॉडल’ जैसे कड़े इकबाल से आती है। क्या राजस्थान में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं?— आंकड़ों और हालिया घटनाओं पर नजर डालें तो राजस्थान में महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के पिछले कुछ सालों के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में राजस्थान अक्सर शीर्ष राज्यों में रहा है। भजनलाल सरकार के कार्यकाल में भी प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से दुष्कर्म, अपहरण और घरेलू हिंसा की खबरें लगातार आ रही हैं। योगी आदित्यनाथ के ‘सुरक्षा और सम्मान’ के दावे के विपरीत, राजस्थान में आज भी महिलाएं रात के समय घर से बाहर निकलने में असुरक्षा महसूस करती हैं। सरकारी तंत्र की विफलता का ही नतीजा है कि मुख्यमंत्री को दूसरे राज्य के मॉडल की प्रशंसा सुननी पड़ रही है। देशव्यापी स्थिति और खोखले दावे— सिर्फ राजस्थान ही नहीं, पूरे देश में महिला सुरक्षा की स्थिति संतोषजनक नहीं है। जब नेता ‘पूरी तरह सुरक्षित’ होने का दावा करते हैं, तो वे उन हजारों पीड़िताओं के दर्द को नजरअंदाज कर देते हैं जो थानों के चक्कर काट रही हैं। चित्तौड़गढ़ जैसे ऐतिहासिक स्थल से जब सुरक्षा की बात होती है, तो यह केवल चुनावी भाषण बनकर रह जाती है। धरातल पर न तो उत्तर प्रदेश पूरी तरह अपराध मुक्त हुआ है और न ही राजस्थान में सुरक्षा की वह गारंटी दिख रही है जिसका वादा चुनाव के समय किया गया था। योगी आदित्यनाथ का बयान एक ओर तो उनकी अपनी सरकार की पीठ थपथपाता है, लेकिन दूसरी ओर यह राजस्थान की भजनलाल सरकार की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा ‘डिस्क्लेमर’ है। यह बयान साफ करता है कि राजस्थान में ‘सुरक्षा का राज’ स्थापित करना अभी कोसों दूर है। जब तक सरकारें आंकड़ों की बाजीगरी छोड़कर कड़े कदम नहीं उठातीं, तब तक “महिलाएं सुरक्षित हैं” जैसे दावे केवल किलों की दीवारों से टकराकर दम तोड़ने वाले नारे ही बने रहेंगे।

Jaipur News: नशे में धुत थार चालक का तांडव, थाने के सामने खड़ी पुलिस की गाड़ी को मारी टक्कर

