Rajasthan Mews: किसानों को पर्याप्त और निर्बाध बिजली आपूर्ति राज्य सरकार की प्राथमिकता -मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को पर्याप्त और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि बिजली बचाना भी विद्युत उत्पादन के समान है। इसी क्रम में उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जमीनी स्तर पर सघन दौरे कर बिजली चोरी के मामलों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
श्री शर्मा सोमवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में पम्प स्टोरेज प्रोजेक्ट्स के संबंध में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पम्प स्टोरेज प्रोजेक्ट्स सस्ते होने के साथ ही लम्बी अवधि के लिए कारगर हैं, जिससे आने वाले समय में पर्याप्त बिजली मिलना संभव हो सकेगा। इससे किसानों के साथ-साथ घरेलू उपभोक्ता को भी गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा किया जाए, ताकि इनका लाभ उपभोक्ताओं को शीघ्र मिल सके। उन्होंने प्रोजेक्ट्स की क्लीयरेंस के लिए विभिन्न विभागों को आपसी समन्वय स्थापित करने एवं कार्यों की सतत् मॉनिटरिंग करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।
मुख्यमंत्री ने सभी राजकीय कार्यालयों पर जल्द से जल्द सोलर पैनल लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन कार्यालयों में अब तक सोलर पैनल नहीं लगे हैं, उन्हें सूचीबद्ध कर शीघ्र कार्य शुरू किया जाए। बैठक में 8 गीगावाट बिजली उत्पादन के लिए चिह्नित 6 प्रोजेक्ट्स पर विस्तृत चर्चा की गई।

Rajasthan News: जाति प्रमाण पत्र के लिए अब राजस्व रिकॉर्ड अनिवार्य नहीं —मंत्री अविनाश गहलोत 

राजस्थान के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने सोमवार को विधानसभा में जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि अभ्यर्थियों को प्रमाण पत्र के लिए अब केवल राजस्व रिकॉर्ड पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। विकल्पों से आसान होगी प्रक्रिया— मंत्री गहलोत ने प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा 9 सितंबर, 2015 को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि किसी आवेदक के पास राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो अन्य वैकल्पिक दस्तावेजों के आधार पर भी जाति प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है। इन दस्तावेजों में मुख्य रूप से:शैक्षणिक रिकॉर्ड (स्कूल या कॉलेज के दस्तावेज),नगर पालिका के रिकॉर्ड, ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड शामिल हैं। बशर्ते इन दस्तावेजों से आवेदनकर्ता की पैतृक जाति की स्पष्ट पुष्टि होती हो। राजस्थान पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन वैकल्पिक साक्ष्यों का उचित परीक्षण कर सक्षम अधिकारी प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत हैं। निस्तारण के सख्त निर्देश— इसके अतिरिक्त, मंत्री ने विभाग को उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के लंबित आवेदनों के शीघ्र निस्तारण के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों के आवेदन छोटी कमियों या आक्षेपों के कारण रुके हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जिला कार्यालयों को अग्रेषित किया जाए ताकि पात्र विद्यार्थियों को समय पर लाभ मिल सके। सरकार का यह कदम उन हजारों ग्रामीण और शहरी आवेदकों के लिए राहत भरा है जिनके पास पुराने पुश्तैनी राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे, लेकिन उनके पास स्कूल या स्थानीय निकायों के प्रामाणिक दस्तावेज मौजूद हैं।

