मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों को बजटीय घोषणाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी समर्पण-निष्ठा के साथ राज्य सरकार की घोषणाओं एवं लक्ष्यों को तय समय में पूरा करें।
श्री शर्मा बुधवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में परिवर्तित बजट वर्ष 2024-25 की घोषणाओं की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गुड गवर्नेंस का मॉडल स्थापित करके आमजन की सेवा करना राज्य सरकार का प्रमुख ध्येय है। बजटीय घोषणाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर कार्यवाही लंबित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि घोषणाओं के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक बाधाओं को चिन्हित कर उनका त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
Chief Minister
मुख्यमंत्री ने सरिस्का, रणथम्भौर एवं चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य, कोटा का ईको सेंसेटिव जोन के रूप में चिन्हिकरण कर मास्टर प्लान बनाने, मेडिकल कॉलेजेज में हिन्दी माध्यम से शिक्षा प्रदान करने, ऊर्जा उत्पादन के लिए निजी क्षेत्र को अधिक प्रोत्साहन देते हुए कैप्टिव पावर उत्पादन की सीमा को 200 प्रतिशत करने, स्टेट कैरिज वाहनों के लिए उप नगरीय श्रेणी के 40 नए मार्ग बनाने आदि बजट घोषणाओं की समीक्षा कर उचित दिशा-निर्देश प्रदान किए। उन्होंने नगरीय विकास विभाग को जयपुर मैट्रो का विस्तार के लिए ज्वॉइंट वेंचर कंपनी पर शीघ्र कार्य करने के निर्देश दिए।
वहीं मुख्यमंत्री ने जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग को प्रदेश में खुले बोरवेल रखने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं के विरूद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खुले बोरवेल से जनहानि का खतरा रहता है। ऐसी कई घटनाएं प्रदेश के कई अंचलों में हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं की प्रभावी रोकथाम के लिए विभागीय दल नियमित निरीक्षण करें और खुले बोरवेल रखने वालों पर सख्त कार्रवाई करें। विभागीय शासन सचिव समित शर्मा ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि खुले बोरवेल पर निगरानी एवं कार्रवाई करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जा रहा है।
श्री शर्मा ने वित्त विभाग को स्मार्ट सिस्टम के अंतर्गत ऑटोमेटेड सर्विस डिलिवरी सुविधा शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस सिस्टम के माध्यम से आमजन को 25 सेवाएं 24 घण्टों की सीमा में उपलब्ध करवायी जाएगी। उन्होंने सफाई कर्मचारियों के लिए आरजीएचएस के अंतर्गत लंग्स, किडनी एवं स्किन जैसी संबंधित बीमारियों से संबंधित निःशुल्क विशेष पैकेज शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए। श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में औद्योगिक निवेश का अनुकूल माहौल बनाने के लिए कार्य कर रही है। ऊर्जा भण्डारण नीति-2024 और नई पर्यटन नीति के साथ-साथ बजट में भी अन्य कई महत्वपूर्ण नीतियों की घोषणा की गई है। 9 से 11 दिसम्बर तक जयपुर में आयोजित होने जा रही ‘राइजिंग राजस्थान’ समिट के परिप्रेक्ष्य में इन नीतियों को शीघ्र ही अंतिम रूप प्रदान किया जाए।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि केन्द्र सरकार की विशेष वित्तीय सहायता योजना से होने वाले कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए, ताकि प्रदेश में बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए इस योजना का अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके।
