पैनल पर विचार!

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राजस्थान भाजपा कोर कमेटी सदस्यों की आज शुक्रवार दोपहर मे अध्यक्ष जेपी नड्डा के दिल्ली निवास पर बैठक होने के संभावना हैं। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री अमित शाह तथा भाजपा राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष भी भाग ले सकते हैं। भाजपा हाईकमान के साथ राजस्थान भाजपा कोर कमेटी सदस्यों कीआज शुक्रवार बैठक की अहमियत से इससे ही अंदाजा हो जाता है कि, राजस्थान विधानसभा चुनाव भाजपा उम्मीदवार बाबत पहली दफे राजस्थान भाजपा कोर कमेटी के सभी सदस्य प्रदेशाध्यक्ष सी,.पी.जोशी, संगठन महामंत्री चन्द्र शेखर, प्रतिपक्ष नेता राजेंद्र राठौड़, उपनेता डॉ सतीश पुनिया, केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल, भूपेंद्र यादव,कैलाश चौधरी, सांसद कनकमल कटारा, राजेंद्र गहलोत पूर्व सांसद ओमप्रकाश माथुर दिल्ली मीटिंग में शामिल होंने की उम्मीद है। इससे पहले अध्यक्ष नड्डा, मंत्री अमित शाह के साथ दिल्ली में हुई मीटिंग में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, सांसद कनकमल कटारा, राजेंद्र गहलोत ओर पूर्व सांसद ओमप्रकाश माथुर ने भाग नहीं ले, राजस्थान विधानसभा चुनाव उम्मीदवार पैनल पर विचार विमर्श में भाग नहीं लिया था। अध्यक्ष जेपी नड्डा के दिल्ली निवास पर कल गुरुवार रात को भी अध्यक्ष नड्डा,संगठन महामंत्री संतोष, मंत्री शाह ने विधानसभा चुनाव भाजपा उम्मीदवार पैनल बाबत तेलंगाना भाजपा कोर कमेटी सदस्यों के साथ लम्बी बैठक की थी।
वहीं गुरुवार दोपहर में केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी के दिल्ली निवास पर राजस्थान भाजपा कोर कमेटी सदस्यों ने करीब 56भाजपा विधायकों की सीटों पर उम्मीदवार पैनल पर चर्चा करने के संकेत मिले हैं। बैठक चर्चा में विधायक के नाम के साथ अन्य दावेदारों के नामों को भी पैनल में जगह मिलने के संकेत हैं। भाजपा के चुनाव में लगातार पराजय प्राप्त करने वाली बेहद कमजोर डी क्षेणी की 10सीटो तथा कभी हार -कभई जीत वाली सी केटेगरी की तकरीबन दो दर्जन सीटों पर भी उम्मीदवार चयन पर चर्चा होने के संकेत हैं। उसमें डी की दो सीटों ओर भाजपा विधायक वाली एक क्षेणी की आठ सीटों को अभी भी होल्ड रखने के संकेत हैं। बाकी बची सीटों पर भाजपा हाईकमान राजस्थान कांग्रेस उम्मीदवार सूची के जारी होने के बाद राजस्थान भाजपा कोर कमेटी सदस्यों के साथ विचार विमर्श करने की संभावना है। अब आज शुक्रवार को अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन महामंत्री बीएल संतोष, केन्द्रीय मंत्री अमित शाह राजस्थान भाजपा कोर कमेटी सदस्यों से संभाग अनुसार सीटों पर तैयार किए संभावित पैनल के नामों पर विस्तार से चर्चा कर भाजपा केन्द्रीय चुनाव समिति में विचार विमर्श – उम्मीदवार चयन बाबत पैनल को अंतिम रूप देने की संभावना है।