C M NEWS: वायु सेना के शौर्य एवं कौशल युवाओं को सेना में जाने के लिए प्रेरित करते हैं —मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को राज्यपाल  हरिभ ऊ बागडे की गरिमामयी उपस्थिति में जयपुर में जलमहल की पाल पर भारतीय वायु सेना के सूर्यकिरण एरोबैटिक और सारंग हेलिकॉप्टर डिस्प्ले कार्यक्रम में शिरकत की। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भारतीय वायुसेना के शौर्य, साहस और तकनीकी कौशल की सराहना करते हुए कहा कि जयपुर की धरती पर यह आयोजन गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि आर्मी डे परेड के भव्य एवं सफल आयोजन के बाद वायु सेना की ओर से आयोजित इस अद्भुत कार्यक्रम से यह साबित हुआ है कि जयपुर ऐसे राष्ट्रीय आयोजनों के लिए पूरी तरह तैयार है।
श्री शर्मा ने कहा कि हमारी सेना का गौरव लगातार बढ़ रहा है। बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर वायु सेना के अद्भुत पराक्रम और भारत की सुरक्षा मज़बूत हाथों में होने का परिचायक है। उन्होंने कहा कि हमारी वायु सेना सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं और महामारी में भी लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय वायु सेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम और सारंग हेलिकॉप्टर डिस्प्ले टीम अपने अद्वितीय हवाई कौशल और उत्कृष्ट करतबों से मंत्रमुग्ध करती है। भारतीय वायुसेना के एम्बेसडर्स सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम के तीन पायलट विंग कमांडर राजेश काजला, विंग कमांडर अंकित वशिष्ठ और स्क्वॉड्रन लीडर संजेश सिंह जयपुर के ही हैं। इन पायलट्स ने वर्षों की कठिन मेहनत, अटूट अनुशासन और असाधारण कौशल के बल पर यह मुकाम हासिल किया है।
श्री शर्मा ने कहा कि यह आयोजन नागरिक और सेना के बीच अटूट रिश्ते का उत्सव है। इस तरह के आयोजन से युवाओं के मन में सेना में जाने का संकल्प जन्म लेता है। इसके साथ ही राष्ट्रीय गौरव और रक्षा सेवाओं के प्रति जागरुकता को भी बढ़ावा देता है। कार्यक्रम की समाप्ति के पश्चात मुख्यमंत्री ने मौजूद जनसमूह के बीच जाकर उनका अभिनंदन स्वीकार किया।
आसमान में गूंजा ‘‘खम्मा घणी‘‘ और ‘‘राम-राम सा‘‘ 
जल महल पर खुले आसमान में सारंग हेलिकॉप्टर डिस्प्ले टीम ने सटीकता और सामूहिक समन्वय का अद्भुत प्रदर्शन किया। टीम ने सारंग स्पिलिट, एरोहैड, डॉल्फिन लीप, लेवल क्रॉस, हाई स्पीड क्रॉस, क्रॉस ओवर ब्रेक, डायमंड एवं इन्वर्टेड वाइन ग्लास जैसी अनेक आकृतियां आसमान में बनाई। सूर्य किरण एरोबैटिक टीम ने इन्वर्टेड रन, बैरल रोल, बॉम्ब बर्स्ट, डीएनए संरचना जैसी अनेक आकृतियों के साथ आसमान में दिल बनाकर वायु सेना की ओर से जयपुरवासियों का अभिनंदन किया। इस दौरान दोनों टीमों द्वारा कॉकपिट से ‘‘खम्मा घणी‘‘ और ‘‘राम-राम सा‘‘ का उद्घोष जनता के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।

