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MODI:- मोदी विश्वविद्यालय छात्राओं देगी छात्रवृति

मोदी विश्वविद्यालय ने जयपुर में “संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें प्रत्रकारों से विश्वविद्यालय में शुरू होने वाले नये सत्र से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। संवाद में बतताया कि विश्वविद्यालय का 265 एकड़ का विशाल कैम्पस शिक्षा द्वारा नारी सशक्तिकरण के अभियान को सतत् आगे बढ़ा रहा है। राजस्थान सहित देशभर के छात्राओं के लिए मोदी विश्वविद्यालय ने इस साल भी कुछ खास छात्रवृति की घोषणा की। साथ ही शिक्षा के नये परिदृश्य और मोदी विश्वविद्यालय के वर्तमान परिपेक्ष्य पर भी मिडिया से चर्चा की।

मोदी विश्वविद्यालय के डीजीएम एडमिशन प्रवीण झा और पीआरओ राजीव सिंह ने बताया कि  मोदी विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्स एंड साइसेंस, स्कूल ऑफ इंजिनयरिंग, स्कूल ऑफ लॉ. स्कूल ऑफ डिजाइन एवं स्कूल ऑफ बिजनेस में विभिन्न स्नातक एवं स्नातकोत्तर के साथ पीएचडी के भी कोर्स कराये जाते हैं। उन्होने बताया कि विश्वविद्यालय में कई स्किल बेस्ड कोर्सेस मसलन डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, फॉरेनसिक साइंस, फिजयोथेरेपी, फूड एंड न्यूट्रीशयन, बॉयोमेडिकल एवं न्यूक्लियर साइंस एंड टेक्नोलॉजी जैसे कोर्स जो कि पूर्णतः कौशल आधारित है और छात्राओं को बेहतर भविष्य की ओर ले जाता हैं। छात्राओं को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए विश्वविद्यालय ने वर्तमान सत्र से डी फार्मा कोर्स की भी शुरुआत की। रिसंच एवं इनोवेशन के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय ने कई मुकाम हासिल किया है जिसमें क्यूरी के तहत रिसंच एवं इनोवेशन के लिए विश्वविद्यालय को 2.25 करोड़ रूपये का अनुदान प्राप्त हुआ है। सभी वर्गों को शिक्षा का समान अवसर मुहैया कराने के उददेश्य से विश्वविद्यालय ने ऑनलाईन माध्यम की भी शुरूआत की है जिसके अर्न्तगत बीए, बीकॉम एम कॉम के साथ ही एमबीए और एमसीए जैसे विभिन्न कॉसेस करवाए जाएगें। इस माध्यम में छात्राओं के साथ छात्र भी दाखिला ले सकते हैं। आरएएस, पीसीएस एवं आइएएस जैसे परिक्षाओं के तैयारी के लिए विश्वविद्यालय कैंपस में ही छात्राओं को विशेष सुविधा प्रदान कर रही है और इसके लिए प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान समकल्प नई दिल्ली से अनुबंध किया गया है ताकि छात्राओं को स्नातक के दौरान ही तैयारी का बेहतर अवसर प्राप्त हो सकता है।

IPL in Jaipur:- मंत्री ने पत्रकारों की कोहनी पर लगाया गुड़

खेल कोटे से राजनीति में आए राज्यवर्धन सिंह राठौर ने पत्रकारों की कोहनी पर गुड़ लगाकर राजनीति खेल गये। कल ऐसा प्रतित हुआ कि राजनीति में हुक्म की पालना करने वाले ने शायद पहली बार राजनीति दाव खेला है, वो भी पत्रकारों के साथ।

