Medical News: प्रदेश के गांव-कस्बों में होगी निःशुल्क 66 प्रकार की जांचें —स्वास्थ्य मंत्री

प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में विभिन्न रोगों की जांच सुविधा को बेहतर बनाने के लिए प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण कर उन्हें मदर हब एण्ड स्पॉक प्रयोगशालाओं के रूप में बदला जाएगा। हब और स्पॉक मॉडल के तहत मदर लैब, हब लैब व स्पोक्स के माध्यम से जिला चिकित्सालयों में 145, उप जिला चिकित्सालयों और सैटेलाइट चिकित्सालयों में 117, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में 101, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों व डिस्पेन्सिरियों में 66 प्रकार की जांचें आउटसोर्स मोड पर उपलब्ध करवाई जाएंगी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर और प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ की उपस्थिति में इसके लिए स्वास्थ्य भवन में मंगलवार को एक एमओयू हस्ताक्षरित किया गया। एमओयू पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. अमित यादव, टेलीकम्यूनिकेशंस इंडिया लिमिटेड की ओर से कार्यकारी निदेशक अरूण डागर एवं कृष्णा डायग्नोस्टिक लिमिटेड की ओर से कार्यकारी निदेशक पल्लवी जैन ने हस्ताक्षर किए। उल्लेखनीय है कि निःशुल्क जांच सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए भारत सरकार की ओर से हब एवं स्पॉक मॉडल अपनाने की पहल की गई है। इसी क्रम में राजस्थान में भी यह मॉडल लागू किया जा रहा है ताकि गांव-कस्बों तक रोगियों को जांच की समुचित सुविधाएं सुगमता से उपलब्ध हों। यह मॉडल लागू होने से चिकित्सा संस्थानों में जांचों की संख्या में वृद्धि होगी और जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के समय में भी कमी आएगी। 42 मदर लैब, 135 हब लैब और 1335 स्पॉक्स चिन्हित— जांच सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण की दृष्टि से प्रदेश में 42 मदर लैब, 135 हब लैब एवं 1335 स्पॉक्स चिन्हित किए गए हैं। इन संस्थानों में उपलब्ध जांचों का दायरा व्यापक रूप से बढ़ाया जाएगा। मदर लैब में 145 जांचें इन हाउस की जाएंगी। हब लैब में कुछ जांचें इन हाउस होंगी तथा कुछ के सैम्पल मदर लैब में भेजे जाएंगे। इसी प्रकार स्पॉक्स में कुछ जांचें इन हाउस होंगी तथा शेष हब लैब एवं मदर लैब में की जाएंगी। राज्य की 42 मदर लैब को तय समय में एनएबीआई-एक्रीडेटेड कराया जाएगा, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली जांच सुविधा सुनिश्चित होगी। गुणवत्ता में होगा सुधार, मरीजों को घर बैठे मिलेगी जांच रिपोर्ट— यह मॉडल अपनाने से जांचों की गुणवत्ता में सुधार होगा। सेवा प्रदाता द्वारा मदर लैब एवं हब लैब में यूएसएफडीए यूरोपियन सीई सर्टिफाइड उच्च गुणवत्ता के उपकरण स्थापित किये जाएंगे। रिएजेन्टस, कन्जूमेबल्स एवं मानव संसाधन भी सेवा प्रदाता द्वारा ही उपलब्ध करवाये जाएंगे। सैम्पल कलेक्शन से लेकर क्वालिटी चैक और रिपोर्टिंग तक सभी कार्याें का रेकार्ड सेवा प्रदाता द्वारा नियमित रूप से लेबोरेट्री इंर्फोमेशन मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से ऑनलाइन संधारित किया जाएगा व मरीजों को घर बैठे ऑनलाइन रिपोर्ट उपलब्ध हो सकेगी। इस अवसर पर निदेशक, जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, मुख्यमंत्री निःशुल्क जांच योजना के स्टेट नोडल आफिसर डॉ. मुश्ताक खान सहित कई अधिकारी उपस्थित थे।

C M NEWS: मुख्यमंत्री की घोषणा रोडवेेज बसों में दो दिन महिलाएं कर सकती निःशुल्क यात्रा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर प्रदेश की महिलाओं को खुशियों की दोहरी सौगात दी है। मंगलवार को जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बहनों को इस वर्ष रक्षाबंधन पर्व पर राजस्थान रोडवेज की बसों में दो दिन निःशुल्क यात्रा की सुविधा देने की घोषणा की। यह सुविधा रक्षाबंधन (9 अगस्त) और उसके अगले दिन (10 अगस्त) अर्थात् दो दिन राज्य की सीमा के अंदर राजस्थान रोडवेज की बसों में यात्रा के लिए मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन केवल एक पर्व ही नहीं बल्कि हमारी सामाजिक और पारिवारिक परम्पराओं की जीवंत अभिव्यक्ति है। इस शुभ अवसर पर राज्य सरकार का प्रयास है कि कोई भी बहन अपने भाई से मिलने से वंचित न रहे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री की अनूठी पहल पर पहली बार इस वर्ष रक्षाबंधन पर राज्य की महिलाओं को रोडवेज बसों में दो दिन निःशुल्क यात्रा की सुविधा दी गई है। इससे पूर्व केवल एक दिन (रक्षाबंधन को) ही यह छूट दी जाती थी। राज्य सरकार का यह निर्णय महिला सशक्तीकरण और पारिवारिक मूल्यों को महत्व देने की दिशा में अभिनव कदम है।

