C M NEWS: प्रदेश में 6 वर्षों में बने सरकारी भवनों की जांच करेगी राज्य स्तरीय कमेटी —मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सभी विभाग क्षतिग्रस्त, जीर्ण-क्षीर्ण भवनों की तुरंत मरम्मत कराएं, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि अब ऐसी किसी भी दुर्घटना में हुई जनहानि पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गत 6 वर्षों में बने सरकारी भवनों, स्कूलों, आंगनबाड़ियों की सूची बनाएं और एक विशेष राज्य स्तरीय कमेटी बनाकर निर्माण गुणवत्ता की जांच की जाए। श्री शर्मा ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास पर अधिकारियों को जर्जर भवनों के संबंध में संवाद किया और विशेष दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त भवनों की मरम्मत के लिए आपदा प्रबंधन मद से स्वीकृति प्राप्त की जाए और समय पर प्रस्ताव तैयार कर कार्य प्रारंभ किया जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए भवनों के निरीक्षण, मरम्मत और रखरखाव पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। सरकारी कार्यालयों में कार्यरत कार्मिक भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जर्जर भवनों की जानकारी संबंधित अधिकारियों को देना सुनिश्चित करें।

जर्जर भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केन्द्र किए गए अन्यत्र स्थानांतरित-

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के आंगनबाड़ी केन्द्रों की मरम्मत और रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा इनका अनिवार्य निरीक्षण किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बजट 2025-26 में 5 हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों के भवनों की मरम्मत के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। बैठक में बताया गया कि जीर्ण-क्षीर्ण एवं क्षतिग्रस्त आंगनबाड़ियों को अन्यत्र सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है। क्षतिग्रस्त स्कूलों और अस्पतालों की हो मरम्मत-

श्री शर्मा ने सार्वजनिक निर्माण विभाग, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि सभी सरकारी कार्यालयों, विशेष रूप से स्कूलों, अस्पतालों सहित अन्य सार्वजनिक भवनों का तत्काल निरीक्षण कर पूरी जानकारी के साथ जिलेवार रिपोर्ट बनाएं व मरम्मत कार्य करवाए जाएं। संवाद के दौरान शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायतीराज, चिकित्सा और स्वास्थ्य सहित अन्य विभागों ने क्षतिग्रस्त व जीर्ण-क्षीर्ण भवनों एवं उनकी मरम्मत संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। संवाद में मुख्य सचिव सुधांश पंत सहित कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

dairy booth News: डेयरी बूथ आवंटन पॉलिसी में होगा संशोधन, पांच सदस्यीय कमेटी का हुआ गठन

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राज्य में सरस डेयरी बूथ आवंटन को लेकर पॉलिसी में आवश्यक संशोधन किया जाएगा। इसके लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इस संबंध में शासन सचिवालय में बुधवार को पशुपालन, गोपालन, डेयरी और देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत की अध्यक्षता में आयोजित सभा में डेयरी सेवाओं के विस्तार व बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया। पांच सदस्यीय कमेटी में पशुपालन, डेयरी एवं गोपालन विभाग के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा, डीएलबी के निदेशक जुईकर प्रतीक चंद्रशेखर, नगर निगम आयुक्त डॉ. गौरव सैनी, आरसीडीएफ एमडी श्रीमती श्रुति भारद्धाज, दुग्ध संघ और जयपुर के एमडी मनीष फौजदार को शामिल किया गया है। यह कमेटी आए सुझावों के आधार पर प्रस्ताव तैयार करेगी। सभा में यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा, डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत व अन्य अधिकारियों ने बूथ आवंटन नीति-2021 में संशोधन के सुझाव दिए। इनमें बूथ आवंटन हेतु आवेदन पत्र संबंधित जिला दुग्ध संघ में जमा कराने, नए डेयरी बूथों के स्थान आवंटन आरसीडीएफ/जिला दुग्ध संघ द्वारा गठित समिति द्वारा चिन्हित कर अंतिम सूची जारी करने जैसे सुझाव शामिल थे। इसके अलावा प्रस्तावित डेयरी बूथ के लिए उसी क्षेत्र के पांच किमी. की परिधि के स्थानीय निवासी को प्राथमिकता देने, सेवारत सेना के जवान के पारिवारिक सदस्य को आवेदन के लिए पात्र मानने संबंधी प्रस्ताव को नई नीति में शामिल करने का सुझाव दिया गया।

