सौ दिवसीय कार्ययोजना और बजट घोषणाओं की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सौ दिवसीय कार्ययोजना में शामिल सभी बिंदुओं और लेखानुदान 2024-25 की घोषणाओं को समयबद्ध रूप से पूरा करने के लिए नियमित रूप से माॅनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि आगामी गर्मी के मौसम के लिए बिजली, पानी एवं चिकित्सा संबंधी कंटिन्जेंसी प्लान विभागीय एवं जिला स्तर पर समय रहते तैयार कर लिए जाएं ताकि आमजन को परेशानी का सामना नहीं करना पडे़।

श्री शर्मा सोमवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में सौ दिवसीय कार्ययोजना में शामिल बिन्दुओं, बजट घोषणाओं सहित अन्य घोषणाओं की क्रियान्विति को लेकर विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेशकों को अधिकाधिक आकर्षित करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के नियमों का सरलीकरण किया जाए। उन्होंने उद्यमियों को औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए भूमि, बिजली एवं पानी सहित विभिन्न सुविधाएं एवं स्वीकृतियां प्रदान करने में लगने वाले समय को कम करने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए संभाग स्तर पर खेल सुविधाओं को विकसित किया जाए ताकि मिशन ओलंपिक-2028 के लिए युवाओं को प्रतिस्पर्धी माहौल और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण एवं संसाधन उपलब्ध करवाये जा सकें। उन्होंने विश्वविद्यालयों में भी खेल सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर बल दिया।

उन्होने ने कहा कि सभी विभागों से रिक्त पदों की जानकारी लेकर आवश्यकतानुसार भर्ती प्रक्रिया का कलेण्डर बनाया जाए। उन्होंने विभिन्न विभागों की भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी एवं सुचारू ढंग से आयोजित कराने के लिए पुलिस, कार्मिक एवं संबंधित विभाग के  उच्चस्तरीय अधिकारियों की कमेटी के गठन के निर्देश दिए। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में खेल कोटे के तहत दी जाने वाली नियुक्तियों में नियमों के स्पष्टीकरण हेतु खेल विभाग व कार्मिक विभाग को उचित कार्यवाही के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा के साथ ही स्कूल शिक्षा में भी कौशल विकास को जोड़ा जाए ताकि युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्रदान किये जा सके। उन्होंने कहा कि मिड-डे-मील योजना में भोजन की गुणवत्ता की जांच करने एवं कार्यालयों में शौचालय आदि स्वच्छता संबंधी बिंदुओं की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक को अपनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने राजस्व मामलों के निस्तारण के संबंध में संभागीय आयुक्त के स्तर पर प्रगति रिपोर्ट तैयार करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन प्रकरणों के निस्तारण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा एवं लापरवाही करने वाले अधिकारियों के विरूद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

श्री शर्मा ने एंटी रोमियो स्क्वायड के गठन के कार्य को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिला सशक्तिकरण हेतु भयमुक्त वातावरण बनाना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने लाडली सुरक्षा योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए सार्वजनिक स्थलों, बालिका छात्रावासों एवं नारी निकेतन परिसरों में सीसीटीवी कैमरे शीघ्र लगवाने के भी निर्देश प्रदान किए।

मुख्यमंत्री ने बृज चैरासी परिक्रमा मार्ग में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना में घरों पर सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए अधिकाधिक प्रचार-प्रसार किया जाए।

ईआरसीपी के लिये मुख्यमंत्री का पूर्वी राजस्थान दौरा जारी

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान बरसों से पानी की कमी से जूझता आ रहा है। इसलिए प्रदेशवासी इसके महत्व से भली-भांति परिचित हैं। ऐसी स्थिति में पूर्वी राजस्थान की प्यास बुझाने वाली संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना प्रदेश को पानी के मामले में समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

