Mines News: मुख्यमंत्री की मंशा है कि नीलाम खानें जल्द से जल्द परिचालन में आएं —टी. रविकान्त

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नीलाम खानों के मंशापत्रधारकों द्वारा समय पर आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने में देरी को लेकर राज्य सरकार गंभीर है। प्रमुख सचिव खान, भूविज्ञान और पेट्रोलियम टी. रविकान्त ने मंशापत्रधारकों से नीलाम खानों के मशांपत्रधारकों को आवश्यक अनुमतियों के लिए समय पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करने को कहा है। उन्होंने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार नीलाम खानों को जल्द से जल्द परिचालन में लाना चाहती है। जिससे खनन क्षेत्र में निवेश, रोजगार और राजस्व के नए अवसर विकसित हो सके। उन्होंने 8 मंशापत्रधारकों द्वारा पर्यावरण स्वीकृति के लिए आवेदन तक नहीं करने को गंभीरता से लिया है। प्रमुख सचिव ने बताया कि आवश्यक अनुमतियों के संबंध में मंशापत्रधारकों, सीया, सेक व राजस्व व खान अधिकारियों को बुधवार को खनिज भवन में साझा मंच उपलब्ध कराया गया ताकि प्रक्रिया, जिज्ञासा और समस्याओं का समाधान हो सके। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की स्पष्ट मंशा है कि नीलाम खानें जल्द से जल्द परिचालन में आएं। इसके लिए विभाग द्वारा पोस्ट ऑक्शन फेसिलिटेशन सेल गठित करने के साथ ही लगातार समन्वय बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, यह भी जानकारी में आया है कि कुछ मंशापत्रधारकों द्वारा औपचारिकता पूरी करने के लिए आवेदन तो कर दिया जाता है पर पूरे दस्तावेज या स्पष्ट दस्तावेज संलग्न नहीं किये जाते हैं तो दूसरी और सिया, सेक, राजस्व या खान विभाग द्वारा अधूरी सूचना को पूरा करने के लिए पत्राचार किया जाता है तो उसे भी गंभीरता से नहीं लिया जाता है। श्री रविकान्त ने कहा कि अब आवश्यक अनुमतियों के अभाव के कारण मंशापत्रधारकों द्वारा अवधि बढ़ाने के आवेदन प्राप्त होते हैं तो सरकार स्तर पर समय सीमा बढ़ाने से पहले यह भी देखा जाएगा कि संबंधित मंशापत्रधारक द्वारा अनुमतियां प्राप्त करने के वास्तविक प्रयास भी किये गये हैं या नहीं। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा सेक, सीया, राजस्व, जिला कलक्टरों विभाग सहित सभी संबंधित विभागोें के साथ ही संबंधित मंशापत्रधारकों से अनवरत समन्वय बनाये के बावजूद उत्साहजनक परिणाम प्राप्त नहीं होने को सरकार गंभीरता से ले रही है। वहीं स्टेट एनवायरमेंट इंपेक्ट एसेसमेंट आथोरिटी (सीया) के सदस्य सचिव विजय एन ने बताया कि पर्यावरण स्वीकृति के लिए आवश्यक दस्तावेजों की चैक लिस्ट जारी है, उसके बाद भी अधूरे या अस्पष्ट आवेदनों के कारण भी अनावश्यक बिलंब होता है। कहीं डेटा अधूरा होता है तो कहीं दस्तावेज अपठनीय या अस्पष्ट होने से अनावश्यक पत्राचार होता है। उन्होंने मंशापत्रधारकों द्वारा भी समय पर प्रत्युत्तर देने की आवश्यकता प्रतिपादित की। सेक के सदस्य सचिव श्री प्रदीप असनानी ने भी विचाराधीन प्रकरणों में बिलंब होने के कारणों की और ध्यान दिलाया।

