Badmer News: बाड़मेर में एम्बुलेंस सेवा की खुली पोल, प्रसूता लोडिंग साइकिल रिक्शे से पहुंचायी अस्पताल

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बाड़मेर में एम्बुलेंस सेवा की पोल खुल गई। सिस्टम की लापरवाही के कारण एक प्रसूता को प्रसव पीड़ा होने पर पति ने लोडिंग साइकिल रिक्शे से अस्पताल पहुंचाया। जानकारी के अनुसार पति ने अपनी पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर 108 एम्बुलेंस सेवा को फोन किया। लेकिन समय पर एम्बुलेंस नहीं आई तो पति और सास ने उसे लोडिंग साइकिल रिक्शे पर अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया। इस आशय का वीडियो भी वायरल हुआ है। जिसमें इस घटना को देखा जा सकता है। प्रसूता के अस्पताल पहुचने के करीब एक घंटे बाद उन्होने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। सीएमएचओ विष्णुराम विश्नोई ने मामले में बताया कि यह जांच का विषय है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लापरवाही कहां हुई। कंपनी को नोटिस जारी किया गया है। उन्होने फिलहाल, मां और बच्ची दोनों स्वस्थ हैं।

C M NEWS: केन्द्र सरकार के सहयोग से प्रदेश में स्थापित होगी 3200 मेगावाट की परियोजना

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में राजस्थान ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर निरंतर अग्रसर है। मुख्यमंत्री द्वारा लिए गए दूरदर्शी निर्णयों और विभिन्न कदमों के परिणामस्वरूप प्रदेश की ऊर्जा उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री का एक और प्रयास रंग लाया है। केन्द्र सरकार की एम्पावर्ड कमेटी ने राज्य में 3200 मेगावाट की कोल आधारित परियोजना को स्थापित करने की मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री ने राज्य में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने और दीर्घकालिक ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से केन्द्रीय कोयला मंत्रालय से इस परियोजना के लिए कोल लिंकेज का आवंटन का आग्रह किया था। उन्होंने केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहरलाल के समक्ष इस परियोजना के राज्य में स्थापित होने से अपेक्षित प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष आर्थिक, सामाजिक व तकनीकी लाभों पर पुरजोर तरीके से पक्ष रखा था। मुख्यमंत्री के इन्हीं प्रयासों से केन्द्र सरकार की अधिकार प्राप्त समिति (एम्पावर्ड कमेटी) ने परियोजना को राजस्थान में ही स्थापित करने का निर्णय किया है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार भविष्य की ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए बेस मांग पूर्ति हेतु कोयला आधारित परियोजनाओं के विकास पर भी विशेष ध्यान दे रही है। 3200 मेगावाट की कोल आधारित परियोजना की स्थापना से लगभग 40 हजार करोड़ का निवेश होगा, जिससे राज्य में राजस्व वृद्धि के साथ ही रोजगार के अवसरों का भी सृजन होगा।

C M NEWS: भजनलाल सरकार ग्रामीण महिलाओं को देगी 3,000 करोड़ का ऋण

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार “राजस्थान महिला निधि” योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिये 3,000 करोड़ का ऋण देगी। इस योजना के तहत राजीविका स्वयं सहायता समूहों (SHG) और उनकी सदस्याओं को आसान, सुलभ और त्वरित ऋण दिया जायेगा ताकि वे अपना व्यवसाय शुरु या विस्तारित कर सकें और परिवार की आमदनी बढ़ा सकें। राज्य मिशन निदेशक राजीविका श्रीमती नेहा गिरि ने बताया कि महिलाएं 40,000 रुपये तक का ऋण मात्र 48 घंटे में प्राप्त कर सकती हैं, जबकि इससे अधिक राशि 15 दिनों में स्वीकृत होती है। यह योजना राजस्थान के सभी 41 जिलों में लागू है और लगभग 4 लाख स्वयं सहायता समूहों व करीब 45 लाख ग्रामीण परिवारों तक पहुँच चुकी है। गरीब, निराश्रित और वंचित महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। डिजिटल आवेदन और न्यूनतम कागजी कार्यवाही होने से प्रक्रिया बेहद सरल है। उन्होने बताया कि योजना के विस्तार के लिए राज्य सरकार ने नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनसीडीसी) से 3,000 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा प्राप्त की है। एनसीडीसी भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत एक वैधानिक संगठन है। उक्त राशि का चेक प्रदान किये जाने के अवसर पर रोहित गुप्ता, उप प्रबंध निदेशक एनसीडीसी, डॉ. पूजा शर्मा, सीईओ- राजस्थान महिला निधि उपस्थित थे। श्रीमती गिरि ने बताया कि योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा महिलाओं को ऋण पर ब्याज अनुदान दिया जाएगा जिससे उन्हें केवल 1.5% वार्षिक ब्याज पर ऋण उपलब्ध हो सकेगा। यह राशि महिलाओं को सूक्ष्म उद्यम, कृषि, पशुपालन, छोटे कारोबार और सामाजिक आवश्यकताओं के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में प्रयुक्त होगी। कम ब्याज दर महिलाओं को बिना आर्थिक बोझ के व्यवसाय बढ़ाने में मदद करती है। समय पर ऋण से महिला उद्यमिता, आय वृद्धि और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा मिला है। आवेदन से लेकर निगरानी तक सभी प्रक्रियाएँ पूरी तरह ऑनलाइन हैं। सामुदायिक समूह और महिला नेतृत्वकर्ता जागरूकता फैलाने और ऋण अदायगी में सक्रिय हैं।

