Rajasthan News: महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा

महाशिवरात्रि 2026: शिव कृपा पाने का महापर्व, जानें अभिषेक का महत्व और पूजा के शुभ मुहूर्त। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व शिव और शक्ति के मिलन के उत्सव के रूप में अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी, रविवार, 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन महादेव की विशेष आराधना करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। अभिषेक का महत्व: विभिन्न द्रव्यों से मिलता है अलग फल— शिव पुराण और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का विभिन्न पदार्थों से अभिषेक करने का विशेष विधान है। ज्योतिषाचार्य पंडित शिव लहरी शास्त्री के अनुसार, भक्त अपनी समस्याओं के निवारण हेतु निम्न द्रव्यों से शिव का अभिषेक कर सकते हैं: जल व गंगाजल: शुद्ध जल से अभिषेक करने पर रोगों से मुक्ति मिलती है, वहीं गंगाजल से अभिषेक मोक्ष प्रदायक माना गया है। दूध व घी: दूध में बूरा मिलाकर अभिषेक करने से बुद्धि प्रखर होती है। देसी घी से अभिषेक करने पर शारीरिक दुर्बलता और नपुंसकता समाप्त होती है। तेल व रस: शत्रु नाश के लिए सरसों के तेल से और घर में सुख-समृद्धि के लिए सुगंधित तेल से अभिषेक करना श्रेष्ठ है। आर्थिक तंगी दूर करने और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने का रस सबसे उत्तम माना गया है। पूजन सामग्री का विशेष फल— महादेव को अर्पित की जाने वाली सामग्री का भी अपना विशिष्ट महत्व है। अक्षत (चावल) चढ़ाने से धन लाभ होता है, तो तिल अर्पित करने से संचित पापों का नाश होता है। संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले जातकों को गेहूं से पूजन करना चाहिए। विशेष रूप से बिल्वपत्र का महत्व बताते हुए शास्त्री जी कहते हैं कि इसे अर्पित करने से तीन जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। बिल्व वृक्ष की सेवा मात्र से पितृ प्रसन्न होते हैं, लेकिन ध्यान रहे कि इस वृक्ष को काटना वंश की हानि का कारण बन सकता है। चार प्रहर की पूजा का समय— महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का विशेष विधान है। वर्ष 2026 के लिए पूजा के शुभ मुहूर्त इस प्रकार रहेंगे: प्रथम प्रहर: सायं 06:14 से रात्रि 09:27 तक। द्वितीय प्रहर: रात्रि 09:28 से मध्यरात्रि 12:41 तक। तृतीय प्रहर: मध्यरात्रि 12:42 से तड़के 03:54 तक। चतुर्थ प्रहर: मध्यरात्रि बाद 03:55 से अगले दिन प्रातः 07:07 तक। निशीथ काल: सर्वश्रेष्ठ पूजा का समय— महाशिवरात्रि की रात में निशीथ काल की पूजा को तंत्र और भक्ति मार्ग में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस वर्ष निशीथ काल का विशेष पूजन समय मध्यरात्रि 12:15 से 01:06 तक रहेगा। यह वह समय है जब ब्रह्मांडीय ऊर्जा अपने चरमोत्कर्ष पर होती है और शिव साधना तत्काल फलदायी सिद्ध होती है। यदि आप अपनी कुंडली के अनुसार विशेष ज्योतिषीय उपाय जानना चाहते हैं, तो विशेषज्ञ परामर्श के लिए पंडित से संपर्क कर सकते हैं।

C M NEWS: प्रदेश में खेजड़ी संरक्षण के लिए बनेगा नया कानून, बिश्नोई समाज ने मुख्यमंत्री का जताया आभार

