Jaipur News: जनता त्रस्त – सरकार मस्त: भ्रस्टाचार, निकम्मेपन और बाहरी अफसरों’ की अंधी तैनाती ने बंटाधार कर दिया है राजधानी का

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—महेश झालानी

जयपुर की इस बार की बरसात ने प्रशासनिक निकम्मेपन की परतें खोलकर रख दी हैं। जिस राजधानी की पहचान सुव्यवस्थित सड़कें, ऐतिहासिक धरोहरें और आधुनिक सुविधाएं थीं, वहीं अब हर साल बरसात आते ही घुटनों तक पानी, सीवर उफान और ट्रैफिक जाम की कहानियां आम हो गई हैं। लेकिन 2025 की बरसात सिर्फ़ एक प्राकृतिक आपदा नहीं थी, यह सरकार, नगरीय विकास विभाग और अधिकारियों की घोर विफलता का ‘लाइव सबूत’ बनकर उभरी। इस बार जनता के गुस्से का केन्द्र केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि वे ‘बाहरी अफसर’ बन रहे हैं जिन्हें जयपुर के भूगोल, मानसून की प्रकृति और स्थानीय जरूरतों की तनिक भी जानकारी नहीं है। हकीकत यह है कि जयपुर की नगर व्यवस्था की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, वे कंधे या तो असंवेदनशील हैं या पूरी तरह से अज्ञान। नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा से लेकर सचिव देवाशीष पृष्टि, जेडीए की आयुक्त आनंदी और सचिव निशांत जैन, चारों शीर्ष पदों पर बैठे ये अधिकारी या तो गैर-राजस्थानी हैं या राजधानी की शहरी जटिलताओं से पूरी तरह अनभिज्ञ। इनमें से किसी को भी जयपुर की भूगर्भीय बनावट, पानी की निकासी का पैटर्न, पुराने नालों की संरचना या स्थानीय ड्रेनेज नेटवर्क की तकनीकी समझ नहीं है। जब अफसरशाही की रीढ़ ही बाहरी और अनुभवहीन हो, तो परिणाम यही होता है कि शहर हर बारिश में दम तोड़ देता है। मजे की बात यह है कि जब बारिश शुरू हो चुकी थी, देवाशीष पृष्टि को उस वक्त यूडीएच का प्रमुख शासन सचिव नियुक्त किया गया था। ये मूलतः उड़ीसा के रहने वाले है। इन्हें जयपुर या राजस्थान के किसी भी शहर की एबीसीडी तक पता नही है। सचिवालय के भीतर माने जाने वाले सूत्रों के अनुसार, वे पूरी तरह ‘फाइल-बेस्ड निर्णयों’ पर निर्भर हैं और ग्राउंड रियलिटी से उनका कोई वास्ता नहीं है। कमोबेश यही हाल आनंदी और निशांत जैन का है। आनंदी तमिलनाडु की तो निशांत जैन यूपी के रहने वाले है। आनंदी ईमानदार तो है, लेकिन जेडीसी के लायक नही बताई जाती। जबकि निशांत जैन के बारे में कहा जाता है कि इनसे टालू और अकर्मण्य अफसर जेडीए में इससे पहले नियुक्त नही हुआ। नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा की अकर्मण्यता और अज्ञानता के बारे में अधिकांश मंत्री और विधायक तक बखूबी जानते है। इनकी खूबी है कि ये जाट है। इन्हें शांति धारीवाल बनने के लिए बीसो साल लग जाएंगे। धारीवाल ने विकास किया था, जबकि खर्रा शहरों का “विनाश” करने पर आमादा है। उन्होंने अब तक एक भी बार मानसून के दौरान जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा नहीं किया हैं। न कोई निरीक्षण, न कोई राहत समीक्षा बैठक। मंत्री महोदय की चुप्पी इस बात का संकेत है कि या तो वे हालात की गंभीरता को समझ नहीं पा रहे हैं, या फिर जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं। अथवा इस योग्य ही नही है कि वे इस विभाग का नेतृत्व कर सके । जनता सवाल पूछ रही है —क्या नगरीय विकास केवल फाइलों में योजनाएं बनाने तक सीमित है? जब राजधानी ही बेहाल हो, तो बाकी शहरों की स्थिति की कल्पना की जा सकती है। अफसरों की लापरवाही और सरकार की उदासीनता के चलते जयपुर के कई मोहल्लों में जलभराव से लोग अस्पताल नहीं पहुंच सके, तब अफसर लोग सचिवालय में “मीटिंग-मीटिंग” खेलते हुए ‘वर्क फ्रॉम होम’ पर थे। जयपुर विकास प्राधिकरण की कमिश्नर आनंदी, जिन पर जयपुर शहर की सबसे अहम विकास परियोजनाओं और ड्रेनेज सिस्टम की जिम्मेदारी है, वे भी शहर से न तो भावनात्मक रूप से जुड़ी हैं, न ही तकनीकी रूप से। जानकारों के अनुसार, आनंदी द्वारा शुरू की गई कई योजनाएं आधी-अधूरी हैं, जिनमें 22 करोड़ की पाइपलाइन योजना भी शामिल है जो उलटी ढलान पर बिछा दी गई। इससे जलनिकासी नहीं हो सकी, बल्कि पानी रुक गया और मोहल्ले डूब गए। उनके नेतृत्व में जेडीए का कामकाज केवल कागज़ी आंकड़ों और स्लाइड प्रजेंटेशन तक सीमित है। दरअसल सरकार द्वारा सिस्टम में ऐसे अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं जिन्हें शहर की गलियों, नागरिक जरूरतों और भौगोलिक संरचना का आधारभूत ज्ञान नहीं है । योजनाएं कागज़ों पर बनती हैं और जमीन पर डूब जाती हैं। अब आवश्यकता है कि नगरीय विकास जैसे संवेदनशील विभागों में ऐसे स्थानीय अधिकारियों नियुक्ति हो, जिन्हें जयपुर की सड़कों, नालों, और बस्तियों की पहचान हो। जो न सिर्फ़ नक्शा, बल्कि नब्ज़ भी पढ़ सकें। जब तक मंत्रालय और प्रशासन में अनुभवी, लोकल अफसरों को शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक जयपुर हर साल बारिश में भीगता रहेगा और जनता गुस्से में उबलती रहेगी। जयपुर की बर्बादी केवल बादलों से नहीं, बर्बाद होती नीतियों, लापरवाह नेताओं और अजनबी अफसरों से हो रही है। बरसात ने तो केवल पर्दा उठाया है, असली कारण तो वो नेतृत्व है, जिसे न इस शहर की पहचान से कोई लगाव है और न इसकी समस्याओं से। अगर सरकार अब भी नहीं चेती, तो जनता अगली बारिश से पहले ही ‘प्रशासनिक सफाई’ कर देगी “वोट की झाड़ू से”।

