C M NEWS: डेयरी क्षेत्र बनेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सशक्त धुरी, ‘सरस’ को मिलेगा ग्लोबल ब्रांड का दर्जा

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि डेयरी क्षेत्र राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाली प्रमुख कड़ी है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में डेयरी क्षेत्र के विकास हेतु आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ‘सहकार से समृद्धि’ के ध्येय के साथ दुग्ध उत्पादकों की आर्थिक उन्नति के लिए प्रतिबद्ध है। सरस बनेगा नेशनल ब्रांड, धार्मिक स्थलों पर खुलेंगे आउटलेट— मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार ने बजट में 2000 करोड़ रुपये के ‘राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड’ का प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य ‘सरस’ को एक राष्ट्रीय ब्रांड के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजस्थान के बाहर और प्रदेश के प्रमुख धार्मिक व पर्यटन स्थलों पर सरस के आउटलेट खोलने की संभावनाएं तलाशी जाएं, ताकि पर्यटकों और श्रद्धालुओं को उच्च गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पाद सुलभ हो सकें। मिलावट पर जीरो टॉलरेंस और आधुनिक तकनीक— दूध की शुद्धता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और इसके लिए अत्याधुनिक मिल्क टेस्टिंग मशीनों व रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम को सुदृढ़ किया जाए। नियमित औचक निरीक्षण सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। रोजगार और अवसंरचना का विस्तार— श्री शर्मा ने कहा कि राजस्थान दुग्ध उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। ऐसे में औसत दुग्ध संकलन बढ़ाने और दुग्ध सहकारी समितियों के विस्तार की आवश्यकता है। उन्होंने विभागीय योजनाओं के समयबद्ध और पारदर्शी क्रियान्वयन पर जोर दिया ताकि तकनीकी नवाचारों के जरिए डेयरी क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी और संगठित बनाया जा सके। इस पहल से न केवल ग्रामीण परिवारों को आर्थिक संबल मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे

C M NEWS: संस्कार और शिक्षा के संगम से होगा राजस्थान का विकास —मुख्यमंत्री

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राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को राजापार्क स्थित आदर्श विद्या मंदिर विद्यालय में नवनिर्मित बहुउद्देशीय सभागार का लोकार्पण किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षा, संस्कारों और सामाजिक सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यालय केवल भवन नहीं होते, बल्कि वे स्थान हैं जहां विद्यार्थियों में संस्कारों के बीज बोए जाते हैं। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षक अपने ज्ञान रूपी दान से विद्यार्थियों के भविष्य की नींव मजबूत करते हैं और उन्हें जीवन में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। आदर्श विद्या मंदिर संस्थान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्थान केवल किताबी शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में निस्वार्थ सेवा, सहयोग और करुणा की भावना का विस्तार कर रहा है। शिक्षा और अंत्योदय हमारी प्राथमिकता— श्री शर्मा ने राज्य सरकार के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि वर्तमान सरकार शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। शिक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए सरकार निरंतर तत्परता से कार्य कर रही है। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘अंत्योदय’ विजन का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का उत्थान करना है। भामाशाहों और शिक्षकों का आभार— नवीन सभागार के निर्माण पर खुशी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों और भामाशाहों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह भव्य सभागार उन हजारों सपनों की नींव पर खड़ा है, जिसे शिक्षकों, अभिभावकों और दानदाताओं ने मिलकर बुना है। उन्होंने समाज के समर्थ वर्ग से अपील की कि वे शिक्षा के इन केंद्रों (ज्ञान केंद्रों) के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राएं, शिक्षाविद और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने मुख्यमंत्री के विजन और शिक्षा के प्रति उनके समर्पण का स्वागत किया।

