Rajasthan News: कत्लघर बनते जा रहे है प्राइवेट अस्पताल, सरकार से मिली है लूट की खुली छूट

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आज चिकित्सा जगत उस मुकाम पर खड़ा है जहाँ ‘डॉक्टर’ और ‘कसाई’ के बीच की रेखा धुंधली पड़ चुकी है। जिसे कभी मानवता का मंदिर कहा जाता था, वह आज कॉर्पोरेट गिद्धों का ‘प्रॉफिट सेंटर’ बन चुका है। अस्पताल की दहलीज पार करते ही मरीज एक इंसान नहीं, बल्कि ‘बीमा पॉलिसी’ या ‘बैंक बैलेंस’ के रूप में देखा जाता है। यह आज की नग्न सच्चाई है कि बीमारी शरीर को मारती है, लेकिन अस्पताल का बिल पूरे परिवार की रूह को छलनी कर देता है। मरीज को ‘बेबसी’ की जकड़ में लेकर उसे धीरे-धीरे ‘हलाल’ करने का यह तंत्र इतना संगठित है कि यहाँ खून नहीं बहता, पर हर गैर-जरूरी टेस्ट और हर ओवरप्राइस्ड दवा के साथ उसकी उम्मीदों का कत्ल किया जाता है। ऑपरेशन टेबल पर लेटा हुआ व्यक्ति केवल एक रोगी नहीं, बल्कि उस परिवार की पूरी आर्थिक बिसात होती है, जिसे सफेद कोट पहने ‘व्यापारी’ अपनी धारदार नजरों से तौलते हैं कि इससे आखिरी बूंद तक कितना निचोड़ा जा सकता है। ​जैसे ही कोई लाचार मरीज डॉक्टर के केबिन में कदम रखता है, संवेदनाओं का गला घोंटकर ‘कमीशन’ का गणित शुरू हो जाता है। खून, पेशाब से लेकर एमआरआई तक की वह अंतहीन सूची अक्सर बीमारी पकड़ने के लिए नहीं, बल्कि उस ‘अदृश्य सिंडिकेट’ की तिजोरियां भरने के लिए लिखी जाती है जिसमें डॉक्टर, डायग्नोस्टिक सेंटर और फार्मा कंपनियां एक ही जहरीले धागे से बंधे हैं। सबसे घिनौना खेल ‘इमरजेंसी’ और ‘ICU’ के नाम पर खेला जाता है। वेंटिलेटर अब जीवन रक्षक यंत्र नहीं, बल्कि ‘नोट छापने का प्रिंटर’ बन चुका है। परिजनों के ‘डर’ को इंजेक्शन की तरह इस्तेमाल कर उन्हें हफ्तों तक आईसीयू के बाहर अंधेरे में रखा जाता है, जबकि भीतर वेंटिलेटर पर पड़ा बेजान शरीर केवल एक ‘मीटर’ की तरह बिल बढ़ा रहा होता है। वेंटिलेटर का प्लग तब तक नहीं खींचा जाता, जब तक तीमारदार के क्रेडिट कार्ड की लिमिट खत्म न हो जाए। क्या यह इलाज है या लाशों पर की जाने वाली डकैती? इस सड़ चुके सिस्टम की सर्जरी के लिए अब “इलाज नहीं तो भुगतान नहीं” जैसा कड़ा और तार्किक कानून अनिवार्य है। यदि निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज की मौत होती है, तो उसके बिल का प्रावधान तत्काल प्रभाव से समाप्त होना चाहिए। यह तर्क पूरी तरह न्यायसंगत है क्योंकि जब भुगतान केवल ‘सफलता’ (मरीज के बचने) से जुड़ा होगा, तो अस्पताल का ध्यान ‘बिल मैक्सिमाइजेशन’ से हटकर ‘लाइफ सेविंग’ पर केंद्रित होगा। इससे उन दिखावटी वेंटिलेटर पैकेजों और अनावश्यक आईसीयू स्टे पर स्वतः अंकुश लग जाएगा जो केवल मुनाफाखोरी के लिए थोपे जाते हैं। हालाँकि, निजी अस्पतालों द्वारा गंभीर मरीजों को भर्ती न करने की आशंका को दूर करने के लिए सरकार को ‘बीमाकर्ता’ की भूमिका निभानी होगी। यदि किसी मरीज की मृत्यु होती है, तो अस्पताल के वास्तविक बुनियादी खर्च की भरपाई सरकारी कोष से हो, ताकि अस्पताल को वित्तीय हानि का डर न रहे और वह पूरी ईमानदारी से जीवन बचाने का जोखिम उठा सके। ​पारदर्शिता के नाम पर अब बंद कमरों की गोपनीयता को खत्म करना होगा। कैश काउंटर से लेकर आईसीयू के बिस्तर तक ‘तीसरी आँख’ यानी सीसीटीवी कैमरों का पहरा अनिवार्य हो। आईसीयू की लाइव फुटेज का सीधा एक्सेस परिजनों के मोबाइल पर मिलना चाहिए ताकि वे देख सकें कि ‘पर्दे के पीछे’ उनके अपने के साथ क्या उपचार हो रहा है। जब अस्पताल के गलियारों में होने वाले ‘कमीशन के सौदे’ और ‘फर्जी दवाओं का वितरण’ कैमरे की जद में होगा, तब जाकर इस पेशेवर डकैती पर लगाम लगेगी। सवाल यह नहीं कि डॉक्टरों के आलीशान बंगलों में इटालियन मार्बल क्यों लगा है; सवाल यह है कि उस मार्बल की चमक में कितने गरीबों की गिरवी रखी जमीनों का पसीना और कितने बेबस पिताओं की आंखों के आंसू मिले हुए हैं? अगर चिकित्सा जैसा पवित्र पेशा केवल ‘मुनाफे का नंगा बाजार’ बना रहा, तो समाज का सामूहिक विश्वास पूरी तरह ढह जाएगा। अब समय आ गया है कि इस ‘मेडिकल माफिया’ के खिलाफ सख्त कानून बने, क्योंकि जब सांसे बिकने लगती हैं, तो लोकतंत्र और इंसानियत दोनों दम तोड़ देते हैं। —✍️महेश झालानी

