Rajasthan News: राजस्थान ने खाद्य सुरक्षा में बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड 

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संकल्प ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ को धरातल पर उतारते हुए राजस्थान ने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रदेशवासियों को शुद्ध एवं सुरक्षित खाद्य सामग्री सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने मात्र दो दिनों में हजारों खाद्य कारोबारियों को प्रशिक्षित कर ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन’ में अपना नाम दर्ज कराया है। दो दिनों में 48 हजार से अधिक का पंजीकरण और प्रशिक्षण— चिकित्सा मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के कुशल निर्देशन में खाद्य सुरक्षा आयुक्तालय द्वारा 17 एवं 18 मार्च को एक वृहद प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस विशेष अभियान के दौरान प्रदेश भर के 48 हजार से अधिक खाद्य कारोबारियों और संबंधित व्यक्तियों को खाद्य सुरक्षा मानकों, स्वच्छता और मिलावट रोकने के उपायों का गहन प्रशिक्षण दिया गया। इस उपलब्धि की विशिष्टता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अभियान के पहले ही दिन 30 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जो अपने आप में एक स्वतंत्र रिकॉर्ड है। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुई उपलब्धि— चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने इस ऐतिहासिक सफलता की पुष्टि करते हुए बताया कि राजस्थान की इस मुहिम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन’ ने इसे सबसे कम समय में सर्वाधिक खाद्य कारोबारियों को प्रशिक्षित करने वाले कार्यक्रम के रूप में मान्यता दी है। श्रीमती राठौड़ ने इस सफलता का श्रेय खाद्य सुरक्षा आयुक्तालय की टीम, जिला स्तरीय अधिकारियों और फील्ड में कार्यरत उन सभी कार्मिकों को दिया जिन्होंने दिन-रात मेहनत कर इस लक्ष्य को हासिल किया। मिलावटखोरों पर नकेल और जागरूकता पर जोर— मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की मंशा है कि प्रदेश में मिलावटखोरी के विरुद्ध केवल दंडात्मक कार्रवाई ही न हो, बल्कि जागरूकता के माध्यम से एक ऐसा ईकोसिस्टम तैयार किया जाए जहां कारोबारी स्वयं गुणवत्ता के प्रति जवाबदेह बनें। इसी सोच के साथ चिकित्सा मंत्री श्री खींवसर लगातार विभाग की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छोटे-बड़े सभी खाद्य व्यापारियों को यह समझाना था कि खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करना न केवल कानूनी रूप से अनिवार्य है, बल्कि आमजन के स्वास्थ्य के प्रति उनकी नैतिक जिम्मेदारी भी है। भविष्य की रूपरेखा— प्रशासन का कहना है कि यह केवल एक शुरुआत है। आने वाले समय में इस तरह के जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण शिविर ब्लॉक स्तर तक आयोजित किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि राजस्थान का प्रत्येक जिला ‘फूड सेफ्टी’ के मानकों पर खरा उतरे ताकि प्रदेश का कोई भी नागरिक मिलावटी खाद्य सामग्री के कारण बीमार न पड़े। इस विश्व रिकॉर्ड ने न केवल राजस्थान का मान बढ़ाया है, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी खाद्य सुरक्षा की दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है।

C M NEWS: राजस्थान ने जल जीवन मिशन में केंद्र के साथ किया एमओयू बना देश का पहला राज्य