नए सरस पार्लर खोलने की संभावनाएं तलाशेगा आरसीडीएफ—

इस दौरान प्रदेश में नए सरस पार्लर खोलने के लिए आरसीडीएफ को संभावनाएं तलाशने का निर्देश दिया गया। इसके लिए सरकारी चिकित्सालय, मेडिकल कॉलेज, शैक्षणिक संस्थाओं, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के आसपास के क्षेत्र में प्राथमिकता के आधार पर सरस पार्लर खोलने को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। डेयरी मंत्री ने बताया कि नए सरस पार्लर खोलने से न केवल आरसीडीएफ की आय में बढोतरी होगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढेंगे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशानुसार युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाने के उदेश्य से ही बजट घोषणा 2024-25 के तहत प्रदेशभर में 2500 नए सरस बूथ खोले जा रहे हैं। इसके तहत 2 हजार बूथों के लिए कुल 11 हजार 536 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से जांच के बाद 7 हजार 861 आवेदन पत्र आरसीडीएफ द्वारा अनुमोदित कर संबंधित निकायों को प्रेषित किए गए हैं। इसके अलावा विगत वर्षों के पैंडिंग 500 बूथों का निस्तारण स्थानीय निकाय स्तर पर लंबित है। इस प्रकार कुल 8 हजार 361 लंबित आवेदन पत्रों का जल्द से जल्द निस्तारण कर लॉटरी के जरिए कुल 2500 बूथों के आवंटन के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। इसके अलावा प्रदेश में मोबाइल बूथों के संचालन को लेकर स्थानीय निकाय से वेंडिग जोन निर्धारित करने के लिए नगर निकाय विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया है।

Politics News: वसुंधरा की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात, क्या प्रदेश की राजनीति में कोई खिचड़ी पक रही है?