आपको बता दें कि प्रदेश में नवगठित भाजपा सरकार के खेल मंत्री राठौर ने 23 मार्च 2024 को भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों के लिया घोषणा करते हुए कहा कि जयपुर में आयोजित होने वाले आईपीएल मैच के दो दो पास दिए जायेंगे। पास बांटने की जिम्मेदारी भाजपा मुख्यालय के मीडिया प्रकोष्ठ को दी गई थी और पत्रकारों की सूची भी बनाई गई। 24 मार्च होली के दिन सुबह ग्यारह बजे पास लेने बुलाया गया और डेड बजे पास बांटे भी गए लेकिन दो की जगह केवल एक। हालांकि कई तिकड़म बहादुर एक पास की जगह कई पास ले उड़े और कइयों को एक भी नहीं दिया, पास। जब मंत्री जी को इस बात से रूबरू कराया गया तो कुछ के मुंह देख तिलक कर दिया और कुछ को अगले मैंच की कह कर टरका दिया।

अब बात करते है कल की यानि 6 अप्रैल 2024 की। अगले मैंच में पास की आस में लगाए बैठे लोग सुबह से ही भाजपा मुख्यालय के चक्कर काटने लग गये और मीडिया प्रकोष्ठ के पादाधिकारियों के ताबड़तोड़ फोन करने लगे और बिचारे फोन को परेशान कर दिया। एक पदाधिकारी ने तो यहां तक कह दिया कि समाचार और कवरेज के लिये कभी इतने फोन नहीं आए जितने आज पास के लिये आये ​है। ये आलम तो भाजपा मुख्यालय का था। वहीं मंत्री जी के मातहतों ने पत्रकारों की भावनाओं के साथ खूब खेल खेला। जब मंत्राी जी के फोन नं. 9460996611 पर पत्रकार फोन करते तो फोन मातहत ही उठाते और सबसे पहले यह पूंछा जाता की क्या काम है। जब दूसारी ओर से पास के लिये बताया जाता तो उन्हे कहा जाता कि आपका नाम नोट कर लिया गया है। आपको फोन करके बुला लिया जायेगा, पास के लिये। लेकिन फोन कभी नहीं आया। मंत्री जी ने ऐसा गुड़ लगाया कि पत्रकार चाटने की कोशिश करते रहे लेकिन चाट ही नहीं पाए, गुड़। क्रिकेटवा में चुनावी खेला बा।

RMSC:- ने निविदा शर्तों के उल्लंघन पर तीन फर्म को किया डीबार

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राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (RMSC) ने दो भेषज एवं औषधि आपूर्ति फर्म मै. एजीयो फार्मास्यिूटिकल मुम्बई एवं मैक्स मेड लाइफ साइसेंज नई दिल्ली को निविदा शर्तों का उल्लघंन करने पर अनुशासनात्मक समिति की अनुशंषा पर 3 वर्ष की अवधि के लिए डीबार किया है। साथ ही इनकी जमा प्रतिभूति राशि जब्त किए जाने के आदेश दिए हैं। इसी प्रकार सर्जिकल आइटम्स के लिए फर्म वीनस सेफ्टी एण्ड हैल्थ प्राइवेट लिमिटेड को भी निर्धारित अवधि में आपूर्ति नहीं करने पर 2 वर्ष के लिए डीबार करते हुए जमा प्रतिभूति राशि जब्त किए जाने के आदेश जारी किए गए हैं।

आरएमएससी की प्रबंध निदेशक नेहा गिरि ने बताया कि फर्म मै. एजियो फार्मास्यूटिकल-मुम्बई द्वारा दवा आपूर्ति से संबंधित बिड की शर्तों का उल्लंघन किया गया। अनुशासनात्मक समिति के समक्ष सुनवाई के दौरान कोई तथ्य भी प्रस्तुत नहीं किया। बिड शर्तों का उल्लंघन मानते हुए अनुशासनात्मक समिति की अनुशंषा पर फर्म को तीन वर्ष के लिए डिबार करने तथा 2 लाख रूपये की प्रतिभूति राशि जब्त करने के आदेश जारी किए।

इसी प्रकार मै. मैक्समेड लाइफ साइंसेज प्रा.लि., नई दिल्ली ने भी दवा आपूर्ति के संबंध में बिड वापस लेते हुए सप्लाई से मना कर दिया, जो कि निविदा शर्तों का उल्लंघन था। फर्म द्वारा इस संबंध में किसी भी प्रकार का स्पष्टीकरण भी नहीं दिया गया। इसके चलते अनुशासनात्मक समिति की अनुशंषा पर फर्म को तीन वर्ष के लिए डिबार करने तथा 2 लाख रूपये की प्रतिभूति राशि जब्त करने के आदेश जारी किए।

