जाट आंदोलन में नारी शक्ति ने भरी हूंकार

सिर पर घूंघट, हाथों में लाठी लिए जाट आंदोलन में पहुंचीं दर्जनों महिलाएं, संघर्ष समिति ने सरकार को दी यह खुली चेतावनी

Jat Aandolan: प्रदेश में जाटों ने केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण का हक लेने के लिये हूंकार भरली है। इस बार आंदोलन में नारी शक्ति का भी प्रयोग किया जा रहा है। जाट आंदोलन का मुद्दा अब गरमाने लगा है। धरना स्थल पर बड़ी संख्या लुगाई और मोट्यारों ने शक्ति प्रर्दशन किया। वहीं 22 जनवरी तक मांग नहीं मानने पर 23 जनवरी से आंदोलन उग्र करने की चेतावनी दी है।

आंदोलन संघर्ष समिति ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 22 जनवरी तक हमारी मांगें नहीं मानी गई तो हम हाईवे के साथ-साथ दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक को ब्लॉक कर देंगे। नारी शक्ति ने कहा कि हमें अपनी मांग मगवाने के लिए दिल्ली तक जाना पड़े तो हम जाएंगे। क्योंकि हमारे बच्चों के भविष्य की बात है। हम 1998 से आरक्षण की मांग करते आ रहे हैं। वहीं आंदोलन में लुगाइयों की भागीदारी को देख प्रशासन भी हरकत में आ गया है।

Rajasthan Assembly Session:- प्रदेश में भाजपा सरकार का प्रथम विधानसभा सत्र आज से शुरू

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16वीं राजस्थान विधानसभा की बैठकें आज फिरसे शुरू होंगी। बीते दिनों विधानसभा अध्यक्ष और सीएम ने मिलकर सर्वदलीय बैठक बुलाई थी।
राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र आज यानी शुक्रवार सुबह 11 बजे सोलहवीं विधानसभा के सत्र में अभिभाषण देंगे। एक सरकारी बयान के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, मुख्य सचिव सुधांश पंत और विधानसभा के प्रमुख सचिव राज्यपाल मिश्र का विधानसभा परिसर में स्वागत करेंगे।
राजस्थान की सोलहवीं विधानसभा के प्रथम सत्र की फिर से बैठकें शुक्रवार से शुरू होंगी। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विधानसभा में सर्वदलीय बैठक बुलाई। देवनानी ने सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा था कि ‘सदन में सार्थक चर्चा होनी चाहिए. सभी सदस्यों को बोलने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि सदन को चलाने की जिम्मेदारी सोलहवीं विधानसभा के सभी नवनिर्वाचित सदस्यों की है।
श्री देवनानी ने सभी सदस्यों से राज्यपाल का अभिभाषण शान्तिपूर्वक सुनने का आग्रह किया। देवनानी ने प्रश्नों के उत्तर नहीं आने पर चिन्ता जताते हुए कहा ‘अब समय पर प्रश्नों के जवाब मंगाये जायेंगे। इसके लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जायेगी। उन्होंने सभी दलों से अपील करते हुए कहा कि ‘सदन में गरिमा में रहकर मुद्दे उठायें जाए। सभी सदस्य सदन में मर्यादा में रहकर अपनी बात रखें। अमर्यादित आचरण ना करें।
वहीं इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा था कि ‘सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का मौका मिले इसके लिए पूरे प्रयास किये जाएं। सदस्य भी अपनी बात समय सीमा में रखने का प्रयास करें। कांग्रेस के टीकाराम जूली ने कहा कि ‘सदन में रखी गयी बातों को सरकार गंभीरता से ले और प्रश्नों के जवाब अगले सत्र से पहले आवश्यक रूप से प्रस्तुत कराये।

