जयपुर, 13 अगस्त। विद्यार्थियों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए 31 संस्कृत महाविद्यालयों में ध्यान कक्षों का निर्माण होगा। इसमें 4.65 करोड़ रूपए खर्च होगें। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ध्यान कक्षों के निर्माण हेतु वित्तीय प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। गहलोत ने कहा कि प्रत्येक ध्यान कक्ष का निर्माण 15 लाख रूपए की लागत से होगा। इनमें योग एवं ध्यान की नियमित कक्षाएं संचालित की जाएंगी। इन कक्षाओं के माध्यम से विद्यार्थियों के मानसिक और शारीरिक विकास होगा।
इन महाविद्यालयों में बनेंगे कक्ष- राजकीय महाराज आचार्य संस्कृत महाविद्यालय जयपुर, राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय जोधपुर, राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय बीकानेर, राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय उदयपुर, राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय भरतपुर, राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय चिराना, राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय सीकर,राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय गनोड़ा, राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय दौसा, राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय कोटा, राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय अजमेर, राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय कोटकासिम, राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय मनोहरपुर, राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय बोली, राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय महापुरा, राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय चीथवाड़ी, राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय तितरिया, राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय कालाडेरा, राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय श्रीमाधोपुर, राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय सालासर, राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय अलवर, राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय तालाब गांव, राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय नीमकाथाना, राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय पीठ डूंगरपुर, राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय सरमथुरा धौलपुर, राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय चक, राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय चौथ का बरवाड़ा, राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय चेचट, राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय कुंड गेट सांवर, राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय नाथद्वारा, राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय सैदपुरा भरतपुर
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को अधिवक्ताओं वर्ग के लोगों को संबोधित किया। उन्होंने मनचलों के इलाज का पुख्ता काम करने की बात की तो हुक्का बार, ड्रग्स जैसी बुराई पर कार्रवाई की भी बात की। गहलोत ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में वकीलों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था। आदर्श समाज के निर्माण में वकीलों की भूमिका अहम रही है। उन्होने कहा कि मैं खुद शुरुआती दौर में वकील रहा हूं। जो मांगते हैं उससे अधिक दे रहा हूं, आपकी बिरादरी का मुख्यमंत्री बैठा है। आप मांग ही क्यों रहे हो, मुझे तो इशारा ही बहुत है।
वहीं युवा महापंचायत में आयोजित समारोह के दौरान गहलोत ने कहा कि छात्र संघ चुनाव पर शिक्षा राज्य मंत्री राजेंद्र यादव ही फैसला करेंगे। लेकिन मैं यह जरूर कहना चाहूंगा कि जब चुनाव बंद हो गए थे। तब मैं ही वह मुख्यमंत्री हूं, जिसने फिर से चुनाव शुरू करवाए थे। आज इस तरह से स्टूडेंट पैसे खर्च कर रहे हैं, जैसे एमएलए-एमपी के चुनाव लड़ रहे हो। आखिर कहां से पैसा आ रहा है और इतने पैसे क्यों खर्च किए जा रहे हैं, जबकि यह सब लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के खिलाफ है।
—क्या मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को यह लगने लगा है कि राजस्थान में उनका मिशन रिपीट का सपना नाकाम होने जा रहा है? —क्या गहलोत को यह आशंका है कि वह भले ही 156 सीटें लाने का दावा कर रहे हो, लेकिन मामला 56 के आसपास सिमटकर ना रह जाए? —क्या मुख्यमंत्री को यह लगने लगा है कि राजस्थान में कांग्रेस विधायकों और मंत्रियों की छवि उनके इलाकों में इतनी खराब हो गई है कि उनमें से अधिकांश के जीतने के आसार नहीं हैं? —क्या गहलोत को लगने लगा है कि राजस्थान में ही नहीं, दिल्ली से भी कांग्रेस के बड़े उन्हें नाकाम करने के लिए उनके खिलाफ साजिश रच रहे है? —क्या मुख्यमंत्री को ये लगने लगा है कि उनकी ढेर सारी मुफ्त योजनाओं पर राज्य में भ्रष्टाचार,बलात्कार,महिला सुरक्षा का मुद्दा चुनावों में भारी पड़ने वाला है?
