Roadways News: बस स्टैंडों पर यात्रियों को मिलेगी विस्तृत सुविधाएं —प्रेमचंद बैरवा

उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने बुधवार को शासन सचिवालय में राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने रोडवेज की विस्तृत कार्यप्रणाली, यात्री सुविधाओं, राजस्व वृद्धि और बजट घोषणाओं से संबंधित विभिन्न बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की। उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रोडवेज की ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्रणाली को और अधिक प्रभावी व सरल बनाया जाए। मोबाइल एप और वेबसाइट के माध्यम से यात्रियों को सहज सुविधा उपलब्ध हो, इसके लिए तकनीकी उन्नयन किया जाए। उन्होंने बस स्टैंडों का नवीनीकरण व सौंदर्यीकरण और बस स्टैंड पर स्वच्छ शौचालय, स्वच्छ पेयजल, आरामदायक प्रतीक्षालय, डिजिटल सूचना पट्ट और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। श्री बैरवा ने निगम वित्तीय व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस रणनीति बनाकर संसाधनों का उचित उपयोग, अनुशासनात्मक व्यवस्था, राजस्व रिसाव पर नियंत्रण और संचालन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बस चालकों व परिचालकों को निर्देश दिए जाये कि सभी बसें निर्धारित समय पर ही बस स्टैंड से संचालित हों इससे यात्रियों का रोडवेज पर विश्वास बढ़ेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री के आमजन को सुलभ व किफायती यात्रा उपलब्ध कराने के संकल्प को मद्देनजर रखते हुए कार्ययोजना बनाकर काम करने के निर्देश दिए। प्रदेश में बिना परमिट चल रही बसों पर होगी नियमानुसार कार्रवाई:— परिवहन विभाग की सचिव श्रीमती सुचि त्यागी ने प्रदेश में बिना परमिट चल रही बसों पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए जिससे रोडवेज के यात्रीभार में वृद्धि हो सके। रोडवेज एमडी पुरूषोत्तम शर्मा ने बताया कि निगम ने वर्ष 2024-25 में 99.3 प्रतिशत और वर्तमान में 100 फीसदी से अधिक का उच्चतम यात्री भार हासिल किया हैं। निगम ने पैसेंजर फ़ॉल्ट प्रणाली से अप्रैल 2025 में 19 लाख रुपए का अब तक की इस अवधि का सबसे अधिक जुर्माना प्राप्त किया हैं। इसके अतिरिक्त वर्ष 2025-26 की प्रथम तिमाही में 51 लाख रूपये से अधिक का जुर्माना वसूल किया है। यात्रियों को बसों की लोकेशन ट्रेस करने के लिए आरएसआरटीसी-लाइव मोबाइल एप्लीकेशन की शुरुआत की है। साथ ही जयपुर-दिल्ली मार्ग पर डीलक्स बसों की फ्रीक्वेंसी 3 घंटे से घटकर डेढ़ घंटा हुई है। इस दौरान रोडवेज के कार्यकारी निदेशक (प्रशासन) चांद मल वर्मा, कार्यकारी निदेशक (यातायात) डॉ. ज्योति चौहान, कार्यकारी निदेशक (यांत्रिक) रवि सोनी सहित निगम के ​अधिकारी उपस्थित रहे।

Mines News: प्रदेश में अब खान विभाग का डेटा डोमेन पर होगा उपलब्ध होगा —प्रमुख शासन सचिव

