Jaipur News: परीक्षा फर्जीवाड़े पर SOG का बड़ा प्रहार, SI और BSTC भर्ती के 27 आरोपी गिरफ्तार

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राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़े के खिलाफ मुख्यमंत्री के निर्देश पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने एक बार फिर बड़ी कामयाबी हासिल की है। SOG ने एसआई (SI) भर्ती परीक्षा और BSTC परीक्षा में डमी अभ्यर्थी बैठाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए कुल 27 आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। 15 आरोपी गिरफ्तार— एडीजी (SOG) विशाल बंसल के अनुसार, SI भर्ती परीक्षा के दौरान डमी अभ्यर्थियों के जरिए परीक्षा पास करने की कोशिश करने वाले 13 मूल अभ्यर्थियों और 2 डमी अभ्यर्थियों सहित कुल 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये आरोपी जोधपुर, उदयपुर, भरतपुर और टोंक के रहने वाले हैं और लंबे समय से फरार चल रहे थे। जांच में सामने आया है कि इन अभ्यर्थियों ने मोटी रकम देकर अपनी जगह पेशेवर डमी परीक्षार्थियों को बिठाया था। BSTC परीक्षा में भी कार्रवाई— SOG की टीम ने केवल SI भर्ती ही नहीं, बल्कि बीएसटीसी (प्री डीएलएड/बीएलएड) परीक्षा 2019-20 में हुए फर्जीवाड़े की जांच करते हुए 12 मूल अभ्यर्थियों को भी गिरफ्तार किया है। इनमें से 11 आरोपी उदयपुर के और 1 भरतपुर का निवासी है। अशोक सारण की गिरफ्तारी से खुला राज— इस पूरे खेल का खुलासा साल 2021 में पाली के रोहट थाने में कुख्यात नकल माफिया अशोक सारण की गिरफ्तारी के बाद हुआ था। सारण से पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर SOG ने नए सिरे से मामले दर्ज कर जांच शुरू की, जिससे इस संगठित गिरोह की परतें खुलती चली गईं। एडीजी विशाल बंसल ने स्पष्ट किया कि जांच अभी जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में दबिश दी जा रही है। इस कार्रवाई से प्रदेश के मेहनती युवाओं में न्याय की उम्मीद जगी है।

Rajasthan News: एमएसपी पर गेहूं खरीद प्रक्रिया हुई सरल, अब मौके पर ही होगा रजिस्ट्रेशन

राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेश के लाखों किसानों के हित में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीद की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है। सोमवार से लागू होने वाली इस नई व्यवस्था के तहत अब वे किसान भी अपनी उपज सरकारी केंद्रों पर बेच सकेंगे, जो तकनीकी कारणों या जानकारी के अभाव में ऑनलाइन पोर्टल पर पहले से पंजीकरण नहीं करा पाए थे। लोकसभा अध्यक्ष की पहल पर मिली राहत— इस बड़े बदलाव की नींव शनिवार को कोटा में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में रखी गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और प्रदेश के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने किसानों की समस्याओं को लेकर अधिकारियों के साथ मंथन किया था। श्री बिरला के हस्तक्षेप और किसानों की व्यवहारिक दिक्कतों को देखते हुए राज्य सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने रबी विपणन सीजन 2026-27 के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है। नई व्यवस्था की मुख्य विशेषताएं— ऑन-स्पॉट रजिस्ट्रेशन: अब किसानों को पंजीकरण के लिए ई-मित्र या साइबर कैफे के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। खरीद केंद्र पर ही ‘हैंड-टू-हैंड’ रजिस्ट्रेशन की सुविधा मिलेगी। पोर्टल में बदलाव: विभाग ने ऑनलाइन पोर्टल की जटिलताओं को खत्म कर उसे यूजर-फ्रेंडली बनाया है। गिरदावरी और सत्यापन में ढील: पूर्व में सत्यापन की प्रक्रिया के कारण किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ता था, जिसे अब सुव्यवस्थित और तेज कर दिया गया है। किसानों में खुशी की लहर— इस फैसले से विशेष रूप से उन छोटे और सीमांत किसानों को बड़ी राहत मिलेगी जो तकनीक से दूर हैं। सरकार के इस कदम से न केवल बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी, बल्कि किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम समय पर मिल सकेगा। सोमवार से प्रदेश के सभी केंद्रों पर नई गाइडलाइन के अनुसार गेहूं की तुलाई और खरीद शुरू कर दी जाएगी।

