Excise News:आबकारी विभाग ने अवैध मदिरा की रोकथाम के लिये की प्रभावी कार्यवाही

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आबकारी आयुक्त शिवप्रसाद नकाते के निर्देशानुसार प्रदेश में दीपावली पर्व के तहत अवैध मदिरा निर्माण, भण्डारण, परिवहन एवं विक्रय पर रोकथाम के लिए जारी विशेष निरोधात्मक अभियान के तहत नाकाबंदी, गश्त, रेड की प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। इसके तहत प्रदेश में उदयपुर, श्रीगंगानगर, बीकानेर, हनुमानगढ, जयपुर, अलवर, अनूपगढ सहित विभिन्न जिलों में कार्यवाही कर अभियोग दर्ज किए गए। आबकारी आयुक्त के निर्देशानुसार अतिरिक्त आबकारी आयुक्त प्रशासन ओपी जैन और अतिरिक्त आबकारी आयुक्त प्रदीप सिंह सांगावत के सुपरविजन में जारी विशेष निरोधात्मक अभियान के तहत जीरो टोलरेंस की नीति अपनाते हुए अन्य राज्य की शराब की तस्करी, अवैध मदिरा के परिवहन व विक्रय पर आबकारी निरोधक टीमों द्वारा मुस्तैदी से प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। इन क्षेत्रों में कार्यवाही- जयपुर ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम त्रिलोकपुरा, बस्सी सिंडोली, फलियावास, साखचंदजी की ढाणी, सांभरिया, लिसाड़िया गुड़ा में हथकड़ शराब पर कार्रवाई करते हुए 52 लीटर हथकड़ शराब एवं मोटरसाईकल जब्त की गई। इसी क्रम में आगरा रोड़ पर नाकाबंदी करते हुए विभिन्न वाहनों की सघन तलाशी ली गई। वहीं उपायुक्त आबकारी निरोधक दल प्रद्युम्न सिंह चुण्डावत के सुपरविजन में अहमदाबाद रोड़ पर खेरवाड़ा टोल नाका, डाकन कोटड़ा टोल नाका एवं कीर की चौकी टोल नाका पर नाकाबंदी करते हुए हल्के एवं भारी वाहनों की सघन तलाशी ली गई। मौके पर पीओ दौलत सिंह, कैलाश मय आबकारी जाब्ता मौजूद रहे। श्रीगंगानगर-जिले के ग्राम खाट लबाना में भी गश्त, दबिश की कार्रवाही में 2700 लीटर वॉश और 8 कच्ची भट्टी नष्ट की गई। कार्रवाई जिला आबकारी अधिकारी एचएस राठौड़ के नेतृत्व में आबकारी दल द्वारा की गई। हनुमानगढ- जिले के ग्राम गंगाघाट अमरपुर थेड़ी में भी आबकारी निरोधक दल ने कार्रवाही की। इस दौरान 6500 लीटर उत्तेजित वॉश एवं 8 कच्ची भट्टी नष्ट की गई। मोटरसाईकल पर 30 लीटर अवैध हथकड़ शराब परिवहन पर कार्रवाई कर सीज किया गया। इसी क्रम में नाका नोहर पालु रोड़ पर नाकाबंदी करते हुए सघन तलाशी ली गई। अनूपगढ़-आबकारी निरोधक दल की कार्रवाई में 73 लीटर अवैध शराब जब्त करते हुए 400 लीटर वॉश एवं 5 भट्टी को नष्ट किया गया। इस दौरान 5 अभियोग दर्ज करते हुए एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया। अलवर-जिले के आबकारी थाना रामगढ़ क्षेत्र में अवैध हथकड़ शराब के विरूद्ध कार्रवाई करते हुए 2500 लीटर वॉश एवं 3 भट्टी को नष्ट किया गया। इस मौके पर 2 अभियोग दर्ज किए गए बीकानेर-जिले में भारतमाला हाईवे लूणकरणसर एवं रासीसर टोल प्लाजा नोखा क्षेत्र में नाकाबंदी करते हुए वाहनों की सघन जांच की गई। बीकानेर शहर में 288 देशी शराब के पव्वे सीज किए गए।