– महेश झालानी

राजस्थान की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। दिल्ली के सियासी गलियारों में इन दिनों कुछ ऐसा पक रहा है, जिसकी महक अब जयपुर तक पहुंचने लगी है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हाल ही में हुई तकरीबन आधे घंटे की मुलाकात को यूं ही नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह मुलाकात सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट भर नहीं थी बल्कि इसके पीछे गंभीर राजनीतिक संदेश और संभावनाओं का संकेत छिपा है। सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक पूरी तरह से गोपनीय रखी गई। न तो पार्टी के आधिकारिक हैंडल से कोई तस्वीर जारी हुई, न ही किसी प्रवक्ता ने बयान दिया। लेकिन जो राजनीतिक धुंध अब तक पर्दे में थी, वह धीरे-धीरे साफ होने लगी है। बीते कुछ वर्षों से यह जगजाहिर रहा है कि वसुंधरा राजे को बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व, विशेष रूप से प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से वैसा समर्थन नहीं मिला, जैसा एक दिग्गज नेता को मिलना चाहिए था। विधानसभा चुनावों के दौरान टिकट बंटवारे से लेकर नेतृत्व के मामले में वसुंधरा को अक्सर किनारे रखा गया। पार्टी नेतृत्व ने न तो उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया और न ही चुनाव प्रचार में निर्णायक भूमिका दी। कई मौकों पर तो उनके समर्थकों ने यहां तक आरोप लगाया कि राजे को जानबूझकर दरकिनार किया जा रहा है। भजनलाल के नाम की पर्ची खुलवाकर वसुंधरा को सार्बजनिक रूप से न केवल अपमानित किया गया बल्कि उनको जबरदस्त तरीके से प्रताड़ित किया गया। ऐसे में अचानक दिल्ली बुलाकर प्रधानमंत्री से एकांत में मुलाकात कराना महज इत्तेफाक नहीं माना जा सकता। बल्कि यह संकेत है कि बीजेपी राजस्थान में किसी बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वसुंधरा एक बार फिर केंद्रीय भूमिका में हो सकती हैं। लेकिन इसका यह मतलब कतई नही है कि भजनलाल को हटाया जा रहा है। धनखड़ की रवानगी के बाद उप राष्ट्रपति के चयन के संदर्भ में भी वसुंधरा और मोदी की मुलाकात को देखा जा रहा है । राजस्थान में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार फिलहाल आंतरिक खींचतान और नौकरशाही हावी होने जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। पार्टी के कई विधायक अंदरखाने असंतुष्ट हैं। कुछ विधायकों के वसुंधरा के लगातार संपर्क में रहने की खबरें पहले भी सामने आ चुकी हैं। अब अगर वसुंधरा को फिर से एक्टिव रोल दिया जाता है तो यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या मौजूदा सरकार पर कोई संकट आने वाला है? कई राजनीतिक जानकार इस मुलाकात को “संकेतात्मक सर्जरी” की शुरुआत मान रहे हैं। हो सकता है कि दिल्ली दरबार अब भजनलाल की कार्यशैली और पकड़ को लेकर चिंतित हो और विकल्पों पर विचार कर रहा हो। वसुंधरा के पास जनाधार है, संगठन पर पकड़ है और नौकरशाही में भी उनकी पकड़ मानी जाती रही है। दिल्ली में इस पूरी कवायद को लेकर यह भी चर्चा है कि पर्दे के पीछे आरएसएस की भूमिका अहम हो सकती है। संघ के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी पहले ही राजस्थान में स्थायित्व और प्रशासनिक दक्षता को लेकर चिंता जता चुके हैं। वसुंधरा राजे भले ही संघ की पसंद न रही हों, लेकिन यदि मामला भाजपा की राज्य सरकार को बचाने और संगठन को नियंत्रित करने का हो, तो संघ लचीला रुख अपना सकता है। राजनीति में संदेश शब्दों से कम, घटनाओं से ज्यादा दिए जाते हैं। वसुंधरा-मोदी मुलाकात भी ऐसा ही एक संदेश—संकेत है कि राजस्थान में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल सकते हैं। जिस चुप्पी में यह बैठक हुई, वह शायद आने वाले तूफान की आहट है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगा कि वसुंधरा फिर से मुख्यमंत्री की दौड़ में हैं, लेकिन इतना तय है कि अब उन्हें नजरअंदाज करना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा। राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा की वापसी अब महज अटकल नहीं, एक संभावित स्क्रिप्ट है। इसका क्लाइमेक्स जल्द ही सामने आ सकता है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलको में यह चर्चा बड़ी तीव्र गति से फैल रही थी कि मुख्य सचिव सुधांश पन्त को दिल्ली तलब किया गया है। हकीकत इससे इतर है। वे दिल्ली गए ही नही।और न उन्हें किसी ने तलब किया। अपने दफ्तर में बैठकर प्रतिदिन की तरह कार्य निपटा रहे है। यह खबर अवश्य है कि पिछले दिनों सरकार के कामकाज का जायजा लेने के लिए दिल्ली से एक विशेष टीम जयपुर आई थी। टीम ने यह पाया कि सीएम भजनलाल की ईमानदारी पर किसी को संदेह नही है। लेकिन उनके सुस्त और विलम्ब से निर्णय लेने की वजह से विधायको और पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त आक्रोश है ।

CM’s visit to Delhi: प्रधानमंत्री का मुख्यमंत्री को हरसंभव मदद का आश्वासन, कयासों पर लगा विराम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नई दिल्ली स्थित उनके राजकीय आवास पर शिष्टाचार भेंट की। करीब 40 मिनट चली इस मुलाकात में दोनों के बीच राजस्थान के विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश उत्तरोत्तर उन्नति कर रहा है, पूरे विश्व में भारत का कद ऊंचा हुआ है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राजस्थान सरकार देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री को मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में किसान, युवा, महिला, गरीब और वंचित वर्ग को न्याय मिल रहा है। राज्य सरकार जनता के सम्मानयुक्त जीवन जीने के लिए अपनी पूर्ण क्षमता से कम कर रही है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ समय पर लोगों को प्राप्त हो रहा है। राजस्थान सरकार ने पेपर लीक माफिया पर नकेल कस दी है, प्रदेश में कानून और व्यवस्था की स्थिति बहुत ही अच्छी है। एंटी गैंगस्टर एक्ट के माध्यम से संगठित अपराध ग्रहण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। इस अवसर राजस्थान में चल रही विभिन्न परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से मिल रहे सहयोग के लिए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री को भविष्य में राजस्थान के विकास के लिए हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात के बाद कहा कि बहुत ही सौहार्द्रपूर्ण माहौल में यह भेंट हुई और प्रधानमंत्री ने राजस्थान के विकास को लेकर गहरी दिलचस्पी दिखाई । इस मुलाकात में उन तमाम कयासों पर विराम लगा दिया है जिसमें कहा जा रहा था कि राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन किया जा सकता है। पिछले कुछ समय से इस तरह की अफवाहें फैलाई जा रही थी कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को बदला जा सकता है। लेकिन इस मुलाकात ने यह साबित कर दिया है कि भाजपा आलाकमान के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुख्यमंत्री को विश्वास प्राप्त है। जिस गर्मजोशी से नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की उससे यह सिद्ध हो गया है कि भजन लाल शर्मा कहीं नहीं जा रहे, वे पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा करेंगे।