Political News: धनखड़ की खामोशी करेगी जबरदस्त विस्फोट

— महेश झालानी

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की रहस्यमयी चुप्पी अब केवल एक संवैधानिक मर्यादा नहीं रही। यह चुप्पी अब सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र बन चुकी है। जब कोई इतना मुखर, स्पष्टवादी और तेजस्वी नेता अचानक से शांत हो जाए, तो समझा जाना चाहिए कि पानी के नीचे कुछ बड़ा पक रहा है। राजनीतिक संकेत साफ कह रहे हैं कि धनखड़ एनडीए को भीतर से चुनौती देने की तैयारी में हैं। धनखड़ कोई आम नेता नहीं हैं। उनका राजनीतिक इतिहास बताता है कि वे टकराव से डरते नहीं, बल्कि उसका सटीक जवाब देना जानते हैं। पश्चिम बंगाल में राज्यपाल रहते हुए उन्होंने ममता बनर्जी को जिस प्रकार खुली चुनौती दी, वह उनकी कार्यशैली का परिचायक है। वे कभी ‘गौरवशाली चुप्पी’ में विश्वास नहीं करते रहे । लेकिन आज उनका यह मौन, वास्तव में एक बगावत की प्रस्तावना बनता दिख रहा है। जगदीप धनखड़ अनुकूल समय का इंतजार कर रहे है । समय आने पर वे तुरुप का इक्का निकालकर उन लोगो को कठघरे में खड़ा कर सकते है जिनकी वजह से उन्हें इस्तीफा देने के लिए बाध्य होना पड़ा। वे इस बात पर भी गम्भीरतापूर्वक विचार कर रहे है कि कहीं सतपाल मलिक की तरह उनका कारतूस फुस्स साबित नही हो जाए । अपना नफा और नुकसान भी तोलना धनखड़ को बखूबी आता है। वे जानते है कि सत्ता में ऐसे लोग भी बैठे है जो उनको नेस्तनाबूद करने के लिए सीबीआई और ईडी को पीछे लगा सकते है। सभी बिन्दुओ पर विचार भी किया जा रहा है और अपने शुभचिंतको से निरन्तर विचार विमर्श भी जारी है। एनडीए की मौजूदा राजनीति में जहां एक नेता के इर्द-गिर्द सत्ता का पूरा चक्र केंद्रित हो चुका है, वहां स्वतंत्र विचार रखने वाले नेताओं के लिए स्थान लगभग समाप्त हो गया है। धनखड़ जैसे व्यक्ति के लिए यह घुटनपूर्ण स्थिति असहनीय हो सकती है। यही कारण है कि अब उनके इर्द-गिर्द की गतिविधियां असामान्य रूप से तेज़ हो गई हैं। न तो वे भाजपा नेतृत्व से प्रत्यक्ष संवाद में हैं, न ही सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय। खबर मिल रही है कि वे भीतर ही भीतर अपने लिए अगली लड़ाई की जमीन तैयार कर रहे हैं। सियासी गलियारों में कानाफूसी है कि धनखड़ न केवल भाजपा के असंतुष्ट वर्ग से संवाद कर रहे हैं, बल्कि विपक्षी नेताओं, विशेष रूप से कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के कुछ प्रमुख चेहरों के साथ परोक्ष व अपरोक्ष संपर्क में हैं। यह संवाद फिलहाल अनौपचारिक है । लेकिन इसका स्वरूप गंभीर होता जा रहा है। विपक्ष की नज़र में धनखड़ वह चेहरा बन सकते हैं जो संविधान, मर्यादा और भाजपा के ‘भीतर के विद्रोह”, इन तीनों का संतुलन बनाकर प्रस्तुत किया जा सकता है। चोट खाए धनखड़ को भी इससे कोई गुरेज नही होने वाला है। उनके मन मे जबरदस्त ज्वालामुखी धधक रही है जो वक्त आने पर जलजला पैदा अवश्य करेगी। सूत्रों से पता चला है कि कुछ राजनीतिज्ञ धनखड़ के निकट सम्पर्क में है। लेकिन धनखड़ सुन सबकी रहे है। लेकिन वे क्या करने वाले है, इसकी भनक किसी को लगने नही दे रहे है। धनखड़ बहुत ही घाघ राजनीतिज्ञ माने जाते है। उनको कब हंसना और कब आंखे दिखानी है, यह बखूबी जानते है। इसी खूबी के चलते भाजपा की विचारधारा के इतर होते हुए भी वे न केवल पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बन गए बल्कि उप राष्ट्रपति की कुर्सी पर भी विराजमान होगये है। मोदी और शाह का करीबी बनने का “गौरव” हर किसी को नसीब नही होता है। लेकिन धनखड़ की अति महत्वाकांक्षा की वजह से वे मोदी और शाह की आंखों की किरकिरी बन गए थे। भविष्य की तस्वीर थोड़ी थोड़ी साफ दिखाई दे रही है। यदि धनखड़ भाजपा से खुलकर अलग होते हैं तो 2027 के राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष उन्हें अपना प्रत्याशी बना सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह एनडीए के लिए सिर्फ एक चुनावी चुनौती नहीं, बल्कि एक गहरे मनोवैज्ञानिक झटके की तरह होगा। धनखड़ इस समय जितने शांत हैं, उतने ही तैयार भी हैं। उनकी चुप्पी में गूंज है, और उनकी आंखों में वो भाषा है जो सत्ता की सीमाओं को चुनौती देना जानती है। यह बात जितनी जल्दी भाजपा नेतृत्व समझे, उतना ही अच्छा। क्योंकि यदि वे जागे नहीं, तो जल्द ही उन्हें अपने ही आंगन से उठती एक बगावत की आवाज़ सुनाई दे सकती है । उस बगावत का नाम होगा – जगदीप धनखड़। क्योंकि इतिहास गवाह है । कुछ तूफान शब्दों से नहीं, चुप्पियों से जन्म लेते हैं।  

