Rajasthan Assembly:— हाउस में आदर्श शिष्टाचार का अभाव, चले धूड़ में लट्ठ

विधानसभा में कल मंगलवार को हाउस में आदर्श शिष्टाचार का अभाव देखने मिला। शून्यकाल में राजीव गांधी युवा मित्रों को हटाने का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा ने संसदीय मंत्री जोगाराम पटेल के टोकाटाकी को लेकर डांटते हुए कहा, आप चुप रहें, मंत्री हो तो आपको बीच में बोलने का हक नहीं है। और तू तड़ाके पर आगये। ये परंपरा विधानसभा की नहीं रही है।
उपरोक्त कांड में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की घोर लाचारी देखने मिली। या यूं कह सकते हैं कि उनको हाउस चलाने की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन के नियमों का पूर्ण ज्ञान नहीं है। शायद उन्हे ट्युशन की आवश्यकता है।
विधानसभा चलाने की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन के नियमों के विशेषज्ञो का कहना है कि श्री देवनानी को उपरोक्त घटना पर सख्त व्यवस्था देनी चाहिए। क्योंकि विधायक रोहित बोहरा का आचरण हाउस के आदर्श शिष्टाचार का हनन करता है। श्री देवनानी ने नियम 269 के तहत केवल अपने पद की गरिमा बनाने के लिये व्यवस्था दी है, जो कि संपूर्ण हाउस के लिये न्याय संगत नहीं है।
विधानसभा अध्यक्ष के ज्ञान और सजगता का अभाव मंगलवार को ही हाउस में 12 बजकर 28 मिनट पर देखने को मिला। जब खुद अध्यक्ष महोदय ने बिलाड़ा विधयक अर्जुन लाल का नाम प्रक्रिया एवं कार्य संचालन के नियम 295 के तहत पुकारा और विधायक ने अपनी बात रखना शुरू किया तो, माननीय अध्यक्ष महोदय ने बिलाड़ा विधायक को दो बार टोका। और कहा कि आपने जो दिया है वो ही पढ़ रहे है, मेरे पास कुछ अलग भी है। फिर से विधायक को टोकते हुए कहा कि माननीय सदस्य ये वो नही है जो मेरे पास आपने दिया है, जो दिया है वो हीं पढ़े। बिलाड़ा विधायक ने कहा कि मैं वो ही पढ़ रहा हूं। हाउस में ऐसा लग रहा था जैसे सब हवा हवाई हो। जैसे धूड़ में लट्ठ चल रहे हो। बिलाड़ा विधायक कुछ कह रहे हैं और माननीय अध्यक्ष कुछ। ऐसे में कई सवाल खड़े होते है। क्या हाउस इसी तरह चलेगा या फिर सुधार होगा। यह देखने और सोचने वाली बात है। बोलो राधे— राधे

RSMSSB ने 6 हजार पदों पर जारी की भर्ती, आवेदन 17 फरवरी तक

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RSMSSB:— 10वीं पास उम्मीदवारों के लिए सरकारी नौकरी पाने का शानदार मौका है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने पशु परिचर के पद करीब 6 हजार वैकेंसी निकाली है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट rsmssb.rajasthan.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से 17 फरवरी 2024 तक आवेदन कर सकते हैं। बोर्ड द्वारा जारी एनिमल अटेंडेंट सीधी भर्ती 2023 नोटिफिकेशन के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 19 जनवरी से शुरू हो चुकी है, जबकि भर्ती परीक्षा अप्रैल या जून 2024 में आयोजित की जाएगी।