Animal Husbandry News: विभाग में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता बिल्कुल बरदाश्त नहीं की जाएगी —शासन सचिव पशुपालन

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शासन सचिव पशुपालन, गोपालन और मत्स्य डॉ समित शर्मा ने राज्य सरकार की योजनाओं का पशुपालकों को अधिक से अधिक लाभ दिलाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। डॉ शर्मा ने मंगलवार को शासन सचिवालय में पशुपालन विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, एएमएस और के पी आई आधारित ग्रेडिंग प्रणाली सहित अन्य विषयों की प्रगति की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान शासन सचिव ने कहा कि 17 सितंबर से आयोजित होने वाले ग्रामीण सेवा शिविर में पशुपालन विभाग के लोग अनुशासित, कर्मठ और तत्पर होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं और भीड़ में अपनी अलग पहचान में दिखें। इन शिविरों के दौरान पशुपालन विभाग द्वारा पशु चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जाएगा जिसमें रोगी पशुओं के उपचार और टीकाकरण आदि गतिविधियों के लिए सभी से सक्रिय होकर काम करने के निर्देश डॉ शर्मा ने दिए। शासन सचिव ने निर्देश दिए कि शिविरों के दौरान टीकाकरण अभियान, मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना, मोबाइल वेटरिनरी यूनिट और कॉल सेंटर व चैटबॉट , सेक्स सॉर्टेड सीमन से कृत्रिम गर्भाधान जैसी योजनाओं का अधिकाधिक प्रचार प्रसार किया जाए। ग्रामीण सेवा शिविरों में मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के बीमा सर्टिफिकेट भी वितरित किए जाएंगे जिसके लिए शासन सचिव ने अधिकारियों को एसआइपीएफ से समन्वय कर पूरी योजना बनाने के निर्देश दिए। कृत्रिम गर्भाधान पर पीएस ने जताया असंतोष — सेक्स सॉर्टेड सीमन तकनीक के उपयोग की समीक्षा करते हुए डॉ शर्मा ने कहा कि यह पशुपालन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम है जो पशुपालकों को चार गुना फायदा देगी। उन्होंने अधिकारियों से इस तकनीक के उपयोग की अब तक की प्रगति की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि अब तक प्रदेश में दो लाख स्टा्रॅ की आपूर्ति के विरूद्ध मात्र 36 हजार 317 पशुओं का ही कृत्रिम गर्भाधान किया गया है इस पर असंतोष व्यक्त करते हुए शासन सचिव ने इसके प्रति उदासीनता के कारण का पता लगाते हुए इसकी सघन मॉनिटरिंग करने के सख्त निर्देश दिए और इसकी संख्या बढ़ाने को कहा। उन्होंने कृत्रिम गर्भाधान का इन्द्राज पशुधन एप पर किए जाने के भी निर्देश प्रदान किए। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में सेक्स सॉर्टेड सीमन से ही एआई करनी है इसके लिए पशुधन निरीक्षक को प्रशिक्षण की आवश्यकता है। उन्होंने आरएलडीबी को इस प्रशिक्षण की व्यवस्था करने के लिए निर्देश प्रदान किए। वहीं जिलों के संयुक्त निदेशकों को निर्देश दिए कि उनके अधीनस्थ सभी संस्थाएं समय पर खुलने के साथ साथ सभी कार्मिको की उपस्थिति सुनिश्चित हो और सभी कार्मिक अनुशासन और निष्ठा से काम करें। उन्होंने कहा कि विभाग में कामचोरी, भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता बिल्कुल बरदाश्त नहीं की जाएगी। शासन सचिव ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पशु चिकित्सकों से व्यक्तिगत रूप से बात की और उनकी सराहना करते हुए अन्य चिकित्सकों को उनसे प्रेरणा लेने की सलाह दी। इस दौरान विभाग के निदेशक डॉ आनंद सेजरा ने सभी जिलों के संयुक्त निदेशकों कहा कि गा्रमीण सेवा शिविर हमारे विभाग की योजनाओं के प्रचार प्रसार के लिए एक अच्छा मौका है। उन्होंने कहा कि हमें अपने विभाग को और बेहतर बनाने के पूरा प्रयास और सुधार करने की आवश्यकता है। हम ड्यूटी समय मे ड्यूटी पर जाएं और ईमानदारी से अपने काम को अंजाम दें।

