Mahakumbh—24 News: महाकुंभ में राजस्थान सरकार करेगी श्रद्धालुओं की सेवा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश की जनता की धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक परंपरा के संरक्षण के लिए कृत संकल्पित है। राज्य सरकार आस्था धामों के विकास और वरिष्ठ जनों को तीर्थ यात्रा करवाने जैसे कार्य कर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए अगले साल 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक उत्तरप्रदेश के प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित होने वाले महाकुंभ में राजस्थान के श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सार्थक पहल की है। श्री शर्मा ने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कुंभ मेला स्थल के निकट राजस्थान का एक पैवेलियन स्थापित करने के लिए भूखंड आवंटित करने का आग्रह किया है। ये पैवेलियन स्थापित होने से राजस्थान के लाखों श्रद्धालुओं के विश्राम, जलपान तथा चिकित्सा सहित अन्य व्यवस्था सुनिश्चित हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में आशा व्यक्त की है कि उत्तरप्रदेश सरकार का सहयोग राजस्थान के श्रद्धालुओं के महाकुंभ के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ ही देश की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपरा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।

Women and Children News: महिला एवं बच्चे समाज के प्रमुख अंग —मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आंगनबाड़ी केन्द्रों पर सुविधाओं का उन्नयन करते हुए पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ केन्द्रों का संचालन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण एवं सशक्तीकरण की योजनाओं का लाभ प्रत्येक महिला, बच्चे और परिवार तक लाभ पहुंचाना जाना सुनिश्चित करें ताकि कोई भी व्यक्ति योजनाओं से वंचित नहीं रहे। उन्होंने बजट घोषणाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए । मुख्यमंत्री मंगलवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कुछ क्षेत्रों विशेषकर जनजातीय में कुपोषण के समूल उन्मूलन के लिए हमें दीर्घ अवधि की कार्ययोजना पर कार्य करने की आवश्यकता है। इसी क्रम में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर दिए जा रहे पोषण आहार की निरन्तर समीक्षा करते हुए आवश्यक सुधार किए जाए। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को वार्षिक कैलेण्डर बनाकर आंगनबाड़ी केन्द्रों का सघन निरीक्षण करने और आवश्यक व्यवस्थाएं दुरूस्त करने के लिए निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने शिक्षा सेतु योजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को ड्रॉप आउट बालिकाओं एवं महिलाओं को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को प्रोत्साहित एवं पुरस्कृत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कौशल सामर्थ्य योजना के अन्तर्गत लाभान्वित युवाओं को स्वरोजगार सुनिश्चित करने के क्रम में अधिक से अधिक सुविधाएं सृजित करने के लिए निर्देशित किया। श्री शर्मा ने कहा कि योजना के अन्तर्गत प्रशिक्षित युवाओं की नियमित ट्रेकिंग करने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बालिकाओं को समुचित शिक्षा और सम्बल प्रदान करने के लिए ‘लाडो प्रोत्साहन योजना’ अहम है जिसके तहत हमारी सरकार बेटी के जन्म से लेकर स्नातक शिक्षा पूरी करने तक एक लाख रुपये की राशि दे रही है। राज्य सरकार शीघ्र ही इसके अन्तर्गत 1 साथ 1 लाख लाभार्थियों के खातों में प्रति लाभार्थी 2500 रूपये की किस्त हस्तांतरित करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल्द ही ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना’ के अन्तर्गत एक साथ लगभग 70 हजार लाभार्थियों को बढ़ी हुई 1500 रूपये की अतिरिक्त राशि देने जा रही है। श्री शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री अमृत आहार (आंगनबाड़ी दुग्ध वितरण योजना) योजना का भी शीघ्र शुभारंभ किया जाएगा। इसके अन्तर्गत आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों पर सप्ताह में तीन दिन दूध उपलब्ध करवाया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार 200 करोड़ रूपये व्यय करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक ब्लॉक में एक मॉडल आंगनबाड़ी केन्द्र का भी शीघ्र शुभारंभ करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए जल्द ही आमुखीकरण कार्यशाला आयोजित की जाएगी। जिसके माध्यम से कार्यकर्ताओं को नवाचार एवं नवीन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। श्री शर्मा ने विभाग के अधिकारियों को महिला सुरक्षा एवं सलाह केन्द्र की संख्या बढ़ाने के लिए भी निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि इन केन्द्रों के माध्यम से 24 हजार से अधिक प्रकरणों में सामाजिक एवं पारिवारिक स्तर हिंसा से पीड़ित महिलाओं को मार्गदर्शन एवं सहायता प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद एवं अन्त्योदय की परिकल्पना को साकार करने के लिए नीति एवं कार्यक्रमों के माध्यमों से प्रभावी कदम उठा रही है। महिला एवं बच्चे समाज के प्रमुख अंग है, जिनके उत्थान के लिए हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

Youth News: ‘राजस्थान यूथ आइकॉन अवार्ड’ के लिए आवेदन आमंत्रित

प्रदेश में 12 जनवरी 2025 को यूथ डे के अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले प्रतिभाशाली युवाओं को ‘राजस्थान यूथ आइकन अवॉर्ड’ प्रदान किया जाएगा। अवार्ड के लिए विभाग द्वारा आवेदन आमंत्रित किये गए हैं। युवा मामले एवं खेल विभाग के शासन सचिव डॉ. नीरज कुमार पवन ने बताया कि अवार्ड के लिए प्रदेश के 15 वर्ष से 29 वर्ष की आयु वर्ग के युवा, जो कला व संस्कृति, सामाजिक कार्य, विज्ञान तकनीकी,संचार एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार, शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कृषि, पर्यावरण,उद्यमिता,महिला सशक्तिकरण तथा स्वच्छता में उत्कृष्ट कार्य कर रहें हैं, वे राजस्थान युवा बोर्ड की वेबसाइट https://youthboard.rajasthan.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। यूथ आइकॉन पुरस्कार से संबंधित दिशा निर्देश, नियम एवं शर्तें भी राजस्थान युवा बोर्ड की वेबसाईट पर उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की बजट घोषणा- 2024-25 के तहत 12 जनवरी को यूथ डे के अवसर पर प्रदेश में राष्ट्रीय युवा महोत्सव की तर्ज पर ‘राज्य युवा महोत्सव’आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। इस अवसर पर राष्ट्रीय युवा पुरस्कार की तरह प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं को ‘यूथ आइकन अवार्ड’ से सम्मानित किया जाएगा।

