C M NEWS: मुख्यमंत्री किसान हितों के प्रति संवेदनशील

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राज्य सरकार और कृषि विभाग द्वारा किसानों को उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। विशेष रूप से यूरिया और डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा उर्वरकों की दैनिक उपलब्धता पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। कम उपलब्धता और अधिक खपत वाले जिलों व ब्लॉकों को चिन्हित कर प्रदेश भर में प्राथमिकता के साथ पूर्ण पारदर्शिता से डीएपी व यूरिया का वितरण किया जा रहा है। उर्वरकों की कालाबाजारी व जमाखोरी को रोकने के लिए कृषि विभाग के अधिकारी प्रदेश भर में पूर्ण सतर्कता से कार्य कर रहे हैं। अप्रैल से अगस्त तक केंद्र से यूरिया की 8.23 एमटी की आपूर्ति राज्य सरकार द्वारा निरंतर केंद्र सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर प्रदेश की मांग अनुसार उर्वरकों की आपूर्ति करवाई जा रही है। राज्य के किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु खरीफ 2025 में अप्रैल से अगस्त तक भारत सरकार द्वारा आवंटित 8 लाख 82 हजार मैट्रिक टन यूरिया के विरुद्ध अब तक 8 लाख 23 हजार मैट्रिक टन की आपूर्ति की जा चुकी है। अगस्त माह की शेष अवधि में 59 हजार मैट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति राज्य सरकार द्वारा कराये जाने की कार्यवाही की जा रही है। केंद्र से स्वीकृत 4.75 मैट्रिक टन डीएपी के विरुद्ध 3.59 लाख मैट्रिक टन की आपूर्ति माह अप्रैल से अगस्त तक भारत सरकार द्वारा आवंटित 4 लाख 75 हजार मैट्रिक टन डीएपी के विरुद्ध अब तक 3 लाख 59 मैट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति की जा चुकी हैं, शेष 27 हजार मैट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति प्रस्तावित है। प्रदेश में वर्तमान में 1 लाख 86 हजार मैट्रिक टन यूरिया, 1 लाख 20 हजार मैट्रिक टन डीएपी, 0.81 लाख मैट्रिक टन एनपीके एवं 1 लाख 93 हजार मैट्रिक टन एसएसपी उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है। वर्तमान में गत वर्ष की तुलना में फॉस्फेटिक उर्वरकों का स्टॉक 1 लाख मैट्रिक टन अधिक है एवं आपूर्ति जारी है। यूरिया की लगभग 8000 मैट्रिक व डीएपी की 10 हजार 900 मैट्रिक उर्वरक रेल द्वारा परिवहन में है। केंद्र सरकार की ओर से यूरिया, डीएपी एव अन्य उर्वरकों का राज्यों को माहवार व कंपनीवार आवंटन किया जाता है। राज्य सरकार द्वारा प्राप्त आवंटन एवं जिलों की मांग के अनुसार जिलेवार आपूर्ति योजना तैयार कर प्रदेश में उर्वरकों को वितरण कराया जाता है। राज्य सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध हो कर कार्य कर रही है और यह सुनिश्चित करने हेतु हर संभव प्रयास कर रही है कि खेती-किसानी में किसी प्रकार की बाधा न आए। यूरिया एवं डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता के साथ-साथ उनकी उचित कीमत पर आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा रही है। कृषकों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड में अंकित सिफारिश के अनुसार ही उर्वरकों के उपयोग हेतु प्रेरित करने, उर्वरकों का समान रूप से पारदर्शिता के साथ वितरण कराने और उर्वरक वितरण में अनियमित्ता बरतने वाले विक्रेताओं, जमाखोरों और कालाबाजारी करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हेतु समस्त जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है। विभाग द्वारा समस्त किसानों को समान रूप से उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने के लिए कृषकों को पंक्तिबद्ध किया जाकर उर्वरकों का वितरण प्रशासन के सहयोग एवं विभागीय कार्मिकों की देख-रेख में किया जा रहा है। राज्य में सरसों फसल की अग्रिम बुवाई करने वाले जिलों में किसानों द्वारा डीएपी का क्रय कर अग्रिम भण्डारण किया जा रहा है।