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान ने जल प्रबंधन और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। ‘हर घर जल’ के संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में बड़ी छलांग लगाते हुए राजस्थान, जल जीवन मिशन 2.0 की नई गाइडलाइन्स के तहत केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित जल शक्ति मंत्रालय में आयोजित एक गरिमामय समारोह में यह महत्वपूर्ण समझौता हस्ताक्षरित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैया लाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। जनहित में मुख्यमंत्री की पहल रंग लाई— हस्ताक्षर समारोह के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की भौगोलिक स्थिति और जल संकट की चुनौतियों को देखते हुए प्रदेशवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार से विशेष आग्रह किया था। नई गाइडलाइन्स के तहत केंद्र से अनुमति मिलने के तुरंत बाद इस एमओयू को अमलीजामा पहनाया गया है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह समझौता न केवल राज्य की जल आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा, बल्कि प्रदेश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के घर तक नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को भी समयबद्ध तरीके से पूरा करेगा। जल जीवन मिशन 2.0: भविष्य की तैयारी— जल जीवन मिशन 2.0 के तहत राजस्थान में अब जल स्रोतों की स्थिरता और शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस नए चरण में न केवल पाइपलाइन बिछाने पर जोर होगा, बल्कि सौर ऊर्जा आधारित पंपिंग सिस्टम, जल शोधन संयंत्रों के आधुनिकीकरण और भूजल पुनर्भरण जैसे तकनीकी पहलुओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने राजस्थान की इस सक्रियता की सराहना करते हुए कहा कि राजस्थान का प्रथम राज्य के रूप में आगे आना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को मजबूती प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राजस्थान को जल क्षेत्र में हर संभव तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में जल क्रांति का नया सूत्रपात— जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैया लाल ने इसे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि विभाग अब मिशन मोड में काम करते हुए उन ढाणियों और गांवों तक पहुंचेगा, जहां पानी की उपलब्धता एक चुनौती रही है। इस एमओयू के बाद फंड की उपलब्धता और कार्यान्वयन की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और गति आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस एमओयू से राजस्थान में जल जीवन मिशन के कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी और नई गाइडलाइन्स के तहत मिलने वाले अतिरिक्त संसाधनों से पेयजल परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सकेगा। यह उपलब्धि राजस्थान के ‘स्वर्णिम भविष्य’ की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगी।

CS NEWS: बुनियादी शिक्षा को सशक्त बनाएगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस —मुख्य सचिव 

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राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी नवाचारों पर जोर देते हुए कहा है कि यदि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सोच-समझकर और सही योजना के साथ शिक्षा प्रणाली में शामिल किया जाए, तो यह बुनियादी शिक्षा की पूरी प्रक्रिया को काफी मजबूत और प्रभावी बना सकता है। उन्होंने एआई को भविष्य की जरूरत बताते हुए कहा कि यह न केवल सीखने की प्रक्रिया को सरल बनाता है, बल्कि निर्णय लेने की क्षमता में भी गुणात्मक सुधार लाता है। मुख्य सचिव मंगलवार को जयपुर स्थित ‘राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर’ में आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। ‘संपर्क फाउंडेशन’ के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘राजस्थान की शिक्षा में एआई की भूमिका’ रखा गया था। सीखने और सिखाने का नया माध्यम— संवाद कार्यक्रम के दौरान श्री श्रीनिवास ने विस्तार से बताया कि कैसे आधुनिक तकनीक पारंपरिक शिक्षा पद्धति को बदल सकती है। उन्होंने कहा कि बुनियादी शिक्षा पद्धति को बेहतर बनाने में एआई की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह तकनीक डेटा और विश्लेषण के माध्यम से शिक्षकों को यह समझने में मदद करती है कि किस छात्र को कहाँ कठिनाई आ रही है। इससे व्यक्तिगत स्तर पर सीखने की प्रक्रिया को बल मिलता है। उन्होंने आगे कहा, “राजस्थान सरकार ऐसे नए और प्रभावी तरीकों को खोजने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है जो हमारे शिक्षकों को सशक्त बनाते हैं। हमारा लक्ष्य एक ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जहाँ कक्षा में बच्चों की भागीदारी बढ़े और पूरी शिक्षण प्रणाली अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बने।” टेक्नोलॉजी और नीतियों का संगम— मुख्य सचिव ने इस बात पर विशेष बल दिया कि केवल तकनीक का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सही नीतियों के साथ जुड़ाव होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चों के सीखने के नतीजों को बेहतर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी, प्रभावी शिक्षण विधियों और दूरदर्शी नीतियों को एक मंच पर लाना अनिवार्य है। एआई इस संगम के लिए एक प्रभावी और मजबूत प्लेटफॉर्म प्रदान करता है। एआई के माध्यम से शिक्षकों पर प्रशासनिक काम का बोझ कम किया जा सकता है, जिससे वे अपना अधिक समय छात्रों के रचनात्मक विकास और अध्यापन पर केंद्रित कर सकें। संपर्क फाउंडेशन की पहल की सराहना— कार्यक्रम में ‘संपर्क फाउंडेशन’ के प्रयासों की भी सराहना की गई, जो जमीनी स्तर पर शिक्षा में सुधार के लिए तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। संवाद के दौरान शिक्षा विशेषज्ञों ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे स्मार्ट क्लासरूम और एआई-संचालित टूल्स के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी वैश्विक स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराई जा सकती है। संबोधन के अंत में मुख्य सचिव ने विश्वास जताया कि एआई के समावेश से राजस्थान शिक्षा के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य बनकर उभरेगा। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों से आह्वान किया कि वे एआई के नैतिक उपयोग और इसके सुरक्षित कार्यान्वयन पर ध्यान दें ताकि हर बच्चे को समान अवसर मिल सकें। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और शिक्षाविद उपस्थित रहे, जिन्होंने एआई के माध्यम से राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था को ‘स्मार्ट’ बनाने पर अपने विचार साझा किए।

