प्रदेश की 13 लोकसभा सीटों पर होने वाले दूसरे चरण के चुनाव प्रचार का शोर आज थम जाएगा। शाम 6 बजे के बाद प्रत्याशी केवल डो टू डोर कैंपेन कर सकेंगे। राज्य निर्वाचन विभाग ने मतदान के अंतिम 48 घंटे के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, जिसके अनुसार प्रत्याशी किसी भी तरह के लाउडस्पीकर से प्रचार नहीं कर सकेंगे। साथ ही उन्हें जुलूस निकालने की भी अनुमति नहीं होगी। इतना ही नहीं निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के अनुसार स्टार प्रचारकों को भी संबंधित लोकसभा क्षेत्रों की सीमाओं को छोड़ना होगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रवीण गुप्ता ने बताया कि राजस्थान में लोकसभा चुनाव 2024 के दूसरे चरण में मतदान के अंतिम 48 घंटे के लिए चुनाव प्रचार संबंधित गतिविधियां 24 अप्रैल शाम 6 बजे से थम जाएंगी। दूसरे चरण में 13 लोकसभा क्षेत्रों टोंक-सवाईमाधोपुर, अजमेर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर, जालोर, उदयपुर, बासंवाड़ा-डूंगरपुर , चितौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा, कोटा-बूंदी और झालावाड़-बारां में 26 अप्रैल को मतदान होगा. गुप्ता ने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126 के तहत इन लोकसभा क्षेत्रों में मतदान की समाप्ति के लिए नियत समय से 48 घंटें की अवधि 24 अप्रैल को शाम 6 बजे से आरंभ होकर मतदान समाप्ति अवधि 26 अप्रैल को शाम 6 बजे तक प्रभावी रहेगी।
वैसे तो आगामी 26 अप्रेल को 13 लोकसभाई सीटों पर चुनाव होने जा रहे है। लेकिन सबसे दिलचस्प चुनाव जालोर-सिरोही का है जहां पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साहबजादे वैभव गहलोत अपना भाग्य आजमा रहे है। सामने है बीजेपी के लुम्बाराम चौधरी।
वैभव गहलोत को जिताने के लिए जहां पूरा कुनबा सक्रिय है, लुम्बाराम को पार्टी की ओर से अपेक्षित सहयोग नही मिल रहा है। न नेता सक्रिय है और न ही कार्यकर्ता। जबकि वैभव के लिए उसके पिता अशोक गहलोत, मां सुनीता, पत्नी हिमांशी और पुत्री कश्विनी जितने के लिए जी जान से जुटे हुए है ।
अशोक गहलोत को कांग्रेस पार्टी से कोई मतलब नही है। उनका एक ही मकसद है, अपने पुत्र को लोकसभा में भेजने का। लेकिन वैभव को सफलता मिलेगी, इसमें संदेह है। पिछला लोकसभा चुनाव जोधपुर से शर्मनाक तरीके से हारने के बाद बाप-बेटे जालोर की जनता को मूर्ख बनाने की गरज से यहां चले आए। पूरा कुनबा गिड़गिड़ाते हुए वैभव को जिताने की भीख मांग रहे है। उधर उन्होंने बीजेपी के कुछ नेताओं को भी खरीद लिया है । ऐसे में लुम्बाराम की स्थिति अनाथ जैसी होगई है।
वैभव की जीत में संदेह इसलिए है क्योंकि उनमें कोई राजनीतिक लक्खन नही है। अलावा इस बात के कि वे अशोक गहलोत के बेटे है। न बोलने का सहूर है या राजनीतिक दूरदृष्टि। आरसीए का चुनाव वैभव ने जीता नही, उनके पिता ने छल कपट से जितवाया। उसी छल कपट और अरबो रुपये खर्च करके अशोक गहलोत अपने बेटे को जिताने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे है।