Rajasthan News: विधान सभा में रिम्स विधेयक 2025’ पेश करेगी सरकार

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश में आमजन को विश्व स्तरीय और किफायती चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कदम उठा रही है। वर्ष 2024-25 के बजट में प्रदेश में सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा को नये आयाम देने के लिये आरयूएचएस (राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हैल्थ साईंसेज) का उन्नयन कर दिल्ली एम्स की तर्ज पर राजस्थान इंस्टीयूट ऑफ मेडिकल साईंसेज (रिम्स) की स्थापना की घोषणा की गई थी। इसी क्रम में राज्य सरकार द्वारा राज्य विधानसभा में ‘राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, जयपुर विधेयक 2025’ पेश किया जायेगा। चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने बताया कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली की तर्ज पर जयपुर में रिम्स की स्थापना की जाएगी जिसमें सुपर-स्पेशियलिटी नैदानिक सेवाओं, उन्नत चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए अनुसंधान और रोगी देखभाल की सर्वोत्तम सुविधाएँ आमजन को मिलेगी। रिम्स एक स्वायत्त संस्थान और विश्वविद्यालय के रूप में कार्य करेगा जहाँ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 के तहत डिग्री, डिप्लोमा और अन्य शैक्षणिक मान्यता दी जा सकेगी। यह होगा रिम्स में — चिकित्सा शिक्षा सचिव अम्बरीष कुमार ने बताया कि रिम्स में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, एंडोक्राइनोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, सीटीवीएस और ट्रांसप्लांट यूनिट जैसे सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएँ होगी व – पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, जेरियाट्रिक मेडिसिन, रूमेटोलॉजी, रिप्रोडक्टिव बायोलॉजी, जेनेटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, स्लीप मेडिसिन, क्रिटिकल केयर जैसी अनेक नई सब-स्पेशियलिटी विभागों की भी स्थापना की जाएगी। संस्थान में सुपर-स्पेशियलिटी और ब्रॉड स्पेशियलिटी के विकास, क्वाटरनरी-स्तर के रेफरल अस्पताल सेवाओं, आधुनिक चिकित्सा और संबद्ध विज्ञानों (आयुष प्रणालियों-आयुर्वेद और योग) में विशेष स्नातकोत्तर शिक्षण और राज्य के विशिष्ट स्वास्थ्य पहलुओं पर नवाचार अनुसंधान किया जायेगा। साथ ही यहाँ शिक्षकों के प्रशिक्षण और प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक देखभाल के लिए उपचार प्रोटोकॉल में नवाचार में भी कदम उठाये जायेगे। रिम्स में सरकारी नीतियों और योजनाओं के पात्र मरीजों को मुफ्त उपचार मिलेगा जिससे अन्य राजकीय अस्पतालों पर मरीजों का भार कम होगा और उन्हें विश्व स्तरीय सुपर-स्पेशियलिटी सुविधाएँ यहाँ उपलब्ध होगी। उन्होने बताया कि राज्य के मुख्य सचिव इसके अध्यक्ष होंगे और प्रतिनियुक्ति पर निदेशक नियुक्त किए जायेंगे। साथ ही एक शासी निकाय का गठन किया जायेगा जिसमें एम्स नई दिल्ली, चंडीगढ़ के पीजीआई और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों को शामिल किया जायेगा। आरयूएचएस और स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, जयपुर को भी रिम्स में समाहित करना प्रस्तावित है। विश्व स्तरीय सुविधाओं से होगा रोगों का उपचार— रिम्स एक स्वायत्त संस्थान के रूप में कार्य करेगा जिसकी एक समर्पित निधि होगी। राज्य सरकार द्वारा रिम्स के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपए का व्यय किया जाना प्रस्तावित है। अन्य खर्चों के लिए प्रतिवर्ष 5 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है, जिसे आवश्यकतानुसार बढ़ाया जा सकेगा। रिम्स में मेडिकल, डेंटल और नर्सिंग कॉलेज, ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य केन्द्रों और फिजियोथेरेपिस्ट, फार्मासिस्ट जैसे स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जायेगा। जिससे चिकित्सक निजी प्रैक्टिस के स्थान पर संस्थागत उत्कृष्टता पर ध्यान केंद्रित करेगे। विधानसभा से रिम्स विधेयक पारित होने के बाद विभिन्न विषय विशेषज्ञ एवं निदेशक की नियुक्ति के लिए कार्यवाही शुरू की जाएगी और विश्व स्तरीय अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान के लिए विभिन्न विश्व स्तरीय चिकित्सा संस्थानों से अनुबंध किये जायेंगे। रिम्स की स्थापना से राजस्थान देश-विदेश में मेडिकल टूरिज्म के केंद्र के रूप में विकसित होगा।

Farmer News: गोपाल रत्न पुरस्कार के लिये किसान 15 सितम्बर तक कर सकते है आवेदन

देश में पिछले कुछ सालों में दुग्ध उत्पादन बढ़ा है। दुग्ध उत्पादन क्षेत्र को और अधिक बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार हर वर्ष डेयरी किसानों, सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान करने वाले तकनीशियन और दुग्ध उत्पादक कंपनियों को गोपाल रत्न पुरस्कार प्रदान करती है। यह पुरस्कार गाय/भैंसों की प्रमाणित स्वदेशी नस्लों की डेयरी करने वाले किसानों, सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान करने वाले तकनीशियन और सहकारी व दुग्ध उत्पादक कंपनियों को पशुपालन, मत्स्य और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत प्रति वर्ष दिया जाता है। मंत्रालय द्वारा इस वर्ष भी गोपाल रत्न पुरस्कार के लिए 15 सितम्बर तक ऑनलाईन आवेदन आमंत्रित किये गये हैं। इस पुरस्कार के लिए गाय /भैंसों की डेयरी करने वाले वही किसान पात्र होंगे जो गाय की 53 प्रमाणित देशी नस्लों अथवा भैंस की 20 प्रमाणित देशी नस्लों में से किसी एक का पालन करते हों। इसी प्रकार राज्य/ राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड/ दुग्ध फेडरेशन/ गैर सरकारी संगठन अथवा निजी क्षेत्र का कोई भी कृत्रिम गर्भाधान करने वाला तकनीशियन जिसने इस कार्य के लिए कम से कम 90 दिनों का प्रशिक्षण प्राप्त किया हो इस पुरस्कार के लिए पा़त्रता रखता है। साथ ही दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में सहकारी/कम्पनी अधिनियम के तहत 100 लीटर प्रतिदिन दूध का उत्पादन करने वाली और 50 किसान सदस्यों वाली ग्राम स्तर पर स्थापित सहकारी समिति/एमपीसी/एफपीओ दुग्ध उत्पादक कम्पनी इसके लिए पात्र है। वहीं राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत गोपाल रत्न पुरस्कार के लिए तीनों श्रेणी में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के लिए क्रमशः 5 लाख, 3 लाख और 2 लाख रुपये की राशि पारितोषिक स्वरूप प्रदान की जायेगी। विजेताओं को यह पुरस्कार 26 नवम्बर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में प्रदान किये जायेंगे। सभी इच्छुक किसान, कृत्रिम गर्भाधान करने वाले तकनीशियन और सहकारी व दुग्ध उत्पादक कम्पनियां इस पुरस्कार के लिए पशुपालन, मत्स्य और डेयरी विभाग, भारत सरकार की वेबसाइट https://awards.gov.in पर 15 सितम्बर 2025 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