RAJASTHAN NEWS: पेंशनर को नवंबर माह में देना होगा जीवित प्रमाण पत्र

राजस्थान सिविल सेवा पेंशन नियम 1996 के नियम 134 के अनुसार पेंशनर और पारिवारिक पेंशनर को प्रत्येक वर्ष नवम्बर माह में जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक है। निदेशालय पेंशन एवं पेंशनर्स वैलफेयर विभाग के निदेशक लीला राम मीणा ने बताया कि पेंशनर और पारिवारिक पेंशनर राज्य सरकार में कार्यरत समस्त राजपत्रित व अराजपत्रित कर्मचारियों (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को छोड़कर) के द्वारा आईएफएमएस 3.0 पर कर्मचारी स्वयं की एसएसओ आईडी के माध्यम से संबंधित कोषालय में व्यक्तिशः उपस्थित होकर अथवा अन्य पूर्व में निर्धारित तरीकों के अनुसार प्रस्तुत कर सकते है। राज्य सरकार के समस्त पेंशनर्स नवम्बर माह में जीवन प्रमाण पत्र आवश्यक रूप से प्रस्तुत कर सकते हैं।

C M NEWS: पश्चिम बंगाल के आर्थिक विकास में प्रवासी राजस्थानियों का बड़ा योगदान —मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रवासी राजस्थानी अपनी मातृभूमि से दूर होने के बावजूद अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक मूल्यों को कायम रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार दुनिया भर में रह रहे राजस्थानियों की कर्मभूमि और जन्मभूमि के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए आगामी 10 दिसंबर को जयपुर में प्रवासी राजस्थानी दिवस का आयोजन कर रही है। यह दिवस प्रवासी राजस्थानियों की उपलब्धियों का जश्न मनाने और अपनी मातृभूमि के साथ उनके जुड़ाव को गहरा करने के लिए एक समर्पित मंच का काम करेगा। उन्होंने सभी प्रवासी राजस्थानियों को इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का आमंत्रण दिया। श्री शर्मा मंगलवार को कोलकाता में प्रवासी राजस्थानी मीट को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के आर्थिक विकास में प्रवासी राजस्थानियों का बड़ा योगदान है। मुख्यमंत्री ने पीढ़ी दर पीढ़ी राजस्थान की संस्कृति को संजोए रखने के लिए प्रवासी राजस्थानी समुदाय की सराहना करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां राज्य के युवाओं और भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राजस्थान फाउंडेशन (आरएफ) के 26 चैप्टर देश के विभिन्न राज्यों और दुनिया के देशों में कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में गतिशील, निवेशक-अनुकूल वातावरण निर्मित हुआ है और इससे उद्योग, व्यापार एवं बुनियादी ढाँचे के विकास में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है। उन्होंने प्रवासी राजस्थानियों को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन और अन्य उभरते क्षेत्रों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि वे राजस्थान के विकास में भागीदार बन सकें। राजस्थान भारत का अग्रणी टेक्सटाइल सेंटर- मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान देश के अग्रणी टेक्सटाइल सेंटर के रूप में उभरा है, जहां 1,500 से अधिक फैक्ट्रियां संचालित हैं। राज्य पॉलिएस्टर विस्कोस यार्न, कपास और ऊन का सबसे बड़ा उत्पादक है और कपास उत्पादन में चौथे स्थान पर है। हमारी नई टेक्सटाइल एंड अपेरल पॉलिसी नवाचार और रोजगार सृजन को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में लगभग 85 प्रकार के खनिज पाए जाते हैं और प्रदेश देश में जस्ता, सीसा, चांदी, संगमरमर और बलुआ पत्थर का अग्रणी उत्पादक है। उन्होंने कहा संसद भवन से लेकर राष्ट्रपति भवन तक राजस्थान के पत्थर की विरासत अद्वितीय है। राज्य सरकार ने खनिज ब्लॉकों की नीलामी में तेजी लाने के लिए राजस्थान खनिज नीति 2024 और एम-सैंड नीति 2024 भी लागू की है। पयर्टन राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार- श्री शर्मा ने कहा कि पर्यटन राजस्थान की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। यहां वर्ष 2024 में लगभग 2.3 करोड़ पर्यटक आए थे और राज्य सरकार द्वारा पर्यटन एवं हॉस्पिटेलिटी सेक्टर को उद्योग का दर्जा दिया गया है। सरकार द्वारा पर्यटन परियोजनाओं में भूमि आवंटन हेतु न्यूनतम निवेश आवश्यकता को 100 करोड़ रूपए से घटाकर 50 करोड़ रूपए कर दिया गया है। सरकार खाटू श्यामजी, नाथद्वारा, पुष्कर, सालासर बालाजी, रणकपुर और माउंट आबू जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों को जोड़ने वाला धार्मिक-पर्यटन सर्किट भी विकसित कर रही है। नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि हमारी सरकार टाउनशिप नीति जैसी पहलों के माध्यम से टिकाऊ और किफायती आवास उपलब्ध कराने व हरित विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इन प्रयासों से प्रवासी राजस्थानियों की और अधिक सक्रिय भागीदारी होगी। उन्होंने कहा कि प्रवासी राजस्थानियों द्वारा प्रदेश में निवेश और विकास में भागीदारी करने से विकसित राजस्थान के संकल्प को और मजबूती मिलेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रवासी राजस्थानियों का सम्मान किया और राजस्थान फाउंडेशन की कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया।