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राजधानी के बिंदायका थाना इलाके में स्थित सिंवार मोड़ पर उस वक्त अफरा-तफरी और हड़कंप मच गया, जब एक तेज रफ्तार और बेकाबू ब्लैक थार ने जमकर उत्पात मचाया। नशे की हालत में धुत एक थार चालक ने कानून और व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए बिंदायका थाने के ठीक सामने खड़ी पुलिस की ‘डायल 112’ गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण भिड़ंत में पुलिस का वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। तेज रफ्तार और लापरवाही का मंजर— प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, ब्लैक थार चालक वैशाली नगर की दिशा से मुण्डियारामसर की तरफ जा रहा था। थार की रफ्तार इतनी अधिक थी कि सड़क पर चल रहे अन्य राहगीरों में भी दहशत फैल गई। जैसे ही थार बिंदायका थाने के सामने स्थित सिंवार मोड़ पर पहुंची, चालक ने गाड़ी पर से पूरी तरह नियंत्रण खो दिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि चालक नशे में इतनी बुरी तरह धुत था कि उसे सामने खड़ी गाड़ियां तक नजर नहीं आईं। पुलिस वाहन और मोटरसाइकिल को बनाया निशाना— बेकाबू थार ने सबसे पहले थाने के बाहर ड्यूटी के लिए तैनात पुलिस की ‘डायल 112’ गाड़ी को अपनी चपेट में लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पुलिस वैन का अगला हिस्सा पूरी तरह पिचक गया और वह काफी दूर तक घिसटती चली गई। थार का कहर यहीं नहीं थमा; पुलिस गाड़ी को टक्कर मारने के बाद उसने पास ही खड़ी एक मोटरसाइकिल को भी जोरदार टक्कर मारी, जिससे बाइक के परखच्चे उड़ गए। गनीमत यह रही कि हादसे के वक्त पुलिस गाड़ी के पास कोई पुलिसकर्मी या राहगीर मौजूद नहीं था, वरना बड़ी जनहानि हो सकती थी। मचा हड़कंप, आरोपी हिरासत में— थाने के ठीक बाहर जोरदार धमाके की आवाज सुनकर थाने में मौजूद पुलिसकर्मी तुरंत बाहर दौड़े। मौके पर मौजूद भीड़ ने थार को रुकवाया और चालक को बाहर निकाला। पुलिस ने मौके की नजाकत को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की और आरोपी थार चालक को हिरासत में ले लिया। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि चालक अत्यधिक शराब के नशे में था, जिस कारण वह गाड़ी को संतुलित नहीं कर पाया। स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश— इस घटना के बाद इलाके के व्यापारियों और निवासियों में भारी रोष व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सिंवार मोड़ और बिंदायका इलाके में आए दिन तेज रफ्तार वाहनों के कारण हादसे होते रहते हैं। लोगों ने मांग की है कि शराब पीकर वाहन चलाने वालों और ओवरस्पीडिंग करने वालों के खिलाफ पुलिस को सख्त अभियान चलाना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके। पुलिस की कार्रवाई जारी— बिंदायका थाना पुलिस ने क्षतिग्रस्त पुलिस वाहन और बाइक को कब्जे में ले लिया है। पुलिस ने आरोपी चालक का मेडिकल परीक्षण करवाया है ताकि रक्त में अल्कोहल की मात्रा की पुष्टि हो सके। आरोपी के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और मोटर व्हीकल एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि थार चालक के साथ गाड़ी में और कौन मौजूद था और गाड़ी के दस्तावेज सही हैं या नहीं।

Rajasthan News: प्रदेश के सबसे ‘धनी’ आईएएसों में अम्बरीश कुमार

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राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों आईएएस अधिकारियों की अचल संपत्ति का ब्यौरा चर्चा का विषय बना हुआ है। 31 दिसंबर 2025 तक की स्थिति के अनुसार सार्वजनिक की गई इस ताजा सूची ने कई चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। इस नई लिस्ट में 2004 बैच के आईएएस अधिकारी और वर्तमान में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सचिव, अम्बरीश कुमार प्रदेश के सबसे अमीर आईएएस अधिकारी बनकर उभरे हैं। उनकी अचल संपत्ति का कुल वर्तमान बाजार मूल्य 20.62 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। उनकी संपत्ति में जयपुर के पॉश इलाकों के साथ-साथ अन्य स्थानों पर आवासीय और व्यावसायिक भूखंड शामिल हैं। अन्य शीर्ष अधिकारी भी चर्चा में— अम्बरीश कुमार के अलावा कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्ति भी करोड़ों में दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार सूची में कई ऐसे अधिकारी भी हैं जिनकी संपत्ति पिछले एक साल में तेजी से बढ़ी है। इन संपत्तियों में पुश्तैनी जमीनें, फ्लैट्स और विभिन्न शहरों में स्थित प्लॉट शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि जहां कुछ अधिकारियों के पास करोड़ों की संपत्ति है, वहीं कुछ जूनियर आईएएस अधिकारियों ने अपनी संपत्ति ‘शून्य’ भी घोषित की है। पारदर्शिता की ओर कदम— कार्मिक विभाग के नियमानुसार, हर साल आईएएस अधिकारियों को अपनी अचल संपत्ति का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होता है। समय पर ब्यौरा न देने वाले अधिकारियों की पदोन्नति और विजिलेंस क्लीयरेंस पर रोक लगा दी जाती है। इस बार की रिपोर्ट ने न केवल अफसरों की माली हालत को उजागर किया है, बल्कि आम जनता के बीच भी यह कौतूहल का विषय बना हुआ है कि सेवा के दौरान संपत्तियों के मूल्यों में कितनी वृद्धि हुई है।

rajasthan News: राजस्थान में अवैध शराब के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 16 मार्च से शुरू होगा प्रदेशव्यापी महाभियान