फर्म वीनस सेफ्टी एण्ड हैल्थ प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सर्जिकल आइटम्स के लिए बिड प्रस्तुत की गयी। फर्म को 10 दिवस में सप्लाई करने के लिए आदेशित किया गया, परन्तु फर्म द्वारा न तो सप्लाई की गयी और न ही सप्लाई अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया गया। अनुशासनात्मक समिति की अनुशंषा पर उक्त फर्म को आरएमएससी की निविदा में भाग नहीं लेने तथा 2 वर्ष की अवधि के लिए डीबार करते हुए जमा कराई गई प्रतिभूति राशि जब्त किए जाने के आदेश जारी किए गए।

C M RAJSTHAN:- निजी क्षेत्र के समान राजकीय विद्यालयों में भी हो बेहतरीन शैक्षणिक सुविधाएं -मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक विद्यार्थी को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। हमारा उद्देश्य गांव, कस्बे से लेकर शहर तक शिक्षा का ऐसा वातावरण विकसित करना है, जिससे हर वर्ग का विद्यार्थी सुंदर भविष्य का सपना देख सके और उसे पूरा भी कर सके।

श्री शर्मा सोमवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में स्कूल, उच्च, तकनीकी एवं संस्कृत शिक्षा विभागों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निजी क्षेत्र के विद्यालयों के समान राजकीय विद्यालयों में भी आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं एवं संसाधन उपलब्ध कराने की योजना बनाने के निर्देश दिए ताकि जरूरतमंद परिवार के विद्यार्थी को भी उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराई जा सके। उन्होंने कहा कि राजकीय विद्यालयों में शिक्षक कठिन परीक्षा को पास कर नियोजित होते हैं। उनमें विद्यार्थियों के भविष्य को बनाने की पूर्ण क्षमता होती है।

मुख्यमंत्री ने राजकीय विद्यालयों में रिक्त पदों को भरने के लिए मानव संसाधनों के सामंजस्यपूर्वक उपयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति करने के लिए नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। इससे जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है, वहां विद्यार्थियों को प्राथमिकता से एवं समय पर शिक्षक मिल सकेंगे।

श्री शर्मा ने कहा कि शिक्षकों के अनियमित स्थानान्तरण के कारण विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है। इसके समाधान के लिए शिक्षा विभाग को पारदर्शी स्थानान्तरण नीति तैयार करनी चाहिए। इससे शिक्षकों का योग्यता के आधार पर एवं सही समय पर स्थानान्तरण सुनिश्चित हो सकेगा। उन्होंने अधिकारियों को शिक्षा के सुधार के लिए कुछ जिलों में नवाचार करने के निर्देश भी दिए। जिन्हें निकट भविष्य में पूरे प्रदेश में लागू किया जा सके और राजस्थान पूरे देश में उत्कृष्ट शिक्षा का मॉडल बनकर उभरे। 

श्री शर्मा ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बजट घोषणा 2024-25 (लेखानुदान), 100 दिवसीय कार्य योजना एवं संकल्प पत्र में शामिल घोषणाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने राजीव गांधी स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस की समीक्षा करते हुए इस योजना में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों को शामिल करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने राजस्थान पाठ्य पुस्तक मण्डल को पुस्तकों की खरीद प्रक्रिया में सुधार लाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने प्रक्रियाधीन भर्तियों की स्थिति, विद्या सम्बल योजना, स्कूटी एवं साइकिल वितरण योजना, छात्रवृत्ति योजना, पीएम उषा योजना के संबंध में विस्तृत समीक्षा की।