C M NEWS: जल जीवन मिशन से साकार हो रहा ‘हर घर नल से जल’ का सपना — मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के गांव-ढाणी तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राज्य सरकार के अब तक के कार्यकाल में जल जीवन मिशन के अंतर्गत 7 हजार 500 गांवों के 13.10 लाख घरों को नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया गया है। इस पर लगभग 10 हजार करोड़ रूपये की लागत आई है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में देश के ग्रामीण क्षेत्रों में नल से जल पहुंचाने के उद्देश्य से यह योजना प्रारंभ की गई थी। केन्द्र एवं राज्य सरकार की संयुक्त भागीदारी से संचालित यह योजना राजस्थान में औसतन कम बारिश और गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए प्रदेशवासियों के लिए वरदान साबित हो रही है। जल जीवन मिशन के अन्तर्गत 49.70 लाख नल कनेक्शन जारी — प्रदेश के हर ग्रामीण परिवार को नल से जल (टैप वॉटर) की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस योजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। अब तक राज्य में जल जीवन मिशन के अन्तर्गत 49.70 लाख नल कनेक्शन जारी कर लगभग 61.44 लाख ग्रामीण परिवारों को नल से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा चुका है। प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 92.11 लाख नल कनेक्शनों के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में कुल 78.12 लाख नल कनेक्शनों के कार्यादेश जारी कर दिये गये हैं। शेष 13.99 लाख नल कनेक्शनों के कार्यादेश शीघ्र जारी कर दिए जाएंगे। प्रदेश में जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं की प्रगति- प्रदेश में जल जीवन मिशन के अंतर्गत 11 हजार 347 योजनाएं स्वीकृत की गयी जिनमें 188 वृहद् योजनाएं एवं 11 हजार 159 अन्य योजनाएं हैं इनमें से 152 वृहद् योजना व 10 हजार 734 अन्य योजनाओं के 59 हजार 104 करोड़ रुपये के कार्यादेश जारी किये जा चुके हैं। इनमें से 38 वृहद् योजनाएं एवं 5,271 अन्य योजनाओं के कार्य पूर्ण हो चुके हैं। जिनमें 114 वृहद् योजनाएं एवं 5,263 अन्य योजनाएं प्रगतिरत है। राजस्थान में जल जीवन मिशन सिर्फ एक योजना नहीं है, बल्कि एक सामाजिक बदलाव का प्रयास है। यह राज्य के उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जो दशकों से पानी की कमी से जूझ रहे हैं। मिशन के सफल कार्यान्वयन से न केवल पानी की समस्या का समाधान होगा, बल्कि यह ग्रामीण राजस्थान की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

