Kota News: कोटा में जेईएन को प्रधान ने मारे थप्पड़, पुलिस ने नहीं किया मामला दर्ज

0
जल संसाधन विभाग के कनिष्ठ अभियंता नितिन पटेल नहर का पानी खोलने पहुंचे तो इटावा के प्रधान रिंकू मीणा ने कनिष्ठ अभियंता के साथ मारपीट कर दी। अभियंता का आरोप लगाया है कि खुद प्रधान और उनके समर्थकों ने नहर से अवरोध हटाने के दौरान पुलिस की मौजूदगी में उनको कई थप्पड़ मारे और गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। वहीं पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया। ये है मामला:— संभागीय आयुक्त के आदेशानुसर नहर विभाग के अधिकारी नहरों में जल प्रवाह सुचारू करने और पानी चोरी रोकने के लिए लगातार निगरानी रख रहे हैं। शिकायत थी कि दाईं मुख्य नहर की गैंता वितरिका की रामपुरिया माइनर में कुछ प्रभावशाली लोगों ने पानी को रोक लिया था। सूचना पर शनिवार को सीएडी के कनिष्ठ अभियंता नितिन पटेल पुलिस कर्मियों के साथ रोके हुये पानी को छुड़ाने पहुंचे इस दौरान इटावा प्रधान रिंकू मीणा और उनके समर्थकों ने जेईएन से मारपीट की। जेईएन ने बताया कि वे डेढ़ माह पहले नौकरी में आए हैं। शनिवार को सहायक अभियंता के निर्देश पर वे नहर में लगे अवैध अवरोध को हटाने पहुंचे थे। उनके साथ पुलिसकर्मी भी थे। इस दौरान इटावा प्रधान, ओमप्रकाश मीणा, महेंद्र मीणा, नमोनारायण मीणा और देवा नहर पर कार्रवाई का विरोध करते हुए गाली-गलौज करने लगे। नितिन ने बताया कि अचानक आरोपियों ने उन्हें थप्पड़, लात-घूंसे से पीटना शुरू कर दिया और पुलिसकर्मियों के सामने ही मारपीट करते रहे। नितिन ने बताया कि मारपीट के बाद नितिन थाने पहुंचे, लेकिन इटावा पुलिस ने उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की। वहीं इस घटना पर इटावा प्रधान रिंकू मीणा ने कहा है कि मैंने जेईएन से मारपीट नहीं की, वह गलत आरोप लगा रहे हैं। जेईएन ने किसानों से अभद्रता की, जिस पर किसानों ने आवेश में थप्पड़ मारे। मैंने तो उन्हें छुड़वाया, अब वे मेरे ऊपर आरोप क्यों लगा रहे हैं, यह समझ से परे है। दूसरी ओर इटावा पुलिस थाना सीआई संदीप विश्नोई का कहना है कि जेईएन नितिन की ओर से शिकायत दी गई है, जांच की जा रही है। इसके बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।

Rajasthan News: प्रदेश में नवीन पशु चिकित्सा एवं पशुविज्ञान महाविद्यालय खोलने के लिए ऑन लाईन आवेदन शुरू