Karauli News: स्वच्छ वातावरण के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण आवश्यक —मंत्री बेढम

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करौली जिला प्रभारी मंत्री जवाहर सिंह बेढम के द्वारा हिण्डौन पंचायत समिति की ग्राम पंचायत खरैटा में हरयाळो राजस्थान के तहत जिला स्तरीय वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। हरयाळो राजस्थान के तहत एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत वृहद स्तर पर पौधारोपण किया गया। कार्यक्रम के दौरान जिला प्रभारी मंत्री ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश आमजन को दिया। इस दौरान जिला प्रभारी मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के आह्वान पर एक पेड़ माँ के नाम अभियान से प्रेरणा लेकर मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राजस्थान सरकार हरियालो राजस्थान वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश को हरा-भरा बनाने के संकल्प को साकार करने की दिशा में अग्रसर है। पिछले वर्ष 7 करोड़ के लक्ष्य के विरूद्ध हमारी सरकार ने जन सहभागिता के माध्यम से 7.25 करोड पौधे रोपित किये थे। मंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पेड़ों की पूजा की जाती है। उन्हें भगवान माना जाता है पेड़ों से हमें ऑक्सीजन, जड़ी-बूटी, फल-फुल, छाया, स्वच्छ वातावरण और अच्छी बारिश मिलती है। इसलिए हमारी संस्कृति में प्राचीन समय से ही अधिक से अधिक पेड़ लगाने की परम्परा रही है। उन्होंने आमजन से अधिक से अधिक पौधारोपण कर उसे संरक्षण प्रदान करने की भी बात की। श्री बेढ़म ने बताया कि वर्षा को मौसम को देखते हुए मुख्यमंत्री ने स्कूलों, आंगनबाड़ियों व राजकीय भवनों की क्षतिग्रस्त इमारतों की मरम्मत के लिए प्रत्येक विधानसभा को 3-3 करोड़ रूपये दिये है उन्होंने जिला कलक्टर को कार्ययोजना बनाकर क्षतिग्रस्त भवनों की मरम्मत को प्राथमिकता में रखने के निर्देश भी दिये। वहीं इस दौरान ग्रामीणों ने 33 केवी जीएसएस की मांग रखी जिस पर जिला प्रभारी मंत्री ने आगामी बजट में मांग को पुरा करने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित आमजन, ग्रामीणों सहित अधिकारियों व कर्मचारियों के द्वारा पौधारोपण किया गया। इस दौरान दो छोटे बच्चों को पर्यावरण के प्रति स्वयं प्रेरित होकर पौधारोपित किया।