C M NEWS: मुख्यमंत्री का हवाई सर्वेक्षण लिया सवाई माधोपुर, करौली व धौलपुर जिलों का लिया जायजा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को सवाई माधोपुर, करौली और धौलपुर जिलों में जलभराव व अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने सवाई माधोपुर जिले के चकचैनपुरा, करौली जिले के मण्डरायल एवं धौलपुर जिले के बिश्नोदा में प्रभावित लोगों से संवाद कर उनकी समस्याएं जानी और संबंधित अधिकारियों को आपदा राहत कार्य मुस्तैदी से किए जाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने सवाई माधोपुर जिले के भारी बारिश से प्रभावित गांवों चकेरी, जडावता, अजनोटी, मेनपुरा, धनोली, सूरवाल एवं खण्डार की क्षतिग्रस्त बोदल पुलिया, करौली जिले के अतिवृष्टि प्रभावित गांवों कसेड़, केमकछ, टोड़ी, मल्हापुरां, रांचौली, रहुघाट, मण्डरायल और धौलपुर जिले के राजाखेड़ा उपखंड के अतिवृष्टि प्रभावित गांवों कठूमरा, महमदपुरा, बक्सपुरा, चीलपुरा, चाडियान का पुरा, गढ़ी जाफर, बसई घीयाराम, अंधियारी के साथ ही निभी का ताल व उर्मिला सागर बांध (बाड़ी) का हवाई सर्वेक्षण कर अतिवृष्टि से हुए जलभराव और नुकसान का जायजा लिया। उन्होने भारी बारिश और जलभराव से प्रभावित लोगों से संवाद करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस कठिन समय में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और उनकी हरसंभव मदद की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष असामान्य और अत्यधिक वर्षा के कारण बने हालात पर राज्य सरकार लगातार नजर बनाए हुए है। जिला कलेक्टर, स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों से नियमित रूप से बैठक कर फीडबैक लिया जा रहा है। श्री शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्कूल, आंगनबाड़ी, अस्पताल और सड़कों की मरम्मत के कार्य प्राथमिकता से पूरे करवाए जाएं। फसल खराबे की भरपाई हेतु गिरदावरी की कार्यवाही शीघ्र पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों में तत्परता बरतते हुए बुनियादी सुविधाओं जैसे बिजली, सड़क एवं संचार व्यवस्था को जल्द से जल्द बहाल किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बारिश और बाढ़ से हर साल होने वाली समस्याओं के दीर्घकालिक समाधान की दिशा में भी कार्य कर रही है। जल निकासी, नालों की सफाई और बाढ़ रोकथाम हेतु बुनियादी ढांचा सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चंबल नदी के किनारे बसे जिन गांवों में अतिवृष्टि होने पर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है, वहां स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के अतिवृष्टि एवं जलभराव वाले क्षेत्रों में सिविल डिफेंस एवं आपदा राहत बलों की टीमें निरंतर कार्य कर रही हैं। धौलपुर जिले में बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए एवं राहत बचाव कार्य हेतु एसडीआरएफ की 2 टीमें राजाखेडा एवं 1-1 टीम धौलपुर व सरमथुरा उपखण्ड क्षेत्रों में तैनात की गई हैं। एनडीआरएफ की एक टीम धौलपुर मुख्यालय पर तैनात है। सेना का एक दल भी राहत और बचाव कार्यों के लिए धौलपुर बुलाया जा चुका है। इन क्षेत्रों के प्रभावित गांवों में से 2700 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। सवाई माधोपुर में भी बचाव दल द्वारा लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है। सवाई माधोपुर के मानसरोवर बांध के डाउनस्ट्रीम में बनी बोदल पुलिया की मरम्मत का कार्य भी पूर्ण कर यातायात सुचारू कर दिया गया है। इस दौरान आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, सहकारिता राज्य गौतम कुमार दक, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म, विधायक जितेन्द्र गोठवाल, दर्शन सिंह गुर्जर, हंसराज मीणा, जसवंत सिंह गुर्जर मौजूद रहे।