अशोक गहलोत भलीभांति जानते है कि वैभव हार गया तो उनका राजनीतिक जीवन लगभग समाप्त हो जाएगा। वैसे भी विधानसभा चुनाव के बाद उनके शेयर की रेट 30 फीसदी से भी कम रह गई है। इसी को मद्देनजर रखते हुए गहलोत द्वारा अरबो रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे है। कार्यकर्ताओ की लंबी फौज है जो वैभव को जिताने के नाम पर मुर्गे की टँगड़ी तोड़ रही है और बियर के जरिये गर्मी को दूर भगाया जा रहा है।
जालोर की जनता के जेहन में एक ही सवाल है कि यदि वैभव जीत भी गए तो क्षेत्र के काम क्या आएंगे? न उन्हें सलीके से बोलना आता है और उनमें कोई राजनीतिक परिपक्वता है। केंद्र में बीजेपी की सरकार बनना तय है। ऐसे में जीत भी जाते है तो वैभव क्षेत्र के लिए कुछ नही कर पाएंगे। हारे या जीते, वैभव का चुनाव के बाद जालोर से कोई ताल्लुक नही रहेगा। वे रहेंगे जयपुर और जनता इंतजार करेगी जालोर में।
इसके इतर लुम्बाराम के जितने पर क्षेत्रीय विकास होना संभावित है। यह इलाका बहुत पिछड़ा हुआ है। ऐसे में लुम्बाराम की आवाज केंद्र में अवश्य सुनी जाएगी जिसका सीधा फायदा जालोर की जनता को होगा। वैभव की जीत से जालोर की जनता को रत्ती भर लाभ नही होने वाला है। इसलिए क्षेत्रीय लोगो का मानना है कि वैभव की जोधपुर के मुकाबले यहां और भी शर्मनाक पराजय होगी।
राजस्थान लोकसभा चुनाव लड़ने की दमदार घोषणा करने वाले रविंद्रसिंह भाटी की सिंह गर्जना का भाजपा और कांग्रेस में भय व्याप्त है। दोनों दलों के उच्च स्तरीय नेताओं में जयपुर और दिल्ली के दिलों में भय और भाल पर चिंता की लकीरें खिंच चुकी है। अबकी बार 400 के पार का नारा भाटी के सिघनाद से हिचकोले खाने लगा है। आखिर क्यों डर रहे हैं भाजपा सम्राट? शिव विधानसभा का रण कौशल ऐसा रहा है कि उसे कोई समझ नहीं पाया है और उसी युद्ध कौशल से भाटी चुनौती देते हुए बाड़मेर जेसलमेर का युद्ध जीत जाएंगे। राजस्थान की 25 सीटों में से चुनाव से पहले ही एक सीट बाड़मेर जेसलमेर भाजपा के अधिकार से निकलती हुई चर्चा में है। भाजपा की एक कोर खंडित होने का स्पष्ट खतरा। इस युद्ध के लिए राजस्थान और राजस्थान के बाहर अन्य प्रदेशों के राजपूतों में जबरदस्त जोश है। युद्ध जीतने से पहले का उत्साह भरा है।
हर ओर भाटी की चर्चा है। महाराणा प्रताप मेमोरियल ट्रस्ट अयोध्या, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, श्री राजपूत सभा, क्षत्रिय युवक संघ व सभी राजपूत संगठन, राजपूत कोर कमेटी सदस्य व अखंड राजपुताना सेवा संस्थान दिल्ली परिवार और अनेक क्षत्रिय संस्थाएं उनके पदाधिकारी भाटी के साथ खड़े हैं।
वाट्सएप ग्रुप, मतलब सोशल मीडिया प्लेटफार्म। खबरनामा वाट्सएप ग्रुप के एडविन ने एक संदेश जारी किया है कि ग्रुप में कोई भी सदस्य मोदी और राहुल पर कोई भी बहस की पोस्ट न डालें। इसके अलावा गुड मार्निंग संदेश भी नहीं। यही व्यवस्था दिल्ली, यूपी, एमपी और महाराष्ट्र के कई वाट्सएप ग्रुप के ऐडविन ने काफी समय पहले से की हुई है। खबरनामा वाट्सएप ग्रुप के ऐडविन की यह बहुत अच्छी पहल है और इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। चूंकि हक़ीक़त यही है कि अधिकांश लोग दिन भर बैठे-बैठे वाट्सएप पर ऐसी ही क्रिया-प्रतिक्रिया में उलझे रहते हैं। बुजुर्गों की बात अलग है क्योंकि वे अपने ज्ञान और अनुभव को शेयर करते हैं लेकिन युवा वर्ग, जैसे उनके पास और कोई काम है ही नहीं और यही उनकी सर्विस है।