CRP Plus News: प्रदेश में “सीआरपी प्लस” नीति लागू

राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद् ( राजीविका) द्वारा “CRP Plus नीति” को आधिकारिक रूप से स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। यह नई नीति राजस्थान के स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और समुदाय आधारित संगठनों (CBOs) के सशक्तिकरण व विस्तार के कार्य में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य मिशन निदेशक श्रीमती नेहा गिरी ने बताया कि “सीआरपी प्लस नीति” का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में सबल और प्रभावी सामाजिक पुनर्निर्माण प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाना है। सीआरपी प्लस नीति के तहत ‘विलेज सपोर्ट टीम’ को प्रतिस्थापित कर सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों (CRP Plus) की नई व्यवस्था लागू की जा रही है, जिससे स्वयं सहायता समूह, ग्राम संघटन और क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) आदि सामुदायिक संगठनों का सशक्तिकरण सुचारू रूप से किया जा सकेगा। राज्य मिशन निदेशक के निर्देशानुसार इस नीति के अन्तर्गत चयनित सामुदायिक संसाधन दल (CRPs) को बेहतर प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे स्थानीय स्तर पर सामाजिक विकास की गतिविधियों का समुचित नेतृत्व कर सकें । इसके परिणामस्वरूप स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन और क्लस्टर लेवल फेडरेशन जैसे समुदाय आधारित संगठनों की सशक्तीकरण की गुणवत्ता तथा पहुँच में उल्लेखनीय सुधार होगा। “CRP Plus नीति” से ग्रामीण व्यापक स्तर पर आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा तथा समुदाय आधारित विकास कार्यक्रमों की सफलता में नयी ऊँचाइयाँ प्राप्त होंगी। इस महत्वपूर्ण सफलता पर राज्य सरकार व राजीविका अपनी प्रतिबद्धता पुनः मजबूत करते हुए हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। राजीविका का यह नवाचारी प्रयास राज्य सरकार के “सशक्त महिला – समृद्ध राजस्थान” के दृष्टिकोण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Politics News: सत्ता नही सम्मान चाहिए: उपेक्षा से जबरदस्त आहत वसुंधरा राजे कब तक बैठेगी चुप ?