श्री शर्मा ने पूर्वी राजस्थान दौरे के दूसरे दिन सवाई माधोपुर, दौसा और टोंक सहित विभिन्न जिलों में आयोजित आभार एवं स्वागत सभाओं को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को पानी के मामले में समृद्ध बनाने के लिए हमने इसका बजट 37 हजार करोड़ रूपये से बढ़ाकर 45 हजार करोड़ कर दिया है। उन्होने कहा कि हमारी सरकार मजदूर, युवा, महिला और किसानों की सरकार है। हमने मात्र दो महीने के कार्यकाल में ही संकल्प पत्र के वादों को पूरा करना प्रारम्भ कर दिया है। राज्य सरकार 70 हजार सरकारी पदों पर भर्ती कर युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाएगी। साथ ही उनके कौशल में वृद्धि कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को कड़ी सजा दिलाने के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। यदि आवश्यकता हुई तो ऐसे मामलों की सीबीआई से भी जांच करवाई जाएगी। उन्होने कहा कि शक्ति और भक्ति की इस पावन धरा पर गुण्डाराज को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रदेश को गैंगवार से मुक्त करने के लिए एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स गठित की गई है। साथ ही, राज्य सरकार ने 73 लाख परिवारों की महिलाओं को 450 रूपए में गैस सिलेण्डर, गेंहू की एमएसपी पर 125 रूपए का अतिरिक्त बोनस तथा किसान सम्मान निधि की राशि में 2 हजार रूपए की वृद्धि जैसे कई जनकल्याणकारी निर्णय लिए हैं।

देश में  01 जुलाई 2024 से लागू होगें तीन नये कानून

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देश में अब 01 जुलाई 2024 से तीन नये कानून लागू होगें। इससे आमजन को काफी राहत मिलने की संभावना है। देश में सरकारी कर्मचारीयों और न्यायाधीशों पर क्रिमिनल केस चलाने हेतु अनुमति लेने संबंधी प्रावधानों में बदलाव हुआ है। अब संबंधित कोर्ट जिसमें क्रिमिनल केस पेश होगा, उस कोर्ट का न्यायाधीश ही केस चलाने की अनुमति दे सकेगा। वहीं अब शासन की या उच्च न्यायालय‌ से अनुमति की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं होगी।

लंबे समय तक लिव इन पार्टनर को साथ रखकर, शादी के मुगालते में रखकर सेक्स करते रहना अब कानून में अपराध घोषित, बलात्कार नहीं माना जायेगा लेकिन सजा कम से कम दस साल से लेकर आजीवन कारावास तक होगी। वहीं माब लीचिंग या भीड़ द्वारा किसी जुनून में की जाने वाली किसी की मारपीट या हत्या अब घोषित व परिभाषित अपराध होगा और सजा कम से कम 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक होगी ।

दूसारी और जाति, धर्म और वर्ग आदि के नाम पर किये जाने वाले उपद्रव अब घोषित व परिभाषित अपराध होंगें। वहीं जमानत के लिये अब कानून विधि और तरीकों को फिक्स किया है।  किसकी जमानत होगी और किसकी नहीं होगी अब 90% विधि नियत और परिभाषित होगी। नये कानून में जजों के विवेकाधीन और रहमो करम पर जमानतों के होने न होने का परिणाम 90% समाप्त हो गया है।

एफ आई आर दर्ज करने के कानून में भी बदलाव किया है। अब प्रत्येक एफ आई आर आनलाइन होगी और पब्लिक दर्ज करा सकेगी। अब एफ आई आर थाने में आये फरियादी की दर्ज करना भी पुलिस की बाध्यता होगी। देश में शून्य एफ आई आर प्रणाली लागू होगी। इसके तहत कोई भी व्यक्ति अब भारत में कहीं भी किसी भी थाने में एफ आई आर दर्ज करा सकेगा।अब पहली बार कोई भी व्यक्ति जो एफ आई आर नही़ दर्ज करने से दुखी है वह सीधे ही एफ आई आर कोर्ट मे़ प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट को दे सकेगा और मजिस्ट्रेट उसे कोर्ट में एंट्री कर सीधे संबंधित थाने को फारवर्ड करेगा। ऐसी प्रत्येक एफ आई आर तुरंत दर्ज करना पुलिस की ड्यूटी होगी, अन्यथा उसे बर्खास्त कर दिया जायेगा और संबंधित कानून में गिरफ्तार कर जेल भी भेजा जायेगा।

अब प्रत्सेक केस का फैसला 3 साल के भीतर सुनाना अनिवार्य होगा। चालान पेश करने, विवेचना करने की भी अवधियां फिक्स हुईं। प्रत्येक पुलिस अधिकारी, कोर्ट के अधिकारी, कर्मचारी और वकील का आनलाइन होना अब जरूरी रहेगा, प्रत्येक एफ आई आर, रोजनामचा, केस डायरी, विवेचना, प्रतिवेदन, चालान, कोर्ट की डेली प्रोसीडिंग्स, आर्डर शीटें, कार्यवाहियां और सुनवाई आनलाइन होंगीं। सभी प्रकार के कोर्ट केसेज और दस्तावेज शपथ पत्र (वीडियो ओथ रिकार्डिंग) आनलाइन कोर्ट पोर्टल पर आनलाइन वीडियो रिकार्डिंग से होंगें।

