Rajasthan News: स्ट्रीट लाइट से रोशन होंगे गांव -पंचायती राज मंत्री

पंचायती राज मंत्री  मदन दिलावर ने गुरुवार को विधान सभा में कहा कि हमारी सरकार गांवों को सशक्त बनाने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने पंचायती राज विभाग की अनुदान मांगों पर हुई चर्चा के बाद जवाब देते हुए ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए कई घोषणाएं की। उन्होंने कहा कि अब ग्रामीण आबादी क्षेत्र में स्थापित मंदिरों के नाम पट्टे जारी किए जाएंगे। ड्रोन सर्वे के आधार पर क्रियान्वित की जा रही है। इससे उनमें पानी, बिजली कनेक्शन सहित अवाप्त भूमि होने की परेशानियों से समाधान मिलेगा। उन्होंने बताया कि स्वामित्व योजना के तहत 13 लाख लोगों को पट्टे वितरित किए जा चुके हैं।

पंचायती राज मंत्री गुरुवार को विधान सभा में पंचायती राज विभाग की (मांग संख्या-52) अनुदान मांग पर हुई बहस का जवाब दे रहे थे। चर्चा के बाद सदन ने पंचायती राज विभाग की 129 अरब 17 करोड़ 53 लाख 25 हजार रुपए की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दीं। श्री दिलावर ने कहा कि पंचायती राज के सभी कार्यालयों में प्रतिदिन सुबह राष्ट्रगीत और कार्यालय समय समाप्त होने पर राष्ट्रगान गाया जाएगा। श्री दिलावर ने कहा कि प्रदेश के सभी गांवों को चरणबद्ध रूप से स्ट्रीट लाइट से रोशन किया जाएगा। उन्होंने गांवों की परिसम्पत्तियों को सूचीबद्ध कराकर ऑनलाइन कराने, अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाने के लिए घोषणा की। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण करने वाले स्वयं हट जाए, नहीं तो राज्य सरकार बाजार मूल्य से कीमत वसूलकर अतिक्रमण हटाएगी। इसके लिए नियम बनाए जाएंगे। गांवों के तालाब क्षेत्र में योजना बनाकर अतिक्रमण हटाते हुए सफाई कराएंगे। ग्रामीण विकास की सभी योजनाओं और निर्माण कार्यों की सूचना पोर्टल पर अपलोड की जा रही है, जिससे पारदर्शिता आएगी। उन्होंने कहा कि कार्यों में गुणवत्ता कम आने पर संबंधितों से राशि वसूल करेंगे। गुणवत्ता के लिए पंचायत समितियों में जांच लैब क्रियाशील की जा रही हैं। उन्होंने सदन के जरिए अधिकारियों को पंचायतों में होने वाली बैठकों के बाद रजिस्टर में लिखे जाने वाले कार्यवाही विवरण का निष्कर्ष भी लिखे जाने के निर्देश दिए।

जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतें पोर्टल पर होगी अपलोड-

श्री दिलावर ने पंचायतों में नियमित जनसुनवाई करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि प्राप्त शिकायतों को पोर्टल पर अपलोड करें, ताकि समयबद्ध निस्तारण हो सके। इसके लिए हर स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टर की तरह जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी जनसुनवाई करेंगे। गांवों के विकास में बेहतर प्रदर्शन करने, नशा मुक्त और अपराध मुक्त गांव बनाने के लिए ग्राम पंचायतों को सम्मानित किया जाएगा।

ग्रामीण आबादी क्षेत्र में होगा विस्तार-

श्री दिलावर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी बढ़ती जा रही है। इसके लिए योजना बनाकर आबादी क्षेत्र का विस्तार करते हुए नियमानुसार पट्टे दिए जाने संबंधित घोषणा की। उन्होंने ग्राम सेवा शिविरों में प्राप्त आवेदनों का अभियान चलाकर समयबद्ध निस्तारण के लिए निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कई ग्राम पंचायत और पंचायत समितियों में बैठक बुलाकर स्थगित कर दी जाती है। अब प्रधान और सरपंच की अनुपस्थिति में उप प्रधान या वरिष्ठ सदस्य अध्यक्षता करते हुए बैठक तय समय पर ही आयोजित करेंगे।