शुक्रवार को राजस्थान में हुई कांग्रेस की पॉलिटिक्स अफेयर्स कमेटी की बैठक में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा को बैठे बिठाये कांग्रेस पर सवाल उठाने का मौका दे दिया है। शुक्रवार की घटना में गहलोत के उपर ओम माथुर ने कई सवाल खड़े कर दिये है।
भाजपा नेता ओम प्रकाश माथुर ने सवाल करते हुए कहा कि कल विधानसभा चुनाव को लेकर बनी कांग्रेस की पॉलिटिक्स अफेयर्स कमेटी की बैठक में गहलोत ने जिस तरह की भाषा में अपने सहयोगियों और विधायकों को झाड़ा, उससे यह जाहिर हो रहा है, मानो गहलोत को सत्ता जाने का डर अभी से सताने लगा है। जिन रघुवीर मीणा,नीरज डांगी, प्रताप सिंह खाचरियावास और रघु शर्मा पर वह बरसे, वो गहलोत के ही करीबी माने जाते रहे हैं। हां, खाचरियावास और शर्मा अपनी सहूलियत से खेमा बदलते जरूर रहे हैं,लेकिन फिर भी उन्होंने अशोक गहलोत से कभी खुली अदावत नहीं की। ऐसे में इन पर गुस्सा उतारना मुख्यमंत्री का फर्स्टटेशन ही कहा जाएगा। जिन उठाए गए मुद्दों पर गहलोत हंसकर अपनी बात कह सकते थे, उन पर तंज कसकर वो अपने राजनीतिक विरोधियों की तादाद में बढ़ोतरी ही करेंगे। भले ही चुनाव तक यह लोग खामोश रहे, लेकिन अपनी सार्वजनिक तौहीन कोई भी विधायक-मंत्री बर्दाश्त नहीं कर सकता है और मौका मिलने पर राजनीति में इसका बदला जरूर लेता है। कहते हैं कि राजनीति में तो सबसे बड़ा धोखा वो ही देता है जो आपके सबसे करीब होता है।
माथुर ने कहा महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से किसी ने भी गलत बात नहीं की थी, लेकिन जवाब सभी को गलत अंदाज में मिला। ऐसा लगता है इन सब की टिप्पणियों को गहलोत ने व्यक्तिगत ले लिया और शायद यह भी मान लिया कि ये सभी उनकी समझ और राजनीतिक अनुभव को चुनौती दे रहे हैं। जाहिर है चुनाव के वक्त जातिगत जनगणना कांग्रेस को राजस्थान में नुकसान पहुंचा सकती है और रघु शर्मा ने यही आशंका जताई थी। लेकिन गहलोत ने उन्हें ये कहकर तल्खी से जवाब दिया कि, तुम तो नेशनल लीडर हो सीधे राहुल गांधी से बात क्यों नहीं करते। कर्नाटक में राहुल गांधी ने ही कहा था कि जातिगत जनगणना कांग्रेस स्टैंड है। गहलोत राहुल के नाम का ताना मारने की वजह सिर्फ यह भी कह सकते थे कि क्योंकि जातिगत गणना पार्टी का स्टैंड इसलिए राजस्थान में भी कराई जाएगी, बात खत्म हो जाती। आखिर शर्मा कोई मामूली नेता नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के गृह राज्य गुजरात के चुनाव प्रभारी रहे थे। यह बात अलग है कि वह कांग्रेस को वहां बुरी तरह निपटा कर आए थे। राजस्थान के सबसे अमीर कांग्रेसी नेताओं में वो शुमार है और जब गहलोत और पायलट में सीएम पद को लेकर बगावत और विधायकों की भगदड़ का दौर चल रहा था, तब वह खुद को मुख्यमंत्री का दावेदार भी समझने लगे थे। यह ठीक है कि रघु शर्मा का इस बार केकड़ी से वापस चुनाव जीतना बहुत मुश्किल है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गहलोत उन्हें इस तरह बेइज्जत कर दें। रघु शर्मा की राजनीतिक चतुराई और मैनेजमेंट को आप इस तरह समझ सकते हैं कि वह भिनाय से विधानसभा के लगातार तीन चुनाव हारने और जयपुर से सांसद का चुनाव हारने के बाद पांचवीं बार में 2013 