अब 01 जुलाई से वकील आनलाइन वीडियो कान्फ्रेंसिंग से अपने पक्षकार / गवाह सहित उपलब्ध होंगें और एक ही दिन वी सी के जरिये देश के अनेक कोर्ट अटेंड कर सकेंगें ।

मोबाईल फोन चोरी या खोने पर मोबाईल ब्लॉक करने की करें कार्यवाही

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मोबाईल फोन चोरी/खोने पर तुरंत CEIR पर मोबाईल ब्लॉक करने की कार्यवाही करें। CEIR पर मोबाईल ब्लॉक करने हेतु निम्न steps अपनाये।

1.सबसे पहले मोबाईल खोने/चोरी होने पर मिसिंग/प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराये।

2.मिसिंग रिपोर्ट url – https://www.police.rajasthan.gov.in पर lost articles report  पर जाकर ऑनलाईन भी दर्ज करवाई जा सकती हैं।

3.खोये/चोरी हुये मोबाईल नंबर की नई सिम मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनी से प्राप्त करें और ओटीपी सुविधा प्रारंभ होने तक 24 घंटे इंतजार करें।

4.CEIR(https://www.ceir.gov.in)  के होमपेज पर जाकर Block Stolen/Lost Mobile ऑप्शन का चयन करें।

5.मोबाईल ब्लॉक फॉर्म step by step फिल करे।

6.मिसिंग/प्रथम सूचना रिपोर्ट, जो आपने पुलिस थाने या पुलिस वेब पोर्टल पर दर्ज करवाई है, की प्रति अपलोड करें।

7. मोबाइल ब्लॉक फॉर्म सबमिट करे और प्राप्त request id को सुरक्षित रखे।

8. जैसे ही खोया/चोरी हुआ मोबाईल फोन उपकरण नये मोबाईल नंबर के संपर्क में आयेगा, तो वह नम्बर traceability report में दर्ज हो जाएगा।

9. यह traceability report पुलिस को उपलब्ध होगी और आप भी request id से check imei request status के ऑप्शन जाकर देख सकते हैं।

10. मोबाइल ट्रेस होने पर संबंधित पुलिस थाने से संपर्क कर अपने मोबाईल की तलाश करवाकर प्राप्त करें।

11. खोया हुआ मोबाईल मिलने पर CEIR के होमपेज पर जाकर Un-Block Found Mobile ऑप्शन का चयन करें और मोबाईल को Un-Block  कर काम में लेवें।

रेलवे ने घटाया किराया, 50 किमी. यात्रा के लिए लगेंगे अब महज इतने रुपये, आदेश जारी

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नई दिल्ली रेलयात्रियों के लिए खुशखबरी है। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले भारतीय रेलवे बोर्ड ने जनरल टिकट का किराया कम कर दिया है। अब जनरल टिकट लेकर 50 किलोमीटर सफर करने के लिए मात्र 10 रुपए किराया देना होगा। यह पहले 30 रुपए था। शुक्रवार को रेलवे बोर्ड ने तत्काल प्रभाव से आदेश जारी कर दिया है। बताते चलें कि, कोरोना काल तक यही किराया था, लेकिन इसके बाद जब ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया, तो रेलवे ने किराया बढ़ाकर 10 से 30 रुपये कर दिया। रेलवे बोर्ड ने यूटीएस सिस्टम और यूटीएस एप में बदलाव करने का आदेश जारी कर दिया है। लोकल टिकट बुकिंग करने वाले आईआरसीटीसी के सॉफटवेयर में भी बदलाव आदेश जारी कर दिए गए हैं।
दैनिक रेलयात्रा में तीन गुना पैसा चुका रहे मजदूरों और दैनिक यात्रियों को भारतीय रेलवे बोर्ड के इस फैसले से बड़ा लाभ होने जा रहा है। अब 50 किलोमीटर की परिधि में रहने वाले लोग मात्र 10 रुपए में आवाजाही कर सकेंगे। फिर चाहे जयपुर के रेलयात्री हों या भोपाल के। दिल्ली के रेलयात्री हों या फरीदाबाद के। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि 50 से हर 10 से 15 किलोमीटर तक यात्रा करने पर 5 रुपए बढ़ जाता है। इसका मतलब यह कि अब 30 रुपए में यात्री 90 किलोमीटर तक की यात्रा कर पाएंगे।
रेलवे ने कोरोना काल में लोकल ट्रेनों को एक्सप्रेस ट्रेन के रूप में नामित कर दिया था। सामान्य ट्रेनों का संचालन भी बंद कर दिया गया था। इसके कारण इनका किराया 10 रुपए से बढ़कर 30 रुपए हो गया था। एक्सप्रेस ट्रेनों का सबसे कम किराया 30 रुपए है। अब फिर से इसे सामान्य कर दिया है, तो यह किराया कम हो गया है। इससे देश के लाखों दैनिक यात्रियों को लाभ होने जा रहा है। ट्रेनों की श्रेणी बदलने से अन्य यात्रियों को भी लाभ हो सकता है।