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प्रमुख शासन सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम टी. रविकान्त ने कहा कि राज्य की खनिज संपदा का डेटा डोमेन उपलब्ध होना माइनिंग सेक्टर में ईज ऑफ डूइंग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग से इस तरह के मॉड्यूल तैयार करवाये जा रहे हैं जिससे ओवरलेपिंग के स्थिति ना आयें और प्रदेश में माइनिंग सेक्टर में निवेशकों को आकर्षित करने में सहायक हो सके। विभाग द्वारा इस दिशा में डीाओआईटी के साथ मिलकर काम में तेजी लाई गई है और आने वाले दो से तीन माह में यह कार्य धरातल पर आ जाएगा। उन्होंने कहा कि डोमेन पर उपलब्ध मिनरल डेटा को राजधरा पोर्टल और केन्द्र सरकार के प्रधानमंत्री गति शक्ति पोर्टल से इंटीग्रेट किया जाएगा। श्री रविकान्त बुधवार को सचिवालय में माइंस डेटा डोमेन के मॉड्यूल्स कार्य की प्रगति की नोडल अधिकारी अतिरिक्त निदेशक भूविज्ञान आलोक जैन और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारियों के साथ प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री माइनिंग सेक्टर को निवेषोन्मुखी, रोजगारोन्मुखी और पारदर्शी बनाने पर जोर देते रहे हैं। उन्होंने कहा कि माइनिंग डेटा के डोमेन पर उपलब्ध होने और राजधरा व पीएमगतिशक्ति से जुड़ने के बाद ओवर लेपिंग की समस्या के साथ ही माइनिंग सेक्टर से जुड़ने वाले निवेशकों और प्रदेश की खनिज संपदा के जिज्ञासु भी लाभान्वित हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि राजधरा पर खनिज संपदा और खनिज विभाग से संबंधित डेटा उपलब्ध होने से सबसे बड़ा लाभ ओवरलेपिंग की समस्या का समाधान हो सकेगा। वन, राजस्व, सार्वजनिक निर्माण विभाग सहित विकास कार्यों से जुड़े विभागों को डोमेन पर यह जानकारी उपलब्ध हो सकेगी कि यह मिनरल क्षेत्र है और इससे विकास कार्य आरंभ करने से पहले ही उसी के अनुसार वर्कप्लान तैयार करने में सुविधा होगी। उन्होंने बताया कि विभागों में परस्पर समन्वय नहीं होने से महत्वपूर्ण मिनरल क्षेत्रों में भी ओवरलेपिंग हो जाती है। उन्होंने कहा कि इससे विकास कार्यों से जुड़े विभाग स्वयं राजधरा या पीएमगतिशक्ति पोर्टल पर खान विभाग से उपलब्ध डेटा को देख सकेंगे व ओवरलेपिंग की समस्या नहीं रहेगी। उन्होने कहा कि इससे ईज ऑफ डूंइग के साथ ही निवेशकों के लिए भी लाभदायक होगी। उन्होंने नोडल अधिकारी श्री जैन को डीओआईटी से समन्वय बनाते हुए कार्य में तेजी लाने और साप्ताहिक प्रगति समीक्षा कर सरकार को अवगत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रत्येक कार्य की टाइमलाइन तय करने के लिए भी कहा।

Cricket News: प्रदेश के 33 जिलों में बनेगा ‘क्रिकेट स्टेडियम’

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राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) की एडहॉक कमेटी ने प्रदेश के 33 जिला क्रिकेट केंद्रों पर क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण करने की घोषणा की है। इससे राज्य में क्रिकेट के बुनियादी ढांचे को मजबूती और युवा खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेगी। एडहॉक कमेटी के संयोजक डीडी कुमावत ने बताया कि इस योजना में प्रत्येक जिला क्रिकेट केंद्र पर आधुनिक स्टेडियम विकसित होगें। इसके लिये डवलपमेंट कमेटी का गठन भी किया गया है। श्री कुमावत ने बताया कि हम राजस्थान में क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहते है। जिलों में स्टेडियम बनने से स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलेगा। परियोजना में स्टेडियमों में उच्च गुणवत्ता वाली पिच, पवेलियन, दर्शक दीर्घा, मीडिया सुविधाएं और प्रशिक्षण केंद्र की सुविधाएं होंगी। इन जिलों में बनेग क्रिकेट स्टेडियम:— प्रदेश के अजमेर, चूरू, हनुमानगढ़, प्रतापगढ़, बीकानेर, जयपुर, उदयपुर, कोटा, झुंझुंनू, जोधपुर, झालावाड़, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, सवाईमाधोपुर, जालौर, बूंदी, श्रीगंगानगर, सिरोही, भरतपुर, बारां, भीलवाड़ा, डूंगरपुर, बाड़मेर, पाली, करौली, नागौर, अलवर, राजसमंद, दौसा, धौलपुर, सीकर और टोंक जिले में क्रिकेट स्टेडियम बनाये जायेगें।

