Rajasthan: प्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के कार्यक्रम होगें सालभर

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सहकारिता विभाग की प्रमुख शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां श्रीमती मंजू राजपाल ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 के उपलक्ष्य में वर्ष पर्यंत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के माध्यम से जनमानस में सहकारिता विभाग और सहकारी संस्थाओं की अच्छी छवि का निर्माण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा की जा रही कवायद का लाभ किसानों, सहकारी संस्थाओं के सदस्यों और सहकारी संस्थाओं तक बेहतर रूप में पहुंचे, यह सुनिश्चित किया जाए। श्रीमती राजपाल शुक्रवार को नेहरू सहकार भवन में अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष, ‘सहकार से समृद्धि’ कार्यक्रम और ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाले शिविरों के सम्बन्ध में आमुखीकरण कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहीं थीं। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में अपेक्स कमेटी, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय कमेटी और जिला कलक्टर्स की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कमेटियों का गठन किया जा चुका है। उन्होंने निर्देश दिए कि फरवरी माह के प्रथम सप्ताह में जिला स्तरीय कमेटी की बैठक आयोजित करवाकर राज्य स्तर से जारी एसओपी के अनुसार जिले में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का कैलेण्डर तैयार कर आयोजनों की अविलम्ब शुरूआत की जाए। सचिव ने कहा कि जिला स्तर पर आयोजित किए जाने वाली गतिविधियों में उस जिले से सम्बन्धित महत्वपूर्ण अवसरों का ध्यान रखा जाए। प्रत्येक माह एक बड़ी गतिविधि के साथ ही अन्य सारगर्भित गतिविधियों का आयोजन पाक्षिक तौर पर किया जाए। उन्होंने इन गतिविधियों की प्रगति और आयोजन पर साप्ताहिक रिपोर्ट राज्य स्तर पर स्थापित किये जाने वाले कंट्रोल रूम में अपडेट करने के निर्देश दिए। श्रीमती राजपाल ने कहा कि आमजन में जागरूकता के लिए प्रभात फेरी, रथ यात्रा, प्रदर्शनी और वृक्षारोपण के साथ ही विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा सकता है। उन्होंने आयोजनों में महिलाओं, युवाओं और विद्यार्थियों की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होने कहा कि ‘सहकार से समृद्धि’ सहकारिता विभाग का नियमित कार्यकरण है, इसे वर्षभर के आयोजन में अभियान की तरह क्रियान्वित किया जाए। राष्ट्रीय स्तर पर बीज, जैविक खेती और एक्सपोर्ट के सम्बन्ध में गठित की गई सहकारी समितियों की सदस्यता राज्य की सहकारी समितियों को दिलवाई जाए। उन्होंने कहा कि सभी पैक्स फंक्शनल हों, उनका सुचारू संचालन हो और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो, यह हमारी प्राथमिकता है। श्रीमती राजपाल ने निर्देश दिए कि अवसायनाधीन और निष्क्रिय समितियों के अवसायन की प्रक्रिया 30 जून, 2025 से पूर्व, भारत सरकार की एसओपी के अनुरूप समयबद्ध तरीके से सम्पन्न की जाए। वहीं, राजस्व विभाग द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर फार्मर रजिस्ट्री बाबत आयोजित किये जाने वाले शिविरों के संबंध में प्रमुख सचिव ने कहा कि यह हमारे लिए एक अच्छा अवसर है, जिसका समुचित उपयोग किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि इन शिविरों में जीएसएस गठन के सर्वे कार्य का सम्पादन, नये सदस्य बनाना, नैफेड और एनसीसीएफ पोर्टल पर कृषकों का पंजीयन, सहकारिता स्कीम्स की जानकारी देना, म्हारो खातो, म्हारो बैंक कार्यक्रम के तहत नये खाते खोलना, डेयरी के खाते खोलना और सीएससी सेवाओं की जानकारी देना आदि कार्य किए जाएं।

Solar: रूफ टॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए, डिस्कॉम्स और टाटा के बीच हुआ एमओयू