भूपेन्द्र औझा

मौहब्बत की दुकान का फायदा किसको

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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने एक दूसरे के लिए जो प्यार- मोहब्बत और भाईचारे की दुकान अचानक खोली है, उसने उन दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है जो युवा है, मेहनती है,अपने इलाकों में जीतने की क्षमता रखते हैं और जिन्हें सर्वे में भी वर्तमान विधायकों से ज्यादा टिकट के योग्य माना गया। लेकिन जब बात खुद के समर्थकों के टिकट कटने पर आई,तो दोनों ने मिनटों में अपनी सालों से चल रही दुश्मनी को भुला दिया और नफरत की दुकान का शटर डाउन कर मौहब्बत की दुकान खोल ली।
गहलोत ने कह दिया कि उन्होंने उन विधायकों को फिर टिकट देने पर कोई आपत्ति नहीं की,जो सरकार गिराने के लिए मानेसर चले गए थे। बदले पायलट ने जवाब में कहा कि, उन्होंने भी उन जीतने वालों उन उम्मीदवारों के नामों पर कोई आपत्ति नहीं की, जो सोनिया गांधी और आलाकमान की अवमानना में शामिल थे। मीडिया की खबरों में काफी समय से कहा जा रहा था कि विभिन्न स्तरों पर कराए गए सर्वे में कांग्रेस के 50 विधायकों की टिकट कट सकते हैं,क्योंकि उनकी स्थिति कमजोर पाई गई है। इनमें गहलोत और पायलट दोनों के ही समर्थक शामिल थे। खुद गहलोत कह चुके हैं कि नाराजगी सरकार या उनके प्रति नहीं,कुछ विधायकों के प्रति है। फिर भी अगर ऐसे विधायकों को वापस टिकट गया गया,तो नुकसान तो कांग्रेस को ही होगा। लेकिन फिर भी दोनों स्क्रीनिंग कमेटी या सीईसी की बैठक में एक- दूसरे के उम्मीदवारों का विरोध करते -कराते, इससे बेहतर यह था कि एक-दूसरे से हाथ मिलाकर सभी नाम क्लियर करा लेते। ताकि विरोध के स्वर दोनों ओर से नहीं उठे। अपने-अपने टिकटों के लिए सचिन नाकारा, निकम्मा और गद्दार जैसे आभूषणों को भूल गए, तो गहलोत इस बात को कि ने पायलट के नेतृत्व में उनकी सरकार गिराने की कोशिश की गई थी और बचाने के महीनों तक विधायकों के साथ वो भी होटलों में रहे।
जाहिर है दोनों में प्यार- मौहब्बत की दुकान खुलवाने में गांधी परिवार की ही पूंजी लगी होगी, क्योंकि यह खुला सच है कि अगर दोनों में इस तरह को समझौता ( भले ही मजबूरी या स्वार्थ का हो ) न होता, तो राजस्थान में कांग्रेस का मुकाबला भाजपा से ज्यादा कांग्रेस से ही होता। आज प्रियंका गांधी अशोक गहलोत को नुभवी और पायलट को युवा बता कर राजस्थान में अनुभव और युवा का जो गणित समझा कर गई है, उसने भी इस बात को पुख्ता किया है। लेकिन इसने कांग्रेस और राहुल गांधी के उन तमाम दावों की पोल खोल दी,जो राहुल गांधी समय-समय पर करते रहे हैं। यही कि 50 प्रतिशत युवाओं को टिकट दिए जाएंगे। टिकट सिर्फ जिताऊ उम्मीदवारों को ही मिलेगा। टिकट सर्वे के आधार दिए जाएंगे। किसी की सिफारिश पर टिकट नहीं मिलेंगे। मैंने तो अपने ब्लॉग में पहले भी लिखा था कि कांग्रेस में सर्वे,रायशुमारी, पर्यवेक्षकों को भेजना सिर्फ नौटंकी और दिखावा होता है। आखिर में टिकट कुछ नेताओं के चाहने और उनके चहेतों को ही कोई मिलते हैं।
गहलोत ने तो मानेसर जाने वाले विधायकों के टिकटों पर आपत्ति नहीं की है,लेकिन क्या पायलट उनकी तरह 25 सितम्बर के शिल्पकार शांति धारीवाल,महेश जोशी और धर्मेंद्र राठौड़ के नाम को हरी झंडी दे देंगे ?क्या आलाकमान अपने खिलाफ बगावत करने वालों को फिर मैदान में देखना पसंद करेगा? क्या खड़गे और माकन उन चेहरों को उम्मीदवारों के रूप में देखना गवारा करेंगे जिन्होंने दोनों को बेइज्जत कर वापस दिल्ली भेजा था। कहा जा रहा है कि गहलोत इन तीनों को हर हाल में टिकट दिलाना चाहते हैं,ताकि ये मैसेज जाए कि दिल्ली में आज भी उनकी चलती है। इसीलिए वो बार- बार माकन से मिल रहे हैं,क्योंकि उन्हें साध लिया तो सोनिया-राहुल भी मान सकते हैं।हालांकि आम कांग्रेसी को अभी भी इस सवाल का जवाब नहीं मिला है कि उस समय बगावत बड़ी किसकी थी पायलट की या गहलोत की। क्योंकि थी तो दोनों कांग्रेस के ही खिलाफ।