Transportation News: परिवहन विभाग ने चौमू में दो स्लीपर बसों को किया जब्त

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प्रदेश में सरकार सड़क सुरक्षा और यात्री सुरक्षा अभियान शुरू करने जा रही है। लेकिन जिला परिवहन कार्यालय चौमूं ने इस कड़ी में अग्रीम कार्यवाही करते हुए अपने क्षेत्र में दो स्लीपर बसें जब्त कर लिया। प्रादेशिक परिवहन अधिकारी जयपुर द्वितीय धर्मेन्द्र कुमार ने बताया कि जिला परिवहन अधिकारी चौमूं अनूप सहारिया और उनकी टीम ने संयम का परिचय देते हुए अवैध वाहनों को ज़ब्त किया है। परिवहन विभाग ने बस बॉडी कोड AIS-119/52 के प्रावधानों के तहत स्लीपर बस नंम्बर — MP44 ZD 9944 और AR11 L 1111 का निरिक्षण किया इस दौरान दोनो बसों में कोड के अनुसार गंभीर उल्लंघन पाए गये। उन्होने बताया कि बस में बैठे यात्रियों के लिये वैकल्पिक व्यवस्था की गई और उन्हे भोजन जैसी व्यवस्था भी की गई। श्री कुमार ने बताया की निरिक्षण के दौरान एक LPG गैस सिलेंडर बस में पाया गया जो ख़तरनाक साबित हो सकता था। उल्लेखनीय है कि यात्री वाहनों में ज्वलनशील पदार्थों का परिवहन निषेध है। वहीं स्लीपर कोच बस की लंबाई के अनुरूप स्लीपरों की संख्या अधिकतम छह पंक्तियों मेंं हो सकती है और अधिकतम 36 स्लिपर हो सकते हैं। लेकिन इसके वाहन स्वामी ने चैसिस को काटकर उसके पीछे बॉडी बढ़ाकर सात पंक्तियां बनाकर कुल 50 स्लिपर लगा रखे थे और बस में आपातकालीन दरवाज़ा नियमानुसार नहीं था व उसे बाधित कर रखा था। बस के अन्य आपातकालीन द्वार भी नियमानुसार नहीं थे। उन्होने कहा कि इस कार्यवाही के माध्यम से परिवहन विभाग ने संदेश दिया कि किसी भी परिस्थिति में आमजन को ख़तरा कारित कर चलने वाले ऐसे अनाधिकृत परिवर्तन वाले वाहनों को सड़क पर नहीं चलने दिया जाएगा और इन्हें ज़ब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

Teacher suspended News: प्रदेश में पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के दूध पाउडर दुरुपयोग पर 5 शिक्षक निलंबित

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार कल्याणकारी योजनाओं का पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसी क्रम में स्कूली शिक्षा विभाग ने पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के तहत दूध पाउडर के दुरुपयोग की खबर का संज्ञान लेते हुए संलिप्त कार्मिकों पर कड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने उक्त प्रकरण में प्रारंभिक जांच में दोषी पाए गए श्रीमती शीला बलाई (अध्यापक लेवल-1-राजकीय प्राथमिक विद्यालय, जाटों की ढ़ाणी, भोमिया जी का थान गंगावास, कल्याणपुर), सुरेश कुमार (प्रबोधक-राजकीय प्राथमिक विद्यालय, नागणेसियों की ढ़ाणी, गंगावास, कल्याणपुर), मंगलाराम (वरिष्ठ अध्यापक-राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, भारी नगर, बावड़ी, जोधपुर), पप्पाराम गोदारा (व्याख्याता-राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, नागाणा फाटा, बालोतरा) और राजेश कुमार मीणा (प्रधानाध्यापक-राजकीय उच्च प्राथमिक संस्कृत विद्यालय, भिनयाराम, माण्डवों की ढाणी) को सीसीए (1958) के नियम 13(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने उक्त प्रकरण की जांच के लिए स्कूल शिक्षा निदेशालय, बीकानेर के अधीन एक तीन सदस्यीय समिति का गठन भी किया है। यह उच्च स्तरीय जांच समिति दूध पाउडर के दुरुपयोग की खबर में उल्लेखित तथ्यों का सत्यापन करेगी, साक्ष्य एकत्र करेगी और चार दिनों में एक विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इस दौरान यदि किसी अधिकारी या शिक्षक की संलिप्तता की पुष्टि होती है, तो राजस्थान सिविल सेवा (सीसीए) नियम, 1958 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। प्रदेशभर के विद्यालयों में मध्याह्न भोजन के लिए सामग्री के किसी भी दुरुपयोग की रोकथाम सुनिश्चित करने के क्रम में स्कूली शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों और खंड शिक्षा अधिकारियों को तीन दिनों के भीतर सत्यापित कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही, सभी पीईईओ (पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी) और यूसीईईओ (शहरी क्लस्टर प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी) को अपने अधिकार क्षेत्र में किन्हीं दो स्कूलों (कुल लगभग 22,500 स्कूल) का गहन निरीक्षण कर जिला शिक्षा अधिकारी को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश भी जारी किए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने बताया कि सभी स्कूलों में स्टॉक का भौतिक सत्यापन करने के आदेश भी जारी किए गए हैं। भौतिक सत्यापन में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित के विरूद्ध कठोर कार्यवाही भी की जाएगी। उल्लेखनीय है कि पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के अंतर्गत प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा-8 तक के छात्रों को उनके पोषण में सुधार के लिए गर्म दूध (स्किम्ड मिल्क पाउडर से तैयार) उपलब्ध कराया जाता है। प्रदेश में लगभग 57 लाख स्कूली बच्चों को यह दूध दिया जा रहा है, जिसपर राज्य सरकार लगभग 722 करोड़ रुपये खर्च करती है।