यह सच है कि लोगों ने सभी वाट्सएप ग्रुप्स को भड़ास डाट काम बना कर रख दिया है। दिन भर बैठे-बैठे वाट्सएप पर यही करते रहते हैं कि मोदी ने राहुल के लिए क्या कहा और राहुल ने मोदी के लिए क्या कहा। कहा तो ऐसा क्यों कहा। ममता बनर्जी क्या कर रही हैं, नीतीश कुमार ने यह ठीक नहीं किया, कंगना रनौत ने बीफ क्यों खाया आदि-आदि। मोदी और राहुल ने एक-दूसरे के लिए जो कुछ कहा या कह रहे हैं उस पर बैठे-बैठे तर्क-वितर्क करते रहना ही जैसे इनकी दिनचर्या बन गया है और उन्हें पढ़ना लोगों की बाध्यता हो गई है। जैसे इसके बिना न उनका खाना पचेगा और न ही उन्हें नींद आएगी। ऐसे लोगों ने सोशल मीडिया का हुलिया बिगाड़ कर रख दिया।
दूसरी ओर कुछ लोग आफिसों में बैठे-बैठे सोशल मीडिया पर गुटर गूं करते रहते हैं। काम-धाम छोड़ कर इसी में रमे रहते हैं। उस पर तुर्रा यह कि वे खुद को सोशल मीडिया पर एक्टिव शो करते हैं। सामने काम रखा है, विंडो पर क्यू में लोग खड़े हैं लेकिन ये अपनी इसी ताकधिन्ना में मस्त हैं। कुछ लोग तो मोदी और राहुल को लेकर इस कदर ज़ुबानी आस्तीन चढ़ाए रहते हैं जैसे वे उन्हें सोल्व कर देंगे या उसके लिए मर जाएंगे अथवा मार देंगे।
इन ग्रुप्स में कुछ लोग तो इस तरह एक-दूसरे से उलझते रहते हैं जैसे वे मोदी या राहुल के लिए ही वाट्सएप ग्रुप में बैठे हुए हैं और ये दोनों दल उन्हें ” पे ” कर रहे हैं। सच में कुछ लोग ऐसे लिख भी रहे हैं। ऐसे लोग अपने स्वार्थ के लिए ग्रुप की वेल्यु भी खराब कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ ग्रुप वाले भी एक ही आईटम बार-बार रिपीट करते रहते हैं जैसे उनकी भी उनसे कोई बंधी है। कुछ लोग भड़ास निकालने में इस कदर उलझ जाते हैं कि स्तरहीन भाषा का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे लोग न केवल वाट्सएप ग्रुप का स्तर गिरा रहे हैं बल्कि वे शिक्षित हैं इस पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है। कुछ लोगों ने गुड मार्निंग संदेश में अपनी कंपनी का नाम, मोबाइल नंबर और वर्क भी लिख कर भेजते हैं, यह एक तरह की चालाकी पूर्ण गुड मार्निंग संदेश है। चूंकि इस आड़ में मुफ्त में सोशल मीडिया पर कंपनी का विज्ञापन भी प्रकाशित कर लेते हैं और धंधा भी।
एक और बात कि अखबारों में दोनों पार्टियों को लेकर रोज बहुत-कुछ छपता रहता है लेकिन वहां इस तरह भड़ास निकालने वाले चुप रहते हैं। सिर्फ वाट्सएप पर ही फिजूल ताव खाते रहते हैं। इसी को घर की खेती समझ रखा है। अखबारों में पहले पाठकों के लिए एक कालम आता था लेकिन बाद में अखबारों ने उसे बंद कर दिया क्योंकि फालतू कलम घसीटने वालों की बाढ़ आ गई थी। खबरनामा ने जो आपत्ति उठाई है वह सही है। उन्ही की तरह दिल्ली, यूपी और एमपी के भी कई वाट्सएप ग्रुप के ऐडविन ने ठीक ऐसा ही क़दम उठाया हुआ है। उन्होंने अपने निर्देश में यही कहा कि सोशल मीडिया को सोशल मीडिया ही रहने दें, इसे फ़िज़ूल की बातों का प्लेटफार्म न बनाएं और जो नहीं मानता है उसे ग्रुप से बाहर कर देते हैं।