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पीएम सूर्य घर नि:शुल्क बिजली योजना को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कम्पनियों और टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी के बीच शुक्रवार को विद्युत भवन में एमओयू किया गया। अतिरिक्त मुख्य सचिव (ऊर्जा) आलोक की मौजूदगी में विद्युत कम्पनियों की ओर से चेयरमैन डिस्कॉम्स सुश्री आरती डोगरा और टाटा पावर रिन्यूबल की तरफ से सीईओ व एमडी दीपेश नन्दा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। श्री आलोक ने कहा कि प्रदेश में पीएम सूर्यघर योजना में बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। टाटा पावर के साथ इस साझेदारी से डिस्कॉम्स को इन रजिस्ट्रेशन को इंस्टालेशन में बदलने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य आमजन को सौर ऊर्जा से जोड़कर बिजली खर्च से उन्हें मुक्ति दिलाना है। श्री नन्दा ने कहा कि पीएम सूर्यघर योजना देश में आमजन को ऊर्जा दाता बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। कंपनी प्रदेश में फैले अपने नेटवर्क के माध्यम से इस योजना में लोगों की भागीदारी बढ़ाने में सहायता करेगी।

Villages News: गावों में रात्रि विश्राम करेंगे अधिकारी

पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि गांवों को वास्तविक रूप से स्वच्छ बनाना हैं। उन्होंने हर ग्राम पंचायत की साफ-सफाई प्रतिदिन करवाने और अधिकारियों को महीने के चार दिन गांवों में रात्रि विश्राम के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि अधिकारी शाम 6 बजे से प्रातः 6 बजे तक गांवों में रह कर साफ-सफाई से लेकर हर व्यवस्था का जायजा लेंगे। श्री दिलावर आज शासन सचिवालय परिसर स्थित पंचायती राज भवन के कांफ्रेंस हाॅल में विभाग की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी अधिकारी समय-समय पर ग्राम पंचायतों में संवेदक के माध्यम से करवाई जा रही गतिविधियों का निरीक्षण करें और पाई गई कमियों को दुरूस्त करवायें ताकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के स्वच्छ राजस्थान के मिशन को धरातल पर साकार किया जा सके। उन्होंने कहा कि गांवों की स्वच्छता का कार्य करने के लिए पहली प्राथमिकता परंपरागत सफाई के कार्य करने वाले व्यक्ति ही होने चाहिए। मंत्री ने जिला स्तर पर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत गठित समितियों की बैठक नियमित रूप से करने और प्लास्टिक स्टाॅकिस्ट की सूची चार दिवस में उपलब्ध कराने के निर्देश प्रदान किये गये। श्री दिलावर ने प्लास्टिक उपयोग कम करने और प्लास्टिक डिस्पोजल आइटमों से होने वाले हानिकारक प्रभावों के बारे में बताया। उन्होंने ग्राम पंचायतों के आबादी विस्तार हेतु भूमि आवंटन संबंधित लम्बित प्रस्तावों का समयबद्ध रूप से 7 दिवस में निस्तारण के निर्देश दिये। विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्धघुमन्तु आवासहीन व्यक्तियों को वितरित पट्टों का भौतिक सत्यापन भी सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिये। वहीं इस दौरान मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान-2.0 और स्वामित्व योजना की भी समीक्षा की गई।

C M NEWS: प्रदेश में राज्य स्तरीय एपेक्स समिति का गठन, मुख्यमंत्री होंगे समिति के अध्यक्ष