C M NEWS: रामजल सेतु लिंक परियोजना में देरी बर्दाश्त नहीं —मुख्यमंत्री 

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राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने महत्वाकांक्षी ‘रामजल सेतु लिंक परियोजना’ (संशोधित पार्बती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना) को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को इसे मिशन मोड पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस परियोजना में किसी भी स्तर पर देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि केन्द्रीय जल आयोग ने परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट का तकनीकी परीक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया है। यह परियोजना के क्रियान्वयन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। श्री शर्मा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि परियोजना के वित्त पोषण के लिए ‘पीआईबी (पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड) नोट’ को तत्काल अंतिम रूप दिया जाए और केंद्र सरकार के साथ आवश्यक समन्वय स्थापित कर वित्तीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया तेज की जाए। पेयजल आपूर्ति और मुआवजे पर विशेष ध्यान— बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि परियोजना के माध्यम से आमजन को पेयजल की आपूर्ति जल्द से जल्द सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि शेष बचे हुए कार्यों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। साथ ही, उन्होंने मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना से प्रभावित होने वाले लोगों के मुआवजे के प्रकरणों का त्वरित और संवेदनशीलता के साथ निस्तारण किया जाए। नियमित निगरानी के निर्देश— परियोजना की प्रगति की कड़ाई से निगरानी के लिए मुख्यमंत्री ने तय किया है कि अब मंत्री और मुख्यमंत्री स्तर पर इसकी नियमित समीक्षा बैठकें होंगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से हर महीने प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है ताकि किसी भी बाधा को समय रहते दूर किया जा सके। इस बैठक से स्पष्ट है कि राज्य सरकार पूर्वी राजस्थान के लिए जीवनरेखा मानी जाने वाली इस परियोजना को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने के लिए संकल्पबद्ध है।

RGHS NEWS: ‘राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम’ सेवाओं का 15 मई से बहिष्कार —इंडियन मेडिकल एसोसिएशन

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राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी ‘राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम’ (RGHS) पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। बकाया भुगतान को लेकर राज्य सरकार और निजी अस्पतालों के बीच चल रहा गतिरोध अब आर-पार की जंग में बदल गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) सहित प्रदेश के विभिन्न डॉक्टर संगठनों ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 15 मई से पूरे प्रदेश में आरजीएचएस के तहत कैशलेस इलाज पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। 3500 करोड़ के मुकाबले मिला कम भुगतान— आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेश शर्मा और सचिव डॉ. एन.के. अग्रवाल के अनुसार, निजी अस्पतालों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 3500 करोड़ रुपये की चिकित्सा सेवाएं प्रदान की हैं। इसके विपरीत, सरकार की ओर से अब तक केवल 2400 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया गया है। अस्पतालों का आरोप है कि लगभग 1100 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि अभी भी सरकार के पास बकाया है। लिखित आश्वासन की अनदेखी का आरोप— डॉक्टर संगठनों का कहना है कि सरकार ने पूर्व में 45 दिनों के भीतर भुगतान प्रक्रिया पूरी करने का लिखित आश्वासन दिया था। इसके बावजूद, पिछले 7 महीनों से कई अस्पतालों के क्लेम अटके हुए हैं। भुगतान न होने से अस्पतालों के लिए कर्मचारियों का वेतन, दवाओं का खर्च और दैनिक परिचालन का बोझ उठाना मुश्किल हो रहा है। 30 अप्रैल तक का दिया समय— IMA ने स्पष्ट किया है कि यदि 30 अप्रैल तक बकाया राशि का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान नहीं किया गया, तो उनके पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। 15 मई से प्रस्तावित इस पूर्ण बहिष्कार से प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो स्वास्थ्य सेवाओं का यह गतिरोध प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था को पटरी से उतार सकता है।

Rajasthan News: रविंद्र सिंह भाटी और छोटू सिंह रावणा विवाद गहराया, राजपूत समाज ने की शांति की अपील