संस्कृत शिक्षा के प्रसार पर गंभीरता से करें कार्य—

मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृत भाषा के ज्ञान से व्यक्ति के आचार, विचार और संस्कार में सकारात्मक बदलाव आता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए संकल्पबद्ध है और इस दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। उन्होंने संस्कृत शिक्षा विभाग को शिविर एवं गोष्ठियों का आयोजन कर विद्यार्थियों को संस्कृत शिक्षा के प्रति प्रेरित करने के निर्देश दिए। साथ ही, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए विभागीय वार्षिक कलेण्डर प्रकाशित करने के निर्देश भी दिए। 

Education Minister मैं पांड्या ब्राह्मण नहीं हूं, उल्टा लटका कर मरता हूं —शिक्षा मंत्री मदन दिलावर


सूबे के बेअंदाज शिक्षा मंत्री जनता के बीच फंस गये। उन्हे कतई अंदाजा नहीं था कि आमजन से उलझने पर उंटपटांग तरीके से माफी मांगनी पड़ेगी। घटना शिक्षा मंत्री के विधानसभा क्षेत्र का है। वायरल वीडियो के अनुसार मंत्री जनता से घिरे हुए थे और आपस में उलझ रहे थे और कह रहे थे, मैं पांड्या ब्राह्मण नहीं हूं, उल्टा लटका कर मरता हूं, जबाव में जनता ने कहा हम भी गुर्जर हैं। मामला बढ़ा तो मंत्री ने सफाई पेश की और कहा कि हां मेरे से गलती हुई, ये असभ्य लोगों की भाषा नहीं थी। लेकिन सवधान, मंत्री जी का दबदबा जारी रहेगा, क्योंकि वो सरकार के शिक्षा मंत्री हैं।
आपको बतादें कि पूर्व में भी भाजपा सरकार में मदन दिलावर मंत्री रहे थे। तब भी वो बेअंदाज थे और चर्चा में रहे

प्रदेश में माइनिंग ब्लॉकों की नीलामी का बनेगा मासिक एक्शन प्लान -डीएमजी

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आगामी वित्तीय वर्ष में मेजर और माइनर मिनरल ब्लॉकों के ऑक्शन का मासिक एक्सन प्लान बनाया जाएगा। निदेशक खान एवं भूविज्ञान भगवती प्रसाद कलाल ने माइंस व भूविज्ञान विभाग के फील्ड अधिकारियों को निर्देश दिए कि फील्ड अधिकारी अपने क्षेत्र के मिनरल एक्सप्लोरेशन, डेलिनियेशन और ऑक्शन के लिए ब्लॉक तैयार करने का रोडमेप तैयार कर प्रतिमाह ऑक्शन के प्रस्ताव भिजवाएं। उन्होंने कहा कि अवैध खनन पर प्रभावी रोक के लिए गेप व खनन क्षेत्रों के ब्लॉकों की नीलामी के कार्य में तेजी लानी होगी।

डीएमजी खान एवं भूविज्ञान विभाग के फील्ड अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से रुबरु हो रहे थे। उन्होंने 15 जनवरी से 31 जनवरी तक चले अवैध खनन गतिविधियों के खिलाफ राज्यव्यापी संयुक्त अभियान की स्प्रिट को आगे भी बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि अधिकारियों को नियतकालीन अंतराल में औचक निरीक्षण जारी रखने को कहा ताकि खनन माफियाओं पर अंकुश जारी रखा जा सके। उन्होंने विभाग की माइनिंग विंग व जियोलॉजी विंग के बीच बेहतर तालमेल बनाकर खनिज खोज और खनन कार्य को बढ़ावा देने और औद्योगिक विकास, निवेश, रोजगार व राज्य सरकार का रेवेन्यू बढ़ाने के साझाा प्रयास करने को कहा। उन्होंने कहा कि राजस्थान विविध और विपुल खनि संपदा वाला प्रदेश है। खनन माफियाओं द्वारा खनिज ब्लाकों के ऑक्शन को विफल कराने के प्रयासों की चर्चा करते हुए कहा कि खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी को सफल बनाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर देना होगा।