सतर्क रह कर चलें, इस दौर में, अब हर रिश्ता यहां दग़ाबाज़ है। कुछ दिनों पहले लालसोट में एक मामा ने अपने भांजे की हत्या कर दी। वज़ह यह थी कि भांजे के मामी से अवैध संबंध थे। भांजे की हत्या के बाद मामा ने भी आत्महत्या कर ली। उसके बाद हत्या में शामिल मामा के भाई ने भी रेल से कट कर आत्महत्या कर ली। एक अवैध संबंध एक ही घर के तीन सदस्यों की मौत का कारण बन गया। उधर मामी भी इस वाकिये के बाद फरार हो गई। यद्यपि कानून ने महिलाओं को किसी से भी यौन संबंध बनाने की छूट दे दी है लेकिन उसने कभी भी यह नहीं सोचा कि ऐसे रिश्ते अनगिनत खून-खराबे को जन्म देंगे। ये जो मामी से अवैध संबंधों के कारण तीन मौतें हुई हैं ये उसी का परिणाम है। यह समाचार राजस्थान के सभी समाचार-पत्रों में छपा है। एक यथार्थ यह कि हवस की भूख में स्त्री हो या पुरुष हर गुनाह कर गुजरता है। इसके लिए वह हर रिश्ते की हत्या कर रहा है। एक औरत रोटी खाए बगैर रह सकती है लेकिन सेक्स किये बिना नहीं रह सकती। फिर चाहे पति हो, पडौसी हो, प्रेमी हो, आफिस में बास हो या सहकर्मी हो, उम्र में बहुत बड़ा व्यक्ति हो अथवा कोई नाबालिग हो। हवस की भूख लगने पर वह इनमें से किसी से भी संबंध स्थापित करने से नहीं चूकती। भले ही इसके लिए उसे किसी की हत्या ही क्यों न करनी पड़े। वह कर देगी, चाहे उसकी अपनी औलाद ही क्यों न हो। मानें आपकी इच्छा न मानें आपकी इच्छा। हाल ही में घड़साना में एक बहू ने अवैध संबंधों में बाधक अपनी सास को डिग्गी में डुबो कर मार डाला। हैवानियत की हद यह कि उसने अपनी वृद्ध सास का मुंह पानी में तब तक डुबोए रखा जब तक वह मर नहीं गई। उसका प्रेमी पहले धर्म भाई बना हुआ था। जागरण अख़बार में एक खबर छपी कि लोनी में एक सगी मां अपनी ही नाबालिग़ बेटी को सौतेले पिता से यौनाचार कराने में मदद करती रही। यही नहीं उसने अपने नाबालिग़ बेटे को भी सौतेले पिता से अप्राकृतिक मैथुन का शिकार बनाए रखने में मदद की। आखिर दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अब देखिये हैदराबाद की एक विवाहिता का अजीबो-गरीब किस्सा। स्वाति सुधाकर रेड्डी की धर्मपत्नी थी। उसके राजेश से अवैध संबंध थे। राजेश से अपने रिश्ते क़ायम रखने के लिए उसने अपने पति सुधाकर को एनेस्थिसिया का इंजेक्शन देकर बेहोश किया। उसके बाद गला दबा कर उसकी हत्या कर दी। फिर राजेश की प्लास्टिक सर्जरी करा कर उसे सुधाकर रेड्डी बनवा दिया। लेकिन हैदराबाद पुलिस सच तक पहुंच गई और स्वाति और राजेश को सलाखों में डाल दिया। यह है सेक्स की भूखी औरत की दरिंदगी। ये जो इस तरह के संबंध हैं, एक बार स्थापित हो जाने के बाद न स्त्री उन्हें छोडती है न ही पुरुष। भले ही जान जाए तो जाए। एक औरत के सिर पर जब हवस का भूत सवार होता है तो वह कुछ भी कर सकती है। कुछ भी। वह हत्या और आत्महत्या की हद तक पहुंच जाती है। कुछ दिनों पहले देहरादून में एक पांच बच्चों की मां बुआ ने अपने ही 16 साल के भतीजे से सेक्स संबंध बना लिए और उससे मां बन