श्री शर्मा बुधवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में केन्द्र सरकार की पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना के संबंध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि योजना के तहत प्राप्त होने वाली निधि का उपयोग 31 मार्च, 2025 तक ही किया जा सकता है। ऐसे में समय-सीमा का ध्यान रखते हुए इस राशि का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस योजना के अंतर्गत पीएचईडी, जल संसाधन विभाग की परियोजनाओं, पुलिस कार्मिकों के लिए आवास और यूनिटी मॉल के निर्माण के लिए पहली किस्त के रूप में प्राप्त राशि का शीघ्र उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि दूसरी किस्त जल्द से जल्द जारी हो सके। उन्होंने आइकॉनिक टूरिस्ट सेंटर के चिन्हीकरण, पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग, औद्योगिक विकास के लिए अपेक्षित नीतिगत सुधारों सहित अन्य बिंदुओं पर समीक्षा की। साथ ही, राज्य के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में भू-सुधार, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से संबंधित बिंदुओं के लिए निर्धारित माइलस्टोन की पूर्ति करते हुए रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में वृद्धजनों को सुगमतापूर्वक विशेष स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्थापित किए गए रामाश्रय वार्ड (जेरियाट्रिक वार्ड एवं जेरियाट्रिक क्लीनिक) जनसेवा का एक सार्थक माध्यम बनकर उभरे हैं। यहां बुजुर्गों को सम्मान के साथ बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवायी जा रही हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गत 14 मार्च से प्रारम्भ हुई इस संवेदनशील पहल से अब तक करीब 6 लाख बुजुर्ग लाभान्वित हो चुके हैं।
‘Ramashraya’
विभाग के अनुसार बुजुर्गों को उपचार के लिए चक्कर नहीं काटना पड़े, कतारों में खड़ा नहीं होना पड़े और एक ही स्थान पर जांच एवं उपचार सेवाओं का लाभ मिल सके, इस मानवीय सोच के साथ रामाश्रय वार्डों की स्थापना की गई है। अब तक 5 लाख 14 हजार से अधिक बुजुर्गों ने रामाश्रय वार्ड की ओपीडी में विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं के लिए परामर्श लिया है। इसी प्रकार रामाश्रय आईपीडी में 32 हजार से अधिक वृद्धजनों को भर्ती कर उपचार उपलब्ध करवाया गया है। अब तक 3 लाख 14 हजार से अधिक लैब टैस्ट किए गए हैं एवं 8 हजार 320 बुजुर्गों को फिजियोथैरेपी सेवाएं प्रदान की गयी हैं। गंभीर स्थिति में उच्च स्तरीय उपचार के लिए 1 हजार 706 रोगियों को यहां रैफर किया गया है।
रामाश्रय वार्डों में 10 फाउलर बैड आरक्षित किए गए हैं। इनमें से 5 बैड महिला एवं 5 बैड पुरूषों के लिए हैं। हर बैड के बीच पार्टीशन कर पर्दे लगाए गए हैं। बैड के पास नर्सिंग अलार्म सिस्टम लगाए गए हैं ताकि आपात स्थिति में वृद्धजन तुरंत नर्सिंग स्टाफ को बुला सकें। वार्ड में महिला एवं पुरूष रोगियों के लिए अलग-अलग शौचालय हैं। इन शौचालयों में ग्रेब-बार लगाए गए हैं। वार्ड में फिजियोथेरेपिस्ट एवं फिजियाथैरेपी से संबंधित उपकरणों की समुचित व्यवस्था की गई है। इनमें शॉर्ट वेव डायाथर्मी, अल्ट्रासाउण्ड थैरेपी, सरवाइकल ट्रेक्शन, पैल्विक ट्रेक्शन, ट्रांस इलेक्ट्रिक नर्व स्टिमुलेटर जैसे उपकरण शामिल कर वार्ड में व्हील चेयर, ट्रोली, मेडिसिन कैबिनेट एवं अन्य आवश्यक फर्नीचर उपलब्ध करवाया गया है।
प्रदेश में बुजुर्ग अब साल में चार बार नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच करवा सकेंगे। यह सुविधा बुजुर्गों के लिए सभी जिला अस्पतालों, उप जिला अस्पतालों से लेकर सीएचसी स्तर तक उपलब्ध होगी। साथ ही एक एडवाइजरी जारी कर सभी जिला अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में बुजुर्गों को पार्किंग सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध करवाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
प्रमुख शासन सचिव राजस्व दिनेश कुमार और प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी वैभव गालरिया की अध्यक्षता में मंगलवार को पंत कृषि भवन में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनान्तर्गत फसल कटाई प्रयोगो के ऑन-लाईन गुणवत्ता पूर्ण सम्पादन के लिए वी.सी. के माध्यम से समस्त जिला कलक्टरों के साथ बैठक का आयोजन किया गया।