C M NEWS: योजनाओं के लाभ से कोई भी पात्र व्यक्ति वंचित न रहे —मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार अंत्योदय के संकल्प के साथ समाज के वंचित वर्ग के कल्याण हेतु समर्पित होकर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के कमजोर वर्ग को मिलना सुनिश्चित हो इसके लिए हम प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे सेवाभाव से कार्य करते हुए योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने विभागीय बजट घोषणाओं को शीघ्र पूरा करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। मुख्यमंत्री सोमवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अधिकारी नियमित मॉनिटरिंग के माध्यम से यह सुनिश्चित करें कि योजनाओं के लाभ से कोई भी पात्र व्यक्ति वंचित न रहे और अपात्र व्यक्ति योजना का लाभ न ले पाए, क्योंकि इससे पात्र व्यक्ति के हितों पर कुठाराघात होता है। श्री शर्मा ने कहा कि विभाग द्वारा विभिन्न वर्गों के लिए संचालित आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों की मरम्मत का कार्य प्राथमिकता तय कर चरणबद्ध रूप से किया जाए। श्री शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पत्थर तोड़ने एवं पीसने के कार्य वाले स्थानों एवं खदानों पर निर्धारित गाईडलाइन की सख्ती से पालना सुनिश्चित कराएं ताकि सिलिकोसिस रोग पर नियंत्रण किया जा सके। श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने वंचित वर्ग के उत्थान के लिए कई निर्णय किए हैं। राज्य बजट में अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण के लिए एससीएसपी और टीएसपी फंड की राशि को 1000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1500 करोड़ रुपये किया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि को भी 1000 रुपये से बढ़ाकर 1150 रुपये किया गया है। राज्य में सभी वर्गाें के राजकीय एवं अनुदानित छात्रावासों में छात्र-छात्राओं को देय मेस भत्ता भी 2500 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये कर दिया गया है। श्री शर्मा ने कहा कि आश्रय से वंचित घूमंतू समुदाय के लोगों के लिए घूमंतू आवासीय योजना क्रियान्वित की जा रही है। राज्य के दिव्यांग नागरिकों को कृत्रिम अंग एवं उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही, 2 हजार युवा दिव्यांगों को संबल प्रदान करने के लिए स्कूटी भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों के लिए शीघ्र ही मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल संबल योजना प्रारंभ कर 5 हजार रुपये की मासिक सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि राज्य सरकार लगभग 90 लाख लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ दे रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने वाले लाभार्थियों की पात्रता व उनसे जुडे़ रिकॉर्ड का नियमित रूप से सत्यापन करें और इस कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे पेंशनर्स की मृत्यु का पंजीकरण अनिवार्य कर संबंधित कार्मिकों की जिम्मेदारी तय की जाए।

Cabinet News: राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में हुये कई महत्वपूर्ण निर्णय, रोजगार पर रहा फोकस

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में शनिवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित मंत्रिमण्डल की बैठक में प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास को गति देने के लिए 9 नई नीतियों के अनुमोदन, 7वें राज्य वित्त आयोग के गठन, बीकानेर और भरतपुर में विकास प्राधिकरणों के गठन के लिए अध्यादेश लाने, खेमराज समिति की सिफारिशों के अनुरूप राजस्थान सिविल सेवा (पुनरीक्षित वेतन) नियम-2017 में संशोधन, विभिन्न सेवा नियमों में संशोधन, द राजस्थान प्रोहेबिशन ऑफ अनलॉफुल कन्वर्जन ऑफ रिलिजन बिल 2024 लाने सहित प्रदेश के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए। उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा एवं विधि एवं विधिक कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने पत्रकार वार्ता में बताया कि राज्य में औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाने, प्रदेश को एक्सपोर्ट हब बनाने, स्थानीय पर्यटन, छोटे उद्योगों, स्थानीय शिल्प एवं कारीगरी, हथकरघा एवं एक जिला एक उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान एमएसएमई नीति, निर्यात संवर्द्धन नीति, एक जिला एक उत्पाद नीति, राजस्थान पर्यटन इकाई नीति एवं एकीकृत क्लस्टर विकास योजना को मंजूरी दी गई।

बल-छल पूर्वक धर्मान्तरण रोकने के लिए आएगा विधेयक—

विधि एवं विधिक कार्य मंत्री  जोगाराम पटेल ने बताया कि प्रलोभन अथवा कपटपूर्वक धर्मान्तरण के प्रयासों को रोकने के लिए “दि राजस्थान प्रोहिबिशन ऑफ अनलॉफुल कन्वर्जन ऑफ रिलीजन बिल-2024“ विधानसभा में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी राज्य में अवैध रूप से धर्मान्तरण को रोकने के सम्बन्ध में कोई विशिष्ट कानून नहीं है, इसलिए मंत्रिमण्डल की बैठक में विचार कर इसके प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। उन्होंने बताया कि इस विधेयक के कानून बनने के उपरान्त कोई व्यक्ति या संस्था, किसी व्यक्ति पर मिथ्या निरूपण, कपटपूर्वक, बलपूर्वक, अनुचित प्रभाव आदि का प्रयोग कर धर्म परिवर्तन नहीं करवा सकेंगे। अगर कोई व्यक्ति अथवा संस्था ऐसा कृत्य करते हैं, तो उन्हें कठोर दण्ड दिया जाएगा। अगर कोई व्यक्ति विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से विवाह करता है, तो पारिवारिक न्यायालय ऐसे विवाह को अमान्य घोषित कर सकता है। इस विधि में अपराध गैर-जमानती व संज्ञेय होंगे। उन्होंने कहा कि अन्य कई राज्यों में जबरन धर्मान्तरण को रोकने के लिए पहले से ही कानून अस्तित्व में है।