इस भर्ती अभियान संगठन में 5934 पदों को भरेगा। इनमें गैर अनुसूचित क्षेत्र एरिया के 5281 पद और अनुसूचित क्षेत्र एरिया के 653 पद शामिल हैं। उम्मीदवार को किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से कक्षा 10वीं या इसके समकक्ष परीक्षा पास किया होना चाहिए। इसके अलावा देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी में काम करने का ज्ञान और राजस्थान की संस्कृति का ज्ञान होना चाहिए।
आवेदकों की आयु सीमा 01 जनवरी 2025 को कम से कम 18 वर्ष और अधिकतम 40 वर्ष हो। वहीं आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी मानदंड के अनुसार अधिकतम आयु सीमा छूट दी जाएगी।
सामान्य/ओबीसी कैटेगरी के उम्मीदवारों को 600 रुपये और ओबीसी एनसीएल/एससी/एसटी वर्ग के उम्मीदवारों को 400 रुपये फीस जमा करनी होगी, जबकि करेक्शन फीस 300 रुपये है। यह फीस एक बार रजिस्ट्रेशन के लिए है, अब उम्मीदवार को एक बार ओटीआर शुल्क का भुगतान करने के बाद बार-बार आवेदन शुल्क का भुगतान नहीं करना होगा।

अयोध्या, पूरा विश्व सम्मोहित

अयोध्या, पूरा विश्व सम्मोहित
आस्था की ढाल में प्राण प्रतिष्ठा
प्रसाद में मिलेगी अयोध्या की मिट्टी