0
प्रराजस्थान की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत के संरक्षण की दिशा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक युगांतकारी पहल की है। रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर प्रदेशभर से आए पर्यावरण प्रेमी संतों और बिश्नोई समाज के प्रबुद्धजनों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर राज्य विधानसभा में खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून लाने की घोषणा पर उनका आत्मीय अभिनंदन किया। 70 वर्षों का इंतजार खत्म: संतों ने सराहा निर्णय— मुकाम पीठाधीश्वर रामानन्द जी महाराज ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश में पिछले 70 वर्षों से इस तरह के ठोस कानून की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। उन्होंने मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा खेजड़ी (राजस्थान का राज्य वृक्ष) की रक्षा के लिए की गई यह पहल न केवल सराहनीय है, बल्कि पूरे समाज में हर्ष की लहर पैदा करने वाली है। संतों ने मुख्यमंत्री के इस निर्णय को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया। कथनी और करनी में समानता: महन्त स्वामी सच्चिदानंद— महन्त स्वामी सच्चिदानंद जी ने मुख्यमंत्री की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम साझा किया। उन्होंने बताया कि 27 अगस्त 2024 को मुख्यमंत्री ने पर्यावरण प्रेमियों के साथ संवाद कर खेजड़ी संरक्षण पर सुझाव मांगे थे। उस समय मुख्यमंत्री ने जो आश्वासन दिया था, उसे 5 फरवरी को विधानसभा में आधिकारिक घोषणा के रूप में पूरा कर अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया है। संतों की मंशा का सम्मान करते हुए कानून बनाने की इस घोषणा ने सरकार के प्रति विश्वास को और सुदृढ़ किया है। सरकार की प्रतिबद्धता: मुख्यमंत्री का संबोधन— मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार पर्यावरण और विशेषकर खेजड़ी के वृक्षों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “हमने संतों और प्रतिनिधियों के सुझावों को गंभीरता से लिया है। विधानसभा में की गई घोषणा इसी दिशा में एक बड़ा कदम है और संतों की भावना के अनुरूप ही कानून की प्रक्रिया पर तेजी से काम चल रहा है।” मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि खेजड़ी की कटाई को रोकने और इसके संवर्धन के लिए शीघ्र ही एक प्रभावी कानून धरातल पर लाया जाएगा। खेजड़ी: राजस्थान का जीवन आधार— गौरतलब है कि खेजड़ी राजस्थान की अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी का मुख्य स्तंभ है। बिश्नोई समाज ने सदियों से इसके संरक्षण के लिए बलिदान दिए हैं। नया कानून बनने से इस वृक्ष को कानूनी कवच प्राप्त होगा, जिससे अवैध कटाई पर रोक लगेगी और मरुस्थलीकरण को रोकने में मदद मिलेगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में बिश्नोई समाज के प्रतिनिधि और पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे, जिन्होंने मुख्यमंत्री को साफा पहनाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

Rajasthan News: खान एवं भूविज्ञान विभाग और RSMM ने सरकारी पेवेलियन श्रेणी में जीता प्रथम पुरस्कार