C M NEWS: मुख्यमंत्री ने लालसोट में ईसरदा-दौसा पेयजल परियोजना का किया शिलान्यास

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रदेश के हर गांव, हर ढाणी और हर व्यक्ति तक सुविधाएं पहुंचाकर लोगों का जीवन बेहतर बनाना हमारा संकल्प है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश को सशक्त और समृद्ध बनाने का लक्ष्य लेकर कार्य कर रही है। श्री शर्मा सोमवार को दौसा जिले के लालसोट विधानसभा क्षेत्र स्थित डूंगरपुर गांव में आयोजित समारोह में रिमोट का बटन दबाकर ईसरदा-दौसा पेयजल परियोजना का शिलान्यास किया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि महादेव की कृपा से प्रदेश में भरपूर बारिश से जलाशय लबालब हो गए हैं और ईरसदा बांध में भी खूब पानी आया है। उन्होंने कहा कि ईसरदा-दौसा पेयजल परियोजना के तहत लालसोट में लगभग 350 करोड़ रुपये की लागत से 8 स्वच्छ जलाशयों, 5 पंपहाउस, 47 उच्च जलाशयों का निर्माण किया जाएगा। इसमें 280 किलोमीटर राइजिंग मुख्य पाइपलाइन, 200 किलोमीटर से अधिक मुख्य पाइपलाइन एवं 1360 किलोमीटर वीडीएस पाइपलाइन बिछाई जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 तक पूर्ण किए जाने वाले इन कार्यों से 302 गांवों की लगभग 5 लाख 58 हजार आबादी और लालसोट की करीब 69 हजार आबादी को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। श्री शर्मा ने कहा कि लालसोट विधानसभा में 120 करोड़ रुपये से अधिक के अन्य विकास कार्यों की भी स्वीकृति दी गई है। डेढ़ साल में पानी-बिजली के क्षेत्र में किए ठोस कार्य मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले डेढ़ साल में पानी, बिजली, बुनियादी ढांचे और प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए अनेक निर्णय लिए हैं। पेयजल और सिंचाई की समस्या के स्थायी समाधान के लिए राम जल सेतु लिंक परियोजना, यमुना जल समझौता, माही बांध योजना सहित विभिन्न कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 8 हजार 496 करोड़ रुपये खर्च कर 82 हजार 964 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई है। श्री शर्मा ने कहा कि हम वर्ष 2027 तक किसानों को दिन में बिजली भी उपलब्ध कराएंगे। पारदर्शिता से हो रही भर्तियां, 75 हजार से अधिक युवाओं को मिली नियुक्ति श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार 5 वर्षों में 4 लाख सरकारी नौकरियां सृजित करने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। साथ ही, 3 लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार योग्य बनाया गया है। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल में 6 रोजगार मेलों के माध्यम से 75 हजार से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए हैं और एक लाख से अधिक पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किए गए हैं। राज्य सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ सरकारी भर्तियों का आयोजन कर रही है। हमारे कार्यकाल में एक भी भर्ती परीक्षा का पेपरलीक नहीं हुआ है। हमारा डेढ़ साल गत सरकार के पांच साल पर भारी मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले डेढ़ साल में जो विकास कार्य करवाए हैं, उतने पूर्ववर्ती सरकार पांच साल में भी नहीं करवा पाई। गत सरकार के पूरे पांच साल में बने 29 हजार फार्म पौंड की तुलना में हमने डेढ़ साल में ही 32 हजार से अधिक फार्म पौंड बनवाए हैं। हमारे समय में बिजली उत्पादन क्षमता में लगभग 4 हजार 800 मेगावाट की बढ़ोतरी हुई है, जबकि पिछली सरकार के पांच साल में लगभग 3 हजार 900 मेगावाट की बढ़ोतरी हुई थी। हमारी सरकार ने 1 हजार 421 गांवों को सड़कों से जोड़ने का कार्य किया है, जबकि गत सरकार पांच साल में लगभग 1100 गांवों को ही सड़कों से जोड़ पाई थी। डेढ़ साल में 89 हजार विद्यार्थियों को टैबलेट दिए गए हैं, जबकि उनके पूरे पांच साल में यह आंकड़ा 986 ही रहा। गत सरकार ने पांच साल में केवल पौने दो लाख स्वामित्व कार्डों का वितरण किया था, जबकि हम पौने दस लाख स्वामित्व कार्ड का वितरण कर चुके हैं। श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा चलाए गए वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के सकारात्मक परिणाम हमें नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष प्रदेश में 7 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए और इस वर्ष हमने 10 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री ने 5 साल में 50 करोड़ पौधे लगाने के लक्ष्य की दिशा में प्रदेशवासियों से ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने का आह्वान भी किया। लालसोट विधानसभा के लिए किया 116 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान मुख्यमंत्री ने कहा कि लालसोट विधानसभा के लिए 116 करोड़ रुपए का प्रावधान कर संबंधित कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एसएच-24 से एनएच-11ऐई वाया नांगल मोड, देवली रोड-लालसोट बाईपास के नवीनीकरण एवं चौड़ाईकरण हेतु कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं। एनएच 148 डूंगरपुर मोड से डोब वाया हरिपुरा एवं लालसोट से खटवा तक सड़क नवीनीकरण एवं चौड़ाईकरण कार्य करवाया जा रहा है। लालसोट नगर पालिका को नगर परिषद् में क्रमोन्नत किया गया है। साथ ही, श्यामपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एवं कन्या महाविद्यालय, लालसोट को पीजी में क्रमोन्नत किया गया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सिंदूर का पौधा भी लगाया। समारोह में गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढ़म, विधायक रामबिलास मीणा, भागचंद टांकड़ा, राजेन्द्र मीणा, महेंद्रपाल मीणा, रामावतार बैरवा, रामसहाय वर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी और आमजन उपस्थित रहे।