— महेश झालानी

राजस्थान की राजनीति में अगर कोई नाम है जो वर्षों से सत्ता के शिखर पर रहा है, तो वह है—वसुंधरा राजे। दो बार की मुख्यमंत्री, अपार जनाधार और एक खास राजपूताना आभा । राजे का नाम आज भी राजनीति में सिहरन पैदा करता है। लेकिन सवाल यह है कि जब उनकी अनदेखी हो चुकी है, मुख्यमंत्री की कुर्सी भजनलाल शर्मा को सौंप दी गई है, तो क्या वसुंधरा राजे चुप बैठेंगी या वे कोई बड़ा धमाका करेंगी, महत्वपूर्ण सवाल यही है । दरअसल, 2023 विधानसभा चुनाव के बाद वसुंधरा खेमा उम्मीद में था कि पार्टी आलाकमान उन्हें तीसरी बार मुख्यमंत्री पद सौंपेगा। उनकी संगठन में ताकत, जमीनी पकड़ और महिला वोट बैंक पर प्रभाव किसी से छिपा नहीं। लेकिन हाईकमान ने उन्हें एक किनारे कर भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बना दिया। इस फैसले ने न केवल राजे समर्थकों को ठगा महसूस कराया, बल्कि खुद वसुंधरा के आत्मसम्मान को भी चुनौती दी । तब से अब तक राजे खामोश नहीं रहीं। कभी अचानक बीजेपी मुख्यालय पहुंच जाना, कभी मंदिरों में दिखना, कभी सोशल मीडिया पर भावुक संदेश देना । ये सब इशारे साफ हैं कि वसुंधरा कोई ‘राजनीतिक संन्यास’ लेने नहीं जा रहीं है बल्कि माहौल को बारीकी से तौल रही हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या वसुंधरा राजे सरकार गिरा सकती हैं? इसका जवाब होगा नही । क्योकि वे बखूबी जानती है कि पार्टी में अनुशासन तोड़ना आत्मघाती कदम साबित होगा । एक बार उन्होंने आलाकमान को आंख दिखाई थी । नतीजा सामने है । वे हाशिये पर चली गई और एक नए विधायक की पर्ची उनसे खुलवाकर भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बना दिया गया । जहां तक राजे समर्थकों का आंकड़ा विधानसभा में 25–30 विधायकों तक बताया जाता है। ये वे विधायक हैं जो उन्हीं के दम पर चुनाव जीते और खुले मंचों से यह कहते भी रहे कि “हमारी नेता वसुंधरा राजे हैं।” यदि राजे चाहें तो ये विधायक भजनलाल सरकार को मुश्किल में डाल सकते हैं। मगर क्या सिर्फ असंतोष से सरकार गिराई जा सकती है? भाजपा की सबसे बड़ी ताकत है—अनुशासन। हाईकमान ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि किसी भी प्रकार की ‘फूट’ या ‘गुटबाजी’ को सख्ती से निपटाया जाएगा। वसुंधरा भी यह बात समझती हैं। वे कोई भी कदम सोच-समझ कर उठाती हैं। उनके लिए सरकार गिराना उतना आसान नहीं, क्योंकि इससे वे खुद पार्टी नेतृत्व के कोपभाजन में आ सकती हैं। और वे इतनी परिपक्व नेता हैं कि पार्टी के बाहर जाकर कोई विद्रोह नहीं करेंगी। हालांकि, यह भी सच है कि अगर बीजेपी नेतृत्व उन्हें बार-बार हाशिए पर रखता रहा, उन्हें सम्मानजनक भूमिका नहीं दी गई—तो वे परोक्ष रूप से सरकार के खिलाफ वातावरण बनवा सकती हैं। कुछ विधायकों के नाराज़गी के सुर, अफसरशाही के अति सक्रिय हस्तक्षेप, और सरकार की धीमी गति, ये सब मिलकर भीतर ही भीतर अस्थिरता का बीज बो सकते हैं। एक ओर है पार्टी नेतृत्व की अवहेलना, दूसरी ओर है जनाधार और उनकी आत्मछवि। वे न तो आसानी से झुकेंगी, न ही खुलकर टकराव मोल लेंगी। यही राजनीतिक चतुराई उन्हें आज भी प्रासंगिक बनाती है। सरकार गिराने की बात वे सोच तो सकती है, लेकिन अमल में नही ला सकती है । हालांकि गहलोत से उनके सम्बन्ध बहुत ही मधुर है । जब गहलोत सरकार संकट में थी, तब राजे ने पर्दे के पीछे ऐसा खेल खेला जिससे सब अचंभित रह गए । प्रत्यक्ष रूप से वे सरकार गिराने की हिम्मत तो नही जुटा सकती है । लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से वे सरकार की नींव में दरार जरूर ला सकती है । यदि उन्हें सम्मानजनक भूमिका नहीं दी गई। वे चाहें तो दिल्ली तक संदेश भेज सकती हैं कि “या तो मुझे केंद्र में यथोचित जिम्मेदारी दी जाए या मैं चुप नहीं बैठूंगी।” यदि उन्हें अपनी छवि बचाए रखनी है, तो उन्हें अब खुलकर अपनी भावनाएं सामने लानी होंगी। या तो केंद्र में उपराष्ट्रपति जैसे पदों की ओर बढ़ें, या फिर राजस्थान में जनसंपर्क तेज कर संगठन को अपनी ताकत का एहसास कराएं। राज्यपाल का पद वे पहले ही अस्वीकार कर चुकी है और उप राष्ट्रपति उन्हें बनाया जाएगा, संशय है । वे सत्ता के लिए लालायित नहीं, पर अपनी अनदेखी को पचा भी नहीं पा रहीं। यही द्वंद ही उन्हें आने वाले समय में राजनीति की नई धुरी बना सकता है। राजे की चुप्पी शांति नहीं है। वह तूफान से पहले की तैयारी है। सरकार गिराना उनके लिए अंतिम विकल्प हो सकता है । लेकिन यह तय है कि अगर पार्टी ने उन्हें नजरअंदाज किया तो वे “राजनीतिक विद्रोह” का एक चौंकाने वाला चेहरा बन सकती हैं। राजस्थान की सियासत में अभी भी “राजे युग” समाप्त नहीं हुआ—वह अगली करवट की प्रतीक्षा कर रहा है।

Rajasthan News: राजस्थान में ‘मिल एंड फिल’ नीति हुई लागू

राजस्थान में 305 शहरों में अब ऊंची सड़क और नीचे मकान की समस्या नहीं होगी। नगरीय विकास विभाग के बाद अब स्वायत्त शासन विभाग ने भी परत हटाए बिना डामर या कंक्रीट की नई परत बिछाने पर रोक लगा दी है। इससे मकान और सड़क का लेवल बराबर रहेगा। सड़क पर जलभराव की समस्या समस्या को देखते हुए सरकार ने सड़कों के नवीनीकरण के लिए तत्काल प्रभावी से ‘मिल एंड फिल’ नीति लागू कर दी है। इसके तहत अब सड़क उखाड़ने पर उसके मैटेरियल को सड़क निर्माण में फिर से उपयोग में लिया जाएगा। नीति के अनुसार ठेकेदार द्वारा पुरानी परत को मशीन से हटाकर उसी डामर को दोबारा उपयोग में लिया जाएगा। इससे सड़क की ऊंचाई भी नहीं बढ़ेगी, वहीं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और वित्तीय बचत भी होगी। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने भी ऐसे कई सर्कुलर जारी कर रखे है, जिसमें इस तकनीक को बढ़ावा दिया गया है।  

