राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने और पशुपालक किसानों के हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना’ का प्रभावी क्रियान्वयन शुरू कर दिया है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन न केवल आजीविका का मुख्य आधार है, बल्कि यह संकट के समय किसानों के लिए ‘एटीएम’ की तरह काम करता है। इसी महत्व को समझते हुए सरकार ने दुधारू पशुओं की असमय मृत्यु से होने वाले आर्थिक जोखिम को कम करने के लिए यह बड़ी पहल की है।
पशुपालकों को मिलेगा सीधा लाभ—
अक्सर देखा जाता है कि लंपी जैसी संक्रामक बीमारियों, प्राकृतिक आपदाओं या अचानक होने वाली दुर्घटनाओं के कारण दुधारू पशुओं की मृत्यु हो जाती है। एक गरीब किसान के लिए यह केवल एक पशु की हानि नहीं, बल्कि उसकी आय के एकमात्र स्रोत का बंद होना है। मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत, पशुपालकों को उनके मवेशियों का बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। पशु की मृत्यु होने पर बीमा राशि सीधे किसान के खाते में हस्तांतरित की जाएगी, जिससे वह नया पशु खरीद सके और उसकी आजीविका का चक्र न थमे।
सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम—
राज्य सरकार का मानना है कि जब ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी, तभी प्रदेश का सर्वांगीण विकास संभव है। यह योजना न केवल किसानों को कर्ज के जाल से बचाएगी, बल्कि उन्हें पशुपालन क्षेत्र में और निवेश करने के लिए प्रोत्साहित भी करेगी। बीमा कवर होने से पशुपालक अब निश्चिंत होकर उन्नत नस्ल के पशु पाल सकेंगे, जिससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह योजना राजस्थान के पशुपालन क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी। सरकार का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक पात्र पशुपालक परिवार को इस योजना से जोड़ना है ताकि “पशुधन सुरक्षित, किसान खुशहाल” का संकल्प साकार हो सके।




