राजस्थान में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल

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RAS Transfer: गुरुवार रात राजस्थान सरकार द्वारा जिन 396 आरएएस अधिकारियों का तबादला किया गया है, उसमें चार एपीओ अधिकारियों को पोस्टिंग दी गई है। इनमें से तीन अधिकारी सरकार बदलने के बाद से एपीओ चल रहे थे वहीं एक अधिकारी को मुख्य सचिव (सीएस) के हाल ही जेडीए में औचक निरीक्षण के बाद एपीओ किया गया था।
गहलोत सरकार में सीएमओ में तैनात आरएएस अधिकारी शाहीन अली खान को अतिरिक्त निदेशक, एचसीएम रीपा, आरएएस अजय असवाल को अतिरिक्त आयुक्त कॉलेज शिक्षा और आरएएस गौरव बजाड़ को हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार के पद पर पोस्टिंग दी गई है। साथ ही कुछ दिन पहले सीएमओ में विशेषाधिकारी बनाए गए आरएएस अधिकारी रामरतन सौंकरिया को हटा दिया गया है।
वहीं सरकार ने उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी के विशिष्ट सहायक को बदल दिया है। पहले आरएएस अधिकारी जगवीर सिंह को दीया कुमारी का विशिष्ट सहायक नियुक्त किया गया था। लेकिन, अब उनकी जगह पर आरएएस ललित कुमार को विशिष्ट सहायक नियुक्त किया है। आरएएस ललित कुमार हमेशा से प्राइम पोस्टिंग पर रहे हैं।