C M NEWS: ट्रैफिक व्यवस्था पर मुख्यमंत्री का उच्च स्तरीय संवाद, कहा सिग्नल फ्री ट्रैफिक संचालन की कार्ययोजना बनाएं

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर शहर की वर्तमान ट्रैफिक स्थिति को तुरंत सुगम और सुचारू बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यातायात संचालन हेतु भविष्य की आवश्यकताओं के दृष्टिगत दीर्घकालीन कार्ययोजना के लिए गृह और यातायात विभाग, जेडीए, शहरी विकास व आवासन, स्वायत्त शासन विभाग मिलकर सामूहिक जिम्मेदारी के साथ काम करें। श्री शर्मा शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पर प्रदेश के प्रमुख शहरों और जयपुर शहर की यातायात व्यवस्था को लेकर उच्च स्तरीय संवाद कर रहे थे। उन्होंने पुलिस व यातायात के अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन को जागरूक करते हुए ट्रैफिक सेंस को बढ़ावा दिया जाए। चिन्हित बस स्टैण्डों का स्थानांतरण शीघ्र हो लागू— मुख्यमंत्री ने संवाद में जयपुर शहर में वाहनों के सुगम संचालन और जाम से राहत के लिए व्यापारियों और आमजन से सुझाव लेकर व्यस्ततम मार्गों पर वन वे ट्रैफिक संचालन की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहर के चिन्हित ऑटो और बस स्टैण्ड के स्थानांतरण को शीघ्र लागू किया जाए। इसी क्रम में हीरापुरा बस टर्मिनल से मानसून के पश्चात बसों का तुरंत संचालन किया जाए। उन्होंने जयपुर के नवीन स्थानांतरित बस स्टैण्डों से यात्रियों के शहर में आवागमन के लिए जेसीटीसीएल बसों का संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जयपुर शहर में आवश्यकतानुरूप मल्टीलेवल पार्किंग व्यवस्था हो विकसित— श्री शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वाहनों की पार्किंग व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए शहर के प्रमुख स्थानों पर मल्टीलेवल पार्किंग और उसकी उपयोगिता के अवसरों को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने शहर में जोन आधारित ई-रिक्शा संचालन के लिए जारी दिशा-निर्देशों की पालना सुनिश्चित करवाते हुए जेडीए को जब्त ई-रिक्शाओं के लिए यार्ड व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने यातायात नियमों के उल्लंघन पर निगरानी के लिए शहर में आधुनिक कैमरे लगाने और केन्द्रित कंट्रोल रूम बनाने के लिए राजस्थान ट्रांसपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट फंड से वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति करने के निर्देश दिए। उन्होंने यातायात नियमों की सख्त पालना कराने और उल्लंघन पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही, बढ़ती वाहनों की संख्या को ध्यान में रखते हुए भविष्य में प्रमुख चौराहों को चिन्हित कर सिग्नल फ्री ट्रैफिक संचालन की कार्ययोजना बनाएं। इस दौरान मुख्य सचिव सुधांश पंत, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