में पहली बार केकड़ी के विधायक बने थे। बताइए इतने चुनाव हारने के बाद किसे राजनीति में आगे बढ़ने का मौका मिलता है। इसी तरह खाचरियावास का यह मुद्दा उठाना भी गलत नहीं था कि हमें भाजपा के आरोपों पर आक्रामक होने की जरूरत है। भाजपा ने नहीं सहेगा राजस्थान अभियान चलाकर कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है और सोशल मीडिया पर भी वह आक्रामक मुद्रा में है। ऐसे में कांग्रेस रक्षात्मक मुद्रा में क्यों रहे? लेकिन गहलोत ने खाचरियावास को ही उनकी व्यक्तिगत आक्रामकता और बोलते समय ट्रैक से भटक जाने का ताना मारते हुए अपरोक्ष रूप से अनुशासनहीन करार दे दिया। उन्होंने कहा कि ये तो ऐसी वेणुगोपाल है, जो अनुशासन के मामले में कार्रवाई में वक्त लगा देते हैं। अगर इनकी जगह मैं होता तो कार्रवाई में देर नहीं करता। खाचरियावास ने ऐसे कई मुद्दों पर बयान दिए हैं, जो सरकार को परेशानी में डालने वाले रहे हैं। उन्होंने जयपुर में स्मार्ट सिटी के कामों की धीमी गति को लेकर सरकार में नंबर दो माने जाने वाले एवं गहलोत के विश्वस्त शांति धारीवाल पर भी यह कहते निशान साधा था कि वो भाजपा के कार्यकर्ता हो गए हैं। कांग्रेस को हराना चाहते हैं। यानी अगर गहलोत का बस चलता तो क्या वह खाचरियावास को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा देते। पूर्व सांसद रघुवीर मीणा ने भी क्या गलत कहा था जब मानगढ़ आदिवासी इलाका है, तो वहां ओबीसी आरक्षण की घोषणा किस राजनीति नजरिए से उचित थी। आदिवासियों के बीच में उनके हित की बात करते तो ज्यादा उचित होता। आदिवासी इस बात से नाराज है कि हमारा अधिकार दूसरों को दिया जा रहा है, इससे पार्टी को नुकसान होगा। लेकिन इसे गहलोत ने व्यक्तिगत हमला मानते हुए मीणा खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हूं, कौन सी बात कहां रखनी है, मैं जानता हूं। राज्यसभा सांसद नीरज डांगी तो गहलोत का ताना सुनकर रो ही पड़े। किसी नेता की इससे बड़ी बेइज्जती क्या होगी कि उसे यह कहा जाए कि विधानसभा के लिए तीन मौके दिए। लेकिन हार गए, तो पार्टी ने राज्यसभा सांसद बना दिया। कम से कम एक सीट जिता पाने की जिम्मेदारी तो लो। साले के लिए टिकट मांगना छोडो। डांगी को राज्यसभा सांसद गहलोत ने ही तो बनवाया था। जो तीन बार चुनाव हार चुका हो, ऐसे बिना जनाधार की नेता को राज्यसभा भेजने की जरूरत क्या थी। इससे तो लगता है कि आप मुख्यमंत्री के करीबी हो, तो कितने भी चुनाव हार जाओ, आपका राजनीतिक भविष्य बर्बाद नहीं होगा। भले इसके लिए दूसरे नेताओं की बलि चढ़ा दी जाए। गहलोत की राजनीति को लंबे समय से देखने और समझने वाले प्रेक्षकों का मानना है कि 2020 में जब से सचिन पायलट ने बगावत की थी, तब से अशोक गहलोत का व्यवहार एकदम से बदल गया है। उनके मधुर और सौम्य व्यवहार पर गुस्से और चिड़चिड़ापन ने कब्जा कर लिया है। उनकी भाषा और शब्दों का चयन भी निरंतर गिरता रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में गहलोत अपनी मर्जी से टिकट वितरण नहीं कर पाएंगे, इसलिए भी वो परेशान हैं। इस पर नजर रखने के लिए मधुसूदन शास्त्री और गौरव गोगोई जैसे नेताओं को राजस्थान में लगाया गया है, यह दोनों राहुल गांधी के