C M NEWS: प्रदेश का कोई भी क्षेत्र विकास से अछूता नहीं रहना चाहिए —मुख्यमंत्री

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सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर सत्ता-संगठन के दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम शुरू हुआ। इस कार्यक्रम के पहले दिन सीएम ने सांसदों और विधायकों से संवाद किया। संवाद में विकसित राजस्थान 2047 के तहत संकल्प पर मंथन किया और सांसदों और विधायकों ने क्षेत्रवार स्थानीय जरूरतों व समस्याओं पर मुख्यमंत्री को सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष को कमजोर करने के लिये जनप्रतिनिधियों को जनता से मजबूत जुड़ाव करना होगा। उन्होने कहा कि प्रदेश का कोई भी क्षेत्र विकास से अछूता नहीं रहना चाहिए। वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने निकाय व पंचायत चुनावों की तैयारियों को लेकर संगठन को एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और अशोक परनामी ने संचार माध्यमों को बताया कि राज्य सरकार ने पिछले दोनों बजटों की 80% घोषणाओं को पूरा किया है। आगामी कार्यक्रमों में 16 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक सेवा पखवाड़ा, 29 सितम्बर से 31 अक्टूबर तक सांसद खेल महोत्सव और सरदार पटेल जयंती पर प्रत्येक संसदीय क्षेत्र में 150 किमी की पदयात्रा शामिल होगी।

RAS-2013 पेपरलीक के मुख्य आरोपी अमृतलाल मीणा का अध्याय समाप्त

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राजस्थान में बहुचर्चित RAS-2013 पेपरलीक मामले का मुख्य आरोपी अमृतलाल मीणा का अध्याय समाप्त हो गश है। मीणा पर 30 लाख रुपए लेकर अभ्यर्थियों को एग्जाम पास कराने और अपने पांच रिश्तेदारों को मुफ्त में पेपर उपलब्ध कराने का आरोप था। संचार माध्यमों के अनुसार राजस्थान लोक सेवा आयोग के पेपरलीक के मुख्य आरोपी अमृतलाल मीणा की वाराणसी में संदिग्ध हालात में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि कुछ दिन बनारस हॉस्पिटल में भर्ती रहने के बाद परिजन उसको जयपुर ला रहे थे। लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। समाचार माध्यमों की रिर्पोट के अनुसार परिजन हिंडौन सिटी जिला अस्पताल में शव लेकर पहुंचे, वहां पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। मामले में परिजनों ने वाराणसी में हत्या की आशंका जताई है और नादौती थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। वहीं पुलिस ने जीरो नंबर की एफआईआर दर्ज कर वाराणसी के सिगारा थाने में भेज दी। दर्ज रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी से आरके सिंह बिहारी नाम के एक व्यक्ति ने फोन कर अमृतलाल के अस्पताल में भर्ती होने की सूचना दी थी। जब परिजन वहां पहुंचे तो आरके सिंह का मोबाइल बंद आया। बतादें कि आरके सिंह भी पेपरलीक मामले में आरोपी था और अमृतलाल सरकारी कॉलेज में व्याख्याता रह चुका था। वहीं साल 2014 आरपीएससी की प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपरलीक कर पेपर बेचने के मामले में एसओजी ने गिरोह का पर्दाफाश किया था। एसओजी के अनुसार आरएएस सेवा की परीक्षा 2013 का पेपरलीक करने के मामले में अमृतलाल को गिरफ्तार किया था। तब एक अभ्यर्थी को प्री और मेंस परीक्षा पास कराने के बदले अमृतलाल ने 30 लाख रुपए में सौदा किया था। वहीं एसओजी ने पेपरलीक मामले में संजीव और हंसराज मीणा को भी गिरफ्तार किया था।