Elections 2026: देश में अप्रैल महीने चार राजनैतिक कवायद को लेकर चर्चा, अटकलें -कयासों का बाजार गर्म

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बिहार में नीतीश कुमार की जगह भाजपा का अगला मुख्यमंत्री कब-कौन ! बंगाल में ममता बनर्जी का राजनैतिक किला भाजपा ढ़हा देंगे – की नहीं- भवानीपुर में भाजपा उम्मीदवार सुबोधु अधिकारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हरा पायेंगे कि नही!! देश अकेले बचे वामपंथी सत्तारूढ़ प्रदेश केरल मे कांग्रेस आयेगी की नहीं! बंगाल में अमित शाह और केरल में कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल की प्रतिष्ठा दांव पर!! नितीश कुमार के 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद की शपथ ग्रहण करेंगे, 11 अप्रैल को नितिश कुमार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करेंगे, 12 अप्रैल को नितिश कुमार दिल्ली से पटना लौट कर मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देंगे।16 से20 अप्रैल तक पटना में बिहार एनडीए गठबंधन दलों के विधायको की बैठक में मुख्यमंत्री पद पर नेता का चयन , फिर भाजपा मुख्यमंत्री का शपथग्रहण समारोह आयोजित होने की राजनैतिक गलियारों में सुगबुगाहट हैं। चर्चा में भाजपा उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार। वहीं भाजपा राजनैतिक गलियारों में पूर्व केंद्रीय मंत्री, बिहार एमएलसी विधायक संघनिष्ठ संजय पासवान के यूवा सुपुत्र भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान के नाम की खुसर-पुसर भी है। बिहार भाजपा में दलित समुदाय में प्रमुख संघनिष्ठ परिवार के अम्बेडकर विचार धारा के हिन्दू वादी यूवा नेता गुरु प्रकाश पासवान पटना विश्वविद्यालय में विधि विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं। आपकों याद हैं कि नहीं? लोकसभा चुनाव 2014 में बिहार में जदयू के खराब नतीजे – प्रदर्शन पद नितिश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर जदयू के दलित समुदाय नेता विधायक जीतन राम मांझी को म ई 2014 में मुख्यमंत्री बनाया था। बिहार राजनैतिक गलियारों की एकबात और कांग्रेस के 6 में 4 विधायक के पाला बदल कर भाजपा में जाने, एक दो राजद विधायको के जदयू का दामन थामने की सुगबुगाहट हैं। गुजरे महीनों में बिहार कांग्रेस के तीन विधायकों ने पार्टी बैठको से किनारा कर सार्वजनिक रूप से भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पटना ओर दिल्ली कार्यक्रम में शामिल हुए थे।पिछले महीने बिहार राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के तीन ओर राजद का एक विधायक ने मतदान में भाग नहीं लेकर मतदान नहीं किया था। अगर यह सच हुआ तो बिहार में भाजपा बहुमत के नजदीक तथा जदयू एवं इंडिया गठबंधन दल मिल कर भी एनडीए गठबंधन विधायको की संख्या से बिहार में आगे नहीं निकल रह पायेगी।