वर्दी के दम पर कुकर्म, थानों में गुनाहों की तहरीरें, क्योंकि यह भारत है

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वर्दी मतलब हर किस्म का गुनाह करने की छूट। आजादी के बाद से यह खूब होता आया है और हो रहा है। वर्दी खाकी हो या खादी की, इसकी ताक़त के दम पर अनेक अपराध हुए हैं और हो रहे हैं। जैसे कि अब पुलिस थानों के क्वाटर में भी बेख़ौफ़ सामूहिक बलात्कार होने लगे हैं। इसी सप्ताह जयपुर के गांधी नगर पुलिस थाने के एक क्वाटर में एक छात्रा से सामूहिक रेप हो गया। यह जयपुर है। राजस्थान की राजधानी जयपुर, जहां से भजन लाल सरकार का चाबुक फ़िलहाल पूरे राजस्थान में चल रहा है लेकिन इस राजधानी की ही बत्ती गुल है। पीड़ित छात्रा जयपुर के गुर्जर घाटी ब्रह्मपुरी की रहने वाली है। उसका कहना है कि पवन नाम के लड़के ने जिससे उसकी दोस्ती थी ने अपने पुलिसकर्मी जीजा नीरज कुमार के क्वाटर में न केवल खुद ने रेप किया बल्कि उसके जीजा नीरज कुमार ने भी किया। फ़िलहाल पुलिस ने पवन को गिरफतार कर लिया है लेकिन नीरज कुमार पर अभी चुप है। अब क्या करेंगे सीएम साहब। क्योंकि जिस पुलिस के बूते पर वे अपराधों को खत्म करने की बात कह रहे हैं उन्ही में से कुछ पुलिसकर्मी ऐसे घिनौने अपराध कर रहे हैं जिनकी वजह से पूरा डिपार्टमेंट बदनाम हो रहा है। लेकिन यह कोई नई बात नहीं है बल्कि इससे पहले भी ऐसे कई अपराध होते रहे हैं। सन् 82 में अज़मेर के क्रिश्चनगंज थाने में काजीपुरा के की कुछ महिलाओं के साथ बहुत-कुछ हुआ। उसके दो वर्ष बाद नसीराबाद के थाने में सुन्दरी नाम की महिला से भी बहुत-कुछ हुआ। इतना कुछ कि सुन्दरी मर गई।
इस जिस्मखोरी और रिश्वतखोरी ने न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के थानों को बहुत बदनाम किया है लेकिन क्या करें, ये दोनों लत ही ऐसी हैं कि जिसे एक बार लगी उसकी मरते दम तक नहीं छूटी, भले ही कुछ भी हो जाए। धरती का कोई भी क़ानून इन्हें अब तक न तो खत्म करे पाया है और न ही कर पाएगा। हाल ही यूपी के देवरिया जिले में बैतालपुर पुलिस चौकी इंचार्ज अंकित कुमार सिंह ने अपने ही विभाग में कार्यरत आजमगढ़ की महिला कांस्टेबल को अपने प्रेम जाल में फंसाकर उससे शारीरिक संबंध बनाए, उसकी न्यूड तस्वीरें उतारी, न्यूड वीडियो बनाया, दो बार गर्भपात भी कराया। लेकिन शादी की बात आने पर इन्कार कर दिया। मामला एसपी के पास पहुंचा तो अंकित को सस्पेंड कर दिया गया। कल ही यूपी के सुल्तानपुर में एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी अपनी ही किराएदार महिला के 9 वर्षीय बेटे से अप्राकृतिक मैथुन करते पाए गए। महिला की शिक़ायत पर उनके खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया। दो महीने पहले अलवर के रैणी थाने में तैनात पुलिसकर्मियों ने एक नाबालिग़ बच्ची से गैंग रेप कर लिया। बच्ची की मां ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई और बताया कि ये तीनों बच्ची के भाई को आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार करने का डर बिठा कर उससे दो वर्षों से दरिंदगी कर रहे हैं। नवम्बर 2023 में जयपुर में एक कोचिंग सेंटर में पढने वाली छात्रा को नौकरी दिलाने का लालच देकर एक पुलिस कांस्टेबल ने बलात्कार कर लिया और उसका न्यूड वीडियो भी बना लिया। बसवा, राजस्थान और एमपी से जुड़वां क्षेत्र। यहां महेश गुर्जर नाम के एक पुलिसकर्मी ने एक 30 वर्षीय महिला को गोली मार देने का डर दिखाकर बलात्कार किया लेकिन महिला के चिल्लाने पर गांव वालों ने उसे पकड़ कर पहले पीटा और फिर पुलिस के हवाले कर दिया। नवम्बर 23 में ही दौसा के राहुवास गांव में सब इंस्पेक्टर भूपेन्द्र सिंह ने एक चार वर्षीय मासूम बच्ची से रेप कर लिया।
अब आइये थोड़ा राजस्थान से बाहर चलते हैं। पिछ्ले पांच सालों में दिल्ली पुलिस में 321 पुलिसकर्मी सस्पेंड किये गए। वजह यह कि इन सब पर बलात्कार के अपराध सिद्ध हो गए थे। ऐसे ही पिछ्ले साल 63 पुलिसकर्मियों पर रेप के केस दर्ज हुए। लेकिन अफसोस कि इनमें से 60 पुलिसकर्मी अभी भी ड्यूटी पर तैनात हैं। जो लोग नियमित अखबार पढ़ते हैं उन्हें याद होगा कि मात्र 4 महीने पहले मुम्बई में 8 महिला पुलिसकर्मियों ने अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। इन अधिकारियों ने न केवल उनका यौन शोषण किया बल्कि उनके न्यूड वीडियो भी बनाए। इन सभी पीड़िताओं ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर यह शिक़ायत की। लेकिन कोई कार्रवाई होने से पहले ही वह पत्र वायरल हो गया जिससे पूरे महाराष्ट्र पुलिस विभाग में भूचाल आ गया। इन सब महिला पुलिसकर्मियों ने यह भी कहा कि उच्चाधिकारियों ने यौन शोषण के बाद उनका गर्भपात भी कराया। कुछ अधिकारियों ने तो आफिस में ही रेप किया। ऐसे ही यूपी में एक सरकारी स्कूल टीचर से पुलिस कांस्टेबल ने न केवल रेप किया बल्कि उसका न्यूड वीडियो भी बनाए और उक्त महिला से रूपए भी ऐंठता रहा। अत्यधिक मार और रेप से तंग आकर टीचर ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई तब जाकर कांस्टेबल गिरफ्तार हुआ। ऐसे किस्सों की बहुत लम्बी फेहरिस्त है। लेकिन यह भारत देश है। यहां यह सब दशकों से चलता आया है और न जाने कब तक चलता रहेगा।