करीबी है और वेणुगोपाल भी। ऐसे हुए भले ही गहलोत मुख्यमंत्री का पद बचाने में कामयाब रहे हो, लेकिन टिकट वितरण में उनके अकेले की चलने वाली नहीं है। वेणुगोपाल की मौजूदगी में सीएम ने अपने कटु वचनों से यह जाहिर कर दिया कि उन्हें अपने काम में किसी के दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं है। लेकिन वह तो एक बार उन्हें सहनी ही होगी। बैठक में सचिन पायलट की खामोशी ने उनके नंबर कांग्रेस आलाकमान नजरों में और बढ़ा दिया होंगे।
वसुंधरा तेरी खेर नहीं, मोदी तुझसे बैर नहीं, प्रदेश के पिछले विधान सभा चुनावों में इस नारे ने खूब धूम मचाई थी। जिसका खामियाजा भाजपा और वसुंधरा ने व्यक्तिगत भुगता। जिसका असर आज भी वसुंधरा के लिये गले की हड्डी बना हुआ है। भाजपा सूत्रों और संचार माध्यमों के अनुसार प्रदेश में भाजपा की पूर्व वसुंधरा सरकार के दौरान भाजपा के संगठन महासचिव रहे प्रकाश चन्द्र की पुर्व मुख्यंत्री राजे से नाराजगी उस दौरान जगजाहिर थी। नाराजगी के दौरान प्रकाश चन्द्र ने संघ मुख्यालय नागपुर को राजे की शिकायत दर्ज कराई थी जिसका अंधेरा आज भी कायम है।
प्रकाश के प्रकाश को तरस रही वसुंधरा गत शुक्रवार को चार घण्टे के लिए जयपुर आई थी और प्रकाश से मुलाकात कर वापस लौट गई। प्रकाश से मिलकर राजे का अंधेरा दूर हुआ या नही इसका पता 15 अगस्त को ही चल पायेगा। संचार माध्यमों के अनुसार 15 अगस्त से भाजपा परिवर्तन यात्रा जैसा कुछ नया करने जा रही है। आपको बता दें कि राजस्थान में फिलहाल भावी मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया है और आगामी विधान सभा चुनाव पीएम मोदी के चेहरे पर ही लड़ा जाना है। यदि प्रकाश का प्रकाश वसुंधरा के चेहरे पड़ जाये तो माना जा रहा है कि आगामी विधान सभा चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का चेहरा चमक सकता है।
प्रदेश के वॉर रूम में कांग्रेस की पोलटिकल अफेयर कमेटी की पहली बैठक हुई। इस कमेटी का गठन महज दो दिन पहले होना बताया गया है। बैठक में भाग लेने वाले कई नेता मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कोप भाजन का शिकार हो गये। सरकार की वापसी के सपने देख रहे परेशान गहलोत ने अपने ही मंत्री मंडल के साथियों पर गुस्सा निकालते नजर आए। बैठक में मुख्यमंत्री स्थिति देख उपस्थित नेताओं के चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगी। वहां मौजूद मधुसूदन मिस्त्री, वेणुगोपाल, रंधावा, सचिन पायलट और संवैधानिक पद पर बैठे सी पी जोशी केवल मूक दर्शक बने नजर आये। संचार माध्यमों के अनुसार मुख्यमंत्री की यह हालत उनकी दर्जनों घोषणाओं के बाद भी राज्य के मतदाताओं का कांग्रेस के प्रति सकारात्मक रुख नहीं बन पाना बताया जा रहा है। आपको बता दें कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार की वापिस के प्रयास केवल मुख्यमंत्री ही करते नजर आ रहे है। यहीं कारण है कि गहलोत बार बार दोहरा रहे हैं कि उनकी सरकार के खिलाफ राज्य में इस बार एंटी इनकम्बेंसी का वातावरण नहीं है। बैठक में गहलोत ने मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास को भविष्य में फाउल नहीं खेलने की सीख दे डाली। वहीं गहलोत की वक्र दृष्टि