C M NEWS: विकसित भारत की उभरती यात्रा में मील का पत्थर है राजस्थान रिफाइनरी -मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने रविवार को बालोतरा के पचपदरा में एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लि. (एचआरआरएल) का निरीक्षण किया। उन्होंने रिफाइनरी परिसर में क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (सीडीयू) व डिलेयड कोकिंग यूनिट (डीसीयू) का सघन निरीक्षण किया और कर्मचारियों से मुलाकात कर उनके कार्य अनुभव की जानकारी ली। श्री पुरी और मुख्यमंत्री ने रिफाइनरी मेन कंट्रोल रूम (आरएमसीआर) का उद्घाटन किया। वहीं आरएमसीआर परिसर में ऑपरेटर प्रशिक्षण सिम्युलेटर का भी शुभारंभ किया। श्री शर्मा ने सीडीयू, वीडीयू और डीसीयू यूनिट के कंट्रोल पैनल के माध्यम से पम्पिंग सिस्टम की शुरूआत की तथा इस प्रकिया की जानकारी ली। कौशल प्रशिक्षण से स्थानीय युवाओं को रिफाइनरी में मिलेगा रोजगार— केन्द्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने आरएमसीआर में परियोजना समीक्षा की। इस दौरान एचपीसीएल अधिकारियों ने पावर प्वाइंट प्रजेन्टेशन के माध्यम से रिफाइनरी की वर्तमान स्थिति, ओवरव्यू, उत्पाद व निकासी योजना और सभी महत्वपूर्ण रिफाइनरी इकाइयों की उपयोगिता व सम्पूर्ण उत्पादकता से संबंधित जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने रिफाइनरी अधिकारियों को कौशल विकास पहल की आगामी 15 दिनों में कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से इस रिफाइनरी में रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों से रिफाइनरी की आगामी समय में शुरू होने वाली महत्वपूर्ण इकाइयों को लेकर भी चर्चा की। रिफाइनरी के बेहतर संचालन में राज्य सरकार देगी हरसंभव सहयोग— मुख्यमंत्री ने एचपीसीएल अधिकारियों को प्रदेश में सौर ऊर्जा उत्पादन और बैटरी स्टोरेज के लिए नवीन संभावनाएं तलाशने व सांभरा में रिफाइनरी द्वारा संचालित होने वाले अस्पताल को शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने रिफाइनरी के उत्पादों की बिक्री संबंधी कार्ययोजना बनाने व सम्पूर्ण रिफाइनरी परिसर में अधिकाधिक पौधारोपण करने के निर्देश दिए। उन्होंने रिफाइनरी की महत्वपूर्ण इकाइयों के शीघ्र कार्यशील होने और पूर्ण क्षमता पर संचालन के लिए राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। श्री शर्म ने रिफाइनरी की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य और केन्द्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से पिछले 6 माह में रिफाइनरी के कार्यों में उल्लेखनीय तेजी आई है और शीघ्र ही इसका संचालन प्रारंभ हो सकेगा। उन्होंने कहा कि यह रिफाइनरी स्थानीय युवाओं को रोजगार के साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि हम पर्यावरण संरक्षण के साथ ही राज्य के चहुंमुखी विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत, उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री के.के. विश्नोई, सांसद राजेन्द्र गहलोत, विधायक हमीर सिंह भायल, पूर्व केन्द्रीय राज्यमंत्री कैलाश चौधरी और मुख्य सचिव सुधांश पंत सहित कई उच्चाधिकारी व एचपीसीएल के अधिकारी मौजूद रहे।

C M NEWS: मुख्यमंत्री का ई-साइकिल वितरण समारोह, कहा बेटियों की मुस्कान ही हमारी ताकत

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार बालिका शिक्षा, महिला सुरक्षा, महिला सशक्तीकरण और महिला उत्थान को प्राथमिकता मानते हुए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बेटियों की मुस्कान ही हमारी ताकत है और हम प्रदेश की महिला शक्ति के उत्थान के लिए तत्पर हैं। महिलाओं व बेटियों के शिक्षित और सशक्त होने से ही देश और समाज सशक्त होगा। श्री शर्मा शनिवार को बालिकाओं को ई-साइकिल वितरण समारोह के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि माताएं-बहनें हमारी संस्कृति और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाती हैं। मातृशक्ति समाज व परिवार में बच्चों के पालन से लेकर बुजुर्गों की सेवा तक विभिन्न भूमिकाओं का बखूबी निर्वहन करती हैं। राज्य सरकार द्वारा गार्गी पुरस्कार योजना के तहत 3.90 लाख बालिकाओं और बालिका प्रोत्साहन पुरस्कार योजना के तहत लगभग 2 लाख बालिकाओं को प्रोत्साहन दिया गया है। उन्होंने कहा कि लाडो प्रोत्साहन योजना के तहत गरीब परिवारों को बालिकाओं के जन्म पर 1 लाख 50 हजार रुपये का सेविंग बॉन्ड मिल रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अब तक विभिन्न योजनाओं में लगभग 11 लाख से अधिक छात्राओं को साइकिल प्रदान की है। राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए कर रही प्रयास श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश में महिला सशक्तीकरण की दिशा में मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और मुख्यमंत्री मातृत्व पोषण योजना संचालित की जा रही हैं। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर 6 हजार 500 रुपये किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पांच साल में चार लाख सरकारी व निजी क्षेत्र में 6 लाख नौकरियों के संकल्प को पूरा करेगी। मुख्यमंत्री ने इस दौरान बालिकाओं और कामकाजी महिलाओं को ई-साइकिल वितरित की। कार्यक्रम में ईईएसएल की ई-साइकिल प्रोग्राम हैड रितु सिंह सहित बालिकाएं और कामकाजी महिलाएं उपस्थित रहीं।

Cabinet News: राज्य मंत्रिमंडल सभा में हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय- प्रदेश के आर्थिक समृद्धि पर हुआ संवाद