Rajasthan News: प्रदेश में डॉक्टर और इंजीनियरों की शराब में रूची बढ़ी

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राजस्थान में सरकारी नौकरी के ट्रेंड में एक चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिला है। राजस्थान स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (RSBCL) में प्रतिनियुक्ति के लिए आए आवेदनों ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। शराब के प्रबंधन और वितरण से जुड़े इस विभाग में काम करने के लिए अब डॉक्टर, इंजीनियर और नर्सिंग कर्मी भी कतार में खड़े हैं। तकनीकी और चिकित्सा विशेषज्ञों की नई पसंद— हाल ही में RSBCL ने प्रबंधक (ऑपरेशन), प्रबंधक (प्रशासन) और डिपो मैनेजर जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए आवेदन मांगे थे। सामान्यतः इन पदों के लिए प्रशासनिक या वाणिज्यिक पृष्ठभूमि के अधिकारियों की उम्मीद की जाती थी। लेकिन, जब आवेदकों की सूची सामने आई, तो विभाग भी हैरान रह गया। इस सूची में स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर, नर्सिंग ऑफिसर और विभिन्न तकनीकी विभागों के इंजीनियरों के नाम प्रमुखता से शामिल हैं। मूल विभाग छोड़ शराब विभाग में दिलचस्पी क्यों?— विशेषज्ञों का मानना है कि इस ‘शिफ्ट’ के पीछे कई कारण हो सकते हैं। डॉक्टर और इंजीनियर जैसे पेशेवर अक्सर अपने मूल विभागों में भारी कार्यभार, नाइट ड्यूटी और फील्ड वर्क के तनाव से जूझते हैं। इसकी तुलना में RSBCL जैसे निगमों में प्रतिनियुक्ति को तुलनात्मक रूप से अधिक ‘स्थिर’ और ‘प्रशासनिक रूप से आकर्षक’ माना जाता है। इसके अलावा, फील्ड पोस्टिंग और डिपो संचालन में मिलने वाले भत्ते और अन्य सुविधाएं भी एक बड़ा आकर्षण हो सकती हैं। बदलते ट्रेंड के निहितार्थ— यह बदलाव इस बात का संकेत है कि अब सरकारी अधिकारी अपने विशिष्ट कार्यक्षेत्र के बजाय प्रशासनिक और प्रबंधकीय भूमिकाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। चिकित्सा और तकनीकी सेवाओं के अधिकारियों का इस तरह दूसरे विभागों की ओर रुख करना, उनके मूल विभागों में मानव संसाधन की कमी का कारण भी बन सकता है। फिलहाल, RSBCL में इस भारी भीड़ ने यह साफ कर दिया है कि सरकारी सेवा में ‘ग्लैमर’ और ‘सुविधा’ के मायने अब तेजी से बदल रहे हैं।

Rajasthan News: आईआईटी रुड़की की चेतावनी: जयपुर-जोधपुर पर मंडराएगा जल संकट

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भारत के प्रमुख शहरों में भू-जल का गिरता स्तर एक बड़े जल संकट की आहट दे रहा है। आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं द्वारा 10 लाख से अधिक आबादी वाले देश के 54 प्रमुख शहरों पर किए गए एक ताज़ा अध्ययन ने भविष्य की डरावनी तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि भू-जल दोहन और जलवायु परिवर्तन की वर्तमान स्थिति जारी रही, तो साल 2050 तक करीब 55 करोड़ शहरी आबादी को पीने के पानी के गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा। 23 शहरों में भारी गिरावट— अध्ययन में पाया गया कि 1996 से 2023 के बीच 54 में से 23 शहरों में भू-जल स्तर में खतरनाक गिरावट दर्ज की गई है। उत्तर और मध्य भारत के शहरों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है, जहाँ जल स्तर -0.12 से -0.45 मीटर प्रति वर्ष की दर से नीचे जा रहा है। शोधकर्ताओं ने दिल्ली, जयपुर और जोधपुर को ‘बेहद जोखिमपूर्ण’ श्रेणी में रखा है। विरोधाभासी दावे और जमीनी हकीकत— एक ओर जहाँ आईआईटी का अध्ययन भविष्य के खतरे की ओर इशारा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय भू-जल बोर्ड ने कुछ राहत भरी रिपोर्ट दी है। बोर्ड का दावा है कि पिछले साल हुई जोरदार बारिश के कारण जयपुर जैसे शहरों के भू-जल स्तर में मामूली सुधार हुआ है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार अस्थायी हो सकता है क्योंकि अनियंत्रित दोहन और कंक्रीट के बढ़ते जाल के कारण पुनर्भरण की प्रक्रिया बाधित हो रही है। आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं ने आगाह किया है कि शहरीकरण की अंधी दौड़ और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध इस्तेमाल ने हमें विनाश के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। यदि समय रहते जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को अनिवार्य नहीं बनाया गया, तो आधी सदी बीतने से पहले ही देश के बड़े महानगर ‘जीरो वॉटर डे’ की ओर बढ़ जाएंगे।

