मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में नारी शक्ति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण के एक नए युग की शुरुआत हुई है।
मुख्यमंत्री हाल ही में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना किसी भी राष्ट्र की प्रगति संभव नहीं है। श्री शर्मा ने ऐतिहासिक ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का जिक्र करते हुए कहा कि इस कानून से विधानसभाओं और संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे देश की नीति निर्धारण में उनकी आवाज और बुलंद होगी। यह अधिनियम केवल कानूनी सुधार नहीं, बल्कि महिलाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों को सुदृढ़ करने का एक बड़ा कदम है।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “महिलाएं अपने सपनों को सीमित न रखें, बल्कि उन्हें उड़ान भरने के लिए पंख दें। हमारी सरकार आपके हर कदम पर मजबूती के साथ खड़ी है।” उन्होंने राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे लाडो प्रोत्साहन योजना और लखपति दीदी योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके कौशल विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि महिलाएं आगे आकर नेतृत्व संभालें और नवाचारों के माध्यम से समाज में बदलाव लाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राजस्थान की मातृशक्ति अपनी मेहनत और समर्पण से राज्य को देश का अग्रणी प्रदेश बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया गया।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने और अपराधियों में भय व आमजन में विश्वास पैदा करने के संकल्प के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चलते हुए अपराध मुक्त राजस्थान बनाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।
अपराध पर जीरो टॉलरेंस और पुलिस का सुदृढ़ीकरण—
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि पुलिस तंत्र को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार संसाधनों की कोई कमी नहीं आने देगी। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि थानों में आने वाली हर एफआईआर का समयबद्ध अनुसंधान सुनिश्चित किया जाए। यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जनसुनवाई और जवाबदेही पर जोर—
प्रशासन को आमजन के प्रति अधिक जवाबदेह बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने स्थानीय स्तर पर प्रतिदिन जनसुनवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस और जनता के बीच सीधा संवाद होना चाहिए ताकि पीड़ित को न्याय के लिए भटकना न पड़े। इसके साथ ही, अब हर जिले की श्रेणीवार अपराध रिपोर्ट और उनके निस्तारण की प्रगति रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली का वास्तविक मूल्यांकन हो सके।
नियमित निरीक्षण और फील्ड मॉनिटरिंग—
अनुशासन बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को फील्ड में उतरने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस अधीक्षक नियमित रूप से थानों का निरीक्षण करें और पुलिस महानिरीक्षक अपने क्षेत्र के एसपी कार्यालयों की कार्यप्रणाली को जांचें। इस व्यवस्था से जमीनी स्तर पर पुलिसिंग में सुधार आएगा और पुलिसकर्मियों की सक्रियता बढ़ेगी।
साइबर क्राइम और संगठित अपराध पर प्रहार—
बढ़ते साइबर अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए श्री शर्मा ने इसकी उच्च स्तरीय मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि साइबर ठगी के पीड़ितों के साथ संवाद कर उन्हें त्वरित सहायता प्रदान की जाए। वहीं, संगठित अपराध और गैंगस्टर्स के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके ‘लोकल नेटवर्क’ को पूरी तरह खत्म करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि अपराधियों को पनाह देने वाले और उनके मददगारों पर भी कड़ी नजर रखी जाए।
कम्यूनिटी पुलिसिंग और महिला भागीदारी—
सामाजिक स्तर पर अपराध रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने कम्यूनिटी पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सुरक्षा सखी और सीएलजी कमेटियों में महिलाओं की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि महिला अपराधों पर प्रभावी रोक लग सके और महिलाएं निर्भीक होकर अपनी समस्याएं पुलिस के सामने रख सकें।