0
जयपुर के प्रदर्शनी और कन्वेंशन सेंटर (JECC) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पत्थर उद्योग प्रदर्शनी ‘इंडिया स्टोन मार्ट-2026’ का समापन समारोह उपलब्धियों भरा रहा। राजस्थान की समृद्ध खनिज संपदा को प्रदर्शित करने में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राजस्थान खान एवं भूविज्ञान विभाग और राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम (RSMM) को ‘सरकारी पेवेलियन श्रेणी’ में सर्वश्रेष्ठ चुना गया। राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष ने किया सम्मानित— समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और विशिष्ट अतिथि विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विभाग की इस उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने खान एवं भूविज्ञान विभाग और RSMM के प्रतिनिधियों को संयुक्त रूप से स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति पत्र प्रदान कर पुरस्कृत किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि राजस्थान की खनिज संपदा वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही है और इस तरह के प्रदर्शन नवाचारों को बढ़ावा देते हैं। प्रभावी प्रदर्शन और खनिज संपदा का चित्रण— प्रमुख शासन सचिव (माइंस एवं पेट्रोलियम) टी. रविकांत के कुशल निर्देशन में तैयार किए गए इस पेवेलियन में राजस्थान के प्रमुख और गौण खनिजों का विस्तृत प्रदर्शन किया गया। विभाग की ओर से नोडल अधिकारी संजय सक्सेना, RSMM के वरिष्ठ प्रबंधक असीम अग्रवाल और पीआरओ राजेंद्र शर्मा ने मंच पर यह सम्मान प्राप्त किया। पेवेलियन की मुख्य विशेषताएं— विभागीय पेवेलियन इस बार आगंतुकों और निवेशकों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। पेवेलियन में न केवल राजस्थान के प्रसिद्ध मार्बल, ग्रेनाइट और सैंडस्टोन को प्रदर्शित किया गया, बल्कि राज्य में उपलब्ध अन्य महत्वपूर्ण खनिज संपदा की जानकारी भी डिजिटल और भौतिक माध्यमों से दी गई। प्रदर्शनी के दौरान विशेषज्ञों ने आगंतुकों को राजस्थान की खनिज नीतियों, निवेश की संभावनाओं और खनन क्षेत्र में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों से अवगत कराया। खनिज क्षेत्र में खुशी की लहर— इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की घोषणा के साथ ही राजस्थान के खनिज सेक्टर और विभागीय कर्मचारियों में खुशी की लहर है। अधिकारियों का मानना है कि इस पुरस्कार से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान के पत्थरों और खनिजों की ब्रांडिंग मजबूत होगी। ‘इंडिया स्टोन मार्ट’ जैसे मंच पर विभाग का यह प्रदर्शन राज्य में भविष्य के औद्योगिक निवेश के लिए नए द्वार खोलने में सहायक सिद्ध होगा। प्रदर्शनी में देश-विदेश के पत्थर उद्यमियों ने हिस्सा लिया, जहां राजस्थान के माइंस विभाग ने अपनी तकनीकी क्षमता और विपुल भंडार का लोहा मनवाया।

C M NEWS: मुख्यमंत्री की बड़ी सौगात: अलवर को मिली 152 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की भेंट

0
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को अलवर जिले के रामगढ़ स्थित ग्राम बहाला में आयोजित ‘ग्राम उत्थान शिविर’ को संबोधित करते हुए प्रदेश के विकास और ग्रामीण सशक्तीकरण की दिशा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अलवर शहर के कायाकल्प के लिए 152 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास कर जिलेवासियों को बड़ी सौगात दी। अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंच रही सरकार— मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में ग्राम उत्थान शिविरों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य सरकार का मुख्य ध्येय किसान, श्रमिक, पशुपालक और समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा, “अब जनता को दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है, बल्कि सरकार स्वयं चलकर पात्र लाभार्थियों के पास पहुंच रही है।” प्रदेश के हर गिरदावर सर्किल पर इन शिविरों का आयोजन किया जा रहा है ताकि स्थानीय स्तर पर ही समस्याओं का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित हो सके। अलवर के बुनियादी ढांचे को मिली मजबूती— मुख्यमंत्री द्वारा दी गई 152 करोड़ रुपये की सौगातों में शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे से जुड़े विभिन्न कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं से अलवर शहर में नागरिक सुविधाओं का विस्तार होगा और स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ ऊर्जा आपूर्ति में भी सुधार आएगा। उन्होंने विश्वास दिलाया कि इन विकास कार्यों से अलवर की तस्वीर बदलेगी और स्थानीय युवाओं व नागरिकों के लिए बेहतर अवसर पैदा होंगे। आत्मनिर्भर और सशक्त गांवों का विजन— गांवों की महत्ता पर जोर देते हुए श्री शर्मा ने कहा कि ‘गांवों में ही देश की आत्मा बसती है’। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए बताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। स्वच्छ भारत अभियान: गांवों को खुले में शौच से मुक्ति मिली है। करोड़ों परिवारों को अपनी छत और पक्के मकान का सपना पूरा हुआ है। जल जीवन मिशन: हर घर तक नल से स्वच्छ जल पहुंचाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। शिविरों का लाभ उठाने का आह्वान— मुख्यमंत्री ने उपस्थित ग्रामीणों से अपील की कि वे ग्राम उत्थान शिविरों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। इन शिविरों में राजस्व, कृषि और सामाजिक न्याय विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन को निर्देशित किया कि कोई भी पात्र व्यक्ति योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। इस कार्यक्रम के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने मुख्यमंत्री का जोरदार स्वागत किया।