RAjasthan News: पूरे प्रदेश में आपराधिक तंत्र को ध्वस्त किया जाएगा —डीजीपी

राजस्थान में सक्रिय संगठित आपराधिक गैंगों पर प्रभावी कार्यवाही के लिए शनिवार को राजस्थान पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा की अध्यक्षता में पुलिस मुख्यालय में संगठित अपराधियों से अधिक प्रभावित जिलों व रेंजों के अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय सभा का आयोजन हुआ। संबंधित पुलिस अधीक्षक, रेंज आईजी व वरिष्ठ अधिकारी इस में शामिल हुए। डीजीपी ने सभी जिलों को निर्देश दिए कि गैंग संचालन, धमकी, वसूली, फायरिंग और मर्डर जैसे गंभीर अपराधों में लिप्त तत्वों पर तुरंत प्रभावी कार्रवाई की जाए। डीजीपी ने कहा कि राजस्थान पुलिस संगठित अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। अपराधियों को हतोत्साहित करना और जनता में सुरक्षा की भावना बनाए रखना ही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस कार्य में प्रत्येक पुलिसकर्मी को पूरी क्षमता से काम करना होगा। इस दौरान उन्होंने राजस्थान पुलिस की हर अपराध और परिस्थिति का सामना करने और जनसुरक्षा की प्रतिबद्धता को भी उजागर किया। गैंग से जुड़ी गतिविधियों पर सख्ती बरतने के निर्देश :— डीजीपी ने स्पष्ट कहा कि अब कार्रवाई केवल अपराधियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे आपराधिक तंत्र को ध्वस्त किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि राजस्थान में संगठित आपराधिक गैंगों, जो धमकी देने, वसूली करने और भय फैलाने का काम करते हैं। उनका और उनके सदस्यों का चिह्नीकरण करते हुए कठोर और प्रभावी क़ानूनी कार्यवाही की जावें। उन्होंने गैंगों के सहायक, सोशल मीडिया पर फॉलो व प्रमोट करने वालों के विरुद्ध भी कार्यवाही के निर्देश दिए गए। इस दौरान जिलों और रेंजों के प्रभारियों ने अपने—अपने कार्यक्षेत्रों में संगठित अपराधियों की जानकारी व उनको निष्क्रिय करने की कार्ययोजना प्रस्तुत की। डीजीपी ने कहा कि जिलों में गैंग के सक्रिय सदस्यों पर धारा 111 बीएनएस के तहत कार्यवाही की जाए, ताकि अपराधियों के हौसले पस्त हों। उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधियों की सम्पत्ति जब्त करने, वित्तीय स्रोतों पर प्रहार करने और उनके सहयोगियों को भी कानूनी दायरे में लाने के लिए ठोस कार्य योजना बनाई जाए। उन्होंने समस्त राजस्थान पुलिस को टीम वर्क के रूप में कार्य करने, तकनीक पर जोर देने और परम्परागत तरीकों के साथ-साथ नवीन कार्यप्रणाली अपनाने के निर्देश देते हुए कहा कि चिह्नित अपराधियों और गैंगों के विरुद्ध समस्त सूचनाओं को आपस में साझा किया ताकि उन्हें जड़ से निष्क्रिय किया जा सके। वहीं इस दौरान फायरिंग व मर्डर से संबंधित लंबित प्रकरणों की समीक्षा की गई। डीजीपी ने निर्देश दिए कि जिन मामलों में गिरफ्तारी शेष है, उन्हें प्राथमिकता से निपटाया जाए। फरार अपराधियों की धरपकड़ के लिए विशेष अभियान चलाने और अदालतों में पेश चालान की स्थिति की भी रिपोर्ट मांगी गई। उन्होंने कहा कि जिलों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार कई स्थानों पर अपराधियों द्वारा धमकी भरे कॉल आने की शिकायतें मिली हैं। डीजीपी ने ऐसे मामलों में तकनीकी विश्लेषण कर शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर अपराधियों की धमकी या भय का वातावरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभा में एजीटीएफ प्रभारी दिनेश एम एन, एडीजी बीजू जॉर्ज जोसफ, जयपुर पुलिस कमीश्नर सचिन मित्तल, एडीजी अपराध शाखा हवा सिंह, एटीएस/एसओजी के अधिकारी, अपराध शाखा के अधिकारी, बीकानेर, अजमेर, जोधपुर रेंज के अधिकारी, जयपुर व जोधपुर कमिश्नरेट के अधिकारी, 15 जिलों के एसपी, इन रेंज व जिलों के डीएसटी व साइबर सेल के प्रभारी उपस्थित रहे।