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में शनिवार को आयोजित मंत्रिमण्डल की सभा में प्रदेश की आर्थिक समृद्धि, सतत् विकास और समावेशी प्रगति के विजन डॉक्यूमेंट ‘विकसित राजस्थान@2047’ व 2 नीतियों को मजूंरी दी गई। वहीं आगामी विधानसभा सत्र को देखते हुए 3 विधेयकों के प्रारूप के अनुमोदन, परवन बांध डूब क्षेत्र के विस्थापितों को विशेष अनुग्रह राशि स्वीकृत करने और युवाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहन देने से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले किए गए। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ व जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने पत्रकार वार्ता में बताया कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना के अनुरूप राज्य सरकार के ‘विकसित राजस्थान@2047’ विजन डॉक्यूमेंट का मंत्रिमण्डल द्वारा अनुमोदन किया गया। उन्होंने कहा कि राज्य को आर्थिक समृद्धि, सतत् विकास और समावेशी प्रगति की दिशा में सशक्त, आत्मनिर्भर व विकसित बनाने का रोडमैप है। विजन डॉक्यूमेंट के अनुरूप संबंधित विभाग विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेंगे व वित्तीय आवश्यकताओं का वर्षवार आकलन कर उपलब्ध संसाधनों के अनुसार इसकी क्रियान्विति करेंगे। मंत्रिपरिषद् सभा में वन स्टेट-वन इलेक्शन को लेकर चर्चा संसदीय कार्य मंत्री पटेल ने बताया कि राज्य सरकार वन स्टेट, वन इलेक्शन को लागू करने की दिशा में निरंतर जरूरी कदम उठा रही है। पंचायतीराज और शहरी निकायों के परिसीमन, पुनर्गठन इत्यादि के संबंध में गठित मंत्रिगणों की कमेटियों द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट को मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य ओबीसी आयोग सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना करते हुए पंचायती राज संस्थाओं व नगरीय निकायों के निर्वाचन में अन्य पिछड़ा वर्ग के सम्बन्ध में आरक्षण के बारे में सर्वे पूरा होने के बाद आगामी तीन माह में अनुशंषा देगा। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि इस विजन डॉक्यूमेंट में राजस्थान को वर्ष 2030 तक 350 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और वर्ष 2047 तक 4.3 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें जनकल्याण एवं सामाजिक सशक्तीकरण, तीव्र विकास और रोजगार सृजन, भविष्य उन्मुख राजस्थान के लिए भौतिक अवसंरचना और सतत विकास व सहायक आधार नीति, वित्त और शासन थीम्स को शामिल किया गया है। इस दस्तावेज में शत-प्रतिशत साक्षरता, छात्र-केंद्रित और कौशल आधारित शिक्षा प्रणाली, युवाओं और महिलाओं का सशक्तीकरण, सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, सतत् जल प्रबंधन, स्मार्ट शहरीकरण, किफायती आवास, आधुनिक परिवहन, पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के लिए विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन योजना श्री राठौड़ ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा युवाओं को स्वावलंबी बनाने और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध करने के उद्देश्य से विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन योजना को मंत्रिमंडल सभा में मंजूरी प्रदान की गई। इस योजना के तहत 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को वित्तीय संस्थानों के माध्यम से मार्जिन मनी और कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे स्वयं का उद्यम स्थापित कर सकेंगे या पहले से स्थापित उद्यम का विस्तार, विविधीकरण अथवा आधुनिकीकरण कर सकेंगे। योजना में अधिकतम 2 करोड़ रुपये तक के ऋण पर 8 प्रतिशत तक ब्याज अनुदान दिया जाएगा। महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग श्रेणी के उद्यमियों, ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित उद्यम, कार्ड धारक बुनकर और शिल्पकारों को 1 करोड़ से अधिक और 2 करोड़ रुपये तक के ऋण पर 1 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज अनुदान मिलेगा। वित्तीय संस्थान द्वारा दिए गए ऋण पर 25 प्रतिशत अथवा अधिकतम 5 लाख रुपये तक मार्जिन मनी अनुदान भी प्रदान किया जाएगा। रिम्स की स्थापना के लिए आएगा विधेयक श्री जोगाराम पटेल ने कहा कि वर्ष 2024-25 की बजट घोषणा की अनुपालना में राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज का उन्नयन कर राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स), जयपुर की स्थापना के लिए विधेयक के प्रारूप पर कैबिनेट में सहमति प्रदान की गई। एम्स, नई दिल्ली की तर्ज पर यह संस्थान राज्य का एकमात्र पीजी स्तर का चिकित्सा संस्थान होगा। इसके माध्यम से सुपर-स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं को नया आयाम मिलेगा तथा चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति होगी। श्री पटेल ने कहा कि सवाई मानसिंह चिकित्सा महाविद्यालय के अधीन संचालित राज्य कैंसर संस्थान भी रिम्स में शामिल होगा। आरयूएचएस में कार्यरत सभी वर्तमान फैकल्टी, कर्मचारी और स्टाफ के पास सरकार में शामिल होने या आरयूएचएस के कर्मचारी के रूप में बने रहने का विकल्प होगा। राज्य के मुख्य सचिव रिम्स के अध्यक्ष होंगे। रिम्स में प्रमुख का दायित्व निभाने के लिए निदेशक की नियुक्ति की जाएगी। नगरीय क्षेत्रों के लिए भूमि आवंटन नीति-2025 को मंजूरी संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि राज्य में सार्वजनिक, सामाजिक, धार्मिक और चैरिटेबल संस्थाओं, ट्रस्ट, निजी निवेशकों, कम्पनियों व विभिन्न विभागों द्वारा शैक्षणिक, चिकित्सकीय, औद्योगिक, व्यावसायिक और पर्यटन इकाइयों आदि के लिए भूमि आवंटन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी, एकरूप बनाने के उद्देश्य से ‘नगरीय क्षेत्रों में विभिन्न उद्देश्यों के लिए भूमि आवंटन नीति-2025’ लाई जा रही है। इस नीति में विभिन्न सामाजिक उपयोगों हेतु भूमि आवंटन आरक्षित/डी.एल.सी. दर की 40 प्रतिशत दर पर किया जाएगा। रीको और आवासन मंडल को अविकसित भूमि कृषि डी.एल.सी. दर पर आवंटित की जा सकेगी। राजकीय विभागों को उनकी गतिविधियों हेतु निर्धारित सीमा तक भूमि निःशुल्क आवंटित की जाएगी। वहीं पर्यटन, आई.