C M RAJSTHAN:- निजी क्षेत्र के समान राजकीय विद्यालयों में भी हो बेहतरीन शैक्षणिक सुविधाएं -मुख्यमंत्री

0

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक विद्यार्थी को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। हमारा उद्देश्य गांव, कस्बे से लेकर शहर तक शिक्षा का ऐसा वातावरण विकसित करना है, जिससे हर वर्ग का विद्यार्थी सुंदर भविष्य का सपना देख सके और उसे पूरा भी कर सके।

श्री शर्मा सोमवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में स्कूल, उच्च, तकनीकी एवं संस्कृत शिक्षा विभागों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निजी क्षेत्र के विद्यालयों के समान राजकीय विद्यालयों में भी आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं एवं संसाधन उपलब्ध कराने की योजना बनाने के निर्देश दिए ताकि जरूरतमंद परिवार के विद्यार्थी को भी उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराई जा सके। उन्होंने कहा कि राजकीय विद्यालयों में शिक्षक कठिन परीक्षा को पास कर नियोजित होते हैं। उनमें विद्यार्थियों के भविष्य को बनाने की पूर्ण क्षमता होती है।

मुख्यमंत्री ने राजकीय विद्यालयों में रिक्त पदों को भरने के लिए मानव संसाधनों के सामंजस्यपूर्वक उपयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति करने के लिए नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। इससे जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है, वहां विद्यार्थियों को प्राथमिकता से एवं समय पर शिक्षक मिल सकेंगे।

श्री शर्मा ने कहा कि शिक्षकों के अनियमित स्थानान्तरण के कारण विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है। इसके समाधान के लिए शिक्षा विभाग को पारदर्शी स्थानान्तरण नीति तैयार करनी चाहिए। इससे शिक्षकों का योग्यता के आधार पर एवं सही समय पर स्थानान्तरण सुनिश्चित हो सकेगा। उन्होंने अधिकारियों को शिक्षा के सुधार के लिए कुछ जिलों में नवाचार करने के निर्देश भी दिए। जिन्हें निकट भविष्य में पूरे प्रदेश में लागू किया जा सके और राजस्थान पूरे देश में उत्कृष्ट शिक्षा का मॉडल बनकर उभरे। 

श्री शर्मा ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बजट घोषणा 2024-25 (लेखानुदान), 100 दिवसीय कार्य योजना एवं संकल्प पत्र में शामिल घोषणाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने राजीव गांधी स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस की समीक्षा करते हुए इस योजना में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों को शामिल करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने राजस्थान पाठ्य पुस्तक मण्डल को पुस्तकों की खरीद प्रक्रिया में सुधार लाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने प्रक्रियाधीन भर्तियों की स्थिति, विद्या सम्बल योजना, स्कूटी एवं साइकिल वितरण योजना, छात्रवृत्ति योजना, पीएम उषा योजना के संबंध में विस्तृत समीक्षा की।

संस्कृत शिक्षा के प्रसार पर गंभीरता से करें कार्य—

मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृत भाषा के ज्ञान से व्यक्ति के आचार, विचार और संस्कार में सकारात्मक बदलाव आता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए संकल्पबद्ध है और इस दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। उन्होंने संस्कृत शिक्षा विभाग को शिविर एवं गोष्ठियों का आयोजन कर विद्यार्थियों को संस्कृत शिक्षा के प्रति प्रेरित करने के निर्देश दिए। साथ ही, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए विभागीय वार्षिक कलेण्डर प्रकाशित करने के निर्देश भी दिए। 

Education Minister मैं पांड्या ब्राह्मण नहीं हूं, उल्टा लटका कर मरता हूं —शिक्षा मंत्री मदन दिलावर