पूर्व मंत्री रघु शर्मा पड़ी और उन्हे कहा कि केकडी को जिला बनाने से स्थिति में सुधार आया है, वहीं एक दिन पहले गहलोत ने रघु को एक महिल नेत्री के माध्यम से नमस्कार कहलवाकर राजनीति संदेश दे दिया था। इसी बीच आरक्षण के मुद्दे पर सुझाव देने वाले रघुवीर मीणा भी अछूते नही रहे। मुख्यमंत्री ने कहा क्या कभी एक भी विधायक को भी चुनाव जिताया है आपने? नीरज डांगी भी मुख्यमंत्री की वक्र दृष्टि से नही बच पाये। उन्होने डांगी से कहा तुम स्वंय तीन बार विधानसभा चुनाव हारे हो फिर भी तुम्हें राज्यसभा में भेजा अब अपने साले के लिए टिकिट मांगते हुए शर्म नहीं आती है, बन्द करो नेतागिरी। मीटिंग में मंत्री रामलाल जाट और उदय लाल आंजना भी गहलोत की वक्र दृष्टि से बच नहीं पाये। अब अगली मीटिंग 18 अगस्त को होना तय हुआ है। इस दौरान जिम्मेदार नेताओं को ब्लॉक स्तर पर फिड बैक लेने को कहा गया है।
प्रदेश में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा पर फिरकी लेते हुए कहा कि पीएम की सभा में कुर्सियां खाली रह जाती हैं। ये खाली कुर्सियां ही वसुंधरा का भला करेंगी। पीएम नरेंद्र मोदी की सभा में इन्होंने देख लिया, जनता ने आईना दिखा दिया। कुर्सियां खाली पड़ी थीं और लोग जाने लग गए थे। ये बात गहलोत ने गुरुवार को जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान कही। उन्होने कहा कि पीएम के भाषण के दौरान कुर्सियां खाली रखना और उनका जाना, वसुंधरा राजे का यही भला करेगा और कोई भला करने वाला नहीं है। वसुंधरा राजे का अगर कोई भला होगा तो इन खाली कुर्सियों से ही होगा। गहलोत । गहलोत ने संचार माध्यम के प्रतिनिधियों से कहा कि ईडी,सीबीआई और सारी केंद्रीय एजेंसी को आने दीजिए, वह क्या कर लेंगे? आपके सामने मैं मोदी से बड़ा फकीर बैठा हूं। मैंने एक ग्राम सोना नहीं खरीदा, कोई जमीन या फ्लैट नहीं खरीदा। कोई प्रॉपर्टी नहीं बनाई। मुख्यमंत्री आवास खाली करना पड़ा तो मुझे किराए का मकान ढूंढना पड़ेगा। भाजपा के लोग झूठे आरोप लगा रहे हैं।
हम पर आरोप लगाने वाले खुद करप्ट, कहां से लाए इतनी प्रॉपर्टी गहलोत ने कहा- हम पर आरोप लगाने वाले खुद करप्ट लोग हैं। उनसे पूछिए जिंदगी में आपने पैसा कहां से कमा लिया, ये चार-चार मंजिल के बंगले कहां से खड़े कर लिए? तुम लोगों ने कोई काम धंधा किया क्या? यह इतनी प्रॉपर्टी कहां से खड़ी कर ली? कोई आईटी का उद्योग शुरू किया है, तुम्हारे पास पैसा कहां से आया है। इनकी बातों में कोई दम नहीं है।
गहलोत ने अपने दोनों पैरों के अंगूठों में लगी चोट पर सफाइ्र देते हुये कहा कि गवर्नर आरएसएस बैकग्राउंड के हैं,उनसे पूछ लीजिए मेरे फ्रैक्चर है कि नहीं। उन्होने कहा कि मेरे दोनों पैरों के अंगूठों में चोट लग गई, एक अंगूठे के तीन टुकड़े हो गए और एक अंगूठे का नाखून पूरा बाहर आ गया, उसमें एयरलाइन फ्रैक्चर हो गया है। आपने टूटे हुए अंगूठों की सीटी स्कैन की फिल्म देखी होगी। अब भाजपा के नेता कह रहे हैं कि कील चुभ गई है। ये इतने निम्न स्तर के लोग हैं, आरोप लगा रहे हैं कि जानबूझकर सिम्पैथी के लिए पट्टा बांधकर घूम रहा हूं। गवर्नर भी आरएसएस बैकग्राउंड के हैं, आप उनसे पूछ लीजिए कि सीटी स्कैन में क्या है?
