CM BHAJAN LAL -राष्ट्र की उन्नति के लिए नागरिकों में राष्ट्रवाद की भावना आवश्यक -मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि होनहार प्रतिभाएं अपने परिवार के साथ ही समाज और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। इनके सम्मान से अन्य लोगों को भी जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। श्री शर्मा रविवार को जयपुर के बिड़ला सभागार में अखिल भारतीय राव राजपूत महासभा द्वारा आयोजित शपथ ग्रहण एवं प्रतिभा सम्मान समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के सर्वांगीण विकास, महिला उत्थान के साथ विकसित राजस्थान के निर्माण के लिए कृत संकल्पित है। इसी दिशा में राज्य के परिवर्तित बजट 2024-25 में पांच साल में 4 लाख सरकारी नौकरियां देने एवं निजी क्षेत्रों में स्किल अपग्रेडेशन के साथ रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाए जाने की घोषणा की गई हैं। उन्होंने कहा कि खेलों में युवा प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और संभाग स्तर पर खेल महाविद्यालय खोले जाएंगे जहां खेल प्रतिभाओं को तराशकर आगे बढ़ाया जाएगा।

श्री शर्मा ने कहा कि राव राजपूत समाज को उनके गौरवशाली इतिहास, अमूल्य विरासत, और भारतीय समाज में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। संख्या में कम होने के बावजूद इस समाज के लोगों ने हमेशा राष्ट्रधर्म निभाया है और अपनी राष्ट्रवाद की भावना से अन्य समाज के लोगों को भी प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि समाज की माताओं-बहनों ने अपने बच्चों को अच्छे संस्कार और शिक्षा देकर मेहनती और प्रतिभाशाली बनाया है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी राष्ट्र भावना और सांस्कृतिक विरासत पर गर्व अनुभव करें और राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

हम सब निभाएं जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य—
श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार पं. दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के संकल्प को साकार करने की दिशा में प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। सरकार के इस ध्येय को पूरा करने के लिए नागरिकों का भी सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हम सबको अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए अपने आस-पास के वंचित वर्ग को केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करनी चाहिए। ‘सबका साथ-सबका विकास’ की सोच के साथ ही विकसित राजस्थान और विकसित भारत की परिकल्पना साकार होगी।

पहले भवन निर्माण करो, फिर स्वीकृति के लिये आवेदन करो

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सुर्खियों में रहना नगर निगम हैरिटेज के लिये कोई खास बात नहीं है। लेकिन सुर्खियों में लगातार बना रहना बड़ी बात। सुर्खियों के क्रम में एक और गम्भीर मामला संज्ञान में आया है। निगम क्षेत्र में अवैध भवन निर्माणकर्ता ने पहले अपने तरीके से निर्माण किया, फिर स्वीकृति के लिये आवेदन किया। और इस दौरान निर्माण कार्य भी चलता रहा। वो भी निगम आयुक्त सहित सभी स्तर के अधिकारियों के संज्ञान के बाद भी।

मामला घाटगेट के पास छप्पर बन्दो का रास्ता भूखण्ड संख्या 1502 और भूखण्ड का क्षेत्रफल लगभग 40 बाई 90 का है। इस भूखण्ड पर श्रीमती राबिया बेगम पत्नि वाहिद खान ने बिना भवन स्वीकृति के तीन मंजीला भवन का निर्माण कर लिया। जब ये चर्चा आम हुई तो निगम का दस्ता 06 मई 2024 को मौके पर पहुंचा और जांच करके अवैध निर्माणकर्ता को दो दिवस में स्वीकृति और स्वामित्व सम्बंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का नोटिस दे कर लौट आया। नोटिस की रस्म अदायगी के बाद अपायुक्त आर्दश नगर जोन द्वारा दिनांक 13 मई 2024 को पत्र के ज​रीए अतिरिक्त मुख्य नियोजक को अग्रिम कार्यवाही के लिये फाइल प्रस्तुत की गई।