सूबे के बेअंदाज शिक्षा मंत्री जनता के बीच फंस गये। उन्हे कतई अंदाजा नहीं था कि आमजन से उलझने पर उंटपटांग तरीके से माफी मांगनी पड़ेगी। घटना शिक्षा मंत्री के विधानसभा क्षेत्र का है। वायरल वीडियो के अनुसार मंत्री जनता से घिरे हुए थे और आपस में उलझ रहे थे और कह रहे थे, मैं पांड्या ब्राह्मण नहीं हूं, उल्टा लटका कर मरता हूं, जबाव में जनता ने कहा हम भी गुर्जर हैं। मामला बढ़ा तो मंत्री ने सफाई पेश की और कहा कि हां मेरे से गलती हुई, ये असभ्य लोगों की भाषा नहीं थी। लेकिन सवधान, मंत्री जी का दबदबा जारी रहेगा, क्योंकि वो सरकार के शिक्षा मंत्री हैं।
आपको बतादें कि पूर्व में भी भाजपा सरकार में मदन दिलावर मंत्री रहे थे। तब भी वो बेअंदाज थे और चर्चा में रहे

प्रदेश में माइनिंग ब्लॉकों की नीलामी का बनेगा मासिक एक्शन प्लान -डीएमजी

0


आगामी वित्तीय वर्ष में मेजर और माइनर मिनरल ब्लॉकों के ऑक्शन का मासिक एक्सन प्लान बनाया जाएगा। निदेशक खान एवं भूविज्ञान भगवती प्रसाद कलाल ने माइंस व भूविज्ञान विभाग के फील्ड अधिकारियों को निर्देश दिए कि फील्ड अधिकारी अपने क्षेत्र के मिनरल एक्सप्लोरेशन, डेलिनियेशन और ऑक्शन के लिए ब्लॉक तैयार करने का रोडमेप तैयार कर प्रतिमाह ऑक्शन के प्रस्ताव भिजवाएं। उन्होंने कहा कि अवैध खनन पर प्रभावी रोक के लिए गेप व खनन क्षेत्रों के ब्लॉकों की नीलामी के कार्य में तेजी लानी होगी।

डीएमजी खान एवं भूविज्ञान विभाग के फील्ड अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से रुबरु हो रहे थे। उन्होंने 15 जनवरी से 31 जनवरी तक चले अवैध खनन गतिविधियों के खिलाफ राज्यव्यापी संयुक्त अभियान की स्प्रिट को आगे भी बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि अधिकारियों को नियतकालीन अंतराल में औचक निरीक्षण जारी रखने को कहा ताकि खनन माफियाओं पर अंकुश जारी रखा जा सके। उन्होंने विभाग की माइनिंग विंग व जियोलॉजी विंग के बीच बेहतर तालमेल बनाकर खनिज खोज और खनन कार्य को बढ़ावा देने और औद्योगिक विकास, निवेश, रोजगार व राज्य सरकार का रेवेन्यू बढ़ाने के साझाा प्रयास करने को कहा। उन्होंने कहा कि राजस्थान विविध और विपुल खनि संपदा वाला प्रदेश है। खनन माफियाओं द्वारा खनिज ब्लाकों के ऑक्शन को विफल कराने के प्रयासों की चर्चा करते हुए कहा कि खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी को सफल बनाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर देना होगा।

श्री कलाल ने खनन क्षेत्र के पूर्व बकाया राशि की युद्ध स्तर पर वसूली करने के निर्देश दिए और कहा कि वसूली प्रयासों में किसी तरह की कोताही बर्दास्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि राजकीय राशि वसूली के लिए सख्ती के साथ ही अप्रिय कार्यवाही भी करनी पड़े तो इसमें कोताही नहीं बरती जाएं। लीजों के बीच गेप एरिया पर हो रहे अवैध खनन की शिकायतों की चर्चा करते हुए कहा कि गेप एरिया के ब्लॉक तैयार कर ऑक्शन की तैयारी करने को कहा। डीएमजी ने जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित अंतर्विभागीय बैठक में अवैध खनन क्षेत्रों और उन पर कार्यवाही के लिए परस्पर सहयोग व समन्वय पर विस्तार से चर्चा करें ताकि आपसी समन्वय से कार्यवाही की जा सके। उन्होंने आवश्यक विभागीय कार्यों को तय समय सीमा में निपटाने के निर्देश दिए।

Fever:- “बुखार:— एक प्रकृति प्रदत्त सुरक्षाचक्र है”