श्री कुमार ने कहा कि फसल कटाई प्रयोगों का सम्पादन निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार ही किया जाये, जिससे बीमा कम्पनियों द्वारा आपत्तियां न की जाये। बीमा कम्पनी प्रतिनिधियों एवं जिले के अधिकारियों के साथ नियमित साप्ताहिक बैठक की जाये, जिससे फसल कटाई प्रयोगो के दौरान आने वाली आपत्तियों का निस्तारण किया जाये। अधिकारी कोशिश करें कि क्रॉप कटिंग में कम से कम आपत्तियां दर्ज हों, जिससे किसानों को फसल बीमा क्लेम समय पर मिल सके। क्रॉप सर्वे ज्यादा से ज्यादा डिजिटल करवाये जाये।
वहीं श्री गालरिया ने कहा कि फसल कटाई प्रयोग पूर्ण सावधानी से किये जायें, जिससे किसानों को क्लेम मिलने में परेशानियों का सामना न करना पड़े। फसल कटाई प्रयोगो की गोपनीयता बरकरार रखी जाये। सीसीई प्रक्रिया की पूर्ण वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी की जाये जिससे फसल के साथ की जाने वाली छेड़छाड़ का मालूम पड़ सके। थ्रेसिंग के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता न बरती जाये।
उन्होने ने कहा कि जिलों के अधिकारियों द्वारा फसल कटाई प्रयोग शत-प्रतिशत ऑन-लाईन करवाये जाये तथा इस दौरान बीमा कम्पनी प्रतिनिधि का सह-पर्यवेक्षक आवश्यक रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने निर्देशित किया कि फसल कटाई प्रयोगों के कार्यक्रम के बारे में बीमा कम्पनियों के प्रतिनिधियों को सूचित करें एवं कार्यक्रम में संशोधन की दशा में कम्पनी को लिखित में तुरन्त सूचित करें।
मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने बजट घोषणाओं में प्रदेश के किसानों को विदेश में होने वाली हाईटेक कृषि सिखाने के लिए विेदेश भ्रमण की घोषणा की थी। इसी घोषणा अनुरूप प्रदेश के 100 युवा प्रगतिशील कृषक नॉलेज एनहांसमेन्ट प्रोग्राम के तहत इजराइल सहित अन्य देशों में कृषि भ्रमण के लिए जायेंगे। भ्रमण के लिए कृषि एवं पशुपालन में विशेष उपलब्धि में पहचान बनाने वाले सम्मानित प्रगतिशील किसानों एवं पशुपालकों का चयन किया जायेगा।
आयुक्त उद्यानिकी जयसिंह के अनुसार चयन के लिए किसान स्वयं राज किसान साथी पोर्टल पर 10 सितम्बर तक आवेदन कर सकेंगे। कार्यक्रम के चयन की प्रक्रिया के लिए सभी जिलों के लिए गाईडलाईन जारी कर दी है।
उन्होंने बताया कि 50 साल से कम आयु वाले कृषक जो पंचायती राज संस्था, सहकारी संस्था, वाटर यूजर एसोसिशन, कृषि मंडी आदि में पिछले 10 वर्षों से किसी पद पर रहा हो या एफपीओ का सदस्य हो। कृषक का पासपोर्ट होना जरूरी है। किसान के नाम एक हैक्टेयर भूमि हो जिस पर वह पिछले 10 साल से खेती कर रहा हो। खेती में किसान द्वारा उच्च कृषि तकनीक संरक्षित खेती, सूक्ष्म सिंचाई, मल्चिंग, सौर ऊर्जा पम्प, ड्रोन फर्टिगेशन, ऑटोमेशन और फार्म पौण्ड आदि अपनाई जा रही हो। पशुपालन क्षेत्र से जुड़ा होने पर सम्बन्धित का हाईटेक तरीके से 10 साल से गाय, भैंस आदि से किसी भी डेयरी से जुड़ा हो। भ्रमण के दौरान किसान कम भूमि और कम पानी में बेहतर खेती और उन्नत तरीके से पशुपालन करना सीखेंगे।
सिक्किम के नवनियुक्त राज्यपाल ओमप्रकाश माथुर का मंगलवार को जयपुर के बिड़ला सभागार में नागरिक अभिनन्दन किया गया। राज्यपाल नियुक्त होने के बाद पहली बार जयपुर आए माथुर का विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा स्वागत और सम्मान किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस अवसर पर ओमप्रकाश माथुर ने राज्यपाल के पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद के अपने कार्यानुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का पद संवैधानिक पद होने के साथ ही जनता की सेवा करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम होता है। श्री माथुर ने कहा कि सैनिकों के साथ ही देश के नागरिक भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर राष्ट्र सेवा में योगदान दे सकते हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने उद्बोधन में श्री माथुर के साथ बिताए यादगार पलों की स्मृतियां साझा करते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सिक्किम के राज्यपाल के रूप में श्री माथुर अपने संवैधानिक दायित्वों का बखूबी निर्वहन करते हुए जनसेवा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान में निवेश की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। 9 से 11 दिसंबर को आयोजित हो रही ‘राइजिंग राजस्थान’ समिट प्रदेश में निवेश के नए द्वार खोलेगी। उन्होंने कहा कि समिट के माध्यम से निवेशकों को ना केवल प्रदेश की औद्योगिक विकास क्षमता से रूबरू होने का अवसर मिलेगा अपितु वे विकसित राजस्थान की यात्रा में मजबूत साझेदार बन सकेंगे।