श्री कलाल ने खनन क्षेत्र के पूर्व बकाया राशि की युद्ध स्तर पर वसूली करने के निर्देश दिए और कहा कि वसूली प्रयासों में किसी तरह की कोताही बर्दास्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि राजकीय राशि वसूली के लिए सख्ती के साथ ही अप्रिय कार्यवाही भी करनी पड़े तो इसमें कोताही नहीं बरती जाएं। लीजों के बीच गेप एरिया पर हो रहे अवैध खनन की शिकायतों की चर्चा करते हुए कहा कि गेप एरिया के ब्लॉक तैयार कर ऑक्शन की तैयारी करने को कहा। डीएमजी ने जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित अंतर्विभागीय बैठक में अवैध खनन क्षेत्रों और उन पर कार्यवाही के लिए परस्पर सहयोग व समन्वय पर विस्तार से चर्चा करें ताकि आपसी समन्वय से कार्यवाही की जा सके। उन्होंने आवश्यक विभागीय कार्यों को तय समय सीमा में निपटाने के निर्देश दिए।

Fever:- “बुखार:— एक प्रकृति प्रदत्त सुरक्षाचक्र है”

प्रतिष्ठित डॉक्टरों की सलाह-लेकिन कुछ जिम्मेदारी, कुछ दिक्कतें डॉक्टरों और मरीजों की भी पिछले कुछ दिनों दो प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक अखबारों में दो प्रतिष्टित चिकित्सको के लेख पढ़ें, जिन से मुझे वर्तमानं परिस्थितियों में डाक्टर, बीमार, जांच और इलाज पर आम लोगों की कुछ प्रतिक्रियाएं रं आप तक पहुंचाने का साहस हुआ। मैं जिन लेखों की बात कर रहा हूँ उनका शीर्षक है–“बुखार: एक प्रकृति प्रदत्त सुरक्षाचक्र है” तथा “बेअसर होती दवाएं एक नया संकट खड़ा कर सकती है”।

इन लेखों में एनटीबियोटिक दवायों के न्यूनतम उपयोग की सलाह दी है और इनके ज्यादा उपयोग से होने वाले नुकशान की ओर ध्यान आकृष्ठ किया है। एक लेख की जिस बात पर मुझे यह पंक्तियां लिखने के लिए प्रेरित किया वे है” बुखार उताराने की दवा लिवर को थोड़ा बहुत नुकसान हर हालत में पहुंचती है। इसलिए जहां तक सम्भव हो उनका न्यूनतम उपयोग कीजिये। आपका चिकित्सक यदि एंटीबायोटिक का सुझाव देता है तो उसका औचित्य पूछिये। याद रखिये कि जब आप चिकित्सक को परामर्श शुल्क देते है तो फिर परामर्श लेने से हिचकिचाते क्यो हैं?–शरीर प्रकृति द्वारा निर्मित है तो प्रकृति के अनुसार ही जीना है बुखार नहीं बुखार के कारण का उपचार करना है। दूसरे लेख की मुख्य बात यह है कि एंटीबायोटिक दवाओं के ज्यादा, अनावश्यक उपयोग से रोग विषाणुओं में उनसे अपने बचाव के लिए स्वयं में कुछ परिवर्तन कर लेते है और दवा उन पर बेअसर हो जाती है। है। दूसरी, तीसरी व इस से भी आगे की नई नई दवाई आएंगी और रोग विषाणु भी वैसे ही बचाव के तरीके ढूंढेगे और दवाएं बेअसर होती जाएगी।