C M NEWS: 20 माह में सरकार ने 210 लोकसेवकों पर की अनुशासनात्मक कार्यवाही

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का मानना है कि अधिकारी-कर्मचारी सरकार के शासन तंत्र की मुख्य धुरी हैं, जिनकी जनकल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने में अहम भूमिका होती है। ऐसे में कार्मिक पूरे समर्पण भाव और सत्यनिष्ठा से काम करते हुए राज्यहित को सर्वाच्च प्राथमिकता दें, ताकि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री की मंशानुसार राज्य सरकार आमजन को संवेदनशील, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में राजकीय कार्य के निष्पादन में लापरवाही, अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के दोषी कार्मिकों के विरुद्ध निरंतर सख्त कार्रवाई की जा रही है। राजकीय सेवाओं में अनुशासन और ईमानदारी के लिए सर्वापरि स्थान सुनिश्चित करने के क्रम में राज्य सरकार द्वारा गत पौने दो वर्ष में कुल 210 कार्मिकों के विरुद्ध विभिन्न अनुशासनात्मक कार्यवाहियां की गई हैं। 66 अधिकारियों को किया निलंबित, 98 कार्मिकों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति— राज्य सरकार ने 20 माह के कार्यकाल में आपराधिक प्रकरणों में कार्रवाई करते हुए अखिल भारतीय सेवा और राज्य सेवा के 66 अधिकारियों को निलंबित किया है। वहीं, आपराधिक प्रकरणों में दोष सिद्ध पाए जाने पर 6 अधिकारियों को पदच्युत और 9 अधिकारियों के विरूद्ध आजीवन शत प्रतिशत पेंशन रोकने संबंधी कार्रवाई की है। राजकीय सेवाओं में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा सुनिश्चित करने के क्रम में राज्य सरकार ने 20 माह के कार्यकाल में ही 98 कार्मिकों के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति प्रदान की है और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 17ए के तहत कुल 31 प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण किया है।