Rajasthan News: प्रदेश में ग्राम–2026, 23 से 25 मई को, देशभर के 5 प्रमुख शहरों में होंगे रोडशो

राजस्थान सरकार का कृषि विभाग ‘ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट’ (GRAM)–2026 के आगामी संस्करण को भव्य बनाने की तैयारियों में जुट गया है। 23 से 25 मई, 2026 तक आयोजित होने वाले इस मेगा इवेंट के व्यापक प्रचार-प्रसार और निवेशकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से विभाग देशभर के पांच प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में ‘रोडशो’ आयोजित करने जा रहा है। निवेशकों और स्टार्टअप्स पर रहेगा फोकस— इन रोडशो का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र के निवेशकों, एग्रीटेक कंपनियों, प्रतिष्ठित शोध संस्थानों, उभरते हुए स्टार्टअप्स और विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाना है। विभाग इन आयोजनों के माध्यम से उन्हें ग्राम–2026 में सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित करेगा। राजस्थान सरकार की मंशा राज्य को कृषि-व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में एक ग्लोबल हब के रूप में स्थापित करने की है। रोडशो का पूरा कार्यक्रम— प्रचार अभियान की शुरुआत पिंक सिटी से होगी। कार्यक्रमों की प्रस्तावित रूपरेखा इस प्रकार है: 10 अप्रैल: जयपुर 17 अप्रैल: दिल्ली 24 अप्रैल: अहमदाबाद 06 मई: हैदराबाद 08 मई: पुणे सवांद और संभावनाएं— इन कार्यक्रमों के दौरान राजस्थान के कृषि क्षेत्र में उपलब्ध असीम निवेश संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया जाएगा। साथ ही, राज्य सरकार द्वारा कृषि प्रसंस्करण, भंडारण और नई तकनीकों के लिए दी जा रही रियायतों व नीतियों की जानकारी भी साझा की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन रोडशो से न केवल राज्य में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे, बल्कि प्रदेश के किसानों को वैश्विक स्तर की तकनीक और विपणन (Marketing) के नए अवसर भी प्राप्त होंगे। राज्य सरकार ‘ग्राम–2026’ को खेती-किसानी के भविष्य को बदलने वाले एक मील के पत्थर के रूप में देख रही है।

Rajasthan News: राजस्थान के खनन क्षेत्र में 8 अप्रैल से आरएफआईडी सिस्टम का होगा लाइव ट्रायल

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राजस्थान के खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और निगरानी को पुख्ता करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में खनन गतिविधियों और खनिज परिवहन के सुव्यवस्थित प्रबंधन के लिए आगामी 8 अप्रैल से ऑटोमाइज्ड अधिकृत तुलाई कांटों का लाइव परीक्षण शुरू किया जाएगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव (माइंस एवं पेट्रोलियम), श्रीमती अपर्णा अरोरा ने बताया कि राज्य सरकार के ‘उन्नति कार्यक्रम’ के तहत खनन क्षेत्र में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस तकनीक के माध्यम से खानधारकों और सरकार दोनों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। दो चरणों में होगा कार्य— इस परियोजना के पहले चरण में वे-ब्रिज (तुलाई कांटा) ऑटोमाइजेशन और जीपीएस-आरएफआईडी आधारित व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम के मॉड्यूल तैयार किए गए हैं। इसके जरिए खनिज ले जाने वाले वाहनों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी, जिससे अवैध खनन और ओवरलोडिंग जैसी समस्याओं पर अंकुश लगेगा। अगस्त तक का लक्ष्य— श्रीमती अरोरा ने स्पष्ट किया कि विभाग ने इस कार्य को गति देने के लिए फील्ड अधिकारियों को अवकाश के दिनों में भी कार्य जारी रखने के निर्देश दिए हैं। विभाग का लक्ष्य है कि अगस्त माह तक प्रदेश के सभी तुलाई कांटों और खनिज परिवहन वाहनों के ऑटोमाइजेशन का कार्य पूर्ण कर लिया जाए। प्रभावी मॉनिटरिंग के निर्देश— परियोजना के सफल क्रियान्वयन और तय समय सीमा में कार्य पूरा करने के लिए फील्ड स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। यह प्रणाली लागू होने से न केवल राजस्व की चोरी रुकेगी, बल्कि खनन क्षेत्र में डेटा प्रबंधन और अधिक सटीक एवं विश्वसनीय हो जाएगा। राज्य सरकार के इस नवाचार से प्रदेश का खनन उद्योग डिजिटल और पारदर्शी भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है।