0
राज्य के विभिन्न जिलों में नवीन पशु चिकित्सा और पशुविज्ञान महाविद्यालय खोलने के लिए निजी क्षेत्र की संस्थाओं से राजएनओसी पोर्टल के माध्यम से आवेदन मांगे गए हैं। पशुपालन, गोपालन और देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने शुक्रवार को इस पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि आवेदन हेतु निजी क्षेत्र की संस्थायें, जो प्रदेश में नवीन पशु चिकित्सा एवं पशुविज्ञान महाविद्यालय की स्थापना करना चाहती हैं, वे राज्य सरकार से इस सम्बन्ध में अनापत्ति प्रमाण पत्र आवश्यकता प्रमाण पत्र जारी करवाने हेतु सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के राज एनओसी पोर्टल की वेबसाईट https://rajnoc.rajasthan.gov.in पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से दिनांक 21.11.2025 को प्रातः 10 बजे से दिनांक 28.11.2025 को सांय 5 बजे तक ऑन लाईन आवेदन कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के इस कदम से प्रदेश में पशु चिकित्सकों और अन्य तकनीकी कार्मिकों की कमी को आने वाले समय में पूरा करने में सहायता मिलेगी। उल्लेखनीय है कि पूर्व में इस विभाग की समसंख्यक विज्ञप्ति दिनांक 04.04.2025 के क्रम में राजएनओसी पोर्टल पर आवेदन प्रस्तुत करने वाले संस्थान भी अपने ऑन लाईन आवेदन में राज्य सरकार द्वारा गठित आवेदन स्क्रूटनी समितियों द्वारा परीक्षण उपरान्त दर्शायी गई त्रुटियों का अवलोकन कर तदनुरूप आवश्यक संशोधन इस अवधि के दौरान कर सकते हैं। नवीन आवेदन और पूर्ववर्ती आवेदन में संशोधन करने हेतु विस्तृत जानकारी राजएनओसी पोर्टल की वेबसाईट https://rajnoc.rajasthan.gov.in और पशुपालन विभाग की वेबसाईट www.animalhusbandry.rajasthan.gov.in पर उपलब्ध है।

Farmers News: प्रदेश बैलों से खेती करने पर किसानों को मिलेगी 30 हजार की आर्थिक सहायता

0
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण और कल्याणकारी निर्णय लिये हैं। जिससे कृषि क्षेत्र में निरंतर सुधार के साथ किसानों का आर्थिक सशक्तीकरण हो रहा है। राज्य सरकार ने बैलों से खेती करने वाले चयनित लघु एवं सीमांत किसानों को प्रतिवर्ष 30 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की पहल की है। इसका उद्देश्य पारंपरिक और जैविक खेती पद्धति को प्रोत्साहन व गौवंश संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ ही किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करना है। समय के साथ आधुनिक कृषि यंत्रों के बढ़ते उपयोग के कारण बैलों का महत्व कम होता जा रहा है, जिससे उनके संरक्षण पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। सरकार द्वारा घोषित इस प्रोत्साहन राशि से न केवल बैलों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि खेतों की उर्वरकता और पर्यावरण संरक्षण को भी लाभ मिलेगा। गोबर गैस प्लांट पर मिलेगी सब्सिडी- वहीं राज्य सरकार बैलों से खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि के साथ ही गोबर गैस प्लांट लगाने पर सब्सिडी भी प्रदान करेगी। इससे किसानों की कृषि लागत कम होगी, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा और जैविक खाद की उपलब्धता से जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। किसान अपने खेत पर ही खाद तैयार कर उत्पादन बढ़ा सकेंगे। इसके लिये कृषि विभाग द्वारा बैलों से खेती करने वाले किसानों का डाटाबेस तैयार किया जा रहा है, जिसके आधार पर पात्र किसानों का चयन किया जाएगा और उन्हें प्रोत्साहन राशि उपलब्ध करवाई जाएगी। प्रदेश में अब तक 42 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। जिनमें सबसे ज्यादा आवेदन डूंगरपुर, बांसवाड़ा और उदयपुर से प्राप्त हुए हैं। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया राज किसान साथी पोर्टल पर जारी है।