C M NEWS: सभी कार्मिक जनगणना कार्य को राष्ट्रीय कर्तव्य मानकर पूरी निष्ठा से संपन्न करें —मुख्यमंत्री

0
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सटीक जनगणना विकास योजनाओं का एक महत्वपूर्ण आधार है। जनगणना के समय संकलित आंकड़ों से ही केन्द्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का निर्धारण एवं क्रियान्वयन प्रभावशीलता के साथ संभव हो पाता है। इसलिए सभी कार्मिक जनगणना कार्य को राष्ट्रीय कर्तव्य मानकर पूरी निष्ठा से संपन्न करें। श्री शर्मा शनिवार को जनगणना-2027 पर वर्चुअली आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनगणना के पहले चरण अर्थात मकानों का सूचीकरण और मकानों की गणना का काम जितना सटीक होगा, व्यक्तियों की गणना का अगला चरण उतना ही त्रुटि रहित और सही होगा। उन्होंने कहा कि जनगणना हमारा संवैधानिक दायित्व है। इससे प्राप्त आंकड़े हमें विकास के स्तर और अपने लक्ष्यों तक पहुंचने की जरूरतों के बारे में बताते हैं। पुख्ता आंकड़ों से ही गांव-शहरों के व्यक्तियों और परिवारों की स्थिति, बिजली, पानी, सड़क, शौचालय, स्कूल, चिकित्सालय, घरेलू गैस कनेक्शन आदि की उपलब्धता और आवश्यकता के बारे में जानकारी मिलती है। आंकड़े सही नहीं होंगे तो ना तो योजनाएं अच्छे से बन पाएंगी और ना ही इनका क्रियान्वयन लक्ष्यों के अनुरूप हो पाएगा। श्री शर्मा ने कहा कि निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन भी जनगणना आंकड़ों के आधार पर होता है। राष्ट्रीय संसाधनों का यथोचित बंटवारा और आवश्यकतानुसार देय अनुदान एवं सहायता का वितरण भी इन्हीं आंकड़ों पर टिका है। उन्होंने कहा कि देश में पहली बार डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग करते हुए जनगणना कार्य किया जाएगा। साथ ही, मकान सूचीकरण संबंधी प्रथम चरण में दिनांक 1 मई से 15 मई 2026 तक समस्त नागरिकों को स्वगणना का विकल्प भी पहली बार उपलब्ध हो रहा है। इसलिए इससे जुड़ने वाले सभी कार्मिकों का बेहतर एवं गहन प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए, ताकि आंकड़ों का पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण संकलन किया जा सके। साथ ही, आमजन में भी व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए लोगों को इस कार्य में सक्रिय भागीदारी और सहयोग देने हेतु प्रेरित किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी अधिकारी इस राष्ट्रीय महत्व के काम में अच्छी तरह से निगरानी करें, नियमित समीक्षा बैठकें करें और अपनी टीमों को प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि राजस्थान में जनगणना के प्रथम चरण के अंतर्गत आगामी 1 मई से 15 मई तक स्वगणना के विकल्प का प्रयोग एवं 16 मई से 14 जून तक मकान सूचीकरण का कार्य किया जाएगा। राजस्थान की विषम भौगोलिक परिस्थितियों एवं गर्मी के मौसम को देखते हुए कार्मिकों के प्रति संवेदनशीलता रखी जाए। उन्होंने संतुलित कार्यभार सुनिश्चित करने के साथ ही कार्य की गुणवत्ता का भी विशेष ध्यान देने हेतु संभागीय आयुक्त, जिला कलक्टर्स एवं अन्य समस्त अधिकारियों को निर्देशित किया।