C M NEWS: मुख्यमंत्री ने युवाओं को बताया राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत, 19 मार्च को मनेगा राजस्थान दिवस

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राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि युवा तरुणाई किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी और ताकत होती है। भारत आज विश्व के उन देशों में शुमार है जहाँ युवाओं की आबादी सर्वाधिक है। यदि इस ऊर्जा और प्रतिभा का सही दिशा में उपयोग किया जाए, तो भारत को दुनिया का ‘सिरमौर’ बनने से कोई नहीं रोक सकता। मुख्यमंत्री मंगलवार को मानसरोवर स्थित टैगोर इंटरनेशनल स्कूल में राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘राजस्थान युवा शक्ति दिवस’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। विकसित राजस्थान के सपने में युवाओं की भूमिका— मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में ‘विकसित भारत-विकसित राजस्थान’ के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस सपने को धरातल पर उतारने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर है। राज्य सरकार युवाओं के सपनों को पंख देने और उनकी राह की बाधाओं को दूर करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। श्री शर्मा ने प्रदेश के युवाओं से अपील की कि वे पूरी मेहनत और लगन के साथ अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में जुट जाएं, सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है। 19 मार्च को मनेगा ‘राजस्थान दिवस’— कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संदर्भ साझा किया। उन्होंने बताया कि लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के अथक प्रयासों से ही राजपूताना की विभिन्न रियासतों का एकीकरण संभव हो सका था। सरदार पटेल ने 30 मार्च 1949 को भारतीय नववर्ष (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) के शुभ अवसर पर ‘वृहद् राजस्थान’ की स्थापना की थी। इसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए राज्य सरकार ने इस बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही ‘राजस्थान दिवस’ मनाने का निर्णय लिया है। इसी कड़ी में इस वर्ष 19 मार्च को पूरे प्रदेश में राजस्थान दिवस का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ किया जाएगा। सांस्कृतिक गौरव और भविष्य की नींव— मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की धरती वीरों और त्याग की धरती है। यहाँ का गौरवशाली इतिहास युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। राजस्थान युवा शक्ति दिवस जैसे आयोजनों का उद्देश्य युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ना और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और युवा उपस्थित रहे, जिन्हें मुख्यमंत्री ने उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। सरकार के इस कदम को राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक युवा शक्ति के साथ जोड़ने की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