C M NEWS: विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु समुदाय भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग —मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु समुदाय भारतीय सभ्यता और संस्कृति का अभिन्न अंग है। धरती की मिट्टी से जुड़ा यह समुदाय त्याग और बलिदान की प्रतिमूर्ति है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस समुदाय के कल्याण और सशक्तीकरण के लिए समर्पित है। श्री शर्मा रविवार को आयोजित विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु समुदाय अधिकारी, कर्मचारी व प्रबुद्धजन महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु समुदायों के सशक्तीकरण के लिए ठोस क़दम उठाए हैं। हमारी सरकार ने घुमन्तु परिवारों को आश्रय उपलब्ध कराने के लिए आवासीय पट्टे वितरित किए व इन परिवारों के बच्चों की शिक्षा के लिए छात्रावास की व्यवस्था की।
घुमन्तु परिवारों के बच्चों की शिक्षा होगी सुनिश्चित —
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने बजट वर्ष 2026-27 में घुमन्तु समुदाय के बच्चों की शिक्षा के लिए राज पहल कार्यक्रम की अभिनव पहल की है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रथम चरण में प्रत्येक जिले में एक स्कूल ऑन व्हील्स स्थापित किया जाएगा। यह कार्यक्रम शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। इसके साथ ही प्रवास-प्रभावित क्षेत्रों में अस्थायी शिक्षा शिविर तथा शैक्षिक संभागों में 6 माह के स्कूल रेडिनेस कैम्प भी आयोजित किए जाएंगे। इससे पलायन और प्रवास के कारण नियमित विद्यालय से वंचित रहने वाले बच्चों तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित होगी।
घुमन्तु समुदाय का हमारी संस्कृति में अहम योगदान —
श्री शर्मा ने कहा कि घुमन्तु समुदाय का राष्ट्र की संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन समुदायों ने विदेशी आक्रांताओं से लोहा लिया और हमारीे संस्कृति को बनाए रखा। आजादी से पहले इस समाज ने गांव-गांव जाकर जनता को जागरूक करने के साथ ही, देश की अर्थव्यवस्था में प्रमुख रूप से सहभागिता निभाई। उन्होंने कहा कि इस समुदाय के पास कई कौशल और पारंपरिक ज्ञान है और यह समाज अपनी संस्कृति और परंपराओं से हमेशा जुड़ा रहा है। इस समुदाय की लोहा-शिल्प कला पूरे विश्व में प्रख्यात है। बंजारा समुदाय का व्यापारिक कौशल और उनकी यात्रा-परंपरा भारतीय व्यापार-मार्गों की रीढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महासम्मेलन समाज के उत्थान, अपनी पहचान को सम्मान दिलाने तथा विकास की मुख्यधारा में अटल स्थान बनाने की संकल्प सभा है। उन्होंने समाज के युवाओं से आह्वान किया कि वे देश-प्रदेश के विकास में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने घुमन्तु समुदाय के कल्याण और उत्थान से संबंधित सुझावों पर आश्वासन दिया।

Rajasthan News: नगर निकाय चुनावों के लिए पुनरीक्षण कार्यक्रम 24 मार्च से -राज्य निर्वाचन आयुक्त

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राज्य के नगरीय निकायों में होने वाले आम चुनाव, 2026 को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को 24 मार्च से विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम शुरू करने के निर्देश जारी किए हैं। आयोग के आदेश के अनुसार 1 जनवरी 2026 की तिथि के अनुसार मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का कार्य शुरू किया जाए। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंहने बताया कि निर्वाचन कार्य की तैयारी के क्रम में पूर्व में प्रकाशित विधानसभा मतदाता सूचियों को आधार मानते हुए नगरीय निकायों की वार्डवार मतदाता सूचियां तैयार की जाएगी। इन सूचियों का अद्यतन, दावा-आपत्तियों का निराकरण तथा अंतिम प्रकाशन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार किया जाएगा। वार्डों का गठन, भागों का निर्धारण एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप भागों का पुनर्संयोजन किया जाएगा, ताकि प्रत्येक वार्ड की मतदाता सूची सुव्यवस्थित एवं संतुलित रहे।
निर्धारित कार्यक्रम के तहत प्रपत्र-ए को तैयार करने की अंतिम तिथि 9 मार्च, ई-सूची पर अपलोड 11 मार्च, प्रोसेस की अंतिम तिथि 13 मार्च, चैकलिस्ट डाउनलोड 14 मार्च, वेरिफाई 16 मार्च, फ्रीज 19 मार्च तथा प्रारूप मतदाता सूची अपलोड की तिथि 22 मार्च, 2026 तय की गई है। इसके बाद निर्वाचक नामावलियों का प्रकाशन का कार्य किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 24 मार्च, 2026 को निर्वाचक नामावलियों का प्रारूप प्रकाशन करने की तिथि निर्धारित की गई है, 25 मार्च को निर्वाचक नामावलियों का वार्डों और मतदान केंद्रों पर पठन किया जाएगा, दावों एवं आपत्तियां दाखिल करने के लिए 7 अप्रेल, 2026 तक की तिथि निर्धारित की गई है तथा इसके लिए 29 मार्च और 5 अप्रेल, 2026 को विशेष अभियान भी चलाया जाएगा। दावों और आक्षेपों के निस्तारण की अंतिम तिथि 15 अप्रेल रखी गई है, इसी प्रकार पूरक सूचियों की तैयारियों के लिए 20 अप्रेल, 2026 तक का समय निर्धारित किया गया है। निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन 22 अप्रेल, 2026 को किया जाएगा।
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि निर्वाचन नामावलियों को 1 जनवरी, 2026 को अर्हता तिथि के आधार पर तैयार किया जाएगा। इस तिथि तक 18 वर्ष की आयु पूरी होने वाले व्यक्ति मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के पात्र होंगे।
उन्होंने कहा कि आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए है कि मतदाता सूची का कार्य पारदर्शिता एवं सावधानीपूर्वक किया जाए, ताकि कोई पात्र मतदाता वंचित न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।