C M NEWS: शेखावाटी की 662 ऐतिहासिक हवेलियों को बनाया जायेगा टूरिज्म हब —मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि शेखावाटी की हवेलियां प्रदेश की अनमोल और अद्वितीय धरोहर हैं। इन धरोहरों का संरक्षण व संवर्द्धन हम सबका सामूहिक दायित्व है। राज्य सरकार इस समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाते हुए इनकी सुरक्षा और रखरखाव हेतु हर संभव सहयोग के लिए तत्पर है। श्री शर्मा सोमवार को शेखावाटी विरासत सरंक्षण संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शेखावाटी क्षेत्र में पर्यटन के माध्यम से रोजगार सृजन और आर्थिक विकास के लिए ठोस कदम उठा रही है। इसी दिशा में बजट वर्ष 2025-26 में शेखावाटी हवेली संरक्षण योजना की घोषणा की गई है। इस योजना में झुंझुनूं, सीकर और चूरू में अब तक 662 ऐतिहासिक हवेलियों को चिन्हित किया गया है। इन हवेलियों को हेरिटेज वॉक, सांस्कृतिक केंद्र, आर्ट गैलरी, होमस्टे और टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि शेखावाटी के रामगढ़, नवलगढ़, मंडावा, खेतड़ी, लक्ष्मणगढ़, फतेहपुर और महनसर कस्बों की विरासत के संरक्षण एवं विकास के लिए विभिन्न विभागों की ज्वाइंट कमेटी गठित की जाएगी, जो इन क्षेत्रों में आधारभूत संरचना एवं पर्यटन विकास के लिए दीर्घकालिक कार्ययोजना बनाकर कार्य करेगी। साथ ही, उन्होंने भविष्य में कोई भी हवेली नहीं तोड़े जाने के संबंध में जिला कलक्टर्स को निर्देशित करने के लिए कहा।

C M NEWS: विद्यालयों और महाविद्यालयों पर मुख्यमंत्री की गहन चर्चा, कहा जवाबदेही हो तय

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि विद्यार्थी हमारे देश के सुनहरे भविष्य हैं, जिनकी सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने गुणवत्ता के उच्चतम मापदण्डों का पालन करते हुए विद्यालयों के निर्माण और मरम्मत कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, इन कार्याें में जवाबदेहिता के लिए स्कूली शिक्षा विभाग में कार्यकारी एजेंसी की नियुक्ति करने के लिए भी निर्देशित किया। मुख्यमंत्री सोमवार को स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और संस्कृत शिक्षा विभाग की बजट घोषणाओं की समीक्षा कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने गांव-ढाणी से लेकर शहरी क्षेत्र में स्थित राजकीय विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शैक्षणिक सुविधाओं तथा सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और विस्तार पर गहन चर्चा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। श्री शर्मा ने कहा कि विगत कुछ वर्षों में निर्मित शैक्षणिक संस्थानों के जीर्ण-क्षीर्ण और जर्जर होने पर उनके निर्माण कार्याें की विस्तृत रिपोर्ट मंगवाकर जांच करवायी जाए। साथ ही, निर्मित होने वाले भवनों और मरम्मत कार्यों के खर्चों की सतत मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि खराब कार्यों के संबंध में जवाबदेहिता को निर्माण कार्यों की प्रमुख शर्तों में शामिल किया जाए। उन्होंने शैक्षणिक भवनों के मरम्मत संबंधी कार्यों के लिए डांग, मगरा, मेवात क्षेत्रीय विकास योजना के तहत अनुमत 20 प्रतिशत राशि का प्राथमिकता से उपयोग करने के विशेष दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप कक्षा निर्माण और अन्य सुविधाओं का विस्तार सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के भवनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। इन संयत्रों के संचालन से शैक्षणिक संस्थानों की ऊर्जा जरूरत पूरी हो सकेगी और आधारभूत ढांचा भी सुदृढ़ हो सकेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री को उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने हरियालो राजस्थान के अन्तर्गत दुर्लभ प्रजातियों के रिकॉर्ड पौधे लगाने पर वर्ल्ड बुक रिकॉर्ड ऑफ लंदन का सर्टिफिकेट प्रस्तुत किया।