C M NEWS: आदिवासी समाज की सक्रिय भागीदारी से ही संभव होगा देश-प्रदेश का विकास: मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जनजातीय समाज अपनी समृद्ध परंपरा, विशिष्ट संस्कृति और प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव के लिए विश्वभर में विख्यात है। इस समाज के वीर सपूतों ने मातृभूमि की रक्षा और आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजस्थान और देश का सर्वांगीण विकास जनजातीय समाज की सक्रिय भागीदारी के बिना संभव नहीं है। मुख्यमंत्री सोमवार को डूंगरपुर स्थित आदिवासियों के सबसे बड़े आस्था केंद्र, बेणेश्वर धाम में ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के अवसर पर आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित कर रहे थे। राजस्थान दिवस और भारतीय संस्कृति का संगम— अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने इस वर्ष राजस्थान दिवस को भारतीय संस्कृति और कैलेंडर के अनुसार मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि 30 मार्च 1949 को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के शुभ संयोग में वृहद् राजस्थान की स्थापना हुई थी। इसी परंपरा का सम्मान करते हुए, इस वर्ष 19 मार्च (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) को पूरे प्रदेश में राजस्थान दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजस्थान की विकास यात्रा में आदिवासियों का योगदान अतुलनीय है, इसीलिए उत्सव की कड़ियाँ उन्हें समर्पित की गई हैं। बेणेश्वर धाम का होगा कायाकल्प— श्रद्धा के केंद्र बेणेश्वर धाम की महत्ता को रेखांकित करते हुए श्री शर्मा ने कहा कि यह भूमि न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि हमारे गौरवशाली इतिहास की साक्षी भी है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार द्वारा बेणेश्वर धाम के सौंदर्यीकरण और वहां बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए विशेष कार्य योजना तैयार कर काम करवाया जाएगा, ताकि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को सुगमता हो सके। जनजातीय कल्याण के प्रति संकल्पित सरकार— मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार जनजातीय समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों को इस समाज के अंतिम छोर तक पहुँचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए आदिवासियों से इन योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, समाज के प्रमुख व्यक्ति और भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री के विजन और बेणेश्वर धाम के विकास की घोषणा से क्षेत्र के लोगों में भारी उत्साह देखा गया।

Rajasthan News: प्रदेश में 20 मार्च से शुरू होगा सरसों और चने की सरकारी खरीद 

राजस्थान में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के तहत सरसों और चने की खेती करने वाले किसानों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। राज्य सरकार ने इन फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की तैयारियां पूरी कर ली हैं। जयपुर जिले में पंजीकरण की प्रक्रिया 20 मार्च 2026 से शुरू होने जा रही है, जबकि फसलों की वास्तविक खरीद 1 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होगी। समर्थन मूल्य और मानक — उप रजिस्ट्रार जयपुर ग्रामीण उदय दीप सिंह राठौड़ ने बताया कि भारत सरकार द्वारा सत्र 2026-27 के लिए चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,875 रुपये प्रति क्विंटल और सरसों का 6,200 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी उपज को सरकार द्वारा निर्धारित एफएक्यू मापदण्डों के अनुसार ही तैयार करके लाएं ताकि उन्हें विक्रय में कोई परेशानी न हो। पंजीकरण और तुलाई की प्रक्रिया— उप रजिस्ट्रार शिरीष वी. चान्दे ने जानकारी दी कि किसानों को उनकी पंजीकृत मोबाइल संख्या पर खरीद की तिथि का संदेश भेजा जाएगा। किसानों को आवंटित तिथि पर ही केंद्र पहुंचना अनिवार्य है। महत्वपूर्ण बात यह है कि निर्धारित तिथि से अधिकतम 10 दिनों के भीतर ही उपज की तुलाई करवानी होगी। इस समय सीमा का पालन करने से किसानों को उनकी उपज का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जा सकेगा। जिले में व्यवस्थाएं और हेल्पलाइन— जयपुर जिले में किसानों की सुगमता के लिए कुल 42 खरीद केन्द्र स्थापित किए गए हैं। किसी भी तकनीकी समस्या या जानकारी के लिए विभाग ने टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-6001 जारी किया है। किसान इस नंबर पर संपर्क कर अपनी समस्याओं का त्वरित समाधान पा सकते हैं। प्रशासन ने अपील की है कि किसान भीड़ से बचने और सुचारू व्यवस्था बनाए रखने के लिए केवल संदेश में दी गई तिथि पर ही केंद्र पर आएं।