पश्चिमी राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर में पिछले कुछ दिनों से जारी सियासी और सामाजिक घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी और प्रसिद्ध भजन गायक छोटू सिंह रावणा के बीच सोशल मीडिया से शुरू हुई जुबानी जंग अब कानूनी दहलीज तक पहुँच गई है। विवाद के चलते जिला कलेक्ट्रेट और एसपी ऑफिस पर गहमागहमी का माहौल है, जहाँ रावणा समाज इस मामले में आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहा है। साजिशकर्ताओं से सावधान रहने की चेतावनी— बिगड़ते सामाजिक सद्भाव को देखते हुए श्री राजपूत समाज सेवा समिति, बाड़मेर ने ‘एक ही जाजम’ पर बैठकर मामले को सुलझाने की भावुक अपील जारी की है। समिति के उपाध्यक्ष किशोर सिंह कानोड़ ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि यह विवाद दो व्यक्तियों के बीच का है, जिसे पूरे समाज की भावनाओं से जोड़ना अनुचित है। उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ असामाजिक तत्व इस व्यक्तिगत विवाद की आड़ में दो समाजों के बीच वर्षों पुराने भाईचारे को बिगाड़ने की साजिश रच रहे हैं, जिसे सफल नहीं होने दिया जाएगा। संवाद से समाधान की पहल— समिति ने दोनों पक्षों और प्रबुद्धजनों से आग्रह किया है कि वे ‘एक ही परिवार’ की भावना के साथ आगे आएं। कानोड़ ने कहा, “हम सदियों से एक ही संस्कृति और परंपराओं से बंधे हैं। किसी एक व्यक्ति के मतभेद को सामाजिक संघर्ष का रूप देना समझदारी नहीं है।” राजपूत समाज के प्रबुद्धजनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और संवाद के माध्यम से विवाद को खत्म करने की अपील की है ताकि क्षेत्र में शांति और आपसी सौहार्द बना रहे। फिलहाल, प्रशासन भी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है।

Rajasthan News: उद्योग के लिये सरकार देगी अब, 99 की जगह 33 साल की लीज पर सस्ती जमीन

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राजस्थान को औद्योगिक हब बनाने और निवेश की राह आसान करने के लिए राज्य सरकार एक क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी में है। प्रदेश में अब औद्योगिक भूखंडों के आवंटन के पारंपरिक ‘लीज मॉडल’ को बदला जा रहा है। इसके तहत अब तक 99 साल की लीज पर मिलने वाली जमीन को अब 33 साल की अवधि के लिए देने की योजना है। इस बदलाव से औद्योगिक भूखंडों की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत तक की कमी आने का अनुमान है। निवेशकों के लिए बढ़ेंगे विकल्प— रीको द्वारा तैयार किए जा रहे इस नए मॉडल में केवल लीज की अवधि ही कम नहीं होगी, बल्कि उद्यमियों को कई लचीले विकल्प भी मिलेंगे। अब नए निवेशक भूखंड को किराये पर ले सकेंगे, किस्तों में भुगतान कर सकेंगे और भविष्य में उसे खरीदने का विकल्प भी चुन सकेंगे। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि स्टार्टअप्स और छोटे उद्यमियों को काम शुरू करने के लिए शुरुआत में ही बड़ी पूंजी जमीन पर खर्च नहीं करनी होगी। वैश्विक और सफल मॉडल्स का अध्ययन— राजस्थान सरकार और रीको इस मॉडल को लागू करने के लिए सिंगापुर, वियतनाम जैसे देशों के साथ-साथ गुजरात, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के सफल औद्योगिक मॉडल्स का अध्ययन कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में कम अवधि की लीज और लचीली नीतियों के कारण औद्योगिक गतिविधियों में भारी तेजी देखी गई है। केंद्र सरकार के इस कॉन्सेप्ट को अब राजस्थान अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढाल रहा है। MSME के लिए गेमचेंजर— विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) और नए निवेशकों के लिए ‘गेमचेंजर’ साबित होगी। सस्ती जमीन और आसान भुगतान प्रक्रिया से न केवल प्रदेश में निवेश बढ़ेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। रीको फिलहाल इस पर होमवर्क कर रहा है और जल्द ही इसे नई नीति के रूप में लागू किया जा सकता है।

Jaipur News: जयपुर में अवैध गैस रिफिलिंग और कालाबाजारी पर बड़ी कार्रवाई, 118 सिलेंडर जब्त