✍️ भूपेन्द्र ओझा वरिष्ठ पत्रकार

 Elections 2026: बंगाल चुनाव  और मारवाड़ी मतदाता

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बंगाल राज्य में राजस्थान मारवाड़ी, शैखावडी व्यापार, व्यवसाय जगत में है। बंगाल में राजस्थान मारवाड़ी शैखावडी मतदाता वाले विधानसभा क्षेत्र में कलकत्ता शहर में भवानीपुर, जोडासाक, बड़ा बाजार, चौरंगी बैल गाछिया। हुबली में श्रीरामपुर, रिसाडा, उत्तर 24 परगना में बैरमपुर, दमदम, साल्टलेक, आसनसोल उद्योगिक इलाके, चंदननगर, अलीपुर समृद्धशाली, बालीगंज में राजस्थान मारवाड़ी, शैखावडी मतदाता कहीं अच्छी तो कहीं बहुत ज्यादा संख्या है। भाजपा नेतृत्व ने बंगाल विधानसभा चुनाव में राजस्थान भाजपा नेता, पदाधिकारियों को चुनाव मैदान में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी भाजपा राष्ट्रीय नेतृत्व निर्देश पर गुजरे कई महीनों से बंगाल में डरा डाले हैं। आप इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि राजस्थान किसान मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष पद पर कैलाश चौधरी की नियुक्ति पर मैंने कैलाश चौधरी से मोबाइल बातचीत करने के समय वह बंगाल में थे। विधायक जितेंद्र गोठवाल, अतुल भंसाली, पूर्व सांसद मनोज राजोरिया,  राजस्थान भाजपा पदाधिकारी बिहारी लाल विश्नोई वासुदेव चावला, मोतीलाल मीणा, अशोक सैनी,  कमलेश पुरोहित,  नीरज जैन, पवन दूग्गल, काफी दिनों से बंगाल विधानसभा क्षेत्र में भाजपा चुनाव अभियान में लगे हैं। राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष, भाजपा पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, पूर्व प्रतिपक्ष नेता राजेन्द्र राठौड़, चितौड़गढ़ भाजपा सांसद, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी,  राज्य किसान बोर्ड चैयरमेन एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री सी आर चौधरी, राज्य देवनारायण बोर्ड चैयरमेन एवं भाजपा पूर्व प्रदेश महामंत्री ओमप्रकाश भडाणा, पूर्व सांसद रामचरण बोहरा, पूर्व मंत्री एवं भाजपा पूर्व प्रदेश महामंत्री सुशील कटारा, पूर्व विधायक रामलाल शर्मा,, मोहन लाल गुप्ता, सुरेन्द्र पारीक, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता दशरथ सिंह शेखावत, जोधपुर नगर निगम पूर्व महापौर राजेन्द्र कुमार गहलोत बंगाल में विधानसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार के समर्थन में संगठन बैठक चुनाव रणनीति रचना का दायित्व संभाल पहुंच गई है। बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ओर भाजपा के बीच रोचक चुनाव दंगल में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का फिर बंगाल विधानसभा चुनाव में राजस्थान प्रवासी की सभाओं को संबोधित करने, भाजपा उम्मीदवार के समर्थन में चुनाव प्रचार अभियान चलाने जाने का प्रोग्राम बनने के संकेत मिले हैं। ✍️ भूपेन्द्र ओझा वरिष्ठ पत्रकार