मोदी कुछ पीछे हटे

22 को मुख्य यजमान मोदी ही होंगे
भोग और आरती मोदी ही करेंगे

अब सिर्फ चार दिन बाद अयोध्या में भगवान श्री राम प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की पूर्णाहुति हो जाएगी।अनेकानेक विवादों के बीच समारोह की प्रक्रिया शुरू हुए आज तीन दिन हो चुके हैं। अयोध्या में भगवान श्री राम प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में पीएम मोदी द्वारा प्रधान पूजा को लेकर देश भर उठे विवाद और संतों में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए उन्होंने कुछ पैर पीछे कर लिए। अब वे प्रधान पूजा नहीं करेंगे लेकिन 22 जनवरी को सभी कार्यों के यजमान वे ही होंगे। इससे पहले के सभी कार्य डॉ अनिल मिश्रा निभा रहे हैं। पीएम दो कदम पीछे हटे क्योंकि एक तो सपत्नीक वे बैठ नहीं सकते चूंकि उनके अकेले बैठने पर देश के प्रकांड विद्वानों, संतों, राजनीतिज्ञों और आम जनमानस में घोर विरोध हो रहा था जिसका आगे चल कर उन्हें इसका नुकसान हो सकता था फलतः उन्होंने अपना यह फैसला थोडा बदल लिया। अब मोदी जी की जगह राम मंदिर के ट्रस्टी अनिल मिश्रा सपत्नीक मुख्य यजमान हैं। प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त निकालने वाले पंडित गणेश्वर शास्त्री तथा पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित और रामानन्द सम्प्रदाय के श्रीमत ट्रस्ट के महामंत्री रामविनय दास जी के अनुसार ट्रस्टी अनिल मिश्रा सपत्नीक मुख्य यजमान हैं और पीएम मोदी प्रतीकात्मक यजमान के रूप में मौजूद रहेंगे। ( यह समाचार एक मात्र दैनिक नवज्योति में 17 जनवरी के अंक में प्रकाशित हुआ है। ) अनिल मिश्रा ने सपत्नीक संकल्प, प्रायश्चित और गणेश पूजा कर सात दिवसीय अनुष्ठान की यजमानी शुरू कर दी है। चूंकि अनुष्ठान के मुख्य यजमान गृहस्थ ही हो सकते हैं इसीलिए यह निर्णय लिया गया। ( यही बात मैने अपने 10 जनवरी के ब्लॉग में वजह की व्याख्या करते हुए लिख दी थी कि एक गृहस्थ ही यजमानी करे तो श्रेष्ठ है। ) पीएम मोदी अपने हाथ से गर्भ गृह में कुशा और श्लाका खींचेंगे। यहां मिश्रा दम्पति मोदी के प्रतिनिधि के तौर पर 60 घंटे का शास्त्रीय मंत्रोच्चारण सुनेंगे लेकिन 22 जनवरी को पीएम मोदी ही मुख्य यजमान होंगे और वे ही भगवान् को भोग अर्पित करेंगे तथा आरती भी उतारेंगे।
डॉ अनिल मिश्रा राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य हैं। वे पिछले 40 साल से अयोध्या में होम्योपैथिक क्लिनिक चला रहे हैं।उन्होंने 1981 में बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी में डिग्री प्राप्त की थी। वे यूपी होम्योपैथिक बोर्ड के रजिस्ट्रार थे और गोंडा के हौमयोपैथी अधिकारी पद से रिटायर हुए। संघ के सक्रिय सदस्य रहते हुए इन्होंने आपातकाल का घोर विरोध किया था। इन्होंने अयोध्या राम मंदिर आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मुख्य यजमान होने के नाते डॉ मिश्रा ने दो दिन पहले सरयू नदी में डुबकी लगाई और फिर यज्ञ शुरू करने से पहले पंचामृत लिया इसके बाद सपत्नीक हवन में बैठे। ज्ञात रहे कि यहां मंदिर में 121 पुजारी अनुषठान कर रहे हैं और यह पूरा कार्य वैदिक विद्वान गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ की देख-रेख में हो रहा है।
ज्ञात रहे कि अविमुक्तेश्वरानंद ने भी यही कहा था कि शास्त्रों के विधान के अनुसार मोदी मुख्य यजमान नहीं हो सकते। बस हो गया एक विवाद खत्म। वैसे यहां यह कहना जरूरी है कि अविमुक्तेश्वरानंद सिद्धांततः बिलकुल सही हैं जबकि दूसरे जिन संतों ने सत्ता की हां में हां मिलाई वे कहने को संत हो सकते हैं लेकिन शास्त्र सम्मत संत नहीं क्योंकि जो शास्त्रों के नियमों से विमुख होकर किसी की हां में हां मिलाए, वह संत नहीं हो सकता।

