JDA News: जेडीए ने केशव विद्यापीठ पर चार मंजिला अवैध व्यावसायिक भवन को किया सील

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जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जोन-10 में ईकोलोजिकल जोन में केशव विद्यापीठ जामडोेली के सामने जेडीए की बिना अनुमति और स्वीकृति के व्यावसायिक प्रयोजनार्थ बनी अवैध 4 मंजिला बिल्डिंग की नियमानुसार पुख्ता सील की गई। साथ ही ईकोलोजिकल जोन में निजी खातेदारी करीब 25 बीघा कृषि भूमि पर 03 नवीन अवैध कॉलोनियों का प्रारंभिक स्तर पर ही पूर्णतः ध्वस्त किया गया। उप महानिरीक्षक पुलिस कैलाष चन्द्र विश्नोई ने बताया कि जोन- 10 के क्षेत्राधिकार ईकोलोजिकल जोन में अवस्थित केशव विद्यापीठ जामडोेली के सामने जेडीए की बिना अनुमति व स्वीकृति के व्यावसायिक प्रयोजनार्थ 4 मंजिला बिल्डिंग/कॉम्पलैक्स का अवैध निर्माण किये जाने पर निर्माणकर्ता को धारा 32, 33 जेडीए एक्ट के तहत नोटिस जारी कर अवैध निर्माण हटाने हेतु पाबंद किया गया था। परन्तु निर्माणकर्ता द्वारा अवैध निर्माण नहीं हटाये जाने पर सक्षम स्तर से स्वीकृति प्राप्त कर धारा 34 (क) नोटिस जारी कर दिनांक 22.10.2024 को उक्त अवैध 4 मंजिला व्यावसायिक बिल्डिंग के प्रवेश द्वारों इत्यादि को इंजीनियरिंग शाखा की मदद से ईंटों की दीवारों से चुनवाकर गेटों, शटरों पर ताले सील चपडी लगाकर नियमानुसार पुख्ता सीलिंग की कार्यवाही की गई। जविप्रा द्वारा सीलिंग में हुए व्यय-खर्च की नियमानुसार संबंधित से वसूली की जायेगी।

Jaipur Foundation Day Celebration 2024: जलमहल की पाल पर सजी राजस्थानी गीतों की सुरमयी शाम

जलमहल की पाल पर केसरिया बालम आओ नी पधारे म्हारे देश….जैसे राजस्थानी गीतों की जैसे ही शुरुआत हुई, दर्शकों को सभा मौजूद सैकड़ों लोगो की तालियों गड़गड़ाने लगी। मौका था जयपुर स्थापना के 297 साल पूरे होने पर जल महल की पाल पर आयोजित गौरबंद सांस्कृतिक कार्यक्रम का। कार्यक्रम के दौरान राजस्थानी कलाकारों ने कालबेलिया, घूमर, भवई, चरी नृत्य कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। वहीं, राजस्थानी गायिका सुप्रिया और दिलबर हुसैन ने हिचकी, चांद चढ़यो गिग्नार, कुंवे पर एकली जैसे गीत गाकर दर्शकों की तालियों बटोरी। आयोजन के दौरान महापौर कुसुम यादव ने कहा कि जयपुर स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत 18 अक्टूबर से 18 नवंबर तक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। उन्होंने जल महल की पाल पर हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत कर समस्त जयपुरवासी को शुभकामना देते हुए कहा कि हमें हमारे शहर को सुंदर और स्वच्छ बनाना है। इसकी शान और ऊंची हों। इसके लिए कचरा फैलाने वाले हर व्यक्ति के साथ रोको और टोको अभियान की शुरुआत करनी होगी। दीपावली का त्यौहार आ रहा है। घर घर में सफाई अभियान चलाया जा रहा है। मां लक्ष्मी का पूजन किया जाएगा। अन्न धन की कामना की जाएगी। ऐसे में हमें हमारे शहर को भी स्वच्छ रखना है, जिससे गुलाबी नगरी का नाम स्वच्छता में हों और इस बार हमारी रैंक नंबर आएं।

Chhabra Thermal News: छबड़ा मोतीपुरा थर्मल पर देर शाम को कार्मिकों ने किया प्रदर्शन