सर्व प्रथम तो यह डॉक्टर का दायित्व है कि जरूरी से अधिक एंटीबायोटिक या अन्य दवाइयां-जांचे लिखे ही क्यों? किन्तु केवल इतना कह देने से समस्या का निदान नहीं होता। बहुत सी बार मरीज स्वयं पुरानी नुस्खा पर्ची पर दवाई लेता रहता है। अधिकांशतः केमिस्ट भी पर्ची चालू है या पुरानी इस बात को नजरअंदाज करते हैं। सरकारी आदेश से यह सुनिश्चित किया जाना अत्यंत कठिन है कि केमिस्ट चालू नुस्खे पर ही दवा दें, यद्यपि नैतिक दृष्टि से यह उनका दायित्व है। डाक्टर समुदाय की आलोचना नहीं किन्तु कई बार सुनने में आता है कि कुछ लोग अनावश्यक अधिक दवाई-जांचे लिखते हैं। एक ही व्याधि के लिए आवश्यकता से अधिक व एक साथ कई दवाइयां इसलिए लिखते है ताकि मरीज जल्दी ठीक हो जाए। इस से डॉक्टर का फौरी प्रचार-प्रसार हो जाता है। ज्यादा मरीज उनसे इलाज कराने को आकर्षित होते हैं। इस प्रकार की प्रवर्ती ग्रामीण इलाकों, छोटे शहरों में कार्यरत परामर्श देने वालों में व गरीब व निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों के बीमार व्यक्तियों में ज्यादा देखी जाती। गरीब, अल्पाय व दैनिक आमदनी भोगियों की अपनी समस्या है। उनके लिए बार बार डॉक्टर के पास जाना, बीमार होना धन उपलब्धता व रोजी रोटी की बहुत बड़ी समस्या उतपन्न कर देता है।वे चाहते है तुरन्त स्वास्थ्य लाभ और रोजगारी कर घर चलाएं। इसलिए अपनी सुविधा या मजबूरी के चलते पुराने नुस्खों पर दवाई लेते रहते हैं। डॉक्टरों की नैतिकता, प्रतिबद्धता की भी कई अत्यंत उम्मदा/उत्कृष्ट कहानियां भी जन सामान्य से सुनने को मिलती है। यहां बिना नाम लिखे में कुछ डॉक्टर्स की नैतिकता व पेशे के स्टैंडर्ड्स के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के बारे में लिखना चाहता हूं।

सर्व प्रथम तो यह डॉक्टर का दायित्व है कि जरूरी से अधिक एंटीबायोटिक या अन्य दवाइयां-जांचे लिखे ही क्यों? किन्तु केवल इतना कह देने से समस्या का निदान नहीं होता। बहुत सी बार मरीज स्वयं पुरानी नुस्खा पर्ची पर दवाई लेता रहता है। + अधिकांशतः केमिस्ट भी पर्ची चालू है या पुरानी इस बात को नजरअंदाज करते हैं। सरकारी आदेश से यह सुनिश्चित किया जाना अत्यंत कठिन है कि केमिस्ट चालू नुस्खे पर ही दवा दें, यद्यपि नैतिक दृष्टि से यह उनका दायित्व है।

एसएमएस अस्पताल के पूर्व अधीक्षक, अत्यंत सम्माननित व वरिष्ठ डॉक्टर रिटायरमेंट के बाद दुर्लभजी अस्पताल में सेवाएं दे रहे थे। एक महिला मरीज उनके पास नुस्खों के पर्चे व दवाओं का ढेर लेकर आई। कहने लगी न जाने कितने डॉक्टरों को दिखा लिया और कितनी दवाई खा ली किन्तु पेट की तकलीफ ठीक ही नहीं हो रही। डॉक्टर में बड़े ध्यान से धैर्यपूर्वक उसे सुना और जो कहा वह हूबहू लिख रहा हूँ–ठीक है माता जी, यह दवाइयां बंद करदो और यह एक दवाई 5-7 दिन लेना और फिर भी कभी ऐसा ही हो तो खाने के आधा पौण घण्टे पहले ले लिया करो, आराम आजाएगा। शायद, उस समय 5 रुपए की दवा नें उसे राहत दे दी। ओर भी बहुत से ऐसे डाक्टर होंगे किन्तु शायद वे डॉक्टर्स की कुल संख्या की तुलना में कम ही होंगे। बहुत पहले, करीब 40 साल पहले कोटा में एक बच्चों के डॉक्टर थे। उनका उसूल था कि अस्पताल समय खत्म होने पर चाहे 100 आदमी लाइन में हों, जब तक लास्ट मरीज को नहीं देख लेते थे, सीट नही छोड़ते थे। दो जगह घर पर देखते थे, शायद 5 रुपये फीस, उसमें भी कोई अत्यंत गरीब मजदूर नहीं दे सके तो नहीं लेते थे और सेम्पल की दवाइयां ऐसे लोगों को देते थे। जयपुर के एक डॉक्टर ने एक मरीज को कुछ जांच करने के लिए पर्ची लिखी। मरीज पास के जांच सेंटर में जांच कराने पहुंचा। उस से पहले व्यक्ति से, जांच केंद्र वाले ने एक राशि वसूल की और इस व्यक्ति से उससे काफी कम राशि ली। उस व्यक्ति नें पूछ लिया, भाई इतना अंतर क्यों? उसका जवाब था, आप जिस डॉक्टर को दिखा कर आये हो वे हमारे से कमीशन नहीं लेते, सो उतना कम कर देते है। सम्बंधित डॉक्टर भी एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक पद से रिटायर हुए है। जेनेरिक दवाइयों को लेकर भी कई भ्रांतियां, समस्याएं हैं। सबसे बड़ी समस्या तो यह है कि इनके नाम बहुत बड़े व आसानी से मरीज और शायद, डॉक्टर भी, याद रख सके ऐसे नहीं।