सवाल ये है कि जब स्वीकृति थी तो 06 मई 2024 को अवैध निर्माणकर्ता को नोटिस क्यों दिया गया?
दूसरा सवाल जब भवन स्वीकृति की समस्त कार्यवाही नहीं हुई थी तो निर्माण कार्य को रोका क्यों नहीं गया? जबकि जांच दस्ता ने अपनी रिपोर्ट में साफ उल्लेख किया किया कि निर्माण अवैध है।

क्या कहते हैं नियम :—
नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 194—7 एफ/ 285 के तहत ऐसे अवैध निर्माणों को सीज या धवस्त किया जाता है।

प्रिंट मीडिया में राजनैतिक विज्ञापनों का प्रकाशन अधिप्रमाणन के बाद ही किया जा सकेगा

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राजस्थान में ओपिनियन पोल या अन्य पोल सर्वे के प्रसारण पर प्रतिबंध रहेगा, साथ ही, एग्जिट पोल के परिणामों को समाचार पत्रों में प्रकाशित या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से प्रसारित करना अथवा अन्य किसी तरीके से प्रचार-प्रसार करने पर भी पूर्णतया प्रतिबंध रहेगा। एग्जिट पोल पर यह प्रतिबन्ध लोकसभा चुनाव के 7वें चरण के मतदान दिवस 1 जून को शाम 6:30 बजे तक जारी रहेगा।


निर्वाचन मशीनरी एवं पुलिस प्रशासन सुनिश्चित करेंगे कि सामुदायिक केंद्रों, धर्मशालाओं, गेस्ट हाऊस, लॉज, होटलों आदि में ठहरे हुए बाहरी व्यक्तियों की जानकारी और सत्यापन किया जाए साथ ही बाहर से आने वाले वाहनों पर भी निगरानी रखी जाएगी।

निर्वाचन के संबंध में कोई सार्वजनिक सभा या जुलूस न बुलाएगा और न ही उसमें शामिल हो

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दूसरे चरण के चुनाव से संबंधित सिनेमा, चलचित्र, टेलीविजन या वैसे ही अन्य साधनों द्वारा जनता के समक्ष किसी निर्वाचन संबंधी बात का प्रदर्शन नहीं करेगा। कोई संगीत समारोह या कोई नाट्य अभिनय या कोई अन्य मनोरंजन या आमोद-प्रमोद जनता के सदस्यों को उसके प्रति आकर्षित करने की दृष्टि से, आयोजित करके या उसके आयोजन की व्यवस्था करके, जनता के समक्ष किसी निर्वाचन संबंधी बात का प्रचार नहीं करेगा, कोई व्यक्ति यदि इन उपबंधों का उल्लंघन करता है, तो दो वर्ष तक कारावास या जुर्माना या दोनों सजा होगी।

कोई भी राजनैतिक व्यक्ति जो उस निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता या अभ्यर्थी नहीं है अथवा सांसद या विधायक नहीं है, वह उस निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव प्रचार समाप्त होने के पश्चात् नहीं ठहर सकता।
राज्य की सुरक्षा कवच प्राप्त राजनैतिक व्यक्ति (अभ्यर्थी से भिन्न) यदि निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता है, तो वह अपने मताधिकार का उपयोग करने के बाद क्षेत्र में आवाजाही नहीं करेगा। इस दौरान अंतरराज्यीय सीमाएं भी सील रहेंगी। इन क्षेत्रों में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध के साथ सूखा दिवस रहेगा।

दूसरे चरण के लिए आज थम जाएगा चुनावी शोर गुल, प्रत्याशी और पार्टियों को करना होगा नियमों का पालन