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छबड़ा के मोतीपुरा थर्मल पॉवर पर कार्मिकों ने तीसरे दिन भी देर शाम तक विरोध—प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सरकार और प्रशासन के होस में आने के नारे लगाये। प्रदर्शनकारी NTPC के साथ हुये MOU को रद्द करने की मांग कर रहे थे। उन्होने अपनी मांग दौहराते हुये कहा कि सरकार हमारी जायज मांग नहीं मानती है तो हम आंदोलन में तेजी लाएगें। CTPP और RVUNL के प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बढ़ती बिजली की माँग को लेकर नई इकाईयां लगाने के लिए राज्य सरकार पुरानी इकाईयों को बेच रही है। सरकार के इस निर्णय से सभी कार्मिक और अधिकारी अपने भविष्य को लेकर तनावग्रस्त है। ये प्रदर्शन थर्मल की 6 यूनिट का NTPC के साथ मिलकर संयुक्त उपक्रम बना निजीकरण किये जाने पर किया जा रहा है।

Assembly by-election—2024,news: उपचुनाव के विधानसभा क्षेत्रों में सूखा दिवस घोषित

प्रदेश की सात विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए आबकारी विभाग ने आदेश जारी कर इन क्षेत्रों में 11 नवंबर को शाम 6 बजे से लेकर 13 नवंबर शाम 6 बजे तक सूखा दिवस घोषित किया है। वित्त (आबकारी) विभाग के संयुक्त शासन सचिव जसवंत सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार झुंझुनू, रामगढ़ (अलवर), दौसा, देवली-उनियारा (टोंक), खींवसर (नागौर) सलूंबर (उदयपुर) एवं चौरासी (डूंगरपुर) विधानसभा क्षेत्रों में मतदान समाप्ति के 48 घंटे पूर्व अर्थात 11 नवंबर को शाम 6 बजे से, 13 नवंबर को शाम 6 मतदान समाप्ति तक इन विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों और इनके तीन किलोमीटर की परिधि क्षेत्र में सूखा दिवस रहेगा। पुनर्मतदान की स्थिति में पुनर्मतदान की घोषणा से पुनर्मतदान की समाप्ति तक संबंधित मतदान केंद्र के क्षेत्र में भी सूखा दिवस रहेगा। साथ ही मतगणना दिवस 23 नवंबर, 2024 को जिला मुख्यालय झुंझुनू, अलवर, दौसा, टोंक, नागौर, उदयपुर एवं जिला डूंगरपुर की नगरपालिका या नगर परिषद क्षेत्र में भी सूखा दिवस घोषित किया गया है।

Chief Minister News: मुख्यमंत्री से अमेरिकी राजदूत ने की मुलाकात

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सोमवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने आगामी 9 से 11 दिसम्बर को आयोजित होने वाले राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट में श्री गार्सेटी और अमेरिकी निवेशकों को आमंत्रित किया। श्री शर्मा ने कहा कि राज्य में अक्षय ऊर्जा, खनन, आईटी और विनिर्माण क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। राज्य सौर एवं पवन ऊर्जा के क्षेत्र में देश में पहले स्थान पर है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा एक नई पर्यटन नीति लाई जा रही है, जिसमें निवेशकों को कई तरह के लाभ दिए जाएंगे। राज्य में कौशल विकास, आई टी, बुनियादी ढ़ांचे के आधुनिकीकरण एवं रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं तथा इन क्षेत्रों में निवेशकों के लिए ढेरों अवसर हैं। मुख्यमंत्री ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों के राजस्थान में कैम्पस खोलने, जीसीसी और डाटा सेन्टर के क्षेत्र में काम करने के लिए आमन्त्रित किया। अमेरिकी राजदूत ने महिला विकास, ऊर्जा, शहरी विकास, खेलकूद इत्यादि के क्षेत्र में भी अमेरिका द्वारा सहयोग की इच्छा व्यक्त की।

Chief Minister News: सफाईकर्मियों की राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका —मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सफाईकर्मियों की राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका है। वे हमें बीमारियों और गंदगी से बचाकर स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि सफाईकर्मियों की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण राज्य सरकार की प्राथमिकता और जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री सोमवार को संयुक्त वाल्मीकि श्रमिक संघ द्वारा आयोजित स्वागत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नगरीय निकायों में होने वाली करीब 24 हजार सफाई कर्मचारियों की भर्ती में सफाईकर्मियों की मांगों एवं सुझावों के अनुरूप संशोधन कर नियमों का सरलीकरण किया है और लॉटरी के माध्यम से पारदर्शी तरीके से भर्ती का काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सफाईकर्मियों को उनका यह हक पहले ही मिल जाना चाहिए था लेकिन पूर्ववर्ती सरकार ने इन भर्तियों को अटकाने, लटकाने और भटकाने का काम किया। इससे पहले भी 2018 में हमारी ही सरकार ने 21 हजार से अधिक पदों पर सफाईकर्मियों की भर्ती की थी। श्री शर्मा ने कहा कि सफाई कर्मचारी विषम परिस्थितियों में काम करते हैं। ऐसी स्थिति में उनके स्वास्थ्य का ख्याल रखते हुए आरजीएचएस के तहत फेफड़ों, किडनी एवं त्वचा से संबंधित बीमारियों के निःशुल्क इलाज की व्यवस्था की गई है। साथ ही, सफाई कर्मचारियों को राज्य सरकार द्वारा रियायती दर पर ऋण भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वाल्मीकि समाज के छात्रावास हेतु भूमि आवंटन और जोधपुर में नवल जी महाराज का पैनोरमा बनवाने का सकारात्मक आश्वासन दिया।