C S NEWS: क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता -मुख्य सचिव

मुख्य सचिव सुधांश पंत ने मंगलवार को सचिवालय में सार्वजनिक निर्माण विभाग और एनएचएआई की परियोजनाओं की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान उन्होंने वर्षा से क्षतिग्रस्त सड़कों व सीडी कार्यों की मरम्मत को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए त्वरित गति और पूर्ण गुणवत्ता के साथ काम पूर्ण करवाने के निर्देश विभाग के अधिकारियों को दिए। गौरतलब है कि वर्षा से क्षतिग्रस्त सड़कों की अस्थाई मरम्मत जैसे पेच रिपेयर वर्क आदि के लिए 645 करोड़ रुपये व स्थाई मरम्मत के लिए 800 करोड़ रुपये का बजट सरकार द्वारा आवंटित किया जा चुका है। इस क्रम में विभाग द्वारा कार्य प्रारंभ कर दिये गये हैं। मुख्य सचिव ने पेच रिपेयर कार्य 15 नवम्बर तक उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करवाने के निर्देश दिए। विभाग द्वारा इन कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अन्य विभागों के अभियन्ताओं से उक्त कार्यों की जाँच करवाई जा रही है। अपवाद की स्थिति में ही निविदा की तिथि आगे बढ़ाऐं ताकि काम समय पर पूर्ण हों- मुख्य सचिव ने कहा कि अधिकारी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भावना के अनुरूप ईमानदारी से काम करते हुए फील्ड में सक्रिय रहकर स्वीकृत कार्यों को समय पर पूर्ण करवाएं। उन्होंने कहा कि अपवाद की स्थिति में ही निविदा की तिथि को आगे बढ़ाएं। इसके साथ ही निविदा खोलने से वर्क ऑर्डर जारी करने तक निर्धारित टाइमलाइन का सख्ती से पालना करने एवं उसका निरीक्षण ऑनलाईन माध्यम से करने के निर्देश भी उन्होंने दिए। स्पेशल टास्क फोर्स गठन के निर्देश- मुख्य सचिव ने एनएचएआई-एनएच के कार्यों में अन्तर्विभागीय मुद्दों के त्वरित निस्तारण के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए। टास्क फोर्स में वन, राजस्व, विद्युत व अन्य सम्बंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने एनएचएआई की 7919 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि प्रदेश में चल रही इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को समय पर पूर्ण करने के लिए पूर्ण सहयोग एवं सामंजस्य से काम करें। लम्बित कामों को मार्च तक पूरा करें- मुख्य सचिव ने पीडब्ल्यूडी के 50 करोड़ रुपये की लागत से अधिक के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि जो 35 लम्बित कार्य 90 प्रतिशत तक पूर्ण हो चुके हैं, उन्हें 31 दिसम्बर तक एवं शेष 8 कार्यों को मार्च, 2026 तक पूर्ण करें। गौरतलब है कि पीडब्ल्यूडी के 50 करोड़ रुपये की लागत से अधिक के 33 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, 31 निर्धारित समयावधि में चल रहें हैं एवं 43 कार्यों की निर्धारित समयावधि निकल चुकी है। गत दो वर्षो में 36140 कि.मी. सड़कों का निर्माण- अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता ने समीक्षा में बताया कि बजट घोषणा 2024-25 व 2025-26 के तहत लगभग 15000 करोड़ रुपये की लागत के 12 हजार से अधिक कार्य स्वीकृत किये गये हैं, जिनमें से अधिकांश कार्य आरंभ करवाये जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि विगत 2 वर्षो में 24,976 करोड़ रुपये व्यय कर 36140 कि.मी. लम्बाई की सड़कों का विकास प्रदेश में करवाया जा चुका है।