प्रतिष्ठित डॉक्टरों की सलाह-लेकिन कुछ जिम्मेदारी, कुछ दिक्कतें डॉक्टरों और मरीजों की भी पिछले कुछ दिनों दो प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक अखबारों में दो प्रतिष्टित चिकित्सको के लेख पढ़ें, जिन से मुझे वर्तमानं परिस्थितियों में डाक्टर, बीमार, जांच और इलाज पर आम लोगों की कुछ प्रतिक्रियाएं रं आप तक पहुंचाने का साहस हुआ। मैं जिन लेखों की बात कर रहा हूँ उनका शीर्षक है–“बुखार: एक प्रकृति प्रदत्त सुरक्षाचक्र है” तथा “बेअसर होती दवाएं एक नया संकट खड़ा कर सकती है”।

इन लेखों में एनटीबियोटिक दवायों के न्यूनतम उपयोग की सलाह दी है और इनके ज्यादा उपयोग से होने वाले नुकशान की ओर ध्यान आकृष्ठ किया है। एक लेख की जिस बात पर मुझे यह पंक्तियां लिखने के लिए प्रेरित किया वे है” बुखार उताराने की दवा लिवर को थोड़ा बहुत नुकसान हर हालत में पहुंचती है। इसलिए जहां तक सम्भव हो उनका न्यूनतम उपयोग कीजिये। आपका चिकित्सक यदि एंटीबायोटिक का सुझाव देता है तो उसका औचित्य पूछिये। याद रखिये कि जब आप चिकित्सक को परामर्श शुल्क देते है तो फिर परामर्श लेने से हिचकिचाते क्यो हैं?–शरीर प्रकृति द्वारा निर्मित है तो प्रकृति के अनुसार ही जीना है बुखार नहीं बुखार के कारण का उपचार करना है। दूसरे लेख की मुख्य बात यह है कि एंटीबायोटिक दवाओं के ज्यादा, अनावश्यक उपयोग से रोग विषाणुओं में उनसे अपने बचाव के लिए स्वयं में कुछ परिवर्तन कर लेते है और दवा उन पर बेअसर हो जाती है। है। दूसरी, तीसरी व इस से भी आगे की नई नई दवाई आएंगी और रोग विषाणु भी वैसे ही बचाव के तरीके ढूंढेगे और दवाएं बेअसर होती जाएगी।

सर्व प्रथम तो यह डॉक्टर का दायित्व है कि जरूरी से अधिक एंटीबायोटिक या अन्य दवाइयां-जांचे लिखे ही क्यों? किन्तु केवल इतना कह देने से समस्या का निदान नहीं होता। बहुत सी बार मरीज स्वयं पुरानी नुस्खा पर्ची पर दवाई लेता रहता है। अधिकांशतः केमिस्ट भी पर्ची चालू है या पुरानी इस बात को नजरअंदाज करते हैं। सरकारी आदेश से यह सुनिश्चित किया जाना अत्यंत कठिन है कि केमिस्ट चालू नुस्खे पर ही दवा दें, यद्यपि नैतिक दृष्टि से यह उनका दायित्व है। डाक्टर समुदाय की आलोचना नहीं किन्तु कई बार सुनने में आता है कि कुछ लोग अनावश्यक अधिक दवाई-जांचे लिखते हैं। एक ही व्याधि के लिए आवश्यकता से अधिक व एक साथ कई दवाइयां इसलिए लिखते है ताकि मरीज जल्दी ठीक हो जाए। इस से डॉक्टर का फौरी प्रचार-प्रसार हो जाता है। ज्यादा मरीज उनसे इलाज कराने को आकर्षित होते हैं। इस प्रकार की प्रवर्ती ग्रामीण इलाकों, छोटे शहरों में कार्यरत परामर्श देने वालों में व गरीब व निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों के बीमार व्यक्तियों में ज्यादा देखी जाती। गरीब, अल्पाय व दैनिक आमदनी भोगियों की अपनी समस्या है। उनके लिए बार बार डॉक्टर के पास जाना, बीमार होना धन उपलब्धता व रोजी रोटी की बहुत बड़ी समस्या उतपन्न कर देता है।वे चाहते है तुरन्त स्वास्थ्य लाभ और रोजगारी कर घर चलाएं। इसलिए अपनी सुविधा या मजबूरी के चलते पुराने नुस्खों पर दवाई लेते रहते हैं। डॉक्टरों की नैतिकता, प्रतिबद्धता की भी कई अत्यंत उम्मदा/उत्कृष्ट कहानियां भी जन सामान्य से सुनने को मिलती है। यहां बिना नाम लिखे में कुछ डॉक्टर्स की नैतिकता व पेशे के स्टैंडर्ड्स के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के बारे में लिखना चाहता हूं।