Transportation News: प्रदेश में 15 साल पुराने सरकारी वाहन नहीं चलेगें

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प्रदेश में 15 साल पुराने सरकारी वाहनों अब नहीं चलेगें।। परिवहन मुख्यालय ने इसे लेकर समीक्षा की है। परिवहन सचिव शुचि त्यागी ने विशेष रूप से राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में संचालित ऐसे वाहनों की समीक्षा संवाद किया है। या करने वाले हैं। परिवहन सचिव ने इस दैरान कहा कि ऐसे सभी वाहन अब संचालन योग्य नहीं माने जो वर्ष 2025-26 तक 15 साल की उम्र पूरी कर चुके हैं। सरकार ने 15 साल पुराने वाहनों को हटाने के लिये प्रदूषण फैलाने और पर्यावरण को सुरक्षित बनाने का कारण बताया है। इससे श्रीमती त्यागी ने बताया कि इससे न केवल दुर्घटना के जोखिम कम होंगे, बल्कि मेंटेनेंस पर होने वाले अतिरिक्त खर्च से भी निजात मिलेगी। वहीं समीक्षा के दौरान स्क्रैपिंग प्रक्रिया को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। परिवहन विभाग के अनुसार विभागों में ऐसे वाहन वर्षों से इस्तेमाल हो रहे हैं, जो न केवल तकनीकी रूप से असुरक्षित हो चुके हैं, बल्कि ईंधन की खपत भी अधिक करते हैं और पर्यावरणीय मानकों के अनुसार भी ये वाहन अब उपयुक्त नहीं पाये गये हैं और स्क्रैपिंग नीति को सख्ती से लागू करने को लेकर दिशा निर्देश दिए। इस दौरान कहा जाएगा कि यदि कोई विभाग लापरवाही बरतता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी।

Jaipur News: जनता त्रस्त – सरकार मस्त: भ्रस्टाचार, निकम्मेपन और बाहरी अफसरों’ की अंधी तैनाती ने बंटाधार कर दिया है राजधानी का