Rajasthan News: 1800 से अधिक चिकित्सा केंद्रों का औचक निरीक्षण, बेहतर सुविधाओं के लिए सरकार सख्त

0
राजस्थान सरकार प्रदेश के पशुपालकों की खुशहाली और पशुधन के संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। पशुपालन, गोपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत के मार्गदर्शन में राज्य में पशु चिकित्सा सेवाओं को आधुनिक और प्रभावी बनाने की मुहिम तेज कर दी गई है। इसी क्रम में, शासन सचिव (पशुपालन) डॉ. समित शर्मा के निर्देशों पर प्रदेश भर के पशु चिकित्सा संस्थानों का एक व्यापक और गहन निरीक्षण अभियान चलाया गया, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली को नई गति प्रदान की है। सेक्स सॉर्टेड सीमन योजना पर विशेष ध्यान— मंत्री जोराराम कुमावत प्रदेश में सेक्स सॉर्टेड सीमन (Sex Sorted Semen) तकनीक के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत गंभीर हैं। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य पशुपालकों की आय में वृद्धि करना और उन्नत नस्ल की बछड़ियों की संख्या बढ़ाना है। हालिया निरीक्षण का मुख्य केंद्र यह आकलन करना था कि धरातल पर इस योजना का क्रियान्वयन कितनी प्रभावी ढंग से हो रहा है। एक दिन में 1804 संस्थानों का निरीक्षण— शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने बताया कि इस अभियान के तहत प्रदेश के 41 जिलों में कुल 1804 पशु चिकित्सा संस्थानों की औचक जांच की गई। विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा किए गए इस निरीक्षण के परिणाम उत्साहजनक रहे: उपलब्धता: निरीक्षण के दौरान 99% से अधिक संस्थान खुले पाए गए, जबकि केवल 16 संस्थान बंद मिले। सेवा गुणवत्ता: 98% से अधिक केंद्रों पर स्वास्थ्य सेवाएं ‘बहुत अच्छी’ या ‘संतोषजनक’ श्रेणी में पाई गईं। मानक: केवल 23 संस्थानों में व्यवस्थाएं असंतोषजनक मिलीं, जिनके खिलाफ सख्त सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। जमीनी हकीकत का आकलन— अधिकारियों ने केवल हाजिरी ही नहीं जांची, बल्कि अस्पतालों में साफ-सफाई, मानव संसाधन की उपलब्धता, जांच सुविधाओं, दवाओं के स्टॉक और उपचार की गुणवत्ता का भी बारीकी से विश्लेषण किया। डॉ. शर्मा के अनुसार, इन निरीक्षणों से प्राप्त रिपोर्ट का गहन डेटा विश्लेषण किया जाएगा। जहाँ कमियां पाई गई हैं, वहां जवाबदेही तय की जाएगी और जहां व्यवस्थाएं बेहतर हैं, उन्हें मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। पशुपालकों के लिए नई उम्मीद— राज्य सरकार का लक्ष्य पशुपालन सेवाओं को इतना सुदृढ़ करना है कि पशुपालकों को अपने द्वार पर ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सहायता मिल सके। सेक्स सॉर्टेड सीमन जैसी योजनाओं की सफलता से न केवल दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि आवारा पशुओं की समस्या के समाधान में भी मदद मिलेगी। पशुपालन विभाग की यह सक्रियता दर्शाती है कि राजस्थान सरकार केवल कागजों पर योजनाएं नहीं बना रही, बल्कि उनकी वास्तविक स्थिति (Ground Reality) को सुधारने के लिए संकल्पित है। आने वाले दिनों में इन निरीक्षणों के आधार पर राज्य की पशु चिकित्सा सेवाओं में और अधिक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