Rajivika News: ग्रामीण विकास विभाग का दिपावली मेला 21 से 27 अक्टूबर तक

ग्रामीण विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती श्रेया गुहा ने सोमवार को राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद् (राजीविका) ग्रामीण विकास विभाग के तहत आयोजित दीपावली मेले का उद्घाटन इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान में फीता काटकर कर किया। श्रीमती गुहा ने मेले में आयी महिला सदस्यों से स्टॉल्स पर प्रदर्शित उत्पादों की जानकारी ली और हस्तनिर्मित समस्त उत्पादों को सराहा। दीपावली मेले का आयोजन 21 से 27 अक्टूबर तक प्रात: 11 से रात्रि 9 बजे तक इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान परिसर, जयपुर में आयोजित किया जा रहा है| इस दीपावली मेले में विभिन्न जिलों की संस्कृति, परिधान, भाषा, एवं पारंपरिक उत्पादों का बेजोड़ नमूना देखने को मिलता है। राजस्थान के ब्लू पोटरी, कोटा डोरिया, लोहे के सामान, रोज प्रोडक्ट्स, लाख की चूड़ियां, आचार, नमकीन, मंगोड़ी, पापड़, टेरा कोटा, जूट के उत्पाद, बाजरे के उत्पाद, सांगानेरी प्रिंट, कैर सांगरी, कसूरी मेथी, पेपर प्रोडक्ट्स, तीर कमान, सॉफ्ट टॉयज, राजस्थानी जूतियाँ मुख्य रूप से आकर्षण का केंद्र है। इसके साथ ही मेले में आने वाले आमजन फूड जोन में राजस्थानी व्यंजन का लुफ्त उठा सकेंगे। मेले में 65 स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्य, अपने उत्पादों को प्रदर्शित एवं विक्रय का कार्य कर रही है। यह दीपावली मेला ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने एवं उनकी आय में वृद्धि के लिए एक प्रमुख पहल है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिरता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सकेगा।

RSSB News: राजस्थान राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड ने जारी किया भर्ती कलेण्डर

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राजस्थान राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड ने अक्टूबर, 2024 से जून, 2026 तक आयोजित होने वाली 70 भर्ती परीक्षाओं का विस्तृत कलेण्डर जारी कर दिया है जिसमें आवेदन, परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन समेत विभिन्न बिन्दुओं की तिथिवार घोषणा की गई है। कलेण्डर के अनुसार 2024 में अक्टूबर से दिसम्बर तक 11 भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जाएगी। राजस्थान में अगले 2 साल में परीक्षाये कब-कब होंगी और उनके परिणाम कब जारी होंगे, इसका सम्पूर्ण विवरण इस कलेण्डर में निहित है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए भर्ती परीक्षा आयोजित करवाने वाली एजेंसियों (कर्मचारी चयन बोर्ड, आरपीएससी) को भर्ती परीक्षा का शेड्यूल जारी करने और जल्द परीक्षाएं करवाने के निर्देश दिये थे। इसी निर्देश की पालना में कर्मचारी चयन बोर्ड ने सोमवार को अपनी भर्ती परीक्षाओं की तारीखों का संशोधित कलेण्डर जारी किया है। राज्य में दिसम्बर, 2024 तक लगभग 1 लाख से ज्यादा विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्ति देने के लिए विज्ञप्तियां जारी कर दी गई हैं।

Chief Minister News: विदेश यात्रा से लौटने पर मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम की विदेश यात्रा के बाद रविवार को जयपुर लौटे। श्री शर्मा का जयपुर एयरपोर्ट परिसर में राज्य मंत्रिपरिषद् के सदस्यों और विधायकों सहित उच्च अधिकारियों ने स्वागत कर सफल विदेश यात्रा के लिए बधाई दी। उल्लेखनीय है कि राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट-2024 के तहत राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अन्य देशों में इन्वेस्टर मीट और रोड-शो आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ने जर्मनी के म्यूनिख और यूनाइटेड किंगडम के लंदन में आयोजित इन्वेस्टर मीट में हिस्सा लिया और निवेशकों से मुलाकात कर उन्हें प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित

Marriage News: आपके लिये जरूरी है यह जानना— समान गौत्र में इस कारण नहीं होता विवाह और क्यों किया जाता कन्यादान

भारतीय सनातन संस्कृति में परिवार पितृसत्तात्मक होते हैं अर्थात वंश परंपरा में पिता का ही सर्वोपरि स्थान होता है। पिता का ही गौत्र, पुत्र को प्राप्त होता है और यही परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती जाती है। सनातन संस्कृति में इसके पीछे कोई रूढि नहीं अपितु वैज्ञानिक कारण है, जो की पूर्ण रूप से अनुवांशिक सिद्धांत पर आधारित है। आनुवंशिक विज्ञान के अनुसार प्रत्येक स्त्री में X गुणसूत्र होते हैं, जबकि प्रत्येक पुरुष में XY गुणसूत्र होते हैं। मान लो किसी संतति में पुत्र पैदा होता है (XYगुणसूत्र) इसमें यह निश्चित तथ्य है कि Y गुणसूत्र पिता से प्राप्त हुआ है, क्योंकि माता के Y गुणसूत्र होता ही नहीं है और यदि पुत्री पैदा हुई है एक्स वाई गुणसूत्र तो (XXगुणसूत्र) माता और पिता दोनों से ही आते हैं। X गुणसूत्र का संयोजन अर्थात पुत्री। इस X के जोड़े में एक X गुणसूत्र पिता से तथा दूसरा X गुणसूत्र माता से आता है और इन दोनों गुणसूत्र के सहयोग से एक गांठ जैसी रचना बन जाती है जिसे क्रॉसओवर कहा जाता है। XY गुणसूत्र के संयोजन से पुत्र उत्पत्ति होती है। इस XY गुणसूत्र के जोड़े में Y गुणसूत्र केवल पिता से ही आना संभव है, क्योंकि माता के Y गुणसूत्र होता ही नहीं है और दोनों गुणसूत्र असमान होने के कारण पूर्ण क्रॉसओवर नहीं होता अपितु यह केवल 5% तक ही होता है और 95% Y गुणसूत्र ज्यों का त्यों (इंटैक्ट) ही रहता है। यहां Y गुणसूत्र अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि हम इसके विषय में निश्चित रूप से कह सकते हैं कि यह पिता से ही आया है। बस इसी गुणसूत्र का पता लगाना ही गोत्र प्रणाली का उद्देश्य है। जो हजारों वर्ष पूर्व हमारे ऋषि मुनियों ने जान लिया था और यही गोत्र प्रणाली भारतीय संस्कृति में परिवार के पितृसत्तात्मक होने का कारण है। Marriage News अब तक हम यह समझ चुके हैं कि वैदिक गोत्र प्रणाली गुणसूत्र पर आधारित है अथवा बाय Y गुणसूत्र को ट्रेस करने का एक माध्यम है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति का गोत्र कश्यप है तो उस व्यक्ति में विद्यमान Y गुणसूत्र कश्यप ऋषि से आया है या कश्यप ऋषि उस Y गुणसूत्र के मूल है, क्योंकि वह गुणसूत्र स्त्रियों में नहीं होता। यही कारण है कि विवाह के पश्चात स्त्रियों को उसके पति के गोत्र से जोड़ दिया जाता है। वैदिक हिंदू संस्कृति में एक ही गोत्र में विवाह वर्जित है इसका मुख्य कारण यह है कि एक ही गोत्र से होने के कारण वह पुरुष और स्त्री भाई बहिन कहलाए क्योंकि उनका पूर्वज एक ही है। परंतु यह थोड़ी अजीब बात नहीं की जिन स्त्री व पुरुष ने एक दूसरे को कभी देखा तक नहीं और दोनों अलग-अलग देश में परंतु एक ही गोत्र में जन्मे तो वह भाई-बहन हो गए। इसका एक मुख्य कारण एक ही गोत्र होने के कारण गुणसूत्र में समानता का भी है। आज की आनुवंशिक विज्ञान के अनुसार यदि समान गुणसूत्र वाले दो व्यक्तियों में विवाह हो तो उनकी संतति आनुवंशिक विकारों के साथ उत्पन्न होगी ऐसी दंपतियों की संतान में एक ही विचारधारा, पसंद और व्यवहार आदि में कोई नयापन नहीं होता। ऐसे बच्चों में