Mines News: राज्य सरकार राजस्व वसूली को लेकर गंभीर —प्रमुख शासन सचिव माइंस

प्रमुख शासन सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम टी. रविकान्त की अध्यक्षता में सोमवार को विभागीय अधिकारियों के साथ वर्चुअल समीक्षा का आयोजन हुआ। उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि खान विभाग की बकाया ब्याजमाफी की एमनेस्टी योजना के बड़े बकायादारों से अधीक्षण खनिज अभियंता वन टू वन कर वसूली कार्य को गति देंगे। वहीं अन्य बकायादारों से संबंधित खनिज अभियंता और सहायक खनिज अभियंता संपर्क करेंगे और योजना प्रावधानों की जानकारी देते हुए इस योजना के दायरें में आने वाली राशि की वसूली के ठोस प्रयास करेंगे। प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि राज्य स्तर पर इसकी नियमित समीक्षा होगी वहीं खान विभाग के वित्तीय सलाहकार प्रतिदिन रिपोर्ट तैयार कर सरकार को अवगत कराएंगे। अतिरिक्त निदेशक वृत नियतकालीन समीक्षा करते हुए वृत स्तर पर मार्गदर्शन व समन्वय बनायेंगे। श्री रविकान्त ने कहा कि राज्य सरकार राजस्व वसूली को लेकर गंभीर है और इसमें किसी तरह की कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि विभागीय एमनेस्टी योजना में बकाया मूलराशि में अधिकतम 90 प्रतिशत तक की छूट देते हुए सरल और लाभकरी बनाया गया है। फील्ड अधिकारियों का दायित्व हो जाता है कि वे योजना के दायरें में आने वाले सभी बकायादारों से संपर्क कर वसूली के ठोस प्रयास करें। उन्होंने न्यायालय में स्टे प्राप्त प्रकरणों को छोड़कर शेष प्रकरणों में भी वसूली प्रयासों में तेजी लाएं।

E-name: ई-नाम से भुगतान करने पर व्यापारियों को मिलेगा नगद पुरस्कार

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने कृषि में तकनीक को बढ़ावा देने और कृषि उपज मंडी समितियों में विकास को लेकर निरंतर ठोस कदम उठाए गए हैं। वहीं अब ‘ई-भुगतान प्रोत्साहन योजना’ को ‘कृषक उपहार योजना’ में शामिल करने का मुख्यमंत्री ने अनुमोदन किया है। इससे कृषि उपज मंडी समितियों में ई-भुगतान को बढ़ावा मिलेगा। इस निर्णय से जो व्यापारी ई-नाम के माध्यम से भुगतान करते है तो उन्हें भी लॉटरी के माध्यम से नगद पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इससे पहले केवल कृषकों को ही ई-नाम से भुगतान प्राप्त करने पर लॉटरी के माध्यम से नगद पुरस्कार प्रदान किया जा रहा था, अब ‘ई-भुगतान प्रोत्साहन योजना’ को ‘कृषक उपहार योजना’ में शामिल होने से व्यापारियों को भी इसका लाभ मिलेगा। जो व्यापारी ई-नाम के माध्यम से भुगतान करेंगे उन्हें उसी विक्रय पर्ची पर पुरस्कार हेतु लॉटरी में शामिल किया जा सकेगा। राज्य सरकार द्वारा सिरोही में फल-सब्जी मंडी यार्ड की स्थापना की जाएगी जिससे किसानों को स्थानीय स्तर पर ही फल-सब्जी के विपणन के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म मिल सके। इसके लिये राज्य सरकार ने सिरोही में फल-सब्जी मंडी यार्ड की स्थापना के संबंध में गौण मंडी यार्ड की सीमाएं अधिसूचित करने का अनुमोदन किया है।