C M NEWS: राजस्थान जस्ता, सीसा और चूना पत्थर का अग्रणी उत्पादक राज्य —मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंगलवार को कोलकाता में प्रवासी राजस्थानी मीट के दौरान माइंस और मिनरल्स, केमिकल्स, टेक्सटाइल व होजरी, आईटी और शेखावाटी हवेली पर केंद्रित सेक्टोरल राउंडटेबल की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने राजस्थान के तेजी से बदलते औद्योगिक परिदृश्य के बारे में उद्यमियों, निवेशकों और प्रवासी राजस्थानियों को विस्तृत रूप से जानकारी दी। श्री शर्मा ने माइंस एंड मिनरल्स सेक्टोरल राउंड टेबल में चर्चा करते हुए कहा कि ग्रेनाइट और संगमरमर के प्रचुर भंडार के साथ-साथ राजस्थान जस्ता, सीसा और चूना पत्थर का अग्रणी उत्पादक राज्य भी है। उन्होंने प्रवासी राजस्थानियों और निवेशकों को खनिज प्रसंस्करण, डाउनस्ट्रीम उद्योगों और सस्टेनेबल माइनिंग में अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। श्री शर्मा ने राजस्थान खनिज नीति-2024, राजस्थान निवेश प्रोत्साहन नीति-2024 (रिप्स-2024) और राजनिवेश सिंगल-विंडो प्रणाली जैसी नीतियों की जानकारी भी दी जिनके माध्यम से इन सेक्टर्स में प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम हो पा रहा है। आत्मनिर्भरता की यात्रा में रेअर अर्थ एलिमेंट्स का भंडार महत्वपूर्ण पड़ाव— मुख्यमंत्री ने कहा कि बालोतरा के सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में महत्वपूर्ण रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आरईई) के भंडार की खोज के साथ प्रदेश औद्योगिक विकास के एक नए युग की शुरुआत करने जा रहा है। यह भारत का पहला हार्ड रॉक आरईई ब्लॉक बन गया है। उन्होंने कहा कि यह खोज आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यहां मिलने वाले 17 खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों और उच्च तकनीक निर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस संसाधनों का दोहन करने के लिए राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप एक एक्सीलेंस सेंटर स्थापित करने की योजना भी बना रही है। प्रदेश में केमिकल्स और पेट्रोकेमिकल उद्योगों के बढ़ रहे अवसर— मुख्यमंत्री ने केमिकल्स और पेट्रोकेमिकल उद्योगों की बढ़ती संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा करते हुए राजस्थान का दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और दिल्ली-एनसीआर से मजबूत कनेक्टिविटी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे नए अवसर पैदा करना है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही इसकी विरासत को संरक्षित करें और सतत विकास को बढ़ावा भी दें। उन्होंने कहा कि बालोतरा में शुरू होने जा रही पेट्रोलियम रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स से राज्य एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। उन्होंने बताया कि एचपीसीएल, वेदांता, हिंदुस्तान जिंक, चंबल फर्टिलाइजर्स और दीपक नाइट्राइट जैसी अग्रणी कम्पनियां प्रदेश में काम कर रही हैं और इससे बड़े पैमाने पर रोजगार और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिला है। राजस्थान बन रहा देश का अग्रणी आईटी हब— मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान मजबूत डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और नीतियों के साथ एक अग्रणी आईटी केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है। उन्होंने कहा कि जयपुर और जोधपुर में भारत का सबसे बड़ा सरकारी डेटा सेंटर संचालित है, जो राजस्वान नेटवर्क और ई-मित्र प्लेटफॉर्म के माध्यम से 600 से अधिक सेवाएं उपलब्ध कराता है। आईस्टार्ट के तहत 4,900 से अधिक स्टार्टअप और टेक्नो हब जैसी सुविधाओं के साथ प्रदेश का इनोवेटिव इकोसिस्टम लगातार विस्तार कर रहा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान सेंटर फॉर एडवांस टेक्नोलॉजी (आर-कैट), दिग्गज ग्लोबल टेक कम्पनियों के साथ साझेदारी कर राज्य सरकार युवाओं के स्किल डवलपमेंट पर कार्य कर रही है। वहीं, आईआईटी जोधपुर और आईआईएम उदयपुर जैसे प्रमुख संस्थान प्रतिभाओं को नए अवसर प्रदान भी कर रहे हैं। श्री शर्मा ने कहा कि महिंद्रा वर्ल्ड सिटी जैसे विशेष आर्थिक क्षेत्र और राजस्थान डेटा सेंटर नीति-2025 जैसी निवेशक-अनुकूल नीतियों के कारण हमारा राज्य आईटी और आईटीईएस विकास के लिए एक प्रमुख गंतव्य स्थान के रूप में उभरा है। हमारा राज्य तेजी से बढता टेक्सटाइल डेस्टीनेशन— मुख्यमंत्री ने टेक्सटाइल और होजरी क्षेत्र के प्रतिनिधियों से संवाद करते हुए कहा कि राजस्थान देश का सबसे तेजी से उभरता टेक्सटाइल डेस्टीनेशन है। टेक्सटाइल सिटी के रूप में भीलवाडा ने राजस्थान को नई पहचान दी है। उन्होंने कहा कि नई टेक्स्टाइल एंड अपेरल पॉलिसी-2025 मानव निर्मित रेशों, तकनीकी वस्त्रों और सस्टेनेबल मैन्युफेक्चिरिंग को बढ़ावा देती है। शेखावटी की हवेलियों में पर्यटन की अपार सम्भावनाएं— श्री शर्मा ने राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत के साथ ही शेखावाटी हवेलियां के संरक्षण के संबंध में भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि ये हवेलियां राजस्थान के गौरवशाली अतीत की प्रतीक हैं। ये कला, वास्तुकला और इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटकों को आकर्षित करती है। उन्होंने कहा कि इन हवेलियों के संरक्षण करने के साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देते हुए राज्य सरकार प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है।