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—महेश झालानी

जयपुर की इस बार की बरसात ने प्रशासनिक निकम्मेपन की परतें खोलकर रख दी हैं। जिस राजधानी की पहचान सुव्यवस्थित सड़कें, ऐतिहासिक धरोहरें और आधुनिक सुविधाएं थीं, वहीं अब हर साल बरसात आते ही घुटनों तक पानी, सीवर उफान और ट्रैफिक जाम की कहानियां आम हो गई हैं। लेकिन 2025 की बरसात सिर्फ़ एक प्राकृतिक आपदा नहीं थी, यह सरकार, नगरीय विकास विभाग और अधिकारियों की घोर विफलता का ‘लाइव सबूत’ बनकर उभरी। इस बार जनता के गुस्से का केन्द्र केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि वे ‘बाहरी अफसर’ बन रहे हैं जिन्हें जयपुर के भूगोल, मानसून की प्रकृति और स्थानीय जरूरतों की तनिक भी जानकारी नहीं है। हकीकत यह है कि जयपुर की नगर व्यवस्था की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, वे कंधे या तो असंवेदनशील हैं या पूरी तरह से अज्ञान। नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा से लेकर सचिव देवाशीष पृष्टि, जेडीए की आयुक्त आनंदी और सचिव निशांत जैन, चारों शीर्ष पदों पर बैठे ये अधिकारी या तो गैर-राजस्थानी हैं या राजधानी की शहरी जटिलताओं से पूरी तरह अनभिज्ञ। इनमें से किसी को भी जयपुर की भूगर्भीय बनावट, पानी की निकासी का पैटर्न, पुराने नालों की संरचना या स्थानीय ड्रेनेज नेटवर्क की तकनीकी समझ नहीं है। जब अफसरशाही की रीढ़ ही बाहरी और अनुभवहीन हो, तो परिणाम यही होता है कि शहर हर बारिश में दम तोड़ देता है। मजे की बात यह है कि जब बारिश शुरू हो चुकी थी, देवाशीष पृष्टि को उस वक्त यूडीएच का प्रमुख शासन सचिव नियुक्त किया गया था। ये मूलतः उड़ीसा के रहने वाले है। इन्हें जयपुर या राजस्थान के किसी भी शहर की एबीसीडी तक पता नही है। सचिवालय के भीतर माने जाने वाले सूत्रों के अनुसार, वे पूरी तरह ‘फाइल-बेस्ड निर्णयों’ पर निर्भर हैं और ग्राउंड रियलिटी से उनका कोई वास्ता नहीं है। कमोबेश यही हाल आनंदी और निशांत जैन का है। आनंदी तमिलनाडु की तो निशांत जैन यूपी के रहने वाले है। आनंदी ईमानदार तो है, लेकिन जेडीसी के लायक नही बताई जाती। जबकि निशांत जैन के बारे में कहा जाता है कि इनसे टालू और अकर्मण्य अफसर जेडीए में इससे पहले नियुक्त नही हुआ। नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा की अकर्मण्यता और अज्ञानता के बारे में अधिकांश मंत्री और विधायक तक बखूबी जानते है। इनकी खूबी है कि ये जाट है। इन्हें शांति धारीवाल बनने के लिए बीसो साल लग जाएंगे। धारीवाल ने विकास किया था, जबकि खर्रा शहरों का “विनाश” करने पर आमादा है। उन्होंने अब तक एक भी बार मानसून के दौरान जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा नहीं किया हैं। न कोई निरीक्षण, न कोई राहत समीक्षा बैठक। मंत्री महोदय की चुप्पी इस बात का संकेत है कि या तो वे हालात की गंभीरता को समझ नहीं पा रहे हैं, या फिर जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं। अथवा इस योग्य ही नही है कि वे इस विभाग का नेतृत्व कर सके । जनता सवाल पूछ रही है —क्या नगरीय विकास केवल फाइलों में योजनाएं बनाने तक सीमित है? जब राजधानी ही बेहाल हो, तो बाकी शहरों की स्थिति की कल्पना की जा सकती है। अफसरों की लापरवाही और सरकार की उदासीनता के चलते जयपुर के कई मोहल्लों में जलभराव से लोग अस्पताल नहीं पहुंच सके, तब अफसर लोग सचिवालय में “मीटिंग-मीटिंग” खेलते हुए ‘वर्क फ्रॉम होम’ पर थे। जयपुर विकास प्राधिकरण की कमिश्नर आनंदी, जिन पर जयपुर शहर की सबसे अहम विकास परियोजनाओं और ड्रेनेज सिस्टम की जिम्मेदारी है, वे भी शहर से न तो भावनात्मक रूप से जुड़ी हैं, न ही तकनीकी रूप से। जानकारों के अनुसार, आनंदी द्वारा शुरू की गई कई योजनाएं आधी-अधूरी हैं, जिनमें 22 करोड़ की पाइपलाइन योजना भी शामिल है जो उलटी ढलान पर बिछा दी गई। इससे जलनिकासी नहीं हो सकी, बल्कि पानी रुक गया और मोहल्ले डूब गए। उनके नेतृत्व में जेडीए का कामकाज केवल कागज़ी आंकड़ों और स्लाइड प्रजेंटेशन तक सीमित है। दरअसल सरकार द्वारा सिस्टम में ऐसे अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं जिन्हें शहर की गलियों, नागरिक जरूरतों और भौगोलिक संरचना का आधारभूत ज्ञान नहीं है । योजनाएं कागज़ों पर बनती हैं और जमीन पर डूब जाती हैं। अब आवश्यकता है कि नगरीय विकास जैसे संवेदनशील विभागों में ऐसे स्थानीय अधिकारियों नियुक्ति हो, जिन्हें जयपुर की सड़कों, नालों, और बस्तियों की पहचान हो। जो न सिर्फ़ नक्शा, बल्कि नब्ज़ भी पढ़ सकें। जब तक मंत्रालय और प्रशासन में अनुभवी, लोकल अफसरों को शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक जयपुर हर साल बारिश में भीगता रहेगा और जनता गुस्से में उबलती रहेगी। जयपुर की बर्बादी केवल बादलों से नहीं, बर्बाद होती नीतियों, लापरवाह नेताओं और अजनबी अफसरों से हो रही है। बरसात ने तो केवल पर्दा उठाया है, असली कारण तो वो नेतृत्व है, जिसे न इस शहर की पहचान से कोई लगाव है और न इसकी समस्याओं से। अगर सरकार अब भी नहीं चेती, तो जनता अगली बारिश से पहले ही ‘प्रशासनिक सफाई’ कर देगी “वोट की झाड़ू से”।