Census News: डिजिटल स्वरूप में होगी 2027 की जनगणना, योजनाओं का आधार बनेगा सटीक डेटा -मुख्य सचिव

राज्य में प्रस्तावित जनगणना-2027 की तैयारियों को लेकर मुख्य सचिव सुधांश पंत ने सोमवार को सचिवालय में राज्य स्तरीय समन्वय समिति की समीक्षा की। इसमें राजस्थान राज्य के 19 विभागों के प्रशासनिक सचिवों/ वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मुख्य सचिव ने कहा कि फरवरी 2027 में आयोजित होने वाली जनगणना की प्रारंभिक समीक्षा है। उन्होंने विभागों को निर्देशित किया कि आगामी जनगणना के लिए प्रशासनिक इकाइयों का समय पर गठन सुनिश्चित करें और सभी कार्य केंद्र सरकार के जनगणना कार्य निदेशालय के निर्देशों के अनुरूप पूरे करें। उन्होंने बताया कि इस बार जनगणना पूर्णत: डिजिटल स्वरूप में होगी, जिससे तहसील और गाँव स्तर का डेटा सटीक रूप से संकलित होगा। इस डेटा के विश्लेषण से विभिन्न विभाग अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेंगे। श्री पंत ने कहा कि केन्द्र सरकार के निर्देशानुसार सम्बंधित सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि जनगणना प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रशासनिक इकाई की सीमाओं में परिवर्तन नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि 31 दिसम्बर 2025 तक ही सीमाओं में बदलाव अनुमत होगा और इसके बाद 1 जनवरी 2026 से मार्च 2027 तक किसी भी प्रकार का परिवर्तन स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने निर्देशित किया कि सम्बंधित विभागों को 1 दिसंबर 2025 के पूर्व उक्त प्रक्रिया पूर्ण कर लेने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जानी है, उन्होंने इसे एक राष्ट्रीय दायित्व बताते हुए सभी विभागों से समन्वय के साथ कार्य करने का आह्वान किया। श्री पंत ने जनगणना के प्रथम चरण में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य मई जून माह में किए जाने के संबंध में निर्णय लेने हेतु नोडल विभाग को निर्देश दिए। उन्होने मई—जून माह में गर्मी की तीव्रता को देखते हुए ओआरएस के साथ प्राथमिक दवाइयों का किट भी जनगणना प्रगणकों और सुपरवाइजरों को दिए जाने के संबंध में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को निर्देश भी प्रदान किए। इस दौरान जनगणना कार्य निदेशक, गृह मंत्रालय बिष्णु चरण मल्लिक ने कहा कि जनगणना की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए ग्राम, नगर, तहसील और जिला स्तर की सीमाएँ समय रहते स्थिर की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि मुख्य रूप से राजस्व एवं स्वायत्त शासन विभाग द्वारा विभिन्न स्तर पर किए जाने वाले प्रशासनिक / क्षेत्राधिकार परिवर्तनों को यथाशीघ्र पूर्ण किया जाना है क्योंकि भारतवर्ष में कुल बनी तहसीलों में राजस्थान का 18 प्रतिशत हिस्सा और कुल नए बने गांवों में लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान का है। वहीं जनगणना 2027 के फ्रेम को स्थिर करने से पूर्व नई इकाइयों का सत्यापन, मानचित्र निर्माण व कोड आवंटन किए जाने की प्रक्रिया में भी समय लगता है। श्री मल्लिक ने बताया कि मई, जून 2026 में जनगणना के पहले चरण में हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस का कार्य किया जाएगा व इसके बाद फरवरी 2027 में दूसरे चरण के तहत जनसंख्या गणना शुरू की जाएगी। उन्होंने जनगणना के कार्य के सुचारू क्रियान्वयन के लिए सुझाव दिया कि रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए और जनगणना कार्य में नियुक्त कार्मिकों को कार्य पूरा होने तक स्थानान्तरण नहीं किया जाए। उन्होंने विभागों की जिम्मेदारियाँ स्पष्ट करते हुए कहा कि राजस्व विभाग और स्वायत्त शासन विभाग द्वारा सीमाओं के निर्धारण का कार्य किया जाएगा। इसी प्रकार योजना व सांख्यिकी विभाग जिला स्तर पर समन्वय का दायित्व निभाएगा और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग व शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