क्या मोदी जी से पहले भारत मृत था, क्या ये उपलब्धियां भूतों की देन हैं

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अभी कुछ दिनों पहले अमित शाह ने जयपुर मे कहा कि भले ही देश 1947 में आजाद हुआ लेकिन इसमें प्राण अब मोदी जी ने फूंके हैं। कभी-कभी ये राजनेता भी कितनी बेतुकी बातें कर जाते हैं। सन् 1947 से अब तक क्या भारत एक शव था ॽ या मोदी जी में भारत के ऋषि-मुनियों की तरह इतनी तप ताकत थी कि वे किसी भी मृत को जीवित कर सकते थे। इसे कहते हैं बहकना और देश का दुर्भाग्य कि एक-आध को छोड़ कर मौजूदा अखबार भी हूबहू वही छाप देते हैं जो ये नेता लोग किसी भी मंच से कह देते हैं। राजस्थान में एकमात्र राष्ट्रदूत समाचार-पत्र है जो किसी नेता की ख़बर को हूबहू नहीं छापता बाकी अमूमन सब लकीर के फकीर बने हुए हैं।
एक जमाना था जब नेता कुछ भी कहता अखबार उसके कहे को तुलनात्मक विवरण देकर प्रकाशित करते थे लेकिन अब कोई अखबार इतनी जहमत नहीं करता। क्योंकि अब लगभग सभी समाचार-पत्र सत्ता के सिर्फ पेम्पलेट हो गए हैं। अमित शाह ने जो कहा वह किसी ने लीड खबर बना कर छाप दिया तो किसी ने बेनर खबर छापी। बस हो गई पत्रकारिता। क्या भारत परमाणु हथियार सम्पन्न राष्ट्र भूत-प्रेतों के दौर में बना ॽ क्या मोदी जी से पहले सभी पार्टीज के पीएम मृत प्राय थे ॽ क्या भारत देश अब तक पाषाण था ॽ विडम्बना है इस देश की कि कोई कुछ भी बोल जाता है और अखबार वाले उसे वैसा ही छाप कर इतिश्री कर लेते हैं।
भारत में दूरसंचार क्रान्ति राजीव गांधी की देन है, भारत को डिजिटल इंडिया राजीव ने बनाया, टेलीमैटिक्स की स्थापना राजीव ने की। देश भर के हर शहर और गांव में दूरसंचार का जाल बिछाया, 18 साल की उम्र को मताधिकार दिलवाया, पंचायती राज राजीव की देन है। अयोध्या में विवादित स्थल का ताला खुलवाया, 1989 में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की इजाजत दी, राम मंदिर निर्माण की मांग भी सबसे पहले 1985 में महंत रघुवर दास जी ने की थी। देश में आईटी के उपयोग की शुरुआत राजीव ने की थी। ई-गवर्नेंस की नींव रखी थी। राजीव गांधी से पहले उनकी मां श्रीमती इंदिरा गांधी ने बांग्ला देश को स्वतंत्रता दिलाईं, देश में 20 सूत्रीय कार्यक्रम इन्दिरा गांधी की देन है। बैंकों का राष्ट्रीयकरण इन्दिरा गांधी ने ही किया था। 1974 में पोकरण परमाणु परीक्षण इन्दिरा गांधी की देन है। उस दौर के अख़बार टटोलें उनमें साफ लिखा है कि पोकरण परमाणु परीक्षण के लिए अमेरिका ने सख्त मनाही की थी लेकिन इंदिरा गांधी ने किसी की परवाह न करते हुए परमाणु परीक्षण कर दिया। तब से इंदिरा गांधी को आयरन लेडी कहा जाने लगा।उनके बाद नरसिंहराव सरकार ने देश को आर्थिक संकट से मुक्ति दिलाई। 10 भाषाओं में बात करने का माद्दा रखने वाले एक मात्र पीएम नरसिंहराव थे। इन्हें ही भारतीय आर्थिक सुधारों का जनक कहा गया है। अयोध्या बावरी मस्जिद ढहाए जाने की ताक़त भी नरसिंहराव ने ही दिखाई थी। ये सब उपलब्धियां इन्ही प्रधानमंत्रियों की देन है जबकि अमित शाह कहते हैं कि मोदी जी ने भारत में प्राण फूंके। वे तो यह भी कह सकते हैं कि भारत को आजादी भी मोदी जी के तप करने से मिली। भारतीय अर्थव्यवस्था में जबरदस्त बदलाव और सुधार कब आए, आर्यभट्ट, मंगल ग्रह, वायरलैस टेलीफोन, सुपर कम्प्यूटर कब आए, नैनो कार का निर्माण कब हुआ, दूध और मक्खन का विश्व में सबसे बड़ा उत्पादक भारत कब बना, रेल्वे का जबरदस्त नेटवर्क एयरपोर्ट काउंसलिंग इंटरनेशनल ने इंदिरा गांधी हवाईअड्डे को सर्वश्रेष्ठ हवाई अड्डे का खिताब कब और किसने दिया। कामरान की मिड डे मील योजना कब लागू हुई, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम विश्व के सबसे बडे कार्यक्रमों में से एक किसके समय में घोषित हुए और पंचवर्षीय योजनाएं कब बनी और कब लागू हुई।
आश्चर्य, घोर आश्चर्य कि लोग पढते कम हैं। इसीलिए जिसके मन में जो आया फेंक देता है। अंतरिक्ष अनुसंधान, इंटरनेट तकनीक, कृषि, भारी उद्योग, सिंचाई, ऊर्जा उत्पादन क्षमता किसके दौर में विकसित हुई, समुद्र विज्ञान किसके दौर में सुदृढ़ हुआ। अमित शाह की मानें तो मोदी जी के आने से पहले तो भारत मुर्दा था। उन्होंने आकर इसमें प्राण फूंके। काश, कुछ भी बोलने से पहले थोड़ा सोच लिया करें कि क्या बोल रहे हैं।