Rajasthan News: ‘दो बूंद जिंदगी‘ की अभियान रविवार को

प्रदेश में उप राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान 23 नवम्बर, रविवार को आयोजित किया जायेगा। अभियान में जन्म से पांच वर्ष तक के 1 करोड़ से अधिक बच्चों को पोलियो प्रतिरक्षक दवा निःशुल्क पिलायी जायेगी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने सभी अभिभावकों से अपने पांच वर्ष तक की उम्र के बच्चों को पोलियो रोग से प्रतिरक्षा देने वाली ‘दो बूंद जिंदगी‘ की नजदीकी पोलियो बूथ पर अवश्य पिलाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि भारत में पिछले 14 साल में पोलियो का एक भी नया केस दर्ज नहीं किया गया है और भारत को पोलियो मुक्त राष्ट्र घोषित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि पोलियो एक संक्रामक रोग है और पड़ोसी देशों में पोलियो संक्रमण के मामलों को ध्यान में रखकर ही सम्पूर्ण प्रदेश में पल्स पोलियो अभियान आयोजित कर सभी लक्षित बच्चों को पोलियो प्रतिरक्षक दवा पिलाई जायेगी। निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर ने बताया कि 23 नवम्बर, रविवार को पोलियो बूथ पर दवा पिलाने की सुविधा उपलब्ध रहेगी और अगले दो दिन स्वास्थ्यकार्मिक घर-घर जाकर किसी कारणवश बूथ पर दवा पीने नहीं आने वाले बच्चों को दवा पिलाएंगे। उन्होंने बताया कि लक्षित लगभग 1 करोड़ 8 लाख बच्चों को पोलियो दवा पिलाने के लिए सम्पूर्ण प्रदेश में 58 हजार 823 पोलियो बूथ स्थापित किये जायेंगे और साथ ही 6 हजार 741 ट्रांजिट टीमे और 8 हजार 989 मोबाइल टीम की व्यवस्था की गयी है।

Jaipur News: लाइफ लाइन स्टोर की लाइफ थमी घोटालों से

0
मरिजों के लिये वरदान लाइफलाइन मेडिकल और ड्रग स्टोर ने अब घोटाले से दम तोड़ दी। ने सवाई मानसिंह अस्पताल परिसर में संचालित यह सुविधा में हुये घोटाले को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में एफआइआर दर्ज हुई है। ब्यूरो की प्राथमिक जांच में बताया गया है कि वर्ष 2011 से 2019 के बीच निजी फर्मों से दवाओं की विलंबित आपूर्ति पर लगने वाली मैंडेटरी पेनल्टी की वसूली जानबूझकर नहीं की गई। इससे सरकार को करोड़ो का नुकसान हुआ। मामले का खुलासा SMS अस्पताल के विभागाध्यक्ष न्यूरोसर्जन मनीष अग्रवाल को रिश्वत प्रकरण में पकड़े जाने के बाद जांच में हुआ। वहीं वर्ष 2019 में लाइफलाइन स्टोर में लगी आग को भी इस घोटाले से जोड़ा जा रहा है। संदेह है कि यह आग रिकॉर्ड नष्ट करने के लिये तो नहीं लगाई गई। जांच में तत्कालीन फार्मासिस्ट सुनील कुमार मीणा और वरिष्ठ सहायक मदन लाल बैरवा ने मिलीभगत पाई गई। इन दोनो ने सॉफ्टवेयर में एमडी पेनल्टी की एंट्री नहीं की। इससे निजी फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचा। एफआइआर में दोनों कर्मचारियों पर पद का दुरुपयोग कर राज्य सरकार को आर्थिक हानि पहुंचाने का आरोप दर्ज है।

C S NEWS: 2 लाख रुपये तक के कृषि ऋण वितरण को फास्ट ट्रेक मोड़ पर संचालित करें बैंक —मुख्य सचिव