यक़ीनन युगों-युगों ने आस्था के सैलाब का ऐसा समंदर नहीं देखा जो अब देखने को मिल रहा है। देश के ज़र्रे-जर्रे में, हर जुबां पर बस एक ही नाम श्रीराम। आलोचनाओं की चौखट पर भी यही नाम श्रीराम। जो तन से नहीं जा पा रहे हैं वे मन से अयोध्या में हैं। देश के हर गांव, शहर और राज्य से और इसके बाद विदेश से भी। यक़ीनन पीएम मोदी ने श्रीराम प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के माध्यम से अयोध्या को विश्व क्षितिज पर जो स्थान और ऊंचाइयां दे दी हैं वैसी न तो अब तक कोई दे पाया और न ही आगे कोई दे पाएगा। एक मंदिर के दम पर पूरे संसार में भारत को जो पहचान दिला दी है वह विस्मित कर देने वाली है। भले ही मोदी जी की यह लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक चाल हो लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि श्रीराम मंदिर के बहाने मोदी ने देश के हर घर में और हर दिल में प्रवेश कर लिया है। खासकर देश की लगभग हर महिला के दिल में, जो आज तक कोई नहीं कर सका। और दो-टूक लफ़्ज़ों में जो अब तक कोई नहीं कर सका वो मोदी ने यहां कर दिखाया, बेखौफ। यदि राजनीति और आलोचनाओं से अलग हट कर देखा जाए तो धर्म के क्षेत्र में यह एक ऐसी उपलब्धि है जो भारत के इतिहास में खुद एक स्वर्णिम इतिहास बन गई।
यहां गोरखपुर में गीता प्रेस में अब तक 3 करोड 70 लाख श्रीरामचरितमानस प्रकाशित हो चुकी हैं और अब अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के चलते इसके प्रकाशन का लोड बहुत बढ गया है। छपा हुआ एक स्टाक खत्म हो गया है और दूसरा प्रेस में है। बावजूद डिलीवरी का आलम यह है कि मांग बढती ही जा रही है। प्रेस में 500 कर्मचारी दिन-रात श्रीरामचरितमानस छाप रहे हैं फिर भी मांग रूकने का नाम नहीं ले रही। यह सब प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का चमत्कार है। देश तो देश, विदेशों से भी लगातार आर्डर आते जा रहे हैं। दूसरी ओर यहां 40 दिनों में 1,900 भजन तैयारी किये जा चुके हैं जिन्हें वाट्सएप के जरिये सीधे भक्तों तक पहुंचाया जा रहा है।
इधर अयोध्या में 35 साल पहले प्रख्यात धारावाहिक रामायण के राम उर्फ़ अरूण गोविल और सीता उर्फ़ दीपिका चिकलिया के अयोध्या पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। यद्यपि यह प्रायोजित है जबकि इतने सालों में उन्हें लोग भूल से गए थे। कहीं दिखाई दे जाने पर भी कोई खास तवज्जोह नहीं मिलती थी लेकिन श्रीराम प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए अयोध्या में कदम रखते ही फिर मिले उसी सत्कार ने इन्हें भावविभोर कर दिया। यूपी के एक समाचार-पत्र ने तो लिखा कि दीपिका चिखलिया यह अदभुत सम्मान पाकर रो दी।
नेपाल, राजधानी से 220 किलोमीटर दूर दक्षिण-पूर्व में स्थित जनकपुरी। सीता जी की जन्म स्थली। अयोध्या से 500 किलोमीटर दूर। यहां पिछले 10 दिन से अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव को याद करते हुए भव्य समारोह आयोजित किया जा रहा है। उसी के तहत यहां के जानकी मंदिर में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी चल रहे हैं और आश्चर्य कि उसमें समूचे नेपाल वासी उमड रहे हैं। बस उनकी एक ही अभिलाषा है कि अयोध्या से 22 जनवरी के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए एक बुलावा हमें भी मिल जाए।
अब पहले अयोध्या की बात। इस नवनिर्मित मंदिर की अनुमानित लागत 1,800 करोड रुपए है। यह भारत की सबसे महंगी धार्मिक परियोजनाओं में से एक है। ज्ञात रहे कि 5 अगस्त 2020 को पीएम मोदी ने ही इस मंदिर की आधारशिला रखी थी। यह मंदिर लगभग ढाई एकड़ जमीन पर बना हुआ है। यदि इसमें परिक्रमा मार्ग भी जोड दिया जाए तो यह पूरा मंदिर परिसर 8 एकड़ का हो जाता है। इस तीन मंजिला मंदिर की ऊंचाई 162 फीट है। यहां यह उल्लेख करना जरूरी है कि मोदी जी ने 1992 में मस्जिद ढहाए जाने के बाद यह सौगंध ली थी कि अब मै मंदिर निर्माण पूरा होने तक अयोध्या नहीं लौटूंगा और अब तीन दशक बाद वह दिन आ गया।
22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा मुहूर्त मात्र 84 सेकंड का है और इसी पल में रामल्ला की पूजा होगी। 22 जनवरी दोपहर 12 बज कर 29 मिनट और 8 सैकंड से 12 बज कर 30 मिनट और 32 सैकंड तक। इसी 84 सेकंड में पीएम को पूजा कर लेनी होगी। यह प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव देश के 5 लाख मंदिरों में लाइव प्रसारण होगा। प्राण प्रतिष्ठा के बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा और आश्चर्य की बात यह कि प्रसाद के रूप में अयोध्या की मिट्टी दी जाएगी।
अब चलते हैं विदेश। 21 जनवरी से 22 जनवरी तक विश्व के 160 देशों में इसी प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे। युरोप के एलिफ टावर से लेकर अमेरिका के टाईम्स स्क्वायर तक विभिन्न महोत्सवों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। फ्रांस की राजधानी पैरिस में कल 21 जनवरी को राम रथ यात्रा निकाली जाएगी जिसमें यूरोप के चुनिंदा 1,000 लोग भाग लेंगे। पैरिस में रहने वाले भारतीय अविनाश मिश्रा इसे साझा करेंगे। उन्होंने अपनी पोस्ट में राम रथ यात्रा का पूरा मैप शेयर किया है।
ऐसे ही 22 जनवरी को अमेरिका में नार्थ अमेरिका से कनाडा तक के मंदिरों में पूजा तथा दीपोत्सव किया जाएगा। यहां कैलिफोर्निया, वाशिंगटन, शिकागो तथा और दूसरे शहरों में अयोध्या के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत कार रैली निकाली जाएगी। इनके अलावा मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र इंडोनेशिया तथा सऊदी अरब में भी लाइव प्रसारण होगा।
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संघ में चुनाव!