रचनात्मक का अभाव होता है। विज्ञान द्वारा भी इस संबंध में यही बात कही गई है कि सगौत्र शादी करने पर अधिकांश ऐसे दंपति की संतानों में अनुवांशिक दोष अर्थात मानसिक विकलांगता और अपंगता गंभीर रोग आदि जन्मजात ही पाए जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार इन्हीं कारणों से सगौत्र विवाह पर प्रतिबंध लगाया था। इस गोत्र का संवहन यानी उत्तराधिकार पुत्री को एक पिता प्रेषित ना कर सके इसलिए विवाह से पहले कन्यादान कराया जाता है और गोत्र मुक्त कन्या का पाणिग्रहण कर भावी वर अपने कुल गौत्र में उसे कन्या को स्थान देता है। यही कारण था कि विधवा विवाह भी स्वीकार्य नहीं था। क्योंकि कुल गौत्र प्रदान करने वाला पति तो मृत्यु को प्राप्त कर चुका है, इसलिए कुंडली मिलान के समय वैधव्य पर खास ध्यान दिया जाता था और मांगलिक कन्या होने पर ज्यादा सावधानी बरती जाती है। Marriage News आत्मज या आत्मजा का संधि विच्छेद तो कीजिए। आत्म+जया= जन्म या जन्मी यानी जो मैं ही जन्मा या जन्मी हूं। यदि पुत्र है तो 95% पिता और 5% माता का सम्मिलन है। यदि पुत्री है तो 50% पिता और 50% माताका सम्मिलन है। फिर यदि पुत्री की पुत्री हुई तो वह डीएनए 50% का 50% रह जाएगा फिर यदि उसके भी पुत्री हुई तो उस 25% का 50% डीएनए रह जाएगा इस तरह सातवीं पीढ़ी में पुत्री जन्म में यह घटकर एक प्रतिशत रह जाएगा। अर्थात एक पति—पत्नी का ही डीएनए सातवीं पीढ़ी तक पुनः पुनः जन्म लेता रहता है और यही है सात जन्मों का साथ। लेकिन जब पुत्र होता है तो पुत्र का गुणसूत्र पिता के गुणसूत्र का 95% गुणों को आनुवंशिकी में ग्रहण करता है, और माता का 5% (जो की किन्हीं परिस्थितियों में एक प्रतिशत से भी कम हो सकता है) डीएनए ग्रहण करता है और यही क्रम अनवरत चलता रहता है। जिस कारण पति और पत्नी के गुणों युक्त डीएनए बारंबार जन्म लेते रहते हैं अर्थात यह जन्म जन्मांतर का साथ हो जाता है। इसलिए, अपने ही अंश को पितृ जन्मों जन्म तक आशीर्वाद देते रहते हैं और हम भी अमूर्त रूप से उनके प्रति श्रद्धा भाव रखते हुए आशीर्वाद ग्रहण करते रहते हैं। और यही सोच हमें जन्मों तक स्वार्थी होने से बचाती है और संतानों की उन्नति के लिए समर्पित होने का संबल देती है। एक बात और माता-पिता यदि कन्यादान करते हैं, तो इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि वह कन्या को कोई वस्तु समकक्ष समझते हैं बल्कि इस दान का विधान इस निमित्त किया गया है कि दूसरे कुल की कुलवधू बनने के लिए और उस कुल की कुल धात्री बनने के लिए उसे गौत्र मुक्त होना चाहिए। डीएनए गौत्र मुक्त हो नहीं सकती, क्योंकि भौतिक शरीर में वह डीएनए रहेंगे ही इसलिए मायका अर्थात माता का रिश्ता बना रहता है। गौत्र यानी पिता के गोत्र का त्याग किया जाता है। तभी वह भावी वर को यह वचन दे पाती है कि उसके कुल की मर्यादा का पालन करेगी यानी उसके गौत्र और डीएनए को करप्ट नहीं करेगी, वर्णसंकर नहीं करेगी। क्योंकि कन्या विवाह बाद कुल वंश के लिए रज का रजदान करती है और मातृत्व को प्राप्त करती है। यही कारण है कि हर विवाहित स्त्री माता समान पूजनीय हो जाती है। यह रजदान भी कन्यादान की तरह उत्तम दान है और पति को किया जाता है। यह सुचिता अन्य किसी सभ्यता में दृश्य नहीं है।

—डा.अमर सिंघल