भारत निर्मित वस्तुओं का ही इस्तेमाल अनिवार्य-

पंचायती राज मंत्री ने अपने विभागीय कार्यालयों में भारत निर्मित वस्तुओं के इस्तेमाल ही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विदेशी वस्तुएं मिलने पर संबंधित अधिकारी से वसूली करेंगे। अतिआवश्यक होने पर ही बाहर की वस्तुओं में छूट रहेगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने घुमन्तुओं को 20 हजार भूखंड दिए हैं, उनकी रजिस्ट्री हुई है या नहीं साथ ही उन्होंने घर बनाया है या नहीं, इसकी भी सुनिश्चिता की जाएगी।

गांवों में भी कचरा लेने आएंगे वाहन-

श्री दिलावर ने कहा कि गांवों में स्वच्छता के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। इसके लिए अब शहरों की तरह गांवों में वाहनों से घर-घर कचरा एकत्रित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि देश में पहली बार राजस्थान में बीएसआर दर पर ऐसे कार्य कराए जाएंगे। श्री दिलावर ने कहा कि अब 2 लाख रुपए तक का पट्टा नीलामी के जरिए ग्राम पंचायत दे सकेगी। साथ ही, 5 लाख रुपए तक के मामलों में पंचायत समिति, 10 लाख रुपए तक के लिए जिला परिषद, 15 लाख रुपए तक के लिए संभागीय आयुक्त और 15 लाख से अधिक के मामलों में राज्य सरकार का अनुमोदन आवश्यक होगा। उन्होंने इस संबंध में घोषणा की।

jaipur News: अवैध रिफिलिंग के विरुद्ध विशेष अभियान में 111 सिलेंडर जब्त

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खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के आदेशानुसार घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के व्यवसायिक उपयोग, अवैध रिफिलिंग, अवैध भंडारण व कालाबाजारी जैसी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने और मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना एवं एलपीजी आपूर्ति प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जयपुर जिले में विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है।
विभागीय निर्देशों की अनुपालना में जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के निर्देशन में जिला रसद अधिकारी जयपुर प्रथम प्रियव्रत सिंह चारण द्वारा जयपुर शहर में कार्रवाई हेतु तीन जांच दलों का गठन किया गया। गठित सतर्कता दलों द्वारा अलग-अलग समय पर विभिन्न क्षेत्रों में सघन निरीक्षण और दबिश की कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान कुल 111 घरेलू व व्यवसायिक गैस सिलेंडर, एक पिकअप वाहन, एक रिफिलिंग मोटर मय रबर पाइप व नोजल, एक इलेक्ट्रॉनिक कांटा, 28 रेगुलेटर, एक मोबाइल एवं एक डायरी जब्त की गई। संबंधित प्रकरणों में नियमानुसार अग्रिम कानूनी कार्यवाही की जा रही है।
सतर्कता दल “ए” ने सेक्टर-28, प्रताप नगर स्थित कृष्णा अपार्टमेंट के पीछे झुग्गी-झोपड़ियों के पास दबिश दी, जहां अवैध क्रय-विक्रय एवं भंडारण की पुष्टि होने पर 67 घरेलू एवं व्यवसायिक गैस सिलेंडर, एक पिकअप वाहन, एक मोबाइल एवं एक डायरी जब्त की गई। इसके अतिरिक्त झोटवाड़ा क्षेत्र में विभिन्न व्यवसायिक प्रतिष्ठानों, होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, मिठाई दुकान व फैक्ट्री पर की गई कार्रवाई में 4 प्रतिष्ठानों से 11 घरेलू गैस सिलेंडर और 4 रेगुलेटर मय रबर पाइप जब्त किए गए। सतर्कता दल “बी” द्वारा आमेर कुंडा, सांगानेर एवं मालवीय नगर क्षेत्र में दबिश दी गई, जहां 8 व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से 19 घरेलू गैस सिलेंडर व 18 रेगुलेटर मय रबर पाइप जब्त किए गए।
सतर्कता दल “सी” ने महसो का मोहल्ला, आमेर में अवैध गैस रिफिलिंग करते हुए 4 घरेलू सिलेंडर, एक इलेक्ट्रिक मोटर, एक रिफिलिंग पाइप, एक इलेक्ट्रॉनिक कांटा मय नोजल तथा अन्य उपकरण जब्त किए। इस प्रकरण में संलिप्त एक व्यक्ति के विरुद्ध संबंधित पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवाई गई। साथ ही चांदपोल क्षेत्र में 6 व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करते हुए 10 घरेलू गैस सिलेंडर एवं 6 रेगुलेटर मय रबर पाइप जब्त किए गए।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अभियान अवधि में इस प्रकार की सघन जांच एवं प्रवर्तन कार्यवाही निरंतर जारी रहेगी तथा घरेलू एलपीजी के दुरुपयोग एवं अवैध गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