ओम माथुर

विधानसभा आम चुनाव-2023-एनफोर्समेंट एजेंसियों ने 10 दिन में 143 करोड़ रुपए से ज्यादा का जब्ती कर बनाया नया रिकॉर्ड

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विधानसभा आम चुनाव – 2023 के मद्देनजर निर्वाचन विभाग के निर्देश पर प्रदेश में विभिन्न एनफोर्समेंट एजेंसियां अवैध सामग्री जब्त करने के मामले में नित नए रिकॉर्ड बना रही हैं। आदर्श आचार संहिता लागू होने के 10 दिन के भीतर एनफोर्समेंट एजेंसियों ने 143 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की अवैध शराब, नकदी व अन्य सामग्री जब्त कर नया रिकॉर्ड कायम किया है, जबकि 2018 के विधानसभा आम चुनाव में पूरी आचार संहिता के दौरान यानि 65 दिन में 70 करोड़ की अवैध सामग्री जब्त की गयी थी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रवीण गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में अलग-अलग एजेंसियों की ओर से जारी रिपोर्ट में ये जानकारी दी गयी है। इसमें आचार संहिता लगने से अब तक 7 लाख 95 हजार 978 लीटर शराब (15 करोड़ 37 लाख रुपए कीमत) 26 करोड़ 27 लाख रू कैश, ड्रग्स लगभग 38.94 करोड़ रुपए, और सोना- चांदी जैसी कीमती धातुओं की 15.72 करोड़ रूपए की जब्ती की गयी है, जबकि फ्रीबीज 46.24 करोड़ रुपए की कीमत की जब्त की गयी है।
श्री गुप्ता ने बताया कि 21 करोड़ 20 लाख की जब्ती के साथ जयपुर प्रदेश में सबसे आगे है। दूसरे स्थान पर उदयपुर 11 करोड़ 20 लाख रुपए, तीसरे स्थान पर बाड़मेर 9 करोड़ 80 लाख रूपए चौथे स्थान पर 9 करोड़ 49 लाख रुपए के साथ भीलवाड़ा है। अलवर 8.31 करोड़, जोधपुर 8.26 करोड़, श्रीगंगानगर 7.17 करोड़, सीकर 6.63 करोड़, चित्तौड़गढ़ 6.53 करोड़ और पाली ने अब तक 5.26 करोड़ रुपए का जब्ती की है।
श्री गुप्ता ने बताया कि प्रदेश भर में विभागों द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही है और किसी भी संदेहास्पद मामले पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
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पात्र वंचित मतदाता 27 अक्टूबर तक मतदाता सूची में जुड़वा सकते हैं अपना नाम