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इन कड़े कदमों से राजस्थान में शांति और सौहार्द का वातावरण और अधिक मजबूत होगा।
राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप ने पेट्रोलियम पाइपलाइन से कच्चे तेल की संगठित चोरी के मामले में एक बड़ी सफलता हासिल की है। एसओजी ने गाजियाबाद से इस रैकेट के मुख्य खरीदार राजीव सिंगल को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई तेल चोरी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई है।
15 वर्षों से तेल चोरी के काले कारोबार में लिप्त—
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपी राजीव सिंगल पिछले करीब 15 वर्षों से कच्चे तेल की चोरी और उसकी खरीद-फरोख्त के अवैध कारोबार में सक्रिय था। वह बेहद शातिर तरीके से पाइपलाइनों में सेंध लगाने वाले गिरोहों से संपर्क में रहता था और उनसे चोरी किया गया तेल सस्ते दामों पर खरीदता था।
आधी कीमत पर खरीदकर कमा रहा था मोटा मुनाफा—
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी राजीव सिंगल बाजार में लगभग 70 रुपये प्रति लीटर की कीमत वाले कच्चे तेल को चोरी करने वाले गिरोहों से मात्र 30 से 35 रुपये प्रति लीटर में खरीद रहा था। इस सस्ते तेल को वह आगे ऊंची कीमतों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहा था।
6.70 करोड़ रुपये के तेल की चोरी का अनुमान—
एसओजी के आकलन के अनुसार, अब तक इस संगठित नेटवर्क के जरिए चोरी किए गए कच्चे तेल की कुल कीमत करीब 6.70 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि राजीव सिंगल ने यह तेल किन-किन फैक्ट्रियों या डीलरों को सप्लाई किया है।
नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी—
विशाल बंसल ने बताया कि यह एक बड़ा नेटवर्क है जो कई राज्यों में फैला हो सकता है। राजीव की गिरफ्तारी से इस गिरोह की पूरी चेन का खुलासा होने की उम्मीद है। एसओजी अब गिरोह के उन सदस्यों की तलाश कर रही है जो पाइपलाइन में ड्रिल करके तेल निकालने का तकनीकी काम करते थे। आरोपी को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा, ताकि इस काले कारोबार से जुड़े अन्य रसूखदारों के नामों का खुलासा हो सके।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शहर में ट्रैफिक के रियल टाइम मैनेजमेंट के लिए एक नया इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर स्थापित किया जाए, ताकि जाम की स्थिति पर सीधी नजर रखी जा सके और तत्काल समाधान हो।
निर्माण कार्यों में गति और गुणवत्ता पर जोर—
मुख्यमंत्री ने शहर में चल रहे विभिन्न आरओबी (ROB) और एलिवेटेड रोड के निर्माण कार्यों की धीमी गति पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रगतिरत कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करें। साथ ही चेतावनी दी कि निर्माण कार्यों में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों के विरुद्ध ठोस कार्यवाही अमल में लाई जाए। कार्य की गुणवत्ता और समय सीमा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
ट्रैफिक सुधार के लिए ‘फ्री लेफ्ट’ और ‘डबल यू-टर्न’—
शहर के प्रमुख मार्गों को जाम मुक्त करने के लिए मुख्यमंत्री ने डबल यू-टर्न और फ्री लेफ्ट टर्न की कार्ययोजना को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़कों पर बनी अनियमित मीडियन ओपनिंग दुर्घटनाओं और जाम का मुख्य कारण हैं, जिन्हें जल्द से जल्द बंद किया जाए।
जेएलएन मार्ग पर विशेष फोकस—
शहर की लाइफलाइन माने जाने वाले जेएलएन मार्ग पर यातायात के बढ़ते दबाव को देखते हुए सीएम ने इसके लिए एक ‘इफेक्टिव ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान’ बनाने के निर्देश दिए। इसके अलावा, पार्किंग की समस्या को हल करने के लिए पार्किंग स्थलों का संचालन व्यवस्थित और नियमानुसार सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि सड़कों पर अवैध पार्किंग से यातायात बाधित न हो।