Political News: धनखड़ की खामोशी करेगी जबरदस्त विस्फोट

— महेश झालानी

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की रहस्यमयी चुप्पी अब केवल एक संवैधानिक मर्यादा नहीं रही। यह चुप्पी अब सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र बन चुकी है। जब कोई इतना मुखर, स्पष्टवादी और तेजस्वी नेता अचानक से शांत हो जाए, तो समझा जाना चाहिए कि पानी के नीचे कुछ बड़ा पक रहा है। राजनीतिक संकेत साफ कह रहे हैं कि धनखड़ एनडीए को भीतर से चुनौती देने की तैयारी में हैं। धनखड़ कोई आम नेता नहीं हैं। उनका राजनीतिक इतिहास बताता है कि वे टकराव से डरते नहीं, बल्कि उसका सटीक जवाब देना जानते हैं। पश्चिम बंगाल में राज्यपाल रहते हुए उन्होंने ममता बनर्जी को जिस प्रकार खुली चुनौती दी, वह उनकी कार्यशैली का परिचायक है। वे कभी ‘गौरवशाली चुप्पी’ में विश्वास नहीं करते रहे । लेकिन आज उनका यह मौन, वास्तव में एक बगावत की प्रस्तावना बनता दिख रहा है। जगदीप धनखड़ अनुकूल समय का इंतजार कर रहे है । समय आने पर वे तुरुप का इक्का निकालकर उन लोगो को कठघरे में खड़ा कर सकते है जिनकी वजह से उन्हें इस्तीफा देने के लिए बाध्य होना पड़ा। वे इस बात पर भी गम्भीरतापूर्वक विचार कर रहे है कि कहीं सतपाल मलिक की तरह उनका कारतूस फुस्स साबित नही हो जाए । अपना नफा और नुकसान भी तोलना धनखड़ को बखूबी आता है। वे जानते है कि सत्ता में ऐसे लोग भी बैठे है जो उनको नेस्तनाबूद करने के लिए सीबीआई और ईडी को पीछे लगा सकते है। सभी बिन्दुओ पर विचार भी किया जा रहा है और अपने शुभचिंतको से निरन्तर विचार विमर्श भी जारी है। एनडीए की मौजूदा राजनीति में जहां एक नेता के इर्द-गिर्द सत्ता का पूरा चक्र केंद्रित हो चुका है, वहां स्वतंत्र विचार रखने वाले नेताओं के लिए स्थान लगभग समाप्त हो गया है। धनखड़ जैसे व्यक्ति के लिए यह घुटनपूर्ण स्थिति असहनीय हो सकती है। यही कारण है कि अब उनके इर्द-गिर्द की गतिविधियां असामान्य रूप से तेज़ हो गई हैं। न तो वे भाजपा नेतृत्व से प्रत्यक्ष संवाद में हैं, न ही सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय। खबर मिल रही है कि वे भीतर ही भीतर अपने लिए अगली लड़ाई की जमीन तैयार कर रहे हैं। सियासी गलियारों में कानाफूसी है कि धनखड़ न केवल भाजपा के असंतुष्ट वर्ग से संवाद कर रहे हैं, बल्कि विपक्षी नेताओं, विशेष रूप से कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के कुछ प्रमुख चेहरों के साथ परोक्ष व अपरोक्ष संपर्क में हैं। यह संवाद फिलहाल अनौपचारिक है । लेकिन इसका स्वरूप गंभीर होता जा रहा है। विपक्ष की नज़र में धनखड़ वह चेहरा बन सकते हैं जो संविधान, मर्यादा और भाजपा के ‘भीतर के विद्रोह”, इन तीनों का संतुलन बनाकर प्रस्तुत किया जा सकता है। चोट खाए धनखड़ को भी इससे कोई गुरेज नही होने वाला है। उनके मन मे जबरदस्त ज्वालामुखी धधक रही है जो वक्त आने पर जलजला पैदा अवश्य करेगी। सूत्रों से पता चला है कि कुछ राजनीतिज्ञ धनखड़ के निकट सम्पर्क में है। लेकिन धनखड़ सुन सबकी रहे है। लेकिन वे क्या करने वाले है, इसकी भनक किसी को लगने नही दे रहे है। धनखड़ बहुत ही घाघ राजनीतिज्ञ माने जाते है। उनको कब हंसना और कब आंखे दिखानी है, यह बखूबी जानते है। इसी खूबी के चलते भाजपा की विचारधारा के इतर होते हुए भी वे न केवल पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बन गए बल्कि उप राष्ट्रपति की कुर्सी पर भी विराजमान होगये है। मोदी और शाह का करीबी बनने का “गौरव” हर किसी को नसीब नही होता है। लेकिन धनखड़ की अति महत्वाकांक्षा की वजह से वे मोदी और शाह की आंखों की किरकिरी बन गए थे। भविष्य की तस्वीर थोड़ी थोड़ी साफ दिखाई दे रही है। यदि धनखड़ भाजपा से खुलकर अलग होते हैं तो 2027 के राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष उन्हें अपना प्रत्याशी बना सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह एनडीए के लिए सिर्फ एक चुनावी चुनौती नहीं, बल्कि एक गहरे मनोवैज्ञानिक झटके की तरह होगा। धनखड़ इस समय जितने शांत हैं, उतने ही तैयार भी हैं। उनकी चुप्पी में गूंज है, और उनकी आंखों में वो भाषा है जो सत्ता की सीमाओं को चुनौती देना जानती है। यह बात जितनी जल्दी भाजपा नेतृत्व समझे, उतना ही अच्छा। क्योंकि यदि वे जागे नहीं, तो जल्द ही उन्हें अपने ही आंगन से उठती एक बगावत की आवाज़ सुनाई दे सकती है । उस बगावत का नाम होगा – जगदीप धनखड़। क्योंकि इतिहास गवाह है । कुछ तूफान शब्दों से नहीं, चुप्पियों से जन्म लेते हैं।  