Rajasthan News: राजस्थान में खुरपका-मुंहपका रोग के विरुद्ध महाअभियान का शंखनाद 

राजस्थान सरकार प्रदेश के पशुधन को सुरक्षित और समृद्ध बनाने के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पशुपालन, गोपालन एवं देवस्थान मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने सोमवार को बगरू स्थित श्री रामदेव गोशाला से खुरपका-मुंहपका रोग नियंत्रण टीकाकरण कार्यक्रम के सातवें चरण का भव्य शुभारंभ किया। इस राज्य स्तरीय अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के गोवंश और भैंस वंशीय पशुओं को इस घातक संक्रामक रोग से सुरक्षा प्रदान करना है। पशुपालकों की समृद्धि सरकार की प्राथमिकता— शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार पशु कल्याण के प्रति पूरी तरह समर्पित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पशुधन केवल हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के लाखों किसानों और पशुपालकों की आजीविका का मुख्य आधार है। पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार सीधा पशुपालकों की आर्थिक उन्नति से जुड़ा है। अभियान का लक्ष्य: 2.32 करोड़ पशुओं का कवच— मंत्री कुमावत ने जानकारी दी कि टीकाकरण के इस सातवें चरण के अंतर्गत राजस्थान के सभी जिलों में व्यापक स्तर पर कार्य किया जाएगा। विभाग ने इस बार प्रदेश के लगभग 2 करोड़ 32 लाख गौ एवं भैंस वंशीय पशुओं के टीकाकरण का विशाल लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने बताया कि एफएमडी एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है, जिससे न केवल पशुओं का स्वास्थ्य गिरता है, बल्कि दुग्ध उत्पादन में भी भारी गिरावट आती है, जिसका सीधा नुकसान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को होता है। वर्ष 2030 तक ‘FMD मुक्त राजस्थान’ का संकल्प— पशुपालन मंत्री ने विभागीय अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को कड़े निर्देश दिए कि टीकाकरण का यह कार्य पूरी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से संपन्न किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक राजस्थान को पूरी तरह से खुरपका-मुंहपका रोग से मुक्त बनाना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हर पात्र पशु तक वैक्सीन की पहुंच सुनिश्चित करना अनिवार्य है। जन-जन से सहयोग की अपील— कार्यक्रम के दौरान श्री कुमावत ने आमजन और पशुपालकों से भावुक अपील करते हुए कहा, “पशुधन को इस जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए अपने सभी पशुओं का टीकाकरण अवश्य करवाएं। यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है और आपके पशुओं के जीवन की रक्षा का कवच है।” उन्होंने विश्वास जताया कि स्वस्थ पशुधन से प्रदेश में श्वेत क्रांति को और मजबूती मिलेगी और पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी। इस अवसर पर विभाग के उच्च अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में पशुपालक उपस्थित रहे। बगरू की रामदेव गोशाला में आयोजित इस कार्यक्रम ने प्रदेशभर के पशुपालकों में एक सकारात्मक संदेश भेजा है कि सरकार उनके द्वार पर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए तत्पर है।

Rajasthan News:राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी- सावधान रहें, सजक बने 