C M NEWS: बेटियों को उच्च शिक्षा में अवसर उपलब्ध करवाना राज्य सरकार की प्राथमिकता —मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशानुसार राज्य सरकार बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि प्रदेश की प्रत्येक बेटी उच्च शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनें, जिससे राज्य महिला शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाईयों को छू सकें। इसी क्रम में राज्य सरकार द्वारा संचालित देवनारायण छात्रा स्कूटी वितरण और प्रोत्साहन राशि योजना प्रदेश की किशोरियों में उत्साह और जोश भरने का कार्य कर रही है। प्रदेश में बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए देवनारायण छात्रा स्कूटी वितरण और प्रोत्साहन राशि योजना कॉलेज शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2011-12 में आरम्भ की गई थी। इस योजना के तहत राजस्थान मूल की विशेष पिछडा वर्ग की वह छात्रा जिसने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड या केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं परीक्षा में 50 प्रतिशत या इससे अधिक अंक प्राप्त किये और राजस्थान स्थित राजकीय महाविद्यालय, राज्य वित्त पोषित विश्वविद्यालय में स्नातक प्रथम वर्ष में नियमित अध्ययनरत है, उसे 12 वीं परीक्षा में प्राप्तांक प्रतिशत की वरीयता सूची के आधार पर स्कूटी प्रदान की जाती है। वर्ष 2025 से बालिकाओं को हर वर्ष 4 हजार 240 स्कूटियों का किया जाएगा वितरण- मुख्यमंत्री की पहल पर इस योजना के तहत प्रतिवर्ष निर्धारित लक्ष्य के अलावा अन्य समान कट ऑफ प्राप्तांक वाली छात्राओं को भी स्कूटी निःशुल्क वितरित की जाती है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए छात्रा के माता पिता/अभिभावक/संरक्षक/पति की वार्षिक आय 2.50 लाख रूपये से कम होनी चाहिए। वर्ष 2019-20 से प्रतिवर्ष 1500 स्कूटी वितरण का लक्ष्य निर्धारित था, जिसे राज्य सरकार द्वारा बढ़ाया गया है और अब वर्ष 2025-26 से 4 हजार 240 स्कूटियों का वितरण किया जाएगा। योजना के अंतर्गत विशेष पिछडा वर्ग की वे छात्राएं जो स्कूटी स्वीकृति की वरीयता सूची में नहीं आ पाती हैं, उनके लिए स्नातक प्रथम वर्ष, द्वितीय वर्ष एवं तृतीय वर्ष में 50 प्रतिशत या अधिक अंक प्राप्त करने पर 10,000 रूपये वार्षिक प्रोत्साहन राशि दी जाती है। साथ ही, उन्हें स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष में 20,000 रूपये वार्षिक तथा स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष में 50 प्रतिशत या अधिक अंक प्राप्त करने स्नातकोत्तर द्वितीय वर्ष में 20,000 रूपये वार्षिक प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। इसके लिए विशेष पिछडा वर्ग की वे छात्राएं जिनके माता-पिता अथवा अभिभावक की वार्षिक आय 2.50 लाख रूपये से कम है तथा जो राजकीय महाविद्यालय, राज्य वित्तपोषित विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत है, पात्र हैं। राज्य सरकार द्वारा देवनारायण छात्रा स्कूटी वितरण के तहत अब तक 74 करोड़ 35 लाख रुपये व्यय कर 16 हजार 21 छात्राओं को लाभान्वित किया जा चुका है। साथ ही, प्रोत्साहन राशि में 9 करोड़ 76 लाख रुपए व्यय कर 19 हजार 100 छात्राएं लाभान्वित की जा चुकी हैं। योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 56.10 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान स्वीकृत है, जिसके विरूद्ध माह सितंबर 2025 तक 32.92 करोड़ राशि का व्यय किया जा चुका है।  

C M NEWS: राष्ट्रीय पोषण माह-2025 में प्राप्त द्वितीय स्थान पर मुख्यमंत्री ने दी बधाई

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राष्ट्रीय पोषण माह-2025 में राजस्थान को देशभर में द्वितीय स्थान प्राप्त होने पर बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि जनसहभागिता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की निष्ठा, मेहनत और राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों का परिणाम है। यह कीर्तिमान सम्पूर्ण प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश में पोषण के क्षेत्र में सुधार हेतु नवाचार किए गए हैं, जिसके तहत पोषण माह— 2025 में जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता, गृह भ्रमण, पौष्टिक आहार वितरण, मातृ और शिशु स्वास्थ्य परामर्श के लिए व्यापक गतिविधियां आयोजित की गईं। मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, आशा सहयोगियों और स्थानीय संगठनों का उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि राज्य सरकार सुपोषित राजस्थान की दिशा में प्रभावी कदमों के लिए सतत् प्रयासरत रहेगी।

Medical College News: प्रदेश में अब मेडिकल काॅलेजों में मैनेजमेंट सीटों के नाम पर नहीं होगी अधिक फीस की वसूली