jaipur News: शासन सचिवालय में होली मेला का भव्य शुभारंभ

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महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के विपणन व ब्रांडिंग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में आयोजित “राजीविका रंगोत्सव” का सचिवालय परिसर में भव्य शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने महिला स्वयं सहायता समूहों की सराहना करते हुए कहा कि राजीविका द्वारा आयोजित ऐसे विपणन मंच महिला उद्यमिता को नई दिशा प्रदान करते हैं तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं अतिरिक्त मुख्य सचिव ने महिला समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को गुणवत्ता, नवाचार और पारंपरिक कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
राजीविका रंगोत्सव शासन सचिवालय में 25 से 27 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें राजस्थान के 13 जिलों से 15 स्वयं सहायता समूह भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम में कुल 10 स्टॉल लगाए गए हैं। इन स्टॉल पर हर्बल गुलाल, पारंपरिक खाद्य सामग्री, गुजिया, ठंडाई उत्पाद, हर्बल उत्पाद, उपहार व सजावटी सामग्री, सॉफ्ट टॉयज, लकड़ी व क्रोशिया उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया जा रहा है। होली के अवसर को ध्यान में रखते हुए इको-फ्रेंडली एवं हर्बल उत्पादों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। राजीविका रंगोत्सव का उद्देश्य महिला समूहों द्वारा चलाए जा रहे उद्यमों को बाजार में पहचान दिलाना, “राजसखी” ब्रांड को मजबूत करना और राज्य में महिलाओं की आजीविका को बढ़ावा देना है। यह आयोजन बिक्री बढ़ाने और स्वयं सहायता समूहों को बेहतर बाजार मंच उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

Jaipur News: रसोई गैस उपभोक्ताओं पर ‘जबरन खरीदारी’ का बोझ, इंडियन ऑयल की एजेंसियों के खिलाफ आक्रोश