मुख्यमंत्री के विभाग में तैयार होते हैं, कूटरचित दस्तावेज

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पिछले अंक में आपने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के खास महकमों में शामिल सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में हुए खेला के बारें में पढ़ा। आज के अंक में आप पढ़ोगे कि कैसे इस खास महकमें में अधिकारियों द्वारा नोट सीट में हेरा—फेरी कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किया जाता है और कैसे नियमों की अनदेखी कर खेला किया जाता है। वैसे इस विभाग के लिये ये कोई नई बात नहीं है। कुछ इसी तरह का खेला विभाग ने 571 पत्रकारों के साथ किया था। जिसका दंश पत्रकार परिवार सहित आज तक झेल रहे हैं।

मामले में आप सभी का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा। सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में वर्ष 2016—17 के लिए वरिष्ठ सहायक पदों की डीपीसी हेतु दिनांक 20 जून 2018 और 20 फरवरी 2023 को विभागीय पदौन्नति समिति की बैठक हुई जिसमें एक बार 10 पदों का उल्लेख किया गया और फिर हेरा—फेरी कर कूटरचित 13 पदों का उल्लेख कर वरिष्ठ सहायकों को पदौन्नत कर दिया गया।

आपको बतादें कि दिनांक 14 दिसम्बर 2022 को कर्मिक विभाग के संयुक्त शासन सचिव रामनिवास मेहता ने सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग को आगाह करते हुए वरिष्ठ सहायक पद की वर्ष 2013—14 से 2021—22 तक की डीपीसी पर सवाल उठाते हुए प्रशासनिक विभाग के परिपत्र दिनांक 4 जून 2008, परिपत्र दिनांक 31 मई 2015 और अधिसूचना दिनांक 11 सितम्बर 2011 के दिशा—निर्देशों और प्रवधानों को सूनिश्चत करने को कहा था। वहीं श्री मेहता ने दिनांक 7 नवम्बर 2022 को वर्ष 2013—14, 2014—15 और 2015716 की हुई डीपीसी में भी जनसम्पर्क विभाग से स्थिति स्पष्ट करने को कहा था और कहा थ कि उपरोक्त डीपीसी किस आधार पर की गई।
आपको यह भी बतादें कि रिव्यू डीपीसी के मामले में भी सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने नियमों की अनदेखी की थी। 28 अक्टूबर 2022 वर्ष 2019—20 से 2020—21 की डीपीसी रिव्यू करने के लिये कार्मिक विभाग को प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव में संख्या: एफ. 1 2 गृह/सम्पर्क./सचि./प्रको./2014 दिनांक 25 दिसम्बर 2014 के आदेश अनुसार कार्य संचालन नियमावली के नियम 21 और 22 की अनदेखी कर सीधे ही निदेशक स्तर पर कार्मिक विभाग को फाइल भेज दी गई थी। जबकि नियमानुसार विभाग के नियंत्रणाधीन अराजपत्रित कर्मचारी वर्ग संबंधीत स्थानापन्न के मामले में शासन सचिव या प्रमुख शासन सचिव के माध्यम से भेजी जानी चाहिए थी।

अब देखना यह है कि उपरोक्त मामलों में माननीय मुख्यमंत्री और जुगलजोड़ी के रूप में जाने वाली जोड़ी सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव समित शर्मा और आयुक्त सुनिल शर्मा क्या कदम उठाते हैं या फिर इसी तरह इस विभाग में कूटरचित दस्तावेज तैयार किए जाते रहेगें।

Chief Minister मुख्यमंत्री के विभाग डीआईपीआर में खेला

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के खास महकमों में शामिल सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में एक खेला होने का मामला संज्ञान में आया है। वैसे तो इस खास महकमें में कई खेला हुए हैं। इनमें सुजस टेंडर, संवाद में 34 लाख का गबन और फोटो ग्राफर भर्ती जैसे कई चर्चित खेला हुए हैं। लेकिन नई सरकार के गठन के बाद यह पहला खेला है, जो आमजन और सरकार के लिये खास है। इस खेला में विभाग ने रिक्त पदों से ज्यादा पदों पर नियुक्तियां दी है।