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विधानसभा आम चुनाव 2023 को लेकर निर्वाचन विभाग तैयारियों में जुटा हुआ है। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 04 अक्टूबर को हो चुका है, लेकिन फिर भी मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित रहे पात्र मतदाता अभी भी 27 अक्टूबर 2023 तक मतदाता सूची में नाम जुड़वा सकते है। मतदाता वोटर लिस्ट में घर बैठे अपना नाम VHA app के माध्यम से check कर सकता हैं ( एपिक नंबर भर कर )निर्वाचन विभाग द्वारा 7 नवंबर को पूरक सूची सहित अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रवीण गुप्ता ने बताया कि विधानसभा चुनावों में शत प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश भर में मतदाता जागरूकता अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। वहीं, मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित पात्र मतदाता 27 अक्टूबर तक भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट https://voters.eci.gov.in, मतदाता सेवा पोर्टल अथवा वोटर हेल्पलाइन एप पर जाकर फॉर्म 6 ( First time voters ) अथवा फॉर्म 8 (Shifting ) के तहत अपने आवेदन कर सकते हैं। अंतिम तिथि 27 अक्टूबर के बाद किए गए आवेदन विधानसभा आम चुनाव 2023 में मतदान के लिए मान्य नहीं होंगे।
श्री गुप्ता ने बताया कि प्रवासी भारतीय फॉर्म 6 A के तहत आवेदन कर मतदाता सूची में शामिल हो कर लोकतंत्र के महापर्व में अपना योगदान दे सकते हैं।

प्रदेश में 36 करोड की शराब एक दिन की घूंट

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आजादी के बाद से अब तक बगैर शराब और शबाब के कभी भी कोई भी चुनाव सम्पन्न नहीं हुआ। तब से दोनों की गलबहियां बा-दस्तूर चली आ रही हैं। पीढ़ियां बीत गई, जमाने बदल गए ,चेहरे बदल गए, लेकिन इन दोनों का याराना दशकों से परवान चढ़ा आ रहा है। अब चूंकि चुनाव चौखट पर हैं तो हर चुनाव की भांति इस चुनाव के लिए भी करोड़ों की शराब देश के हर राज्य में चोरी-छिपे अंदर-बाहर हो रही है। और शबाब, उन्होंने भी अपने भाव बढ़ा कर सजना-संवरना शुरू कर दिया है। भले ही शबाब लिपा-पुता हो लेकिन नशे में किसे पता चलता है।
चूंकि राजस्थान सहित अन्य राज्यों में चुनावों ने दस्तक दे दी है फलतः शराब के गोदाम के गोदाम भरे भी जा रहे हैं और खाली भी हो रहे हैं। मौजूदा समय में अकेले राजस्थान में प्रतिदिन लोग 36 करोड रुपए की शराब और बीयर पी रहे हैं। और जयपुर में रोज एक करोड,40 लाख रुपए की शराब गटकी जा रही है। पिछले महीने सितम्बर में एक महिने में ही लोग 1100 करोड रुपए की शराब गटक गए। इतना राजस्थान में एक साल में पानी पर भी खर्च नहीं होता। मतलब कि राजस्थान में एक साल में 13 अरब और 40 करोड़ रुपए की शराब गटक ली जाती है। यह जान कर आश्चर्य होगा कि पिछले साल 31 दिसंबर की रात जश्न मनाने के लिए जयपुर के लोगों ने सिर्फ दो रात में एक अरब 11 करोड रुपए की शराब पी ली। ये आंकड़े आबकारी विभाग ने जारी किए। शेष चार राज्यों में शराब की लत इससे कहीं ज्यादा है। राजस्थान में एक महिने में जितने रूपयों की शराब पी ली जाती है उतने रूपयों में पूरे देश को एक साल तक मुफ्त खाना खिलाया जा सकता है। लेकिन देश और देशवासियों के लिए कौन सोचता है। राजनीति में कुछ ही चेहरों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश नेता इसके आदी हैं। बल्कि शराब का सेवन तो अब स्टेटस सिंबल बन गया है, जिसमें कई राजनीतिक चेहरे रम चुके हैं।शराब और शबाब के चटखारे लेने वाले हमारे पत्रकारों की बिरादरी में भी कम नहीं हैं। पुरूष भी और स्त्रियां भी।