Mines News: मुख्यमंत्री माइनिंग सेक्टर में राजस्थान को अग्रणी प्रदेश बनाने पर जोर देते हैं —प्रमुख सचिव खान

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खान विभाग के प्रमुख सचिव टी. रविकान्त ने कहा है कि बड़े राजस्व लक्ष्य को प्राप्त करना बड़ी चुनौती है पर इसे समन्वित प्रयासों से अर्जित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 26 अक्टूबर तक विभाग द्वारा गत वित्तीय वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 115 करोड़ रुपए अधिक राजस्व संग्रहित करते हुए 4866 करोड़ 17 लाख रुपए का राजस्व संग्रहित किया जा चुका है। वित्तीय वर्ष के आगामी माहों में हमें राजस्व छीजत रोकने, अधिक से अधिक राजस्व वसूल करने और माइनिंग सेक्टर में राजस्व वसूली के लक्ष्य को अर्जित करने संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा। गत वित्तीय वर्ष में इस अवधि तक 4751 करोड़ 57 लाख रुपए का राजस्व जमा हुआ था। प्रमुख सचिव ने मंगलवार को सचिवालय में कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा माइनिंग सेक्टर में राजस्थान को अग्रणी प्रदेश बनाने और नित नए आयाम स्थापित करने पर जोर देते रहे हैं। उन्होंने निदेशालय सहित फील्ड अधिकारियों को मोनेटरिंग और एनालिसिस सिस्टम को और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए। किन्ही कारणों से अभी तक जहां आरसीसी-ईआरसीसी ठेके नहीं हो पाये हैं वहां कम राजस्व वसूली पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने विभागीय मशीनरी को चाकचोबंद करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को रुटिन के काम के साथ ही सस्टेनेबल माइनिंग, माइनिंग प्लान के अनुसार माइनिंग, सुरक्षा मानकों की पालना सहित माइनिंग लीजों में हो रहे खनिज उत्पादन का विश्लेषण भी करना चाहिए कि पहले से कम या ज्यादा उत्पादन हो रहा है तो उसके क्या कारण है? उत्पादन के अनुसार रायल्टी आदि जमा हो रही है या नहीं और इसके साथ ही अवैध खनन गतिविधियों पर सख्ती से कार्रवाई करने में कोताही नहीं बरती जाए। श्री रविकान्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अतिरिक्त निदेशकों और अधीक्षण अभियंताओं का दायित्व है कि वे अपने स्तर पर नियमित समीक्षा करे और आवश्यकतानुसार अधीनस्थ अधिकारियों को मार्गदर्शन, सहयोग और समन्वय बनाएं ताकि बेहतर परिणाम प्राप्त हो सके। उन्होेंने माइनर मिनरल ब्लॉकों के डेलिनियेशन से लेकर ऑक्शन के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। संयुक्त सचिव माइंस अरविन्द सारस्वत ने ई-फाइलिंग निष्पादन में समय सीमा कम करने, विधानसभा प्रश्नों के उत्तर भिजवाने, विभाग से संबंधित समाचारों पर आवश्यकतानुसार टिप्पणी भिजवाने, मुख्यमंत्री कार्यालय सहित अन्य पत्रों के तत्काल उत्तर भिजवाने की आवश्यकता प्रतिपादित की।