आपको बतादें कि 5 अक्टूबर 2023 को सरकार ने सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के मंत्रालयिक संवर्ग का पुनर्गठन कर 75 नवीन पदों को स्वीकृति प्रदान की गई थी। विभाग में पुनर्गठन के बाद संवर्ग में कुल 242 पद हो गये थे। इनमें संस्थापन अधिकारी के 2 पद, प्रशासनिक अधिकारी के 6 पद, अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के 19 पद, सहायक प्रशासनिक अधिकारी के 40 पद, वरिष्ठ सहायक के 50 पद और कनिष्ठ सहायक के 125 पद शामिल हैं।

डीआईपीआर और सरकार के दस्तावेजों के अनुसार सरकार ने 5 अक्टूबर 2023 को सहायक प्रशासनिक अधिकारी के 40 पदों को स्वीकृति प्रदान की थी। लेकिन अधिकारियों ने खेला करते हुए 47 पदों पर नियुक्ति के आदेश प्रदान किये है। विभाग के आदेश सं.प्रस्था/मंत्रा/Asstt.Adm.Off/वरि.सू./7106—34, दिनांक 23.05.2023 में 13, क्रमांक:प्रस्था/मंत्रा/सहा.प्रशा.अधि.पदौ./8982—9032, दिनांक 09.06.2023 में 10 और क्रमांक:प्रस्था/मंत्रा/सहा.प्रशा.अधि.पदौ./1176—1205, दिनांक 25 जनवरी 2024 में 24 सहायक प्रशासनिक अधिकारियों नियुक्ति प्रदान की गई है। एसे में बिना वित्तिय स्वीकृति के अतिरिक्त पदों पर नियुक्ति कैसे की जा सकती है।

सूत्रों के अनुसार विभाग में हुई डीपीसी और गठित पदोन्नति समिति पर भी कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने सवाल उठाए हैं। जिनका मामला माननीय न्यायालय में विचाराधिन है। वहीं सूत्रों का यह भी कहना है कि विभाग ने हेरा—फेरी कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किये हैं और पुरानी नोट सीट गायब कर दी है। एसे में विभाग का ये कृत्य घोर आपराधिक श्रेणी में आता है जो सरकार और आमजन के लिये उचित नहीं है।

उपरोक्त मामले में सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव समित शर्मा से वाट्सएप के माध्यम से रिपोर्ट भेजकर जानकारी मांगी तो उनका कोई उत्तर नही आया।

वहीं सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के अयुक्त सुनिल शर्मा से भी मामले में जानकारी चाही तो उनका भी कोई उत्तर नहीं आया।

5 लाख लेकर दिलखुश मीणा की जगह मेहंदीपुर बालाजी का कालूराम मीणा परीक्षा देने आया

मामला सिविल लाइन थाना अजमेर का है। यहां कल गुरूवार को ख्वाजा मॉडल स्कूल के प्रिंसिपल ने सिविल लाइन थाने में मामला दर्ज कराया था। एएसपी सुखविंदर पाल सिंह ने बताया कि सीबीएसई की ओर से आयोजित एकलव्य आवासीय स्कूल की वार्डन भर्ती परीक्षा में मूल अभ्यर्थी दिलखुश मीणा की जगह की मेहंदीपुर बालाजी का कालूराम मीणा परीक्षा देने आया था। श्री सिंह के अनुसार इस मामले में 5 लाख रुपए लेन देन होना बताया है।
एडिशनल एसपी ने बताया कि, इस मामले में केंद्राधीक्षक की रिपोर्ट पर मामला दर्ज किया गया था। जिस पर दिलखुश मीणा और कालूराम मीणा को पहले गिरफ्तार किया जा चुका है। गुरुवार शाम को दौसा निवासी ई-मित्र संचालक नरेश को मूल अभ्यर्थी के आधार कार्ड में फोटो एडिट कर डमी अभ्यर्थी की फोटो लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

Rajasthan Education Minister राजस्थान में स्कूलों के लिए लागू हो सकते है खास नियम शिक्षा मंत्री ने दिये संकेत

प्रदेश में 26 जनवरी को बारां जिला और 29 जनवरी को जयपुर शहर के स्कूल में हुए बवाल को लेकर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बयान दिया है। कहा है कि राजस्थान की स्कूलों में ड्रेस कोड (School Dress Code) पहले ही लागू था। लेकिन अब इसकी अवहेलना करने वाले स्कूल, शिक्षक और छात्रों की जांच की जाएगी। साथ ही शिक्षा मंत्री ने प्रदेश की स्कूलों में कई नियम सख्त करने के संकेत दिये हैं।