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संगठन कार्य का सर्वोच्च पद सरकार्यवाह का करीब डेढ़ महीने बाद मार्च में चुनाव होने के संकेत हैं। देश में केन्द्र सरकार के चुनाव से पहले मार्च महीने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की महत्वपूर्ण अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की नागपुर मुख्यालय के रेशम बाग में बैठक बुलाने की योजना तथा तैयारी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संगठन रचना में 44 प्रांत के तकरीबन 1500 प्रांतीय प्रतिनिधियो एवं श्रत्रिय, प्रांत, संघ प्रचारक, संघचालको की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा बैठक में संघ के सरकार्यवाह का निर्वाचन किया जायेगा। मौजूदा समय दत्तात्रेय होसबाल सरकार्यवाह है और एकबार फिर दत्तात्रेय होसबाल का संघ सरकार्यवाह पद पर सर्वसम्मति से निर्विरोध चुनाव होने के आसार हैं। इसके बाद प्रांत ओर श्रेत्रिय संघ संगठन कार्यकारिणी के पदों पर बड़ा बदलाव होने की संभावना है।प्रत्येक तीन साल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संविधान अनुसार स्वयम सेवकों द्वारा संघ संगठन कार्यकारिणी के पदों पर चुनाव होते है। पिछली दफे करोना महामारी काल 2021 में संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक हुई थी और करोना के कारण संघ प्रांत ओर श्रेत्रिय कार्यकारिणी के पदों पर ज्यादा बदलाव नहीं किया गया था। लेकिन अब संघ सरकार्यवाह के चुनाव बाद संघ की प्रांत तथा क्षेत्रीय कार्यकारिणी पदो में बडा बदलाव होने की पूरी उम्मीद है। ‌ ‌कर्नाटक प्रदेश के शिमोगा के रहने वाले दत्तात्रेय होसबाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में पहले ऐसे सरकार्यवाह है जो,संघ की शाखा की जगह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पद से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संगठनात्मक संरचना कार्य में सर्वाधिक शक्तिशाली के पद सरकार्यवाह पर निर्वाचित हुए हैं। कर्नाटक विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी में स्नातक दत्तात्रेय होसबाल ने 1972 में भारतीय विद्यार्थी परिषद में संघ कार्य प्रारंभ किया ओर इसके बाद करीब दो दशक तक भारतीय विद्यार्थी परिषद में संघ के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री पद का दायित्व संभाला है।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक दत्तात्रेय होसबाल को वर्ष 2016 में पटना बिहार से उत्तर प्रदेश में संघ कार्य के हेतु लखनऊ भेजा गया था और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पहले लोकसभा चुनाव में उनके लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में दत्तात्रेय होसबाल ने खुद अपनी देखरेख में संघ एवं भाजपा में समन्वय स्थापित कर उल्लेखनीय काज कर उत्तर प्रदेश में लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव में भाजपा को रिकॉर्ड सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। दत्तात्रेय होसबाल को इसके बाद संघ सह सरकार्यवाह ओर 2021 में सुरेश भैय्या जी की जगह संघ सरकार्यवाह पद का महत्वपूर्ण दायित्व प्रदान हुआ है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ओर उसके अनुषांगिक संगठन भाजपा में समन्वय स्थापित रखने के महत्वपूर्ण पद का अभी संघ में सह सरकार्यवाह अरुण कुमार को दायित्व प्रदान किया हुआ है।
दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार ने अपने संघ पूर्णकालिक प्रचारक कार्य का प्रारंभ देश की राजधानी दिल्ली में संघ के जिला , विभाग से प्रारंभ कर वर्ष 2004 में जम्मू-कश्मीर के संघ प्रांत प्रचारक का दायित्व सौंपा गया था। जम्मू-कश्मीर में तब तात्कालिक कांग्रेस मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने बाबा अमरनाथ श्राइन बोर्ड को भंग कर दिया था। जम्मू कश्मीर संघ प्रांत प्रचारक अरुण कुमार ने इसके खिलाफ बड़े आन्दोलन की रुपरेखा , कमान संभाल उसे फिर बहाल करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। जम्मू कश्मीर प्रांत प्रचारक अरुण कुमार की तब संघ ओर देश में खासी प्रसंशा चर्चा हुई थी।जम्मू कश्मीर संघ प्रांत प्रचारक रहते अरुण कुमार ने अपनी परिकल्पना एवं दृढ़ निश्चय से जम्मू-कश्मीर अध्ययन केन्द्र नाम से एक नये संस्थान की अपनी शुरुआत कराई ओर उसका दिल्ली केन्द्र बनाया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर में धारा 370 ओर 35 A को समाप्त करने की योजना, कार्य में संघ भाजपा समन्वय प्रमुख सह सरकार्यवाह अरुण कुमार की रचना होने के संकेत मिले हैं। संघ प्रचारक अरुण कुमार को 2011 में संघ में सह सम्पर्क प्रमुख ओर इसके पश्चात2021मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बेंगलूर अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा बैठक में अखिल भारतीय कार्यकारिणी में सह सरकार्यवाह ओर देश में उत्तर प्रदेश सहित 7 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव समय 2022 मे चित्रकूट में हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रचारक वार्षिक बैठक में कृष्ण गोपाल के स्थान पर संघ भाजपा समन्वय प्रमुख पद का दायित्व प्रदान हुआ है। ‌‌राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अपना संविधान 1949 में बना ओर उसमें कूल 25 अनुच्छेद है। संघ संविधान के अनुच्छेद में प्रावधान अनुसार प्रत्येक तीन वर्ष में कार्यकारिणी पदो के चुनाव कराने से संघ 8 स्तर संगठनात्मक संरचना में इस साल दिसंबर माह तक जिला, विभाग, प्रांत संघचालक पदों के निर्वाचन करने के निर्देश दिए गए थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 50 सक्रिय स्वयम सेवकों पर एक प्रांतीय प्रतिनिधि ओर 20 प्रांतीय प्रतिनिधि से एक अखिल भारतीय प्रतिनिधि का चुनाव किया जाता है। संघ में सभी संगठन पदों पर अमुमन सर्वसम्मति से निर्विरोध निर्वाचित होने की परम्परा रही है।
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जाट आंदोलन में नारी शक्ति ने भरी हूंकार