C M NEWS: भ्रष्टाचार और कार्य में देरी सरकार की कार्यशैली का हिस्सा नहीं —मुख्यमंत्री 

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राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रदेश में सुशासन और जन सेवा ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित ‘राज-उन्नति’ बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि आमजन की समस्याओं का समाधान त्वरित और संवेदनशीलता के साथ किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि राजकीय दायित्वों के निर्वहन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी कार्मिकों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित होगी। 84 हजार करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की समीक्षा— वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों की 84,282 करोड़ रुपये की वृहद परियोजनाओं और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी विकास कार्यों का क्रियान्वयन निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। श्री शर्मा ने कहा कि समय पर काम पूरा होने से न केवल परियोजनाओं की लागत में होने वाली वृद्धि को रोका जा सकेगा, बल्कि जनता को भी इन सुविधाओं का लाभ जल्द मिल सकेगा। सम्पर्क हेल्पलाइन और जनसुनवाई पर जोर— आमजन की शिकायतों के निवारण को लेकर मुख्यमंत्री ने राजस्थान सम्पर्क हेल्पलाइन की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने जिला कलेक्टरों और विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सम्पर्क पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की नियमित मॉनिटरिंग करें। मुख्यमंत्री ने कहा, “अधिकारी स्थानीय स्तर पर नियमित जनसुनवाई का आयोजन करें ताकि ग्रामीणों और शहरवासियों को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए जयपुर की दौड़ न लगानी पड़े।” उन्होंने जिला स्तर पर नियुक्त नोडल अधिकारियों को इस पूरी प्रक्रिया की जवाबदेही तय करने को कहा। परिवादियों से लिया सीधा फीडबैक— संवेदनशीलता का परिचय देते हुए मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान राजस्थान सम्पर्क हेल्पलाइन के माध्यम से अपनी शिकायतें दर्ज कराने वाले कुछ चयनित परिवादियों से सीधा संवाद किया। जैसलमेर के धन्नाराम सहित अन्य लाभार्थियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनकी समस्याओं का संतोषजनक समाधान हो गया है। परिवादियों ने त्वरित कार्रवाई के लिए राज्य सरकार और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। भ्रष्टाचार और लापरवाही पर ‘जीरो टॉलरेंस’— मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में दोहराया कि अधिकारी और कर्मचारी जनता के सेवक के रूप में कार्य करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार और कार्य में देरी सरकार की कार्यशैली का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे धरातल पर जाकर योजनाओं के क्रियान्वयन का निरीक्षण करें और सुनिश्चित करें कि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे।

Rajasthan news: जांच रिपोर्ट: डिजिटल इंडिया के दावों की पोल खोलता राजस्थान का खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग

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एक तरफ केंद्र और राज्य सरकारें ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘सुशासन’ का ढिंढोरा पीट रही हैं, वहीं राजस्थान का खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग (Food & Civil Supplies Department) तकनीकी रूप से पाषाण काल में जी रहा है। विभाग की आधिकारिक वेबसाइट वर्तमान में केवल कागजी औपचारिकता और मंत्रियों की फोटो बदलने का जरिया बनकर रह गई है। जमीनी हकीकत यह है कि आम जनता के लिए उपलब्ध कराया गया डेटा दशकों पुराना और पूरी तरह अनुपयोगी हो चुका है। 15-20 साल से नहीं बदला डेटा— चौंकाने वाली बात यह है कि वेबसाइट पर तेल कंपनियों और गैस एजेंसियों की जो सूचियां उपलब्ध हैं, उनमें से अधिकांश 15 से 20 साल पुरानी हैं। सरकारें आती-जाती रहीं, मुख्यमंत्री और मंत्री बदलते रहे, और विभाग ने तत्परता दिखाते हुए केवल उनकी तस्वीरें अपडेट करने में ही अपनी ऊर्जा खपा दी। लेकिन जनता की सुविधा से जुड़े महत्वपूर्ण टेलीफोन नंबर, मोबाइल नंबर और पते आज भी वही हैं जो शायद लैंडलाइन के दौर में हुआ करते थे। गैस एजेंसियों की जानकारी: न पता सही, न फोन मिलता— उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी मुसीबत गैस एजेंसियों की जानकारी को लेकर है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की वेबसाइट पर सूचीबद्ध अधिकांश गैस एजेंसियों के नंबर या तो अस्तित्व में नहीं हैं या फिर वे बंद हो चुके हैं। कई एजेंसियों के पते बदल चुके हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में वे आज भी पुरानी जगहों पर ही चल रही हैं। यदि कोई उपभोक्ता किसी शिकायत या जानकारी के लिए वेबसाइट का सहारा लेता है, तो उसे केवल निराशा ही हाथ लगती है। डिजिटल दौर में भी व्यक्ति को पते खोजने के लिए सड़कों पर भटकना पड़ रहा है।
तेल कंपनियों और अधिकारियों की सूची भी ‘आउटडेटेड’— यही हाल तेल कंपनियों के संपर्क सूत्रों का है। महत्वपूर्ण नंबरों की सूची अपडेट न होने के कारण आपातकालीन स्थितियों में संपर्क करना नामुमकिन हो जाता है। डिजिटल इंडिया का दावा करने वाली सरकार में एक क्लिक पर जानकारी मिलना तो दूर, गलत सूचनाओं के कारण समय की बर्बादी अलग से होती है। अधिकारियों की जो सूची पोर्टल पर मौजूद है, उनमें से कई सेवानिवृत्त हो चुके हैं या उनके तबादले सालों पहले हो चुके हैं। सिस्टम की सुस्ती पर सवाल— यह स्थिति विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या आईटी सेल और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल वेबसाइट के होमपेज पर नेताओं की तस्वीरें चमकाने तक सीमित है? जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जनसेवा को सर्वोपरि बता रहे हैं, तब उनकी ही सरकार का यह ‘डिजिटल कबाड़’ उनके दावों को मुंह चिढ़ा रहा है। सूचना के अधिकार और पारदर्शिता के इस युग में भ्रामक और पुरानी जानकारी परोसना जनता के साथ एक तरह का धोखा है। यदि विभाग जल्द ही अपनी डिजिटल कमियों को दूर नहीं करता, तो ‘राज-उन्नति’ और ‘त्वरित समाधान’ जैसे शब्द केवल फाइलों की शोभा बढ़ाते रहेंगे। जनता को उम्मीद है कि सरकार फोटो बदलने के साथ-साथ सिस्टम के इस ‘जंक’ को भी साफ करेगी।

Vidhansabha News: उद्योग मंत्री का विपक्ष पर करारा प्रहार; ‘सस्ती जमीन’ के आरोपों पर पिछले कार्यकाल के आंकड़ों से दिया जवाब