Rajasthan News: प्रदेश में हटेगें विलायती बबूल -पंचायती राज मंत्री

पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विलायती बबूल (प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा) को जड़ सहित हटाने के लिए अध्ययन कर आवश्यक दिशा निर्देश जारी करें और इसके उन्मूलन के संबंध में ऐसे विकल्पों को तलाश करें जिससे इस दिशा में सेफ जोन में काम किया जा सके। उन्होंने कहा कि विलायती बबूल के उन्मूलन के लिए क्षेत्र चिन्हित कर चरणबद्ध रूप से काम किया जाए। श्री दिलावर ने मंगलवार को पंचायती राज सभागार में राज्य में विलायती बबूल उन्मूलन के संबंध में वन विभाग, ग्रामीण विकास और अन्य संस्था प्रतिनिधियों के साथ संवाद में ये निर्देश दिए। उन्होने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल विलायती बबूल को काटना नहीं, बल्कि उनकी जड़ों को पूरी तरह से खत्म करना है ताकि दोबारा न उगें। उन्होंने कहा कि आज हमारे सामने विलायती बबूल खतरा साबित हो रहा है। प्रदेश में बहुतायत में उग आया विलायती बबूल अब अपने आसपास किसी अन्य वनस्पति को पनपने नहीं दे रहा है, इसलिए इसका प्रभावी उन्मूलन आवश्यक है। मंत्री ने कहा कि इस पेड़़ के कारण खेती की मिट्टी अनुपजाऊ बन जाती है। विलायती बबूल ने चारागाह क्षेत्र को भी नष्ट कर दिया है। इस पेड़ के कारण किसानों को पशु चराने में बड़ी समस्या से गुजरना है पड़ता है। विलायती बबूल का एक पौधा उग जाता है तो उसके आसपास बहुत सारे पौधे उगते हैं जो अन्य वनस्पति को विकसित नहीं होने देते हैं। उन्होंने विलायती बबूल के उन्मूलन के लिए वर्तमान में उपलब्ध वैधानिक प्रावधानों और नीतियों पर चर्चा की और कहा कि इन विलायती बबूल को हटाने का सरकार अपने स्तर पर प्रयास कर रही है। कुछ अड़चनें हैं, उन्हें दूर कर इनको भी निकालने की कोशिश करेंगे। इससे संबंधित उत्पादों ईंधन, चारकोल और पशु आहार आदि के बारे में चर्चा की गई। इस दौरान पंचायती राज के शासन सचिव एवं आयुक्त डाॅ. जोगाराम , वाटरशेड निदेशक मोहम्मद जुनैद, कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलगुरु बलराज सिंह सहित कई विभागीय अधिकारीगण और इस क्षेत्र में कार्य कर रही विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

Rajasthan News: प्रदेश में चार नए सीएनजी स्टेशन लगेंगे -प्रमुख सचिव

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राज्य सरकार के संयुक्त उपक्रम राजस्थान स्टेट गैस द्वारा इस वित्तीय वर्ष के अंत तक राज्य का सार्वजनिक क्षेत्र का पहला लिक्विफाइड नेचुरल गैस प्लांट शुरु कर दिया जाएगा। प्रमुख सचिव माइन्स एवं पेट्रोलियम व चेयरमेन राजस्थान स्टेट गैस टी. रविकान्त ने बताया कि कोटा में 2 नए सीएनजी स्टेशन सहित चार सीएनजी स्टेशन इसी वित्तीय वर्ष में शुरु किये जाएंगे। एजीएम में शेयर होल्डर्स को 0.5 प्रतिशत की दर से लाभांश वितरित करने का निर्णय किया गया। श्री रविकान्त ने आरएसजीएल के वार्षिक कारोबार को मल्टीपल करने की आवश्यकता प्रतिपादित करते हुए हरित उर्जा के क्षेत्र में विशेष हिस्सेदारी निभाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डीपीएनजी के साथ ही व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को और अधिक संख्या में पीएनजी सुविधाओं से जोड़ने और सेवाओं में विविधिकरण लाया जाएं। आरएसजीएल के प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह ने बताया कि आरएसजीएल का वार्षिक कारोबार बढ़कर 100 करोड़ को पार कर गया है। इसी तरह से 6 करोड़ से अधिक का लाभ रहा है। उन्होंने बताया कि सीएनजी सेगमेंट में 22 प्रतिशत से अधिक की विकास दर रही है। श्री सिंह ने बताया कि राज्य में सार्वजनिक क्षेत्र का पहला एलएनजी स्टेशन नीमराना में स्थापित होने से लंबी दूरी के परिवहन वाहनों को सुविधा मिल सकेगी वहीं आरएसजीएल और गैल द्वारा एलएनजी को लेकर अवेयरनेस कार्यक्रम आयोजित करना आरंभ कर दिया गया है। कोटा में नए डीपीएनजी कनेक्शन जारी करने की कार्ययोजना के साथ ही नए व्यावसायिक व औद्योगिक प्रतिष्ठानों को जोड़ने के प्रयास किये जा रहे हैं।