सिर पर घूंघट, हाथों में लाठी लिए जाट आंदोलन में पहुंचीं दर्जनों महिलाएं, संघर्ष समिति ने सरकार को दी यह खुली चेतावनी

Jat Aandolan: प्रदेश में जाटों ने केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण का हक लेने के लिये हूंकार भरली है। इस बार आंदोलन में नारी शक्ति का भी प्रयोग किया जा रहा है। जाट आंदोलन का मुद्दा अब गरमाने लगा है। धरना स्थल पर बड़ी संख्या लुगाई और मोट्यारों ने शक्ति प्रर्दशन किया। वहीं 22 जनवरी तक मांग नहीं मानने पर 23 जनवरी से आंदोलन उग्र करने की चेतावनी दी है।

आंदोलन संघर्ष समिति ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 22 जनवरी तक हमारी मांगें नहीं मानी गई तो हम हाईवे के साथ-साथ दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक को ब्लॉक कर देंगे। नारी शक्ति ने कहा कि हमें अपनी मांग मगवाने के लिए दिल्ली तक जाना पड़े तो हम जाएंगे। क्योंकि हमारे बच्चों के भविष्य की बात है। हम 1998 से आरक्षण की मांग करते आ रहे हैं। वहीं आंदोलन में लुगाइयों की भागीदारी को देख प्रशासन भी हरकत में आ गया है।

Rajasthan Assembly Session:- प्रदेश में भाजपा सरकार का प्रथम विधानसभा सत्र आज से शुरू

