राज्य सरकार आमजन को संवेदनशील, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अभियोजन स्वीकृति, 17-ए, अनिवार्य सेवानिवृत्ति और विभागीय जांच के 24 प्रकरणों का निस्तारण करते हुए दोषी कार्मिकों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की है।
श्री शर्मा ने लोक सेवकों द्वारा पद और शक्तियों का दुरूपयोग कर अनैतिक लाभ प्राप्त करने के दो प्रकरणों में एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी व उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के विरूद्ध धारा-19 भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 के तहत अभियोजन स्वीकृति जारी की है। इसी प्रकार सार्वजनिक निर्माण विभाग के 03 अधिकारियों द्वारा संवेदक के साथ मिली-भगत कर सड़क निर्माण कार्य में अवैध लाभ पहुंचाने के आरोप में धारा 13 (1) (डी) और धारा 13 (2) के अंतर्गत अभियोजन स्वीकृति जारी की गई है। कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर राजकीय भूमि की निजी व्यक्ति के पक्ष में खातेदारी प्रदान करने की गंभीर शिकायत पर राजस्थान प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी के विरूद्ध धारा 17-ए के तहत विस्तृत जांच के लिए पूर्वानुमोदन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने राजस्थान सिविल सेवाएं (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1958, के तहत संचालित वृहद शास्ति के प्रकरणों में 04 अधिकारियों द्वारा की गई नियम विरूद्ध कार्यवाही करने पर वार्षिक वेतन वृद्धि रोककर दण्डित किया है। सेवानिवृत्त अधिकारियों के विरूद्ध संचालित 05 जांच प्रकरणों में पेंशन रोके जाने की शास्ति लगाई गई है, जिसमें दो सेवानिवृत्त अधिकारियों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने से राज्य सरकार को कारित भारी आर्थिक हानि एवं अवैध गतिविधियों में संलिप्त होने के दृष्टिगत शत-प्रतिशत पेंशन रोके जाने का आदेश दिया गया है। वहीं, सेवानिवृत्त अधिकारियों के विरूद्ध 04 प्रकरणों में प्रमाणित आरोपों के जांच निष्कर्ष का अनुमोदन करते हुए प्रस्ताव माननीय राज्यपाल महोदय को प्रेषित किए गए हैं।
सीसीए नियम-16 में विभिन्न आरोपित अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत पुनरावलोकन याचिकाओं में से 04 याचिकाएं खारिज की गई हैं और अनिवार्य सेवानिवृत्ति के एक प्रकरण में अपील को अस्वीकार करते हुए पूर्व निर्णय को यथावत रखा गया है। C M NEWS: मुख्यमंत्री ने 5 भ्रष्ट और अनुशासनहीन सेवानिवृ लोक सेवकों की पेंशन रोकी
राज्य सरकार आमजन को संवेदनशील, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अभियोजन स्वीकृति, 17-ए, अनिवार्य सेवानिवृत्ति और विभागीय जांच के 24 प्रकरणों का निस्तारण करते हुए दोषी कार्मिकों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की है।
श्री शर्मा ने लोक सेवकों द्वारा पद और शक्तियों का दुरूपयोग कर अनैतिक लाभ प्राप्त करने के दो प्रकरणों में एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी व उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के विरूद्ध धारा-19 भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 के तहत अभियोजन स्वीकृति जारी की है। इसी प्रकार सार्वजनिक निर्माण विभाग के 03 अधिकारियों द्वारा संवेदक के साथ मिली-भगत कर सड़क निर्माण कार्य में अवैध लाभ पहुंचाने के आरोप में धारा 13 (1) (डी) और धारा 13 (2) के अंतर्गत अभियोजन स्वीकृति जारी की गई है। कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर राजकीय भूमि की निजी व्यक्ति के पक्ष में खातेदारी प्रदान करने की गंभीर शिकायत पर राजस्थान प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी के विरूद्ध धारा 17-ए के तहत विस्तृत जांच के लिए पूर्वानुमोदन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने राजस्थान सिविल सेवाएं (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1958, के तहत संचालित वृहद शास्ति के प्रकरणों में 04 अधिकारियों द्वारा की गई नियम विरूद्ध कार्यवाही करने पर वार्षिक वेतन वृद्धि रोककर दण्डित किया है। सेवानिवृत्त अधिकारियों के विरूद्ध संचालित 05 जांच प्रकरणों में पेंशन रोके जाने की शास्ति लगाई गई है, जिसमें दो सेवानिवृत्त अधिकारियों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने से राज्य सरकार को कारित भारी आर्थिक हानि एवं अवैध गतिविधियों में संलिप्त होने के दृष्टिगत शत-प्रतिशत पेंशन रोके जाने का आदेश दिया गया है। वहीं, सेवानिवृत्त अधिकारियों के विरूद्ध 04 प्रकरणों में प्रमाणित आरोपों के जांच निष्कर्ष का अनुमोदन करते हुए प्रस्ताव माननीय राज्यपाल महोदय को प्रेषित किए गए हैं।
सीसीए नियम-16 में विभिन्न आरोपित अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत पुनरावलोकन याचिकाओं में से 04 याचिकाएं खारिज की गई हैं और अनिवार्य सेवानिवृत्ति के एक प्रकरण में अपील को अस्वीकार करते हुए पूर्व निर्णय को यथावत रखा गया है। Rajasthan News: कैबिनेट का निर्णय —प्रदेश में क्षेत्र विशेष को घोषित किया जायेगा अशांत क्षेत्र —संसदीय कार्य मंत्री
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मुस्लिम तेली घाणी महापंचायत के सामूहिक विवाह सम्मेलन में 17 जोड़े बने हमसफर
समता आन्दोलन समिति के ओबीसी (OBC) प्रकोष्ठ के प्रान्तीय महासचिव कमरूदृीन ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि इस सम्मेलन में केवल जयपुर ही नहीं, बल्कि संपूर्ण राजस्थान राज्य से परिवार अपने बच्चों के विवाह के लिए पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह आज के समय की मांग है, जिससे न केवल आर्थिक बचत होती है, बल्कि समाज में एकजुटता और भाईचारा भी बढ़ता है।
जनाब कमरूदृीन ने बताया कि सम्मेलन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए समाज के युवाओं ने बढ़-चढ़कर स्वयंसेवक के रूप में भूमिका निभाई। कार्यक्रम में कई गणमान्य नागरिक, समाज सुधारक और जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए, जिन्होंने संस्था के इस प्रयास की सराहना की। उपस्थित वक्ताओं ने जोर दिया कि ऐसे आयोजनों से समाज के गरीब तबके को संबल मिलता है और शादियों में होने वाले भारी खर्च पर लगाम लगती है। मुस्लिम तेली घाणी महापंचायत संस्था के अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ सदस्यों ने इस अवसर पर समाज को शिक्षित और संगठित करने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के सामूहिक विवाह सम्मेलनों का आयोजन निरंतर जारी रहेगा ताकि समाज का हर व्यक्ति सम्मान के साथ अपने बच्चों का विवाह संपन्न करा सके।
शाम को विदाई के वक्त माहौल भावुक हो गया। सभी 17 जोड़ों को समाज के बुजुर्गों और उपस्थित जनसमूह ने दुआओं के साथ विदा किया। यह आयोजन जयपुर में मुस्लिम समाज के लिए एकता और सामाजिक सुधार की एक मिसाल बनकर उभरा है। 