Chambal River News: प्रशासन का हर कर्मचारी इस समय जनसेवा का भागीदार है —मंत्री बेढम

चंबल नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण उत्पन्न बाढ़ जैसी परिस्थितियों के बीच धौलपुर जिले के प्रभारी मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने शुक्रवार को धौलपुर जिले के राजाखेड़ा उपखंड क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव गढ़ी जाफर का दौरा किया। उन्होंने राहत शिविरों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर आमजन से बातचीत की और जिला प्रशासन द्वारा की जा रही राहत सेवाओं का फीडबैक लिया। मंत्री ने ग्रामीणों से भोजन, चिकित्सा सुविधाओं, पानी, आश्रय और अन्य आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता के बारे में जानकारी ली और जिला कलेक्टर श्रीनिधि बी टी को राहत कार्यों को युद्ध स्तर पर जारी रखने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रभावित परिवार को असुविधा नहीं होनी चाहिए, प्रशासन का हर कर्मचारी इस समय जनसेवा का भागीदार है। श्री बेढ़म ने प्रशासन द्वारा किए जा रहे राहत और बचाव कार्यों की खुले मन से सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से सेना के जवानों, एसडीआरएफ टीम और पुलिस बल द्वारा किए जा रहे समर्पित कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि आप सभी आपदा में देवदूत की तरह सेवा दे रहे हैं। इस दौरान संभागीय आयुक्त डॉ. टीना सोनी, पुलिस महानिरीक्षक कैलाश चंद्र बिश्नोई, जिला कलेक्टर श्रीनिधि बी टी, पुलिस अधीक्षक, उपखंडाधिकारी वर्षा मीना सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, रेस्क्यू टीम के सदस्य और फील्ड अधिकारी उपस्थित रहे।

Mine News: मुख्यमंत्री का खनिज खोज व वैज्ञानिक खनन पर जोर —प्रमुख सचिव

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प्रमुख शासन सचिव खान एवं भूविज्ञान टी. रविकान्त ने राज्य में खनिज खोज में लगी राज्य व केन्द्र सरकार की संस्थाओं को परस्पर सहयोग व समन्वय से मिनरल एक्सप्लोरेशन कार्य को गति देने की आवश्यकता प्रतिपादित की है। बेहतर एक्सप्लोरेशन और सटीक आकलन से अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकेंगे। राजस्थान में विपुल व विविध प्रकार की बेशकीमती खनिज संपदा को देखते हुए एक्सप्लोरेशन कार्य में समयवद्धता, एक्सप्लोरेशन परिणामों में गुणवत्ता पर बल देना होगा ताकि खनिज ब्लॉकों के ऑक्शन में सरकार को बेहतर राजस्व, प्रदेश में खनन क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर विकसित हो सके। श्री रविकान्त शुक्रवार को सचिवालय में ज्वाईट वर्किंग ग्रुप की 10 वीं सभा की अध्यक्षता कर रहे थे। ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप में भारत सरकार के खान मंत्रालय के निदेशक तकनीकी, जीएसआई, एमईसीएल, एएमडी, आरएसएमईटी और राज्य के खान व भूविज्ञान के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री की खनन क्षेत्र के प्रति गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है कि मिनरल एक्सप्लोरेशन से लेकर ऑक्शन की नियमित समीक्षा के साथ ही सस्टेनेबल माइनिंग पर जोर देते रहे हैं। प्रमुख सचिव ने कहा कि एक्सप्लोरेशन में जुटी केन्द्र व राज्य सरकार की संस्थाएं एक्सप्लोरेशन कार्य में गुणवत्ता, उपलब्धता और वाइविलिटी का सटीक आकलन करेगी तो ब्लॉकों के ऑक्शन में अधिक से अधिक भागीदारी तय होगी और उसका पूरा लाभ देश और प्रदेश को मिल सकेगा। उन्होंने बांसवाड़ा, बाड़मेर, सिन्देसरी में एक्सप्लोरेशन में आ रही स्थानीय स्तर की समस्या के निदान के लिए जीएसआई और खान विभाग जिला कलक्टर से मिलकर समाधान कराएं। उन्होंने आरएसएमईटी को भी एक्सप्लोरेशन कार्यों की भी टाइमलाईन बनाकर क्रियान्विति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जियोलोजिकल सर्वें ऑफ इण्डिया के उपमहानिदेशक अनिंध्यों भट्टाचार्य और निदेशक हरीश मिस्त्री ने बताया कि राजस्थान में प्रचुर मात्रा में मेजर और माइनर मिनरल उपलब्ध है और जीएसआई द्वारा एक्सप्लोरेशन कर सरकार को जीएम और जीआर दी जा रही है ताकि ब्लॉक तैयार कर नीलामी और खनन हो सके। उन्होंने खान विभाग, जीएसआई और इससे जुड़ी संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल की सराहना की। केन्द्रीय खान मंत्रालय के निदेशक तकनीकी योगेन्द्र सिंह भांभू ने कहा कि माइनिंग सेक्टर में राजस्थान में तेजी से और सराहनीय कार्य हो रहा है। बेहतर समन्वय से इस गति को बनाये रखना होगा। निदेशक खान दीपक तंवर ने जीएसआई सहित एक्सप्लोरेशन संस्थाओं द्वारा प्राप्त रिपोर्टस की चर्चा करते हुए रिसोर्स के बेहतर आकलन और क्षेत्र में आने वाले अवरोधों को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट तैयार करने पर जोर दिया। मुख्यकार्यकारी आरएसएमईटी आलोक जैन ने बताया कि संस्था द्वारा कराये जा रहे एक्सप्लोरेशन कार्य को परिणाम स्तर तक पहुंचाने में तेजी लाई जाएगी। इस दौरान एमईसीएल से आशीष सिंह, एएमडी से राजारमन, खान विभाग से एसजी सुनील कुमार वर्मा, सुशील हुड़्डा और जीएसआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