यदि सिद्धांतों पर अडिग संत समाज यह न कहता कि मोदी का प्रथम पूजा करना शास्त्र सम्मत नहीं है तो संभवतः मोदी ही प्रधान पूजा करते। यह भी सच है कि सत्ता की मलाई खाने वाले कई संतों ने मोदी द्वारा पूजा किया जाना स्वीकार कर लिया था जो कि गलत है। यह अच्छा हुआ कि मोदी जी ने शास्त्र सम्मत बात का मान रखा जिससे हां में हां मिलाने वाले संत बेनकाब हो गए।
अब दूसरी बात। संत अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि इस धार्मिक अनुष्ठान का राजनीतिकरण ठीक नहीं। यह सौ फीसदी सच है कि इस प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की आड लेकर आने वाले लोकसभा चुनावों के लिए ही जाल बिछाया गया है। यह देश के सभी राजनीतिज्ञ भी जानते हैं और आम जनता भी।

यहां कुछ विवाद और हैं कि देश के चारों शंकराचार्य पौष मास में इस कार्यक्रम को श्रेष्ठ नहीं मानते। उनके अनुसार इस माह में कोई मुहूर्त भी नहीं होता लेकिन दूसरी तरफ पंडित गणेश शास्त्री, लक्ष्मीकांत दीक्षित और रामानन्द सम्प्रदाय के रामविनय दास जी ने प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त भी निकाल लिया वह कैसे ॽ उन्होंने किस आधार पर मुहूर्त निकाला। इसके अलावा इन संतों का कहना है कि अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा नहीं होती। शास्त्रों के नजरिये से यह सही फरमा रहे हैं। फिलहाल स्थिति यह है कि 22 जनवरी को जब तक यह काम नहीं हो जाता तब तक ऐसे कई और किन्तु-परन्तु उठते रहेंगे लेकिन यह भी तय है कि यह काम 22 जनवरी को होकर रहेगा और अब इसे कोई रोक नहीं सकता।

(This article popular in social media is by Ashok Sharma )

मुख्यमंत्री को जेल से मिली जान से मारने की धमकी

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बुधवार सुबह पुलिस महकमें में एक फोन ने खलबली मचा दी। सुरक्षा एजेंसिया सजग और अलर्ट हो गई। जेल से एक फोन आया और फोन करने वाले ने मुख्यमंत्री भजन लाल को जान से मारने की धमकी दे डाली।
मामले में कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसफ का कहना है कि सुबह साढ़े आठ बजे जेल से एक फोन आया। उन्होने बताया कि करीब दोपहर 12 बजे जेल में धोखाधड़ी के मामले में बंद बंदी तक पुलिस पहुंची। उस बंदी ने बताया कि पोक्सो के मामले में बंद बंदी ने उससे मोबाइल मांगकर फोन किया है। दोनों बंदियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जल्द प्रॉडक्शन वारंट पर दोनों को गिरफ्तार किया जाएगा।
जेल से फोन आने पर जेल डीजी भूपेन्द्र दक के आदेश पर देर रात जेल प्रशासन ने हैड वार्डन अजय सिंह राठौड़ और वार्डन मनीष कुमार यादव को सस्पेंड कर दिया। वहीं जेल प्रहरियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