स्कूलो में ये नियम हो सकते हैं सख्त
शिक्षा मंत्री के संकेतों के अनुसार स्कूल में चयनित प्रार्थना के अलावा किसी दूसरी तरह की प्रार्थना नहीं कराई जाएगी। इसके लिए 4-5 प्रार्थना का चयन किया गया है और किसी दूसरी तरह की प्रार्थना का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। ना ही स्कूल में किसी तरह का धर्मांतरण किया जाएगा।
स्कूल में मां सरस्वती की तस्वीर होनी चाहिए। किसी न किसी रूप में मां सरस्वती आकृति दिखना चाहिए चाहे मूर्ति हो, तस्वीर हो या दिवार पर हो। स्कूल में पाठ्यक्रम में दिये गए महापुरुषों के बारे में ही पढ़ाना होगा।

FasTags:— KYC के लिये आज आखिरी मौका, वहीं कल से IMPS नियमों होगा बदलाव

सामान्य तौर पर फरवरी माह में कई नियमों में बदलाव हो सकता है। लेकिन FasTags KYC वाला नियम आपको खासा परेशान कर सकता है। इस लिये खासतौर पर आपको आगाह किया जाता है कि यदि आपने 31 जनवरी यानि आज से पहले अपने FasTag अकाउंट का KYC नहीं किया तो आपके पास आखिरी मौका है। इसके बाद 1 फरवरी से आपका फास्टैग अकाउंट बैन कर दिया जाएगा या ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने फास्टैग केवाईसी अपडेट करने का आखिरी समय 31 जनवरी दिया है।
वहीं कल 1 February से एक खास नियम में भी बदलाव होगा। इस नियम के बदलाव से आमजन को राहत मिलेगी। RBI (IMPS, Immediate Payment Service) तत्काल भुगतान सेवा के नियमों में बदलाव बदलाव करने जा रहा है। बदले हुए नियमों के अनुसार अब एक फरवरी से बिना आप लाभार्थी (Beneficiary) का नाम जोड़ कर 5 लाख रुपये तक का मनी ट्रांसफर कर सकेंगे। आको बतादें कि इसके लिए पहले ही आरबीआई ने सर्कुलर जारी किया था। अब 1 फरवरी से यह नियम लागू होने जा रहा है।

श्रेष्ठ बनने के चक्कर में पुलिस पत्रकारों की स्वतंत्रता का हनन कर रही है:— सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से पुलिस को भारतीय संविधान के आर्टिकल 19 और 22 की याद दिलाई है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ की बेंच ने कि ‘पत्रकारों के मौलिक अधिकारों की स्वतंत्रता के खिलाफ पुलिस किसी भी पत्रकार से उनकी खबरों के लिए सूत्र नहीं पूछ सकती है। यहां तक की कोर्ट भी उन्हें ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। श्री चंद्रचूड़ ने कहा आजकल ये देखने को मिल रहा है कि बिना किसी ठोस सबूत और बिना जांच के पत्रकारों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर लिए जाते हैं। श्रेष्ठ बनने के चक्कर में पुलिस पत्रकारों की स्वतंत्रता का हनन कर रही है।

“आपको बता दें कि हमारे देश में किसी विशेष कानून के जरिए पत्रकारों को अधिकार हासिल नहीं हैं। पत्रकारों के लिए अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार बाकी नागरिकों की तरह संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (a) के अंतर्गत ही मिले हुए हैं। पत्रकारों को अपने सूत्र को गोपनीय रखने का अधिकार प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया एक्ट 1978 के तहत मिला हुआ है। इसमें 15 (2) सेक्शन में साफ तौर पर लिखा हुआ है कि किसी भी पत्रकार को खबरों के सूत्र की जानकारी के लिए कोई बाध्य नहीं कर सकता लेकिन प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम कानून कोर्ट में लागू नहीं होते हैं। इसके आधार पर कोर्ट में किसी तरह की छूट की मांग नहीं की जा सकती है।”