C M NEWS: ट्रैफिक व्यवस्था पर मुख्यमंत्री का उच्च स्तरीय संवाद, कहा सिग्नल फ्री ट्रैफिक संचालन की कार्ययोजना बनाएं

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर शहर की वर्तमान ट्रैफिक स्थिति को तुरंत सुगम और सुचारू बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यातायात संचालन हेतु भविष्य की आवश्यकताओं के दृष्टिगत दीर्घकालीन कार्ययोजना के लिए गृह और यातायात विभाग, जेडीए, शहरी विकास व आवासन, स्वायत्त शासन विभाग मिलकर सामूहिक जिम्मेदारी के साथ काम करें। श्री शर्मा शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पर प्रदेश के प्रमुख शहरों और जयपुर शहर की यातायात व्यवस्था को लेकर उच्च स्तरीय संवाद कर रहे थे। उन्होंने पुलिस व यातायात के अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन को जागरूक करते हुए ट्रैफिक सेंस को बढ़ावा दिया जाए। चिन्हित बस स्टैण्डों का स्थानांतरण शीघ्र हो लागू— मुख्यमंत्री ने संवाद में जयपुर शहर में वाहनों के सुगम संचालन और जाम से राहत के लिए व्यापारियों और आमजन से सुझाव लेकर व्यस्ततम मार्गों पर वन वे ट्रैफिक संचालन की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहर के चिन्हित ऑटो और बस स्टैण्ड के स्थानांतरण को शीघ्र लागू किया जाए। इसी क्रम में हीरापुरा बस टर्मिनल से मानसून के पश्चात बसों का तुरंत संचालन किया जाए। उन्होंने जयपुर के नवीन स्थानांतरित बस स्टैण्डों से यात्रियों के शहर में आवागमन के लिए जेसीटीसीएल बसों का संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जयपुर शहर में आवश्यकतानुरूप मल्टीलेवल पार्किंग व्यवस्था हो विकसित— श्री शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वाहनों की पार्किंग व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए शहर के प्रमुख स्थानों पर मल्टीलेवल पार्किंग और उसकी उपयोगिता के अवसरों को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने शहर में जोन आधारित ई-रिक्शा संचालन के लिए जारी दिशा-निर्देशों की पालना सुनिश्चित करवाते हुए जेडीए को जब्त ई-रिक्शाओं के लिए यार्ड व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने यातायात नियमों के उल्लंघन पर निगरानी के लिए शहर में आधुनिक कैमरे लगाने और केन्द्रित कंट्रोल रूम बनाने के लिए राजस्थान ट्रांसपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट फंड से वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति करने के निर्देश दिए। उन्होंने यातायात नियमों की सख्त पालना कराने और उल्लंघन पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही, बढ़ती वाहनों की संख्या को ध्यान में रखते हुए भविष्य में प्रमुख चौराहों को चिन्हित कर सिग्नल फ्री ट्रैफिक संचालन की कार्ययोजना बनाएं। इस दौरान मुख्य सचिव सुधांश पंत, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

Chambal River News: प्रशासन का हर कर्मचारी इस समय जनसेवा का भागीदार है —मंत्री बेढम

चंबल नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण उत्पन्न बाढ़ जैसी परिस्थितियों के बीच धौलपुर जिले के प्रभारी मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने शुक्रवार को धौलपुर जिले के राजाखेड़ा उपखंड क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव गढ़ी जाफर का दौरा किया। उन्होंने राहत शिविरों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर आमजन से बातचीत की और जिला प्रशासन द्वारा की जा रही राहत सेवाओं का फीडबैक लिया। मंत्री ने ग्रामीणों से भोजन, चिकित्सा सुविधाओं, पानी, आश्रय और अन्य आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता के बारे में जानकारी ली और जिला कलेक्टर श्रीनिधि बी टी को राहत कार्यों को युद्ध स्तर पर जारी रखने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रभावित परिवार को असुविधा नहीं होनी चाहिए, प्रशासन का हर कर्मचारी इस समय जनसेवा का भागीदार है। श्री बेढ़म ने प्रशासन द्वारा किए जा रहे राहत और बचाव कार्यों की खुले मन से सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से सेना के जवानों, एसडीआरएफ टीम और पुलिस बल द्वारा किए जा रहे समर्पित कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि आप सभी आपदा में देवदूत की तरह सेवा दे रहे हैं। इस दौरान संभागीय आयुक्त डॉ. टीना सोनी, पुलिस महानिरीक्षक कैलाश चंद्र बिश्नोई, जिला कलेक्टर श्रीनिधि बी टी, पुलिस अधीक्षक, उपखंडाधिकारी वर्षा मीना सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, रेस्क्यू टीम के सदस्य और फील्ड अधिकारी उपस्थित रहे।