Rajasthan News: प्रदेशाध्यक्ष के स्वागत में कार्यकर्ताओं की बेरुखी, निवाई भाजपा में गुटबाजी की चर्चा तेज

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राजस्थान भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष के निवाई आगमन पर आयोजित स्वागत कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं की कम उपस्थिति ने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है। भाजपा विधायक रामसहाय वर्मा और नगर पालिका निवाई की मौजूदगी के बावजूद, स्वागत के दौरान मात्र 27 कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने संगठन के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है। स्वागत की तैयारियों पर उठे सवाल— सूत्रों के अनुसार, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के जिले के दौरों के तहत निवाई में एक भव्य स्वागत की योजना बनाई गई थी। स्थानीय विधायक रामसहाय वर्मा और भाजपा शासित नगर पालिका बोर्ड ने इस कार्यक्रम की कमान संभाली थी। उम्मीद जताई जा रही थी कि सत्ताधारी दल के प्रदेशाध्यक्ष के स्वागत में भारी जनसैलाब और कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ेगा। हालांकि, जब स्वागत का समय आया, तो मौके पर संख्या बल बेहद कम रहा। मात्र 27 कार्यकर्ताओं के साथ हुए इस ‘औपचारिक’ स्वागत ने आलाकमान को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। गुटबाजी और असंतोष का असर— राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि स्थानीय कार्यकर्ताओं में विधायक की कार्यशैली और नगर पालिका प्रशासन को लेकर गहरा असंतोष है। हाल ही में सोशल मीडिया पर विधायक रामसहाय वर्मा के खिलाफ कार्यकर्ताओं के आक्रोश के वीडियो भी वायरल हुए थे। कार्यकर्ताओं की इस बेरुखी को विधायक और संगठन के बीच बढ़ती दूरी का परिणाम माना जा रहा है। अटकलों का बाजार गर्म— एक तरफ विधायक रामसहाय वर्मा विधानसभा में निवाई की समस्याओं और सरकार की उपलब्धियों को मजबूती से रखते आ रहे हैं, वहीं धरातल पर कार्यकर्ताओं का साथ न मिलना आने वाले समय में भाजपा के लिए चुनौती बन सकता है। प्रदेशाध्यक्ष के सामने इस तरह की स्थिति उत्पन्न होना स्थानीय नेतृत्व की विफलता के रूप में देखा जा रहा है, जिससे विरोधी खेमे को भी हमलावर होने का मौका मिल गया है।

Politics News: वसुंधरा राजे के तीखे तेवर ‘दलबदलुओं’ के लिए ‘नो एंट्री’ का संकेत

राजस्थान की सियासत में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कड़े तेवरों ने हलचल मचा दी है। पिछले कुछ समय से संगठन की मुख्यधारा से दूरी बनाए रखने वाली राजे ने अब ‘दलबदलू’ नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोलकर अपनी सक्रियता और रसूख का अहसास करा दिया है। उनके हालिया बयान ने उन नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं जो चुनावों के वक्त अपनी सुविधा के अनुसार पाला बदलने की फिराक में रहते हैं। विचारधारा सर्वोपरि, सुविधा की राजनीति नहीं— वसुंधरा राजे ने स्पष्ट शब्दों में संकेत दिया है कि जो नेता केवल सत्ता की मलाई चाटने के लिए विचारधारा को ताक पर रखकर भाजपा का दामन थामना चाहते हैं, उनके लिए अब राह आसान नहीं होगी। राजे का यह “नो एंट्री” वाला रुख उन नेताओं के लिए सीधी चेतावनी माना जा रहा है जो कांग्रेस या अन्य क्षेत्रीय दलों को छोड़कर भाजपा में सुरक्षित भविष्य तलाश रहे हैं। उन्होंने साफ किया है कि पार्टी की मूल विचारधारा से जुड़ा कार्यकर्ता ही संगठन की असली ताकत है, न कि अवसरवादी चेहरे। सियासी गलियारों में हड़कंप— राजे के इस रुख को राजस्थान भाजपा के भीतर शक्ति संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान बड़ी संख्या में दूसरे दलों के नेताओं को भाजपा में शामिल किया गया था, जिससे कई जगहों पर पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी गई थी। राजे अब इसी नाराजगी को आवाज देकर कार्यकर्ताओं के बीच अपनी पकड़ और मजबूत कर रही हैं। भविष्य की रणनीति का हिस्सा?— सियासी पंडितों का तर्क है कि वसुंधरा राजे का यह बयान केवल दलबदलुओं के खिलाफ नहीं, बल्कि पार्टी आलाकमान को भी एक संदेश है कि राजस्थान में जमीनी फैसलों और चेहरों के चयन में उनकी राय को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा। अब देखना यह होगा कि राजे के इन तीखे तेवरों पर दिल्ली दरबार और प्रदेश नेतृत्व की क्या प्रतिक्रिया रहती है।