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राजस्थान में अन्य राज्यों से होने वाली शराब की तस्करी और अवैध बिक्री पर लगाम लगाने के लिए आबकारी विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। होली के बाद और आगामी महीनों की चुनौतियों को देखते हुए विभाग ने 16 से 31 मार्च तक पूरे प्रदेश में एक विशेष ‘निगरानी एवं धरपकड़’ अभियान चलाने का निर्णय लिया है। आबकारी आयुक्त शिवप्रसाद नकाते ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर अधिकारियों को ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने को कहा है। तस्करी के रूटों पर पैनी नजर— अभियान का मुख्य फोकस पड़ोसी राज्यों—विशेषकर हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश—से होने वाली शराब की तस्करी को रोकना है। आबकारी आयुक्त के आदेशानुसार, प्रदेश के सभी जोन और जिलास्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उन संभावित मार्गों को चिन्हित करें जहाँ से अवैध शराब का परिवहन होता है। नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और ग्रामीण लिंक रोड पर स्थित टोल नाकों पर विशेष निगरानी टीमें तैनात की जाएंगी। संदिग्ध वाहनों की सघन तलाशी ली जाएगी ताकि तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके। होटल, ढाबे और समारोह स्थल रडार पर— आबकारी विभाग के इस 15 दिवसीय अभियान की खास बात यह है कि इस बार कार्रवाई केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहेगी। विभाग की टीमें शहर और कस्बों के उन ठिकानों पर भी धावा बोलेंगी जहाँ बिना लाइसेंस के शराब परोसे जाने की शिकायतें मिलती हैं। ढाबे और होटल: हाईवे पर स्थित ढाबों और होटलों की औचक जांच की जाएगी। अक्सर यह देखा गया है कि अवैध शराब के भंडारण के लिए ढाबों का उपयोग एक सुरक्षित ठिकाने के रूप में किया जाता है। मैरिज गार्डन और समारोह स्थल: मार्च के महीने में शादियों और सामाजिक समारोहों की अधिकता रहती है। विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि इन आयोजनों में परोसी जाने वाली शराब वैध हो और उसके लिए आवश्यक परमिट लिया गया हो। आयुक्त के सख्त निर्देश: लापरवाही पर गिरेगी गाज— आबकारी आयुक्त शिवप्रसाद नकाते ने साफ किया है कि यदि किसी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध शराब की बिक्री या तस्करी पाई जाती है, तो इसके लिए संबंधित क्षेत्र के आबकारी निरीक्षक और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त टीमें बनाएं ताकि छापेमारी के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े। राजस्व सुरक्षा और जन स्वास्थ्य प्राथमिकता— इस अभियान के पीछे विभाग के दो मुख्य उद्देश्य हैं। पहला, अवैध शराब की बिक्री से सरकारी राजस्व को होने वाली भारी चपत को रोकना। दूसरा, मिलावटी और जहरीली शराब से होने वाली जनहानि को रोकना। अक्सर अन्य राज्यों से आने वाली सस्ती और मिलावटी शराब लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनती है। क्या होगी कार्रवाई?— अभियान के दौरान यदि कोई व्यक्ति या प्रतिष्ठान अवैध शराब की तस्करी, भंडारण या परिवहन में लिप्त पाया जाता है, तो आबकारी अधिनियम के तहत सख्त मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जाएगी। बिना लाइसेंस शराब बेचने वाले ढाबों और होटलों को सील करने की कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है। आबकारी विभाग के इस कड़े रुख से शराब माफियाओं में हड़कंप मच गया है। 16 से 31 मार्च तक चलने वाला यह विशेष अभियान राजस्थान में अवैध शराब के कारोबार की कमर तोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