सर्व प्रथम तो यह डॉक्टर का दायित्व है कि जरूरी से अधिक एंटीबायोटिक या अन्य दवाइयां-जांचे लिखे ही क्यों? किन्तु केवल इतना कह देने से समस्या का निदान नहीं होता। बहुत सी बार मरीज स्वयं पुरानी नुस्खा पर्ची पर दवाई लेता रहता है। + अधिकांशतः केमिस्ट भी पर्ची चालू है या पुरानी इस बात को नजरअंदाज करते हैं। सरकारी आदेश से यह सुनिश्चित किया जाना अत्यंत कठिन है कि केमिस्ट चालू नुस्खे पर ही दवा दें, यद्यपि नैतिक दृष्टि से यह उनका दायित्व है।

एसएमएस अस्पताल के पूर्व अधीक्षक, अत्यंत सम्माननित व वरिष्ठ डॉक्टर रिटायरमेंट के बाद दुर्लभजी अस्पताल में सेवाएं दे रहे थे। एक महिला मरीज उनके पास नुस्खों के पर्चे व दवाओं का ढेर लेकर आई। कहने लगी न जाने कितने डॉक्टरों को दिखा लिया और कितनी दवाई खा ली किन्तु पेट की तकलीफ ठीक ही नहीं हो रही। डॉक्टर में बड़े ध्यान से धैर्यपूर्वक उसे सुना और जो कहा वह हूबहू लिख रहा हूँ–ठीक है माता जी, यह दवाइयां बंद करदो और यह एक दवाई 5-7 दिन लेना और फिर भी कभी ऐसा ही हो तो खाने के आधा पौण घण्टे पहले ले लिया करो, आराम आजाएगा। शायद, उस समय 5 रुपए की दवा नें उसे राहत दे दी। ओर भी बहुत से ऐसे डाक्टर होंगे किन्तु शायद वे डॉक्टर्स की कुल संख्या की तुलना में कम ही होंगे। बहुत पहले, करीब 40 साल पहले कोटा में एक बच्चों के डॉक्टर थे। उनका उसूल था कि अस्पताल समय खत्म होने पर चाहे 100 आदमी लाइन में हों, जब तक लास्ट मरीज को नहीं देख लेते थे, सीट नही छोड़ते थे। दो जगह घर पर देखते थे, शायद 5 रुपये फीस, उसमें भी कोई अत्यंत गरीब मजदूर नहीं दे सके तो नहीं लेते थे और सेम्पल की दवाइयां ऐसे लोगों को देते थे। जयपुर के एक डॉक्टर ने एक मरीज को कुछ जांच करने के लिए पर्ची लिखी। मरीज पास के जांच सेंटर में जांच कराने पहुंचा। उस से पहले व्यक्ति से, जांच केंद्र वाले ने एक राशि वसूल की और इस व्यक्ति से उससे काफी कम राशि ली। उस व्यक्ति नें पूछ लिया, भाई इतना अंतर क्यों? उसका जवाब था, आप जिस डॉक्टर को दिखा कर आये हो वे हमारे से कमीशन नहीं लेते, सो उतना कम कर देते है। सम्बंधित डॉक्टर भी एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक पद से रिटायर हुए है। जेनेरिक दवाइयों को लेकर भी कई भ्रांतियां, समस्याएं हैं। सबसे बड़ी समस्या तो यह है कि इनके नाम बहुत बड़े व आसानी से मरीज और शायद, डॉक्टर भी, याद रख सके ऐसे नहीं।

उदाहरण के लिए पेट में एसिडिटी एक सामान्य समस्या है और कई संक्षिप्त नाम यथा टोप्सिड आदि लेने का परामर्श डॉक्टर देते हैं। इसका जेनेरिक नाम है–Pantoprazole gastro resistant and Compartidone prolonged release capsules. आदि। इसी प्रकार के नाम अन्य छोटी छोटी शारीरिक व्याधियों की दवाइयों के है। जेनेरिक दवाइयों के बड़े नाम होंने के कारण निजी क्षेत्र में काम करने वाले अधिकांश डॉक्टर्स ब्रांडेड नाम से ही दवाइयां लिखते है। अपने घरों पर परामर्श देने वाले सरकारी डॉक्टर्स भी यही करते हैं।