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16वीं राजस्थान विधानसभा की बैठकें आज फिरसे शुरू होंगी। बीते दिनों विधानसभा अध्यक्ष और सीएम ने मिलकर सर्वदलीय बैठक बुलाई थी।
राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र आज यानी शुक्रवार सुबह 11 बजे सोलहवीं विधानसभा के सत्र में अभिभाषण देंगे। एक सरकारी बयान के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, मुख्य सचिव सुधांश पंत और विधानसभा के प्रमुख सचिव राज्यपाल मिश्र का विधानसभा परिसर में स्वागत करेंगे।
राजस्थान की सोलहवीं विधानसभा के प्रथम सत्र की फिर से बैठकें शुक्रवार से शुरू होंगी। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विधानसभा में सर्वदलीय बैठक बुलाई। देवनानी ने सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा था कि ‘सदन में सार्थक चर्चा होनी चाहिए. सभी सदस्यों को बोलने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि सदन को चलाने की जिम्मेदारी सोलहवीं विधानसभा के सभी नवनिर्वाचित सदस्यों की है।
श्री देवनानी ने सभी सदस्यों से राज्यपाल का अभिभाषण शान्तिपूर्वक सुनने का आग्रह किया। देवनानी ने प्रश्नों के उत्तर नहीं आने पर चिन्ता जताते हुए कहा ‘अब समय पर प्रश्नों के जवाब मंगाये जायेंगे। इसके लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जायेगी। उन्होंने सभी दलों से अपील करते हुए कहा कि ‘सदन में गरिमा में रहकर मुद्दे उठायें जाए। सभी सदस्य सदन में मर्यादा में रहकर अपनी बात रखें। अमर्यादित आचरण ना करें।
वहीं इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा था कि ‘सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का मौका मिले इसके लिए पूरे प्रयास किये जाएं। सदस्य भी अपनी बात समय सीमा में रखने का प्रयास करें। कांग्रेस के टीकाराम जूली ने कहा कि ‘सदन में रखी गयी बातों को सरकार गंभीरता से ले और प्रश्नों के जवाब अगले सत्र से पहले आवश्यक रूप से प्रस्तुत कराये।