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“अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष— 2025” के राज्य स्तरीय कार्यक्रमों को प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में “आईवाईसी-राज्य एपेक्स समिति” का गठन किया गया है। प्रशासनिक सुधार विभाग के उप सचिव शशि कुशवाहा ने बताया कि मुख्यमंत्री राज्य एपेक्स समिति के अध्यक्ष होंगे। इस समिति का मुख्य उद्देश्य सहकारिता वर्ष— 2025 के तहत राज्य स्तरीय कार्यक्रमों की निगरानी, समर्थन और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। उन्होने बताया कि यह समिति राज्य में सहकारिता आंदोलन को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वहीं प्रदेश में राज्य सहकारी विकास समिति का भी पुनर्गठन किया है। यह समिति मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कार्य करेगी। श्री कुशवाहा ने बताया कि समिति में विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सहकारी संगठनों के प्रतिनिधि और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं। उन्होने कहा कि प्रदेश में सहकारी आंदोलन को सशक्त बनाने और इसे जमीनी स्तर तक विस्तार देने के की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस उद्देश्य से राज्य सहकारी विकास समिति का पुनर्गठन किया गया है। मुख्य सचिव सुधांशु पंत को राज्य सहकारी विकास समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। इस समिति का मुख्य उद्देश्य राज्य में सहकारी समितियों को अधिक प्रभावी बनाना और इनके संचालन में पारदर्शिता और कार्यक्षमता को बढ़ावा देना है। श्री कुशवाहा ने बताया कि समिति में विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सहकारी संगठनों के प्रतिनिधि और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं।

Food Safety: गिव अप अभियान के तहत 8 लाख लोगों ने छोड़ी खाद्य सुरक्षा

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि समाज के शोषित और वंचित तबकों को खाद्य सुरक्षा योजना से जोड़ना प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सर्वोच्च प्राथमिकता है। श्री गोदारा ने बुधवार को सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि राज्य सरकार द्वारा गत एक वर्ष में 13 लाख लोगों को खाद्य सुरक्षा से जोड़ा गया है। इनमें 1.60 लाख से अधिक विशेष योग्यजन भी सम्मिलित है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार विभाग लगातार खाद्य सुरक्षा से वंचित लोगों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसी क्रम में गत 26 जनवरी को मुख्यमंत्री के द्वारा खाद्य सुरक्षा पोर्टल को पुनः प्रारंभ किया गया। श्री गोदारा ने कहा कि गत वर्षों से खाद्य सुरक्षा से जुड़ने हेतु लंबित 9 लाख आवेदनों का त्वरित निस्तारण किया जा रहा है ताकि पात्र लोग खाद्य सुरक्षा से जुड़ सकें। प्रक्रिया में शुचिता सुनिश्चित करने हेतु स्वीकृत किए गए आवेदनों की रेंडम चेकिंग का भी प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में जिला कलेक्टर को भी विशेष अपील अधिकार दिए जाकर खाद्य सुरक्षा से वंचित परिवारों को एनएफएसए से जोड़ने के लिए अधिकृत करना प्रस्तावित है। मंत्री ने कहा कि पोर्टल से खाद्य सुरक्षा अधिनियम से जुड़ने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाया गया है। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर आवेदन स्वयं द्वारा या ई मित्र के माध्यम से किया जा सकता है। आवेदन स्वीकृत करने की प्रक्रिया में शुचिता सुनिश्चित करने हेतु आवेदन की त्रिस्तरीय जांच की जाएगी। प्राप्त आवेदन निस्तारण हेतु संबंधित अपीलीय अधिकारी के समक्ष ऑनलाइन जाएगा। अपीलीय अधिकारी द्वारा प्राप्त आवेदन को शहरी क्षेत्र में नगरीय निकायों के अधिशाषी अधिकारी/आयुक्त एवं ग्रामीण क्षेत्र में ब्लॉक विकास अधिकारी को जांच हेतु प्रेषित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग को पोर्टल के माध्यम से निरंतर आवेदन प्राप्त हो रहे हैं और नए दिशा निर्देशों के आलोक में उनके एक माह के अंदर निस्तारण की कार्यवाही की जा रही है। मंत्री ने कहा कि ई— मित्र पर आवेदन हेतु 50 रूपए का शुल्क रखा गया है। इससे अधिक राशि मांगने और विभाग से जुड़े किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार की शिकायत आमजन द्वारा हेल्पलाइन नंबर 1800-180-6030 पर की जा सकती है। श्री गोदारा ने कहा कि अधिकतम लोगों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु ई— केवाईसी की प्रक्रिया को प्रभावी रूप से संपन्न करवाया जा रहा है। आगामी 28 जनवरी तक खाद्य सुरक्षा के अंतर्गत आने वाले 88 प्रतिशत से अधिक लोगों की ई— केवाईसी सम्पन्न हो चुकी है। राज्य सरकार द्वारा संवेदनशीलता के आधार पर 70 साल से ऊपर के लोगों को ई— केवाईसी से छूट दी गई है। साथ ही 10 साल की आयु से कम के बच्चों को भी ई— केवाईसी की बाध्यता से बाहर रखा गया है। श्री गोदारा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित गिव अप अभियान के अंतर्गत राज्य में अब तक 8.38 लाख से अधिक व्यक्तियों ने खाद्य सुरक्षा सूची से स्वत: अपना नाम हटवाया है। उन्होंने कहा कि गिव अप अभियान 28 फरवरी तक अनवरत जारी रहेगा। गरीबी रेखा से ऊपर उठ चुके लोगों द्वारा स्वत: अपना नाम हटवाने से राज्य सरकार और अधिक पात्र लोगों को खाद्य सुरक्षा दे पाएगी। उन्होंने खाद्य सुरक्षा सूची में शामिल सक्षम लोगों से स्वत: गिव अप अभियान से जुड़कर अपना नाम हटवाने की अपील की। उन्होंने कहा की स्वत: नाम नहीं हटवाने की स्थिति में खाद्य सुरक्षा से जुड़े अपात्र परिवारों को चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वसूली अथवा अन्य दंडात्मक कार्रवाई से बचने हेतु अपात्र व्यक्ति अपना नाम खाद्य सुरक्षा सूची से हटवाएं। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार ऐसा परिवार, जिनका कोई भी सदस्य आयकर दाता हो, जिसका कोई भी सदस्य सरकारी/अर्द्ध सरकारी/स्वायत्तशासी संस्थाओं में नियमित कार्मिक हो अथवा एक लाख रूपये वार्षिक से अधिक पेंशन प्राप्त करता है, जिसके किसी भी सदस्य के पास चार पहिया वाहन हो (ट्रेक्टर एवं एक वाणिज्यिक वाहन को छोडकर), जिनके सभी सदस्यों के स्वामित्व में कुल कृषि भूमि लघु कृषक हेतु निर्धारित सीमा से अधिक हो, खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत अपात्र होंगे। वहीं ऐसे परिवार, जिनके सभी सदस्यों की कुल आय एक लाख रुपए वार्षिक से अधिक हो, जिनके पास ग्रामीण क्षेत्र में 2000 वर्गफीट से अधिक स्वयं के निवास हेतु पक्का मकान हो, नगर निगम/नगर परिषद क्षेत्र में 1000 वर्गफीट से अधिक क्षेत्रफल में पक्का आवासीय/व्यावसायिक परिसरधारी परिवार(कच्ची बस्ती को छोडकर), नगर पालिका क्षेत्र में 1500 वर्गफीट से अधिक क्षेत्रफल में निर्मित पक्का आवासीय/व्यावसायिक परिसरधारी परिवार(कच्ची बस्ती को छोडकर), खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत अपात्र होंगे।