गई। देहरादून पोक्सो कोर्ट ने बुआ को 20 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। वह अपने पति से अनबन होने के कारण पीहर में ही रह रही थी। यूपी के हापुड़ में एक बेटी ने अपनी ही मां को भतीजे के साथ आपत्तिजनक अवस्था में देख लिया। बेटी काव्या द्वारा भतीजे अंकित के साथ मां को यूं देख लिये जाने पर सुरेखा ने काव्या की दांतली से हत्या कर दी। हैवान बनी सुरेखा ने काव्या के शरीर पर दांतली से कई वार किये जिससे उसका शरीर कट-फट गया और वह मर गई। सुरेखा यहीं नहीं रुकी, उसने काव्या की मृत देह को चुनरी से बांधा और एक खंडहर में फेंक आई। बाद में पुलिस ने छान-बीन में पता लगा लिया और सुरेखा को गिरफ्तार कर ले गई। भरतपुर के डीग में सौतेली मां ने की थी बेटे की हत्या। 10 मिनट तक टैंक में डुबाए रखा और बच्चा मर गया। यश की मां रमा ने प्लानिंग के तहत उसकी हत्या कर दी। अपने पति की गैरहाजिरी में वह अन्य पुरुष से संबंध रख रही थी जिसे उसके बच्चे ने देख लिया। बस रमा ने उसे टैंक में डुबो कर मार दिया। अब आते हैं ऐसा होने के वैज्ञानिक कारणों पर। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार 29 से 45 और 48 साल की उम्र में महिलाओं में यौनोत्तेजना तेजी से बढ़ती है। ठीक ऐसे ही 13-14 साल की उम्र चिंगारी जैसी होती है। इस उम्र में लड़कियां जल्दी फिसल जाती हैं। एक बार लौ पकड़ने के बाद वह सब-कुछ कर गुजरने को तैयार रहती हैं। शोधों का कहना है कि कामेच्छा सवार होने के बाद वह खुद पर काबू नहीं रख पाती। ये अथवा इस तरह की घटनाएं इसी का परिणाम है।
समाज में ऐसा-वैसा जो भी घटता है हमारे फिल्म वाले उसे तत्काल पर्दे पर उतार देते हैं। लगभग 50-55 साल पहले एक फिल्म आई थी सावन-भादो। नवीन निश्चल और रेखा की यह पहली फिल्म थी। इसमें भी एक ऐसी ही घटना को पिक्चराइज किया गया था जिसमें एक मां अपने ही बेटे की तब हत्या करने को आमादा हो गई जब जवान बेटे ने मां को अपने प्रेमी के साथ हमबिस्तर होते देख लिया। मां श्यामा थी और बेटा नवीन निश्चल था। अर्थात हमारे समाज में इस किस्म के रिश्ते दशकों से क़ायम हैं लेकिन लोग यूं चौंकते हैं जैसे उन्हें कुछ पता ही नहीं है।
युगों-युगों से यह सच धरती पर कायम है और रहेगा। कोई कुछ नहीं कर सकता। जिस्म की भूख ऐसी ही होती है। चूंकि यह कुदरत प्रदत्त वह सुख है जिससे कोई भी वंचित नहीं रहना चाहता। अमूमन जहां भी पुरुष दौलत के पीछे भाग रहा है वहां उसकी पत्नी देह सुख के लिए इधर-उधर भाग रही है। यह मैने भी देखा है और आप लोगों ने भी देखा होगा। इसका एक मात्र ईलाज है संयम, जो हमारे सात्विक विचार और सात्विक भोजन पर निर्भर है। लेकिन आज न किसी के सात्विक विचार हैं और न ही किसी को सात्विक भोजन पसंद है।
मोदी विश्वविद्यालय ने जयपुर में “संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें प्रत्रकारों से विश्वविद्यालय में शुरू होने वाले नये सत्र से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। संवाद में बतताया कि विश्वविद्यालय का 265 एकड़ का विशाल कैम्पस शिक्षा द्वारा नारी सशक्तिकरण के अभियान को सतत् आगे बढ़ा रहा है। राजस्थान सहित देशभर के छात्राओं के लिए मोदी विश्वविद्यालय ने इस साल भी कुछ खास छात्रवृति की घोषणा की। साथ ही शिक्षा के नये परिदृश्य और मोदी विश्वविद्यालय के वर्तमान परिपेक्ष्य पर भी मिडिया से चर्चा की।