उदाहरण के लिए पेट में एसिडिटी एक सामान्य समस्या है और कई संक्षिप्त नाम यथा टोप्सिड आदि लेने का परामर्श डॉक्टर देते हैं। इसका जेनेरिक नाम है–Pantoprazole gastro resistant and Compartidone prolonged release capsules. आदि। इसी प्रकार के नाम अन्य छोटी छोटी शारीरिक व्याधियों की दवाइयों के है। जेनेरिक दवाइयों के बड़े नाम होंने के कारण निजी क्षेत्र में काम करने वाले अधिकांश डॉक्टर्स ब्रांडेड नाम से ही दवाइयां लिखते है। अपने घरों पर परामर्श देने वाले सरकारी डॉक्टर्स भी यही करते हैं।

इसके लिए सरकार के स्तर से रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, बुखार, जुकाम, विभिन्न प्रकार के वाइरल बुखार, एंजाइना व हृदय सम्बन्धी अन्य बीमारियों की व अन्य इसी प्रकार की सामान्य बीमारियों के लिए छोटे ब आसानी से याद रहने वाले नाम दिए जाएं। ऐसा सॉफ्टवेयर तालिका तैयार हो जिस से जनऔषधि स्टोर्स, सरकारी औषधि वितरण केंद्र से जो औषधि जेनेरिक नाम से बेची-इश्यू की जाए, उसके बिल में साथ यह संक्षिप्त नाम ऑटोमेटिक अंकित हो जाए। इस से मरीज आसानी से ध्यान रख सकेगा कि कोन सी दवाई किस बीमारी के लिए है।