Confed: कॉनफेड ने अर्जित किया 22 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ

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मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के मार्गदर्शन में सहकारिता विभाग की प्रमुख शासन सचिव, रजिस्ट्रार सहकारी समितियां और राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ (कॉनफेड) की प्रशासक श्रीमती मंजू राजपाल ने कहा कि सहकारिता की भावना केवल लाभ अर्जित करना नहीं है, अपितु सहकारी संस्थाओं को प्रत्येक कार्य क्षेत्र में लाभ अर्जन एवं रोजगार सृजन के प्रयास करने चाहिए। श्रीमती राजपाल मंगलवार को नेहरू सहकार भवन में आयोजित कॉनफेड की 39वीं वार्षिक साधारण सभा को संबोधित कर रहीं थीं। उन्होंने सभी को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष की बधाई देते हुए कहा कि सहकारिता विभाग ‘सहकार से समृद्धि’ की दिशा में निरन्तर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर परिणाम अर्जित करने के लिए सहकारी संस्थाओं के मध्य भी सहकार की भावना होनी चाहिए। श्रीमती राजपाल ने विगत वर्ष में बेहतर लाभ अर्जन के लिए सभी को बधाई दी और कॉनफेड के अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि चालू वर्ष में भी कॉनफेड भरसक प्रयास कर बेहतर परिणाम हासिल करेगा। श्रीमती राजपाल ने कहा कि कॉनफेड बेहतर कार्य कर अन्य सहकारी संस्थाओं के लिए भी फेसिलिटेटर की भूमिका निभाए। साथ ही, उन्होंने नवाचारों पर फोकस करते हुए संघ के कार्यकलापों में नई गतिविधियां शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संगठन में ऐसी गतिविधियों को शामिल किया जाना चाहिए, जिससे रोजगारों का सृजन हो और सदस्यों को लाभ अर्जन हो। प्रशासक ने कहा कि जब हम अच्छा काम करते हैं तो कई तरह की चुनौतियां और बाधाएं भी आती हैं। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों के परिणामस्वरूप कॉनफेड एवं भण्डारों को आरजीएचएस की बकाया 59 करोड़ की राशि के भुगतान के आदेश जारी हो गए हैं और भुगतान मिलना भी शुरू हो गया है।