राजस्थान में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल

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RAS Transfer: गुरुवार रात राजस्थान सरकार द्वारा जिन 396 आरएएस अधिकारियों का तबादला किया गया है, उसमें चार एपीओ अधिकारियों को पोस्टिंग दी गई है। इनमें से तीन अधिकारी सरकार बदलने के बाद से एपीओ चल रहे थे वहीं एक अधिकारी को मुख्य सचिव (सीएस) के हाल ही जेडीए में औचक निरीक्षण के बाद एपीओ किया गया था।
गहलोत सरकार में सीएमओ में तैनात आरएएस अधिकारी शाहीन अली खान को अतिरिक्त निदेशक, एचसीएम रीपा, आरएएस अजय असवाल को अतिरिक्त आयुक्त कॉलेज शिक्षा और आरएएस गौरव बजाड़ को हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार के पद पर पोस्टिंग दी गई है। साथ ही कुछ दिन पहले सीएमओ में विशेषाधिकारी बनाए गए आरएएस अधिकारी रामरतन सौंकरिया को हटा दिया गया है।
वहीं सरकार ने उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी के विशिष्ट सहायक को बदल दिया है। पहले आरएएस अधिकारी जगवीर सिंह को दीया कुमारी का विशिष्ट सहायक नियुक्त किया गया था। लेकिन, अब उनकी जगह पर आरएएस ललित कुमार को विशिष्ट सहायक नियुक्त किया है। आरएएस ललित कुमार हमेशा से प्राइम पोस्टिंग पर रहे हैं।