भरतपुर और बीकानेर विकास प्राधिकरणों के लिए आएंगे अध्यादेश

उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने बताया कि कैबिनेट ने भरतपुर और बीकानेर में विकास प्राधिकरणों के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है, इनके गठन के लिए भरतपुर विकास प्राधिकरण अध्यादेश-2024 और बीकानेर विकास प्राधिकरण अध्यादेश-2024 लाए जाएंगे। इन शहरों में विकास प्राधिकरण बनने से यहां विकास सुव्यवस्थित और नियोजित ढंग से हो सकेगा। उन्होंने बताया कि बीकानेर विकास प्राधिकरण में नगर विकास न्यास बीकानेर के वर्तमान क्षेत्र के अलावा नापासर व देशनोक तथा आस-पास के 185 गांव सम्मिलित किए जाएंगे। भरतपुर विकास प्राधिकरण में नगर विकास न्यास भरतपुर के वर्तमान क्षेत्र के साथ-साथ 209 गांव शामिल किए जाएंगे।

खेमराज समिति की सिफारिशों के अनुरूप वेतन विसंगतियों का निराकरण

डॉ. बैरवा ने बताया कि सेवानिवृत्त आईएएस श्री खेमराज चौधरी की अध्यक्षता में गठित कर्मचारी वेतन विसंगति परीक्षण समिति की वेतन विसंगति दूर करने, वेतन सुधारों तथा पदोन्नति के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराने संबंधी सिफारिशों को मंत्रिमंडल ने मंजूरी प्रदान की है। उल्लेखनीय है कि वित्त एवं विनियोग विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने वेतन विसंगतियों एवं वेतन सुधार सम्बन्धी सिफारिशों को दिनांक 1 सितम्बर, 2024 से लागू करने की घोषणा की थी।

एमएसएमई नीति-2024 से वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होंगे छोटे उद्यम—

विधि एवं विधिक कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल ने बताया कि राजस्थान एमएसएमई नीति-2024 राज्य के एमएसएमई उद्यमों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने में सहायक सिद्ध होगी। इसमें ऋण पर अतिरिक्त 2 प्रतिशत ब्याज अनुदान, एसएमई एक्सचेंज से धन जुटाने पर 15 लाख रुपए तक सहायता, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी व सॉफ्टवेयर पर 50 प्रतिशत या 5 लाख रुपए तक अनुदान, क्वालिटी सर्टिफिकेशन व आईपीआर पर 3 लाख रुपए तक पुनर्भरण सहायता, विपणन हेतु आयोजनों में 1.5 लाख रुपए तक अनुदान, डिजिटल उपकरणों पर 50 हजार रुपए तक पुनर्भरण और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फीस पर 75 प्रतिशत या अधिकतम 50 हजार रुपए तक पुनर्भरण का प्रावधान है।

उद्यमियों को निर्यातक बनने के लिए प्रोत्साहित करेगी निर्यात संवर्धन नीति—

श्री पटेल ने बताया कि राज्य सरकार की मंशा अगले 5 वर्षों में प्रदेश के निर्यात में 1.50 लाख करोड़ रुपए तक वृद्धि लाने की है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आज अनुमोदित की गई राजस्थान निर्यात संवर्धन नीति-2024 में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं। मुख्यमंत्री निर्यात वृद्धि अभियान चला कर नये उद्यमियों को निर्यातक बनने हेतु प्रोत्साहित भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस नीति में निर्यातकों को दस्तावेजीकरण पर 50 प्रतिशत या 5 लाख रुपए तक सहायता, अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी पर 75 प्रतिशत या 3 लाख तक अनुदान, सर्टिफिकेशन पर 75 प्रतिशत पुनर्भरण (20 हजार रुपए प्रति शिपमेंट व 3 लाख तक प्रति वर्ष), तकनीकी अपग्रेडेशन पर 75 प्रतिशत या 50 लाख तक सहायता, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फीस पर 75 प्रतिशत या 2 लाख तक पुनर्भरण किया जाएगा। श्री पटेल ने बताया कि जिलों के विशिष्ट उत्पादों और शिल्पों को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान एक जिला एक उत्पाद नीति-2024 को स्वीकृति प्रदान की गई है। ओडीओपी नीति के अमल में आने से जिलों की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही कारीगरों, शिल्पकारों, कृषकों और निर्माताओं की आय भी बढ़ेगी। इस नीति में नवीन सूक्ष्म उद्यमों को 25 प्रतिशत या अधिकतम 15 लाख रुपए एवं लघु उद्यमों को 15 प्रतिशत या अधिकतम 20 लाख रुपए तक मार्जिन मनी अनुदान सहायता दी जायेगी। ओडीओपी नीति में सूक्ष्म व लघु उद्यमों को एडवांस्ड टेक्नोलॉजी व सॉफ्टवेयर पर 50 प्रतिशत या 5 लाख रुपए तक अनुदान, क्वालिटी सर्टिफिकेशन व आईपीआर पर 75 प्रतिशत या 3 लाख रुपए तक पुनर्भरण, विपणन आयोजनों में भाग लेने के लिए 2 लाख रुपए तक सहायता, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फीस पर 75 प्रतिशत या 1 लाख रुपए प्रतिवर्ष का 2 साल तक पुनर्भरण और कैटलॉगिंग व ई-कॉमर्स वेबसाइट विकास के लिए 60 प्रतिशत या 75 हजार रुपए तक एकमुश्त सहायता दी जाएगी।  