मुख्यमंत्री के इन निर्देशों का उद्देश्य जयपुर को एक आधुनिक, सुरक्षित और सुगम यातायात वाला शहर बनाना है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर मेट्रो रेल परियोजना की प्रगति और विस्तार को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जयपुर मेट्रो का द्वितीय चरण (फेज-2) शहर के विकास के लिए ‘ग्रोथ इंजन’ साबित होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फेज-2 के पहले पैकेज का कार्य बिना किसी विलंब के शीघ्र शुरू किया जाए।
औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेगी नई रफ्तार—
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि मेट्रो विस्तार से न केवल आमजन को सुगम यातायात मिलेगा, बल्कि शहर के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि मेट्रो नेटवर्क का विस्तार भविष्य की आवश्यकताओं और जनसंख्या घनत्व को ध्यान में रखकर किया जाए, ताकि शहर के प्रमुख मार्गों पर रहने वाले नागरिकों को इसका अधिकतम लाभ मिल सके।
डिपो और पार्किंग पर विशेष ध्यान—
मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने मेट्रो के सुचारू संचालन के लिए डिपो निर्माण हेतु उपयुक्त स्थान के चयन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मेट्रो स्टेशनों के पास पार्किंग सुविधाओं का समुचित विकास किया जाए ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके साथ ही, ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ पर ध्यान देने की बात भी कही गई, जिससे यात्री आसानी से अपने गंतव्य तक पहुँच सकें।
आधुनिक जयपुर की परिकल्पना—
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भविष्य की योजना बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि जयपुर एक वैश्विक पर्यटन केंद्र है, ऐसे में यहाँ का मेट्रो नेटवर्क आधुनिक और विश्वस्तरीय होना चाहिए। फेज-2 के क्रियान्वयन से ट्रैफिक जाम की समस्या में कमी आएगी और प्रदूषण स्तर को कम करने में भी मदद मिलेगी। इस विस्तार योजना से सीतापुरा से अम्बाबाड़ी जैसे प्रमुख रूटों को जोड़ने पर भी चर्चा हुई, जो शहर की लाइफलाइन माने जाते हैं।
राजस्थान में मिलावटखोरों के खिलाफ जारी सरकारी अभियान के तहत शुक्रवार को केंद्रीय दल ने ब्यावर में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। टीम ने स्थानीय एक मसाला फैक्ट्री पर छापा मारकर भारी मात्रा में मिलावटी मसाले और अखाद्य सामग्री जब्त की है।
छापेमारी और जब्ती—
गुप्त सूचना के आधार पर केंद्रीय जांच दल ने ब्यावर स्थित मसाला निर्माण इकाई पर औचक दबिश दी। निरीक्षण के दौरान टीम को फैक्ट्री में बड़े पैमाने पर मिलावट का खेल चलता मिला। अधिकारियों ने मौके से 5480 किलो मिर्च पाउडर और 1400 किलो चापड़ (अनाज का छिलका/वेस्ट) बरामद किया। स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने की आशंका के चलते पूरी खेप को मौके पर ही सीज कर दिया गया।
मिलावट का तरीका—
जांच में सामने आया कि फैक्ट्री संचालक मसालों की मात्रा बढ़ाने और मुनाफा कमाने के लिए शुद्ध मिर्च में भारी मात्रा में ‘चापड़’ मिला रहे थे। चापड़ और अन्य कृत्रिम रंगों के मिश्रण से तैयार यह मसाला न केवल गुणवत्ता में घटिया था, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी था।
सैंपल लैब भेजे गए—
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने जब्त मिर्च पाउडर और चापड़ के नमूने लेकर जांच के लिए सरकारी प्रयोगशाला भेज दिए हैं। दल के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट आने के बाद फैक्ट्री संचालक के खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (FSSAI) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई से क्षेत्र के अन्य मिलावटखोरों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जनता की सेहत से समझौता करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा और यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रयासों से केंद्र सरकार ने राजस्थान को दो बड़ी सौगातें दी हैं। 8 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में जयपुर मेट्रो फेज-2 और पचपदरा रिफाइनरी की संशोधित लागत को ऐतिहासिक मंजूरी प्रदान की गई है।
जयपुर मेट्रो फेज-2: शहर की नई ‘लाइफलाइन’—