WhatsApp News: राजस्थान में अब व्हाट्सऐप बनेगा ई-मित्र केंद्र

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राजस्थान सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग ने प्रदेशवासियों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब राजस्थान की प्रसिद्ध ई-मित्र  सेवाएं जल्द ही आपके मोबाइल पर व्हाट्सऐप (WhatsApp) के जरिए उपलब्ध होंगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी सेवाओं को आम आदमी की जेब तक पहुँचाना और जटिल ऑनलाइन प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। वर्तमान में राजस्थान के नागरिक जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और विभिन्न बिलों के भुगतान के लिए ई-मित्र केंद्रों या सरकारी पोर्टल्स पर निर्भर हैं। कई बार तकनीकी जानकारी के अभाव में लोगों को केंद्रों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए विभाग एक आधिकारिक व्हाट्सऐप बिजनेस अकाउंट तैयार कर रहा है। इसके माध्यम से 100 से अधिक सरकारी सेवाओं का लाभ सीधे चैट के जरिए लिया जा सकेगा। कैसे काम करेगा यह सिस्टम?— व्हाट्सऐप पर ई-मित्र सेवाओं का उपयोग करना किसी मित्र से चैट करने जितना आसान होगा: शुरुआत: विभाग द्वारा एक आधिकारिक नंबर जारी किया जाएगा। उपयोगकर्ता को उस नंबर पर ‘Hi’ या ‘Hello’ लिखकर भेजना होगा। मेनू और विकल्प: संदेश भेजते ही एक ऑटोमेटेड रिप्लाई आएगा, जिसमें उपलब्ध सेवाओं की सूची (जैसे बिल भुगतान, प्रमाण पत्र आवेदन आदि) दिखाई देगी। सत्यापन: सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जन आधार आधारित सत्यापन किया जाएगा। ओटीपी (OTP) के जरिए उपयोगकर्ता की पहचान सुनिश्चित की जाएगी। चैट के जरिए आवेदन: आवेदन की पूरी प्रक्रिया चैट के माध्यम से ही होगी। आवश्यक जानकारी दर्ज करने और दस्तावेज अपलोड करने का विकल्प भी व्हाट्सऐप पर ही मिलेगा। डिजिटल भुगतान: जिन सेवाओं के लिए शुल्क अनिवार्य है, उनका भुगतान व्हाट्सऐप पे (WhatsApp Pay) या अन्य सुरक्षित डिजिटल माध्यमों से सीधे चैट विंडो में ही किया जा सकेगा। उदाहरण के लिए, बिजली या पानी का बिल भरने के लिए उपभोक्ता को केवल अपना CIN नंबर डालना होगा और भुगतान प्रक्रिया पूरी करनी होगी। प्रमुख लाभ और भविष्य की योजना- पोर्टल से मुक्ति: नागरिकों को अब भारी-भरकम वेबसाइट्स लॉगिन करने या यूजर आईडी-पासवर्ड याद रखने की जरूरत नहीं होगी। समय और धन की बचत: ई-मित्र केंद्र तक जाने का समय और अतिरिक्त सेवा शुल्क की बचत होगी। यूजर फीडबैक: विभाग इस सेवा को लागू करने के बाद उपयोगकर्ताओं के अनुभव  का बारीकी से विश्लेषण करेगा। फीडबैक के आधार पर सिस्टम में सुधार किए जाएंगे और नई सेवाएं जोड़ी जाएंगी। कब तक शुरू होगी सेवा?- सूचना प्रौद्योगिकी विभाग इस परियोजना पर तेजी से काम कर रहा है। माना जा रहा है कि अगले दो महीनों के भीतर यह सेवा पूरे प्रदेश में लागू कर दी जाएगी। यह कदम न केवल ‘सुशासन’ (Good Governance) को बढ़ावा देगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ कंप्यूटर की पहुँच कम है, वहाँ मोबाइल के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने में मील का पत्थर साबित होगा। राजस्थान सरकार की यह पहल ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान को जमीनी स्तर पर उतारने का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिससे आम जन का जीवन सुगम और सरल बनेगा।