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बुधवार को राजस्थान स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी की 167वीं सभा को लेकर राज्य में डिजिटल व वित्तीय साक्षरता, कृषि व अन्य ऋणों के समयबद्ध वितरण के सम्बन्ध में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए जिससे रोजगार व अर्थव्यवस्था को बड़ा बूस्ट मिले। मुख्य सचिव ने विकसित राजस्थान— 2047 का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए 100 प्रतिशत क्रेडिट— डिपोजित अनुपात सुनिश्चित करने, डिपोजिट में पर्याप्त वृद्धि करने व क्रेडिट विस्तार के भी निर्देश दिए जिससे नए उद्यम लगाने, स्वरोजगार शुरू करने में अधिक मदद मिले व अर्थव्यवस्था को गति मिले। मुख्य सचिव ने 2 लाख रुपये तक के कृषि ऋण वितरण को फास्ट ट्रेक मोड़ पर संचालित करने के निर्देश दिए ताकि किसानों को समय पर ऋण मिले व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक गति मिले। उन्होंने बैठक में उपस्थित सभी बैंकर्स को निर्देश दिए कि राज्य को 2 लाख रुपये से अधिक के कृषि ऋण पर डिजिटल किसान क्रेडिट कार्ड की उपलब्धि वाला देश का प्रथम राज्य बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समन्वित प्रयास करें, यह अन्नदाताओं के लिए बड़ा लाभदायक सिद्ध होगा। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि वित्तीय समावेशन बढ़े व बैंकिंग सेवाएं प्रत्येक व्यक्ति की पहुंच में हो। एक भी गांव से बैंक शाखा की दूरी 5 कि.मी. से अधिक न हो। इसके लिए सर्वे/फिजिकल आडिट के निर्देश दिए। सरकार प्रायोजित स्कीमों में ऋण के लिए प्रस्ताव/आवेदन की गुणवत्ता सुधार के निर्देश दिए ताकि ऋण स्वीकृतियों पर समय से फैसला हो, प्रोजेक्ट की​फिजिबि​लिटी/सर्वाइबिलिटी के बारे में बेहतर डेटा उपलब्ध रहे। बैंक ऋण के संबंध में आए आवेदन पर लिए निर्णय की सूचना 14 दिन के भीतर आवेदक को देना सुनिश्चित करें। मुख्य सचिव ने वित्तीय साइबर फ्रॉड पर प्रभावी रोकथाम के लिए सुरक्षित डिजिटल ट्रांजेक्शन सुनिश्चित करने के लिए मल्टी मीडिया जागरूकता अभियान आयोजित करने के निर्देश दिए। बैठक में ​सम्बंधित बैंकर्स व विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

Mines News: विकसित भारत-2047 को साकार करने में माइनिंग सेक्टर की भी होगी अहम् भूमिका —केन्द्रीय खान सचिव