सन 1977 में भैरोसिंह शेखावत सरकार ने राजस्थान में शराबबंदी लागू की थी लेकिन उन्हें जल्दी ही इस फैसले को वापस लेना पड़ा। उन्होंने शराबबंदी लागू तो कर दी लेकिन इसका उन्हें नुकसान भी इस रूप में उठाना पड़ा कि वे फिर राजस्थान के सीएम नहीं बन पाए। इसके बाद भैरोसिंह शेखावत जब उपराष्ट्रपति बने तब राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने उनके सम्मान में एक भोज रखा। एक जानकारी और दे दूं कि भैरोसिंह शेखावत ने 5-6 साल पुलिस में भी नौकरी की थी लेकिन फिर छोड दी और अपने गांव जाकर खेती-बाड़ी करने लगे। लेकिन उनके बडे भाई को राजनीति में मौका मिला तो पीछे-पीछे शेखावत भी चल दिए।बस फिर वे राजनीति में उत्तरोत्तर प्रगति करते चले गए। और जब गहलोत सरकार आई उसके बाद उन्होंने शराबबंदी से साफ इन्कार कर दिया। बस उन्होंने यह सलाह जरूर दी कि जिसे पीना है वह घर ले जाकर पीए।

अब थोडी बात शबाब की भी हो जाए। चुनाव आते ही पार्टी कार्यकर्ताओं के रूप में कुछ लड़कियां और युवतियां सक्रीय की जाती हैं ताकि पुलिस की निगाह से भी बची रहें और पार्टी के शौकीनों की सेवा भी होती रहे। यद्यपि पुलिस भी यह सब समझती है लेकिन मजबूरी है कि हाथ नहीं डालती। धीरे-धीरे ये स्त्रियां रवां हो जाती हैं और पार्टी की कार्यकर्ता बन कर साथियों की सेवा करती रहती हैं। इन्हें रौब झाडना भी आ जाता है और मलाई खाना भी। मैने अपने 40 साल के कैरियर में ऐसे कुछ चेहरों को देखा है जो कभी किराए के मकानों में थीं और आज कोठी की मालकिन हैं। इसीलिए मैने कहा था कि शराब और शबाब गलबहियां डाले राजनीति में साथ-साथ चलते हैं। शराब और शबाब के चटखारे लेने वाले हमारे पत्रकारों की बिरादरी में भी कम नहीं हैं। कुछ कई घरों को उजाड चुके हैं तो कुछ कई जगह जूते भी खा चुके हैं। अजमेर के एक बडे अख़बार के रेजिडेंट एडिटर अपनी ही कर्मचारी की आशिकी में ऐसे पडे कि नौकरी से हाथ धोना पड़ा। कुछ ने शबाब को इधर-उधर घुमा कर बीजेएमसी करा दी।
विश्व में प्रतिवर्ष लगभग 30 लाख लोग शराब के सेवन से मर जाते हैं। इसके सेवन से 200 से ज्यादा बीमारियां होती हैं। भारत में हर साल 5 अरब लीटर शराब पी जाती है। पुरूष और महिलाओं का रेशो समान है। भारत में हर साल लगभग 2.6 लाख लोगों की मौत शराब पीने से ही होती है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार भारत में हर 20 वां पुरुष शराब पीता है। इसी की रिपोर्ट के अनुसार देश में 13.27 करोड लोग शराब के आदी हैं। भारत सरकार को सबसे ज्यादा रेवेन्यू शराब से ही प्राप्त होती है। फेडरेशन ऑफ इंडिया चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की रिपोर्ट के अनुसार देश में हर साल शराब का 23 हजार 466 करोड का कारोबार होता है।

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परिचित ने नशीला पदार्थ पिलाकर किया नाबालिग छात्रा से रेप