इसके लिए सरकार के स्तर से रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, बुखार, जुकाम, विभिन्न प्रकार के वाइरल बुखार, एंजाइना व हृदय सम्बन्धी अन्य बीमारियों की व अन्य इसी प्रकार की सामान्य बीमारियों के लिए छोटे ब आसानी से याद रहने वाले नाम दिए जाएं। ऐसा सॉफ्टवेयर तालिका तैयार हो जिस से जनऔषधि स्टोर्स, सरकारी औषधि वितरण केंद्र से जो औषधि जेनेरिक नाम से बेची-इश्यू की जाए, उसके बिल में साथ यह संक्षिप्त नाम ऑटोमेटिक अंकित हो जाए। इस से मरीज आसानी से ध्यान रख सकेगा कि कोन सी दवाई किस बीमारी के लिए है।

जेनेरिक दवाइयों की गुणवत्ता (क्वालिटी) पर आम जन का विश्वास भ्रांतियों के कारण अथवा कुछ कुछ सही कारणों से, अभी तक जमा नहीं। एक सरकारी डॉक्टर साहब से लेखक में पुछ लिया की जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता के सम्बंध में उनका क्या विचार है? उन्होंने काउंटर प्रश्न कर लिया कि मेरी इस सम्बंध में क्या राय है? मेरे पास एक मरीज का बताया अनुभव था, वैसा उन्हें बता दिया कि उसने उच्च रक्तचाप नियंत्रण के लिए जनऔषधि स्टोर से जेनेरिक दवाई ली किन्तु उसे वापस सम्बंधित ब्रांडेड दवा लेनी पड़ी। डॉक्टर महोदय ने बड़ी सधी प्रतिक्रिया दी कि दवाओं की कीमत तो कम होनी ही चाहिए और जेनेरिक दवाइयों के जरिये यह किया जा रहा है। बहुत से मरीज लाभान्वित भी हो रहे है। यह भी सही है कि कई लोग गुणवत्ता के सम्बंध में आशंका तो व्यक्त करते हैं। आगे उनका कहना था कि क्वालिटी सुनिश्चित करने के लिए सरकार में ड्रग विभाग के अधिकारियों के लिए निरीक्षण, बनती दवाओं की क्वालिटी जांच व बाजार में आई दवाओं के औचक नमूने लेना व गुणवत्ता जांचना आदि कई प्रावधान कर रखे है किन्तु अंततोगत्वा यह सब करने वालों में से कुछ लोग, विभिन्न प्रलोभनों या कर्तव्यहीनता के चलते कहीं न कहीं शिथिलता बरतते होंगे और खराब क्वालिटी औषधियां बाजार में आ जाती है। अंत में फीस देकर परामर्श के लेना व मरीज अधिकारपूर्वक सारी जानकर लेने की राय पर राय सोलह आने सही किन्तु हर मरीज डॉक्टर से लगातार तो पुछ नहीं सकता और अधिकांशतः एक जवाब होता है, बाहर सिस्टर या कम्पाउंडर या केमिस्ट सब समझा देंगे। क्या हम यह आशा कर सकते है, कि एक गरीब, अल्पशिक्षित, अल्पाय वाला व्यक्ति डॉक्टर जिसके क्लिनिक पर बाहर 100-50 मरीजों की लाइन लगी हो, वह बार-बार अपनी शंका समाधान की बात पूछने का साहस करेगा? यह काम तो स्वयं डॉक्टर का दायित्वबोध ही करेगा कि वह बोल कर या लिख कर दवाइयों-जांचों की आवश्यकता को विस्तार से मरीज को समझाये।

-महावीर सिंह, पूर्व आईएएस

INDIA ELECTION:- एक देश-एक चुनाव की तैयारी

0

देश में सरकार 2029 में एक साथ सभी चुनाव के कराने की तैयारी कर रही है। संविधान में अलग खंड जोड़ने की तैयारी, कोविंद कमेटी से विधि आयोग करेगा सिफारिश, संविधान के सभी प्रावधानों को रखा जाएगा साथ, कम से कम परिवर्तनों के साथ एक साथ चुनाव अवधारणा की जाएगी शामिल, संसद के साथ विधानसभाओं में पास कराना होगा विधेयक।