टी. उद्योग जैसी विशिष्ट नीतियों के तहत भी राज्य सरकार की स्वीकृति से भूमि आवंटन किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि यह नीति भूमि आवंटन नीति-2015 को प्रतिस्थापित करेगी। इस नीति के अंतर्गत आवासीय परियोजना, वाणिज्यिक परिसर, रिटेल फ्यूल स्टेशन, गैस वितरण प्रोजेक्ट, गैस गोदाम, रेड कैटेगरी उद्योग आदि को भूमि आवंटन नहीं किया जाएगा। एयरो स्पोर्ट्स गतिविधियों हेतु हवाई पट्टियों की भूमि लीज आवंटन नीति मंत्री राठौड़ ने कहा कि राज्य में एयरो स्पोर्ट्स गतिविधियों को बढ़ावा देने, वर्तमान में कम उपयोग में आ रही हवाई पट्टियों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने और एडवेंचर ट्यूरिज्म को प्रोत्साहन देने के लिए “एयरो स्पोर्ट्स गतिविधियों हेतु हवाई पट्टियों की भूमि लीज आवंटन नीति“ को मंजूरी दी गई है। इस नीति से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हांगे, साथ ही राज्य के राजस्व तथा जीडीपी में भी अभिवृद्धि होगी। इस नीति के तहत भूमि का लीज शुल्क 100 रुपये प्रति वर्ग मीटर प्रति वर्ष तथा कंसेशन शुल्क 6 लाख रुपये प्रति एयरस्ट्रिप प्रति वर्ष होगा। पहले 5 वर्षों तक दरों में 5 प्रतिशत एवं 6वें से 20वें वर्ष तक 10 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि की जाएगी। लीज अवधि अधिकतम 20 वर्ष की होगी तथा अधिकतम 2000 वर्ग मीटर भूमि आवंटित की जा सकेगी। एनबीसीसी करेगी राजस्थान मण्डपम, जीसीसी टावर का निर्माण श्री राठौड़ ने बताया कि बी-2 बाईपास, जयपुर स्थित रीको की 95 एकड़ भूमि पर राजस्थान मण्डपम, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, आईटी टावर का निर्माण राजस्व सृजन सह विकास मॉडल के आधार पर एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड के माध्यम से कराये जाने के प्रस्ताव का कैबिनेट द्वारा अनुमोदन किया गया। इस भूमि पर राजस्थान मण्डपम, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर/आईटी टावर, 5-स्टार होटल, 4-स्टार होटल, आवासीय एवं वाणिज्यिक टावरों का विकास किया जाएगा। परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 3700 करोड़ रुपए है, जिसमें 635 करोड़ रुपये की भरपाई राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। परियोजना पूर्ण होने की अनुमानित अवधि 30 माह है। उन्होंने बताया कि राजस्थान मण्डपम लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में कन्वेंशन सेंटर के रूप में 2200 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जायेगा, जिसकी क्षमता 7000 से 7500 व्यक्तियों की होगी। इस 95 एकड़ भूमि में से 15 हजार वर्गमीटर भूमि पर यूनिटी मॉल का निर्माण भी कार्यकारी एजेन्सी रीको के माध्यम से करवाया जा रहा है, जो लगभग डेढ़ साल में पूरा होने की सम्भावना है। राजस्थान राज्य राजमार्ग शुल्क नियम में एक्सप्रेसवे की दरों में संशोधन मंत्री राठौड़ ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 की बजट घोषणा के अनुसार एक्सप्रेसवे की 7 परियोजनाओं की डीपीआर तैयार करवाई जा रही है। अब तक 4 एक्सप्रेसवे परियोजनाओं कोटपूतली-किशनगढ़, जयपुर-भीलवाड़ा, ब्यावर-भरतपुर, जयपुर-फलौदी की रिपोर्ट डीपीआर सलाहकार द्वारा प्रस्तुत की गई है जबकि शेष 3 परियोजनाओं जालोर-झालावाड़, अजमेर-बांसवाड़ा एवं श्रीगंगानगर की रिपोर्ट का कार्य अभी प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि राजस्थान राज्य राजमार्ग शुल्क नियम, 2015 के अनुसार एक्सप्रेसवे पर शुल्क की दरें वर्तमान में राज्य राजमार्गों की निर्धारित दर से दोगुनी हैं, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग एक्सप्रेसवे पर यह दर 1.25 गुणा है। राज्य राजमार्ग एक्सप्रेसवे के लिए भी दरें भारत सरकार की अधिसूचना के अनुरूप करने के लिए नियमों में संशोधन की स्वीकृति दी गई। कारखाना (राजस्थान संशोधन) विधेयक – 2025 उन्होंने कहा कि कारखाना अधिनियम, 1948 (केन्द्रीय अधिनियम) में संशोधन करने के लिए कारखाना (राजस्थान संशोधन) विधेयक- 2025 के प्रारूप का अनुमोदन भी किया गया। इस प्रस्तावित संशोधन से कारखाना श्रमिकों के साप्ताहिक कार्यसमय 48 घंटों में उनकी दैनिक कार्य अवधि अधिकतम 9 घंटे से बढ़ा कर 10 घंटे तथा विश्राम से पूर्व कार्य की अधिकतम अवधि 5 घंटे से बढ़ा कर 6 घंटे की जाएगी। कार्य समय एवं विश्राम अवधि सहित कारखाना श्रमिकों के कार्यस्थल पर अधिकतम समय की सीमा साढ़े दस घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे की जाएगी। तिमाही में ओवरटाइम की अधिकतम सीमा 144 घंटे की जाएगी। इसके लिए श्रमिक की सहमति आवश्यक होगी। महिला श्रमिकों को सुरक्षा शर्तों एवं लिखित सहमति से रात्रिकालीन पारी (सायं 7 बजे के बाद एवं प्रातः 6 बजे से पूर्व) कार्य की अनुमति दी जा सकेगी। राजस्थान मत्स्य (संशोधन) विधेयक-2025 श्री पटेल ने बताया कि राजस्थान मत्स्य अधिनियम, 1953 में संशोधन के लिए मंत्रिमंडल द्वारा राजस्थान मत्स्य (संशोधन) विधेयक, 2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। इस विधेयक में मत्स्य अपराधों के लिए जुर्माने की राशि बढ़ाकर पच्चीस हजार रुपये, पुनः अपराध की स्थिति में पचास हजार रुपये तक करना प्रस्तावित किया गया है। अपराधों के शमन हेतु निर्धारित राशि को सौ रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने का प्रस्ताव है। यह संशोधन इसलिए आवश्यक थे क्योंकि मत्स्य अपराधों को रोकने के लिए वर्तमान में निर्धारित जुर्माना राशि अत्यंत कम है। विभिन्न सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी श्री पटेल ने बताया कि विधानसभा में अतिरिक्त मार्शल के पद पर पदोन्नति हेतु उप मार्शल का 2 वर्ष का अनुभव सहित 10 वर्ष के अनुभव का प्रावधान किया जा रहा है। उप मार्शल के पद के 2 वर्ष के अनुभव का एक-बारीय शिथिलन भी दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि राजस्थान तकनीकी शिक्षा अधीनस्थ सेवा में प्रतियोगी परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान करने के साथ ही न्यूनतम योग्यता अंक 40 प्रतिशत निर्धारित किए जाएंगे। एससी-एसटी अभ्यर्थियों को 5 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि राजस्थान शिक्षा सेवा (महाविद्यालय शाखा) में भर्ती के लिए आयोजित लिखित परीक्षा में प्रत्येक प्रश्नपत्र में न्यूनतम 36 प्रतिशत अंक तथा औसत 40 प्रतिशत अंक अनिवार्य होंगे। एससी-एसटी अभ्यर्थियों को उपरोक्त में 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इसके लिए संबंधित नियमों में संशोधन को मंजूरी दी गई। अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन उन्होंने बताया कि नए सोलर प्रोजेक्ट्स की स्थापना और पहले से चल रहे सोलर प्रोजेक्ट्स के विस्तार के लिए मंत्रिमंडल की बैठक में 10 प्रस्तावों का अनुमोदन किया गया। 1283 हेक्टेयर भूमि पर लगने वाली इन परियोजनाओं से प्रदेश में 2 हजार 400 मेगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता का सृजन होगा। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने बताया कि राज्य के सभी 3 डिस्कॉम में आरडीएसएस के अंतर्गत धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का आरडीएसएस योजना के अंतर्गत क्रियान्वयन किया जाएगा। इसका उद्देश्य आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं आजीविका संबंधी अंतराल को दूर कर उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करना है। इस योजना में ऐसे गांवों को शामिल किया गया है जिनकी जनसंख्या 500 या उससे अधिक है और जिनमें कम से कम 50 प्रतिशत आदिवासी निवासी हैं, साथ ही आकांक्षी जिलों के वे गांव भी सम्मिलित किए गए हैं जहां आदिवासी जनसंख्या 50 प्रतिशत या उससे अधिक है। श्री खराड़ी ने बताया कि परवन बांध डूब क्षेत्र में आ रहे मकानों के परिवारों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए अलग-अलग प्रकरणों में कुल 52 करोड़ रुपये से अधिक की विशेष अनुग्रह राशि देने का निर्णय किया गया है।