31 जनवरी के बाद निस्क्रिय कर दिए जाएंगे FASTag

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग (NHAI) ने फास्टैग के नये नियमों के अनुसार कहा कि खाते में बैलेंस रहने के बावजूद अधूरे KYC वाले फास्टैग को ब्लैकलिस्टेड कर दिया जाएगा. NHAI ने KYC के लिये लास्ट डेट 31 जनवरी 2024 तय की है। अगर केवाईसी की पूरी प्रक्रिया नहीं हुई तो उसे निस्क्रिय कर दिए जाएंगे.
संचार माध्यमों के अनुसार भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग ने ‘एक वाहन, एक फास्टैग’ की नई पहल शुरू की है. इसका उद्देश्य है कि एक ही वाहनों के लिए कई फास्टैग जारी किये गए हैं. ऐसे में इसके इस्तेमाल को रोकने के लिए नई पहल लागू की गई है. अगर आप चाहते हैं कि आपका FASTag ब्लैकलिस्ट में न जाए तो तुरंत आपको KYC अपडेट करना होगा.
FASTag यूजर्स को सलाह दी जाती है कि वे अपने लेटेस्ट FASTag के लिए KYC प्रक्रिया को तुरंत पूरा कर लें. वहीं यूजर्स को बैंकों की ओर से पहले से जारी FASTag को छोड़ना होगा.
NHAI की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि एक ही वाहन के लिए कई फास्टैग जारी कर दिये गए हैं. जो RBI के नियमों के तहत उल्लंघन है. इसी वजह से पुराने FASTag को ब्लैकलिस्ट किया जा रहा है. इसके साथ ही यह भी शिकायतें आयी है कि FASTag को वाहन के विंडशील्ड पर नहीं लगाया जाता है. इस वजह से टोल प्लाजा पर देरी होती है.

चिरंजीवी योजना के लिये पूर्व सरकार ने केवल झूठ बोला है —स्वास्थ्य मंत्री

स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने जोधपुर में संचार माध्यमों के प्रतिनिधियों से स्वास्थ्य व्यवस्था और चिरंजीवी योजना पर चर्चा करते हुए कहा कि इस योजना में 25 लाख रुपये देने की बात कही गई है लेकिन ये केवल लॉलीपॉप है. इसमें 8 लाख रुपये से ज्यादा फायदा किसी को नहीं मिला. पिछली सरकार ने चिरंजीवी में बढ़ा-चढ़ाकर केवल झूठ बोला है, वह हम नहीं कर सकते.
खींवसर ने कहा कि हेल्थ काफी अहम है और मैं यह मालूम करने की कोशिश करूंगा की इस योजना का लाभ आम लोगों को क्यों नहीं मिला. मैं अधिकारियों से मीटिंग करूंगा जिसमें प्राइवेट अस्पतालों को भी शामिल करूंगा. उन्होंने यह भी कहा कि वह आयुष्मान स्कीम पर चर्चा करने दिल्ली जाऊंगा. जिससे राजस्थान को केंद्र से रिलेक्सेशन मिलेगा और अमाउंट भी बढ़ेगा. हम चाहते हैं कि राजस्थान में फंड एड कर आयुष्मान में ही समाहित हो जाए. यानी ‘एक कार्ड वन स्कीम’ होगी.
स्वास्थ्य मंत्री के उपरोक्त कथन के बाद पूर्व की सरकार की मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना पर संकट मंडराते हुए दिख रहा है. इससे यह स्पष्ट नजर आ रहा है कि जल्द ही सरकार स्वास्थ्य पर नयी योजना लागू कर सकती है.