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जयपुर में परिचित युवक के नाबालिग छात्रा से रेप करने का मामला सामने आया है। स्कूल छोड़ने के बहाने बाइक पर लिफ्ट देकर किडनैप कर ले गया। डरा-धमकाकर जबरन नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ रेप किया। जवाहर सर्किल थाने में नाबालिग पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट दर्ज करवाई है। मामले की जांच SHO (जवाहर सर्किल) दलवीर सिंह कर रहे हैं। पुलिस ने बताया कि जगतपुरा निवासी व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज करवाई है। उनकी नाबालिग बेटी प्राइवेट स्कूल में पढ़ती है। स्कूल आते-जाते समय नाबालिग बेटी से मिलने के लिए आरोपी विनोद कोशिश करता था। शनिवार को बस छूटने पर नाबालिग बेटी पैदल स्कूल जा रही थी। रास्ते में अकेला पाकर आरोपी विनोद ने बाइक से स्कूल छोड़ने की कही। बहला-फुसलाकर नाबालिग बेटी को बाइक पर बैठाकर स्कूल छोड़ने की जगह किडनैप कर ले गया।

एक कमरे पर ले जाकर डरा-धमकाकर जबरदस्ती नशीला पदार्थ पिलाकर रेप किया
खुद के पिता के पुलिस में होने की बताकर डराया-धमकाया। किसी को बताने पर ठीक नहीं होने की धमकी देकर स्कूल के बाहर छोड़कर फरार हो गया। डरी-सहमी रहने के बाद पीड़िता ने परिजनों को आपबीती सुनाई। आरोपी परिचित के करतूत का पता चलने पर नाबालिग पीड़िता को लेकर जवाहर सर्किल थाने में जाकर मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

बॉयफ्रेंड ने किया युवती से रेप

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जयपुर में एक बॉयफ्रेंड के युवती से रेप करने का मामला सामने आया है। विरोध करने पर आरोपी ने शादी करने का वादा किया। रेप के दौरान प्रेग्नेंट होने का पता चलने पर आरोपी बॉयफ्रेंड छोड़कर भाग गया। प्रताप नगर थाने में पीड़िता ने आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है। मामले की जांच SHO (प्रताप नगर) जहीर अब्बास कर रहे है। पुलिस ने बताया कि उत्तर प्रदेश निवासी 19 साल की लड़की ने रिपोर्ट दर्ज करवाई है। वह प्रताप नगर में एक हॉस्टल में रहती है। करीब 4 महीने पहले उसकी मुलाकात मोहित वर्मा से हुई थी। बातचीत के दौरान दोनों में दोस्ती हो गई। आरोप है कि करीब 2 महीने पहले आरोपी ने उसे मिलने के बहाने होटल में बुलाया। मिलने जाने पर आरोपी ने जबरदस्ती उसके साथ रेप किया।

विरोध करने पर शादी करने का वादा किया
शादी करने का झांसा देकर उसके हॉस्टल में आकर दो महीने तक देह शोषण करता रहा। प्रेग्नेंट होने पर शादी करने का दबाव बनाने पर आरोपी बॉयफ्रेंड मोहित ने मना कर दिया। उससे दूरी बनाने के साथ ही छोड़ भागा। धोखे का एहसास होने पर पीड़िता ने आरोपी मोहित के खिलाफ मामला दर्ज करवाया।

आरपीए क्वार्टर जयपुर में महिला कॉन्स्टेबल का गला काटा

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राजस्थान पुलिस एकेडमी (आरपीए) स्थित सरकारी क्वार्टर में महिला कॉन्स्टेबल पर बदमाश ने जानलेवा हमला कर दिया। बदमाश ने महिला के गले पर धारदार हथियार से वार किया। जिससे कॉन्स्टेबल के गले पर कट लग गया। महिला के गले में 8 टांके आए। घटना जयपुर के शास्त्री नगर थाना इलाके की 18 अक्टूबर की रात करीब 2 बजे की है।
बुधवार रात वह क्वार्टर में पति और बच्चों के साथ सो रही थी। इसी दौरान अज्ञात बदमाश क्वार्टर में घुसा। बदमाश के घुसने पर वह जाग गई। शोर किया तो बदमाश ने उस पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। इससे उसके गले पर गहरा घाव हो गया।