Jaipur News: परीक्षा फर्जीवाड़े पर SOG का बड़ा प्रहार, SI और BSTC भर्ती के 27 आरोपी गिरफ्तार

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राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़े के खिलाफ मुख्यमंत्री के निर्देश पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने एक बार फिर बड़ी कामयाबी हासिल की है। SOG ने एसआई (SI) भर्ती परीक्षा और BSTC परीक्षा में डमी अभ्यर्थी बैठाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए कुल 27 आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। 15 आरोपी गिरफ्तार— एडीजी (SOG) विशाल बंसल के अनुसार, SI भर्ती परीक्षा के दौरान डमी अभ्यर्थियों के जरिए परीक्षा पास करने की कोशिश करने वाले 13 मूल अभ्यर्थियों और 2 डमी अभ्यर्थियों सहित कुल 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये आरोपी जोधपुर, उदयपुर, भरतपुर और टोंक के रहने वाले हैं और लंबे समय से फरार चल रहे थे। जांच में सामने आया है कि इन अभ्यर्थियों ने मोटी रकम देकर अपनी जगह पेशेवर डमी परीक्षार्थियों को बिठाया था। BSTC परीक्षा में भी कार्रवाई— SOG की टीम ने केवल SI भर्ती ही नहीं, बल्कि बीएसटीसी (प्री डीएलएड/बीएलएड) परीक्षा 2019-20 में हुए फर्जीवाड़े की जांच करते हुए 12 मूल अभ्यर्थियों को भी गिरफ्तार किया है। इनमें से 11 आरोपी उदयपुर के और 1 भरतपुर का निवासी है। अशोक सारण की गिरफ्तारी से खुला राज— इस पूरे खेल का खुलासा साल 2021 में पाली के रोहट थाने में कुख्यात नकल माफिया अशोक सारण की गिरफ्तारी के बाद हुआ था। सारण से पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर SOG ने नए सिरे से मामले दर्ज कर जांच शुरू की, जिससे इस संगठित गिरोह की परतें खुलती चली गईं। एडीजी विशाल बंसल ने स्पष्ट किया कि जांच अभी जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में दबिश दी जा रही है। इस कार्रवाई से प्रदेश के मेहनती युवाओं में न्याय की उम्मीद जगी है।

Rajasthan News: एमएसपी पर गेहूं खरीद प्रक्रिया हुई सरल, अब मौके पर ही होगा रजिस्ट्रेशन

राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेश के लाखों किसानों के हित में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीद की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है। सोमवार से लागू होने वाली इस नई व्यवस्था के तहत अब वे किसान भी अपनी उपज सरकारी केंद्रों पर बेच सकेंगे, जो तकनीकी कारणों या जानकारी के अभाव में ऑनलाइन पोर्टल पर पहले से पंजीकरण नहीं करा पाए थे। लोकसभा अध्यक्ष की पहल पर मिली राहत— इस बड़े बदलाव की नींव शनिवार को कोटा में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में रखी गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और प्रदेश के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने किसानों की समस्याओं को लेकर अधिकारियों के साथ मंथन किया था। श्री बिरला के हस्तक्षेप और किसानों की व्यवहारिक दिक्कतों को देखते हुए राज्य सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने रबी विपणन सीजन 2026-27 के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है। नई व्यवस्था की मुख्य विशेषताएं— ऑन-स्पॉट रजिस्ट्रेशन: अब किसानों को पंजीकरण के लिए ई-मित्र या साइबर कैफे के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। खरीद केंद्र पर ही ‘हैंड-टू-हैंड’ रजिस्ट्रेशन की सुविधा मिलेगी। पोर्टल में बदलाव: विभाग ने ऑनलाइन पोर्टल की जटिलताओं को खत्म कर उसे यूजर-फ्रेंडली बनाया है। गिरदावरी और सत्यापन में ढील: पूर्व में सत्यापन की प्रक्रिया के कारण किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ता था, जिसे अब सुव्यवस्थित और तेज कर दिया गया है। किसानों में खुशी की लहर— इस फैसले से विशेष रूप से उन छोटे और सीमांत किसानों को बड़ी राहत मिलेगी जो तकनीक से दूर हैं। सरकार के इस कदम से न केवल बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी, बल्कि किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम समय पर मिल सकेगा। सोमवार से प्रदेश के सभी केंद्रों पर नई गाइडलाइन के अनुसार गेहूं की तुलाई और खरीद शुरू कर दी जाएगी।

Rajasthan News: प्रदेश में डॉक्टर और इंजीनियरों की शराब में रूची बढ़ी

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राजस्थान में सरकारी नौकरी के ट्रेंड में एक चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिला है। राजस्थान स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (RSBCL) में प्रतिनियुक्ति के लिए आए आवेदनों ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। शराब के प्रबंधन और वितरण से जुड़े इस विभाग में काम करने के लिए अब डॉक्टर, इंजीनियर और नर्सिंग कर्मी भी कतार में खड़े हैं। तकनीकी और चिकित्सा विशेषज्ञों की नई पसंद— हाल ही में RSBCL ने प्रबंधक (ऑपरेशन), प्रबंधक (प्रशासन) और डिपो मैनेजर जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए आवेदन मांगे थे। सामान्यतः इन पदों के लिए प्रशासनिक या वाणिज्यिक पृष्ठभूमि के अधिकारियों की उम्मीद की जाती थी। लेकिन, जब आवेदकों की सूची सामने आई, तो विभाग भी हैरान रह गया। इस सूची में स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर, नर्सिंग ऑफिसर और विभिन्न तकनीकी विभागों के इंजीनियरों के नाम प्रमुखता से शामिल हैं। मूल विभाग छोड़ शराब विभाग में दिलचस्पी क्यों?— विशेषज्ञों का मानना है कि इस ‘शिफ्ट’ के पीछे कई कारण हो सकते हैं। डॉक्टर और इंजीनियर जैसे पेशेवर अक्सर अपने मूल विभागों में भारी कार्यभार, नाइट ड्यूटी और फील्ड वर्क के तनाव से जूझते हैं। इसकी तुलना में RSBCL जैसे निगमों में प्रतिनियुक्ति को तुलनात्मक रूप से अधिक ‘स्थिर’ और ‘प्रशासनिक रूप से आकर्षक’ माना जाता है। इसके अलावा, फील्ड पोस्टिंग और डिपो संचालन में मिलने वाले भत्ते और अन्य सुविधाएं भी एक बड़ा आकर्षण हो सकती हैं। बदलते ट्रेंड के निहितार्थ— यह बदलाव इस बात का संकेत है कि अब सरकारी अधिकारी अपने विशिष्ट कार्यक्षेत्र के बजाय प्रशासनिक और प्रबंधकीय भूमिकाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। चिकित्सा और तकनीकी सेवाओं के अधिकारियों का इस तरह दूसरे विभागों की ओर रुख करना, उनके मूल विभागों में मानव संसाधन की कमी का कारण भी बन सकता है। फिलहाल, RSBCL में इस भारी भीड़ ने यह साफ कर दिया है कि सरकारी सेवा में ‘ग्लैमर’ और ‘सुविधा’ के मायने अब तेजी से बदल रहे हैं।