Rajasthan News: कोटा में 3 मंजिला अवैध रेस्टोरेंट की इमारत ढहने से हाहाकार, 2 छात्रों की मौत, 10 घायल

0
शिक्षा नगरी कोटा के इंद्रविहार इलाके में शनिवार रात एक भीषण हादसा हो गया, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। ओपेरा अस्पताल रोड पर स्थित ‘देहली नॉनवेज स्पाइसी रेस्टोरेंट’ की तीन मंजिला इमारत रात करीब 9 बजे अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस हादसे में मलबे में दबने से दो छात्रों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 10 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। चीख-पुकार के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन— प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब रेस्टोरेंट में कई ग्राहक खाना खा रहे थे। अचानक एक जोरदार धमाका हुआ और देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। चारों ओर धूल का गुबार और मलबे में दबे लोगों की चीखें सुनाई देने लगीं। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत कार्य शुरू किया। देर रात तक मलबे को हटाकर घायलों को निकालने की मशक्कत जारी रही। मृतकों और घायलों का विवरण— हादसे में जान गंवाने वाले दोनों मृतक छात्र बताए जा रहे हैं। इनमें से एक की पहचान 20 वर्षीय अरण्य के रूप में हुई है, जो कोटा में रहकर जेईई (JEE) की तैयारी कर रहा था। वहीं, दूसरे मृतक की उम्र करीब 14-15 वर्ष है, जिसकी शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं। घायलों में सुजिता (40), शालीन (25), पूर्व (24), नावेव (20), जहांगीर (30), कला (25), पूरण मीणा, मो. साबिर, भूपेंद्र, रॉकी और डेनियल शामिल हैं। गंभीर रूप से घायल जहांगीर को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि अन्य का उपचार न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है। घायलों में अधिकांश की उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच है। हादसे की संभावित वजह: बगल में चल रही खुदाई— स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस इमारत से सटा हुआ एक अन्य नॉनवेज रेस्टोरेंट है, जिसे पिछले कुछ दिनों से गिराया जा रहा था। शनिवार को भी वहां जेसीबी मशीन से तोड़फोड़ की गई थी। आशंका जताई जा रही है कि इसी तोड़फोड़ के कारण रेस्टोरेंट वाली इमारत की नींव कमजोर हो गई और वह लोड सहन नहीं कर पाने के कारण गिर गई। प्रशासनिक लापरवाही और अवैध संचालन— हादसे के बाद प्रशासन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह रेस्टोरेंट बिना किसी सुरक्षा मानकों और नगर निगम की एनओसी (NOC) के अवैध रूप से संचालित हो रहा था। रिहायशी इलाके में इस तरह के व्यावसायिक और निर्माण कार्यों को लेकर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जाहिर की है। जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने वाले रेस्टोरेंट संचालक और अवैध निर्माण में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, प्राथमिकता मलबे को पूरी तरह साफ करने और अस्पताल में भर्ती घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने की है। इस हृदयविदारक घटना ने कोटा में रह रहे हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों में सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी है।

Jaipur News: राजस्थान आवासन मंडल की नाक के नीचे लुटती रही 70 करोड़ की ज़मीन—सरकारी मिलीभगत या तंत्र की नाकामी?