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साइबर अपराधियों ने अब ठगी के लिए नई तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक के माध्यम से अपराधी परिचितों की आवाज और वीडियो की नकल कर लोगों को कॉल कर रहे हैं और आपात स्थिति का बहाना बनाकर पैसे ट्रांसफर करवाने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह के मामलों में आमजन भावनात्मक दबाव में आकर ठगी का शिकार हो रहे हैं। इसको लेकर राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन के लिए विशेष एडवाइजरी जारी कर सतर्क रहने की अपील की है। क्या है AI और डीपफेक तकनीक — उपमहानिरीक्षक पुलिस शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ऐसी आधुनिक तकनीक है, जो कंप्यूटर को इंसानों की तरह सोचने, बोलने और काम करने में सक्षम बनाती है। इसी तकनीक की मदद से साइबर अपराधी डीपफेक ऑडियो और वीडियो तैयार करते हैं। ये नकली ऑडियो या वीडियो कॉल बिल्कुल किसी परिचित व्यक्ति की आवाज या चेहरे जैसी लगती है, जिससे सामने वाला व्यक्ति आसानी से भ्रमित हो सकता है। इसके अलावा ठगी और ब्लैकमेलिंग के लिए नकली फोटो और वीडियो क्लिप का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे पहचानें साइबर ठगी के संकेत — साइबर अपराधियों द्वारा की जाने वाली ठगी में कुछ सामान्य संकेत दिखाई देते हैं। यदि कोई व्यक्ति फोन या मैसेज के माध्यम से “अभी पैसे भेजो” या “तुरंत ट्रांसफर करो” जैसे संदेश देता है तो सतर्क हो जाएं। कई बार अपराधी डर, घबराहट या गोपनीयता का हवाला देकर जल्दबाजी में निर्णय लेने के लिए दबाव बनाते हैं। इसके साथ ही ओटीपी, पासवर्ड या बैंक संबंधी जानकारी मांगना भी साइबर ठगी का स्पष्ट संकेत हो सकता है। अक्सर ठग पीड़ित को किसी अन्य व्यक्ति से पुष्टि करने से भी रोकने की कोशिश करते हैं। खुद को ऐसे रखें सुरक्षित — राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या वीडियो पर तुरंत विश्वास न करें। यदि कोई परिचित व्यक्ति पैसे मांगता है तो पहले उसके पहले से ज्ञात मोबाइल नंबर पर सामान्य कॉल करके जानकारी की पुष्टि जरूर करें। ओटीपी, पासवर्ड या बैंक से जुड़ी संवेदनशील जानकारी कभी भी किसी के साथ साझा न करें। सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी, वॉइस नोट या वीडियो अनावश्यक रूप से सार्वजनिक करने से भी बचें। ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत — यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की साइबर ठगी का शिकार होता है तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाना या साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाएं। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। सहायता के लिए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी संपर्क किया जा सकता है। राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि तकनीक के इस दौर में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर बिना जांच-पड़ताल के विश्वास न करें और साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहकर खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखें।  

C M NEWS: मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा: केंद्रीय मंत्रियों से की मुलाकात और आज जायेंगें बेणेश्वरधाम 

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राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इन दिनों प्रदेश के विकास और भविष्य की योजनाओं को गति देने के लिए सक्रिय हैं। रविवार को मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण और केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान से शिष्टाचार भेंट की। इसके बाद सोमवार को वे डूंगरपुर स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल बेणेश्वरधाम में करोड़ों की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। केंद्रीय मंत्रियों के साथ सार्थक चर्चा— वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई मुलाकात में मुख्यमंत्री ने ‘पूंजीगत निवेश हेतु विशेष सहायता योजना’ के तहत राजस्थान को मिल रहे सहयोग के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया। दोनों नेताओं के बीच ‘विकसित राजस्थान’ के संकल्प को पूरा करने के लिए आधारभूत ढांचे के विस्तार और जन-कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई। वहीं, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ मुलाकात के दौरान राजस्थान में नई शिक्षा नीति (NEP-2020) को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने युवाओं को अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के शिक्षण के माध्यम से वैश्विक रोजगार से जोड़ने के विजन पर चर्चा की। उन्होंने दोहराया कि प्रदेश की ‘डबल इंजन सरकार’ ‘शिक्षित प्रदेश-उन्नत प्रदेश’ के ध्येय के साथ युवाओं को नए अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। बेणेश्वरधाम में 130 करोड़ के कार्यों का शिलान्यास— आज 12 दोपहर बजे मुख्यमंत्री ‘जनजाति गौरव दिवस’ के अवसर पर डूंगरपुर के बेणेश्वरधाम पहुंचेंगे। यहाँ वे 130 करोड़ रुपये की लागत वाले विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास कर वागड़ क्षेत्र को बड़ी सौगात देंगे। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर बेणेश्वरधाम में तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी और राष्ट्रीय धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर सभा स्थल, हेलीपैड और प्रदर्शनी स्थल का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री यहाँ एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे, जो क्षेत्र के जनजातीय समुदाय के उत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Rajasthan News: अलवर के गोविंदगढ़ क्षेत्र में चोरी और सीना जोरी की घटना 