Rajasthan News: आईआईटी रुड़की की चेतावनी: जयपुर-जोधपुर पर मंडराएगा जल संकट

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भारत के प्रमुख शहरों में भू-जल का गिरता स्तर एक बड़े जल संकट की आहट दे रहा है। आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं द्वारा 10 लाख से अधिक आबादी वाले देश के 54 प्रमुख शहरों पर किए गए एक ताज़ा अध्ययन ने भविष्य की डरावनी तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि भू-जल दोहन और जलवायु परिवर्तन की वर्तमान स्थिति जारी रही, तो साल 2050 तक करीब 55 करोड़ शहरी आबादी को पीने के पानी के गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा। 23 शहरों में भारी गिरावट— अध्ययन में पाया गया कि 1996 से 2023 के बीच 54 में से 23 शहरों में भू-जल स्तर में खतरनाक गिरावट दर्ज की गई है। उत्तर और मध्य भारत के शहरों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है, जहाँ जल स्तर -0.12 से -0.45 मीटर प्रति वर्ष की दर से नीचे जा रहा है। शोधकर्ताओं ने दिल्ली, जयपुर और जोधपुर को ‘बेहद जोखिमपूर्ण’ श्रेणी में रखा है। विरोधाभासी दावे और जमीनी हकीकत— एक ओर जहाँ आईआईटी का अध्ययन भविष्य के खतरे की ओर इशारा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय भू-जल बोर्ड ने कुछ राहत भरी रिपोर्ट दी है। बोर्ड का दावा है कि पिछले साल हुई जोरदार बारिश के कारण जयपुर जैसे शहरों के भू-जल स्तर में मामूली सुधार हुआ है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार अस्थायी हो सकता है क्योंकि अनियंत्रित दोहन और कंक्रीट के बढ़ते जाल के कारण पुनर्भरण की प्रक्रिया बाधित हो रही है। आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं ने आगाह किया है कि शहरीकरण की अंधी दौड़ और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध इस्तेमाल ने हमें विनाश के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। यदि समय रहते जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को अनिवार्य नहीं बनाया गया, तो आधी सदी बीतने से पहले ही देश के बड़े महानगर ‘जीरो वॉटर डे’ की ओर बढ़ जाएंगे।

Rajasthan News: प्रदेश में ग्राम–2026, 23 से 25 मई को, देशभर के 5 प्रमुख शहरों में होंगे रोडशो

राजस्थान सरकार का कृषि विभाग ‘ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट’ (GRAM)–2026 के आगामी संस्करण को भव्य बनाने की तैयारियों में जुट गया है। 23 से 25 मई, 2026 तक आयोजित होने वाले इस मेगा इवेंट के व्यापक प्रचार-प्रसार और निवेशकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से विभाग देशभर के पांच प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में ‘रोडशो’ आयोजित करने जा रहा है। निवेशकों और स्टार्टअप्स पर रहेगा फोकस— इन रोडशो का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र के निवेशकों, एग्रीटेक कंपनियों, प्रतिष्ठित शोध संस्थानों, उभरते हुए स्टार्टअप्स और विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाना है। विभाग इन आयोजनों के माध्यम से उन्हें ग्राम–2026 में सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित करेगा। राजस्थान सरकार की मंशा राज्य को कृषि-व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में एक ग्लोबल हब के रूप में स्थापित करने की है। रोडशो का पूरा कार्यक्रम— प्रचार अभियान की शुरुआत पिंक सिटी से होगी। कार्यक्रमों की प्रस्तावित रूपरेखा इस प्रकार है: 10 अप्रैल: जयपुर 17 अप्रैल: दिल्ली 24 अप्रैल: अहमदाबाद 06 मई: हैदराबाद 08 मई: पुणे सवांद और संभावनाएं— इन कार्यक्रमों के दौरान राजस्थान के कृषि क्षेत्र में उपलब्ध असीम निवेश संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया जाएगा। साथ ही, राज्य सरकार द्वारा कृषि प्रसंस्करण, भंडारण और नई तकनीकों के लिए दी जा रही रियायतों व नीतियों की जानकारी भी साझा की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन रोडशो से न केवल राज्य में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे, बल्कि प्रदेश के किसानों को वैश्विक स्तर की तकनीक और विपणन (Marketing) के नए अवसर भी प्राप्त होंगे। राज्य सरकार ‘ग्राम–2026’ को खेती-किसानी के भविष्य को बदलने वाले एक मील के पत्थर के रूप में देख रही है।