वर्दी के दम पर कुकर्म, थानों में गुनाहों की तहरीरें, क्योंकि यह भारत है

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वर्दी मतलब हर किस्म का गुनाह करने की छूट। आजादी के बाद से यह खूब होता आया है और हो रहा है। वर्दी खाकी हो या खादी की, इसकी ताक़त के दम पर अनेक अपराध हुए हैं और हो रहे हैं। जैसे कि अब पुलिस थानों के क्वाटर में भी बेख़ौफ़ सामूहिक बलात्कार होने लगे हैं। इसी सप्ताह जयपुर के गांधी नगर पुलिस थाने के एक क्वाटर में एक छात्रा से सामूहिक रेप हो गया। यह जयपुर है। राजस्थान की राजधानी जयपुर, जहां से भजन लाल सरकार का चाबुक फ़िलहाल पूरे राजस्थान में चल रहा है लेकिन इस राजधानी की ही बत्ती गुल है। पीड़ित छात्रा जयपुर के गुर्जर घाटी ब्रह्मपुरी की रहने वाली है। उसका कहना है कि पवन नाम के लड़के ने जिससे उसकी दोस्ती थी ने अपने पुलिसकर्मी जीजा नीरज कुमार के क्वाटर में न केवल खुद ने रेप किया बल्कि उसके जीजा नीरज कुमार ने भी किया। फ़िलहाल पुलिस ने पवन को गिरफतार कर लिया है लेकिन नीरज कुमार पर अभी चुप है। अब क्या करेंगे सीएम साहब। क्योंकि जिस पुलिस के बूते पर वे अपराधों को खत्म करने की बात कह रहे हैं उन्ही में से कुछ पुलिसकर्मी ऐसे घिनौने अपराध कर रहे हैं जिनकी वजह से पूरा डिपार्टमेंट बदनाम हो रहा है। लेकिन यह कोई नई बात नहीं है बल्कि इससे पहले भी ऐसे कई अपराध होते रहे हैं। सन् 82 में अज़मेर के क्रिश्चनगंज थाने में काजीपुरा के की कुछ महिलाओं के साथ बहुत-कुछ हुआ। उसके दो वर्ष बाद नसीराबाद के थाने में सुन्दरी नाम की महिला से भी बहुत-कुछ हुआ। इतना कुछ कि सुन्दरी मर गई।
इस जिस्मखोरी और रिश्वतखोरी ने न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के थानों को बहुत बदनाम किया है लेकिन क्या करें, ये दोनों लत ही ऐसी हैं कि जिसे एक बार लगी उसकी मरते दम तक नहीं छूटी, भले ही कुछ भी हो जाए। धरती का कोई भी क़ानून इन्हें अब तक न तो खत्म करे पाया है और न ही कर पाएगा। हाल ही यूपी के देवरिया जिले में बैतालपुर पुलिस चौकी इंचार्ज अंकित कुमार सिंह ने अपने ही विभाग में कार्यरत आजमगढ़ की महिला कांस्टेबल को अपने प्रेम जाल में फंसाकर उससे शारीरिक संबंध बनाए, उसकी न्यूड तस्वीरें उतारी, न्यूड वीडियो बनाया, दो बार गर्भपात भी कराया। लेकिन शादी की बात आने पर इन्कार कर दिया। मामला एसपी के पास पहुंचा तो अंकित को सस्पेंड कर दिया गया। कल ही यूपी के सुल्तानपुर में एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी अपनी ही किराएदार महिला के 9 वर्षीय बेटे से अप्राकृतिक मैथुन करते पाए गए। महिला की शिक़ायत पर उनके खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया। दो महीने पहले अलवर के रैणी थाने में तैनात पुलिसकर्मियों ने एक नाबालिग़ बच्ची से गैंग रेप कर लिया। बच्ची की मां ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई और बताया कि ये तीनों बच्ची के भाई को आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार करने का डर बिठा कर उससे दो वर्षों से दरिंदगी कर रहे हैं। नवम्बर 2023 में जयपुर में एक कोचिंग सेंटर में पढने वाली छात्रा को नौकरी दिलाने का लालच देकर एक पुलिस कांस्टेबल ने बलात्कार कर लिया और उसका न्यूड वीडियो भी बना लिया। बसवा, राजस्थान और एमपी से जुड़वां क्षेत्र। यहां महेश गुर्जर नाम के एक पुलिसकर्मी ने एक 30 वर्षीय महिला को गोली मार देने का डर दिखाकर बलात्कार किया लेकिन महिला के चिल्लाने पर गांव वालों ने उसे पकड़ कर पहले पीटा और फिर पुलिस के हवाले कर दिया। नवम्बर 23 में ही दौसा के राहुवास गांव में सब इंस्पेक्टर भूपेन्द्र सिंह ने एक चार वर्षीय मासूम बच्ची से रेप कर लिया।
अब आइये थोड़ा राजस्थान से बाहर चलते हैं। पिछ्ले पांच सालों में दिल्ली पुलिस में 321 पुलिसकर्मी सस्पेंड किये गए। वजह यह कि इन सब पर बलात्कार के अपराध सिद्ध हो गए थे। ऐसे ही पिछ्ले साल 63 पुलिसकर्मियों पर रेप के केस दर्ज हुए। लेकिन अफसोस कि इनमें से 60 पुलिसकर्मी अभी भी ड्यूटी पर तैनात हैं। जो लोग नियमित अखबार पढ़ते हैं उन्हें याद होगा कि मात्र 4 महीने पहले मुम्बई में 8 महिला पुलिसकर्मियों ने अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। इन अधिकारियों ने न केवल उनका यौन शोषण किया बल्कि उनके न्यूड वीडियो भी बनाए। इन सभी पीड़िताओं ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर यह शिक़ायत की। लेकिन कोई कार्रवाई होने से पहले ही वह पत्र वायरल हो गया जिससे पूरे महाराष्ट्र पुलिस विभाग में भूचाल आ गया। इन सब महिला पुलिसकर्मियों ने यह भी कहा कि उच्चाधिकारियों ने यौन शोषण के बाद उनका गर्भपात भी कराया। कुछ अधिकारियों ने तो आफिस में ही रेप किया। ऐसे ही यूपी में एक सरकारी स्कूल टीचर से पुलिस कांस्टेबल ने न केवल रेप किया बल्कि उसका न्यूड वीडियो भी बनाए और उक्त महिला से रूपए भी ऐंठता रहा। अत्यधिक मार और रेप से तंग आकर टीचर ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई तब जाकर कांस्टेबल गिरफ्तार हुआ। ऐसे किस्सों की बहुत लम्बी फेहरिस्त है। लेकिन यह भारत देश है। यहां यह सब दशकों से चलता आया है और न जाने कब तक चलता रहेगा।