Food Safety: खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने कार्यों की समीक्षा, करौली एफएसओ को जारी किया नोटिस

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प्रदेश में आमजन को शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर मिलावट के खिलाफ निरन्तर अभियान चलाया जा रहा है। जिलों में कार्यरत खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा किये जा रहे कार्यों की मंगलवार को वीसी के माध्यम से विस्तृत समीक्षा की गई। खाद्य सुरक्षा आयुक्त इकबाल खान के निर्देशन में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में पूरे राज्य में ”शुद्ध आहार, मिलावट पर वार” अभियान को गति देने के निर्देश दिए गए। वहीं अतिरिक्त आयुक्त पंकज ओझा और संयुक्त आयुक्त विजय प्रकाश शर्मा ने अभियान की समीक्षा की। बैठक में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को देशभर में प्रथम स्थान पर रहने के लक्ष्य की पूर्ति हेतु प्रतिमाह आवश्यक सैम्पल लिए जाने एवं निरीक्षण की जानकारी का FoSCOS पोर्टल पर नियमित इंद्राज करने के निर्देश दिए गए। वहीं प्रतिमाह 5 मिस ब्रांडेड के प्रकरण बनाने, मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब का नियमित संचालन करने, ईट राइट गतिविधियों के लक्ष्यों की पूर्ति करने, जिलों में 4 बड़ी कार्रवाई करने एवं न्यायालयों द्वारा निर्णित प्रकरणों में लगाई गयी सजा या शास्ति का व्यापक प्रचार—प्रसार करने के निर्देश दिए। बैठक में चालान से शेष रहे सभी वाद शीघ्र न्यायालय में दर्ज करवाने हेतु निर्देश प्रदान किये गये। करौली जिले के एफएसओ विजय सिंह का सैम्पलिंग में फेल सैंपल का प्रतिशत कम रहने और असंतोषजनक कार्य होने पर नोटिस जारी किया गया।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होगी राज्य की आठवीं आर्थिक गणना

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केन्द्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के निर्देशानुसार राज्य में आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय द्वारा आठवीं आर्थिक गणना 2025-26 का आयोजन किया जाएगा। इस गणना के सफल और समयबद्ध संचालन के लिए मुख्य सचिव सुधांशु पंत की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया गया है। आर्थिक गणना के तहत राज्य में आर्थिक गतिविधियों में संलिप्त औद्योगिक इकाइयों की गणना की जाएगी। इसके साथ ही, उद्यम की स्थिति, प्रकृति, स्वामित्व, वित्तीय प्रबंधन, और रोजगार आदि से संबंधित सूचनाएं भी संकलित की जाएंगी। समन्वय समिति द्वारा तैयारी और प्रगति की समीक्षा, समस्याओं का समाधान, प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की तैनाती, डेटा कवरेज, डेटा की शुद्धता पर रिपोर्ट, जिला स्तरीय समन्वय समिति से प्राप्त फीडबैक की समीक्षा कर समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
राज्य स्तरीय समन्वय समिति में वित्त विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग विभाग, राजस्व विभाग, स्वायत शासन विभाग के प्रमुख शासन सचिव, सहकारिता विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग,  श्रम विभाग, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग के शासन सचिव, आयोजना एवं सांख्यिकी विभाग के विशिष्ठ सचिव, पंचायती राज विभाग के शासन सचिव एवं आयुक्त, सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग  के आयुक्त एंव संयुक्त सचिव, NSSO (उत्तरी आंचल) के उप महानिदेशक, NSSO (क्षेत्रीय कार्यालय) के उप महानिदेशक, एम.एस.एम.ई (डी.आई), भारत सरकार के निदेशक सदस्य होंगे। समन्वय समिति के सदस्य सचिव आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग निदेशक होंगे।
समिति का प्रशासनिक विभाग आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग को बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि यह समिति एक अस्थायी समिति है जो कि आठवीं आर्थिक गणना की समाप्ति तक कार्य करेगी।  यह समिति राज्य में आठवीं आर्थिक गणना को सुव्यवस्थित, सटीक और समयबद्ध तरीके से संपन्न करने में अहम भूमिका निभाएगी।