Election Commission News: प्रदेश में जल्द शुरू होगी विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची प्रक्रिया

प्रदेश में जल्द हि मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। जिसमें सभी मतदाताओं को अपना परिगणना फॉर्म भरकर अपने BLO को जमा करवाना होगा। फॉर्म जमा नहीं करवाने पर आपका नाम मतदाता सूची में नहीं आएगा। इस विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मृत व्यक्तियों के नाम हटाना, स्थायी रूप से निवास बदलने वालों के नाम हटाना, किसी मतदाता का दो स्थानों पर पंजीकरण हो उसे निरस्त करना, फर्जी मतदाताओं का नाम हटाना और शुद्ध, स्वच्छ व पारदर्शी मतदाता सूचियों का निर्माण करना बताया गया है। पुनः पंजीकरण प्रक्रिया के अनुसार अपना फॉर्म भरने से पूर्व आप अपने 2 नवीनतम रंगीन पासपोर्ट साइज फ़ोटो जरूर खिंचवा लें, जिसका बैकग्राउंड सफेद होना चाहिए। आपको अपने BLO द्वारा परिगणना फॉर्म उपलब्ध करवाया जाएगा, जिसे निश्चित समय में भरकर BLO को जमा करवाना होगा। वहीं फॉर्म के साथ आपको 11 दस्तावेजों की सूची में से कोई भी 2 दस्तावेज अनिवार्य रूप से संलग्न करना होगा।

दस्तावेजों की सूची इस प्रकार है:

1. केंद्र सरकार/ राज्य सरकार / PSU के नियमित कर्मचारियों को जारी पहचान पत्र या पेंशन कार्ड 2. भारत में 01/07/1987 से पूर्व सरकार/बैंक/LIC/डाकघर/PSU या स्थानीय प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र/ दस्तावेज/ पहचान पत्र 3. जन्म प्रमाण पत्र 4. पासपोर्ट 5. मूल निवास प्रमाण पत्र 6. 10 वीं बोर्ड की अंक तालिका मय प्रमाण पत्र 7. वन अधिकार प्रमाण पत्र 8. अन्य पिछड़ा वर्ग/ अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति या अन्य जाति प्रमाण पत्र 9. राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां लागू हो) 10. राज्य/ स्थानीय अधिकारियों द्वारा तैयार किया गया परिवार रजिस्टर 11. सरकार द्वारा जारी कोई भूमि/ गृह आवंटन प्रमाण पत्र दूसरी ओर निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं के पंजीकरण के लिये 3 श्रेणियां बनाई है। आप उसके अनुसार भी अपने दस्तावेज तैयार कर सकते हैं। यदि आपका जन्म 01 जुलाई 1987 से पूर्व हुआ है, तो आपको स्वयं का कोई भी एक दस्तावेज जमा करवाना होगा, लेकिन कोई एक दस्तावेज होना अनिवार्य है। यदि आपका जन्म 01 जुलाई 1987 से 02 दिसम्बर 2004 के मध्य हुआ है तो आपको एक दस्तावेज स्वयं का और एक दस्तावेज माता-पिता का होना अनिवार्य है। यानी कम से कम 2 दस्तावेज होने चाहिए। वहीं यदि आपका जन्म 02 दिसम्बर 2004 के बाद हुआ है तो आपके पास 3 दस्तावेज होने चाहिए। एक स्वयं का, एक माता का व एक पिता का यानि कि कम से कम तीन दस्तावेजों का होना जरूरी है।

C M NEWS: हमारी संस्कृति में सेवा का भाव सर्वोपरि -मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि बाबा रामदेव जी ने सामाजिक समरसता की स्थापना करने और समाज में गरीब एवं वंचित लोगों की पीड़ा दूर करने का काम किया। इस धरा पर नेत्र कुंभ का आयोजन बाबा रामदेव जी के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धा और मानव कल्याण के उनके आदर्शों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। श्री शर्मा गुरूवार को जैसलमेर के रामदेवरा में आयोजित नेत्र कुंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह चिकित्सा सेवा जीवन में फिर से उजाले भरने जैसा पुण्य कार्य है। यह जनकल्याण और मानव सेवा की मिसाल है, जो सभी वर्गों के लिए समर्पित है।