0
राजधानी के इंदिरा गांधी नगर में जो हुआ, वह केवल एक ‘अतिक्रमण’ नहीं, बल्कि राजस्थान आवासन मंडल के सुरक्षा तंत्र और सतर्कता के दावों की खुली पोल है। मंडल ने शुक्रवार को जिस 7000 वर्ग मीटर भूमि से अवैध निर्माण हटाया, वह कार्रवाई बहादुरी से ज्यादा विभाग की लापरवाही का स्मारक नजर आती है। दो महीने तक सोता रहा प्रशासन— हैरानी की बात यह है कि सेक्टर-1 जैसे महत्वपूर्ण इलाके में करीब 70 करोड़ रुपये की बेशकीमती व्यावसायिक जमीन पर भू-माफिया पिछले दो महीनों से नींव भर रहे थे, दीवारें खड़ी कर रहे थे, लेकिन मंडल के अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी जमीनों की रखवाली के लिए तैनात दस्ता दफ्तरों में बैठकर ‘सब चंगा है’ की रिपोर्ट बना रहा था? या फिर माफियाओं को विभाग के ही किसी ‘भीतरघाती’ का संरक्षण प्राप्त था? जनता के टैक्स की बर्बादी— जब पानी सिर से ऊपर गुजर गया, तब जेसीबी मशीनों का शोर सुनाई दिया। इस देरी की वजह से न केवल सरकारी संपत्ति का स्वरूप बिगड़ा, बल्कि अवैध निर्माण को ढहाने में लगने वाला भारी-भरकम खर्च भी अंततः जनता की जेब पर ही बोझ बनेगा। अगर मण्डल की नीयत और नजरें साफ होतीं, तो माफिया की पहली ईंट रखते ही उसे उखाड़ फेंका जाता। कागजी दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर— सचिव गोपाल सिंह का यह बयान कि “अतिक्रमण स्वीकार्य नहीं है,” सुनने में तो प्रभावी लगता है, लेकिन हकीकत यह है कि जब तक कार्रवाई का डंडा चला, तब तक माफियाओं ने सरकारी सिस्टम की धज्जियां उड़ा दी थीं। यह घटना विभाग के इंटेलिजेंस फेलियर का जीता-जागता सबूत है। निवेशकों में खौफ का माहौल— आवासन मंडल की इस सुस्ती ने उन आम नागरिकों और निवेशकों के मन में डर पैदा कर दिया है, जो मण्डल की योजनाओं पर भरोसा कर अपनी मेहनत की कमाई लगाते हैं। अगर 70 करोड़ की प्राइम लोकेशन वाली जमीन सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम आदमी के छोटे भूखंडों का क्या होगा? यह कार्रवाई केवल खानापूर्ति लगती है। असली कार्रवाई तो तब मानी जाएगी जब उन अधिकारियों पर गाज गिरेगी जिनकी नाक के नीचे दो महीने तक यह ‘अवैध साम्राज्य’ पनपता रहा।

Rajasthan News: राजस्व लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए ‘एक्शन मोड’ में माइंस विभाग

0
राजस्थान के खान व भूविज्ञान विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष के राजस्व लक्ष्यों को शत-प्रतिशत अर्जित करने के लिए अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। विभाग अब ‘ठोस रणनीति’ और ‘डिजिटल निगरानी’ के दोहरे फॉर्मूले पर फोकस कर रहा है। शुक्रवार को उदयपुर स्थित खनिज भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में खान, भूविज्ञान एवं पेट्रोलियम विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी. रविकान्त ने फील्ड अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वित्तीय वर्ष के अंतिम समय में राजस्व संग्रहण की गति को और तेज किया जाए। राजस्व वसूली में 11 फीसदी की बढ़ोतरी— बैठक के दौरान सामने आया कि विभाग सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में माइंस विभाग 11 फीसदी की विकास दर के साथ पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में अधिक राजस्व वसूल चुका है। इस गति को बरकरार रखने के लिए प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को बकाया वसूली और वर्तमान देयकों पर पैनी नजर रखने को कहा है। तकनीक से रुकेगी लीकेज— विभागीय कामकाज में पारदर्शिता लाने और राजस्व चोरी रोकने के लिए तकनीकी नवाचारों पर जोर दिया गया है। श्री रविकान्त ने कहा कि तुलाई कांटों (वेब्रिज) का कम्प्यूटराइज मोड्यूल और व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम (VTS) न केवल विभाग के लिए बल्कि लीजधारकों के लिए भी गेम-चेंजर साबित होंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि कम्प्यूटराइज मोड्यूल के परीक्षण और इंस्टालेशन के काम में तेजी लाई जाए। व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू कर अवैध परिवहन पर लगाम कसी जाएगी। अवैध खनन पर कड़ाई और बकाया वसूली के निर्देश— बैठक में अवैध खनन गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों की भी समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध खनन के मामलों में जब्त वाहनों और सामग्री पर जुर्माना राशि की वसूली तुरंत सुनिश्चित की जाए। आरसीसी-ईआरसीसी ठेकों पर रॉयल्टी वसूली की नियमित निगरानी हो और पुराने बकाया (Old Arrears) की वसूली के लिए विशेष प्रयास किए जाएं और वर्तमान बकाया की शत-प्रतिशत वसूली की जाए। एसएमई (SME) स्तर पर राजस्व संग्रहण का नियमित विश्लेषण और मार्गदर्शन किया जाए। विभागीय तालमेल और मॉनिटरिंग— निदेशक माइंस महावीर प्रसाद मीणा ने बैठक में विश्वास दिलाया कि राजस्व लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए विभागीय मॉनिटरिंग व्यवस्था को बेहद मजबूत किया गया है। वित्त अधिकारियों को उन कार्यालयों के साथ समन्वय करने के निर्देश दिए गए हैं जहाँ राजस्व संग्रहण तुलनात्मक रूप से कम है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य न केवल सरकारी खजाने को भरना है, बल्कि खनन क्षेत्र में सुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा देना भी है। बैठक में विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने फील्ड स्तर की चुनौतियों और समाधानों पर अपने सुझाव साझा किए।