RAMAYAN: रामायण क्या है?

एक रात की बात हैं, माता कौशल्या जी को सोते में अपने महल की छत पर किसी के चलने की आहट सुनाई दी। नींद खुल गई, पूछा कौन हैं ? मालूम पड़ा श्रुतकीर्ति जी (सबसे छोटी बहु, शत्रुघ्न जी की पत्नी)हैं। माता कौशल्या जी ने उन्हें नीचे बुलाया। श्रुतकीर्ति जी आईं, चरणों में प्रणाम कर खड़ी रह गईं। माता कौशिल्या जी ने पूछा, श्रुति ! इतनी रात को अकेली छत पर क्या कर रही हो बेटी ? क्या नींद नहीं आ रही? शत्रुघ्न कहाँ है? श्रुतिकीर्ति की आँखें भर आईं, माँ की छाती से चिपटी, गोद में सिमट गईं, बोलीं, माँ उन्हें तो देखे हुए तेरह वर्ष हो गए। उफ! कौशल्या जी का ह्रदय काँप कर झटपटा गया। तुरंत आवाज लगाई, सेवक दौड़े आए। आधी रात ही पालकी तैयार हुई, आज शत्रुघ्न जी की खोज होगी, माँ चली। आपको मालूम है शत्रुघ्न जी कहाँ मिले? अयोध्या जी के जिस दरवाजे के बाहर भरत जी नंदिग्राम में तपस्वी होकर रहते हैं, उसी दरवाजे के भीतर एक पत्थर की शिला हैं, उसी शिला पर, अपनी बाँह का तकिया बनाकर लेटे मिले!! माँ सिराहने बैठ गईं, बालों में हाथ फिराया तो शत्रुघ्न जी नेआँखें खोलीं, माँ! उठे, चरणों में गिरे, माँ ! आपने क्यों कष्ट किया ? मुझे बुलवा लिया होता। माँ ने कहा, शत्रुघ्न! यहाँ क्यों?” शत्रुघ्न जी की रुलाई फूट पड़ी, बोले- माँ! भैया राम जी पिताजी की आज्ञा से वन चले गए, भैया लक्ष्मण जी उनके पीछे चले गए, भैया भरत जी भी नंदिग्राम में हैं, क्या ये महल, ये रथ, ये राजसी वस्त्र, विधाता ने मेरे ही लिए बनाए हैं? माता कौशल्या जी निरुत्तर रह गईं। देखो क्या है ये रामकथा… यह भोग की नहीं….त्याग की कथा हैं..!! यहाँ त्याग की ही प्रतियोगिता चल रही हैं और सभी प्रथम हैं, कोई पीछे नहीं रहा… चारो भाइयों का प्रेम और त्याग एक दूसरे के प्रति अद्भुत-अभिनव और अलौकिक हैं। “रामायण” जीवन जीने की सबसे उत्तम शिक्षा देती हैं भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास हुआ तो उनकी पत्नी सीता माईया ने भी सहर्ष वनवास स्वीकार कर लिया..!! परन्तु बचपन से ही बड़े भाई की सेवा मे रहने वाले लक्ष्मण जी कैसे राम जी से दूर हो जाते! माता सुमित्रा से तो उन्होंने आज्ञा ले ली थी, वन जाने की.. परन्तु जब पत्नी “उर्मिला” के कक्ष की ओर बढ़ रहे थे तो सोच रहे थे कि माँ ने तो आज्ञा दे दी, परन्तु उर्मिला को कैसे समझाऊंगा?? क्या बोलूँगा उनसे? यहीं सोच विचार करके लक्ष्मण जी जैसे ही अपने कक्ष में पहुंचे तो देखा कि उर्मिला जी आरती का थाल लेके खड़ी थीं और बोलीं- “आप मेरी चिंता छोड़ प्रभु श्रीराम की सेवा में वन को जाओ…मैं आपको नहीं रोकूँगीं। मेरे कारण आपकी सेवा में कोई बाधा न आये, इसलिये साथ जाने की जिद्द भी नहीं करूंगी।” लक्ष्मण जी को कहने में संकोच हो रहा था!! परन्तु उनके कुछ कहने से पहले ही उर्मिला जी ने उन्हें संकोच से बाहर निकाल दिया..!! वास्तव में यहीं पत्नी का धर्म है..