बाबा रामदेव मेले में श्रद्धालुओं की आंखों की निःशुल्क जांच –

श्री शर्मा ने कहा कि हमारी संस्कृति और त्योहारों में सेवा का भाव सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि लोकदेवता बाबा रामदेव जी के मेले के शुभ अवसर पर आंखों के इलाज के लिए महाशिविर का आयोजन किया जा रहा है। 1 अगस्त से 2 सितम्बर तक चलने वाले इस शिविर में सवा लाख से अधिक श्रद्धालुओं की आंखों की निःशुल्क जांच की जाएगी। साथ ही, 11 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की आंखों का निःशुल्क ऑपरेशन उनके निवास के नजदीक चिकित्सालय में कराने की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन अंत्योदय के संकल्प को साकार करने की दिशा में अहम कदम है।

लोगों के जीवन में उजियारा ला रही राज्य सरकार –

मुख्यमंत्री ने कहा कि अंत्योदय हमारी नीतियों का प्रमुख ध्येय है। यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हमारी सरकार ने पिछले डेढ़ साल में अनेक जनकल्याणकारी कदम उठाए हैं। नेत्र स्वास्थ्य को लेकर हमारी सरकार निरंतर प्रयास कर रही है ताकि प्रदेशवासियों के जीवन में खुशियां की रोशनी फैलती रहे। प्रदेश में प्रतिवर्ष लाखों लोगों की निःशुल्क मोतियाबिंद सर्जरी तथा नेत्र चिकित्सकों और सहायकों को नवीनतम तकनीकों का प्रशिक्षण और अत्याधुनिक उपकरण प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेत्रदान के माध्यम से कॉर्निया प्रत्यारोपण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे हजारों लोगों के जीवन को उजियारा मिल रहा है।

मा योजना में प्रतिदिन 10 हजार लोगों को मिल रहा कैशलेस उपचार –

श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (मा) के माध्यम से गरीब और वंचित परिवारों को 25 लाख रुपए तक निःशुल्क इलाज उपलब्ध करवा रही है। यह सिर्फ एक स्वास्थ्य बीमा योजना नहीं बल्कि लाखों जिंदगियों को बचाने का एक मानवीय संकल्प है। उन्होंने कहा कि इस योजना में प्रतिदिन लगभग 10 हजार लोगों को 10 करोड़ रुपए की राशि का कैशलेस उपचार मिल रहा है। साथ ही, मा वाउचर योजना लागू कर प्रतिमाह 25 हजार गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क सोनोग्राफी की सुविधा भी दी जा रही है। अब तक लगभग 2 लाख 87 हजार महिलाओं को इस योजना के तहत वाउचर दिए गए हैं।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में लगभग 50 हजार भर्तियां –

उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने पेपरलीक जैसी घटनाओं से युवाओं के सपनों को चकनाचूर करने का काम किया। हमारी सरकार ने डेढ़ साल में ही पूर्ववर्ती सरकार के पांच साल के कार्यकाल से अधिक कार्य किए है। उन्होंने कहा कि हमनें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में अब तक लगभग 24 हजार पदों पर भर्तियां की हैं और 26 हजार पदों पर भर्तियां प्रक्रिया में हैं।

राज्य सरकार आस्था धामों का कर रही विकास –

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की धरती शूरवीरों के साथ लोक देवी-देवताओं और संतों की भूमि है। राज्य सरकार आस्था धामों पर मूलभूत सुविधाओं का विकास करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के तहत 18 हजार 328 यात्रियों को अयोध्या में रामलला के दर्शन, 55 ट्रेनों से 48 हजार 928 से अधिक यात्रियों को विभिन्न तीर्थ स्थलों पर तथा लगभग 6 हजार श्रद्धालुओं को हवाई यात्रा से नेपाल में भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन करवाए गए हैं।

प्रदेश में डबल इंजन की सरकार ले रही ऐतिहासिक फैसले –

श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश में डबल इंजन की सरकार ऐतिहासिक फैसले ले रही है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विकसित भारत 2047 के साथ हमारी सरकार विकसित राजस्थान 2047 के लक्ष्य को लेकर काम कर रही है। प्रदेश में सतही जल की उपलब्धता बढ़ाने के लिए हमने राम जल सेतु लिंक परियोजना और यमुना जल समझौते जैसे ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। इंदिरा गांधी नहर, गंग नहर के लिए भी पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए हैं जिससे श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ से लेकर जैसलमेर तक पानी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। साथ ही, प्रधानमंत्री के कैच द रेन अभियान से प्रेरणा लेकर कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान शुरू किया। उन्होंने कहा कि हमने हाल ही में जल एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान चलाया। इस दौरान उन्होंने मरीजों को अपने हाथों से चश्मा पहनाया और उनसे संवाद भी किया। साथ ही श्री शर्मा ने अपनी आंखों की जांच भी करवाई। कार्यक्रम में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि 33 दिन के इस शिविर में लाखों लोगों को नेत्र जांच का अवसर मिलेगा। उन्हें निःशुल्क दवाएं और चश्मे वितरित किए जाएंगे। लोगों को दृष्टि का उपहार देना बहुत बड़े पुण्य का काम है। ऐसे शिविर जन सेवा का बड़ा माध्यम हैं, गरीब एवं जरूरतमंद लोगों के लिए स्वास्थ्य की सौगात हैं। समारोह में मुख्यमंत्री ने नेत्र कुंभ 2025 पुस्तिका का विमोचन किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं संघ के वरिष्ठ प्रचारक सुरेशचन्द्र, क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम, विधायक महंत प्रतापपुरी, महेश भगवती बलदवा फाउंडेशन की श्रीमती भगवती दीदी बलदवा, नरसी गु्रप के एमडी नरसी कुलरिया, सक्षम के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दयाल सिंह, गादीपति राव भोमसिंह और नेत्र कुंभ के महासचिव खेताराम लीलड़ सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे। वहीं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी गुरूवार को एक दिवसीय जैसलमेर यात्रा के दौरान रामदेवरा में बाबा रामदेव पैनोरमा से बाबा रामदेव मंदिर तक पैदल यात्रा की। श्री शर्मा ने इस पदयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं से आत्मीयता से मुलाकात की। श्रद्धालु भी अपने बीच मुख्यमंत्री को पाकर बेहद उत्साहित नजर आए। पदयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं (जातरूओं) ने विभिन्न स्थानों पर मुख्यमंत्री का फूल बरसाकर तथा माला पहनाकर स्वागत-अभिनंदन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बाबा रामदेव की ध्वजा (नेजा) थामे पैदल यात्रा की। इस भक्तिमय माहौल में लोक कलाकार रिक्खियां गाते हुए मुख्यमंत्री के साथ-साथ चले।