जयपुर डकैत एसोसिएशन और रेरा की दादागिरी से जनता त्रस्त

कांग्रेस के जमाने से चली आ रही लूट की परंपरा आज भी बरकरार है। जमीन माफियाओ द्वारा लूट तथा उपभोक्ताओं की भावनाओ के साथ खिलवाड़ का यह कारोबार वैसे तो पूरे जयपुर में संचालित है। लेकिन मुख्यमंन्त्री भजनलाल शर्मा के विधानसभा क्षेत्र में जेडीए और रेरा की मिलीभगत से तथाकथित बिल्डर जनता को बुरी तरह निचोड़ने में लगे हुए है।

कांग्रेस के वक्त गेटेड टाउनशिप के नाम पर जेडीए ने अनाप शनाप अनुमोदन जारी कर भू माफियाओ को लूटने का लाइसेंस जारी कर दिया। आज जेडीए का यह हाल है कि पैसे दो और स्वीकृति लो। वैसे तो जेडीए को जयपुर डकैत एसोसिएशन के नाम से जाना जाता है। लेकिन अब इस एसोसिएशन ने विशाल रूप धारण कर लिया है। जेडीए के सभी जोन रिश्वत बटोरने के अड्डे है, लेकिन जोन 9, 10 और 11 लूटने में सबको पीछे छोड़ दिये है। एक जोन उपायुक्त की अनुमानित कमाई पांच करोड़ रुपये प्रतिमाह आंकी जाती है। खेद का विषय है कि एसीबी भी आंख मूंदे बैठी है और जेडीए आयुक्त भी।

जिस तरह जेडीए रिश्वत संग्रह का केंद्र बना हुआ है, उससे बड़ा लूट का केंद्र रेरा (रियल एस्टेट रेगुलेशन ऑथरिटी) है। यद्यपि रेरा की अध्यक्ष वीनू गुप्ता काफी सख्त और ईमानदार अधिकारी मानी जाती है। लेकिन अधीनस्थों ने जबरदस्त उत्पात मचा रखा है। जेडीए की तर्ज पर यहां रिश्वत तो और स्वीकृति प्राप्त करो । बिना टाइटल और नियमो की पालना किये बिना। रेरा की स्थापना के साथ ही एक अधिकारी यहां पदस्थापित है। पिछले 7-8 साल से यह रेरा को छोड़ ही नही रहा है। रिश्वत के दम पर हर बार तबादला होने से पहले ही एक्सटेंशन कराने की ताकत रखता है यह अधिकारी । धन संग्रह इसकी वकील बेटी के माध्यम से होता है। रेरा का समानांतर प्रशासन वकील साहिबा द्वारा संचालित है।

जानकारी के अनुसार कांग्रेस राज में पिछले तीन साल के अंदर अकेले जयपुर में जेडीए और रेरा द्वारा करीब ढाई सौ टाउनशिप की स्वीकृति जारी कर इन विभागों ने गरीब जनता को लूटने का लाइसेंस जारी किया है। इन दोनों के बैनर तले बिल्डर जनता को निर्मम तरीके से लूट रहे है। ज्यादातर टाउनशिप पर गोकुल कृपा का अधिपत्य है । इसके अतिरिक्त करीब 20 अन्य ग्रुप भी सक्रिय है। दो ग्रुप कांग्रेस में मंत्री रहे व्यक्ति से ताल्लुक रखते है । जबकि पांच ग्रुप में कांग्रेसी विधायको का करीब एक हजार करोड़ निवेश है।

जेडीए का काम है टाइटल आदि देखकर टाउनशिप को अनुमोदित करना। जबकि रेरा का कार्य यह देखना है कि टाउनशिप निर्माण नियमानुसार हो रहा है या नही। चूंकि दोनों विभागों में रिश्वत का बोलबाला है इसलिए टाउनशिप के नियमो की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। नतीजतन लाखों भूखण्डधारी भूमाफियाओं के हाथों लुट रहे है और सरकार, मुख्यमंत्री और यूडीएच मंत्री खमोश होकर तबाही का मंजर देख रहे है। यूडीएच मंत्री झाबरमल खर्रा का शहर से कोई ताल्लुक नही है, इसलिए जेडीए और रेरा की मनमानी चरम पर है।