जेनेरिक दवाइयों की गुणवत्ता (क्वालिटी) पर आम जन का विश्वास भ्रांतियों के कारण अथवा कुछ कुछ सही कारणों से, अभी तक जमा नहीं। एक सरकारी डॉक्टर साहब से लेखक में पुछ लिया की जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता के सम्बंध में उनका क्या विचार है? उन्होंने काउंटर प्रश्न कर लिया कि मेरी इस सम्बंध में क्या राय है? मेरे पास एक मरीज का बताया अनुभव था, वैसा उन्हें बता दिया कि उसने उच्च रक्तचाप नियंत्रण के लिए जनऔषधि स्टोर से जेनेरिक दवाई ली किन्तु उसे वापस सम्बंधित ब्रांडेड दवा लेनी पड़ी। डॉक्टर महोदय ने बड़ी सधी प्रतिक्रिया दी कि दवाओं की कीमत तो कम होनी ही चाहिए और जेनेरिक दवाइयों के जरिये यह किया जा रहा है। बहुत से मरीज लाभान्वित भी हो रहे है। यह भी सही है कि कई लोग गुणवत्ता के सम्बंध में आशंका तो व्यक्त करते हैं। आगे उनका कहना था कि क्वालिटी सुनिश्चित करने के लिए सरकार में ड्रग विभाग के अधिकारियों के लिए निरीक्षण, बनती दवाओं की क्वालिटी जांच व बाजार में आई दवाओं के औचक नमूने लेना व गुणवत्ता जांचना आदि कई प्रावधान कर रखे है किन्तु अंततोगत्वा यह सब करने वालों में से कुछ लोग, विभिन्न प्रलोभनों या कर्तव्यहीनता के चलते कहीं न कहीं शिथिलता बरतते होंगे और खराब क्वालिटी औषधियां बाजार में आ जाती है। अंत में फीस देकर परामर्श के लेना व मरीज अधिकारपूर्वक सारी जानकर लेने की राय पर राय सोलह आने सही किन्तु हर मरीज डॉक्टर से लगातार तो पुछ नहीं सकता और अधिकांशतः एक जवाब होता है, बाहर सिस्टर या कम्पाउंडर या केमिस्ट सब समझा देंगे। क्या हम यह आशा कर सकते है, कि एक गरीब, अल्पशिक्षित, अल्पाय वाला व्यक्ति डॉक्टर जिसके क्लिनिक पर बाहर 100-50 मरीजों की लाइन लगी हो, वह बार-बार अपनी शंका समाधान की बात पूछने का साहस करेगा? यह काम तो स्वयं डॉक्टर का दायित्वबोध ही करेगा कि वह बोल कर या लिख कर दवाइयों-जांचों की आवश्यकता को विस्तार से मरीज को समझाये।

-महावीर सिंह, पूर्व आईएएस

INDIA ELECTION:- एक देश-एक चुनाव की तैयारी

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देश में सरकार 2029 में एक साथ सभी चुनाव के कराने की तैयारी कर रही है। संविधान में अलग खंड जोड़ने की तैयारी, कोविंद कमेटी से विधि आयोग करेगा सिफारिश, संविधान के सभी प्रावधानों को रखा जाएगा साथ, कम से कम परिवर्तनों के साथ एक साथ चुनाव अवधारणा की जाएगी शामिल, संसद के साथ विधानसभाओं में पास कराना होगा विधेयक।

विधि आयोग की 2029 के मध्य तक त्रिस्तरीय चुनाव एक साथ कराने की कवायद, अगले 5 साल में 3 चरणों में विधानसभाओं के कार्यकाल एक साथ करने की भी सिफारिश, सेवानिवृत्त जस्टिस ऋतुराज अवस्थी की अध्यक्षता वाला आयोग करेगा सिफारिश, चुनाव पर नया अध्याय या खंड जोड़ने के लिए संविधान संशोधन की करेगा सिफारिश, ताकि त्रिस्तरीय चुनाव एक साथ एक ही बार में हो सके, विधि आयोग के अलावा एक उच्च स्तरीय समिति भी कर रही रिपोर्ट पर काम, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में कार्य कर रही उच्च स्तरीय समिति, कि कैसे संविधान और कानूनी ढांचे में बदलाव करके लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, नगर पालिकाओं और पंचायतों के लिए एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं।

GOVERNMENT JOB:- “दो से ज्यादा बच्चे तो सरकारी नौकरी नहीं”

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राजस्थान की पिछली सरकार के दो बच्चों के नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मंजूरी की मुहर लगाते हुए कहा है कि “दो से ज्यादा बच्चे होने पर सरकारी नौकरी देने से इनकार करना भेदभावपूर्ण नहीं है.” 2 से ज्यादा बच्चे होने पर राजस्थान पुलिस में नौकरी नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा राजस्थान हाईकोर्ट का निर्णय, याचिका की खारिज, एक्स सर्विसमैन रामजीलाल जाट ने 2017 में रिटायरमेंट के बाद पुलिस कांस्टेबल भर्ती के लिए किया था आवेदन, 2 से ज्यादा बच्चे होने पर आवेदन निरस्त होने को राजस्थान हाईकोर्ट में दी थी चुनौती, हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के निर्णय को माना सही, याचिका की खारिज।