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा के अनुरूप राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के निर्देशों की पालना में जयपुर शहर में अवैध गैस रिफिलिंग और कालाबाजारी के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ा गया है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य शहर में घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी गैस सिलेंडरों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना और आम जनता को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है। विशेष प्रवर्तन दलों का गठन— जिला कलेक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के सीधे निर्देशन में जिला रसद अधिकारी प्रियव्रत सिंह चारण ने इस मुहिम को अंजाम देने के लिए 3 विशेष प्रवर्तन दलों का गठन किया। इन दलों में अनुभवी प्रवर्तन अधिकारियों और निरीक्षकों को शामिल किया गया, जिन्होंने शहर के विभिन्न संदिग्ध इलाकों में एक साथ दबिश देकर अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाया। भारी मात्रा में सामग्री जब्त— इस सघन निरीक्षण अभियान के दौरान विभाग को बड़ी सफलता हाथ लगी है। प्रवर्तन दलों ने विभिन्न स्थानों से कुल 118 घरेलू एवं व्यावसायिक गैस सिलेंडर जब्त किए हैं। इसके अतिरिक्त, अवैध रिफिलिंग में प्रयुक्त होने वाले 03 इलेक्ट्रॉनिक कांटे, 02 अन्य उपकरण, 03 रिफिलिंग मोटर, 01 रेगुलेटर और 01 पिकअप वाहन भी कब्जे में लिया गया है। यह सामग्री रिफिलिंग और कालाबाजारी के संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करती है। होगी सख्त कानूनी कार्रवाई— प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, अवैध गैस रिफिलिंग न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि यह रिहायशी इलाकों के लिए एक गंभीर सुरक्षा खतरा भी है। पकड़े गए व्यक्तियों और अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाए गए लोगों के विरुद्ध संबंधित पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज करवाने की प्रक्रिया जारी है। जिला रसद अधिकारी श्री चारण ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत यह अभियान भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगा। किसी भी स्तर पर गैस सिलेंडरों की जमाखोरी या कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से अवैध कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है।

C M NEWS: मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 10 प्रतिशत वृद्धि की कि घोषणा 

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राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को प्रदेश की लाखों महिला शक्ति को बड़ी राहत और सम्मान देते हुए महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में श्री शर्मा ने राज्य की 1 लाख 22 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के बैंक खातों में सीधे डीबीटी के माध्यम से 1-1 हजार रुपये हस्तांतरित किए। यह राशि उन्हें दो नई यूनिफॉर्म खरीदने के लिए प्रदान की गई है। मानदेय में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी— मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर मानदेय कर्मियों के लिए बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और मिड-डे मील कुक कम हेल्पर सहित सभी मानदेय कर्मियों के वेतन में 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। वेतन की यह बढ़ी हुई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता राष्ट्र निर्माण की नींव हैं, जो हमारे नौनिहालों के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। योजनाओं का लाभ और भविष्य के संकल्प— कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’, ‘लाडो प्रोत्साहन योजना’ और ‘कालीबाई भील योजना’ के लाभार्थियों को भी चेक सौंपे। सरकार के विजन को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि: अमृत आहार योजना: आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 6 वर्ष के बच्चों को अब सप्ताह में 5 दिन गरम दूध दिया जा रहा है। डिजिटलीकरण: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और महिला पर्यवेक्षकों को स्मार्ट फोन वितरित किए जा चुके हैं। स्वास्थ्य देखभाल: आगामी समय में कार्यकर्ताओं के लिए निःशुल्क आंखों की जांच और चश्मे की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार आंगनबाड़ियों के सुदृढ़ीकरण और मरम्मत कार्यों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिला सशक्तिकरण और बच्चों का पोषण सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है।

Rajasthan News: घरेलू गैस पाइपलाइन कनेक्शनों में आएगी तेजी, 3 महीनों में 5 लाख घरों तक पहुंचेगी पीएनजी

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राजस्थान सरकार प्रदेश में स्वच्छ ईंधन की पहुंच बढ़ाने के लिए मिशन मोड पर काम कर रही है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (माइंस एवं पेट्रोलियम) अपर्णा अरोरा ने राज्य की सभी 13 सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) संस्थाओं को घरेलू पाइपलाइन गैस कनेक्शन (PNG) के काम में अभूतपूर्व तेजी लाने के कड़े निर्देश दिए हैं।