सरकार मीटिंग बुला कर समस्यायों पर करें चर्चा —एल.पी.जी वितरक संघ

गैस की प्रस्तावित सब्सिडी पर बहुत से प्रश्न अभी उत्तर की प्रतीक्षा में

तेल कम्पनियां eKYC करते समय ‘रबर टियूब’ बेचने और ‘अनिवार्य जाँच’ का बनाती है दबाव

राजस्थान एल.पी.जी वितरक संघ ने एक प्रैस वार्ता कर घरेलू गैस वितरण और सम्बंधित विभिन्न कार्यक्रमों में आ रही समस्याओं पर राजस्थान सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि सरकार राज्य स्तर पर वितरक प्रतिनिधियों के साथ एक मीटिंग बुला कर समस्यायों पर चर्चा करें, ताकि हड़ताल जैसी नौबत नहीं आए। उपभोक्तायों को राहत देने के सरकारी प्रयास में हम वितरक अपनी अच्छी भागीदारी निभाते रहे हैं और निभाते रहेंगे किंतु ज़िम्मेदार अधिकारियों को भी वितरकों की समस्या का हल करने में अपनी भागीदारी निभानी चाहिए।
संघ के पदाधिकारियों ने संचार माध्यमों के प्रतिनिधियों को बताया कि विकसित भारत संकल्प यात्रा के अंतर्गत लगाए जाने कैम्प में गैस वितरकों को बहुत दिक्कातों का सामना करना पड़ रहा है।
वितरक से अपेक्षा की जा रही है की एक दिन में 2 से 3 कैम्प में विभिन्न स्थानों पर सेवाएँ दे। एक वितरक के पास सीमित स्टाफ़ और संसाधन होते हैं। साथ ही गैस वितरण से सम्बंधित नियमित कार्य भी करना होता है। सभी जगह पर सेवाएँ देना असम्भव सा हो जाता है।
टेम्परेरी नियुक्त स्टाफ़ पर इस ज़िम्मेवारी को नहीं सौंपा जा सकता।
संघ ने प्रशासनिक अधिकारी पर दवाब डालने का आरोप लगाते हुए कहा कि कैम्प में KYC करने और तुरंत गैस कनेक्शन देने का भी ज़ोर डालते है, जबकि कनेक्शन देने से पहले कम्पनी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया को पूरा करना होता है। अपात्र व्यक्तियों को कनेक्शन जारी नहीं किया जा सकता। अधिकारी अपना टार्गेट स्वयं निर्धारित कर उसे पूरा करने पर आमादा हो रहे है और नहीं करने पाने पर वितरकों को लताड़ तक लगा रहे हैं, जबकि इस टार्गेट को पूरा करना एल गैस वितरक के हाथ की बात नहीं होती।
दूसरी ओर कम्पनी व आधार के सर्वर धीमी गति से चल रहे है और दूर दराज के गाँवों में डाटा नेट्वर्क कमजोर होने से eKYC कर कनेक्शन बनाना सम्भव नहीं होता। वहीं गैस वितरक को भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय मिलता है। उस मानदेय में इस प्रकार के अनेक कैम्पो का खर्चा होने से गैस वितरक को भारी आर्थिक नुक़सान उठाना पड़ रहा है!

गैस की प्रस्तावित सब्सिडी पर बहुत से प्रश्न अभी उत्तर की प्रतीक्षा में
संघ ने यह भी कहा कि गैस की प्रस्तावित सब्सिडी पर बहुत से प्रश्न अभी उत्तर की प्रतीक्षा में है। इससे ग्राहकों को जवाब देने में वितरकों को असमंजस का सामना करना पड़ता है। संघ ने सरकार को कहा कि गैस वितरण, कैम्प और सब्सिडी जैसे विषयों पर वितरक प्रतिनिधियों से बात कर सुविधा अनुसार कार्यक्रम व नीति बनाएं ताकि गैस उपभोक्ताओं को विभिन्न योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के दिया जा सके।

तेल कम्पनियां eKYC करते समय ‘रबर टियूब’ बेचने और ‘अनिवार्य जाँच’ का बनाती है दबाव