Rajasthan NEWS: मुख्यमंत्री जन आवास योजना में सरकार का राहत पैकेज जारी, नहीं लगेगा अब ब्याज और पेनल्टी

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राजस्थान सरकार ने मुख्यमंत्री जन आवास योजना (CMJAY) के तहत घर खरीदने वाले आवंटियों के लिए एक बड़ा ‘राहत पैकेज’ जारी किया है। यह कदम उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आया है, जिनके मकान सुविधाओं के अभाव में वर्षों से खाली पड़े थे या जो आर्थिक तंगी के कारण किश्तें नहीं भर पा रहे थे। राहत पैकेज की मुख्य बातें:— ब्याज और पेनल्टी की 100% माफी: सरकार ने उन आवंटियों को बड़ी राहत दी है जो समय पर किश्तें जमा नहीं कर सके थे। योजना के तहत बकाया किश्तों पर लगने वाला पूरा ब्याज और पेनल्टी माफ कर दी गई है। बुनियादी सुविधाओं का विकास: सरकार ने स्वीकार किया है कि शहर से दूर होने और सड़क, पानी, बिजली जैसी सुविधाओं की कमी के कारण लोग वहां बस नहीं पा रहे हैं। अब संबंधित नगरीय निकाय (ULBs) अपने बजट से इन बाहरी विकास कार्यों को पूरा कराएंगे। बकाया जमा करने की समय सीमा: इस छूट का लाभ उठाने के लिए आवंटियों को 31 मार्च 2026 तक अपनी बकाया मूल राशि जमा करनी होगी। ऐसा न करने पर आवंटन निरस्त किया जा सकता है। योजना में बदलाव और नई नीति के संकेत:— वर्तमान में जन आवास परियोजनाओं के उजड़ने की स्थिति को देखते हुए, नगरीय विकास विभाग (UDH) नई आवास नीति पर काम कर रहा है। प्रस्तावित बदलावों के अनुसार: अब मकान उजाड़ या दूरदराज इलाकों के बजाय आबादी क्षेत्र के 500 मीटर के दायरे में ही बनाए जा सकेंगे। बिल्डर्स को ऐसी जगह पर आवास देने होंगे जहां पहले से ही परिवहन, स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं मौजूद हों। यदि बिल्डर अपने प्रोजेक्ट में आवास नहीं दे पा रहा है, तो उसे निकाय की किसी विकसित योजना में ही फ्लैट खरीदकर देने होंगे। प्रभाव और उद्देश्य:— इस निर्णय का सीधा लाभ विशेषकर EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) और LIG (निम्न आय वर्ग) के उन आवंटियों को मिलेगा जो किशनगढ़, जयपुर और अन्य शहरों की बाहरी योजनाओं में फंसे हुए थे। सरकार का लक्ष्य केवल ढांचे खड़े करना नहीं, बल्कि वहां एक जीवंत आवासीय वातावरण विकसित करना है ताकि “सभी के लिए आवास” का सपना सही मायनों में पूरा हो सके।

JJM NEWS: पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल की तलाश तेज, 60 से ज्यादा गाड़ियां बदलकर ACB को दे रहे हैं चकमा