3 महीने का लक्ष्य: 1.25 लाख से 5 लाख तक का सफर—

श्रीमती अरोरा ने हाल ही में आयोजित एक समीक्षा बैठक में लक्ष्य निर्धारित किया कि वर्तमान में जारी 1 लाख 25 हजार घरेलू कनेक्शनों की संख्या को आगामी तीन माह के भीतर बढ़ाकर 5 लाख तक पहुंचाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आमजन को सस्ती और सुरक्षित गैस उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, इसलिए कार्यक्षमता में तत्काल विस्तार की आवश्यकता है। प्रतिदिन कनेक्शन की क्षमता में 4 गुना बढ़ोतरी— वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, सीजीडी संस्थाएं प्रतिदिन औसतन 50 कनेक्शन जारी कर रही हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने इस गति पर असंतोष जताते हुए इसे 3 से 4 गुना बढ़ाने पर जोर दिया है। अब संस्थाओं को प्रतिदिन 200 कनेक्शन जारी करने का लक्ष्य दिया गया है, ताकि निर्धारित समय सीमा में 5 लाख का आंकड़ा छुआ जा सके। औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों पर भी फोकस— बैठक में केवल घरेलू ही नहीं, बल्कि औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी डोमेस्टिक पाइप्ड नेचुरल गैस (DPNG) सेवाओं से जोड़ने पर चर्चा हुई। श्रीमती अरोरा ने संस्थाओं को एक ठोस रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए हैं ताकि प्रदूषण मुक्त ईंधन का लाभ प्रदेश के उद्योगों और होटलों जैसे व्यावसायिक केंद्रों को भी मिल सके। इस कदम से राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में रसोई गैस की किल्लत कम होगी और सिलेंडर रिफिल कराने के झंझट से मुक्ति मिलेगी। सरकार की इस सख्ती और स्पष्ट रणनीति से प्रदेश के बुनियादी ढांचे और ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

C M NEWS: अब दौसा और करौली में भी दिन में मिलेगी खेती के लिए बिजली —मुख्यमंत्री

राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेश के अन्नदाताओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए घोषणा की कि अब प्रदेश के दौसा और करौली जिलों के कृषि उपभोक्ताओं को भी खेती के लिए दिन के दो ब्लॉक में बिजली सुलभ होगी।

22 जिलों के बाद अब दो और जिले शामिल—

मुख्यमंत्री के इस निर्णय के साथ ही अब प्रदेश के 24 जिलों के किसान दिन में बिजली की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इससे पहले राज्य के 22 जिलों में यह व्यवस्था लागू थी। जयपुर विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत आने वाले दौसा और करौली जिलों को इस सूची में जोड़ना राज्य सरकार के उस महत्वाकांक्षी संकल्प का हिस्सा है, जिसके तहत प्रदेश के सभी जिलों में किसानों को सिंचाई के लिए दिन में बिजली देने का लक्ष्य रखा गया है। 2027 तक पूरे प्रदेश में लागू होगा मिशन— उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2024-25 के परिवर्तित बजट में प्रदेश के सभी जिलों में चरणबद्ध रूप से वर्ष 2027 तक दिन में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार का मानना है कि रात में सिंचाई करने से किसानों को कड़ाके की ठंड और जंगली जानवरों के खतरे का सामना करना पड़ता है, जिससे दिन की बिजली उन्हें बड़ी राहत देगी। वर्तमान स्थिति पर एक नजर— वर्तमान में जयपुर डिस्कॉम के 7 जिलों (धौलपुर, बूंदी, कोटा, झालावाड़, जयपुर, डीग और भरतपुर) में यह सुविधा दी जा रही है। वहीं, अजमेर डिस्कॉम के 12 जिलों और जोधपुर डिस्कॉम के 3 जिलों (जालौर, सिरोही और पाली) के किसान भी दिन के दो ब्लॉक में बिजली प्राप्त कर रहे हैं। अब दौसा और करौली के जुड़ने से कृषि उत्पादकता में सुधार और किसानों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है।