जयपुर, 11 अगस्त। प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर उबाल आगया है। जयपुर में मध्य प्रदेश में हुये पेशाब कांड जैसी घटना का होना सामने आया है। जयपुर के जमवारामगढ़ इलाके में एक व्यक्ति ने स्थानिय विधायक गोपाल मीण और डिप्टी एसपी शिवकुमार भारद्वाज पर अपहरण करके उक्त व्यक्ति के ऊपर पेशाब करने और जूते चटवाए लगाया।
उपरोक्त घटना पर विधायक गोपाल मीणा ने कहा कि इस मामले से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। ये जमीन से जुड़ा विवाद है। आरोप तो कोई भी लगा सकता है। मामले की जांच में दूध का दूध पानी का पानी सामने आ जाएगा।
51 साल के पीड़ित व्यक्ति ने बताया कि गांव टोडालडी आंधी में वह एक जमीन की सार-संभाल करता आ रहा है। 30 जून को घटना वाले दिन वह पत्नी और साथी के साथ खेत पर काम कर रहा था। अचानक पुलिस वाले आए और जबरदस्ती गाड़ी में पटककर कर विधायक गोपाल मीणा के घर ले गये और वहां उसे एक कमरे में बंद कर दिया। जब पीड़ित छोड़ने के लिए गिड़गिड़ाने लगा तो डिप्टी शिव कुमार भारद्वाज ने उसके मुंह पर पेशाब कर दिया और कहा कि जमवारामगढ़ के राजा गोपाल मीणा को बिना नजराना दिए टोडालडी में तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई खेत में आने की। पीड़ित ने कहा कि हॉल में गोपाल मीणा अपनी चेयर पर बैठे थे। साथ में काम करने वाले शंकर ने वहां आकर विधायक मीणा के पैरों में माफी मांग कर छोड़ने के लिए कहा। इस दौरान विधायक ने कहा कि जब तक ये मेरे जूते जीभ से साफ नहीं करेगा। तब तक मैं इसे नहीं जाने दूंगा और जान बचाने के लिए विधाश्क मीणा के जूते जीभ से साफ कर वहां से निकला।
उपरोक्त हुई घटना के मामले में मीणा ने कहा कि मामला पूर्व डीजी नवदीप सिंह और उनकी पत्नी परम नवदीप की जमीन से जुड़ा है। ये लोग मुझ पर दबाव बनवाकर जमीन पर कब्जा दिलवाना चाहते थे। मैं पीड़ित को नहीं जानता। इस मामले से मेरा कोई लेना-देना नहीं।
पीड़ित का कहना है कि कुछ दिनों के बाद जब वह थाने में मामला दर्ज करवाने पहुंचा तो पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया। इसके बाद पीड़ित ने एसपी ग्रामीण और डीजीपी तक से गुहार लगाई। लेकिन मामला दर्ज नहीं हुआ। परेशान होकर पीड़ित कोर्ट की शरण में गया और जरीए इस्तगासा 27 जुलाई को मामले की FIR जमवारामगढ़ थाने में दर्ज करवाई गई।
जयपुर, 11 अगस्त। मई माह में शासन सचिवालय के पीछे योजना भवन में हुये आलमारी कांड फिर से चर्चा में आया है। अब तक मामले में एसीबी कार्यवाही कर रही थी, लेकिन अब मामले की गम्भीरता को देखते हुये ईडी ने अपने हाथ में लेलिया है। आपको बता दें कि, शासन सचिवालय के पीछे योजना भवन के बेसमेंट की बंद पड़ी अलमारी से मई में 2.31 करोड़ रुपए से ज्यादा की नकदी और एक किलो सोना बरामद हुआ था। अलमारी से 2000 के 7,298 और 500 रुपए के 17,107 नोट मिले थे वहीं सोने की सिल्ली पर मेड इन स्विट्जरलैंड लिखा था। सोने की कीमत करीब 62 लाख बताई जा गई थी। योजना भवन की सरकारी अलमारी से 2.31 करोड़ रुपए और एक किलो सोना मिलने के मामले में अब ईडी अब कार्यवाही के मूंड मे है। देर रात ईडी की टीम निलंबित DOIT जॉइंट डायरेक्टर वेद प्रकाश को पकड़कर मुख्यालय ले गई। वहां पूछताछ की के दौरान जॉइंट डायरेक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया है। मीडिया और ईडी सूत्रों के अनुसार, जिस दिन पैसा बेसमेंट की अलमारी से रिकवर हुआ था, उसी दिन से ईडी ने इस पर काम करना शुरू कर दिया था। क्योंकि पहले यह मामला अशोक नगर थाने पहुंचा फिर रिश्वत का मामला बता कर एसीबी को दे दिया गया था। 21 मई 2023 से मामले में ज्यादा कुछ नहीं हुआ पर अब पुख्ता सबूत मिलने के बाद अब ईडी ने अपने स्तर पर इसकी जांच शुरू की है।