0
केन्द्रीय खान सचिव पीयूष गोयल ने कहा है कि विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने के लिए देश का माइनिंग सेक्टर नई उर्जा और गति के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि माइनिंग सेक्टर को आगे बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा लगातार कानून कायदों को व्यावहारिक बनाने के साथ ही टाइमलाईन तय की गई है जिससे खानों की नीलामी के बाद खानों के परिचालन में लाने में लगने वाले समय को कम किया जा सके। उन्होंने साफ किया कि यदि इसमे सरकारी स्तर अथवा एलओआई स्तर पर देरी होती है तो उसके लिए दण्डात्मक प्रावधान किये गये हैं। श्री गोयल गुरुवार को आरआईसी में प्रमुख सचिव खान टी. रविकान्त के साथ एलओआई धारकों से रुबरु हो रहे थे। उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों में एलओआई धारकों द्वारा जितनी जल्दी खानों को परिचालन में लाया जाएगा उतना ही अधिक लाभ खानधारकों को होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रोत्साहन के प्रावधान किये गये हैं। श्री गोयल ने राजस्थान में मेजर मिनरल माइंस के ऑक्शन और प्री एम्बेडेड खानों की ऑक्शन प्रक्रिया शुरु करने की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले समय में राजस्थान माइनिंग सेक्टर से रेवेन्यू के क्षेत्र में भी अग्रणी प्रदेश बन जाएगा। उन्होंने आवश्यक अनुमतियां प्रदान करने वाली संस्थाओं से व्यावहारिक रुख अपनाने की आवश्यकता प्रतिपादित की वहीं प्रीएम्बेडेड की तर्ज पर ही पुरानी नीलाम खानों को परिचालन में लाने के लिए राज्य सरकार स्तर से भी सहयोग और मार्गदर्शन पर जोर दिया। उन्होंने एलओआई धारकों से भी आवश्यक औपचारिकता पूरी करने में अनावश्यक देरी नहीं करने का स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि एलओआई धारकों से संवाद कायम करने के लिए यह बैठक आयोजित की गई है। वहीं श्री रविकान्त ने बताया कि राजस्थान में 112 मेजर मिनरल ब्लॉकों की नीलामी की जा चुकी है। भविष्य में नीलाम होने वाले माइनिंग ब्लॉकों के नीलामी से पहले ही चरागाह, वन कन्वर्जन आदि इसी तरह की आने वाली समस्याओं को दूर करते हुए ब्लॉक बनाने के प्रयास किए जाएंगे जिससे आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने मे एलओआई धारक अनावश्यक परेशानियों से बच सके। उन्होने बताया कि इस वर्ष 21 ब्लॉकों की सफल नीलामी हो चुकी हैं और 8 प्री एम्बेडेड ब्लॉकों सहित 26 ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया कि राजस्थान विपुल और विविध प्रकार के खनिज संपदा वाला प्रदेश हैं। राज्य सरकार द्वारा माइनिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। नई खनिज नीति, एम.सेण्ड नीति के साथ ही प्रक्रिया को सरल किया गया है। इसके साथ ही एलओआई धारकों को सहयोग व मार्गदर्शन के लिए अलग से सेल बनाया गया है। उन्होंने कहा कि एलओआई धारकों व संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय के लिए दो कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं वहीं निरन्तर मॉ​निटरिंग की जा रही है।

C M NEWS: प्रवासी राजस्थानी अपने प्रदेश से जुड़ाव महसूस करें —मुख्यमंत्री

0
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रवासी राजस्थानी दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि विकसित राजस्थान की यात्रा में हमारे प्रवासी समुदाय के योगदान का एक विस्तृत रोडमैप भी है। उन्होंने कहा कि प्रवासी राजस्थानी दिवस कार्यक्रम में शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यटन और जल जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर आयोजित होने वाले सेक्टोरल सत्रों में प्रदेश के उभरते औद्योगिक परिदृश्य और निवेश की संभावनाओं पर गहन मंथन किया जाएगा। हमारा उद्देश्य है कि इन सत्रों के माध्यम से हर प्रवासी राजस्थानी अपने प्रदेश से जुड़ाव महसूस करें और ये इस रोडमैप को व्यवहारिक रूप देने का माध्यम बने। श्री शर्मा बुधवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रवासी राजस्थानी दिवस की तैयारियों को लेकर आयोजित समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रवासी समुदाय के सम्मान में प्रदेश में पहली बार आगामी 10 दिसम्बर को प्रवासी राजस्थानी दिवस का आयोजन करने जा रही है, ऐसे में इस भव्य आयोजन का विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए, ताकि यह आयोजन हर एक प्रवासी तक पहुंचे और यह दुनियाभर में फैले हमारे भाई-बहनों को एक सूत्र में जोड़ने का ऐतिहासिक अवसर साबित हो। सेक्टोरल सत्रों में विशेषज्ञ और प्रतिष्ठित संस्थान करेंगे संवाद — मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रवासी समुदाय को प्रदेश में उपलब्ध संभावनाओं से अवगत करवाने और उनके सुझाव साझा करने के लिए विभिन्न विषयों पर सेक्टोरल सत्र आयोजित होंगे। इन सत्रों में आईआईटी, आईआईएम, उद्योग समूहों, स्वास्थ्य संस्थानों व अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा संवाद किया जाएगा। शिक्षा संबंधी सत्र में बिरला संस्थान, आईआईएम, आईआईटी, दिल्ली पब्लिक स्कूल, संयुक्त अरब अमीरात और स्वास्थ्य संबंधी सत्रों में यकृत और पित्त विज्ञान संस्थान के निदेशक व टाटा 1 एमजी के सीएफओ सहित कई विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे। इसी तरह उद्योग सत्र में वेलस्पन इंडिया लिमिटेड एवं बोरोसिल रिन्यूएबल्स लिमिटेड, जल सत्र में ईकोलैब इंडिया, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स जैसे कई संस्थाओं एवं विशेषज्ञों के द्वारा संवाद किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को सेक्टोरल सत्रों के लिए आमंत्रित वक्ताओं, प्रतिभागियों की सूची को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। श्री शर्मा ने कहा कि जयपुर के जेईसीसी में होने वाले इस आयोजन के लिए सुरक्षा, यातायात, पार्किंग, स्वागत एवं प्रोटोकॉल से संबंधित तैयारियों की विस्तृत योजना समय पर लागू की जाए। साथ ही, कार्यक्रम के दौरान आतिथ्य, परिवहन, आवास, चिकित्सा एवं आपात सेवाओं की उपलब्धता के लिए जिम्मेदारियां तय की जाएं।