मैंने आज मुख्यमंन्त्री के विधानसभा क्षेत्र में पत्रकार कॉलोनी, नारायण विहार, धोलाई, भारत माता सर्किल, मुहाना, रामपुरा तथा मदाऊ आदि क्षेत्रों का दौरा किया। दौरा करने के बाद लगा ही नही कि इन क्षेत्रों में सरकार सक्रिय भी है। मदाऊ में स्थित रूपराज, कासली एन्कलेव तथा अरन एन्कलेव बसा तो दी है। लेकिन यहां के आवंटी बुनियादी सुविधाओं के लिए जेडीए, रेरा और डवलपर्स के यहां धक्के खा रहे है। डवलपर्स माल समेट कर भाग छूटे और आवंटी रो रहे है अपने कर्मो को। इनकी सुनवाई न जेडीए कर रहा है और न ही रेरा। दोनों विभागों का एक ही बुनियादी उद्देश्य है रिश्वत बटोरना।

आकर्षक ब्रोशर प्रकाशित कर डवलपर्स आम जनता को लुभाते है। जनता भी इनके झांसे में आ जाती है। पक्की सड़क, अंडरग्राउंड विद्युत लाइन, मंदिर, पार्क, किड्स प्ले सेंटर, कम्युनिटी हाल, ऑप्टिकल लाइन, 24 घण्टे सिक्युरिटी, सीसीटीवी कैमरे, नियमित सफाई और रखरखाव। लेकिन इनमें से कोई भी बुनियादी सुविधा मुहैया नही है । रूप राज एन्कलेव में न कोई सिक्युरिटी थी और न ही कैमरा। सफाई तो लगता है कभी हुई ही नही। पार्क केवल छलावा है। हरियाली का दूर दूर तक नामोनिशान नही। कमोबेश सभी टाउनशिप का यही हाल है।

मुख्यमंन्त्री का क्षेत्र होने के बाद भी इन टाउनशिप में रहने वालों के लिए अनेक तरह की बुनियादी सुविधा जैसे परिवहन, चिकित्सा, गैस सिलेंडर की सप्लाई, खान पान का सामान नदारद है। कांग्रेस राज में जो सेक्टर रोड प्रारम्भ की गई थी, उनका निर्माण कार्य पूरी तरह बंद है। चूंकि अभी तक अधिकारियों के तबादले जारी है, इसलिए सड़क एवं अन्य निर्माण कार्य थमे पड़े है। जेडीए आयुक्त मंजु राजपाल की न तो विकास कार्य में कोई रुचि है और न ही भ्रस्टाचार पर लगाम लगाने में।

भजनलाल सरकार को भू माफिया पर लगाम लगानी है तो उसे अविलम्ब 90 ए और 90 बी पर अविलम्ब रोक लगानी होगी। इसके अलावा जो भी व्यक्ति जेडीए में पहले कभी सतर्कता शाखा, तहसीलदार, एटीपी या जोन उपायुक्त पद पर रह चुका है, उसकी किसी भी हालत में नियुक्ति नही होनी चाहिए। क्योंकि कई अधिकारियों के लिए जेडीए किसी चारागाह से कम नही है। साल, दो साल फिर से लूटने के लिए जोड़तोड़ लगाकर यहीं पदस्थापन करा लेते है।

Minister Madan Dilawar:- गलत आचरण बर्दाश्त नहीं होगा, भले उसके लिए मुझे नियम तोड़ना पड़े

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कोटा के महावीर नगर सरकारी स्कूल में स्कूटी वितरण समारोह में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि बहुत पीड़ा होती है जब शिक्षकों के छात्र-छात्राओं के साथ गलत आचरण की खबरें सामने आती है। लेकिन मैं साफ शब्दों में कह देना चाहता हूं कि मेरे शिक्षा मंत्री रहते हुए गलत आचरण करने वाले शिक्षकों को बख्शा नहीं जाएगा। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी भले उसके लिए मुझे नियम तोड़ना पड़े और मुझे फांसी की सजा ही क्यों न मिल जाए लेकिन शिक्षकों द्वारा गलत आचरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। श्री दिलावर उपरोक्त समारोह के मुख्य अतिथि।