राजस्थान की राजधानी में घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं और गैस एजेंसियों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। इंडियन ऑयल के हजारों उपभोक्ताओं ने गैस एजेंसियों पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। मामला रसोई गैस रिफिल के साथ सुरक्षा पाइप और अन्य एक्सेसरीज खरीदने के लिए दबाव बनाने का है, जिसे लेकर उपभोक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। रिफिल चाहिए तो पाइप खरीदना होगा: एजेंसियों का नया फरमान— उपभोक्ताओं का आरोप है कि जब वे सिलेंडर बुक कराते हैं, तो डिलीवरी के समय उन्हें गैस पाइप या अन्य सामान खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि कई गैस एजेंसियां नियमित आपूर्ति को जानबूझकर बाधित कर रही हैं। यदि कोई उपभोक्ता नया पाइप या अतिरिक्त सामग्री लेने से मना करता है, तो उसे रिफिल देने में हफ्तों का इंतजार कराया जाता है या डिलीवरी मैन द्वारा अभद्र व्यवहार किया जाता है। उपभोक्ताओं का कहना है, “रसोई गैस एक आवश्यक वस्तु है। इसे किसी अन्य उत्पाद की बिक्री से जोड़ना न केवल अनैतिक है, बल्कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का खुला उल्लंघन भी है।” प्रशासनिक दखल की मांग: रसद विभाग को सौंपा ज्ञापन— विवाद बढ़ता देख प्रतिनिधिमंडल ने जिला रसद अधिकारी प्रथम, प्रियवर्त सिंह चारण को ज्ञापन भेजकर हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उपभोक्ताओं की प्रमुख मांगें निम्न हैं: अनिवार्यता खत्म हो: रिफिल की आपूर्ति को बिना किसी शर्त के बहाल किया जाए। सूचना पट्ट: प्रत्येक गैस एजेंसी के बाहर बड़े अक्षरों में यह बोर्ड लगाया जाए कि “रिफिल या नए कनेक्शन के साथ पाइप या अन्य सामान खरीदना अनिवार्य नहीं है।” पारदर्शिता: उपभोक्ता की लिखित सहमति के बिना किसी भी अतिरिक्त वस्तु की बिलिंग न की जाए। जांच दल का गठन: उन एजेंसियों को चिह्नित किया जाए जो स्टॉक होने के बावजूद आपूर्ति रोक रही हैं। क्या कहते हैं नियम?- तेल कंपनियों के नियमों के अनुसार, गैस सिलेंडर की डिलीवरी के लिए सुरक्षा जांच जरूरी है, लेकिन उपभोक्ता पर यह दबाव नहीं बनाया जा सकता कि वह सुरक्षा पाइप या चूल्हा एजेंसी से ही खरीदे। यदि उपभोक्ता के पास पहले से BIS मानक का पाइप मौजूद है, तो एजेंसी उसे नया खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। कार्रवाई नहीं हुई तो होगा आंदोलन— उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जिला रसद विभाग ने अगले कुछ दिनों में इन “अनुचित व्यापार व्यवहार” पर रोक नहीं लगाई, तो वे उपभोक्ता न्यायालय और पेट्रोलियम मंत्रालय के पोर्टल पर सामूहिक शिकायत दर्ज कराएंगे। इस मामले में अभी तक गैस एजेंसी संचालकों का पक्ष सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय निवासियों में व्याप्त आक्रोश को देखते हुए जिला प्रशासन जल्द ही गाइडलाइंस जारी कर सकता है। यदि आप भी ऐसी किसी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो PMEGP Portal या इंडियन ऑयल की आधिकारिक हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

Rajastha News: प्रदेश में सरकार के सख्त निर्देश सड़क से 75 मीटर जगह छोड़ करें निर्माण