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राजस्थान के बहुचर्चित करोड़ों रुपये के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में मुख्य आरोपी और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल की फरारी एंटी करप्शन ब्यूरो के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रवाल जिस शातिराना तरीके से अपने ठिकाने और वाहन बदल रहे हैं, उसने जांच एजेंसियों को हैरत में डाल दिया है। 60 वाहन और 40 ऑटो रिक्शा का खेल— एसीबी की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि फरार होने के बाद से अब तक सुबोध अग्रवाल ने अपनी पहचान छिपाने और पीछा छुड़ाने के लिए करीब 60 से अधिक गाड़ियां बदली हैं। गौर करने वाली बात यह है कि उन्होंने इसमें 40 से ज्यादा बार ऑटो रिक्शा का इस्तेमाल किया है। एसीबी के सूत्रों का कहना है कि अग्रवाल जानबूझकर बड़े वाहनों या लग्जरी कारों से बच रहे हैं ताकि टोल प्लाजा या हाईवे के सीसीटीवी कैमरों में उनकी पहचान न हो सके। ऑटो रिक्शा का उपयोग भीड़भाड़ वाले इलाकों में आसानी से गायब होने के लिए किया जा रहा है। लुकआउट नोटिस और कड़ी निगरानी— भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते सुबोध अग्रवाल के खिलाफ पहले ही लुकआउट नोटिस जारी किया जा चुका है। इसके कारण वे देश के किसी भी एयरपोर्ट से हवाई यात्रा नहीं कर सकते। वहीं, रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों पर एसीबी की खुफिया टीमों की पैनी नजर है। इसी घेराबंदी के डर से अग्रवाल ने छोटे वाहनों और निजी संपर्कों के जरिए सड़क मार्ग से सफर करने की रणनीति अपनाई है। सोहना के फार्म हाउस से हुए रफूचक्कर— एसीबी को हाल ही में इनपुट मिला था कि सुबोध अग्रवाल हरियाणा के सोहना स्थित एक बड़े उद्योगपति के फार्म हाउस पर छिपे हुए हैं। सूचना मिलते ही जब तक टीमें वहां पहुंचतीं, अग्रवाल को भनक लग गई और वे वहां से एक ऑटो रिक्शा में सवार होकर फरार हो गए। तब से उनका कोई पुख्ता सुराग हाथ नहीं लगा है। एसीबी की 6 टीमें दिल्ली और मुंबई में सक्रिय— वर्तमान में एसीबी की छह विशेष टीमें सुबोध अग्रवाल की तलाश में दिन-रात जुटी हुई हैं। जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि वे दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों में किसी गुमनाम ठिकाने पर शरण लिए हुए हैं। अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत निविदाओं और कार्यादेशों में पद का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार किया है। भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें— जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना था, लेकिन इस घोटाले ने पूरी योजना की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में कई अन्य अधिकारी और ठेकेदार भी रडार पर हैं। एसीबी अब अग्रवाल के उन मददगारों की भी सूची तैयार कर रही है, जो उन्हें फरारी के दौरान वाहन और ठिकाने उपलब्ध करवा रहे हैं। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि घेराबंदी कड़ी कर दी गई है और जल्द ही आरोपी पूर्व आईएएस कानून की गिरफ्त में होंगे।