DIPR NEWS: सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने अशोक स्तंभ के सम्मान में चार—चांद लगाया

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———अनिल त्रिवेदी

प्रदेश में राज्य सरकार के राजस्थान सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने अशोक स्तंभ के प्रचार—प्रसार के लिये अभिनव पहल की है। यह कार्य अतिरिक्त निदेशक प्रशासन एवं पदेन शासन उप सचिव गोरधन लाल शर्मा के अथक परीश्रम और प्रतिबद्धता से संभव हो पाया है। उन्होने विभाग में अशोक स्तंभ के मानमर्यादा को बढ़ाने लिये नये आयाम स्थापित किया है। श्री शर्मा ने अपने जीवन काल में दो बड़े कार्य किये हैं। जिससे उन्होने अपने परिवार, समाज और प्रदेश का मान बढ़ाया है। जिसमें पहला कार्य वो है जब श्री शर्मा राजस्थान प्रशासनिक सेवा में अधिकारी बने और दुसरा कार्य अब किया जब उन्होने कार्यालय के बाहर गेट पर लगने वाली नेम प्लेट पर अशोक स्तंभ का चिन्ह लगाया है। इससे अशोक स्तंभ को अपनी खोई हुई पहचान मिल गई है और इस चिन्ह को चार—चांद लग गये। अतिरिक्त निदेशक ने समस्त प्रदेश में ही नहीं अपितु देश भर में अशोक स्तंभ को एक नई पहचान दी है। देश—विदेश तक एक संदेश दिया है कि अशोक स्तंभ का प्रचार—प्रसार इस तरह से भी किया जा सकता है। इससे राष्ट्र का गौरव भी बढ़ा है। भारत सरकार को एक अधिसूचना जारी कर आदेश प्रसरित करना चाहिये कि देश के महामहिम राष्ट्रपति सहित सभी राज्यों के राज्यपाल महोदयों को अपनी नेम प्लेट के साथ अशोक स्तंभ का उपयोग जरूर करें। महामहिम राष्ट्रपति सहित सभी राज्यों के राज्यपाल महोदय ही क्यों देश के यशस्वी प्रधानमंत्री सहित उनके समस्त मंत्री मंडल को भी अपने—अपने कार्यालयों के गेट पर आशोक स्तंभ के साथ अपना नाम लिखना चाहिए। मैं तो कहता हूं कि ये सभी ही क्यों? देश के सभी मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, शासन सचिव, उप सचिव यानि कि सभी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को भी अपने कार्यालयों के गेट पर अपने नाम के साथ अशोक स्तंभ लगी तख्ती लटका देनी चाहिए। इतना ही नहीं देश के सभी राज्यों के प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को भी अपने नाम के साथ अशोक स्तंभ को कार्यालय के गेट पर लटका देना चाहिए जैसे प्रदेश में राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी गोरधन लाल शर्मा ने टांक रखा है। ऐसा करने से भारत सहित सम्पूर्ण विश्व में अशोक स्तंभ का गौरव तो बढ़ेगा ही देश के इतिहास के लिये प्रासंगिक भी होगा। चेतावनी :— राष्ट्रीय प्रतीक का अनुचित प्रयोग करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। ‘प्रतीक और नाम (अनुचित प्रयोग निवारण) अधिनियम, 1950’ और ‘भारत का राज्य प्रतीक (अनुचित प्रयोग का प्रतिषेध) अधिनियम, 2005’ जैसे कानूनों के तहत ऐसा करना अपराध माना जाता है। उल्लंघन के लिए जेल की सजा और जुर्माना अथवा दोनों हो सकते हैं।