C M NEWS: मुख्यमंत्री किसान हितों के प्रति संवेदनशील

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राज्य सरकार और कृषि विभाग द्वारा किसानों को उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। विशेष रूप से यूरिया और डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा उर्वरकों की दैनिक उपलब्धता पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। कम उपलब्धता और अधिक खपत वाले जिलों व ब्लॉकों को चिन्हित कर प्रदेश भर में प्राथमिकता के साथ पूर्ण पारदर्शिता से डीएपी व यूरिया का वितरण किया जा रहा है। उर्वरकों की कालाबाजारी व जमाखोरी को रोकने के लिए कृषि विभाग के अधिकारी प्रदेश भर में पूर्ण सतर्कता से कार्य कर रहे हैं। अप्रैल से अगस्त तक केंद्र से यूरिया की 8.23 एमटी की आपूर्ति राज्य सरकार द्वारा निरंतर केंद्र सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर प्रदेश की मांग अनुसार उर्वरकों की आपूर्ति करवाई जा रही है। राज्य के किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु खरीफ 2025 में अप्रैल से अगस्त तक भारत सरकार द्वारा आवंटित 8 लाख 82 हजार मैट्रिक टन यूरिया के विरुद्ध अब तक 8 लाख 23 हजार मैट्रिक टन की आपूर्ति की जा चुकी है। अगस्त माह की शेष अवधि में 59 हजार मैट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति राज्य सरकार द्वारा कराये जाने की कार्यवाही की जा रही है। केंद्र से स्वीकृत 4.75 मैट्रिक टन डीएपी के विरुद्ध 3.59 लाख मैट्रिक टन की आपूर्ति माह अप्रैल से अगस्त तक भारत सरकार द्वारा आवंटित 4 लाख 75 हजार मैट्रिक टन डीएपी के विरुद्ध अब तक 3 लाख 59 मैट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति की जा चुकी हैं, शेष 27 हजार मैट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति प्रस्तावित है। प्रदेश में वर्तमान में 1 लाख 86 हजार मैट्रिक टन यूरिया, 1 लाख 20 हजार मैट्रिक टन डीएपी, 0.81 लाख मैट्रिक टन एनपीके एवं 1 लाख 93 हजार मैट्रिक टन एसएसपी उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है। वर्तमान में गत वर्ष की तुलना में फॉस्फेटिक उर्वरकों का स्टॉक 1 लाख मैट्रिक टन अधिक है एवं आपूर्ति जारी है। यूरिया की लगभग 8000 मैट्रिक व डीएपी की 10 हजार 900 मैट्रिक उर्वरक रेल द्वारा परिवहन में है। केंद्र सरकार की ओर से यूरिया, डीएपी एव अन्य उर्वरकों का राज्यों को माहवार व कंपनीवार आवंटन किया जाता है। राज्य सरकार द्वारा प्राप्त आवंटन एवं जिलों की मांग के अनुसार जिलेवार आपूर्ति योजना तैयार कर प्रदेश में उर्वरकों को वितरण कराया जाता है। राज्य सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध हो कर कार्य कर रही है और यह सुनिश्चित करने हेतु हर संभव प्रयास कर रही है कि खेती-किसानी में किसी प्रकार की बाधा न आए। यूरिया एवं डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता के साथ-साथ उनकी उचित कीमत पर आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा रही है। कृषकों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड में अंकित सिफारिश के अनुसार ही उर्वरकों के उपयोग हेतु प्रेरित करने, उर्वरकों का समान रूप से पारदर्शिता के साथ वितरण कराने और उर्वरक वितरण में अनियमित्ता बरतने वाले विक्रेताओं, जमाखोरों और कालाबाजारी करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हेतु समस्त जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है। विभाग द्वारा समस्त किसानों को समान रूप से उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने के लिए कृषकों को पंक्तिबद्ध किया जाकर उर्वरकों का वितरण प्रशासन के सहयोग एवं विभागीय कार्मिकों की देख-रेख में किया जा रहा है। राज्य में सरसों फसल की अग्रिम बुवाई करने वाले जिलों में किसानों द्वारा डीएपी का क्रय कर अग्रिम भण्डारण किया जा रहा है।