मोदी विश्वविद्यालय के डीजीएम एडमिशन प्रवीण झा और पीआरओ राजीव सिंह ने बताया कि मोदी विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्स एंड साइसेंस, स्कूल ऑफ इंजिनयरिंग, स्कूल ऑफ लॉ. स्कूल ऑफ डिजाइन एवं स्कूल ऑफ बिजनेस में विभिन्न स्नातक एवं स्नातकोत्तर के साथ पीएचडी के भी कोर्स कराये जाते हैं। उन्होने बताया कि विश्वविद्यालय में कई स्किल बेस्ड कोर्सेस मसलन डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, फॉरेनसिक साइंस, फिजयोथेरेपी, फूड एंड न्यूट्रीशयन, बॉयोमेडिकल एवं न्यूक्लियर साइंस एंड टेक्नोलॉजी जैसे कोर्स जो कि पूर्णतः कौशल आधारित है और छात्राओं को बेहतर भविष्य की ओर ले जाता हैं। छात्राओं को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए विश्वविद्यालय ने वर्तमान सत्र से डी फार्मा कोर्स की भी शुरुआत की। रिसंच एवं इनोवेशन के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय ने कई मुकाम हासिल किया है जिसमें क्यूरी के तहत रिसंच एवं इनोवेशन के लिए विश्वविद्यालय को 2.25 करोड़ रूपये का अनुदान प्राप्त हुआ है। सभी वर्गों को शिक्षा का समान अवसर मुहैया कराने के उददेश्य से विश्वविद्यालय ने ऑनलाईन माध्यम की भी शुरूआत की है जिसके अर्न्तगत बीए, बीकॉम एम कॉम के साथ ही एमबीए और एमसीए जैसे विभिन्न कॉसेस करवाए जाएगें। इस माध्यम में छात्राओं के साथ छात्र भी दाखिला ले सकते हैं। आरएएस, पीसीएस एवं आइएएस जैसे परिक्षाओं के तैयारी के लिए विश्वविद्यालय कैंपस में ही छात्राओं को विशेष सुविधा प्रदान कर रही है और इसके लिए प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान समकल्प नई दिल्ली से अनुबंध किया गया है ताकि छात्राओं को स्नातक के दौरान ही तैयारी का बेहतर अवसर प्राप्त हो सकता है।
खेल कोटे से राजनीति में आए राज्यवर्धन सिंह राठौर ने पत्रकारों की कोहनी पर गुड़ लगाकर राजनीति खेल गये। कल ऐसा प्रतित हुआ कि राजनीति में हुक्म की पालना करने वाले ने शायद पहली बार राजनीति दाव खेला है, वो भी पत्रकारों के साथ।
आपको बता दें कि प्रदेश में नवगठित भाजपा सरकार के खेल मंत्री राठौर ने 23 मार्च 2024 को भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों के लिया घोषणा करते हुए कहा कि जयपुर में आयोजित होने वाले आईपीएल मैच के दो दो पास दिए जायेंगे। पास बांटने की जिम्मेदारी भाजपा मुख्यालय के मीडिया प्रकोष्ठ को दी गई थी और पत्रकारों की सूची भी बनाई गई। 24 मार्च होली के दिन सुबह ग्यारह बजे पास लेने बुलाया गया और डेड बजे पास बांटे भी गए लेकिन दो की जगह केवल एक। हालांकि कई तिकड़म बहादुर एक पास की जगह कई पास ले उड़े और कइयों को एक भी नहीं दिया, पास। जब मंत्री जी को इस बात से रूबरू कराया गया तो कुछ के मुंह देख तिलक कर दिया और कुछ को अगले मैंच की कह कर टरका दिया।