प्रदेश की 13 लोकसभा सीटों पर होने वाले दूसरे चरण के चुनाव प्रचार का शोर आज थम जाएगा। शाम 6 बजे के बाद प्रत्याशी केवल डो टू डोर कैंपेन कर सकेंगे। राज्य निर्वाचन विभाग ने मतदान के अंतिम 48 घंटे के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, जिसके अनुसार प्रत्याशी किसी भी तरह के लाउडस्पीकर से प्रचार नहीं कर सकेंगे। साथ ही उन्हें जुलूस निकालने की भी अनुमति नहीं होगी। इतना ही नहीं निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के अनुसार स्टार प्रचारकों को भी संबंधित लोकसभा क्षेत्रों की सीमाओं को छोड़ना होगा।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रवीण गुप्ता ने बताया कि राजस्थान में लोकसभा चुनाव 2024 के दूसरे चरण में मतदान के अंतिम 48 घंटे के लिए चुनाव प्रचार संबंधित गतिविधियां 24 अप्रैल शाम 6 बजे से थम जाएंगी। दूसरे चरण में 13 लोकसभा क्षेत्रों टोंक-सवाईमाधोपुर, अजमेर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर, जालोर, उदयपुर, बासंवाड़ा-डूंगरपुर , चितौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा, कोटा-बूंदी और झालावाड़-बारां में 26 अप्रैल को मतदान होगा. गुप्ता ने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126 के तहत इन लोकसभा क्षेत्रों में मतदान की समाप्ति के लिए नियत समय से 48 घंटें की अवधि 24 अप्रैल को शाम 6 बजे से आरंभ होकर मतदान समाप्ति अवधि 26 अप्रैल को शाम 6 बजे तक प्रभावी रहेगी।

अशोक गहलोत के कुनबे की इज्जत दाव पर, बीजेपी नेताओं ने लुम्बाराम से किया किनारा

वैसे तो आगामी 26 अप्रेल को 13 लोकसभाई सीटों पर चुनाव होने जा रहे है। लेकिन सबसे दिलचस्प चुनाव जालोर-सिरोही का है जहां पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साहबजादे वैभव गहलोत अपना भाग्य आजमा रहे है। सामने है बीजेपी के लुम्बाराम चौधरी।

वैभव गहलोत को जिताने के लिए जहां पूरा कुनबा सक्रिय है, लुम्बाराम को पार्टी की ओर से अपेक्षित सहयोग नही मिल रहा है। न नेता सक्रिय है और न ही कार्यकर्ता। जबकि वैभव के लिए उसके पिता अशोक गहलोत, मां सुनीता, पत्नी हिमांशी और पुत्री कश्विनी जितने के लिए जी जान से जुटे हुए है ।

अशोक गहलोत को कांग्रेस पार्टी से कोई मतलब नही है। उनका एक ही मकसद है, अपने पुत्र को लोकसभा में भेजने का। लेकिन वैभव को सफलता मिलेगी, इसमें संदेह है। पिछला लोकसभा चुनाव जोधपुर से शर्मनाक तरीके से हारने के बाद बाप-बेटे जालोर की जनता को मूर्ख बनाने की गरज से यहां चले आए। पूरा कुनबा गिड़गिड़ाते हुए वैभव को जिताने की भीख मांग रहे है। उधर उन्होंने बीजेपी के कुछ नेताओं को भी खरीद लिया है । ऐसे में लुम्बाराम की स्थिति अनाथ जैसी होगई है।

वैभव की जीत में संदेह इसलिए है क्योंकि उनमें कोई राजनीतिक लक्खन नही है। अलावा इस बात के कि वे अशोक गहलोत के बेटे है। न बोलने का सहूर है या राजनीतिक दूरदृष्टि। आरसीए का चुनाव वैभव ने जीता नही, उनके पिता ने छल कपट से जितवाया। उसी छल कपट और अरबो रुपये खर्च करके अशोक गहलोत अपने बेटे को जिताने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे है।

अशोक गहलोत भलीभांति जानते है कि वैभव हार गया तो उनका राजनीतिक जीवन लगभग समाप्त हो जाएगा। वैसे भी विधानसभा चुनाव के बाद उनके शेयर की रेट 30 फीसदी से भी कम रह गई है। इसी को मद्देनजर रखते हुए गहलोत द्वारा अरबो रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे है। कार्यकर्ताओ की लंबी फौज है जो वैभव को जिताने के नाम पर मुर्गे की टँगड़ी तोड़ रही है और बियर के जरिये गर्मी को दूर भगाया जा रहा है।