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चिकित्सा शिक्षा विभाग के शासन सचिव अम्बरीष कुमार ने बताया कि पूर्व में कुछ निजी मेडिकल काॅलेजों द्वारा मनमाने ढंग से फीस वसूलने की शिकायतें मिली थी। इसके बाद राज्य सरकार ने विद्यार्थियों के हित में फीस वसूली के नियमों में पूर्ण पारदर्शिता रखने के उद्देश्य से यह आदेश जारी किया है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस्लामिक एकेडमी ऑफ एजुकेशन बनाम कर्नाटक राज्य मामले में दिए गए निर्णय की अनुपालना में यह आदेश जारी किया गया है। जिसमें निजी शैक्षणिक संस्थानों में शुल्क निर्धारण और प्रवेश प्रक्रिया को विनियमित करने पर जोर दिया गया है। आदेश के अनुसार राज्य स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति द्वारा निर्धारित शुल्क संरचना का पालन सभी मेडिकल काॅलेजों के लिए अनिवार्य है। कुछ काॅलेज 15 प्रतिशत सीटों को मैनेजमेंट सीट्स बताकर कर रहे थे अतिरिक्त वसूली— चिकित्सा शिक्षा सचिव ने बताया कि यह आदेश मुख्य रूप से निजी चिकित्सा महाविद्यालयों द्वारा अनाधिकृत रूप से अतिरिक्त शुल्क वसूली की शिकायतों के आधार पर जारी किया गया है। विशेष रूप से यूजी काउंसलिंग बोर्ड की वेबसाइट पर कुछ निजी कॉलेजों द्वारा 15 प्रतिशत सीटों को मैनेजमेंट सीट्स बताकर अतिरिक्त शुल्क प्रदर्शित किया जा रहा है, जो शुल्क नियामक समिति द्वारा अधिकृत नहीं है। यह सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की अवहेलना है, जिसमें शिक्षा को लाभकारी व्यवसाय बनाने पर रोक लगाई गई है। शिकायतों और निरीक्षणों से सामने आई स्थिति— कई मामलों में विद्यार्थियों से निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूल करने की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। राज्य सरकार को प्राप्त शिकायतों और निरीक्षणों से पता चला कि कुछ संस्थाएं व्यावसायीकरण की प्रवृत्ति अपनाकर विद्यार्थियों का शोषण कर रही हैं, जो संवैधानिक मूल्यों के विरूद्ध है। इस आदेश से ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सकेगी। आदेश के अनुसार निजी चिकित्सा महाविद्यालयों को अनुमोदित शुल्क संरचना का पालन करना होगा। सभी निजी चिकित्सा महाविद्यालयों और डेंटल महाविद्यालयों को समिति द्वारा निर्धारित शुल्क संरचना के अनुसार ही विद्यार्थियों से शुल्क वसूल करना होगा। ज्यादा शुल्क लिया तो ब्याज सहित लौटाना होगा, संबद्धता हो सकती है समाप्त— चिकित्सा शिक्षा सचिव ने बताया कि किसी भी संस्था द्वाराअनुमोदित शुल्क से अधिक कोई अन्य शुल्क वसूला जाता है तो प्रभावित विद्यार्थियों को 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ शुल्क वापस किया जाएगा। नियमों का अनुपालन न करने पर संस्था की संबद्धता आरयूएचएस और एमएमयू से समाप्त की जा सकती है, अतिरिक्त शुल्क काॅलेज की संपत्तियों से वसूल किया जाएगा और प्रभावित विद्यार्थियों को अन्य चिकित्सा महाविद्यालयों में स्थानांतरित किया जाएगा। ऐसी संस्थाओं के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। इसकी जानकारी एनएमसी और डीसीआई को भी दी जाएगी। संबद्धता समाप्त होने पर विद्यार्थियों के शुल्क और वित्तीय भार की वसूली संबंधित संस्था से की जाएगी। आदेश से फीस वसूली में आएगी पारदर्शिता, चिकित्सा शिक्षा होगी बेहतर— राज्य सरकार के इस आदेश से विद्यार्थियों से अनुचित फीस वसूली पर प्रभावी रोकथाम लगेगी। साथ ही, चिकित्सा शिक्षा अधिक सुलभ और किफायती बनेगी। इससे मेरिट आधारित प्रवेश प्रक्रिया मजबूत होगी और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी, व्यावसायीकरण पर रोक लगेगी और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। चिकित्सा शिक्षा का स्तर बेहतर होगा और स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान करने वाले योग्य डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी। ईमानदार संस्थाओं को समान प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलेगा। चिकित्सा शिक्षा सचिव ने कहा है कि विद्यार्थी और अभिभावक प्रवेश से पहले शुल्क की आधिकारिक सूची की जांच कर लें और कोई अनियमितता पाएं तो तुरंत चिकित्सा शिक्षा विभाग या शुल्क निर्धारण समिति से शिकायत करें।