Congress News: कांग्रेस जिलाध्यक्ष और विधायक र​फीक में हुई तनातनी

प्रदेश में भाजपा सरकार के विरोध में मुद्दों को लेकर बुलाई जयपुर शहर जिला कांग्रेस की मीटिंग से पहले जिलाध्यक्ष आर आर तिवाड़ी और विधायक रफीक खान में तनातनी हो गई। इस बीच श्री तिवाड़ी पर विधायक रफीक ने आरोप लगाया कि जिलाध्यक्ष अकेले ही कार्यक्रम तय कर लेते हैं और इसकी सूचना तक नहीं देते हैं। मामले में श्री तिवाड़ी ने कहा कि जिलाध्यक्ष हूं, किसी के दबाव में काम नहीं करता। इस दौरान मौजूद जयपुर शहर कांग्रेस प्रभारी रोहित बोहरा, पूर्व विधायक गंगादेवी और पुष्पेंद्र भारद्वाज ने मामला शांत कराया। मामला शांत होने के बाद शहर की बिगड़ती कानून व्यवस्था सहित कई मांगों के लेकर जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। संचार माध्यमों से बातचीत के दौरान प्रभारी बोहरा ने बताया कि मामला वैचारिक मतभेद का था जो किसी भी पार्टी में हो सकता हैं। हम सभी मुद्दों पर एक है। उन्होने बताया कि हमने राजधानी जयपुर और पूरे प्रदेश में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति, निकाय और पंचायत चुनावों में देरी सहित कई मुद्दों को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।

C M NEWS: मुख्यमंत्री की केन्द्रीय मंत्रियों से संवाद, प्रदेश में पीएम-जनमन योजना के तहत बनेगें 7 लाख मकान

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को नई दिल्ली प्रवास के दौरान केन्द्रीय मंत्रियों से भेंट की। उन्होंने केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल एवं केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर.पाटिल से मुलाकात के दौरान राज्य से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की। श्री शर्मा ने कृषि भवन में श्री चौहान के साथ संवाद के दौरान प्रदेश में ग्रामीण विकास, कृषि क्षेत्र, लखपति दीदी योजना, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना सहित विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा की। इस दौरान श्री शर्मा ने केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से राजस्थान को इस वित्तीय वर्ष में मनरेगा योजना के तहत 4384 करोड़ रुपये जारी करने पर केन्द्रीय मंत्री का आभार जताया। कृषि भवन में हुई इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने श्री चौहान से राजस्थान में केन्द्रीय सहयोग से ग्राम पंचायत स्तर पर ‘कृषि पर्यवेक्षकों’ की व्यवस्था करने, राज्य की बेहतर मूंगफली किस्मों के प्रोत्साहन हेतु अधिसूचित करने और राज्य में उत्पादित होने वाले अरंडी के तेल के संवर्धन के लिए आग्रह किया। उन्होंने श्री चौहान को ‘पर ड्रॉप-मोर क्रॉप’, डिग्गी निर्माण और खेतों में तारबंदी से संबंधित योजनाओं के साथ ही जयपुर के बस्सी में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की भी जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना पर चर्चा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में इस महत्वपूर्ण योजना के तहत राजस्थान में बहुत शानदार कार्य हुआ है। केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने इस पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि प्रस्तावित आवासों के सर्वे के सत्यापन का कार्य पूरा होते ही अतिरिक्त मकानों के निर्माण की स्वीकृति दे दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के साथ ही राजस्थान में पीएम-जनमन योजना के तहत भी आवासों का निर्माण करवाया जाएगा और कुल 7.46 लाख मकान बनाए जाएंगे। इस दौरान केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, केन्द्रीय कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, केन्द्रीय ग्रामीण विकास सचिव शैलेष सिंह, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट सहित केन्द्र व राजस्थान के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।