Rajasthan News: विधान सभा में रिम्स विधेयक 2025’ पेश करेगी सरकार

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश में आमजन को विश्व स्तरीय और किफायती चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कदम उठा रही है। वर्ष 2024-25 के बजट में प्रदेश में सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा को नये आयाम देने के लिये आरयूएचएस (राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हैल्थ साईंसेज) का उन्नयन कर दिल्ली एम्स की तर्ज पर राजस्थान इंस्टीयूट ऑफ मेडिकल साईंसेज (रिम्स) की स्थापना की घोषणा की गई थी। इसी क्रम में राज्य सरकार द्वारा राज्य विधानसभा में ‘राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, जयपुर विधेयक 2025’ पेश किया जायेगा। चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने बताया कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली की तर्ज पर जयपुर में रिम्स की स्थापना की जाएगी जिसमें सुपर-स्पेशियलिटी नैदानिक सेवाओं, उन्नत चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए अनुसंधान और रोगी देखभाल की सर्वोत्तम सुविधाएँ आमजन को मिलेगी। रिम्स एक स्वायत्त संस्थान और विश्वविद्यालय के रूप में कार्य करेगा जहाँ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 के तहत डिग्री, डिप्लोमा और अन्य शैक्षणिक मान्यता दी जा सकेगी। यह होगा रिम्स में — चिकित्सा शिक्षा सचिव अम्बरीष कुमार ने बताया कि रिम्स में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, एंडोक्राइनोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, सीटीवीएस और ट्रांसप्लांट यूनिट जैसे सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएँ होगी व – पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, जेरियाट्रिक मेडिसिन, रूमेटोलॉजी, रिप्रोडक्टिव बायोलॉजी, जेनेटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, स्लीप मेडिसिन, क्रिटिकल केयर जैसी अनेक नई सब-स्पेशियलिटी विभागों की भी स्थापना की जाएगी। संस्थान में सुपर-स्पेशियलिटी और ब्रॉड स्पेशियलिटी के विकास, क्वाटरनरी-स्तर के रेफरल अस्पताल सेवाओं, आधुनिक चिकित्सा और संबद्ध विज्ञानों (आयुष प्रणालियों-आयुर्वेद और योग) में विशेष स्नातकोत्तर शिक्षण और राज्य के विशिष्ट स्वास्थ्य पहलुओं पर नवाचार अनुसंधान किया जायेगा। साथ ही यहाँ शिक्षकों के प्रशिक्षण और प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक देखभाल के लिए उपचार प्रोटोकॉल में नवाचार में भी कदम उठाये जायेगे। रिम्स में सरकारी नीतियों और योजनाओं के पात्र मरीजों को मुफ्त उपचार मिलेगा जिससे अन्य राजकीय अस्पतालों पर मरीजों का भार कम होगा और उन्हें विश्व स्तरीय सुपर-स्पेशियलिटी सुविधाएँ यहाँ उपलब्ध होगी। उन्होने बताया कि राज्य के मुख्य सचिव इसके अध्यक्ष होंगे और प्रतिनियुक्ति पर निदेशक नियुक्त किए जायेंगे। साथ ही एक शासी निकाय का गठन किया जायेगा जिसमें एम्स नई दिल्ली, चंडीगढ़ के पीजीआई और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों को शामिल किया जायेगा। आरयूएचएस और स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, जयपुर को भी रिम्स में समाहित करना प्रस्तावित है। विश्व स्तरीय सुविधाओं से होगा रोगों का उपचार— रिम्स एक स्वायत्त संस्थान के रूप में कार्य करेगा जिसकी एक समर्पित निधि होगी। राज्य सरकार द्वारा रिम्स के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपए का व्यय किया जाना प्रस्तावित है। अन्य खर्चों के लिए प्रतिवर्ष 5 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है, जिसे आवश्यकतानुसार बढ़ाया जा सकेगा। रिम्स में मेडिकल, डेंटल और नर्सिंग कॉलेज, ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य केन्द्रों और फिजियोथेरेपिस्ट, फार्मासिस्ट जैसे स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जायेगा। जिससे चिकित्सक निजी प्रैक्टिस के स्थान पर संस्थागत उत्कृष्टता पर ध्यान केंद्रित करेगे। विधानसभा से रिम्स विधेयक पारित होने के बाद विभिन्न विषय विशेषज्ञ एवं निदेशक की नियुक्ति के लिए कार्यवाही शुरू की जाएगी और विश्व स्तरीय अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान के लिए विभिन्न विश्व स्तरीय चिकित्सा संस्थानों से अनुबंध किये जायेंगे। रिम्स की स्थापना से राजस्थान देश-विदेश में मेडिकल टूरिज्म के केंद्र के रूप में विकसित होगा।