मुख्यमंत्री के विभाग में तैयार होते हैं, कूटरचित दस्तावेज

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पिछले अंक में आपने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के खास महकमों में शामिल सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में हुए खेला के बारें में पढ़ा। आज के अंक में आप पढ़ोगे कि कैसे इस खास महकमें में अधिकारियों द्वारा नोट सीट में हेरा—फेरी कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किया जाता है और कैसे नियमों की अनदेखी कर खेला किया जाता है। वैसे इस विभाग के लिये ये कोई नई बात नहीं है। कुछ इसी तरह का खेला विभाग ने 571 पत्रकारों के साथ किया था। जिसका दंश पत्रकार परिवार सहित आज तक झेल रहे हैं।

मामले में आप सभी का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा। सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में वर्ष 2016—17 के लिए वरिष्ठ सहायक पदों की डीपीसी हेतु दिनांक 20 जून 2018 और 20 फरवरी 2023 को विभागीय पदौन्नति समिति की बैठक हुई जिसमें एक बार 10 पदों का उल्लेख किया गया और फिर हेरा—फेरी कर कूटरचित 13 पदों का उल्लेख कर वरिष्ठ सहायकों को पदौन्नत कर दिया गया।

आपको बतादें कि दिनांक 14 दिसम्बर 2022 को कर्मिक विभाग के संयुक्त शासन सचिव रामनिवास मेहता ने सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग को आगाह करते हुए वरिष्ठ सहायक पद की वर्ष 2013—14 से 2021—22 तक की डीपीसी पर सवाल उठाते हुए प्रशासनिक विभाग के परिपत्र दिनांक 4 जून 2008, परिपत्र दिनांक 31 मई 2015 और अधिसूचना दिनांक 11 सितम्बर 2011 के दिशा—निर्देशों और प्रवधानों को सूनिश्चत करने को कहा था। वहीं श्री मेहता ने दिनांक 7 नवम्बर 2022 को वर्ष 2013—14, 2014—15 और 2015716 की हुई डीपीसी में भी जनसम्पर्क विभाग से स्थिति स्पष्ट करने को कहा था और कहा थ कि उपरोक्त डीपीसी किस आधार पर की गई।
आपको यह भी बतादें कि रिव्यू डीपीसी के मामले में भी सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने नियमों की अनदेखी की थी। 28 अक्टूबर 2022 वर्ष 2019—20 से 2020—21 की डीपीसी रिव्यू करने के लिये कार्मिक विभाग को प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव में संख्या: एफ. 1 2 गृह/सम्पर्क./सचि./प्रको./2014 दिनांक 25 दिसम्बर 2014 के आदेश अनुसार कार्य संचालन नियमावली के नियम 21 और 22 की अनदेखी कर सीधे ही निदेशक स्तर पर कार्मिक विभाग को फाइल भेज दी गई थी। जबकि नियमानुसार विभाग के नियंत्रणाधीन अराजपत्रित कर्मचारी वर्ग संबंधीत स्थानापन्न के मामले में शासन सचिव या प्रमुख शासन सचिव के माध्यम से भेजी जानी चाहिए थी।