Farmer News: प्रदेश में ऑनलाइन मोबाइल गिरदावरी आज से

प्रदेश में आज से ऑनलाइन गिरदावरी आरंभ होगी। इस के लिए तैयार मोबाइल गिरदावरी ऐप का लाइव टेस्टिंग गुरुवार किया गया। वहीं राजस्व मंडल निबंधक महावीर प्रसाद ने अतिरिक्त निबंधक और तहसीलदार अजमेर की मौजूदगी में किसानों के बीच जाकर ऑनलाइन गिरदावरी का फील्‍ड निरीक्षण भी किया। श्री प्रसाद की उपस्थिति में गुरुवार मध्‍याह्न अजमेर तहसील के बोराज गिरदावर सर्कल के कायमपुरा ग्राम स्थित कृषक अर्जुन सिंह के खेत पर लाइव टेस्टिंग की। जिसमें खसरा क्रमांक 2828 की ऑनलाइन गिरदावरी का पटवारी स्‍तर से सफल परीक्षण हुआ।

किसान स्‍वयं कर सकेंगे गिरदावरी—

समूचे राजस्थान प्रदेश में शुक्रवार एक अगस्त से पटवारी और स्वयं कृषक के स्तर से भी ऑनलाइन मोबाइल ऐप के जरिए गिरदावरी की सुविधा आरंभ हो जाएगी। कृषकों द्वारा स्वयं गिरदावरी किए जाने से पूर्ण जानकारी उनकी देखरेख में पारदर्शिता से दर्ज हो जाएगी और उन्हें ऐप से जमाबंदी की प्रति डाउनलोड की भी सुविधा मिल सकेगी। इसके लिये राजस्व मंडल की वेबसाइट, अपना खाता पोर्टल, एसएसओ आईडी पोर्टल जैसी राजकीय वेबसाइट पर भी राज किसान गिरदावरी मोबाइल एप डाउनलोड करने की सुविधा दी गई है। कृषि विभाग द्वारा भी अधिक से अधिक किसानों द्वारा मोबाइल एप डाउनलोड करने व स्वयं गिरदावरी करने हेतु किसानो को जागरूक किया जा रहा है।

कृषकों से किया संवाद—

निबंधक ने ऑनलाइन गिरदावरी मोबाइल के परीक्षण के दौरान कृषक जन से भी संवाद किया और उन्हें ऐप के बारे में बताया। उन्‍होंने कृषकों से आग्रह किया कि वे ww.webgirdawari.rajasthan.gov.in एवं राज किसान गिरदावरी एप पर ऑनलाइन गिरदावरी सुविधा का लाभ उठाएं। इस सुविधा के तहत किसान स्वयं अपने मोबाइल पर राज किसान गिरदावरी एप डाउनलोड कर पंजीकरण करते हुए अपने खेत- खसरे की स्वयं गिरदावरी कर सकते हैं। ऑनलाइन गिरदावरी के लिए सभी राजस्व अधिकारियों के माध्यम से पटवारी स्तर तक को जन जागरूकता लाने की निर्देश दिए गए हैं। उन्हें एप के लाभ और उसके उपयोग के संबंध में तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं से भी कृषकों को अवगत कराने को कहा गया है। ऑनलाइन गिरदावरी कार्य के लिये सरकारी स्तर से पटवारी व सर्वेयर को दायित्‍व दिया गया है। कृषक के स्वयं के स्तर से भी मोबाइल गिरदावरी की सुविधा दिया जाना सरकार का अभिनव कदम है। खरीफ गिरदावरी के लगभग 70 लाख खसरों की किसान गिरदावरी का लक्ष्य रखा गया है। इस अवसर पर राजस्व मंडल के अतिरिक्त निबंधक हेमंत स्वरूप माथुर, अजमेर तहसीलदार ओम सिंह लखावत, भू—अभिलेख निरीक्षक सरिता इंदौरिया, बोराज पटवारी शैलेंद्र शर्मा, सहित कई तकनीकी अधिकारी उपस्थित रहे। मोबाइल एप गिरदावरी का परीक्षण मंडल निदेशक (सांख्‍यिकी)श्रीमती बीना वर्मा और संयुक्त निदेशक (आईटी) सौरभ बामनिया ने भी अलग-अलग स्थान पर जाकर किया। इसी प्रकार राज्य के सभी 41 जिलों में लगभग 1100 पटवारीगण द्वारा लाइव टेस्टिंग की गई।