C M NEWS: मुख्यमंत्री का नई दिल्ली दौरा- प्रधानमंत्री सहित केन्द्रीय मंत्रियों से की मुलाकात

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित केन्द्रीय मंत्रियों से उनके आवास पर मुलाकात कर राजस्थान के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की है। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को विकसित राजस्थान-2047 के संकल्प को साकार करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विकसित राजस्थान-2047 विजन डॉक्यूमेंट युवा, महिला, गरीब और किसान को केन्द्र में रखते हुए विकसित भारत-2047 की आकांक्षाओं के अनुरूप राजस्थान का चहुंमुखी विकास सुनिश्चित करेगा। वहीं पत्रकारों से बातचीत में श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राजस्थान की डबल इंजन सरकार प्रदेश की समग्र प्रगति के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही है। इसमें हमें केन्द्र सरकार का पूरा सहयोग मिल रहा है और संयुक्त प्रयासों से राजस्थान तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर हो रहा है। श्री शर्मा ने सोमवार को केन्द्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात की। इस दौरान राजस्थान के आर्थिक, ग्रामीण और कृषि क्षेत्र के विकास से संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री से भेंट के दौरान दोनों नेताओं ने कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय के उच्चाधिकारियों के साथ संवाद किया और राजस्थान में सिंचाई हेतु टांकों की व्यवस्था को जारी रखने, ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाने, योजना के अंतर्गत सांकेतिक आवंटन में वृद्धि करने, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और पोषण मिशन की उप-योजनाओं में तारबंदी कार्यक्रम को शामिल रखने व दलहन उप-योजना के अंतर्गत कांटेदार तारबंदी पर अनुदान स्वीकृति जैसे कृषक हितैषी विषयों पर सार्थक निर्णय लिए गए। इस दौरान श्री चौहान ने पत्रकारों से बातचीत में राजस्थान के विकास के लिए मुख्यमंत्री द्वारा किए जा रहे अथक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि श्री शर्मा राजस्थान के विकास और प्रदेशवासियों के कल्याण के लिए बेहतरीन कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में राजस्थान तेजी से प्रगति की ओर अग्रसर है। दूसरी ओर श्री शर्मा ने केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण से भी शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों नेताओं ने राजस्थान के आर्थिक विकास, विभिन्न योजनाओं के बेहतर वित्तीय प्रबंधन और जीएसटी बचत उत्सव से संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री का आभार जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की पहल पर वित्त मंत्रालय द्वारा जीएसटी दरों में की गई कमी का आम आदमी को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। इससे दैनिक उपयोग की अधिकांश वस्तुएं सस्ती हुई हैं। उन्होंने कहा कि जीएसटी बचत उत्सव में हिस्सा लेते हुए आमजन ने त्यौहारों पर उत्साह के साथ स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी कर ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा दिया है।