अब देखना यह है कि उपरोक्त मामलों में माननीय मुख्यमंत्री और जुगलजोड़ी के रूप में जाने वाली जोड़ी सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव समित शर्मा और आयुक्त सुनिल शर्मा क्या कदम उठाते हैं या फिर इसी तरह इस विभाग में कूटरचित दस्तावेज तैयार किए जाते रहेगें।

Chief Minister मुख्यमंत्री के विभाग डीआईपीआर में खेला

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के खास महकमों में शामिल सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में एक खेला होने का मामला संज्ञान में आया है। वैसे तो इस खास महकमें में कई खेला हुए हैं। इनमें सुजस टेंडर, संवाद में 34 लाख का गबन और फोटो ग्राफर भर्ती जैसे कई चर्चित खेला हुए हैं। लेकिन नई सरकार के गठन के बाद यह पहला खेला है, जो आमजन और सरकार के लिये खास है। इस खेला में विभाग ने रिक्त पदों से ज्यादा पदों पर नियुक्तियां दी है।

आपको बतादें कि 5 अक्टूबर 2023 को सरकार ने सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के मंत्रालयिक संवर्ग का पुनर्गठन कर 75 नवीन पदों को स्वीकृति प्रदान की गई थी। विभाग में पुनर्गठन के बाद संवर्ग में कुल 242 पद हो गये थे। इनमें संस्थापन अधिकारी के 2 पद, प्रशासनिक अधिकारी के 6 पद, अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के 19 पद, सहायक प्रशासनिक अधिकारी के 40 पद, वरिष्ठ सहायक के 50 पद और कनिष्ठ सहायक के 125 पद शामिल हैं।

डीआईपीआर और सरकार के दस्तावेजों के अनुसार सरकार ने 5 अक्टूबर 2023 को सहायक प्रशासनिक अधिकारी के 40 पदों को स्वीकृति प्रदान की थी। लेकिन अधिकारियों ने खेला करते हुए 47 पदों पर नियुक्ति के आदेश प्रदान किये है। विभाग के आदेश सं.प्रस्था/मंत्रा/Asstt.Adm.Off/वरि.सू./7106—34, दिनांक 23.05.2023 में 13, क्रमांक:प्रस्था/मंत्रा/सहा.प्रशा.अधि.पदौ./8982—9032, दिनांक 09.06.2023 में 10 और क्रमांक:प्रस्था/मंत्रा/सहा.प्रशा.अधि.पदौ./1176—1205, दिनांक 25 जनवरी 2024 में 24 सहायक प्रशासनिक अधिकारियों नियुक्ति प्रदान की गई है। एसे में बिना वित्तिय स्वीकृति के अतिरिक्त पदों पर नियुक्ति कैसे की जा सकती है।

सूत्रों के अनुसार विभाग में हुई डीपीसी और गठित पदोन्नति समिति पर भी कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने सवाल उठाए हैं। जिनका मामला माननीय न्यायालय में विचाराधिन है। वहीं सूत्रों का यह भी कहना है कि विभाग ने हेरा—फेरी कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किये हैं और पुरानी नोट सीट गायब कर दी है। एसे में विभाग का ये कृत्य घोर आपराधिक श्रेणी में आता है जो सरकार और आमजन के लिये उचित नहीं है।

उपरोक्त मामले में सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव समित शर्मा से वाट्सएप के माध्यम से रिपोर्ट भेजकर जानकारी मांगी तो उनका कोई उत्तर नही आया।

वहीं सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के अयुक्त सुनिल शर्मा से भी मामले में जानकारी चाही तो उनका भी कोई उत्तर नहीं आया।