मोदी कुछ पीछे हटे

22 को मुख्य यजमान मोदी ही होंगे
भोग और आरती मोदी ही करेंगे

अब सिर्फ चार दिन बाद अयोध्या में भगवान श्री राम प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की पूर्णाहुति हो जाएगी।अनेकानेक विवादों के बीच समारोह की प्रक्रिया शुरू हुए आज तीन दिन हो चुके हैं। अयोध्या में भगवान श्री राम प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में पीएम मोदी द्वारा प्रधान पूजा को लेकर देश भर उठे विवाद और संतों में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए उन्होंने कुछ पैर पीछे कर लिए। अब वे प्रधान पूजा नहीं करेंगे लेकिन 22 जनवरी को सभी कार्यों के यजमान वे ही होंगे। इससे पहले के सभी कार्य डॉ अनिल मिश्रा निभा रहे हैं। पीएम दो कदम पीछे हटे क्योंकि एक तो सपत्नीक वे बैठ नहीं सकते चूंकि उनके अकेले बैठने पर देश के प्रकांड विद्वानों, संतों, राजनीतिज्ञों और आम जनमानस में घोर विरोध हो रहा था जिसका आगे चल कर उन्हें इसका नुकसान हो सकता था फलतः उन्होंने अपना यह फैसला थोडा बदल लिया। अब मोदी जी की जगह राम मंदिर के ट्रस्टी अनिल मिश्रा सपत्नीक मुख्य यजमान हैं। प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त निकालने वाले पंडित गणेश्वर शास्त्री तथा पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित और रामानन्द सम्प्रदाय के श्रीमत ट्रस्ट के महामंत्री रामविनय दास जी के अनुसार ट्रस्टी अनिल मिश्रा सपत्नीक मुख्य यजमान हैं और पीएम मोदी प्रतीकात्मक यजमान के रूप में मौजूद रहेंगे। ( यह समाचार एक मात्र दैनिक नवज्योति में 17 जनवरी के अंक में प्रकाशित हुआ है। ) अनिल मिश्रा ने सपत्नीक संकल्प, प्रायश्चित और गणेश पूजा कर सात दिवसीय अनुष्ठान की यजमानी शुरू कर दी है। चूंकि अनुष्ठान के मुख्य यजमान गृहस्थ ही हो सकते हैं इसीलिए यह निर्णय लिया गया। ( यही बात मैने अपने 10 जनवरी के ब्लॉग में वजह की व्याख्या करते हुए लिख दी थी कि एक गृहस्थ ही यजमानी करे तो श्रेष्ठ है। ) पीएम मोदी अपने हाथ से गर्भ गृह में कुशा और श्लाका खींचेंगे। यहां मिश्रा दम्पति मोदी के प्रतिनिधि के तौर पर 60 घंटे का शास्त्रीय मंत्रोच्चारण सुनेंगे लेकिन 22 जनवरी को पीएम मोदी ही मुख्य यजमान होंगे और वे ही भगवान् को भोग अर्पित करेंगे तथा आरती भी उतारेंगे।
डॉ अनिल मिश्रा राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य हैं। वे पिछले 40 साल से अयोध्या में होम्योपैथिक क्लिनिक चला रहे हैं।उन्होंने 1981 में बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी में डिग्री प्राप्त की थी। वे यूपी होम्योपैथिक बोर्ड के रजिस्ट्रार थे और गोंडा के हौमयोपैथी अधिकारी पद से रिटायर हुए। संघ के सक्रिय सदस्य रहते हुए इन्होंने आपातकाल का घोर विरोध किया था। इन्होंने अयोध्या राम मंदिर आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मुख्य यजमान होने के नाते डॉ मिश्रा ने दो दिन पहले सरयू नदी में डुबकी लगाई और फिर यज्ञ शुरू करने से पहले पंचामृत लिया इसके बाद सपत्नीक हवन में बैठे। ज्ञात रहे कि यहां मंदिर में 121 पुजारी अनुषठान कर रहे हैं और यह पूरा कार्य वैदिक विद्वान गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ की देख-रेख में हो रहा है।
ज्ञात रहे कि अविमुक्तेश्वरानंद ने भी यही कहा था कि शास्त्रों के विधान के अनुसार मोदी मुख्य यजमान नहीं हो सकते। बस हो गया एक विवाद खत्म। वैसे यहां यह कहना जरूरी है कि अविमुक्तेश्वरानंद सिद्धांततः बिलकुल सही हैं जबकि दूसरे जिन संतों ने सत्ता की हां में हां मिलाई वे कहने को संत हो सकते हैं लेकिन शास्त्र सम्मत संत नहीं क्योंकि जो शास्त्रों के नियमों से विमुख होकर किसी की हां में हां मिलाए, वह संत नहीं हो सकता।

यदि सिद्धांतों पर अडिग संत समाज यह न कहता कि मोदी का प्रथम पूजा करना शास्त्र सम्मत नहीं है तो संभवतः मोदी ही प्रधान पूजा करते। यह भी सच है कि सत्ता की मलाई खाने वाले कई संतों ने मोदी द्वारा पूजा किया जाना स्वीकार कर लिया था जो कि गलत है। यह अच्छा हुआ कि मोदी जी ने शास्त्र सम्मत बात का मान रखा जिससे हां में हां मिलाने वाले संत बेनकाब हो गए।
अब दूसरी बात। संत अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि इस धार्मिक अनुष्ठान का राजनीतिकरण ठीक नहीं। यह सौ फीसदी सच है कि इस प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की आड लेकर आने वाले लोकसभा चुनावों के लिए ही जाल बिछाया गया है। यह देश के सभी राजनीतिज्ञ भी जानते हैं और आम जनता भी।