आरोपी क्वार्टर का दरवाजा बाहर से बंद कर फरार हो गया
घायल होने के बाद भी कॉन्स्टेबल ने बदमाश को पकड़ने का काफी प्रयास किया। पति ने भी पकड़ने की कोशिश की, लेकिन बदमाश क्वार्टर का दरवाजा बाहर से बंद कर फरार हो गया। कॉन्स्टेबल ने शोर मचाकर आसपास में रह रहे पुलिसकर्मियों को मौके पर बुलाया। पुलिसकर्मियों ने गेट खोला। महिला को पति कांवटिया अस्पताल लेकर गया। महिला कॉन्स्टेबल के गले पर 8 टांके आए। अस्पताल से महिला थाने पहुंची और मामला दर्ज कराया।

सब इंस्पेक्टर मुकेश ने बताया
कृष्णा की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली है। घटना के बाद अलग-अलग टीम बनाकर जांच की जा रही है। आरपीए के आसपास लगे सीसीटीवी की फुटेज देखी जा रही है। जल्दी आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

आरपीए में बदमाश का घुसना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
आरपीए में बदमाश का घुसना सुरक्षा-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। बदमाश क्वार्टर में घुस जाता है और हमला कर फरार होने में सफल हो जाता है।

बगावत की सजा, धारीवाल,जोशी, राठौड़ को नहीं मिलेगा टिकट

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शांति धारीवाल,महेश जोशी और धर्मेंद्र सिंह राठौड़ को कांग्रेस टिकट नहीं देगी। बताया जा रहा है कि दिल्ली में आज हुई सीईसी की बैठक में इन तीनों के नाम पर क्रॉस लगा दिया गया है। तीनों मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खासमखास और उस बगावत के रचयिता और नेतृत्वकर्ता भी थे,जो 25 सितंबर को कांग्रेस आलाकमान के खिलाफ की गई थी।
उस समय जब सोनिया गांधी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष और सचिन पायलट को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन को पर्यवेक्षक बनाकर जयपुर भेजा था। सोनिया गांधी के निर्देशों पर एक लाइन का प्रस्ताव पास कराना था,लेकिन दोनों पर्यवेक्षक मुख्यमंत्री आवास पर विधायकों का बैठक के लिए इंतजार करते रहे और उधर शांति धारीवाल के घर पर इन तीनों ने गहलोत समर्थक विधायकों की अलग से बैठक कर ली और पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के प्रयास के विरोध में सामूहिक इस्तीफे ले जाकर विधानसभा अध्यक्ष जोशी को दे दिए।
अब वही खड़गे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अजय माकन कोषाध्यक्ष यानी कांग्रेस के दो मजबूत स्तम्भ है। उस बगावत के बाद से गांधी परिवार भी गहलोत से खफा है, खासतौर पर राहुल और प्रियंका। धारीवाल ने तब मीडिया से बातचीत करते हुए यहां तक कह दिया था,कौन आलाकमान। आज आलाकमान ने अपनी ताकत दिखाते हुए तीनों को टिकट की दौड़ से बाहर कर दिया है। आलाकमान के कोप की आशंका को देखते हुए धारीवाल पहले ही खुद के स्थान पर अपने बेटे को टिकट देने की वकालत कर रहे थे। जबकि महेश जोशी न सिर्फ में सर्वे में कमजोर साबित हुए थे। बल्कि उन पर और उनके बेटे रोहित जोशी पर आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं। जबकि धर्मेंद्र राठौड़ पहले कथित रूप से लाल डायरी और उसके बाद आरपीएससी के सदस्य केसर सिंह की नियुक्ति को लेकर और विवाद में आ चुके हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना था कि अगर इन तीनों में से किसी को भी टिकट दिया गया, तो इससे कांग्रेस के नेतृत्व यानी गांधी परिवार को चुनौती देने वालों के हौंसले और बुलंद होंगे। राजस्थान में सचिन पायलट को राजी रखने के लिए भी इन तीनों का टिकट काटना जरूरी समझा गया, क्योंकि यह तय था कि अगर इनमें से किसी को भी टिकट मिलता तो पायलट खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर सकते थे। जिस तरह से पायलट पिछले काफी समय से खामोश हैं, उससे यह संकेत मिल ही रहे हैं कि टिकटों को लेकर उन्हें आलाकमान ने आश्वस्त कर ही रखा है।
इनमें से राठौड़ अजमेर उत्तर से टिकट मांग रहे थे और पिछले डेढ़ -द़ो साल से वह अजमेर में जबरदस्त सक्रिय थे। उन्हें टिकट मिलने का इतना भरोसा था कि उन्होंने वार्ड स्तर तक तैयारी कर ली थी। जबकि दूसरे दावेदार एवं पिछले चुनाव के पराजित प्रत्याशी महेंद्र सिंह रलावता को पूरी तरह पायलट पर भरोसा था कि वो उन्हें ही टिकट दिलाएंगे। हालांकि अभी कांग्रेस की सूची सामने नहीं आई है,लेकिन माना जा रहा है कि अगर राठौड़ का टिकट कट गया, तो रलावता को फिर मैदान में उतारा जा सकता है