C M NEWS: स्थानीय और विदेशी पर्यटकों से हमारा राजस्थान देश में अग्रणी राज्य बन रहा है —मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में स्थानीय व विदेशी पर्यटकों की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी से हमारा राजस्थान देश में अग्रणी राज्य बन रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में आ रहे निरंतर बदलाव के अनुरूप प्रदेश में सैलानियों की संख्या में वृद्धि के लिए ऐतिहासिक, प्राकृतिक व धार्मिक स्थलों के विकास कार्यों की कार्ययोजना बनाएं। साथ ही, निरंतर समीक्षा करते हुए समयबद्ध रूप से इन कार्यों को पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थलों के विकास कार्यों में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों के सुझावों को भी शामिल किया जाए। श्री शर्मा शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में पर्यटन व कला एवं संस्कृति विभाग की बजट और अन्य महत्वपूर्ण घोषणाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजकीय संग्रहालयों के उन्नयन व संरक्षण, पैनोरमा निर्माण कार्य, बावड़ी जीर्णोद्धार सहित अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध रूप से पूरा किया जाए। उन्होंने प्रदेश के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों के विकास के लिए बनाई जाने वाली डीपीआर में कार्य से संबंधित सभी जरूरी पहलुओं को शामिल करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। साथ ही, उन्होंने इन कार्यों की प्रगति के लिए हर तीन माह में निरंतर मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। प्रदेश में वॉटर एवं डेजर्ट एडवेंचर एक्टिविटीज को मिले बढ़ावा- मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के धार्मिक पर्यटन स्थलों पर आधारभूत संरचना के विकास से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने पुष्कर में ब्रह्मा मंदिर कॉरिडोर एवं घाटों का विकास कार्ययोजना के आधार पर करने के निर्देश दिए। साथ ही, ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चिन्हित स्थानों पर विकास कार्यों की डीपीआर शीघ्र तैयार करने के लिए भी निर्देशित किया। उन्होंने बजट घोषणा 2025-26 में प्रदेश के प्रमुख हैरिटेज पर्यटन स्थलों पर किए जाने वाले विकास कार्यों की रूपरेखा बनाने के लिए अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वॉटर एवं डेजर्ट एडवेंचर एक्टिविटीज को बढ़ावा देने के लिए शीघ्र गाइडलाईन तैयार की जाए तथा वेडिंग डेस्टिनेशन को नई ऊंचाईयां देने के लिए प्रदेश के समृद्ध स्थलों को कार्ययोजना बनाकर बढ़ावा दिया जाए। ट्राइबल टूरिस्ट सर्किट हो विकसित- श्री शर्मा ने अधिकारियों को उदयपुर व जोधपुर में ट्रेवल मार्ट के आयोजन की रूपरेखा बनाने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने बेणेश्वर धाम, रामेश्वर घाट और बीगोद संगम को त्रिवेणी संगम के रूप में व प्रदेश में जनजातीय क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ट्राइबल टूरिस्ट सर्किट विकसित करने के निर्देश दिए। बैठक में पर्यटन व कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से प्रदेश में डेढ़ वर्ष में पर्यटन स्थलों पर किए गए विकास कार्यों पर आधारित वीडियो डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया।