Rajasthan News: प्रदेश में किराए पर संचालित इकाइयों को मिलेगा किराए का 50 प्रतिशत रेंटल असिस्टेंस

मंत्रिमण्डल की सभा के अनुसार अनुमोदित राजस्थान ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर पॉलिसी-2025 के तहत किराए पर संचालित इकाइयों को पहले तीन वर्षों तक किराए का 50 प्रतिशत और अगले दो वर्षों के लिए 25 प्रतिशत अधिकतम 5 करोड़ रुपए प्रति जीसीसी प्रति वर्ष तक रेंटल असिस्टेंस के रूप में दिया जायेगा। कर्नल राठौड़ ने बताया कि कर्मचारियों के कौशल विकास को प्रोत्साहित करने हेतु प्रशिक्षण लागत का 50 प्रतिशत (अधिकतम ढाई करोड़ रुपए) प्रति जीसीसी प्रति वर्ष तक प्रतिपूर्ति पात्रतानुसार की जाएगी। वहीं, पर्यावरण-अनुकूल नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन इंसेंटिव, अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में पेटेंट, कॉपीराइट आदि की लागत पर 50 प्रतिशत सहायता, स्टांप ड्यूटी और बिजली शुल्क पर छूट भी दी जाएगी। उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने पत्रकारों को बताया कि मंत्रिमंडल ने राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरवीयूएनएल) और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) के बीच ज्वाइंट वेंचर कंपनी के गठन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया है। इस कंपनी में आरवीयूएनएल और एससीसीएल की हिस्सेदारी क्रमशः 26 प्रतिशत और 74 प्रतिशत होगी। यह जेवी खदान स्थल पर 9,600 करोड़ रुपए की लागत से 800 मेगावाट की कोयला आधारित ताप विद्युत परियोजना और राजस्थान में 6,000 करोड़ रुपए की लागत से 1500 मेगावाट क्षमता की सौर परियोजनाएं स्थापित करेगी। वहीं संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि मंत्रिमंडल ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के लिए बीकानेर जिले की पूगल तहसील के ग्राम करणीसर, भाटियान में 161.45 हैक्टेयर भूमि एवं चित्तौड़गढ़ जिले की रावतभाटा तहसील के ग्राम खरनाई में 356.25 हैक्टेयर भूमि को सशर्त कीमतन आवंटित करने की स्वीकृति प्रदान की है। साथ ही, पॉवरग्रिड बाड़मेर-1 ट्रांसमिशन लिमिटेड को 765 केवी सब स्टेशन की स्थापना के लिए बाड़मेर जिले के सोखरु में 70.6 हैक्टेयर भूमि आवंटित किए जाने का निर्णय भी किया गया है। इन निर्णयों से अक्षय ऊर्जा से उत्पादित विद्युत का ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत होगा और आमजन को सुगम विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