C M NEWS: मुख्यमंत्री ने बारिश से उत्पन्न स्थिति का लिया जायजा, कहा जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार शाम को जयपुर शहर के विभिन्न क्षेत्रों का लगभग ढाई घण्टे सघन निरीक्षण कर बारिश से उत्पन्न स्थितियों का जायजा लिया। उन्होंने बी-टू बाईपास रोड़, सांगानेर, सुमेर नगर, सूरजमल सर्किल, मुहाना मंडी और चौरडिया पेट्रोल पंप पर रुककर जलभराव, क्षतिग्रस्त सड़कों, गड्ढ़ों और ड्रेनेज सिस्टम से संबंधित समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। श्री शर्मा ने बी-टू बाईपास रोड़ के पास द्रव्यवती नदी का अवलोकन किया और घने वृक्षों की छंटाई व नालों के फेरो कवर की मरम्मत करने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने कच्ची बस्ती के लोगों और बच्चों से बातचीत की व अधिकारियों को निचले क्षेत्रों में जल निकासी, आपात स्थिति में वहां के निवासियों के लिए भोजन व पेयजल की व्यवस्था करने के लिए निर्देशित किया। मुख्यमंत्री ने सांगानेर स्थित कैम्प कार्यालय में लोगों से मुलाकात की और शहर के जलभराव वाले स्थानों के संबंध में जानकारी ली। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मुहाना मंडी चौराहे पर पहुंचकर जायजा लिया और अधिकारियों को चौराहे पर सर्कल निर्माण के संबंध में निर्देश दिए। उन्होंने महाराजा सूरजमल सर्किल व केसर नगर चौराहे पर क्षतिग्रस्त सड़कों के शीघ्र मरम्मत कार्यों के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हमारी सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि बारिश से उत्पन्न स्थिति में जनता को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हो। इसके लिए अधिकारियों को अलर्ट मोड़ पर रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के लिए भोजन, पेयजल और रहने की व्यवस्थाओं के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि सभी लोग जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। श्री शर्मा ने निरीक्षण के दौरान सांगानेर क्षेत्र के विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। उन्होंने चौरडिया पेट्रोल पंप तिराहे पर रूककर सांगानेर थाने से चौरडिया पेट्रोल पंप और मालपुरा गेट तक बनने वाली एलिवेटेड रोड़ की प्रगति की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने आमजन से भी फीडबैक लिया। इस दौरान जयपुर विकास प्राधिकरण, जयपुर नगर निगम ग्रेटर सहित ऊर्जा, सार्वजनिक निर्माण, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

Rajasthan News: प्रदेश में ऊंट अधिनियम 2015 के बनेंगे नियम

पशुपालन विभाग, राजस्थान ऊंट (वध का प्रतिषेध और अस्थायी प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) अधिनियम, 2015 के नियम बनाएगा। इस संबंध में पशुपालन, गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत की अध्यक्षता में हुई सभा में नियम बनाने को लेकर विभाग को निर्देश दिए गए। सभा में पंचायतीराज और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री ओटाराम देवासी भी मौजूद थे। शासन सचिवालय में बुधवार को श्री कुमावत के कक्ष में हुई सभा में नए नियम बनाने को अंतिम रूप दिया गया। इसके तहत ऊंट पालकों को अन्य राज्यों में ऊंट चराने, डेयरी और कृषि कार्य व पशु मेलों में ले जाना आसान होगा। अधिनियम, 2015 के लिए नए नियम के मुताबिक ऊंट के परिवहन को लेकर जिला कलेक्टर के साथ-साथ अब सक्षम अधिकारी के रूप में एसडीएम को भी अधिकृत करने पर सहमति बनी। इस सभा में ऊंट पालन को लाभप्रद बनाने को लेकर भी चर्चा हुई। पशुपालन मंत्री ने बताया कि अन्य राज्यों में ऊंट ले जाने को लेकर आ रही दिक्कतों को लेकर चर्चा के बाद प्रशासनिक अनुमति देने के लिए एसडीएम को भी अधिकार देने पर सहमति व्यक्त की गई है। इसके लिए प्रशासनिक स्वीकृति के लिए नई एसओपी भी जारी की जाएगी, ताकि ऊंट पालकों को अन्य राज्यों में ऊंट ले जाने में कानूनी पेचीदगियों का सामना न करना पड़े। इसके अलावा ऊंट पालन को और अधिक लाभप्रद बनाने के लिए आरसीडीएफ के माध्यम से ऊंटनी के दूध के विपणन को लेकर कार्ययोजना बनाने के लिए भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए। इस दौरान पूर्व विधायक रतन देवासी से दूरभाष पर चर्चा कर उनके सुझाव भी लिए गए। पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. आनंद सेजरा भी बैठक में उपस्थित थे।