यहां कुछ विवाद और हैं कि देश के चारों शंकराचार्य पौष मास में इस कार्यक्रम को श्रेष्ठ नहीं मानते। उनके अनुसार इस माह में कोई मुहूर्त भी नहीं होता लेकिन दूसरी तरफ पंडित गणेश शास्त्री, लक्ष्मीकांत दीक्षित और रामानन्द सम्प्रदाय के रामविनय दास जी ने प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त भी निकाल लिया वह कैसे ॽ उन्होंने किस आधार पर मुहूर्त निकाला। इसके अलावा इन संतों का कहना है कि अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा नहीं होती। शास्त्रों के नजरिये से यह सही फरमा रहे हैं। फिलहाल स्थिति यह है कि 22 जनवरी को जब तक यह काम नहीं हो जाता तब तक ऐसे कई और किन्तु-परन्तु उठते रहेंगे लेकिन यह भी तय है कि यह काम 22 जनवरी को होकर रहेगा और अब इसे कोई रोक नहीं सकता।

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मुख्यमंत्री को जेल से मिली जान से मारने की धमकी

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बुधवार सुबह पुलिस महकमें में एक फोन ने खलबली मचा दी। सुरक्षा एजेंसिया सजग और अलर्ट हो गई। जेल से एक फोन आया और फोन करने वाले ने मुख्यमंत्री भजन लाल को जान से मारने की धमकी दे डाली।
मामले में कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसफ का कहना है कि सुबह साढ़े आठ बजे जेल से एक फोन आया। उन्होने बताया कि करीब दोपहर 12 बजे जेल में धोखाधड़ी के मामले में बंद बंदी तक पुलिस पहुंची। उस बंदी ने बताया कि पोक्सो के मामले में बंद बंदी ने उससे मोबाइल मांगकर फोन किया है। दोनों बंदियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जल्द प्रॉडक्शन वारंट पर दोनों को गिरफ्तार किया जाएगा।
जेल से फोन आने पर जेल डीजी भूपेन्द्र दक के आदेश पर देर रात जेल प्रशासन ने हैड वार्डन अजय सिंह राठौड़ और वार्डन मनीष कुमार यादव को सस्पेंड कर दिया। वहीं जेल प्रहरियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

31 जनवरी के बाद निस्क्रिय कर दिए जाएंगे FASTag

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग (NHAI) ने फास्टैग के नये नियमों के अनुसार कहा कि खाते में बैलेंस रहने के बावजूद अधूरे KYC वाले फास्टैग को ब्लैकलिस्टेड कर दिया जाएगा. NHAI ने KYC के लिये लास्ट डेट 31 जनवरी 2024 तय की है। अगर केवाईसी की पूरी प्रक्रिया नहीं हुई तो उसे निस्क्रिय कर दिए जाएंगे.
संचार माध्यमों के अनुसार भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग ने ‘एक वाहन, एक फास्टैग’ की नई पहल शुरू की है. इसका उद्देश्य है कि एक ही वाहनों के लिए कई फास्टैग जारी किये गए हैं. ऐसे में इसके इस्तेमाल को रोकने के लिए नई पहल लागू की गई है. अगर आप चाहते हैं कि आपका FASTag ब्लैकलिस्ट में न जाए तो तुरंत आपको KYC अपडेट करना होगा.
FASTag यूजर्स को सलाह दी जाती है कि वे अपने लेटेस्ट FASTag के लिए KYC प्रक्रिया को तुरंत पूरा कर लें. वहीं यूजर्स को बैंकों की ओर से पहले से जारी FASTag को छोड़ना होगा.
NHAI की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि एक ही वाहन के लिए कई फास्टैग जारी कर दिये गए हैं. जो RBI के नियमों के तहत उल्लंघन है. इसी वजह से पुराने FASTag को ब्लैकलिस्ट किया जा रहा है. इसके साथ ही यह भी शिकायतें आयी है कि FASTag को वाहन के विंडशील्ड पर नहीं लगाया जाता है. इस वजह से टोल प्लाजा पर देरी होती है.