पति संकोच में पड़े, उससे पहले ही पत्नी उसके मन की बात जानकर उसे संकोच से बाहर कर दे!! लक्ष्मण जी चले गये परन्तु 14 वर्ष तक उर्मिला ने एक तपस्विनी की भांति कठोर तप किया.!! वन में “प्रभु श्री राम माता सीता” की सेवा में लक्ष्मण जी कभी सोये नहीं, परन्तु उर्मिला ने भी अपने महलों के द्वार कभी बंद नहीं किये और सारी रात जाग जागकर उस दीपक की लौ को बुझने नहीं दिया!! मेघनाथ से युद्ध करते हुए जब लक्ष्मण जी को “शक्ति” लग जाती है और हनुमान जी उनके लिये संजीवनी का पर्वत लेके लौट रहे होते हैं, तो बीच में जब हनुमान जी अयोध्या के ऊपर से गुजर रहे थे तो भरत जी उन्हें राक्षस समझकर बाण मारते हैं और हनुमान जी गिर जाते हैं!! तब हनुमान जी सारा वृत्तांत सुनाते हैं कि, सीता जी को रावण हर ले गया, लक्ष्मण जी युद्ध में मूर्छित हो गए हैं। यह सुनते ही कौशल्या जी कहती हैं कि राम को कहना कि “लक्ष्मण” के बिना अयोध्या में पैर भी मत रखना। राम वन में ही रहे!! माता “सुमित्रा” कहती हैं कि राम से कहना कि कोई बात नहीं..अभी शत्रुघ्न है!! मैं उसे भेज दूंगी..मेरे दोनों पुत्र “राम सेवा” के लिये ही तो जन्मे हैं!! माताओं का प्रेम देखकर हनुमान जी की आँखों से अश्रुधारा बह रही थी। परन्तु जब उन्होंने उर्मिला जी को देखा तो सोचने लगे कि, यह क्यों एकदम शांत और प्रसन्न खड़ी हैं? क्या इन्हें अपनी पति के प्राणों की कोई चिंता नहीं? हनुमान जी पूछते हैं- देवी! आपकी प्रसन्नता का कारण क्या है? आपके पति के प्राण संकट में हैं…सूर्य उदित होते ही सूर्य कुल का दीपक बुझ जायेगा। उर्मिला जी का उत्तर सुनकर तीनों लोकों का कोई भी प्राणी उनकी वंदना किये बिना नहीं रह पाएगा!! उर्मिला बोलीं- ” मेरा दीपक संकट में नहीं है, वो बुझ ही नहीं सकता!! रही सूर्योदय की बात तो आप चाहें तो कुछ दिन अयोध्या में विश्राम कर लीजिये, क्योंकि आपके वहां पहुंचे बिना सूर्य उदित हो ही नहीं सकता.!! आपने कहा कि, प्रभु श्रीराम मेरे पति को अपनी गोद में लेकर बैठे हैं..! जो “योगेश्वर प्रभु श्री राम” की गोदी में लेटा हो, काल उसे छू भी नहीं सकता..!! यह तो वो दोनों लीला कर रहे हैं.. मेरे पति जब से वन गये हैं, तबसे सोये नहीं हैं.. उन्होंने न सोने का प्रण लिया था..इसलिए वे थोड़ी देर विश्राम कर रहे हैं..और जब भगवान् की गोद मिल गयी तो थोड़ा विश्राम ज्यादा हो गया…वे उठ जायेंगे..!! और “शक्ति” मेरे पति को लगी ही नहीं, शक्ति तो प्रभु श्री राम जी को लगी है!! मेरे पति की हर श्वास में राम हैं, हर धड़कन में राम, उनके रोम रोम में राम हैं, उनके खून की बूंद बूंद में राम हैं, और जब उनके शरीर और आत्मा में ही सिर्फ राम हैं, तो शक्ति राम जी को ही लगी, दर्द राम जी को ही हो रहा!! इसलिये हनुमान जी आप निश्चिन्त होके जाएँ..सूर्य उदित नहीं होगा।” राम राज्य की नींव जनक जी की बेटियां ही थीं… कभी “सीता” तो कभी “उर्मिला”..!! भगवान् राम ने तो केवल राम राज्य का कलश स्थापित किया ..परन्तु वास्तव में राम राज्य इन सबके प्रेम, त्याग, समर्पण और बलिदान से ही आया!! जिस मनुष्य में प्रेम, त्याग, समर्पण की भावना हो उस मनुष्य में राम हि बसता है… कभी समय मिले तो अपने वेद, पुराण, गीता, रामायण को पढ़ने और समझने का प्रयास कीजिएगा .,जीवन को एक अलग नज़रिए से देखने और जीने का सऊर मिलेगा!! “लक्ष्मण सा भाई हो, कौशल्या माई हो, स्वामी तुम जैसा, मेरा रघुराइ हो.. नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो, चरण हो राघव के, जहाँ मेरा ठिकाना हो.. हो त्याग भरत जैसा, सीता सी नारी हो, लव कुश के जैसी, संतान हमारी हो.. श्रद्धा हो श्रवण जैसी, सबरी सी भक्ति हो, हनुमत के जैसी निष्ठा और शक्ति हो… ” ये रामायण न है, पुण्य कथा श्री राम की।