High Court News: राजस्थान आवासन मंडल की भूमि पर बसी 87 अवैध कॉलोनियां नहीं होगी नियमित —हाईकोर्ट

सावधान यदि आप जयपुर सहित किसी भी शहर में अपना घर बनाने के लिये प्लॉट लेने की सोच रहे हैं तो भूमाफियाओं के चुंगल से आपको बचना होगा। ये भूमाफिया लोगों को फंसा कर सरकारी भूमि पर अधिकारियों से मिलीभगत कर अवैध कॉलोनियों का सर्जन कर देते हैं। वैसे जयपुर जैसे शहर में ये आम बात है। लेकिन इस तरह का मामला सांगानेर क्षेत्र में देखने को मिला है। यहां राजस्थान आवासन मंडल की भूमि पर भूमाफियाओं ने अधिकारियों से मिलकर 87 अवैध कॉलोनियां बसा दी। मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। सरकार 87 अवैध कॉलोनियों को नियमित करना चाहती है। लेकिन 20 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट ने मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकारी जमीन पर अतिक्रमण को कैसे नियमित किया जा सकता है और कोर्ट ने अवैध निर्माण को नियमित करने के राज्य सरकार के प्रयासों पर रोक लगा दी, वहीं सभी अवैध निर्माण हटाकर आठ सप्ताह में रिपोर्ट तलब की। कोर्ट ने दोषी अधिकरियों के खिलाफ कार्रवाई करने को भी निर्देश दिये। वहीं हाईकोर्ट में पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने अपना पक्ष रखते हुए आरोप लगाया कि इन अवैध कालोनियों में कई रसूखदारों के प्लाॅट हैं। उनके दबाव में राज्य सरकार इन्हे नियतित करना चाहती है। मामले को लेकर राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की लेकिन सुप्रीम कोर्ट नाराजगी व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर दखल करने से मना कर दिया और कहा कि वे अपना पक्ष हाईकोर्ट में ही रखे। वहीं सुप्रीम कोर्ट का ये रूख देखते हुए राजस्थान सरकार ने अपील वापस लेने की इच्छा जताई है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायाधीश संदीप मेहता की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने सरकार से स्पष्ट तौर पर कहा कि इस मामले में जो भी कहना है, हाईकोर्ट में कहें सुप्रीम कोर्ट अंतरिम आदेश पर दखल नहीं करेगा। आपको बतादें कि पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि राजस्थान सरकार ने 12 मार्च 2025 को सांगानेर की उन कॉलोनियो को नियमित करने का आदेश जारी किया, जो आवासन मंडल के लिए अवाप्त जमीन पर अवैध रूप से बसाई गई है। याचिका के अनुसार ये 87 कालोनियां बी-2 बाईपास से सांगानेर के बीच के क्षेत्र में बसी हैं। इस भूमि के लिए आवासन मंडल की ओर से काश्तकारों को भुगतान किया जा चुका। लेकिन अधिकारियों ने भूमाफियाओं से मिलीभगत कर यहां कब्जे करवा दिए और अब नियमन करवाया जा रहा है।