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राजस्थान के अलवर जिले के गोविंदगढ़ क्षेत्र से कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के सेमला खुर्द गांव में साइबर ठगों को पकड़ने गई पुलिस टीम पर ग्रामीणों और आरोपियों के परिजनों ने न केवल हमला किया, बल्कि एक सहायक उपनिरीक्षक को बंधक बनाकर उनकी जान लेने की कोशिश भी की। यह घटना दर्शाती है कि इस क्षेत्र में अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं। घटना का क्रमवार विवरण— जानकारी के अनुसार, डीग जिले के नगर थाने में तैनात ASI रामनिवास अपनी टीम के साथ साइबर ठगी के वांछित आरोपियों की तलाश में दबिश देने निकले थे। पुलिस को पुख्ता सूचना मिली थी कि ठगी के मामलों में शामिल आरोपी तस्लीम और साबिर (दोनों पुत्र मुस्ताक) सेमला खुर्द गांव में छिपे हुए हैं। जब पुलिस टीम ने गांव में घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया, तो स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। जैसे ही पुलिस उन्हें ले जाने लगी, आरोपियों के परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस का रास्ता रोक लिया। कानून को ठेंगे पर रखते हुए भीड़ ने पुलिस टीम पर पथराव और लाठी-डंडों से हमला बोल दिया। ASI को बनाया बंधक, सिर पर किया वार— भीड़ के उग्र रूप को देख पुलिस टीम को पीछे हटना पड़ा, लेकिन इस बीच हमलावरों ने रामनिवास को घेर लिया। हमलावरों ने उन्हें एक कमरे में बंद कर बंधक बना लिया। कमरे के भीतर उन पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला किया गया, जिससे उनके सिर पर गंभीर चोट आई और वे लहूलुहान हो गए। इतना ही नहीं, हमलावरों ने साक्ष्य मिटाने और संपर्क काटने के उद्देश्य से ASI का मोबाइल फोन भी छीन लिया। पुलिस महकमे में हड़कंप— अपने साथी अधिकारी पर हमले और उन्हें बंधक बनाए जाने की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। भारी पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया। घायल ASI को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका उपचार जारी है। साइबर ठगी का गढ़ बनता इलाका— अलवर और डीग का यह सीमावर्ती क्षेत्र (मेवात बेल्ट) लंबे समय से साइबर ठगी के लिए कुख्यात रहा है। यहाँ के अपराधी तकनीकी रूप से इतने शातिर हैं कि देश के विभिन्न राज्यों के लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। लेकिन अब ये अपराधी और उनके मददगार ग्रामीण इतने बेखौफ हो चुके हैं कि वर्दी पर हाथ डालने से भी नहीं कतरा रहे। कार्रवाई और कानून का रुख— इस घटना के बाद पुलिस ने हमलावरों की पहचान शुरू कर दी है। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस अधिकारी पर जानलेवा हमला करने और आरोपियों को भगाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इलाके में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और उपद्रवियों की धरपकड़ के लिए दबिश दी जा रही है। यह मामला एक बार फिर मेवात क्षेत्र में पुलिसिंग की चुनौतियों और अपराधियों के सामाजिक समर्थन की ओर इशारा करता है, जो समाज और प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय है।