केंद्र सरकार ने जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण (नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर) के लिए ₹13,037.66 करोड़ के बजट को हरी झंडी दे दी है। मुख्यमंत्री ने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए इसे जयपुर के विकास के लिए एक मील का पत्थर बताया है।
विस्तृत रूट: यह कॉरिडोर प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक 41 किलोमीटर लंबा होगा।
कनेक्टिविटी: यह मेट्रो नेटवर्क सीतापुरा और वीकेआईए (VKIA) जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ेगा। इसके साथ ही सांगानेर, जयपुर एयरपोर्ट, टोंक रोड, एसएमएस अस्पताल और विद्याधर नगर जैसे आवासीय व व्यावसायिक क्षेत्रों को भी इस सुगम परिवहन सेवा का लाभ मिलेगा।
स्टेशन: इस रूट पर कुल 36 स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें 34 एलिवेटेड और 2 अंडरग्राउंड स्टेशन (एयरपोर्ट क्षेत्र में) शामिल होंगे।
एकीकरण: यह नया कॉरिडोर मौजूदा फेज-1 (मानसरोवर से बड़ी चौपड़) के साथ इंटरचेंज सुविधाओं के जरिए जुड़ेगा, जिससे पूरे शहर में आवागमन सुगम हो जाएगा।
पचपदरा रिफाइनरी: आर्थिक विकास को रफ्तार —
मंत्रिमंडल ने बालोतरा जिले के पचपदरा में स्थित HPCL राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड की संशोधित लागत को भी मंजूरी दी है।
संशोधित लागत: परियोजना की लागत ₹43,129 करोड़ से बढ़ाकर ₹79,459 करोड़ कर दी गई है।
रोजगार के अवसर: इस रिफाइनरी से राज्य में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
लोकार्पण: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 21 अप्रैल 2026 को इस रिफाइनरी का लोकार्पण कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया है कि ये परियोजनाएं ‘विकसित राजस्थान’ के संकल्प को मजबूती प्रदान करेंगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगी
✍️अनिल त्रिवेदी
पश्चिम बंगाल की राजनीतिक बिसात पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प और बहुआयामी नजर आ रहा है। राज्य की सत्ता पर काबिज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र में सत्तारूढ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच की सीधी भिड़ंत ने बंगाल को भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा अखाड़ा बना दिया है। जहाँ एक तरफ तृणमूल कांग्रेस ‘बंगाली अस्मिता’ और अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं के दम पर किला बचाने में जुटी है, वहीं भाजपा ‘परिवर्तन’ और भ्रष्टाचार के मुद्दों को ढाल बनाकर सत्ता हथियाने की पुरजोर कोशिश कर रही है।
ममता बनर्जी और नरेंद्र मोदी के बीच का यह द्वंद्व पिछले कुछ चुनावों से बंगाल की राजनीति का केंद्र बिंदु रहा है। पीएम मोदी की रैलियों में उमड़ती भीड़ और ममता बनर्जी का आक्रामक जमीनी प्रचार इस लड़ाई को आर-पार की जंग बना देता है। लेकिन इस बार राहुल गांधी की सक्रिय उपस्थिति ने समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।
कांग्रेस और वामपंथी दलों का गठबंधन राज्य में तीसरे विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा है। राहुल गांधी की रैलियां और न्याय यात्रा के दौरान मिले जनसमर्थन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल उपस्थिति दर्ज कराने नहीं, बल्कि वोटों के गणित को प्रभावित करने आए हैं। राहुल गांधी के आने से मुकाबला अब केवल ‘दीदी बनाम दादा’ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह ‘त्रिकोणीय संघर्ष’ की ओर बढ़ता दिख रहा है।
जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी की मौजूदगी विशेष रूप से मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे इलाकों में टीएमसी और भाजपा दोनों के लिए चुनौती पैदा कर सकती है। यदि कांग्रेस-वाम गठबंधन अल्पसंख्यक और पारंपरिक कांग्रेस वोटों को अपने पाले में करने में सफल रहता है, तो इसका सीधा असर ममता बनर्जी के वोट बैंक पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, यह त्रिकोणीय मुकाबला सत्ता विरोधी वोटों के बंटवारे को भी प्रभावित करेगा, जो भाजपा के लिए चिंता का विषय हो सकता है। कुल मिलाकर, बंगाल की धरती पर ममता की ‘शक्ति’, मोदी का ‘प्रभाव’ और राहुल की ‘न्याय की राजनीति’ ने इस चुनाव को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहाँ हर सीट पर कड़ा संघर्ष तय है।