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बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकेगें चिकित्साकर्मी

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अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती शुभ्रा सिंह ने कहा कि विगत कुछ दिनों में मौसमी बीमारियों के मामले बढ़े हैं, ऐसे में प्रदेशभर में जांच, उपचार एवं रोकथाम सहित अन्य सभी व्यवस्थाओं का माकूल इंतजाम हो। इसमें किसी स्तर पर लापरवाही नहीं हो। उन्होंने मौसमी बीमारियों के दृष्टिगत चिकित्साकर्मियों को बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश दिए हैं।
श्रीमती सिंह गुरूवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो काॅन्फ्रेंस के माध्यम से मौसमी बीमारियों की स्थिति की समीक्षा कर रही थीं। उन्होंने सभी संभागों के संयुक्त निदेशक तथा जिला स्तर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों से मौसमी बीमारियों की स्थिति की जानकारी ली और रोकथाम एवं नियंत्रण के संबंध में दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में मौसमी बीमारियों के केस ज्यादा हैं, वहां स्थिति नियंत्रण मंे आने तक संबंधित संयुक्त निदेशक का मुख्यालय उसी जिले में रहेगा। संबंधित संयुक्त निदेशक इन जिलों में प्रभावी माॅनिटरिंग करने के साथ ही सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बैठक में निर्देश दिए कि अधिकारी मौसमी बीमारियों के उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तक पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित करें, ताकि जिला अस्पतालों में मरीजों का दबाव कम हो और अस्पतालों में बैड की कमी नहीं रहे। पर्याप्त मात्रा में जांच किट एवं दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि मलेरिया, डेंगू सहित अन्य मौसमी बीमारियों के पॉजिटिव केस पाए जाने पर संबंधित क्षेत्र में निर्धारित प्रोटोकॉल अनुसार सभी गतिविधियां सुनिश्चित की जाएं। वार्डवार पायरेथ्रम स्प्रे का छिड़काव एवं

फोगिंग नियमित रूप से करवाई जाए।
श्रीमती सिंह ने कहा कि मौसमी बीमारियों से मृत्यु संबंधी मामलों का गहन अध्ययन किया जाए और बचाव एवं उपचार के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करें। श्रीमती सिंह ने मौसमी बीमारियों से बचाव एवं रोकथाम हेतु एडवाइजरी जारी करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि आमजन में मौसमी बीमारियों से बचाव संबंधी जन-चेतना जागृत करने के लिए आवश्यक प्रचार-प्रसार एवं जागरूकता गतिविधियां बढ़ाई जाएं। इन गतिविधियों में आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों की पूर्ण पालना सुनिश्चित की जाए।