राजस्थान में रोड किनारे प्लॉट खरीदने और निर्माण करने को लेकर प्रदेश सरकार और उच्च न्यायालय ने वर्ष 2026 में बेहद सख्त रुख अपनाया है। हाईवे पर बढ़ते हादसों और अतिक्रमण को रोकने के लिए सरकार ने निर्माण की दूरियों को लेकर नए दिशा-निर्देश और चेतावनी जारी की है। यदि आप भी हाईवे या ग्रामीण सड़कों के किनारे जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इन नियमों को अनदेखा करना आपके निवेश को भारी नुकसान पहुँचा सकता है। हाईवे और सड़कों से सुरक्षित दूरी के नए मानक— राजस्थान सरकार और सार्वजनिक निर्माण विभाग के ताजा निर्देशों के अनुसार, सड़क के प्रकार के आधार पर निर्माण की न्यूनतम दूरी तय की गई है: नेशनल हाईवे: राष्ट्रीय राजमार्ग के केंद्र से दोनों तरफ 75 मीटर (लगभग 246 फीट) के दायरे में किसी भी प्रकार का आवासीय या व्यावसायिक निर्माण अवैध माना जाएगा। हाल ही में उच्च न्यायालय के आदेश के बाद इस दायरे में आने वाले होटल, ढाबे और दुकानों को हटाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। स्टेट हाईवे: राज्य राजमार्गों के लिए भी सड़क के मध्य से 40 मीटर से लेकर 75 मीटर तक की दूरी बनाए रखना अनिवार्य है। व्यावसायिक भवनों के लिए यह नियम और भी कड़ा है। ग्रामीण सड़कें: ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क के केंद्र से लगभग 15.5 मीटर (50 फीट) की दूरी छोड़कर ही निर्माण की सलाह दी जाती है। इससे कम दूरी पर किया गया निर्माण भविष्य में सड़क चौड़ीकरण के समय बिना मुआवजे के ढहाया जा सकता है। प्लॉट खरीदते समय रखें ये सावधानियां— ग्रीन बफर ज़ोन की जांच: मास्टर प्लान के तहत हाईवे के किनारे अक्सर ‘ग्रीन बफर ज़ोन’ छोड़ा जाता है। यहाँ हरियाली के अलावा किसी भी पक्के निर्माण की अनुमति नहीं होती। NHAI की एनओसी: हाईवे के किनारे पेट्रोल पंप, होटल या कोई भी व्यावसायिक गतिविधि शुरू करने के लिए अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से मंजूरी लेना अनिवार्य है। मास्टर प्लान और ज़ोनिंग: जमीन खरीदने से पहले शहर का मास्टर डेवलपमेंट प्लान-2025/2026 जरूर देखें। यह सुनिश्चित करें कि आपका प्लॉट ‘येलो ज़ोन’ (आवासीय) या ‘कमर्शियल ज़ोन’ में आता है या नहीं। शपथ पत्र और मुआवजा: कुछ मामलों में सड़क सीमा से 5-7.5 मीटर के बीच निर्माण के लिए NHAI को यह शपथ पत्र देना होता है कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर आप बिना मुआवजे के निर्माण हटाने को तैयार हैं। अवैध निर्माण पर सरकार का ‘पीला पंजा’— फरवरी 2026 में जारी रिपोर्टों के अनुसार, राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेश के हाईवे किनारे बसे 2200 से अधिक अवैध निर्माणों को चिह्नित किया है। उच्च न्यायालय के सख्त निर्देश हैं कि सड़क सुरक्षा और सुगम यातायात के लिए इन अतिक्रमणों को तुरंत हटाया जाए। सस्ता प्लॉट देखकर हाईवे के बिल्कुल पास जमीन न खरीदें। भविष्य की सुरक्षा के लिए हमेशा सड़क के केंद्र से निर्धारित दूरी (75 मीटर) का पालन करें और स्थानीय विकास प्राधिकरण से नक्शा व ज़ोनिंग की पुष्टि अवश्य करें।

Badmer News;  बाड़मेर में शिक्षक की शर्मनाक करतूत, 5 महिला अध्यापिकाओं को धमकाने पर हुआ सस्पेंड

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बाड़मेर में कुदरत और सिस्टम दोनों के तेवर कड़े नजर आ रहे हैं। एक तरफ फरवरी माह में ही सूर्यदेव ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है, जहां मंगलवार को अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री दर्ज कर पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। वहीं दूसरी ओर, शिक्षा के मंदिर को कलंकित करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। जिला शिक्षा अधिकारी ने एक सरकारी स्कूल के शिक्षक को पांच महिला सहकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार और गंभीर धमकियां देने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। अश्लील संदेश और दुष्कर्म की धमकी— मामला तब गरमाया जब स्कूल में पदस्थापित पांच महिला शिक्षकों ने हिम्मत जुटाकर जिला कलक्टर से मुलाकात की और लिखित शिकायत सौंपी। पीड़ित शिक्षिकाओं का आरोप है कि उक्त शिक्षक लंबे समय से उन्हें मोबाइल फोन पर अश्लील और आपत्तिजनक संदेश भेजकर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। हद तो तब हो गई जब एक महिला शिक्षिका को भेजे गए संदेश में आरोपी ने उसे घर से उठाकर दुष्कर्म करने और जान से मारने की सीधी धमकी दे डाली। भय के साये में महिला शिक्षिकाएं— शिकायत के अनुसार, आरोपी शिक्षक केवल संदेशों तक ही सीमित नहीं था, बल्कि वह देर रात फोन कॉल कर महिला सहकर्मियों को परेशान करता था। इस लगातार जारी उत्पीड़न से स्कूल के स्टाफ में भारी भय और असुरक्षा का माहौल व्याप्त हो गया था। शिक्षिकाओं ने प्रशासन को बताया कि ऐसी स्थिति में उनके लिए स्कूल आकर अपनी सेवाएं देना दूभर हो गया है। प्रशासन की सख्त कार्रवाई— मामले की संवेदनशीलता और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लिया। जिला शिक्षा अधिकारी ने निलंबन आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रकार का आचरण कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिक्षक को सस्पेंड करने के साथ ही पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां एक ओर भीषण गर्मी से लोग बेहाल हैं, वहीं शिक्षक की इस “मानसिक विकृति” ने समाज को झकझोर कर रख दिया है।