श्री शर्मा मंगलवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में ‘राइजिंग राजस्थान’ समिट की तैयारियों के संबंध में आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने निर्देश दिए कि समिट में निवेश के लिए भाग लेने वाले प्रतिभागी देशों के अनुरूप सभी आवश्यक तैयारियां समय से पूरी कर ली जाए। रोड-शो एवं अन्य निवेश संबंधी गतिविधियों के संदर्भ में सामंजस्य स्थापित करने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त भी किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में औद्योगिक निवेश का बेहतर माहौल सुनिश्चित करने के लिए हर संभव पहल कर रही है और इसी क्रम में यह समिट प्रदेश के विकास के साथ रोजगार के भरपूर अवसर सृजित करेगी। इस इन्वेस्टमेंट समिट का उद्देश्य देशी-विदेशी कंपनियों, अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं और निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए आकर्षित करना है।
खेती–किसानी में कृषकों द्वारा बुआई, जुताई और बिजाई जैसे कठोर कार्य किये जाते हैं। इन्हीं कार्यो को सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन योजना के प्रावधानों के अन्तर्गत किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों पर अनुदान देकर लाभान्वित किया जायेगा, जिससे किसानों पर आर्थिक भार कम पडेगा और कृषि कार्य आसान हो जायेंगे साथ ही किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
agricultural equipment for farmers
कृषि आयुक्त कन्हैया लाल स्वामी ने बताया कि योजना के अन्तर्गत राज्य में लगभग 66 हजार किसानों को 200 करोड़ रूपये का अनुदान दिये जाने का प्रावधान रखा गया है। इसके लिए कृषक 13 सितम्बर तक ऑनलाईन आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि कृषि यंत्रों पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, लघु, सीमान्त एवं महिला किसानों को ट्रेक्टर की बीएचपी के आधार पर लागत का अधिकतम 50 प्रतिशत तक तथा अन्य श्रेणी के कृषकों को लागत का अधिकतम 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जायेगा। लघु एवं सीमान्त श्रेणी के किसानों को ऑन-लाईन आवेदन से पूर्व जन आधार में लघु एवं सीमान्त श्रेणी जुड़वाना आवश्यक है, आवेदन के दौरान उक्त प्रमाण पत्र संलग्न करना होगा।
कृषि आयुक्त ने बताया कि राज किसान साथी पोर्टल पर ई-मित्र के माध्यम से जनाधार कार्ड, जमाबंदी की नकल, कृषि यंत्र का कोटेशन आदि दस्तावेजों की सहायता से ऑन-लाईन आवेदन कर सकते हैं। किसानों को राज्य में प्रचलित ट्रैक्टर संचालित सभी प्रकार के कृषि यंत्र जैसे रोटावेटर, थ्रेसर, कल्टीवेटर, बंडफार्मर, रीपर, सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, डिस्क हेरो, प्लॉउ आदि यंत्रों पर अनुदान दिया जायेगा। किसान द्वारा कृषि यंत्रों को पंजीकृत फर्म से खरीदने तथा सत्यापन के बाद अनुदान उनके जनाधार से जुड़े बैंक खाते में हस्तान्तरित किया जायेगा।
एक किसान को एक प्रकार के कृषि यंत्र पर तीन वर्ष की कालावधि में केवल एक बार अनुदान दिया जायेगा। किसानों को वित्तीय वर्ष में एक ही कृषि यंत्र पर अनुदान दिया जायेगा। प्रशासनिक स्वीकृति जारी करने से पूर्व खरीदे गये पुराने कृषि यंत्रों पर अनुदान नही दिया जायेगा। एक जन आधार द्वारा एक ही आवेदन स्वीकार होगा कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए किसान के नाम भूमि और ट्रेक्टर चलित यंत्र पर अनुदान के लिए ट्रेक्टर का रजिस्ट्रेशन आवेदक किसान के नाम होना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री जी से प्रेरणा लेकर राज्य सरकार आस्था धामों के विकास और वरिष्ठ जनों को तीर्थ यात्रा करवाने जैसे कार्य कर रही