एकीकृत क्लस्टर विकास योजना में हस्तशिल्प, हथकरघा उद्यमों को प्रोत्साहन

श्री पटेल ने बताया कि राज्य में हस्तशिल्प, हथकरघा तथा एमएसएमई क्षेत्र में कार्यशील उद्यमों की उत्पादकता, गुणवत्ता एवं कार्यक्षमता बढ़ा कर उन्हें वैश्विक बाजार के अनुरूप विकसित करने के लिए एकीकृत क्लस्टर विकास योजना लाई जा रही है। इस योजना में राज्य के हस्तशिल्प, हथकरघा एवं सूक्ष्म और लघु उद्यमों के मौजूदा क्लस्टर्स में कॉमन फेसिलिटी सेंटर्स (सीएफसी) के माध्यम से प्रशिक्षण, कच्चा माल डिपो, सामूहिक उत्पादन/प्रसंस्करण, उत्पाद टेसिं्टग आदि सुविधाओं का विकास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस योजना में हस्तशिल्प व हथकरघा क्लस्टर्स को ट्रेनिंग, मार्केटिंग, क्वालिटी सर्टिफिकेशन आदि के लिए 50 लाख रुपए तक सहायता, कच्चा माल डिपो संचालन पर 8 प्रतिशत ब्याज अनुदान, ई-कॉमर्स के लिए 50 हजार रुपए तक विक्रय सहायता, क्लस्टर्स द्वारा 10 करोड़ लागत वाले सीएफसी की स्थापना के लिए 90 प्रतिशत (गैर रीको क्षेत्रों में 80 प्रतिशत) अनुदान, और गैर रीको क्षेत्रों में 10 एकड़ भूमि पर औद्योगिक पार्क हेतु 60 प्रतिशत या अधिकतम 5 करोड़ रुपए तक सहायता दी जाएगी। श्री पटेल ने बताया कि राज्य सरकार की बजट घोषणा को पूरा करते हुए एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्स्टेंडेड रिएलिटी के क्षेत्र में स्थानीय प्रतिभाओं, राज्य की संस्कृति एवं स्थानीय संसाधनों को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान AVGC-XR नीति-2024 लाई जा रही है। इस नीति में राज्य में बनने वाली एनिमेशन फिल्मों, गेम्स एवं कॉमिक्स को उत्पादन अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। स्थानीय संस्कृति और सामग्री निर्माण पर ध्यान केन्द्रित करने वाले स्टार्ट अप्स व उद्यमों को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अटल इनोवेशन स्टूडियो और एक्सेलेरेटर स्थापित किए जाएंगे। ये स्टूडियो कोडिंग, वीएफएक्स लैब एवं एडवांस्ड कम्प्यूटिंग सुविधाओं से लैस होंगे।  

पर्यटन में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी राजस्थान पर्यटन इकाई नीति-2024

श्री पटेल ने बताया कि मंत्रिमंडल की बैठक में अनुमोदित राजस्थान पर्यटन इकाई नीति-2024 राज्य में पर्यटन के नए संभावनाशील क्षेत्रों में निवेशकों व उद्यमियों को आकर्षित करेगी। नई नीति में इको टूरिज्म यूनिट, फिल्म सिटी, हेरिटेज रेस्टोरेंट, होटल हाउसिंग, इनडोर/आउटडोर प्ले जोन, एकीकृत पर्यटन विलेज, मोटल/वे-साइड सुविधाएं, रिसोर्ट हाउसिंग, ग्रामीण पर्यटन इकाई और पर्यटन स्टार्ट-अप्स जैसी नई पर्यटन इकाइयों को जोड़ा गया है। इस नीति में न्यूनतम 100 करोड़ रूपये का नया निवेश करने वाली पर्यटन इकाई परियोजनाओं को राजकीय भूमि आंवटित किये जाने का प्रावधान किया गया है। पर्यटन इकाई से जुड़ी या उसके अंदर आने वाली भूमि को उनकी भूमि के 10 प्रतिशत तक राजकीय भूमि कृषि या आवासीय डीएलसी दरों पर एक बार आवंटित की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि नई पर्यटन इकाइयों को रिप्स-2024 के तहत स्टाम्प ड्यूटी, कन्वर्जन चार्ज और डेवलपमेंट चार्ज में छूट मिलेगी। ट्यूरिज्म एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र को औद्योगिक दर्जा मिलने से यूडी टैक्स, बिजली दरें, और भवन प्लान शुल्क औद्योगिक दरों पर लागू होंगे। ट्रेड, होटल व रेस्टोरेंट लाइसेंस 10 वर्ष और फायर एनओसी 3 वर्ष के लिए जारी होगी। हेरिटेज होटल/रेस्टोरेंट को रियायती दर पर बार लाइसेंस और 300 वर्ग मीटर से अधिक की हेरिटेज संपत्तियों को फ्री होल्ड पट्टे मिलेंगे। वॉल्ड सिटी में आने वाले होटलों को सड़क चौड़ाई की अनिवार्यता से छूट, दुगुना बिल्टअप एरिया रेश्यो (बीएआर), और संकरी सड़कों पर स्थित हेरिटेज होटल या हेरिटेज रेस्टोरेंट को डेडिकेटेड पार्किंग की व्यवस्था होने पर संचालन की अनुमति मिलेगी। 22 सीट वाले वातानुकूलित लक्जरी कोच पर मोटर वाहन कर में पूर्ण छूट दी जाएगी।  

अक्षय ऊर्जा क्षमता को 125 गीगावाट तक बढ़ाने के लिए राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति-2024

श्री पटेल ने बताया कि अक्षय ऊर्जा के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप वर्तमान अक्षय ऊर्जा नीति, बायोमास एवं वेस्ट टू एनर्जी नीति, ग्रीन हाइड्रोजन नीति के प्रावधानों तथा ऊर्जा भण्डारण के नवीन प्रावधानों को सम्मिलित करते हुए राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति-2024 का अनुमोदन किया गया है। नई नीति में 2030 तक अक्षय ऊर्जा क्षमता को 125 गीगावाट तक बढ़ाने, फ्लोटिंग, रिजर्वायर टॉप और कैनाल टॉप सौर ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने, पम्प स्टोरेज प्रोजेक्ट सहित बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं और 8 मार्च 2019 के बाद शुरू हुई छोटी जल विद्युत परियोजनाओं को शामिल करने, और नेट मीटरिंग व्यवस्था में 80 प्रतिशत ट्रांसफार्मर क्षमता तक सोलर रूफटॉप लगाने की अनुमति दी गई है। सभी अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं और पार्कों को राजकीय भूमि आवंटन, वर्चुअल पीपीए आधारित सौर ऊर्जा परियोजनाओं, कार्बन ट्रेडिंग, ऊर्जा दक्षता तथा नेट जीरो बिलिं्डग को बढ़ावा देने के प्रावधान भी नई नीति में हैं। उन्होंने बताया कि इस नीति में 10 मेगावाट तक की परियोजनाओं का पंजीकरण शुल्क घटाकर 5 हजार रुपए कर दिया गया है। नई नीति में 2029-30 तक 10 हजार मेगावाट क्षमता के पम्प स्टोरेज प्रोजेक्ट, बैट्री ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं (बीईएसएस), हाइड्रो सहित ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। बीईएसएस को बढ़ावा देने के लिए 5 मेगावाट से अधिक की परियोजना की स्थापना पर न्यूनतम 5 प्रतिशत क्षमता का ऊर्जा भंडारण संयंत्र अनिवार्य किया गया है। नीति में बायोगैस, बायो सीएनजी को प्रोत्साहन और वर्ष 2030 तक 2000 केटीपीए ग्रीन हाईड्रोजन उत्पादन हेतु ग्रीन हाइड्रोजन वेली की स्थापना, और न्यूनतम 1 गीगावाट के इलेक्ट्रोलाइजर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। बीईएसएस और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं को रिप्स-2024 सहित विभिन्न प्रकार के लाभ एवं छूट देय होंगे।  