News: मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए विपक्ष हुआ लामबंद

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संसद के वर्तमान सत्र में भारतीय राजनीति की सरगर्मी उस समय तेज हो गई जब विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए औपचारिक रूप से नोटिस सौंप दिया। यह कदम चुनाव आयोग की निष्पक्षता और हालिया चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर विपक्ष के लंबे समय से चले आ रहे असंतोष का परिणाम माना जा रहा है। विपक्ष की बड़ी लामबंदी— संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—में विपक्षी सांसदों ने एकजुटता दिखाते हुए इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार: लोकसभा: नोटिस पर कुल 130 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। राज्यसभा: यहाँ 63 सांसदों ने अपना समर्थन दिया है। कुल समर्थन: विपक्ष ने अब तक कुल 193 हस्ताक्षर जुटाए हैं। संवैधानिक और विधायी नियमों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है। विपक्ष ने इन दोनों ही आंकड़ों को आसानी से पार कर लिया है, जो उनकी गंभीर मंशा को दर्शाता है। TMC की मुख्य भूमिका और सचिवालय की कार्रवाई— इस अभियान का नेतृत्व मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस करती नजर आ रही है। लोकसभा सचिवालय को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ TMC का नोटिस मिल चुका है। सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, अब इस नोटिस की तकनीकी और कानूनी जांच-पड़ताल की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सचिवालय यह देखेगा कि नोटिस में लगाए गए आरोप और प्रक्रिया संसदीय नियमों के अनुरूप हैं या नहीं। हटाने का आधार और संवैधानिक प्रक्रिया— विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार पर चुनाव के दौरान निष्पक्षता न बरतने और आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतों पर उचित कार्रवाई न करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत, मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी आधार और उसी तरीके से हटाया जा सकता है जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है। इसके लिए संसद में ‘अक्षमता’ या ‘सिद्ध कदाचार’ के आधार पर महाभियोग जैसी प्रक्रिया चलानी पड़ती है। आगे क्या होगा?— जांच समिति: यदि लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति नोटिस को स्वीकार करते हैं, तो आरोपों की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया जा सकता है। संसद में बहस: समिति की रिपोर्ट के आधार पर दोनों सदनों में इस पर चर्चा होगी। विशेष बहुमत: इस प्रस्ताव को पारित करने के लिए संसद के प्रत्येक सदन की कुल सदस्यता के बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस टकराव ने संवैधानिक संस्थानों की स्वतंत्रता पर बहस छेड़ दी है। जहाँ सरकार इसे चुनाव आयोग की छवि बिगाड़ने की कोशिश बता सकती है, वहीं विपक्ष इसे लोकतंत्र की रक्षा के लिए उठाया गया कदम करार दे रहा है। आने वाले दिनों में सचिवालय की रिपोर्ट और संसद की कार्यवाही पर पूरे देश की नजरें टिकी होंगी।

C M NEWS: मुख्यमंत्री ने की ‘गौ सेवा नीति, 2026’ लाने की घोषणा

राजस्थान की भजनलाल सरकार प्रदेश में गौ संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य में ‘गौ सेवा नीति, 2026’ लाने की महत्वपूर्ण घोषणा की है। यह नीति न केवल गौवंश के कल्याण को सुनिश्चित करेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और पशुपालकों की आय बढ़ाने में भी मील का पत्थर साबित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप समाज के चार स्तंभों—किसान, महिला, युवा और मजदूर—के सर्वांगीण विकास के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। गौ सेवा नीति 2026: एक दूरगामी विजन— इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य गौ सेवा और गौ कल्याण की गतिविधियों को संस्थागत रूप देना और उनमें गति लाना है। नीति के माध्यम से गौशालाओं के सुदृढ़ीकरण, नस्ल सुधार और गोधन से जुड़े उत्पादों के विपणन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसानों को खेती के साथ-साथ पशुपालन से अतिरिक्त संबल मिलेगा। पशुपालकों के लिए योजनाओं का सुरक्षा कवच— राज्य सरकार ने अपने दो वर्षों के कार्यकाल में पशुधन की सुरक्षा और संवर्धन के लिए कई प्रभावी कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार की निम्नलिखित योजनाओं ने प्रदेश के पशुपालकों का जीवन बदला है। मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना: आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा। राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना: पशुपालकों को बिना ब्याज के ऋण सुविधा। मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना: दुग्ध उत्पादकों को प्रति लीटर बोनस के माध्यम से सीधी आर्थिक सहायता। गौशालाओं को मिल रहा है ऐतिहासिक अनुदान— गौ संरक्षण को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने अनुदान राशि में भी महत्वपूर्ण वृद्धि की है। वर्तमान में पंजीकृत गौशालाओं को बड़े पशु के लिए 50 रुपये प्रतिदिन और छोटे पशु के लिए 25 रुपये प्रतिदिन का अनुदान दिया जा रहा है। यह सहायता राशि बेसहारा गौवंश के संरक्षण और गौशालाओं के प्रबंधन को सुगम बनाने में अत्यंत कारगर साबित हो रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार किसानों की खुशहाली के लिए पूरी तरह समर्पित है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए 1 लाख 19 हजार 408 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि ‘गौ सेवा नीति, 2026’ और कृषि बजट के ये प्रावधान राजस्थान को कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाएंगे।