विधि आयोग की 2029 के मध्य तक त्रिस्तरीय चुनाव एक साथ कराने की कवायद, अगले 5 साल में 3 चरणों में विधानसभाओं के कार्यकाल एक साथ करने की भी सिफारिश, सेवानिवृत्त जस्टिस ऋतुराज अवस्थी की अध्यक्षता वाला आयोग करेगा सिफारिश, चुनाव पर नया अध्याय या खंड जोड़ने के लिए संविधान संशोधन की करेगा सिफारिश, ताकि त्रिस्तरीय चुनाव एक साथ एक ही बार में हो सके, विधि आयोग के अलावा एक उच्च स्तरीय समिति भी कर रही रिपोर्ट पर काम, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में कार्य कर रही उच्च स्तरीय समिति, कि कैसे संविधान और कानूनी ढांचे में बदलाव करके लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, नगर पालिकाओं और पंचायतों के लिए एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं।

GOVERNMENT JOB:- “दो से ज्यादा बच्चे तो सरकारी नौकरी नहीं”

0

राजस्थान की पिछली सरकार के दो बच्चों के नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मंजूरी की मुहर लगाते हुए कहा है कि “दो से ज्यादा बच्चे होने पर सरकारी नौकरी देने से इनकार करना भेदभावपूर्ण नहीं है.” 2 से ज्यादा बच्चे होने पर राजस्थान पुलिस में नौकरी नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा राजस्थान हाईकोर्ट का निर्णय, याचिका की खारिज, एक्स सर्विसमैन रामजीलाल जाट ने 2017 में रिटायरमेंट के बाद पुलिस कांस्टेबल भर्ती के लिए किया था आवेदन, 2 से ज्यादा बच्चे होने पर आवेदन निरस्त होने को राजस्थान हाईकोर्ट में दी थी चुनौती, हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के निर्णय को माना सही, याचिका की खारिज।

PHED:- पानी की चोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी -जलदाय मंत्री

    

जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं भूजल विभाग मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने जिला कलेक्टर सभागार जोधपुर में कहा कि प्रदेश में प्रत्येक क्षेत्र में आमजन तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना हमारी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अवैध कनेक्शनों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि विभागीय अधिकारी अभियान चलाकर जांच करवाएं और इन कनेक्शनों को तत्काल प्रभाव से हटाये। उन्होंने कहा कि पानी की चोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमारा प्रयास हो कि पानी की छीजत और चोरी रोक कर अंतिम छोर तक सुचारू रूप से जलापूर्ति हो।

श्री चौधरी ने कहा कि अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने के लिए पानी की छीजत रोकने पर विशेष ध्यान देने के साथ ही आवश्यकतानुसार परियोजनाओं के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजे। राज्य सरकार उन पर गुणावगुण के आधार पर निर्णय लेगी।

मंत्री ने बताया कि जलदाय विभाग से संबंधित निविदाओं एवं कार्याे में पूरी पारदर्शिता बरती जाए, कहीं भी अनियमितता या लापरवाही सामने आई तो सरकार एक्शन लेगी। उन्होंने कहा कि विभाग के उच्च अधिकारी भी परियोजनाओं एवं जल प्रदाय कार्याे का नियमित निरीक्षण करें। अधूरा कार्य छोड़ने वाली कॉन्ट्रेक्ट फर्माे पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी फर्माे की जांच कर इनके विरूद्ध आवश्यक कार्यवाही करें।

RPSC:— नई भर्ती का विज्ञापन जारी आवेदन 5 अप्रेल तक

राजस्थान लोक सेवा आयोग सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में जनसंपर्क अधिकारी के 6 पद और कृषि विभाग में कृषि अधिकारी के 25 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया है। शैक्षणिक योग्यता, वर्गवार वर्गीकरण, आवेदन प्रक्रिया व अधिक जानकारी के लिये आयोग की वेबसाइट अवलोकन करें।

