Rajasthan News: विभाग में भ्रष्टाचार कतई बरदाश्त नहीं किया जाएगा – शासन सचिव  पशुपालन

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शासन सचिव पशुपालन, मत्स्य, डेयरी एवं गोपालन डॉ. समित शर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को शासन सचिवालय में विभाग की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में पशुपालन निदेशक तथा आरएलडीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुरेश मीना, पशुपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. प्रवीण सेन, डॉ. विकास शर्मा, डॉ. ओमप्रकाश बुनकर, डॉ. लक्ष्मण राव तथा डॉ. हेमंत पंत सहित विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे। संभागों से अतिरिक्त निदेशक, जिलों से संयुक्त निदेशक सहित अन्य पशु चिकित्साधिकारी बैठक में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति, बजट उपयोग, लंबित प्रकरणों के निस्तारण तथा फील्ड स्तर पर सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक को संबोधित करते हुए शासन सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व और पशुपालन मंत्री श्री जोराराम कुमावत के मार्गदर्शन में सरकार पशुपालकों और पशुओं के कल्याण के लिए सतत क्रियाशील है। डॉ. शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र पशुपालकों तक समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि विभाग की प्राथमिकता पशुपालकों की आय में वृद्धि, पशुधन स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण तथा नवाचार आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
बैठक में मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना, मोबाइल वेटरनरी यूनिट, सेक्स सॉर्टेड सीमन तथा अन्य प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए शासन सचिव ने प्रगति की गति बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा फील्ड विजिट के माध्यम से वास्तविक स्थिति का आकलन सुनिश्चित किया जाए।
शासन सचिव ने राज्य सरकार की बजट घोषणा के अंतर्गत सेक्स सॉर्टेड सीमन की प्रगति की जिलेवार समीक्षा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना तथा सेक्स सॉर्टेड समीन योजना दोनों बजट घोषणा के कार्य हैं और मुख्यमंत्री विषेष रूप से इन पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कुछ जिलों की अत्यंत धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए योजना के प्रभावी पर्यवेक्षण पर बल दिया जिससे सेक्स सॉटेड सीमन का शत प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित हो। उन्होंने कार्य में गति लाने के लिए संस्थावार और तकनीकी कार्मिकवार लक्ष्य निर्धारित कर नियमित समीक्षा करने पर जोर देते हुए कमजोर प्रगति वाली संस्थाओं और कार्मिकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश प्रदान किए। उन्होंने अच्छा काम करने वाले जिलों की प्रशंसा भी की।
उन्होंने विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और विभाग के सुदृढ़ीकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा करते हुए कहा कि सरकार मोबाइल वेटरनरी यूनिट के प्रभावी और सुचारू संचालन के प्रति बहुत गंभीर है। मोबाइल वेटरनरी यूनिट के संचालन से पशुपालकों और पशुओं को खासकर सुदूर क्षेत्रों में स्थित पशुपालकों को बहुत ही लाभ हुआ है। अधिकारियों ने जानकारी दी कि पिछले एक वर्ष में 7 लाख 71 हजार 892 पशुपालकों ने 30 लाख 96 हजार से अधिक पशुओं का इलाज मोबाइल वेटरनरी यूनिट से कराया है इसके अलावा लगभग 95 हजार पशुपालकों ने चैटबॉट के माध्यम से अपने पशुओं की बीमारी का उपचार लिया।
उन्होंने कहा कि एफएमडी टीकाकरण में विभाग का काम शानदार रहा है। इतने बड़े पैमाने पर टीकाकरण पहले कभी नहीं हुआ। चार जिलों ने अब तक एफएमडी टीकाकरण का शतप्रतिशत इंद्राज भी पोर्टल पर कर दिया है। शासन सचिव ने इसके लिए अधिकारियों की सराहना की और उन्हें बधाई देते हुए शेष जिलों को भी 23 फरवरी तक शतप्रतिशत इंद्राज पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना की प्रगति के बारे में बताते हुए अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्ष 2025-26 में अब तक  4 लाख 63 हजार पशुपालकों के 10 लाख 32 हजार पशुओं का पंजीकरण कराया जा चुका है जिनमें से 2 लाख 76 हजार पशुपालकों के 5 लाख 53 हजार पशुओं के स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी हो चुके हैं साथ ही 2 लाख 39 हजार पशुपालकों के 5 लाख 21 हजार पशुओं की बीमा पॉलिसी जारी हो चुकी है। शासन सचिव ने इस प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि सख्ती और समन्वय के बीच तालमेल बिठाते हुए हमें 31 मार्च तक 21 लाख पशुओं के बीमा का लक्ष्य पूरा करना है।
विभाग के निदेशक डॉ सुरेश मीना ने अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिलाधिकारियों से जिले में उपलब्ध सभी मानव संसाधनों का समुचित उपयोग करने का आग्रह करते हुए निर्धारित लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए पूरी निष्ठा, ईमानदारी और लगन से प्रयास करने पर जोर दिया।
शासन सचिव ने कहा कि विभाग में भ्रष्टाचार कतई बरदाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने हाल ही एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा की गई ट्रैप कार्यवाही में पेंडिंग बिल पास करने के लिए रिश्वत की राशि लेने वाले नगर निगम में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत दो पशु चिकित्सकों को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अगर कहीं से भी इस तरह की कोई शिकायत आती है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से भी इसकी मॉनिटरिंग करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कई जगह से सरकारी दवाओं के दुरूपयोग की शिकायतें मिल रही हैं उसकी जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएं।