रोजगार सृजन और राजस्व में बढ़ोतरी के लिए राजस्थान खनिज नीति-2024

श्री पटेल ने बताया कि बजट घोषणा को पूरा करते हुए कैबिनेट द्वारा स्वीकृत राजस्थान खनिज नीति-2024 प्रदेश में खनन आधारित उद्योगों, औद्योगिक निवेश, युवाओं व स्थानीय लोगों को रोजगार व राजस्व में बढ़ोतरी के साथ ही अवैध खनन गतिविधियों पर रोक लगाने में कारगर साबित होगी। उन्होंने बताया कि नई खनिज नीति में राजस्व में बढ़ोतरी और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के उद्देश्य से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने, खनिज ब्लॉक्स की प्री-एम्बेडेड अनुमतियों के साथ नीलामी, जनजातीय क्षेत्रों में बिड सिक्योरिटी आधी करने, और पोस्ट-ऑक्शन सेल को मजबूत बनाने के प्रावधान किए गए हैं। इस नीति में मिनरल डायरेक्ट्री और सेण्ड पोर्टल विकसित कर बजरी खनन में पारदर्शिता लाने और अप्रधान खनिजों के रियायत नियम सरल बनाने पर जोर दिया है। आधुनिक तकनीक से जीरो वेस्ट माइनिंग, ऑनलाइन रॉयल्टी वसूली, परमिट सरलीकरण, और अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत जियो-फेंसिंग, जीपीएस ट्रैकिंग और आरएफआईडी चेकपोस्ट लागू किए जाएंगे। खनन आधारित उद्योगों को थर्स्ट सेक्टपर में शामिल किया गया है और इन्हें रिप्स 2024 के लाभ भी दिए जा रहे हैं।  

बजरी के सस्ते विकल्प को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान एम-सेण्ड नीति-2024

श्री पटेल ने बताया कि केबिनेट द्वारा स्वीकृत नई एम-सेण्ड नीति में प्रदेश में एम-सेण्ड इकाइयों की स्थापना और बजरी के सस्ते विकल्प के रुप में एम-सेण्ड के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। एम-सेण्ड इकाई की स्थापना के लिए 3 साल के अनुभव, 3 करोड़ रुपए की नेटवर्थ व 3 करोड़ रुपए के टर्नओवर की बाध्यता समाप्त की गई है। ओवरबर्डन पर देय रॉयल्टी को कम कर आधा किया गया है, वहीं नीलामी के समय एम-सेण्ड यूनिट के लिए दो प्लाट रखने के स्थान पर 5 प्लाट आरक्षित कर आवंटित किया जाएगा। इसी तरह से कीननेस मनी को भी दो लाख से कम कर एक लाख किया गया है। उन्होंने बताया कि ओवरबर्डन पर देय डीएमएफटी की राशि में छूट, सरकारी और सरकार से वित्त पोषित निर्माण कार्यों में बजरी की मांग की आपूर्ति में 25 प्रतिशत एम-सेण्ड के उपयोग की अनिवार्यता तय की गई है। एम-सेण्ड को बढ़ावा देने के लिए इन इकाइयों को राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना-2024 के परिलाभ भी दिए जाएंगे।  

7वें राज्य वित्त आयोग का गठन—

उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने बताया कि पंचायती राज संस्थाओं एवं नगरपालिकाओं के लिये 7वें राज्य वित्त आयोग के गठन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इस आयोग की अवार्ड अवधि 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2030 तक होगी। डॉ. बैरवा ने बताया कि जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में वरिष्ठ प्रयोगशाला सहायक के पद पर सीधी भर्ती हेतु वांछित अनुभव सम्बन्धी योग्यता के प्रावधान को विलोपित करने की मंजूरी दी गई है। अब तक वरिष्ठ प्रयोगशाला सहायक पद पर भर्ती में प्रयोगशाला कार्य मंे अथवा वाटर एवं सीवरेज एनालिसिस कार्य में अनुभव रखने वालों को वरीयता दिए जाने का प्रावधान था। इस प्रावधान को हटाने के निर्णय से वरिष्ठ प्रयोगशाला सहायक पद पर भर्ती शीघ प्रारम्भ हो सकेगी। इसके साथ ही, अब वरिष्ठ प्रयोगशाला सहायक के 25 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से एवं 75 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाएंगे। अब तक सीधी भर्ती और पदोन्नति के पदों का अनुपात 50-50 प्रतिशत था।  

आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी भर्ती अब आरपीएससी से

डॉ. बैरवा ने बताया कि नियमों में समरूपता लाने के उद्देश्य से आयुष विभाग में आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी के पदों पर अब आरपीएससी के माध्यम से भर्ती परीक्षा आयोजित कर चयन किया जाएगा। इस सम्बन्ध में सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी दी गई है। अब तक आयुष विभाग में इन पदों पर भर्ती शैक्षणिक योग्यता के प्राप्तांकों व बोनस के आधार पर होती रही है। डॉ. बैरवा ने बताया कि आरएसी और एमबीसी कांस्टेबल पद पर भर्ती के लिए शैक्षणिक योग्यता में बदलाव करते हुए इसे सीनियर सैकेण्डरी किया जाएगा। इसे देखते हुए राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा नियम, 1989 के संगत नियमों में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इससे समान पात्रता परीक्षा के अंतर्गत राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा के कांस्टेबल पद के साथ ही आरएसी और एमबीसी कांस्टेबल भर्ती भी की जा सकेगी। डॉ. बैरवा ने बताया कि राजस्थान भू-जल सेवा नियम, 1969 एवं राजस्थान भू-जल अधीनस्थभ सेवा नियम, 1973 में विभागीय पदोन्नति समिति के सदस्यों में उप सचिव कृषि विभाग के स्थानन पर उप सचिव, भूजल विभाग को सम्मिलित करने के संशोधन को मंजूरी दी गई है। पूर्व में भूजल विभाग का प्रशासनिक विभाग, कृषि विभाग था लेकिन वर्तमान में यह एक अलग विभाग है। इसे देखते हुए यह संशोधन आवश्यक था।