जालोर की जनता के जेहन में एक ही सवाल है कि यदि वैभव जीत भी गए तो क्षेत्र के काम क्या आएंगे? न उन्हें सलीके से बोलना आता है और उनमें कोई राजनीतिक परिपक्वता है। केंद्र में बीजेपी की सरकार बनना तय है। ऐसे में जीत भी जाते है तो वैभव क्षेत्र के लिए कुछ नही कर पाएंगे। हारे या जीते, वैभव का चुनाव के बाद जालोर से कोई ताल्लुक नही रहेगा। वे रहेंगे जयपुर और जनता इंतजार करेगी जालोर में।

इसके इतर लुम्बाराम के जितने पर क्षेत्रीय विकास होना संभावित है। यह इलाका बहुत पिछड़ा हुआ है। ऐसे में लुम्बाराम की आवाज केंद्र में अवश्य सुनी जाएगी जिसका सीधा फायदा जालोर की जनता को होगा। वैभव की जीत से जालोर की जनता को रत्ती भर लाभ नही होने वाला है। इसलिए क्षेत्रीय लोगो का मानना है कि वैभव की जोधपुर के मुकाबले यहां और भी शर्मनाक पराजय होगी।

रविंद्रसिंह भाटी विजयश्री की ओर

राजस्थान लोकसभा चुनाव लड़ने की दमदार घोषणा करने वाले रविंद्रसिंह भाटी की सिंह गर्जना का भाजपा और कांग्रेस में भय व्याप्त है। दोनों दलों के उच्च स्तरीय नेताओं में जयपुर और दिल्ली के दिलों में भय और भाल पर चिंता की लकीरें खिंच चुकी है। अबकी बार 400 के पार का नारा भाटी के सिघनाद से हिचकोले खाने लगा है। आखिर क्यों डर रहे हैं भाजपा सम्राट? शिव विधानसभा का रण कौशल ऐसा रहा है कि उसे कोई समझ नहीं पाया है और उसी युद्ध कौशल से भाटी चुनौती देते हुए बाड़मेर जेसलमेर का युद्ध जीत जाएंगे। राजस्थान की 25 सीटों में से चुनाव से पहले ही एक सीट बाड़मेर जेसलमेर भाजपा के अधिकार से निकलती हुई चर्चा में है। भाजपा की एक कोर खंडित होने का स्पष्ट खतरा। इस युद्ध के लिए राजस्थान और राजस्थान के बाहर अन्य प्रदेशों के राजपूतों में जबरदस्त जोश है। युद्ध जीतने से पहले का उत्साह भरा है।


हर ओर भाटी की चर्चा है। महाराणा प्रताप मेमोरियल ट्रस्ट अयोध्या, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, श्री राजपूत सभा, क्षत्रिय युवक संघ व सभी राजपूत संगठन, राजपूत कोर कमेटी सदस्य व अखंड राजपुताना सेवा संस्थान दिल्ली परिवार और अनेक क्षत्रिय संस्थाएं उनके पदाधिकारी भाटी के साथ खड़े हैं।

सोशल मीडिया पर यह हो क्या रहा है ॽ

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वाट्सएप ग्रुप, मतलब सोशल मीडिया प्लेटफार्म। खबरनामा वाट्सएप ग्रुप के एडविन ने एक संदेश जारी किया है कि ग्रुप में कोई भी सदस्य मोदी और राहुल पर कोई भी बहस की पोस्ट न डालें। इसके अलावा गुड मार्निंग संदेश भी नहीं। यही व्यवस्था दिल्ली, यूपी, एमपी और महाराष्ट्र के कई वाट्सएप ग्रुप के ऐडविन ने काफी समय पहले से की हुई है। खबरनामा वाट्सएप ग्रुप के ऐडविन की यह बहुत अच्छी पहल है और इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। चूंकि हक़ीक़त यही है कि अधिकांश लोग दिन भर बैठे-बैठे वाट्सएप पर ऐसी ही क्रिया-प्रतिक्रिया में उलझे रहते हैं। बुजुर्गों की बात अलग है क्योंकि वे अपने ज्ञान और अनुभव को शेयर करते हैं लेकिन युवा वर्ग, जैसे उनके पास और कोई काम है ही नहीं और यही उनकी सर्विस है।