C M NEWS: वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान का द्वितीय चरण 25 मई से -मुख्यमंत्री

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केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने जल संचय जन भागीदारी अभियान 2.0 के अंतर्गत बारिश के पानी की पर्याप्त रिचार्ज कैपेसिटी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है। उन्होंने राजस्थान के सभी जिलों और शहरी स्थानीय निकायों से पानी बचाने के कामों को अधिक से अधिक प्राथमिकता देते हुए जन भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान भी किया। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री मंगलवार को नई दिल्ली से जल संचय-जन भागीदारी-2.0 की प्रगति पर आयोजित वर्चुअल बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेश में अभियान के अन्तर्गत किए जा रहे कार्यो की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। श्री पाटिल ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में जल संरक्षण की दिशा में की गई पहलों की सराहना करते हुए कहा कि डूंगरपुर जिले में जन सहभागिता के माध्यम से नदी का जल संरक्षण अनुकरणीय पहल है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा किशनगढ़ एयरपोर्ट से वर्चुअली बैठक में जुड़े। उन्होंने जल संचय जन भागीदारी अभियान 2.0 में शहरी निकायों, पंचायती राज संस्थाओं, सिविल सोसाइटीज और आम जन की सक्रिय भागीदारी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि अभियान के अर्न्तगत रेनवॉटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर्स के निर्माण और मरम्मत कार्यों को अपेक्षित गति प्रदान करते हुए सभी जिले निर्धारित समय में लक्ष्यों की प्राप्ति करें।
जल संचय जन भागीदारी अभियान बना जन-आंदोलन —
श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में जल संरक्षण के महत्वपूर्ण उद्देश्य के क्रम में प्रारंभ किया गया जल संचय जन भागीदारी अभियान एक जन-आंदोलन बन चुका है। इस अभियान से वर्षा के एक-एक बूंद जल को सहेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान ने अभियान में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की। अभियान के प्रथम चरण (1.0) में हमारा प्रदेश तृतीय स्थान पर रहा। बाड़मेर एवं भीलवाड़ा जिलों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिन्हें केंद्र सरकार ने सराहा और पुरस्कृत भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी की महत्ता को राजस्थान से बेहतर कोई भी नहीं समझ सकता है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने जल संरक्षण और जल संचयन की दिशा में कर्मभूमि से मातृभूमि और वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान जैसी पहल कर प्रदेशभर में भूजल स्तर में सुधार लाने के साथ ही पारम्परिक जल स्त्रोतों को नया जीवन देने का प्रयास किया है। इन अभियानों के माध्यम से प्रदेशभर में जनचेतना आई है, जिसके आगामी समय में सुखद परिणाम सामने आयेंगे। श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के द्वितीय चरण की शुरूआत गंगा दशहरा (25 मई) को शुरू करने जा रही है। जो 5 जून को पर्यावरण दिवस तक संचालित होगा।

Rajasthan News: “डिजिटल इंडिया में 15 साल पीछे विभाग: मुख्य सचिव की बैठक में हेल्पलाइन पर जोर, लेकिन धूल फांक रही विभागीय वेबसाइट”