आयोग सचिव ने बताया कि जनसंपर्क अधिकारी के पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन 5 मार्च से 3 अप्रेल 2024 की रात्रि 12 बजे तक एवं कृषि अधिकारी के पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन 7 मार्च से 5 अप्रेल 2024 की रात्रि 12 बजे तक किए जा सकेंगे। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उक्त भर्तियों की परीक्षा तिथि व स्थान के संबंध में यथासमय सूचित कर दिया जाएगा।

भू-रूपांतरण सहित समस्त लंबित राजस्व प्रकरणों का त्वरित निस्तारण हो -जिला कलक्टर

0

जयपुर के कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित राजस्व अधिकारियों की बैठक में कलक्टर प्रकाश राजपुरोहित ने जिले में भू-आवंटन, औद्योगिक प्रयोजनार्थ भू-संपरिवर्तन, नामान्तरण, सीमाज्ञान, कुर्रेजात, पत्थरगढ़ी एवं सहित सभी तरह के लम्बित राजस्व प्रकरणों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को कुर्रेजात के मामलों को भी त्वरित गति से निस्तारित करने के निर्देश दिये, ताकि आमजन को जल्द से जल्द राहत प्रदान की जा सके।

उन्होने जिले में राजस्व अधिकारी भू-रूपांतरण सहित राजस्व से संबंधित सभी प्रकार के प्रकरणों का प्राथमिकता से निस्तारण करने कहा। ताकि आमजन को जल्द से जल्द राहत मिल सके।  कलक्टर ने कहा सभी राजस्व अधिकारी 31 मार्च तक अपने न्यायालय में दर्ज राजस्व प्रकरणों में कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित करें एवं लक्ष्य हासिल करने के लिए सप्ताह में कम से कम तीन दिन कोर्ट लेकर ज्यादा से ज्यादा दावों की सुनवाई करें।

उन्होंने अधिकारियों को रबी की फसल की जल्द से जल्द गिरदावरी करवाने एवं राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज परिवादों का निस्तारण कर आमजन को राहत देने के निर्देश। बैठक में कलक्टर ने राजस्व अधिकारियों को जाति प्रमाण पत्र एवं मूल निवास प्रमाण पत्र के लिए प्रक्रिया का सरलीकरण के निर्देश दिये। साथ ही, उन्होंने कहा कि पेंशन संबंधी प्रकरणों का भी निस्तारण त्वरित गति से करने के लिए राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया।

गिरता भू-जल स्तर चिंता का विषय —डॉ. समित शर्मा

0

प्रदेश में जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में अटल भूजल योजना के तहत एक दिवसीय आमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन हुआ। आयोजन की अध्यक्षता करते हुए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने कहा कि प्रदेश में गिरता भूजल स्तर चिंता का विषय है। जल संचयन सहित अन्य विधियों से भूजल स्तर में सुधार करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके लिए अटल भूजल योजना मील का पत्थर साबित होगी लेकिन इसके लिए योजना के तहत शत-प्रतिशत लक्ष्यों को हासिल करना होगा।

उन्होंने कहा कि राजस्थान के 17 जिलों के 38 ब्लॉक, 1132 ग्राम पंचायत में क्रियान्वित की जा रही अटल भूजल योजना के माध्यम से जन सहभागिता से गिरते हुए भूजल स्तर की रोकथाम हेतु सकारात्मक परिणाम लाने की आवश्यकता है।

श्री शर्मा ने योजना के माध्यम से जल मांग एवं जल आपूर्ति आधारित कार्यों को समय पर पूर्ण किये जाने की आवश्यकता पर बल दिया। सभी सहभागी विभागों से आग्रह किया गया कि योजनान्तर्गत इस वित्तीय वर्ष एवं आगामी अवधि में प्रोत्साहन राशि का पूर्ण उपयोग एवं कन्वर्जेन्स राशि के कार्यों को पूर्ण कर अन्य राज्यों की तुलना में राज्य की स्थिति को बेहतर बनाए जाने हेतु अथक प्रयास करें।

आयोजन में राज्य और जिला नोडल अधिकारियों, राज्य, जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाईयों के अधिकारी और विषय विशेषज्ञ, अटल भूजल योजना के 38 ब्लॉकों से ग्रामीण जल स्वच्छता समिति के सदस्यगणों, जिला क्रियान्वयन इकाई व भूजल विभाग के अधिकारी सहित लगभग 750 प्रतिभागियों ने भाग लिया।