संविदा सेवा नियमों में संशोधन—

डॉ. बैरवा ने बताया कि राजस्थान कॉन्ट्रेक्चुअल अपॉइन्टमेंट टू सिविल पोस्ट्स रूल्स-2022 के अंतर्गत नियुक्त कार्मिकों को भी अब राज्य कर्मचारियों की भांति ही दो तारीखों 1 जुलाई अथवा 1 जनवरी को वार्षिक पारिश्रमिक वृद्धि का लाभ मिल सकेगा। इस सम्बन्ध में की गई बजट घोषणा को पूरा करते हुए राजस्थान कॉन्ट्रेक्चुअल अपॉइन्टमेंट टू सिविल पोस्ट्स रूल्स-2022 में संशोधन का अनुमोदन किया गया है। इस संशोधन से इन नियमों के अन्तर्गत नियुक्त कार्मिकों को प्रथम वार्षिक पारिश्रमिक वृद्धि एक वर्ष से पहले ही प्राप्त हो सकेगी तथा सभी संविदा कार्मिकों की आगामी वार्षिक पारिश्रमिक वृद्धि की दिनांक नियुक्त अवधि के अनुसार एक समान हो जायेगी। डॉ. बैरवा ने बताया कि राजस्थान शिक्षा (राज्य एवं अधीनस्थ) सेवा नियम-2021 के प्रावधानों में संशोधन कर पूर्व प्राथमिक शिक्षा अध्यापक (एनटीटी) के पदों का इसमें ग्रुप ईः प्री प्राइमरी विंग जोड़कर संवर्गीकरण किया जाएगा। इस कैडर का प्रारम्भिक पद पूर्व प्राथमिक शिक्षा अध्यापक रखा गया है। ये सभी पद 100 प्रतिशत सीधी भर्ती से भरे जाने का प्रावधान किया गया है। पूर्व प्राथमिक शिक्षा अध्यापकों की पदोन्नति 5 वर्ष के अनुभव के बाद पूर्व प्राथमिक शिक्षा अध्यापक ग्रेड-2 पर, पूर्व प्राथमिक शिक्षा अध्यापक ग्रेड-2 की पदोन्नति 5 वर्ष के अनुभव के बाद पूर्व प्राथमिक शिक्षा अध्यापक ग्रेड-1 एवं पूर्व प्राथमिक शिक्षा अध्यापक ग्रेड-1 की पदोन्नति 5 वर्ष के अनुभव के बाद पूर्व प्राथमिक वरिष्ठ अध्यापक के पद पर हो सकेगी।

लैंड कन्वर्जन रूल्स-2007 में संशोधन—

श्री जोगाराम पटेल ने बताया कि वर्तमान में एससी-एसटी वर्ग के व्यक्तियों को राजस्थान भू-राजस्व (ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि का अकृषि प्रयोजनार्थ संपरिवर्तन) नियम-2007 के नियम 6 (बी) का लाभ नहीं मिल पाता है। काश्तकारी अधिनियम 1955 की धारा 42 बी के प्रावधानों के कारण अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के किसान अपनी कृषि भूमि को अक्षय ऊर्जा परियोजना विकासकर्ता को लीज पर नहीं दे सकते हैं। इसे देखते हुए मंत्रिमंडल ने राजस्थान भू-राजस्व (ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि का अकृषि प्रयोजनार्थ संपरिवर्तन) नियम, 2007 में संशोधन को मंजूरी दी है। उन्होंने बताया कि इस संशोधन के बाद एससी-एसटी वर्ग के काश्तकारों की कृषि भूमि का सोलर फार्म, सोलर प्लान्ट, सोलर पावर प्लान्ट, विंड फार्म, विंड पावर प्लान्ट के लिए कन्वर्जन करवाये जाने पर जोत तक रिकॉर्डेड पहुंच मार्ग होने की अनिवार्यता की बजाय ऐसे काश्तकार की पहुंच मार्ग होने बाबत स्वघोषणा ही पर्याप्त होगी। इसी तरह, देय कन्वर्जन शुल्क में छूट का प्रावधान भी किया जाएगा।

जैसलमेर जिले में सीमा पर सड़क के लिए भूमि आवंटन—

श्री पटेल ने बताया कि जैसलमेर जिले में भारत-पाक सीमा पर लेटरल सड़क के निर्माण के लिए केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग को 282.15 हैक्टेयर राजकीय भूमि आवंटन करने के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी प्रदान की गई। यह भूमि सम तहसील में स्थित 23 सीमावर्ती राजस्व ग्रामों में आवंटित की जाएगी। इस लेटरल सड़क का निर्माण भारत-पाक बॉर्डर की निगरानी में विशेष सामरिक महत्व को देखते हुए किया जाएगा। श्री पटेल ने बताया कि किशनगढ़ (अजमेर) में कर्मचारी राज्य बीमा निगम का सौ बेड वाला अस्पताल खोलने हेतु निशुल्क भूमि आवंटन की स्वीकृति भी कैबिनेट बैठक में दी गई। ईएसआईसी अस्पताल के लिए राजस्व ग्राम किशनगढ़ बी में 20 हजार 3 सौ वर्गमीटर भूमि आवंटित की जाएगी।

मेट्रो परियोजनाओं के लिए जेवी अब केन्द्र और राज्य सरकार के बीच

श्री पटेल ने बताया कि मेट्रो रेल के विकास में तेजी लाने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार के साथ 50-50 संयुक्त उद्यम कम्पनी अब केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सुझाव पर राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के मध्य स्थापित की जाएगी। राज्य मंत्रिमंडल द्वारा पूर्व में केन्द्र सरकार और वर्तमान जेएमआरसी के बीच संयुक्त उद्यम कम्पनी बनाने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया था। कैबिनेट के अनुमोदन के पश्चात अब केन्द्र सरकार को पुनः विस्तृत प्रस्ताव भिजवाया जाएगा और जेवी कम्पनी को मूर्त रूप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश की निर्माणाधीन एवं भविष्य की सभी मेट्रो रेल परियोजनाओं को इस जेवी के माध्यम से लागू किया जाएगा। राज्य की वर्तमान और भविष्य की सभी मेट्रो रेल परियोजनाओं का निर्माण, संचालन और रखरखाव का अधिकार नई जेवी कंपनी के पास होगा।