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राजस्थान में सुशासन और ‘डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन’ के बड़े-बड़े दावों के बीच सोमवार को शासन सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक ने प्रशासनिक तंत्र की गंभीर उदासीनता को उजागर कर दिया है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में उपभोक्ता मामले और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा तो की गई, लेकिन जो सबसे बड़ी खामी थी, उस पर मुख्य सचिव की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। डिजिटल राजस्थान का ‘पाषाण युग’: 15 साल पुरानी वेबसाइट— हैरानी की बात यह है कि एक ओर सरकार ‘विकसित राजस्थान 2047’ का रोडमैप तैयार कर रही है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ता मामले विभाग की आधिकारिक वेबसाइट आज भी 15 साल पुरानी जानकारी के भरोसे चल रही है। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने हेल्पलाइन को प्रभावी और जवाबदेह बनाने के निर्देश तो दिए, लेकिन विभाग के इस “डिजिटल चेहरे” को अपडेट करने की जहमत नहीं उठाई। जब विभाग का ऑनलाइन पोर्टल ही अप्रासंगिक और पुराना हो, तो आम उपभोक्ता आधुनिक युग में सही मार्गदर्शन की उम्मीद कैसे कर सकता है? निर्देशों की औपचारिकता, धरातल पर विफलता— मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि हेल्पलाइन को ‘संवेदनशील’ बनाया जाए ताकि त्वरित सहायता प्राप्त हो सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बिना तकनीकी सुधार और अपडेटेड डेटा के, हेल्पलाइन केवल एक “कॉल सेंटर” बनकर रह जाएगी, जहाँ से उपभोक्ताओं को पुरानी और गलत जानकारी ही मिलेगी। समीक्षा बैठक में केवल हेल्पलाइन की मॉनिटरिंग पर जोर देना, समस्या की जड़—यानी विभाग के पुराने पड़ चुके डिजिटल ढांचे—को नजरअंदाज करने जैसा है। मुख्य सचिव की जवाबदेही पर सवाल— वी. श्रीनिवास, जो खुद केंद्र में प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग के सचिव रह चुके हैं, उनसे यह अपेक्षा थी कि वे विभाग की डिजिटल कमियों पर कड़ा प्रहार करेंगे। लेकिन वेबसाइट के नवीनीकरण के निर्देशों का अभाव यह दर्शाता है कि सचिवालय में होने वाली ये समीक्षा बैठकें अब केवल एक औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह गई हैं। अधिकारियों द्वारा पुरानी योजनाओं और आंकड़ों का प्रजेंटेशन देकर मुख्य सचिव को “सब ठीक है” का भ्रम परोसा गया, और बिना गहन पड़ताल के उसे स्वीकार कर लिया गया। यदि प्रदेश का सबसे बड़ा प्रशासनिक अधिकारी ही विभाग की इतनी बड़ी लापरवाही को अनदेखा कर दे, तो आम जनता का सिस्टम से भरोसा उठना लाजमी है। हेल्पलाइन को सुदृढ़ करने के खोखले वादे तब तक सार्थक नहीं होंगे, जब तक उपभोक्ताओं को डिजिटल माध्यमों पर सटीक और नवीनतम जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती। विभाग की वेबसाइट का अपडेट न होना सीधे तौर पर उपभोक्ता अधिकारों का हनन है, जिसके लिए शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी ही सबसे अधिक जिम्मेदार है।

Rajasthan News:आरएएस भर्ती-2024 साक्षात्कार का सातवां चरण 5 मार्च से 

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राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के साक्षात्कारों का विस्तृत कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। इसके अनुसार, राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवाएं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा-2024 के सातवें चरण के इंटरव्यू 5 मार्च से शुरू होकर 13 मार्च 2026 तक चलेंगे। इस भर्ती के साक्षात्कार में उपस्थित होने वाले समस्त अभ्यर्थियों को ऑनलाइन भरे गए विस्तृत आवेदन पत्र डाउनलोड कर साक्षात्कार के समय दो प्रतियों में मय समस्त प्रमाण-पत्रों की फोटो प्रति एवं समस्त मूल प्रमाण-पत्रों सहित प्रस्तुत करना होगा।
सहायक आचार्य पदों का साक्षात्कार कार्यक्रम —
इसके अलावा, सहायक आचार्य (कॉलेज शिक्षा विभाग) भर्ती-2023 अन्तर्गत सहायक आचार्य-केमिस्ट्री, इकोनॉमिक्स विषय के द्वितीय चरण के साक्षात्कार का आयोजन 5 से 13 मार्च 2026 तक किया जाएगा और 9 से 13 मार्च 2026 तक सहायक आचार्य-हिस्ट्री विषय के द्वितीय चरण के साक्षात्कार आयोजित किए जाएंगे। उक्त सभी पदों हेतु साक्षात्कार में उपस्थित होने वाले ऐसे अभ्यर्थी, जिन्हाने पूर्व में अपना विस्तृत आवेदन-पत्र आयोग को प्रस्तुत नहीं किया है, वे विस्तृत आवेदन-पत्र आयोग की वेबसाइट से डाउनलोड कर साक्षात्कार के समय दो प्रतियों में समस्त प्रमाण-पत्रों की फोटो प्रतियों के साथ अनिवार्य रूप से लाएं।
अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश—
साक्षात्कार के समय अभ्यर्थियों को स्वयं का नवीनतम पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो, नवीनतम स्पष्ट फोटोयुक्त मूल पहचान-पत्र एवं समस्त मूल प्रमाण-पत्र मय फोटो प्रति साथ लाना अनिवार्य होगा। इन दस्तावेजों के अभाव में साक्षात्कार से वंचित कर दिया जाएगा। अभ्यर्थियों के साक्षात्कार पत्र यथासमय वेबसाइट पर अपलोड कर दिए जाएंगे।