संघ ने तेल कम्पनियों पर कई आरोप लगाते हुए संचार माध्यमों के प्रतिनिधियों को बताया कि सर्दी के इस मौसम में, जब गैस की खपत आम तौर पर बढ़ जाती है, गैस की सप्लाई नियमित नहीं दी जा रही है। वितरक तो पैसे और अपना इंडेंट कर सकते हैं, जिसमें कोई कमी नहीं है, इसके उपरांत वितरक को गैस उपलब्ध करवाना कम्पनी की ज़िम्मेवारी है। 1 जनवरी के पश्चात (ट्रक हड़ताल के बाद) गैस सप्लाई पटरी पर नहीं आई है। वितरकों द्वारा किए गए इंडेंट कम्पनी द्वारा मनमाने ढंग से कैन्सल कर दिए जाते हैं। कम्पनी द्वारा वितरकों को ग़ैर वाजिब टार्गेट पूरा करने को बाध्य किया जा रहा है। यहाँ तक कि eKYC करते समय ‘रबर टियूब’ बेचने और ‘अनिवार्य जाँच’ के लिए भी दबाव डाला जा रहा है। इस जाँच के लिए ग्राहक को 236/- रुपये देने होते हैं। जो कि इस प्रकार के टार्गेट पर कार्य करना वितरक के लिए व्यावहारिक नहीं है।

वहीं दूसरी ओर वितरकों द्वारा किसी भी टार्गेट को पूरा नहीं कर पानेर पर वितरक के विरुद्ध MDG के अंतर्गत लाखों रुपय की शाश्ति लगाने की धमकी भी दी जाती है और कई वितरकों पर इस प्रकार से कोई न कोई गलती निकाल कर लाखों रुपय की शास्ति लगायी गयी है। DAC / OTP के टार्गेट पूरा करने की अनिवार्यता के चलते गावों में और गरीब तबके के परिवारों को गैस सप्लाई करने में बाधा आ रही है।
संघ के पदा​धिकारियों ने कहा कि कई प्रयासों के उपरांत भी, कम्पनी द्वारा इन समस्याओं के समाधान के लिए वितरक प्रतिनिधियों से बात नहीं की जा रही है। पिछले वर्ष, वितरकों द्वारा हड़ताल का नोटिस देने पर आश्वासन दिया गया था की प्रत्येक 3-4 माह में एक मीटिंग कर, वितरकों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा, किंतु समाधान तो दूर, कम्पनियाँ समस्या सुनने तक को तैयार नहीं हैं।

ब्रेकिंग न्यूज़: मीडिया का निधन!

भारतीय मीडिया का निधन हो गया है।
ओम शांति!

‘अयोध्या की ओर दौड़ती मीडिया की गाड़ियां,‘हिंदू’मीडिया की हैं। इनको मीडिया समझने की गलती न करें । नोएडा के सारे संपादक मीडिया के अंतिम संस्कार में मौजूद थे। जिन्होंने अंतिम संस्कार में जाने से इनकार कर दिया, उनका सामान उठाकर सड़क पर फेंक दिया गया।नोटिस पीरियड का पैसा नहीं दिया गया। मुक़दमे की धमकी और बुलडोजर की फ़ोटो दी गई है ।
निधन के बाद मीडिया का पुनर्जन्म नए भारत में ‘हिंदू’और सांप्रदायिक मीडिया के रूप में हुआ है। इस जन्म में इनके माता-पिता का IT सेल है। इस जन्म में सभी मीडिया संस्थान जुड़वा पैदा हुए हैं। इसलिए सबकी हरकतें, चीखने चिल्लाने और दूसरों पर हमला करने की आदत एक जैसी हैं । यह संविधान की भाषा नहीं समझते, इनके दिमाग़ में केवल नफ़रत और हिंसा फीड हैं।
इनकी गाड़ियों पर लिखे गए स्लोगन,इनके दिमाग़ से नहीं बेंगलोर से आते हैं।’ भारतीय मीडिया IT सेल का एक्सटेंशन बन गया है।
क्या राम मंदिर मीडिया कम्पनियों ने बनवाया है? अगर मीडिया गाड़ियों पर सरेआम लिखकर बता रहा है,मंदिर इन्होंने बनवाया है, तो भाजपा को इसका खंडन करना चाहिए! भाजपा कहती है, मंदिर उसने बनवाया है। तो इसलिए भाजपा की नैतिक ज़िम्मेदारी है, वह स्पष्ट करे कि मंदिर किसने बनवाया!