C M NEWS: भ्रष्टाचार में लिप्त कार्मिकों को नहीं बख्शा जाए —मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार शहरी बुनियादी ढ़ांचे को विश्व स्तरीय बनाने एवं जनसुविधाओं को सशक्त, समावेशी बनाने की प्राथमिकता के साथ काम कर रही है। नागरिकों को दी जा रही सेवाओं के स्तर को बेहतर बनाया जाए और नगरीय विकास के लिए नवीनतम तकनीकों का प्रयोग किया जाए ताकि शहरी विकास के नए आयाम स्थापित हो सके। मुख्यमंत्री शर्मा शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित नगरीय विकास विभाग की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने बजट में विभागीय घोषणाओं की समीक्षा कर उनकी कार्यप्रगति की जानकारी ली तथा उन्हें शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन की अधिक जरूरत वाले स्थानों पर संसाधनों का पहले प्रयोग किया जाए ताकि जनता को शीघ्र राहत मिल सके। श्री शर्मा ने कहा कि बढ़ती आबादी के चलते जयपुर में यातायात भार लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में क्षेत्र का बेहतर ट्रेफिक प्रबंधन बेहद जरूरी है। उन्होंने ट्रेफिक जाम से निजात दिलाने के लिए अधिकारियों को प्रभावी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने जयपुर कलेक्ट्रेट सर्किल एवं गांधीनगर मोड़ पर बढ़ रहे यातायात भार के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ट्रेफिक डाइवर्जन के लिए वैकल्पिक मार्गों का भी विकास किया जाए। मुख्यमंत्री ने रिद्धी-सिद्धी फ्लाईओवर, इमली फाटक फ्लाईओवर, सांगानेर फ्लाईओवर से चौरड़िया पेट्रोल पम्प तक एलिवेटेड रोड़, सिविल लाइन्स आरओबी, रामबाग गोल्फ क्लब पार्किंग की प्रगति की जानकारी ली तथा इन कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने द्रव्यवती नदी का सौन्दर्यकरण, आई.पी.डी. टावर के निर्माण, जयपुर मेट्रो के विस्तार, रिंग रोड़ के निर्माण, आरओबी, आरयूबी, सेक्टर रोड़, ऐलिवेटेड रोड़ सहित विभिन्न विकास कार्यों की भी समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड का मुख्य काम आमजन को किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में मण्डल अपनी आवासीय योजनाओं की गति में तेजी लाए। साथ ही, मण्डल की सभी सम्पत्तियों का विवरण ऑनलाइन हो ताकि लोगों को इनकी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि नई आवासीय योजनाओं में गुणवत्ता का ध्यान रखा जाए, साथ ही ऑनलाइन आवेदन तथा ई-नीलामी की प्रक्रिया को अधिक प्रभावशाली बनाया जाए। श्री शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जयपुर विकास प्राधिकरण, राजस्थान आवासन मण्डल, मुख्य नगर नियोजक सहित नगरीय विकास विभाग के रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की जाए। नगरीय विकास विभाग द्वारा जल्द से जल्द अपने अभियान्त्रिकी संवर्ग के सेवा नियम बनाए जाएं जिससे राजस्थान लोक सेवा आयोग के माध्यम से शीघ्र नवीन पदों पर भर्ती की जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन विभागों में लम्बे समय से एक स्थान पर कार्यरत कार्मिकों को बदला जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार की मंशा है कि भ्रष्टाचार में लिप्त कार्मिकों को नहीं बख्शा जाए और ईमानदार कार्मिक को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग में कार्मिकों से संबंधित सभी लम्बित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण करे। बैठक में शहरी परिदृश्य एवं नगरीय निकायों की स्थिति, विभागीय महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट, नवाचारों, मास्टर प्लान एवं जोनल डवलपमेंट प्लान की स्थिति सहित विभिन्न विभागीय बिन्दुओं पर चर्चा की गई।

RAJASTHAN NEWS: प्रदेश में चलेगी 300 इलेक्ट्रिक बसें, यात्रियों का सफर होगा आरामदायक

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राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम संचालक मंडल की 309वीं आमसभा गुरुवार को निगम मुख्यालय पर आयोजित की गई। निगम अध्यक्ष श्रीमती शुभ्रा सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुई बैठक में आगामी 2 वर्षों में निगम बेड़े में नई बसें शामिल करने की कार्य योजना पर मोहर लगाई गई। वहीं निगम में प्रस्तावित विभिन्न भर्तियों के लिए निर्धारित पात्रता में संशोधन कर कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई। श्रीमती सिंह ने बताया कि संचालक मंडल की सभा में निगम के बस बेड़े में आगामी 2 वर्षों में 500 डीजल और 300 इलेक्ट्रिक बसें सर्विस मॉडल पर लिए जाने संबंधी प्रस्ताव की कार्य योजना बनाए जाने पर सहमति दी गई। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस कार्य योजना पर काम शुरू किया जाएगा ताकि यात्रियों को राहत पहुंचाई जा सके और उनके सफर को आरामदायक बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की कार्य योजना को भी मूर्त रूप दिए जाने पर तेजी से काम किया जा रहा है। निगम अध्यक्ष बताया कि ने युवाओं के सपनों को पूरा करने के लिए शीघ्र ही विभिन्न पदों पर भर्तियां भी की जाएंगी। उन्होने कहा कि निगम के भर्ती और पदोन्नति शेड्यूल में कनिष्ठ सहायक, कनिष्ठ विधि अधिकारी, कनिष्ठ अभियंता बी, चालक, कनिष्ठ लेखाकार, कनिष्ठ अभियंता (सिविल) और आर्टिजन ग्रेड 3 की निर्धारित पात्रता में भी संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इसके अंतर्गत आर्टिजन ग्रेड 3 पद पर सीधी भर्ती के लिए वर्तमान पात्रता में से निगम के कार्यशाला में अप्रेंटिसशिप करने वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दिए जाने संबंधी प्रावधान को हटाए जाने का अनुमोदन किया गया। साथ ही निगम में की जाने वाली सीधी भर्ती के पदों में से जो पद राज्य सरकार के विभागों में विद्यमान है उन पदों का पाठ्यक्रम राज्य सरकार के समकक्ष और शेष पदों का पाठ्यक्रम निगम द्वारा की गई पिछली भर्ती के पाठ्यक्रम के अनुरूप रखे जाने के निर्देश दिए गए। साथ ही सीधी भर्ती के पदों पर देय आरक्षण संबंधी प्रस्ताव का भी अनुमोदन किया गया।