यह सच है कि लोगों ने सभी वाट्सएप ग्रुप्स को भड़ास डाट काम बना कर रख दिया है। दिन भर बैठे-बैठे वाट्सएप पर यही करते रहते हैं कि मोदी ने राहुल के लिए क्या कहा और राहुल ने मोदी के लिए क्या कहा। कहा तो ऐसा क्यों कहा। ममता बनर्जी क्या कर रही हैं, नीतीश कुमार ने यह ठीक नहीं किया, कंगना रनौत ने बीफ क्यों खाया आदि-आदि। मोदी और राहुल ने एक-दूसरे के लिए जो कुछ कहा या कह रहे हैं उस पर बैठे-बैठे तर्क-वितर्क करते रहना ही जैसे इनकी दिनचर्या बन गया है और उन्हें पढ़ना लोगों की बाध्यता हो गई है। जैसे इसके बिना न उनका खाना पचेगा और न ही उन्हें नींद आएगी। ऐसे लोगों ने सोशल मीडिया का हुलिया बिगाड़ कर रख दिया।

दूसरी ओर कुछ लोग आफिसों में बैठे-बैठे सोशल मीडिया पर गुटर गूं करते रहते हैं। काम-धाम छोड़ कर इसी में रमे रहते हैं। उस पर तुर्रा यह कि वे खुद को सोशल मीडिया पर एक्टिव शो करते हैं। सामने काम रखा है, विंडो पर क्यू में लोग खड़े हैं लेकिन ये अपनी इसी ताकधिन्ना में मस्त हैं। कुछ लोग तो मोदी और राहुल को लेकर इस कदर ज़ुबानी आस्तीन चढ़ाए रहते हैं जैसे वे उन्हें सोल्व कर देंगे या उसके लिए मर जाएंगे अथवा मार देंगे।

इन ग्रुप्स में कुछ लोग तो इस तरह एक-दूसरे से उलझते रहते हैं जैसे वे मोदी या राहुल के लिए ही वाट्सएप ग्रुप में बैठे हुए हैं और ये दोनों दल उन्हें ” पे ” कर रहे हैं। सच में कुछ लोग ऐसे लिख भी रहे हैं। ऐसे लोग अपने स्वार्थ के लिए ग्रुप की वेल्यु भी खराब कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ ग्रुप वाले भी एक ही आईटम बार-बार रिपीट करते रहते हैं जैसे उनकी भी उनसे कोई बंधी है। कुछ लोग भड़ास निकालने में इस कदर उलझ जाते हैं कि स्तरहीन भाषा का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे लोग न केवल वाट्सएप ग्रुप का स्तर गिरा रहे हैं बल्कि वे शिक्षित हैं इस पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है। कुछ लोगों ने गुड मार्निंग संदेश में अपनी कंपनी का नाम, मोबाइल नंबर और वर्क भी लिख कर भेजते हैं, यह एक तरह की चालाकी पूर्ण गुड मार्निंग संदेश है। चूंकि इस आड़ में मुफ्त में सोशल मीडिया पर कंपनी का विज्ञापन भी प्रकाशित कर लेते हैं और धंधा भी।

एक और बात कि अखबारों में दोनों पार्टियों को लेकर रोज बहुत-कुछ छपता रहता है लेकिन वहां इस तरह भड़ास निकालने वाले चुप रहते हैं। सिर्फ वाट्सएप पर ही फिजूल ताव खाते रहते हैं। इसी को घर की खेती समझ रखा है। अखबारों में पहले पाठकों के लिए एक कालम आता था लेकिन बाद में अखबारों ने उसे बंद कर दिया क्योंकि फालतू कलम घसीटने वालों की बाढ़ आ गई थी। खबरनामा ने जो आपत्ति उठाई है वह सही है। उन्ही की तरह दिल्ली, यूपी और एमपी के भी कई वाट्सएप ग्रुप के ऐडविन ने ठीक ऐसा ही क़दम उठाया हुआ है। उन्होंने अपने निर्देश में यही कहा कि सोशल मीडिया को सोशल मीडिया ही रहने दें, इसे फ़िज़ूल की बातों का प्लेटफार्म न बनाएं और जो नहीं मानता है उसे ग्रुप से बाहर कर देते हैं।