अयोध्या की ओर दौड़ती गाड़ियां, असल में भाजपा के डीज़ल और एजेंडे पर चुनाव प्रचार में जुटी गाड़ियां हैं। इन गाड़ियों में पत्रकार नहीं जाते, सरकारी चित्रकार जाते हैं जो सरकार के बताए नज़ारे का चित्रण कर देते हैं।

भाजपा चुनाव प्रचार में 22 जनवरी के बाद जुटेगी, अभी प्रचार की कमान पुनर्जन्म लेने वाला मीडिया संभाल रहा है।

नोएडा में मीडिया के नाम पर भाजपा कंपनियों में काम करने वाले लोग, पूजा पाठ घर से करने की जगह, घर का मंदिर भी ऑफ़िस में ले आए हैं ।जिससे वह अपने कामकाज का पूरा हिसाब बैंगलोर भेज सकें।

अब भारतीय नागरिकों को तय करना है, वह अभी भी हर दिन के झगड़े को पत्रकारिता कहेंगे? अपने चंदे पर बने मंदिर का श्रेय मीडिया कम्पनियों को लेने देंगे?

अपने विवेक का टेंडर मीडिया को मत दीजिए।

इसे पत्रकारिता नहीं, नागरिकों की आस्था और विश्वास का मज़ाक उड़ाना कहते हैं!
आप क्या कहेंगे तय कर लीजिए…

HAS VASUNDHARA RAJE TAKEN RETIREMENT OR IS SHE ANGRY WITH BJP?

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After winning the Rajasthan Assembly elections, Bharatiya Janata Party has started preparing for the Lok Sabha elections. The meeting of party leaders has started. In this sequence, on Friday, a big meeting of BJP was held at Hotel Rajsthali in the capital Jaipur. In this meeting, Chief Minister Bhajan Lal Sharma, State Party President CP Joshi, Rajasthan in-charge Arun Singh, Chhattisgarh in-charge Om Mathur, Union Ministers Gajendra Singh Shekhawat, Arjun Ram Meghwal, Kailash Choudhary, Government Whip in Assembly Jogeshwar Garg, former State President Satish Poonia, former Leader of Opposition. Many other leaders including Rajendra Rathore were present.

But former Rajasthan Chief Minister Vasundhara Raje did not attend this meeting. This is the third time since BJP’s victory in Rajasthan and the swearing in of Chief Minister Bhajan Lal Sharma, that Vasundhara Raje did not attend the party meeting, Council of Ministers swearing in ceremony.

After Vasundhara Raje did not attend the party meeting, the question has started arising whether Vasundhara Raje is angry with BJP? Is there any factionalism going on in Rajasthan BJP? These questions regarding Vasundhara’s absence are also being raised because the former CM had also avoided PM Modi’s meeting.

Let us tell you that on January 5, when PM Modi had reached Jaipur to attend the IG-DG conference, as soon as he reached Jaipur, he had a meeting with the newly elected MLAs and party officials for two and a half hours in the party office. But Vasundhara Raje did not attend this meeting also. Vasundhara Raje’s participation in PM Modi’s first meeting held at Jaipur BJP office. Urban Development and Self-Government Minister Jhabar Singh said that all the ministers, MLAs and party officials were present in the meeting but due to family reasons, Vasundhara Raje was not present in the meeting. When Minister Jhabar Singh was asked about Vasundhara not attending, he said that she could not come due to some family reasons.

In this situation, it appears that family reasons have been held responsible for Vasundhara Raje not attending the meeting held in Jaipur on Friday. It is being told that due to ill health of his daughter-in-law, she could not come to the meeting. But Vasundhara’s absence from three big occasions points towards factionalism and infighting in the BJP. However, this is an issue on which no one can say anything. Now it has to be seen when Vasundhara returns to her old role or her words spoken jokingly in Jhalawar, it is now time for my retirement.