Farmer News: गोपाल रत्न पुरस्कार के लिये किसान 15 सितम्बर तक कर सकते है आवेदन

देश में पिछले कुछ सालों में दुग्ध उत्पादन बढ़ा है। दुग्ध उत्पादन क्षेत्र को और अधिक बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार हर वर्ष डेयरी किसानों, सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान करने वाले तकनीशियन और दुग्ध उत्पादक कंपनियों को गोपाल रत्न पुरस्कार प्रदान करती है। यह पुरस्कार गाय/भैंसों की प्रमाणित स्वदेशी नस्लों की डेयरी करने वाले किसानों, सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान करने वाले तकनीशियन और सहकारी व दुग्ध उत्पादक कंपनियों को पशुपालन, मत्स्य और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत प्रति वर्ष दिया जाता है। मंत्रालय द्वारा इस वर्ष भी गोपाल रत्न पुरस्कार के लिए 15 सितम्बर तक ऑनलाईन आवेदन आमंत्रित किये गये हैं। इस पुरस्कार के लिए गाय /भैंसों की डेयरी करने वाले वही किसान पात्र होंगे जो गाय की 53 प्रमाणित देशी नस्लों अथवा भैंस की 20 प्रमाणित देशी नस्लों में से किसी एक का पालन करते हों। इसी प्रकार राज्य/ राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड/ दुग्ध फेडरेशन/ गैर सरकारी संगठन अथवा निजी क्षेत्र का कोई भी कृत्रिम गर्भाधान करने वाला तकनीशियन जिसने इस कार्य के लिए कम से कम 90 दिनों का प्रशिक्षण प्राप्त किया हो इस पुरस्कार के लिए पा़त्रता रखता है। साथ ही दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में सहकारी/कम्पनी अधिनियम के तहत 100 लीटर प्रतिदिन दूध का उत्पादन करने वाली और 50 किसान सदस्यों वाली ग्राम स्तर पर स्थापित सहकारी समिति/एमपीसी/एफपीओ दुग्ध उत्पादक कम्पनी इसके लिए पात्र है। वहीं राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत गोपाल रत्न पुरस्कार के लिए तीनों श्रेणी में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के लिए क्रमशः 5 लाख, 3 लाख और 2 लाख रुपये की राशि पारितोषिक स्वरूप प्रदान की जायेगी। विजेताओं को यह पुरस्कार 26 नवम्बर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में प्रदान किये जायेंगे। सभी इच्छुक किसान, कृत्रिम गर्भाधान करने वाले तकनीशियन और सहकारी व दुग्ध उत्पादक कम्पनियां इस पुरस्कार के लिए पशुपालन, मत्स्य और डेयरी विभाग, भारत सरकार की वेबसाइट https://awards.gov.in पर 15 सितम्बर 2025 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