दैहिक संबंधों का कहर

सतर्क रह कर चलें, इस दौर में, अब हर रिश्ता यहां दग़ाबाज़ है।
कुछ दिनों पहले लालसोट में एक मामा ने अपने भांजे की हत्या कर दी। वज़ह यह थी कि भांजे के मामी से अवैध संबंध थे। भांजे की हत्या के बाद मामा ने भी आत्महत्या कर ली। उसके बाद हत्या में शामिल मामा के भाई ने भी रेल से कट कर आत्महत्या कर ली। एक अवैध संबंध एक ही घर के तीन सदस्यों की मौत का कारण बन गया। उधर मामी भी इस वाकिये के बाद फरार हो गई। यद्यपि कानून ने महिलाओं को किसी से भी यौन संबंध बनाने की छूट दे दी है लेकिन उसने कभी भी यह नहीं सोचा कि ऐसे रिश्ते अनगिनत खून-खराबे को जन्म देंगे। ये जो मामी से अवैध संबंधों के कारण तीन मौतें हुई हैं ये उसी का परिणाम है। यह समाचार राजस्थान के सभी समाचार-पत्रों में छपा है।
एक यथार्थ यह कि हवस की भूख में स्त्री हो या पुरुष हर गुनाह कर गुजरता है। इसके लिए वह हर रिश्ते की हत्या कर रहा है। एक औरत रोटी खाए बगैर रह सकती है लेकिन सेक्स किये बिना नहीं रह सकती। फिर चाहे पति हो, पडौसी हो, प्रेमी हो, आफिस में बास हो या सहकर्मी हो, उम्र में बहुत बड़ा व्यक्ति हो अथवा कोई नाबालिग हो। हवस की भूख लगने पर वह इनमें से किसी से भी संबंध स्थापित करने से नहीं चूकती। भले ही इसके लिए उसे किसी की हत्या ही क्यों न करनी पड़े। वह कर देगी, चाहे उसकी अपनी औलाद ही क्यों न हो। मानें आपकी इच्छा न मानें आपकी इच्छा।
हाल ही में घड़साना में एक बहू ने अवैध संबंधों में बाधक अपनी सास को डिग्गी में डुबो कर मार डाला। हैवानियत की हद यह कि उसने अपनी वृद्ध सास का मुंह पानी में तब तक डुबोए रखा जब तक वह मर नहीं गई। उसका प्रेमी पहले धर्म भाई बना हुआ था। जागरण अख़बार में एक खबर छपी कि लोनी में एक सगी मां अपनी ही नाबालिग़ बेटी को सौतेले पिता से यौनाचार कराने में मदद करती रही। यही नहीं उसने अपने नाबालिग़ बेटे को भी सौतेले पिता से अप्राकृतिक मैथुन का शिकार बनाए रखने में मदद की। आखिर दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
अब देखिये हैदराबाद की एक विवाहिता का अजीबो-गरीब किस्सा। स्वाति सुधाकर रेड्डी की धर्मपत्नी थी। उसके राजेश से अवैध संबंध थे। राजेश से अपने रिश्ते क़ायम रखने के लिए उसने अपने पति सुधाकर को एनेस्थिसिया का इंजेक्शन देकर बेहोश किया। उसके बाद गला दबा कर उसकी हत्या कर दी। फिर राजेश की प्लास्टिक सर्जरी करा कर उसे सुधाकर रेड्डी बनवा दिया। लेकिन हैदराबाद पुलिस सच तक पहुंच गई और स्वाति और राजेश को सलाखों में डाल दिया। यह है सेक्स की भूखी औरत की दरिंदगी।
ये जो इस तरह के संबंध हैं, एक बार स्थापित हो जाने के बाद न स्त्री उन्हें छोडती है न ही पुरुष। भले ही जान जाए तो जाए। एक औरत के सिर पर जब हवस का भूत सवार होता है तो वह कुछ भी कर सकती है। कुछ भी। वह हत्या और आत्महत्या की हद तक पहुंच जाती है। कुछ दिनों पहले देहरादून में एक पांच बच्चों की मां बुआ ने अपने ही 16 साल के भतीजे से सेक्स संबंध बना लिए और उससे मां बन गई। देहरादून पोक्सो कोर्ट ने बुआ को 20 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। वह अपने पति से अनबन होने के कारण पीहर में ही रह रही थी। यूपी के हापुड़ में एक बेटी ने अपनी ही मां को भतीजे के साथ आपत्तिजनक अवस्था में देख लिया। बेटी काव्या द्वारा भतीजे अंकित के साथ मां को यूं देख लिये जाने पर सुरेखा ने काव्या की दांतली से हत्या कर दी। हैवान बनी सुरेखा ने काव्या के शरीर पर दांतली से कई वार किये जिससे उसका शरीर कट-फट गया और वह मर गई। सुरेखा यहीं नहीं रुकी, उसने काव्या की मृत देह को चुनरी से बांधा और एक खंडहर में फेंक आई। बाद में पुलिस ने छान-बीन में पता लगा लिया और सुरेखा को गिरफ्तार कर ले गई।
भरतपुर के डीग में सौतेली मां ने की थी बेटे की हत्या। 10 मिनट तक टैंक में डुबाए रखा और बच्चा मर गया। यश की मां रमा ने प्लानिंग के तहत उसकी हत्या कर दी। अपने पति की गैरहाजिरी में वह अन्य पुरुष से संबंध रख रही थी जिसे उसके बच्चे ने देख लिया। बस रमा ने उसे टैंक में डुबो कर मार दिया।
अब आते हैं ऐसा होने के वैज्ञानिक कारणों पर। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार 29 से 45 और 48 साल की उम्र में महिलाओं में यौनोत्तेजना तेजी से बढ़ती है। ठीक ऐसे ही 13-14 साल की उम्र चिंगारी जैसी होती है। इस उम्र में लड़कियां जल्दी फिसल जाती हैं। एक बार लौ पकड़ने के बाद वह सब-कुछ कर गुजरने को तैयार रहती हैं। शोधों का कहना है कि कामेच्छा सवार होने के बाद वह खुद पर काबू नहीं रख पाती। ये अथवा इस तरह की घटनाएं इसी का परिणाम है।