जयपुर, 11 अगस्त। शुद्ध के लिए युद्ध अभियान के तहत प्रदेशभर में खाद्य सुरक्षा टीमों द्वारा मिलावटखोरों के खिलाफ बड़ी कार्यवाही करते हुए भारी मात्रा में मिलावटी घी सहित विभिन्न खाद्य पदार्थ सीज किए गए और विभिन्न पदार्थों के नमूने लिए गए। आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रक शिवप्रसाद नकाते के निर्देशन में प्रदेश के कोटा, जोधपुर, श्रीगंगानगर व अलवर जिले में खाद्य सुरक्षा टीमों ने अलग-अलग प्रतिष्ठानों पर छापे मारकर भारी मात्रा में मिलावटी खाद्य पदार्थों को सीज किया। आयुक्त खाद्य सुरक्षा ने बताया कि अलवर में कृष्णा डेयरी प्रोडक्ट्स पर कार्यवाही करते हुए 13395 लीटर घी को सीज किया गया। इसके साथ ही इस प्रतिष्ठान से घी रूद्रांश, गाय का घी नन्हा गोपाल, घी तान्या, घी मदर डेयरी तथा लूज घी का एक-एक नमूना भी लिया गया। उन्होंने बताया इसी प्रकार कोटा में ऋषभ एंटरप्राइजेज के यहां 300 किलो पामोलीन तेल, 105 किलो वनस्पति तथा 2048 लीटर बेकर शार्टिंग सीज किया गया। इसके साथ ही पामोलीन तेल, वनस्पति तथा बेकरी शार्टिंग के नमूने भी टीम द्वारा लिए गए। आयुक्त नकाते ने बताया कि जोधपुर में मैसर्स धेनु प्रोडक्ट्स सालावास जोधपुर से 6 टिन घी सीज कर नमूना भी लिया गया। इसी प्रकार खाद्य सुरक्षा टीम द्वारा श्रीगंगानगर के महादेव इन्डस्ट्रीज उद्योग बिहार के निरीक्षण के दौरान फैक्ट्री बंद मिलने पर फैक्ट्री गेट को सील कर दिया गया है।
जयपुर, 11 अगस्त। राजस्थान आवासन मण्डल द्वारा विधायक नगर (पश्चिम) में निर्मित अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त विधायक आवास परियोजना का लोकार्पण शनिवार को सायं 6.30 बजे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत करेंगे। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे, जबकि नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल, नेता प्रतिपक्ष श्री राजेन्द्र राठौड़ विशिष्ठ अतिथि होंगे। आवासन आयुक्त पवन अरोड़ा ने बताया कि मॉर्डन डिजाइन और सभी सुविधाओं से युक्त भव्य फ्लैट्स विधायकों को सौंपने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। आयुक्त ने बताया कि 24 हजार 160 वर्गमीटर क्षेत्रफल में बने छह बहुमंजिले टॉवर (जी$8) में 3 हजार 200 स्क्वायर फीट वाले कुल 160 फ्लैट्स में विधायकगणों की सुरक्षा का विशेष रूप से ध्यान रखा गया है। पूरे परिसर के कॉमन एरिया (पार्किंग, ड्राइव वे, बेसमेंट, लिफ्ट) में 80 से ज्यादा अत्याधुनिक और हाई रेंज के सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। ऑटोमैटिक बूम बैरियर, बैग स्कैनर और मुख्य द्वार पर अंडर व्हीकल स्कैनर लगाया गया, जिसकी स्पाय आई किसी गडबड़ी पर तुरंत सिस्टम को अलर्ट करेगी। उन्होंने बताया कि सुरक्षा के मामले में सबसे खास ‘इंट्रूडर अलर्ट सिस्टम‘ है, जिससे कोई भी अवांछित व्यक्ति भवन में यदि बिना अनुमति के प्रवेश करेगा तो अलार्म बज जाएगा। इसके अलावा 24 घण्टे सिक्योरिटी गार्ड्स का भी इंतजाम किया गया है।