Jaipur News: जयपुर को जाम मुक्त बनाने का मेगा प्लान: न्यू सांगानेर और सीकर रोड होंगे सिग्नल-फ्री

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गुलाबी नगरी की सड़कों पर बढ़ते यातायात के दबाव को कम करने और शहरवासियों को सुगम सफर की सौगात देने के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण ने बड़े कदम उठाए हैं। गुरुवार को जेडीए के ‘मंथन’ सभागार में आयुक्त श्री सिद्धार्थ महाजन की अध्यक्षता में ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड की 94वीं महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए कई अहम प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई। सीकर और न्यू सांगानेर रोड का होगा कायाकल्प— बैठक का मुख्य केंद्र शहर के दो सबसे व्यस्ततम मार्ग—सीकर रोड और न्यू सांगानेर रोड रहे। बोर्ड ने ‘अर्बन रोड कॉरिडोर डेवलपमेंट’ योजना के तहत इन दोनों कॉरिडोर के पुनर्विकास को मंजूरी प्रदान की है। विशेष रूप से न्यू सांगानेर रोड पर लगने वाले भारी जाम से निजात दिलाने के लिए यहाँ सिग्नल-फ्री यू-टर्न बनाए जाएंगे। इसके अलावा, पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग जोन विकसित किए जाएंगे। सड़क के सौंदर्यकरण के लिए किनारे पर हॉर्टिकल्चर (बागवानी) का विकास किया जाएगा, जिससे यह मार्ग न केवल सुगम बल्कि देखने में भी आकर्षक लगेगा। द्रव्यवती नदी पर बनेंगे चार नए बॉक्स कल्वर्ट— शहर की विभिन्न कॉलोनियों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए द्रव्यवती नदी परियोजना के तहत एक बड़ा निर्णय लिया गया है। नदी के बहाव क्षेत्र के कारण जो कॉलोनियां आपस में कटी हुई थीं, उन्हें जोड़ने के लिए चार महत्वपूर्ण स्थानों पर नए बॉक्स कल्वर्ट (Box Culverts) बनाए जाएंगे। इससे स्थानीय निवासियों को लंबी दूरी तय करने के बजाय सीधा रास्ता मिल सकेगा और मुख्य सड़कों पर दबाव कम होगा। यातायात सुरक्षा और आधुनिक तकनीक पर जोर— आयुक्त सिद्धार्थ महाजन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विकास कार्य भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किए जाएं। बैठक में अवैध पार्किंग, सुव्यवस्थित जेब्रा क्रॉसिंग और साइन बोर्ड लगाने पर भी चर्चा हुई। ट्रैफिक पुलिस और जेडीए के अधिकारियों को आपसी समन्वय से ब्लैक स्पॉट्स (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) को चिह्नित कर उन्हें सुधारने के निर्देश दिए गए। प्रमुख निर्णय एक नजर में:— सीकर रोड कॉरिडोर: यातायात के सुचारु प्रवाह के लिए इंजीनियरिंग सुधार। न्यू सांगानेर रोड: यू-टर्न और पैदल यात्री सुविधाओं का विस्तार। कनेक्टिविटी: द्रव्यवती नदी पर चार नए छोटे पुल (कल्वर्ट)। हॉर्टिकल्चर: सड़कों के किनारे हरियाली का विकास। बैठक में जेडीए के वरिष्ठ अभियंताओं के साथ-साथ ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम और परिवहन विभाग के उच्च अधिकारी भी मौजूद रहे। इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से जयपुर की ट्रैफिक व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है।