समाज में ऐसा-वैसा जो भी घटता है हमारे फिल्म वाले उसे तत्काल पर्दे पर उतार देते हैं। लगभग 50-55 साल पहले एक फिल्म आई थी सावन-भादो। नवीन निश्चल और रेखा की यह पहली फिल्म थी। इसमें भी एक ऐसी ही घटना को पिक्चराइज किया गया था जिसमें एक मां अपने ही बेटे की तब हत्या करने को आमादा हो गई जब जवान बेटे ने मां को अपने प्रेमी के साथ हमबिस्तर होते देख लिया। मां श्यामा थी और बेटा नवीन निश्चल था। अर्थात हमारे समाज में इस किस्म के रिश्ते दशकों से क़ायम हैं लेकिन लोग यूं चौंकते हैं जैसे उन्हें कुछ पता ही नहीं है।

युगों-युगों से यह सच धरती पर कायम है और रहेगा। कोई कुछ नहीं कर सकता। जिस्म की भूख ऐसी ही होती है। चूंकि यह कुदरत प्रदत्त वह सुख है जिससे कोई भी वंचित नहीं रहना चाहता। अमूमन जहां भी पुरुष दौलत के पीछे भाग रहा है वहां उसकी पत्नी देह सुख के लिए इधर-उधर भाग रही है। यह मैने भी देखा है और आप लोगों ने भी देखा होगा। इसका एक मात्र ईलाज है संयम, जो हमारे सात्विक विचार और सात्विक भोजन पर निर्भर है। लेकिन आज न किसी के सात्विक विचार हैं और न ही किसी को सात्विक भोजन पसंद है।