Rajasthan News: संदिग्ध दिव्यांग प्रमाण पत्र का मामला सरकार ने सौपा एसओजी को

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सिरोही जिले में वर्ष 2019 से जनवरी 2024 के बीच दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने में हुई अनियमितता को लेकर राज्य सरकार गंभीर है। इस संबंध में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देश पर प्रकरण दर्ज करने के लिए एसओजी को पत्र लिखा गया है। प्रकरण में दोषी अधिकारियों-कार्मिकों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। निदेशक जनस्वास्थ्य डाॅ. रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि सिरोही में 10 मार्च, 2019 से 15 जनवरी, 2024 तक डाॅ. राजेश कुमार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। इस अवधि में जिले में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाए जाने की शिकायतें सामने आई थीं, जिस पर एक कमेटी गठित कर जांच की गई थी। जांच के अनुसार तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के कार्यकाल में कुल 7613 दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किये गये, इनमें से माइग्रेटेड आवेदन के आधार पर 5177 दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किये गये हैं, जो एक मात्र विशेषज्ञ चिकित्सक के द्वारा जारी किये गये हैं, जो संदेहास्पद एवं कूटरचित हैं। वहीं सभी प्रमाण पत्रों पर पूर्व सीएमएचओ डॉ. राजेश कुमार के हस्ताक्षर नहीं होकर डॉ. सुशील परमार के हस्ताक्षर से जारी किये गये हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश कुमार के विरूद्ध पुलिस अधीक्षक एसओजी को प्रकरण भिजवाकर कार्रवाई हेतु लिखा गया है।

C M NEWS: सवाई माधोपुर जिला राष्ट्रीय ऊर्जा क्रांति का सशक्त सहभागी —मुख्यमंत्री

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी ऊर्जा नीति और मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में राजस्थान अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में देश का सिरमौर राज्य बन चुका है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के माध्यम से राज्य में सौर ऊर्जा उत्पादन ने नई ऊँचाइयाँ छू ली हैं, जिसमें सवाई माधोपुर जिला भी इस राष्ट्रीय ऊर्जा क्रांति का सशक्त सहभागी है। जिले के बौंली उपखण्ड स्थित कोलाड़ा 33/11 केवी सब-स्टेशन क्षेत्र में हाल ही में 1.82 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया है। यह राज्य का 956वां सौर संयंत्र है, जिससे सवाई माधोपुर जिले की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राजस्थान ने पीएम-कुसुम योजना के कंपोनेंट-ए एवं कंपोनेंट-सी के अन्तर्गत अब तक 2,000 मेगावाट क्षमता से अधिक के विकेन्द्रित सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर देश में एक नई मिसाल कायम की है। योजना के कंपोनेंट-ए में राजस्थान देश में प्रथम स्थान तथा कंपोनेंट-सी में महाराष्ट्र एवं गुजरात के बाद तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। वहीं सवाई माधोपुर सर्किल के रामसिंहपुरा 33/11 केवी सब-स्टेशन क्षेत्र में 1.12 मेगावाट क्षमता का विकेन्द्रित सौर संयंत्र भी प्रारंभ किया गया है, कोलाड़ा और रामसिंहपुरा में 2.94 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना से लगभग 250 से अधिक कृषक परिवारों को सिंचाई के लिए दिन के समय सौर ऊर्जा आधारित बिजली उपलब्ध होगी। सवाई माधोपुर क्षेत्र में पीएम-कुसुम योजना के कंपोनेंट ए और सी दोनों घटकों में सराहनीय प्रगति हो रही है। सभी संयंत्रों की स्थापना उपरांत किसानों को सिंचाई के लिए दिन में बिजली उपलब्ध हो सकेगी और कृषि उत्पादन में भी वृद्धि होगी। वर्तमान में कुसुम योजना कंपोनेंट-ए के तहत अब तक कुल 3 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र चालू हैं, जबकि अतिरिक्त 3.67 मेगावाट क्षमता के संयंत्रों पर कार्य प्रगति पर है। जिले के सारसोप में 1.42 मेगावाट एवं कोलाड़ा में 2.25 मेगावाट उत्पादन क्षमता के संयंत्रों का स्थापना कार्य अंतिम चरण में है। किसानों के लिए लाभ का नया सूर्योदय प्रधानमंत्री कुसुम योजना ने देश भर में किसानों के जीवन में नई ऊर्जा का संचार किया है। इस योजना से किसान अब बिजली व डीजल निर्भरता से मुक्त होकर सौर ऊर्जा का उपभोग कर दिन के समय सिंचाई कर रहे हैं। इससे न केवल उत्पादन लागत में कमी आई है, बल्कि अतिरिक्त आय का मार्ग भी खुला है।