C M NEWS: सदन में पांच साल बनाम-दो साल की लाल किताब पर होगी चर्चा, मुख्यमंत्री ने स्वीकार की चुनौती

0
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विधानसभा में पांच साल बनाम-दो साल पर चर्चा करने के लिये विपक्ष की चुनौती स्वीकार की है। इस के लिये मुख्यमंत्री ने सदन में लाल किताब टेबल की और कहा कि भाजपा सरकार ने दो साल में इतने काम किए हैं, जितने कांग्रेस के पिछले पांच साल के कार्यकाल में भी नहीं हुए। इस मामले पर अध्यक्ष ने कहा कि कार्य सलाहकार समिति में विषय रखकर दिन और समय तय किया जाएगा। वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित कई विधायक खड़े हो गए और कहा कि पूरे पांच साल के कामकाज पर ही चर्चा करना, सिर्फ कांग्रेस सरकार के दो साल की तुलना नहीं करनी है। जूली ने कहा कि उन्हें भी मुख्यमंत्री की चुनौती स्वीकार है। मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नाम लिये बिना तंज कसते हुये कहा पिछली सरकार के नेता जो सदन में नहीं आ रहे और अपने आपको महात्मा गांधी का अनुयायी बताते हैं, लेकिन उन्होंने युवाओं का हक मारा। उनको फिर से महात्मा गांधी की किताब पढ़नी चाहिए। वहीं मुख्यमंत्री ने कांग्रेस सरकार पर घी पीने का आरोप लगाया है और कहा कि आज उपदेश दे रहे हैं। उन्होने कहा कि राम को अपना लो, फायदे में रहोगे, वरना नजर नहीं आओगे। राम के नाम से कटते रहोगे तो कट ही जाओगे। जबकि महात्मा गांधी खुद भी रामराज्य की स्थापना करना चाहते थे। दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार ने अब तक की 1727 बजट घोषणाओं में से केवल 754 ही पूरी की हैं। पिछले बजट की महज 18 प्रतिशत घोषणाओं पर अमल हुआ है। दो साल में एक भी नई भर्ती पूरी नहीं हुई और मेधावी छात्राओं की स्कूटी योजना का टेंडर निरस्त कर दिया। उन्होने कहा कि जनता की सुनवाई नहीं हो रही है। सरकार यह भूल रही है कि वह जनता की मालिक नहीं, बल्कि ट्रस्टी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिविल लाइंस में मंत्रियों के दरवाजे जनता के लिए बंद हैं।