Rajasthan News: सरकार ने राजकीय राजस्व अधिवक्ताओं की फीस में की बढ़ोतरी

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार राजस्व न्यायालयों में पैरवी करने वाले राजकीय अधिवक्ताओं की रिटेनरशिप बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राजस्व विभाग ने आदेश जारी किए हैं। श्री शर्मा के निर्देश की पालना सुनिश्चित करने हेतु न्यायालय राजस्व मण्डल अजमेर और अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों, संभागीय आयुक्त, जिला कलक्टर, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट और राजस्व अपीलीय प्राधिकारी में विचाराधीन राजस्व वादों में राज्य सरकार की ओर से पैरवी करने वाले पूर्णकालिक राजकीय अधिवक्ताओं की मासिक रिटेनरशिप फीस में बढ़ोतरी की गई है। राजस्व विभाग के शासन उप सचिव हरिसिंह मीना ने बताया कि राजस्व मंडल अजमेर में राज्य सरकार की पैरवी करने वाले स्टेट एडवोकेट को 11,250 रुपये, एडिशनल स्टेट एडवोकेट को 10,200 रुपये और डिप्टी स्टेट एडवोकेट को 9000 रुपये मासिक रिटेनरशिप मिलेगी। सभी सम्भागीय आयुक्त और अतिरिक्त सम्भागीय आयुक्त कोर्ट में पैरवी करने वाले राजकीय अधिवक्ता को 6 हजार रूपये, जयपुर, अलवर,भरतपुर, चित्तोडगढ़, उदयपुर, कोटा, श्रीगंगानगर, जोधपुर, नागौर और पाली के जिला कलेक्टर कोर्ट और अतिरिक्त जिला कलेक्टर कोर्ट में पैरवी करने वाले राजकीय अधिवक्ता को 6 हजार रूपये, बूंदी, झालावाड़, टोंक, जालोर, सिरोही, सीकर,झुन्झुनू, दौसा, बारां और राजसमंद में जिला कलेक्टर कोर्ट और अतिरिक्त जिला कलेक्टर कोर्ट में पैरवी करने वाले राजकीय अधिवक्ता को चार हजार 500, बांसवाड़ा, बाड़मेर, बीकानेर, चूरू, डूंगरपुर, धौलपुर,जैसलमेर, हनुमानगढ़ और करौली जिला कलेक्टर कोर्ट और अतिरिक्त जिला कलेक्टर कोर्ट में पैरवी करने वाले राजकीय अधिवक्ता को 3 हजार रूपये मासिक रिटेनरशिप मिलेगी। अन्य जिलों के जिला कलेक्टर कोर्ट और अतिरिक्त जिला कलेक्टर कोर्ट के सम्बंध में यह राशि 4500 रूपये प्रति माह होगी। राजस्व अपीलीय प्राधिकारी (रेवेन्यू अपीलेट अथॉरिटी) और उनके कैम्प कोर्ट के वाद में यह राशि 3 हजार रूपये होगी। इसके अतिरिक्त न्यायिक दायित्वों के पेटे इन अधिवक्ताओं को देय राशि में भी वृद्धि की गई है। अब जवाबदावा के लिए 700 रुपये, प्रति पृष्ठ डिक्टेशन व टंकण शुल्क के लिए 25 रुपये, प्रति पृष्ठ फोटो स्टेट के 2 रुपये, अधिवक्ता कल्याण कोष के लिए 200 रुपये, स्टेशनरी फाईल कवर, टेग्स आदि के लिए 60 रुपये, प्रति प्रमाण पत्र शपथ पत्र प्रमाणीकरण के लिए 100 रुपये और अन्य विधिक खर्चे के रूप में 200 रुपये देय होंगे। वहीं मुख्यमंत्री ने पंचायती राज और शहरी निकायों के परिसीमन, पुनर्गठन जैसे कार्यों के संबंध में गठित मंत्रीगणों की दो सब कमेटियों द्वारा प्रस्तुत की गई अनुशंषा रिपोर्ट को अनुमोदित किया मुख्यमंत्री के इस निर्णय से अब राजस्थान ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ की ओर तेजी से अग्रसर हो सकेगा।