Jaipur News: राजधानी जयपुर में 25 करोड़ से बनेगा एक और पर्यटन स्थल 

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बजट घोषणा को धरातल पर उतारने के लिए जल संसाधन विभाग ने कमर कस ली है। जयपुर की द्रव्यवती नदी पर स्थित सांगानेर के ऐतिहासिक गूलर बांध को पुनर्जीवित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। विभाग ने बांध के सौंदर्यीकरण, नवीनीकरण और इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए लगभग 25 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत के निर्देशों के बाद विभाग ने सक्रियता दिखाते हुए परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर कार्यादेश भी जारी कर दिए हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लेने के लिए विभाग के मुख्य अभियंता और अतिरिक्त सचिव भुवन भास्कर ने हाल ही में गूलर बांध का निरीक्षण किया। उनके साथ अतिरिक्त मुख्य अभियंता सुरेश खतानिया, अधीक्षण अभियंता रमाशंकर और अधिशासी अभियंता अनिल थालौर सहित अन्य उच्चाधिकारी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान श्री भास्कर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए और इसकी नियमित जांच सुनिश्चित की जाए। बांध के ओवरफ्लो स्ट्रक्चर की जर्जर स्थिति को देखते हुए उन्होंने इसके तकनीकी पुन:डिजाइन और नए सिरे से निर्माण के आदेश दिए ताकि भविष्य में जल भराव की स्थिति को सुरक्षित रूप से संभाला जा सके। गूलर बांध का यह जीर्णोद्धार न केवल क्षेत्र के भू-जल स्तर को सुधारने में सहायक होगा, बल्कि पर्यटन के मानचित्र पर भी सांगानेर को एक नई पहचान दिलाएगा। सौंदर्यीकरण के बाद यह स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए एक सुंदर दर्शनीय स्थल के रूप में उभरेगा, जिससे क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

C M NEWS: पंचायत स्तर पर युवाओं को मिलेंगी आधुनिक लाइब्रेरी सुविधाएं —मुख्यमंत्री 

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं के भविष्य को संवारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि अब प्रदेश के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार ‘अटल ज्ञान केन्द्रों’ के माध्यम से ग्राम पंचायत स्तर पर ही आधुनिक लाइब्रेरी और विश्वस्तरीय शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने जा रही है। शनिवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान श्री शर्मा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन केंद्रों को ‘स्मार्ट लर्निंग हब’ के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि गांव के प्रतिभावान युवाओं के पास संसाधनों की कमी नहीं होनी चाहिए। सरकार की मंशा है कि गांव का युवा अपने घर के पास ही शांत और संसाधन युक्त वातावरण में पढ़ाई कर सके। डिजिटल संसाधनों और ई-मित्र सेवाओं से लैस होंगे केंद्र— मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अटल ज्ञान केन्द्रों पर न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी प्रमाणिक पुस्तकें और समसामयिक पत्र-पत्रिकाएं उपलब्ध कराई जाएं, बल्कि इन्हें डिजिटल संसाधनों से भी सुसज्जित किया जाए। इन केंद्रों पर उच्च गति इंटरनेट के साथ ऑनलाइन क्लासेस की सुविधा विकसित की जाएगी, ताकि छात्र देश के प्रतिष्ठित शिक्षकों के व्याख्यान सुन सकें। इसके अलावा, युवाओं की सुविधा के लिए इन केंद्रों पर ई-मित्र सेवाएं भी संचालित की जाएंगी, जिससे वे परीक्षाओं के फॉर्म भरने और अन्य सरकारी सेवाओं का लाभ एक ही छत के नीचे पा सकें। पलायन पर लगेगी रोक— इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण युवाओं का आर्थिक और मानसिक बोझ कम करना है। अक्सर पढ़ाई के लिए शहरों में रहने का खर्च उठाना ग्रामीण परिवारों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि पंचायत स्तर पर ही मूलभूत और आधुनिक सुविधाएं मिलने से युवाओं के समय और धन की बचत होगी, जिससे वे अपनी एकाग्रता के साथ लक्ष्य प्राप्ति की ओर बढ़ सकेंगे।