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राजस्थान विधानसभा में बजट सत्र के दौरान उद्योगों को जमीन आवंटन के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी ‘सियासी जंग’ देखने को मिली। उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने विपक्ष द्वारा लगाए गए सस्ती जमीन आवंटन के आरोपों का न केवल खंडन किया, बल्कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए आवंटनों का कच्चा चिट्ठा सदन के पटल पर रखकर पलटवार किया। आंकड़ों की बाजीगरी— खेल, युवा मामले एवं उद्योग विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान मंत्री राठौड़ ने स्पष्ट किया कि वर्तमान भाजपा सरकार ने उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 20 हेक्टेयर अविकसित भूमि 550 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर पर आवंटित की है। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि जो लोग इस दर पर सवाल उठा रहे हैं, उनके अपने कार्यकाल में जमीनें ‘कौड़ियों के दाम’ बांटी गईं। उन्होंने सदन में तुलनात्मक आंकड़े पेश करते हुए बताया— वंडर सीमेंट: पूर्ववर्ती सरकार ने 400 हेक्टेयर जमीन मात्र 28 रुपये प्रति वर्गमीटर में दे दी। जेके सीमेंट: 210 हेक्टेयर का विशाल भूखंड सिर्फ 37 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर पर दिया गया। श्री एस मिनरल: 48 हेक्टेयर जमीन महज 20 रुपये प्रति वर्गमीटर की मामूली दर पर आवंटित की गई। गीतांजली स्टील: नीमकाथाना में 205 हेक्टेयर भूमि का आवंटन केवल 90 रुपये प्रति वर्गमीटर में किया गया। सदन में हंगामा और नेता प्रतिपक्ष पर निशाना— इन आंकड़ों के सामने आते ही सदन में भारी हंगामा हुआ। विपक्ष ने इन आवंटनों के पीछे के तर्कों को रखने का प्रयास किया, लेकिन मंत्री राठौड़ ने आक्रामक रुख अपनाते हुए नेता प्रतिपक्ष को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और बंदरबांट के आरोप लगाने से पहले विपक्ष को अपने रिकॉर्ड देख लेने चाहिए। राठौड़ ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के समय नीतिगत पारदर्शिता के बजाय चहेते समूहों को उपकृत करने का काम अधिक हुआ। लक्ष्य: विकसित राजस्थान— करीब आधे घंटे तक चली इस नोकझोंक के बाद मंत्री राठौड़ ने अपने संबोधन का अंत सकारात्मक लहजे में किया। उन्होंने कहा, “जमीन किसी भी सरकार ने दी हो, अंतिम लक्ष्य राजस्थान का औद्योगिक विकास और युवाओं को रोजगार मिलना होना चाहिए।” उन्होंने आह्वान किया कि राजनीति से ऊपर उठकर प्रदेश को आर्थिक शक्ति बनाने के लिए मिलकर काम करना होगा।

Rajasthan News: मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत लंबित दावों का भुगतान शीघ्र करेंगे – पशुपालन मंत्री

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राजस्थान के पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने गुरुवार को विधानसभा में आश्वस्त किया कि राज्य सरकार पशुपालकों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने बताया कि ‘मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना’ के अंतर्गत सवाई माधोपुर जिले सहित प्रदेश भर में बीमा क्लेम राशि के भुगतान की प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी है और पात्र आवेदकों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाई जा रही है।

सवाई माधोपुर में 14.58 लाख रुपये का भुगतान पूर्ण—

प्रश्नकाल के दौरान बामनवास विधायक श्रीमती इन्द्रा द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए मंत्री श्री कुमावत ने आंकड़ों के साथ वस्तुस्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि सवाई माधोपुर जिले में बीमित पशुओं की मृत्यु के पश्चात क्लेम के लिए अब तक कुल 217 आवेदन प्राप्त हुए हैं। विभाग द्वारा गहन परीक्षण के उपरांत 72 पात्र आवेदनों पर 14 लाख 58 हजार रुपये की राशि सीधे पशुपालकों के खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि शेष रहे पात्र दावों का निस्तारण भी प्रक्रिया पूर्ण होते ही प्राथमिकता के आधार पर कर दिया जाएगा।