C M NEWS: शहरी सेवा शिविरों में आमजन को मिलेगी ब्याज में 100 प्रतिशत छूट —मुख्यमंत्री के निर्देश

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक प्रदेशभर में आयोजित होने वाले शहरी सेवा शिविरों के माध्यम से आमजन को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किया जाएगा और उनकी समस्याओं का शीघ्र निस्तारण भी किया जाएगा। नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग ने इन शिविरों के माध्यम से आमजन को विभिन्न छूट देने का निर्णय लिया है 0 इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। अधिसूचना अनुसार शहरी सेवा शिविर में पिछले वर्षों की बकाया लीज राशि वर्ष 2025-26 तक एकमुश्त जमा कराने पर ब्याज में 100 प्रतिशत छूट का प्रावधान किया गया है। फ्री होल्ड पट्टे हेतु 10 वर्ष और लीज मुक्ति हेतु 8 वर्ष की लीज राशि व पिछले वर्ष की बकाया लीज राशि वर्ष 2025-26 तक अग्रिम एक मुश्त जमा कराने पर बकाया लीज राशि में 60 प्रतिशत छूट मिलेगी। वहीं आवासीय भूखण्ड के पुनर्ग्रहण शुल्क में 250 वर्ग मीटर तक 75 प्रतिशत, 250 वर्ग मीटर से अधिक व 500 वर्ग मीटर तक 50 प्रतिशत और 500 वर्ग मीटर से अधिक व 1000 वर्ग मीटर तक 25 प्रतिशत छूट प्राप्त होगी। कृषि भूमि पर बसी हुई कॉलोनियां, जिनमें संबंधित धाराओं में कार्यवाही होकर ले-आउट प्लान स्वीकृत हो चुके हैं, इन कॉलोनियों के भूखण्डों के शेष पट्टे जारी करने पर शहरी सेवा शिविर को प्रथम कैम्प मानते हुए ब्याज में शत् प्रतिशत छूट दी जाएगी। अपंजीकृत दस्तावेजों से क्रय किए गए भूखण्डों में अंतिम क्रेता को भूखण्ड पट्टा देने पर शास्ती में शत् प्रतिशत छूट का प्रावधान किया गया है। साथ ही, आवासीय प्रीमियम दरों में 100 वर्ग मीटर तक 25 प्रतिशत तथा 100 वर्ग मीटर से 200 वर्ग मीटर तक 15 प्रतिशत छूट दी जाएगी। शहरी सेवा शिविरों में आमजन को राहत देने तथा कार्य की गति बढ़ाने के लिए भी विभिन्न प्रावधान किए गए हैं। भवन निर्माण स्वीकृति, भू-उपयोग परिवर्तन, ले-आउट प्लान आदि में तकनीकी परीक्षण हेतु क्षेत्रफल के आधार पर सक्षम अधिकारियों को अधिकृत किया गया है। आवासीय उपविभाजन/पुनर्गठन में भी क्षेत्रफल की 3 श्रेणियों में विभिन्न छूट का प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में गैर/व्यवसायिक भू-उपयोग से व्यवसायी भू-उपयोग परिवर्तन में तथा निर्धारित भू-उपयोग से विभिन्न भू-उपयोग परिवर्तन में क्षेत्रफल के आधार पर तय की गई विभिन्न श्रेणियों में छूट दी जाएगी। नगर पालिका अधिनियम के तहत धारा 69-ए के फ्री-होल्ड पट्टा शुल्क में 200 वर्ग मीटर तक 50 प्रतिशत व 200 वर्ग मीटर से अधिक व 500 वर्ग मीटर तक 40 प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार भवन मानचित्र शुल्क में भी छूट का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत 500 वर्ग मीटर तक जी+1 की भवन निर्माण स्वीकृति में अनुमोदन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट मिलेगी। खांचा भूमि के आवंटन में छूट एवं सक्षमता भी दी जाएगी। निकाय के रिकॉर्ड में नामांतरण, मौका निरीक्षण की छूट एवं आवेदनों के सरलीकरण के संबंध में भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।