प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ने शादियों के आगामी सीजन और आमजन की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए विभागीय अधिकारियों को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विवाह समारोहों के दौरान एलपीजी सिलेंडरों की कमी न हो, इसके लिए आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाए।
विवाह समारोहों के लिए विशेष कोटा निर्धारित—
मंत्री ने निर्देश दिए कि विवाह समारोहों की आवश्यकता को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूनतम दो और शहरी क्षेत्रों में न्यूनतम एक साथ तीन वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। अक्सर बड़े आयोजनों में सिलेंडरों की किल्लत के कारण आमजन को असुविधा का सामना करना पड़ता है या अवैध रिफिलिंग की घटनाएं बढ़ती हैं। इस निर्णय से आयोजकों को राहत मिलेगी और पारदर्शिता बनी रहेगी। उन्होंने तेल कंपनियों और जिला रसद अधिकारियों को समन्वय स्थापित कर स्टॉक की नियमित निगरानी करने के आदेश दिए हैं।
पीएनजी कनेक्शनों के विस्तार पर जोर—
बैठक के दौरान खाद्य मंत्री ने शहरी क्षेत्रों में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) नेटवर्क के विस्तार की समीक्षा भी की। उन्होंने कहा कि पीएनजी न केवल सुरक्षित और किफायती है, बल्कि यह पर्यावरण के अनुकूल भी है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नए रिहायशी इलाकों और व्यावसायिक केंद्रों में पीएनजी पाइपलाइन बिछाने के कार्य में तेजी लाई जाए और नए कनेक्शन देने में प्राथमिकता बरती जाए।
कालाबाजारी पर लगेगी लगाम—
मंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विवाह स्थलों और कैटरिंग इकाइयों पर वाणिज्यिक सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ाकर घरेलू गैस के दुरुपयोग को रोका जा सकता है। उन्होंने प्रवर्तन टीमों को नियमित निरीक्षण करने और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
इस पहल का उद्देश्य आम नागरिक को उत्सव के समय अनावश्यक भागदौड़ से बचाना और ऊर्जा के आधुनिक स्रोतों को हर घर तक पहुँचाना है।
राजस्थान के औद्योगिक और आर्थिक परिदृश्य में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। आगामी 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बालोतरा जिले के पचपदरा में निर्माणाधीन बहुप्रतीक्षित रिफाइनरी सह पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोशल मीडिया (ट्वीट) के माध्यम से इस गौरवपूर्ण अवसर की जानकारी साझा करते हुए इसे प्रदेश के भविष्य के लिए क्रांतिकारी कदम बताया है।
मारवाड़ और राजस्थान का आर्थिक कायाकल्प—
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया है कि यह रिफाइनरी न केवल मारवाड़, बल्कि पूरे राजस्थान के आर्थिक ढांचे को बदल कर रख देगी। यह परियोजना क्षेत्र में औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने के साथ-साथ राज्य के राजस्व में भारी वृद्धि का मुख्य स्रोत बनेगी। पचपदरा रिफाइनरी को राजस्थान की ‘भाग्यरेखा’ (लाइफलाइन) के रूप में देखा जा रहा है, जो पश्चिमी राजस्थान के रेतीले धोरों को औद्योगिक हब में तब्दील कर देगी।
युवाओं के लिए रोजगार का सुनहरा अवसर—
इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू युवाओं के लिए रोजगार का सृजन है। मुख्यमंत्री के अनुसार, रिफाइनरी और इसके साथ विकसित होने वाले डाउनस्ट्रीम उद्योगों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों स्थानीय युवाओं को नौकरी और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। यह युवाओं के उज्जवल भविष्य के लिए नए द्वार खोलने वाली सिद्ध होगी।
तैयारियों का जायजा—
प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए राज्य प्रशासन और रिफाइनरी प्रबंधन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री स्वयं इस भव्य आयोजन की निगरानी कर रहे हैं ताकि लोकार्पण समारोह ऐतिहासिक बने। 21 अप्रैल का दिन राजस्थान के औद्योगिक इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा, जब प्रदेश ऊर्जा और पेट्रोलियम क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ी छलांग लगाएगा।