20 हजार से अधिक पशुपालकों को मिले पॉलिसी बॉन्ड—

योजना की प्रगति रिपोर्ट पेश करते हुए पशुपालन मंत्री ने बताया कि 13 दिसंबर 2024 से 15 फरवरी 2026 तक की अवधि में सवाई माधोपुर जिले में कुल 27,909 पशुपालकों ने इस योजना के तहत पंजीकरण कराया। राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग (SIPF) के माध्यम से पारदर्शी लॉटरी प्रक्रिया अपनाते हुए लाभार्थियों का चयन किया गया। 15 फरवरी 2026 तक जिले के 20,642 पशुपालकों को उनके पशुओं के लिए ‘पॉलिसी बॉन्ड’ जारी किए जा चुके हैं, जिससे उनके पशुधन को सुरक्षा कवच मिला है।

बामनवास विधानसभा क्षेत्र की स्थिति—

विधायक श्रीमती इन्द्रा के निर्वाचन क्षेत्र बामनवास के संदर्भ में जानकारी देते हुए श्री कुमावत ने बताया कि इस क्षेत्र से कुल 6,845 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 4,567 पशुपालकों को पॉलिसी जारी की गई है। यहां कुल 7,734 पशु बीमित हैं। बामनवास में पशु मृत्यु के पश्चात कुल 52 दावे पेश किए गए, जिनमें से 10 दावों का त्वरित निस्तारण करते हुए 2 लाख 85 हजार रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

पशुपालकों के लिए वरदान साबित हो रही योजना—

मंत्री श्री कुमावत ने कहा कि मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप यह योजना पशुपालकों को आकस्मिक आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए लागू की गई है। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि बीमा क्लेम की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

विधानसभा में दी गई इस जानकारी से स्पष्ट है कि राज्य सरकार पशुधन के संरक्षण और पशुपालकों की आर्थिक उन्नति के लिए अत्याधुनिक तकनीक और पारदर्शी चयन प्रक्रिया के माध्यम से सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।

JDA NEWS: अब घर बैठे मिलेगा ‘आरक्षण पत्र’, ई-गवर्नेंस की ओर बढ़ते कदम

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सुशासन के संकल्प को साकार करने की दिशा में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने एक बड़ा कदम उठाया है। पारदर्शिता और तकनीक को बढ़ावा देते हुए जेडीए ने अब आरक्षण पत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया को ‘एंड-टू-एंड’ ऑनलाइन करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
 
डिजिटल होगा आवेदन से निर्गमन तक का सफर—
जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन के निर्देशन में विकसित की जा रही इस नई डिजिटल प्रणाली के लागू होने के बाद, फाइलें एक मेज से दूसरी मेज तक नहीं घूमेंगी। इस व्यवस्था के तहत दस्तावेजों को अपलोड करने, उनका ऑनलाइन परीक्षण, उच्चाधिकारियों द्वारा अनुमोदन और अंत में डिजिटल हस्ताक्षर युक्त प्रमाण पत्र जारी करने तक की पूरी कार्यवाही एक ही पोर्टल पर संपन्न होगी।
 
आमजन को मिलेगा कार्यालय के चक्करों से छुटकारा—
अब तक आवेदकों को अपने आरक्षण पत्र की स्थिति जानने या दस्तावेजों की कमी दूर करने के लिए बार-बार जेडीए कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे। लेकिन इस नई व्यवस्था के माध्यम से:
रियल-टाइम ट्रैकिंग: आवेदक घर बैठे अपने प्रकरण की अद्यतन स्थिति देख सकेंगे। ऑनलाइन ऑब्जेक्शन: यदि आवेदन में कोई कमी है, तो संबंधित टिप्पणी पोर्टल पर ही उपलब्ध होगी, जिसे नागरिक ऑनलाइन ही ठीक कर सकेंगे। पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने से मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम होगा, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना खत्म होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। फाइलों के भौतिक संचालन में होने वाली देरी अब बीते दिनों की बात होगी।
जेडीए की यह पहल न केवल शहरी विकास की प्रक्रिया को गति देगी, बल्कि डिजिटल राजस्थान के सपने को भी मजबूती प्रदान करेगी। आने वाले दिनों में जेडीए की अन्य सेवाओं को भी इसी तरह ‘पेपरलेस’ बनाने की योजना है, जिससे गुलाबी नगरी के निवासियों का जीवन और अधिक सुगम हो सकेगा।