Rajasthan News: राजस्थान में 6 अप्रैल से शुरू होगा “आपणों खेत–आपणी खाद” अभियान

राजस्थान के कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने प्रदेश के किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के इस चुनौतीपूर्ण दौर में मिट्टी की सेहत (मृदा स्वास्थ्य) को बचाए रखना न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि कृषि की स्थिरता और बेहतर उत्पादकता के लिए भी अनिवार्य हो गया है। इसी दूरगामी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार द्वारा आगामी 06 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक प्रदेशव्यापी “आपणों खेत–आपणी खाद” अभियान चलाया जाएगा। रासायनिक उर्वरकों से मुक्ति का संकल्प— मंत्री डॉ. मीणा ने बताया कि लंबे समय से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग के कारण खेतों की उर्वरक शक्ति क्षीण हो रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों की रासायनिक खादों पर निर्भरता को कम करना है। सरकार चाहती है कि किसान अपने खेतों में ही जैविक खाद तैयार करें, जिससे खेती की लागत में कमी आए और फसल की गुणवत्ता में सुधार हो। जैविक और प्राकृतिक खेती पर जोर— इस अभियान के तहत कृषि विभाग के अधिकारी और विशेषज्ञ गांव-गांव जाकर किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती के लाभ समझाएंगे। उन्हें वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद), हरी खाद और अन्य पारंपरिक तरीकों से खाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। डॉ. मीणा के अनुसार, “आपणों खेत–आपणी खाद” का अर्थ ही यही है कि किसान आत्मनिर्भर बनें और अपने संसाधनों का उपयोग कर शुद्ध एवं पौष्टिक उपज पैदा करें। मिट्टी की सेहत से बढ़ेगी आमदनी— कृषि मंत्री ने अपील की है कि किसान इस अभियान से बढ़-चढ़कर जुड़ें। स्वस्थ मृदा न केवल आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन को सुरक्षित रखेगी, बल्कि वैश्विक बाजार में जैविक उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए किसानों की आमदनी में भी इजाफा करेगी। अप्रैल माह में संचालित होने वाला यह विशेष अभियान राजस्थान को प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

C M NEWS: राजस्थान में जलमार्ग से खुलेगी विकास की राह —मुख्यमंत्री 

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश में औद्योगिक माल परिवहन और निर्यात को सुगम बनाने के लिए जलमार्गों के विकास को राज्य सरकार की प्राथमिकता बताया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने जवाई-लूनी-रण ऑफ कच्छ राष्ट्रीय जलमार्ग को मूर्त रूप देने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण और आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों को इस प्रोजेक्ट के तकनीकी एवं वित्तीय पहलुओं का गहन आकलन करने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि भविष्य में जहाजों के संभावित ट्रैफिक और माल ढुलाई की लागत का तुलनात्मक अध्ययन भी रिपोर्ट में शामिल किया जाए। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप 27 अक्टूबर 2025 को राज्य सरकार और के बीच इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए एमओयू हस्ताक्षरित किया जा चुका है। बैठक के दौरान आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर के. मुरली ने परियोजना की तैयारियों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राष्ट्रीय जलमार्ग अस्तित्व में आने के बाद न केवल राजस्थान, बल्कि पड़ोसी राज्यों के उद्योगों और व्यापारियों के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा। इससे रण ऑफ कच्छ के रास्ते अरब सागर तक माल की निर्बाध आवाजाही संभव हो सकेगी। यह जलमार्ग प्रदेश के पेट्रोकेमिकल्स, खनिज, सीमेंट, केमिकल और अन्य औद्योगिक उत्पादों के परिवहन को किफायती और सुगम बनाएगा, जिससे रसद लागत में भारी कमी आएगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि एनडब्ल्यू-48 प्रदेश के समग्र आर्थिक विकास और व्यापारिक गतिविधियों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का मजबूत आधार बनेगा।