है। इस वर्ष के प्रारंभ में लगभग 3 हजार तीर्थ यात्रियों को श्री राम लला के दर्शन हेतु अयोध्या की यात्रा करवाई जा चुकी है। वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के तहत इस साल 36 हजार तीर्थ यात्रियों में से 15 हजार तीर्थ यात्रियों को अयोध्या, 15 हजार तीर्थ यात्रियों को अन्य तीर्थ स्थलों की यात्रा करवाई जाएगी, जिनमें रेल द्वारा रामेश्वरम्-मदुरई, जगन्नाथपुरी, तिरूपति, द्वारकापुरी-सोमनाथ, वैष्णो देवी-अमृतसर, प्रयागराज-वाराणसी, मथुरा-वृंदावन -बरसाना, सम्मेद शिखर-पावापुरी-बैद्यनाथ, उज्जैन-ओंकारेश्वर-त्रयम्बकेश्वर (नासिक), गंगासागर (कोलकाता), कामाख्या (गुवाहटी), हरिद्वार-ऋषिकेश-अयोध्या, मथुरा-अयोध्या, बिहार शरीफ, वेलकानी चर्च (तमिलनाडु) की यात्रा शामिल है। साथ ही, 6 हजार तीर्थ यात्रियों को काठमांडू (नेपाल) स्थित पशुपतिनाथ मंदिर की हवाईजहाज से तीर्थ यात्रा भी करवायी जाएगी। उन्होंने कहा कि इन तीर्थ यात्रियों के आवागमन, परिवहन, भोजन, आवास व्यवस्था इत्यादि समस्त व्यवस्थाएं राज्य सरकार द्वारा की जाएगी, जिस पर लगभग 80 करोड़ रुपये का व्यय होने का अनुमान है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देवस्थान मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं विकसित कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य बजट में प्रमुख धार्मिक एवं तीर्थ स्थलों का विकास कराने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही प्रदेश के 600 मन्दिरों में त्यौहारों पर सजावट के लिए 13 करोड़ रुपये की राशि भी मंजूर की गई है।
जयपुर से मदुरई एवं रामेश्वरम् हेतु 7 दिवसीय यात्रा के लिए रवाना हुई विशेष ट्रेन में जयपुर, दौसा, सवाईमाधोपुर एवं कोटा जिले के लगभग 780 वरिष्ठजन यात्रा कर रहे हैं। इस तीर्थ यात्रा में यात्रियों की देखरेख के लिए हर कोच में 2 सरकारी कर्मचारियों की अनुदेशक के रूप में ड्यूटी लगाई गई है। साथ ही यात्रियों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का ध्यान रखने के लिए ट्रेन में एक डॉक्टर, 2 नर्सिंग अधिकारी तथा सुरक्षाकर्मी भी मौजूद हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि हमारे जीवन में तीर्थ यात्रा का बहुत महत्व है। हमारे तीर्थ स्थल सांस्कृतिक विरासत और समृद्ध संस्कृति का प्रतीक है तथा हमारी संस्कृति में भी इनकी असाधारण महिमा बताई गई है। उन्होंने कहा कि तीर्थ स्थलों पर जाने से मन को शांति मिलती है तथा नई ऊर्जा एवं सकारात्मकता का संचार होता है।
श्री शर्मा ने सोमवार को दुर्गापुरा रेलवे स्टेशन पर वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के तहत जयपुर से मदुरई व रामेश्वरम् के लिए इस वित्तीय वर्ष की प्रथम तीर्थ यात्रा स्पेशल ट्रेन को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह में उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के मन में यह उत्कंठा एवं हार्दिक इच्छा रहती है कि वह अपने जीवन काल में महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों की यात्रा कर आत्मिक सुख प्राप्त करे। मगर कुछ लोग आर्थिक अभाव और अन्य कारणों से तीर्थ यात्रा पर नहीं जा पाते। उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह खुशी की बात है कि राज्य सरकार की वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना का सर्वाधिक लाभ समाज के ऐसे तबके को मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश पर आताताइयों का कई बार आक्रमण हुआ, जिन्होंने हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को नष्ट किया। उन्होंने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हमारे सांस्कृतिक केन्द्रों को संरक्षित और विकसित किया है। वे हमारी संस्कृति के संरक्षक हैं। उनके कर कमलों से अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का सदियों पुराना भारत का सपना पूरा हुआ है। साथ ही वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और उज्जैन में महाकाल लोक का निर्माण जैसे अभूतपूर्व कार्यों से हमारी सांस्कृतिक विरासत मजबूत हुई है।