Rajasthan News:साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं पर रोकथाम के लिए प्रभावी निगरानी एवं उत्तरदायित्व तंत्र स्थापित हो -मुख्य सचिव

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मुख्य सचिव  वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में सोमवार को 168वीं राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की समीक्षा बैठक आयोजित हुई । बैठक में राज्य की बैंकिंग प्रगति, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण वितरण, विभिन्न सरकारी प्रायोजित योजनाओं की प्रगति, जिला स्तरीय ऋण प्रवाह की स्थिति तथा साइबर सुरक्षा तंत्र की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कृषि एवं एमएसएमई क्षेत्रों में संतोषजनक उपलब्धियों की सराहना करते हुए स्वरोजगार योजनाओं में लंबित प्रकरणों, जिलों में असमान CD अनुपात तथा बढ़ती साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बैंकों द्वारा राज्य की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप ऋण प्रवाह सुनिश्चित करते हुए प्रभावी निगरानी एवं उत्तरदायित्व तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए।
उन्होंने निर्देश दिये कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित साइबर सुरक्षा मानकों एवं प्रोटोकॉल का कठोर अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। संदिग्ध खातों की तत्काल पहचान एवं फ्रीजिंग, रियल-टाइम मॉनिटरिंग तथा डिजिटल सुरक्षा के संबंध में चलाये जा रहे। जन-जागरूकता अभियानों को प्राथमिकता दी जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार एवं बैंकों के मध्य सतत समन्वय, पारदर्शी और अनुशासित निगरानी तथा रणनीतिक ऋण वितरण के सहयोग से समावेशी विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति संभव होगी और ‘विकसित राजस्थान@2047’ के संकल्प को साकार किया जा सकेगा।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिये कि राज्य के सभी जिलों, विशेषकर नवीन व कम प्रदर्शन वाले जिलों के CD अनुपात की समग्र समीक्षा कर समयबद्ध सुधारात्मक कार्ययोजना तैयार की जाए और उसकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। ‘विकसित राजस्थान@2047’ के लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु वर्ष 2030, 2035, 2040 एवं 2047 के लिए लघु, मध्यम एवं दीर्घकालिक संरचित ऋण योजनाएँ तैयार कर आगामी बैठकों में प्रस्तुत की जाए। उन्होंने PM Vishwakarma, PMFME  ( प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना) PM Surya Ghar, NRLM (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन)  PM SVANidhi, MNSUPY तथा BRUPY के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों का अधिकतम 30 दिवस की अवधि में निस्तारण सुनिश्चित किये जाने के निर्देश देते हुए कहा कि 90 दिवस से अधिक लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता से निराकरण करते हुए संबंधित अधिकारियों/बैंकों की उत्तरदायित्व निर्धारित हो। बैठक में बताया गया कि दिसंबर 2025 की स्थिति के अनुसार राज्य में कुल 9,376 बैंक शाखाएँ संचालित हैं। राज्य में कुल जमा 8.05 लाख करोड़ रूपये और कुल ऋण वितरण 8.10 लाख करोड़ रूपये रहा, जिससे ऋण-जमा अनुपात (CD Ratio) 100.70 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है।