C M NEWS: प्रदेश का कोई भी क्षेत्र विकास से अछूता नहीं रहना चाहिए —मुख्यमंत्री

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सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर सत्ता-संगठन के दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम शुरू हुआ। इस कार्यक्रम के पहले दिन सीएम ने सांसदों और विधायकों से संवाद किया। संवाद में विकसित राजस्थान 2047 के तहत संकल्प पर मंथन किया और सांसदों और विधायकों ने क्षेत्रवार स्थानीय जरूरतों व समस्याओं पर मुख्यमंत्री को सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष को कमजोर करने के लिये जनप्रतिनिधियों को जनता से मजबूत जुड़ाव करना होगा। उन्होने कहा कि प्रदेश का कोई भी क्षेत्र विकास से अछूता नहीं रहना चाहिए। वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने निकाय व पंचायत चुनावों की तैयारियों को लेकर संगठन को एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और अशोक परनामी ने संचार माध्यमों को बताया कि राज्य सरकार ने पिछले दोनों बजटों की 80% घोषणाओं को पूरा किया है। आगामी कार्यक्रमों में 16 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक सेवा पखवाड़ा, 29 सितम्बर से 31 अक्टूबर तक सांसद खेल महोत्सव और सरदार पटेल जयंती पर प्रत्येक संसदीय क्षेत्र में 150 किमी की पदयात्रा शामिल होगी।

RAS-2013 पेपरलीक के मुख्य आरोपी अमृतलाल मीणा का अध्याय समाप्त

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राजस्थान में बहुचर्चित RAS-2013 पेपरलीक मामले का मुख्य आरोपी अमृतलाल मीणा का अध्याय समाप्त हो गश है। मीणा पर 30 लाख रुपए लेकर अभ्यर्थियों को एग्जाम पास कराने और अपने पांच रिश्तेदारों को मुफ्त में पेपर उपलब्ध कराने का आरोप था। संचार माध्यमों के अनुसार राजस्थान लोक सेवा आयोग के पेपरलीक के मुख्य आरोपी अमृतलाल मीणा की वाराणसी में संदिग्ध हालात में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि कुछ दिन बनारस हॉस्पिटल में भर्ती रहने के बाद परिजन उसको जयपुर ला रहे थे। लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। समाचार माध्यमों की रिर्पोट के अनुसार परिजन हिंडौन सिटी जिला अस्पताल में शव लेकर पहुंचे, वहां पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। मामले में परिजनों ने वाराणसी में हत्या की आशंका जताई है और नादौती थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। वहीं पुलिस ने जीरो नंबर की एफआईआर दर्ज कर वाराणसी के सिगारा थाने में भेज दी। दर्ज रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी से आरके सिंह बिहारी नाम के एक व्यक्ति ने फोन कर अमृतलाल के अस्पताल में भर्ती होने की सूचना दी थी। जब परिजन वहां पहुंचे तो आरके सिंह का मोबाइल बंद आया। बतादें कि आरके सिंह भी पेपरलीक मामले में आरोपी था और अमृतलाल सरकारी कॉलेज में व्याख्याता रह चुका था। वहीं साल 2014 आरपीएससी की प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपरलीक कर पेपर बेचने के मामले में एसओजी ने गिरोह का पर्दाफाश किया था। एसओजी के अनुसार आरएएस सेवा की परीक्षा 2013 का पेपरलीक करने के मामले में अमृतलाल को गिरफ्तार किया था। तब एक अभ्यर्थी को प्री और मेंस परीक्षा पास कराने के बदले अमृतलाल ने 30 लाख रुपए में सौदा किया था। वहीं एसओजी ने पेपरलीक मामले में संजीव और हंसराज मीणा को भी गिरफ्तार किया था।