Discoms News: हिंडौन सहित बयाना, भुसावर और वैर क्षेत्र में अब नहीं होगी बिजली ट्रिपिंग

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डिस्कॉम्स चेयरमैन सुश्री आरती डोगरा ने शुक्रवार को विद्युत भवन में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से अजमेर और जोधपुर वितरण निगम के प्रबंध निदेशकों के साथ रबी के पीक सीजन में अधिक ट्रांसमिशन लोड वाले क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति के एक्शन प्लान को लेकर समीक्षा की। डिस्कॉम्स चेयरमैन ने इस दौरान प्रसारण निगम के प्रबंध निदेशक नथमल डिडेल के साथ जैसलमेर, बाडमेर एवं फलौदी के सीमावर्ती क्षेत्र तथा उदयपुर, भरतपुर, हिंडौन एवं डीग में प्रसारण क्षमता सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जीएसएस निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करने पर भी चर्चा की। उन्होंने सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि आपसी समन्वय से निर्बाध विद्युत आपूर्ति को बनाए रखा जाए और जीएसएस निर्माण कार्यों की गति बढ़ाई जाए। डिस्कॉम्स चेयरमैन ने इस दौरान वितरण निगमों के अधीक्षण अभियंताओं को भी नियमित सप्लाई मेंटेन रखने के निर्देश दिए। इस दौरान प्रसारण निगम द्वारा बताया गया कि हिंडौन में ओवरलोड सिस्टम की समस्या से निजात पाने के लिए 500 एमवीए क्षमता का ट्रांसफार्मर 5 दिसम्बर तक प्राप्त हो जाएगा। करीब तीन सप्ताह में इसके चार्ज होने के बाद दिसम्बर माह के अंत तक वहां प्रसारण लाइनों के ओवरलोड होने से निजात मिलेगी। इसके साथ ही छोंकरवाडा-भुसावर 132 केवी जीएसएस लाइन के सुदृढ़ होने का काम भी अंतिम चरण में है। जिससे दिसम्बर माह के अंत तक बयाना, हिंडौन, भुसावर, वैर क्षेत्र में आपूर्ति को बेहतर किया जा सकेगा।

Co-operation News: सहकारिता मंत्री की समीक्षा का 243 अधिकारियों में से केवल 67 पर असर

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सहकारिता राज्य मंत्री गौतम कुमार दक द्वारा माह अक्टूबर में की गई सहकारी अधिनियम की धारा-55 और 57 के तहत समीक्षा के दौरान लम्बे समय से पेंडिंग चल रही जांचों को निर्धारित समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिये थे। लेकिन विभाग में मंत्री की समीक्षा असर नहीं के बराबर हुआ है। यह जानकारी शुक्रवार को रजिस्ट्रार, सहकारिता श्रीमती मंजू राजपाल द्वारा सहकार भवन स्थित कमेटी रूम से रिव्यू करने के बाद सामने आई है। रजिस्ट्रार के अनुसार अक्टूबर माह में धारा-55 के 242 प्रकरण लंबित थे, जिनमें से केवल 67 प्रकरणों में जांच पूरी कर जांच परिणाम जारी किये हैं। इसी प्रकार धारा-57(1) के 318 प्रकरणों में से अब तक 91 प्रकरणों में जांच पूरी की गई है वहीं धारा-57(2) के 232 प्रकरणों में से मात्र 89 प्रकरणों में सरचार्ज निर्धारित किया गया है। ये बात अलग है कि सहकारिता रजिस्ट्रार ने एक माह की अवधि में जिन अधिकारियों ने कोई जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है या जांच परिणाम जारी नहीं हुए हैं उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिये हैं। लेकिन इससे यह स्पष्ट होता है कि विभाग में राज्य मंत्री की कार्यशैली को कितना वजन दिया जाता है। अब देखना यह है कि जनहित में मंत्री महोदय क्या एक्शन लेते हैं।

C M NEWS: समिट में अतिथियों को दिखेगी प्रदेश की अद्भुत संस्कृति की झलक —मुख्यमंत्री

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प्रदेश में आगामी 9 से 11 दिसम्बर को आयोजित होने वाले राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के सफल आयोजन के लिए राज्य सरकार कोई कसर नहीं छोड रही है। इस कड़ी में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरूवार को समिट की तैयारियों का जायजा लेने के लिए बस में बैठकर जयपुर शहर का दौरा किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जयपुर एयरपोर्ट से आयोजन स्थल जयपुर एक्जीबिशन एंड कन्वेन्शन सेंटर (जेईसीसी) तक विभिन्न तैयारियों का अवलोकन किया और अधिकारियों को समिट के ऐतिहासिक आयोजन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। श्री शर्मा ने इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार अपने पहले वर्ष में ही राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन करने जा रही है। राजस्थान में निवेश की अपार संभावनाएं हैं और यह आयोजन राज्य की औद्योगिक दिशा को गति देने में मील का पत्थर साबित होगा। यह समिट राजस्थान को खनन, स्टोन, शिक्षा, चिकित्सा, ऑटोमोबाइल सहित विभिन्न क्षेत्रों में आगे लाने में महती भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि समिट के उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री आएंगे। ऐसे में राज्य सरकार तैयारियों एवं व्यवस्थाओं को पूरा करने में मिशन मोड में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि दुनिया में राजस्थान की अपनी एक पहचान है और प्रवासी राजस्थानियों की खासियत है कि वह अपनी मिट्टी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान अपनी मेहमान नवाजी के लिए प्रसिद्ध है तथा इस समिट में राज्य के आतिथ्य, संस्कृति, परम्पराओं की अद्भुत झलक देखने को मिलेगी। मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थल जेईसीसी पहुंचकर उद्घाटन सत्र के दौरान आयोजित होने वाली गतिविधियों, अतिथियों की बैठक व्यवस्था और अन्य तैयारियों के विषय में जानकारी लेते हुए अधिकारियों को तैयारियों को अन्तिम रूप देने के निर्देश दिए। इसके बाद मुख्यमंत्री समिट के दौरान होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं का अवलोकन करने के लिए जयमहल पैलेस भी पहुंचे।