Constitution: राजस्‍थान विधान सभा की संविधान दीर्घा को आमजन देखे -विधान सभा अध्यक्ष

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राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है कि भारत की आत्‍मा भारतीय संविधान है। भारत के संविधान के प्रति श्रद्धा और जागरूकता बढाने के लिए राजस्‍थान विधान सभा में संविधान दीर्घा का निर्माण किया गया है। उन्‍होंने कहा है कि इस दीर्घा का उद्देश्‍य आमजन और युवाओं को भारत और भारत की सांस्‍कृतिक नैतिकता से परिचित कराना है। श्री देवनानी ने आमजन से राजस्‍थान विधान सभा में बनाई गई संविधान दीर्घा का अवलोकन करने का अनुरोध किया है। अध्यक्ष ने कहा है कि संविधान में नन्‍दलाल बोस द्वारा चित्रित भारतीय सभ्‍यता, संस्‍कृति, इतिहास और विरासत का संविधान दीर्घा में प्रदर्शन किया गया है। मूल संविधान के 22 भागों के आरम्‍भ में प्रदर्शित कलाकृतियों यथा रामायण में भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्‍मण जी के वनवास से घर वापसी का दृश्‍य, श्री कृष्‍ण के उपदेश, गौतम बुद्ध व भगवान महावीर का जीवन, सम्राट अशोक व विक्रमादित्‍य के सभागार के दृश्‍य, छत्रपति शिवाजी, गुरू गोविन्‍द सिंह, रानी लक्ष्‍मीबाई, स्‍वतन्‍त्रता संग्राम में महात्‍मा गांधी के दाण्डी मार्च और नेता जी सुभाष चन्‍द्र बोस का चित्रण किया गया है।