Cabinet News: मंत्रिमंडल का निर्णय- प्रदेश में ‘राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी राजस्थानी मामले विभाग’ का होगा गठन

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित मंत्रिमण्डल की सभा में प्रवासी राजस्थानियों के लिए नया विभाग गठित करने का निर्णय किया गया है। बैठक में राजस्थान ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर पॉलिसी के अनुमोदन और आरवीयूएनएल व सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड के मध्य ज्वाइंट वेंचर कंपनी के गठन सहित कई महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए। प्रवासी राजस्थानियों से संबंधित विषयों के निराकरण के लिए तैयार होगा नीतिगत ढांचा- उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने पत्रकार वार्ता में कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार को मंत्रिमंडल ने ‘राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी राजस्थानी मामले विभाग’ के गठन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया है। यह विभाग प्रवासी राजस्थानियों और राज्य सरकार के बीच संवाद और सहयोग के लिए एक सशक्त मंच उपलब्ध करवाएगा, जिससे प्रवासियों का अपनी मातृभूमि से जुड़ाव और मजबूत होगा। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से यह विभाग विश्व पटल पर ब्रांड राजस्थान को प्रोत्साहित करने का कार्य भी करेगा। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री ने बताया कि विभाग प्रवासी राजस्थानियों को राज्य सरकार की योजनाओं से लाभान्वित करने और उनके विभिन्न मुद्दों के समाधान के लिए नीतिगत ढांचा उपलब्ध कराएगा। साथ ही, प्रवासी राजस्थानी दिवस, प्रवासी राजस्थानी सम्मान समारोह के साथ-साथ प्रवासी राजस्थानियों के लिए एक्सचेंज कार्यक्रमों का भी आयोजन करेगा। प्रवासी राजस्थानी एसोसिएशन्स के रजिस्ट्रेशन के लिए पोर्टल का संचालन भी इस विभाग द्वारा किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष प्रवासी राजस्थानी कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रवासी राजस्थानियों के लिए विशेष विभाग स्थापित करने की घोषणा की थी। राजस्थान बनेगा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए ग्लोबल एक्सीलेंस हब- कर्नल राठौड़ ने बताया कि मंत्रिमंडल ने राजस्थान ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर पॉलिसी-2025 का अनुमोदन किया है। इस नीति का प्रमुख उद्देश्य जीसीसी की स्थापना और विस्तार के माध्यम से राजस्थान को एक वैश्विक नवाचार एवं निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करना है। यह नीति वर्ष 2030 तक राजस्थान में 200 से अधिक जीसीसी स्थापित करने, 1.5 लाख रोजगार के अवसर सृजित करने के साथ देश के 100 अरब डॉलर के जीसीसी बाजार में महत्वपूर्ण योगदान देने के लक्ष्य पर आधारित है। राज्य सरकार इस नीति के माध्यम से जयपुर, उदयपुर, जोधपुर जैसे शहरों को जीसीसी हब के रूप में विकसित करेगी। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री ने बताया कि इस पॉलिसी के अंतर्गत ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स की स्थापना के लिए रिप्स-2024 के प्रावधानों का लाभ दिया जाएगा। इसमें परियोजना लागत (भूमि और भवन लागत को छोड़कर) का 30 प्रतिशत या अधिकतम 10 करोड़ रुपए तक की पूंजी निवेश सब्सिडी दी जाएगी। साथ ही, भूमि या लीज एरिया की लागत का 50 प्रतिशत (अधिकतम 1 करोड़ रुपए) तक प्रतिपूर्ति लैण्ड कॉस्ट इंसेन्टिव के रूप में भी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों के वेतन पर पहले तीन वर्षों तक 30 प्रतिशत (अधिकतम 1.25 लाख प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष) की पेरोल सब्सिडी दी जाएगी।