Mine News: मुख्यमंत्री का खनिज खोज व वैज्ञानिक खनन पर जोर —प्रमुख सचिव

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प्रमुख शासन सचिव खान एवं भूविज्ञान टी. रविकान्त ने राज्य में खनिज खोज में लगी राज्य व केन्द्र सरकार की संस्थाओं को परस्पर सहयोग व समन्वय से मिनरल एक्सप्लोरेशन कार्य को गति देने की आवश्यकता प्रतिपादित की है। बेहतर एक्सप्लोरेशन और सटीक आकलन से अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकेंगे। राजस्थान में विपुल व विविध प्रकार की बेशकीमती खनिज संपदा को देखते हुए एक्सप्लोरेशन कार्य में समयवद्धता, एक्सप्लोरेशन परिणामों में गुणवत्ता पर बल देना होगा ताकि खनिज ब्लॉकों के ऑक्शन में सरकार को बेहतर राजस्व, प्रदेश में खनन क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर विकसित हो सके। श्री रविकान्त शुक्रवार को सचिवालय में ज्वाईट वर्किंग ग्रुप की 10 वीं सभा की अध्यक्षता कर रहे थे। ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप में भारत सरकार के खान मंत्रालय के निदेशक तकनीकी, जीएसआई, एमईसीएल, एएमडी, आरएसएमईटी और राज्य के खान व भूविज्ञान के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री की खनन क्षेत्र के प्रति गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है कि मिनरल एक्सप्लोरेशन से लेकर ऑक्शन की नियमित समीक्षा के साथ ही सस्टेनेबल माइनिंग पर जोर देते रहे हैं। प्रमुख सचिव ने कहा कि एक्सप्लोरेशन में जुटी केन्द्र व राज्य सरकार की संस्थाएं एक्सप्लोरेशन कार्य में गुणवत्ता, उपलब्धता और वाइविलिटी का सटीक आकलन करेगी तो ब्लॉकों के ऑक्शन में अधिक से अधिक भागीदारी तय होगी और उसका पूरा लाभ देश और प्रदेश को मिल सकेगा। उन्होंने बांसवाड़ा, बाड़मेर, सिन्देसरी में एक्सप्लोरेशन में आ रही स्थानीय स्तर की समस्या के निदान के लिए जीएसआई और खान विभाग जिला कलक्टर से मिलकर समाधान कराएं। उन्होंने आरएसएमईटी को भी एक्सप्लोरेशन कार्यों की भी टाइमलाईन बनाकर क्रियान्विति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जियोलोजिकल सर्वें ऑफ इण्डिया के उपमहानिदेशक अनिंध्यों भट्टाचार्य और निदेशक हरीश मिस्त्री ने बताया कि राजस्थान में प्रचुर मात्रा में मेजर और माइनर मिनरल उपलब्ध है और जीएसआई द्वारा एक्सप्लोरेशन कर सरकार को जीएम और जीआर दी जा रही है ताकि ब्लॉक तैयार कर नीलामी और खनन हो सके। उन्होंने खान विभाग, जीएसआई और इससे जुड़ी संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल की सराहना की। केन्द्रीय खान मंत्रालय के निदेशक तकनीकी योगेन्द्र सिंह भांभू ने कहा कि माइनिंग सेक्टर में राजस्थान में तेजी से और सराहनीय कार्य हो रहा है। बेहतर समन्वय से इस गति को बनाये रखना होगा। निदेशक खान दीपक तंवर ने जीएसआई सहित एक्सप्लोरेशन संस्थाओं द्वारा प्राप्त रिपोर्टस की चर्चा करते हुए रिसोर्स के बेहतर आकलन और क्षेत्र में आने वाले अवरोधों को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट तैयार करने पर जोर दिया। मुख्यकार्यकारी आरएसएमईटी आलोक जैन ने बताया कि संस्था द्वारा कराये जा रहे एक्सप्लोरेशन कार्य को परिणाम स्तर तक पहुंचाने में तेजी लाई जाएगी। इस दौरान एमईसीएल से आशीष सिंह, एएमडी से राजारमन, खान विभाग से एसजी सुनील कुमार वर्मा, सुशील हुड़्डा और जीएसआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।