अब बात करते है कल की यानि 6 अप्रैल 2024 की। अगले मैंच में पास की आस में लगाए बैठे लोग सुबह से ही भाजपा मुख्यालय के चक्कर काटने लग गये और मीडिया प्रकोष्ठ के पादाधिकारियों के ताबड़तोड़ फोन करने लगे और बिचारे फोन को परेशान कर दिया। एक पदाधिकारी ने तो यहां तक कह दिया कि समाचार और कवरेज के लिये कभी इतने फोन नहीं आए जितने आज पास के लिये आये है। ये आलम तो भाजपा मुख्यालय का था। वहीं मंत्री जी के मातहतों ने पत्रकारों की भावनाओं के साथ खूब खेल खेला। जब मंत्राी जी के फोन नं. 9460996611 पर पत्रकार फोन करते तो फोन मातहत ही उठाते और सबसे पहले यह पूंछा जाता की क्या काम है। जब दूसारी ओर से पास के लिये बताया जाता तो उन्हे कहा जाता कि आपका नाम नोट कर लिया गया है। आपको फोन करके बुला लिया जायेगा, पास के लिये। लेकिन फोन कभी नहीं आया। मंत्री जी ने ऐसा गुड़ लगाया कि पत्रकार चाटने की कोशिश करते रहे लेकिन चाट ही नहीं पाए, गुड़। क्रिकेटवा में चुनावी खेला बा।
राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (RMSC) ने दो भेषज एवं औषधि आपूर्ति फर्म मै. एजीयो फार्मास्यिूटिकल मुम्बई एवं मैक्स मेड लाइफ साइसेंज नई दिल्ली को निविदा शर्तों का उल्लघंन करने पर अनुशासनात्मक समिति की अनुशंषा पर 3 वर्ष की अवधि के लिए डीबार किया है। साथ ही इनकी जमा प्रतिभूति राशि जब्त किए जाने के आदेश दिए हैं। इसी प्रकार सर्जिकल आइटम्स के लिए फर्म वीनस सेफ्टी एण्ड हैल्थ प्राइवेट लिमिटेड को भी निर्धारित अवधि में आपूर्ति नहीं करने पर 2 वर्ष के लिए डीबार करते हुए जमा प्रतिभूति राशि जब्त किए जाने के आदेश जारी किए गए हैं।
आरएमएससी की प्रबंध निदेशक नेहा गिरि ने बताया कि फर्म मै. एजियो फार्मास्यूटिकल-मुम्बई द्वारा दवा आपूर्ति से संबंधित बिड की शर्तों का उल्लंघन किया गया। अनुशासनात्मक समिति के समक्ष सुनवाई के दौरान कोई तथ्य भी प्रस्तुत नहीं किया। बिड शर्तों का उल्लंघन मानते हुए अनुशासनात्मक समिति की अनुशंषा पर फर्म को तीन वर्ष के लिए डिबार करने तथा 2 लाख रूपये की प्रतिभूति राशि जब्त करने के आदेश जारी किए।
इसी प्रकार मै. मैक्समेड लाइफ साइंसेज प्रा.लि., नई दिल्ली ने भी दवा आपूर्ति के संबंध में बिड वापस लेते हुए सप्लाई से मना कर दिया, जो कि निविदा शर्तों का उल्लंघन था। फर्म द्वारा इस संबंध में किसी भी प्रकार का स्पष्टीकरण भी नहीं दिया गया। इसके चलते अनुशासनात्मक समिति की अनुशंषा पर फर्म को तीन वर्ष के लिए डिबार करने तथा 2 लाख रूपये की प्रतिभूति राशि जब्त करने के आदेश जारी किए।
फर्म वीनस सेफ्टी एण्ड हैल्थ प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सर्जिकल आइटम्स के लिए बिड प्रस्तुत की गयी। फर्म को 10 दिवस में सप्लाई करने के लिए आदेशित किया गया, परन्तु फर्म द्वारा न तो सप्लाई की गयी और न ही सप्लाई अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया गया। अनुशासनात्मक समिति की अनुशंषा पर उक्त फर्म को आरएमएससी की निविदा में भाग नहीं लेने तथा 2 वर्ष की अवधि के लिए डीबार करते हुए जमा कराई गई प्रतिभूति राशि जब्त किए जाने के आदेश जारी किए गए।