Rajasthan News: 15 साल पुराने ‘खटारा’ व्यावसायिक वाहनों पर गिरेगी गाज

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राजस्थान की राजधानी जयपुर की आबो-हवा को शुद्ध बनाने और बढ़ते प्रदूषण ग्राफ को थामने के लिए परिवहन विभाग ने अब ‘आर-पार’ की जंग छेड़ दी है। जयपुर के ‘नॉन अटेनमेंट सिटी’ (वे शहर जहां प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानकों से लगातार अधिक रहता है) की श्रेणी में होने के कारण विभाग अब सख्त रुख अख्तियार कर चुका है। आरटीओ प्रथम राजेंद्र सिंह शेखावत के निर्देशानुसार, गुरुवार से शहर की सड़कों पर 15 साल से अधिक पुराने कॉमर्शियल वाहनों के खिलाफ 45 दिवसीय विशेष निर्णायक अभियान का आगाज किया जा रहा है। खटारा वाहनों का कटेगा पत्ता, एनजीटी नियमों की होगी पालना— इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के उन नियमों को कड़ाई से लागू करना है, जो पुराने और जहरीला धुआं उगलने वाले वाहनों को प्रतिबंधित करते हैं। परिवहन विभाग की रडार पर विशेष रूप से वे व्यावसायिक वाहन हैं, जो अपनी 15 वर्ष की निर्धारित समय सीमा पूरी कर चुके हैं, लेकिन फिर भी सड़कों पर दौड़कर शहर की हवा में जहर घोल रहे हैं। आरटीओ राजेंद्र सिंह शेखावत ने स्पष्ट किया है कि ऐसे वाहनों को न केवल जब्त किया जाएगा, बल्कि उनके पंजीकरण निरस्त करने की प्रक्रिया भी अमल में लाई जाएगी। शहर के प्रमुख प्रवेश द्वारों पर होगी सख्त नाकेबंदी— 45 दिनों तक चलने वाले इस सघन अभियान के लिए परिवहन विभाग ने विशेष फ्लाइंग स्क्वाड और टीमों का गठन किया है। ये टीमें शहर के मुख्य चौराहों, औद्योगिक क्षेत्रों और प्रवेश द्वारों पर तैनात रहेंगी। अभियान के दौरान केवल फिटनेस और धुआं जांच ही नहीं, बल्कि वाहन की आयु की भी गहनता से जांच की जाएगी। विभाग का मानना है कि पुराने डीजल और पेट्रोल व्यावसायिक वाहन पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर को बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। पर्यावरण संरक्षण की ओर बढ़ते कदम— जयपुर में बढ़ते शहरीकरण और वाहनों के दबाव के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अक्सर चिंताजनक स्तर पर पहुंच जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक पुराना व्यावसायिक वाहन 10 नए वाहनों के बराबर प्रदूषण फैलाता है। परिवहन विभाग की इस कार्रवाई से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि फेफड़ों संबंधी बीमारियों से जूझ रहे शहरवासियों को भी स्वच्छ हवा में सांस लेने का मौका मिलेगा। वाहन स्वामियों को चेतावनी— विभाग ने वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स को सख्त हिदायत दी है कि वे स्वयं ही अपने 15 साल पुराने वाहनों को सड़कों से हटा लें। यदि अभियान के दौरान ऐसे वाहन पकड़े जाते हैं, तो उन पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ ‘स्क्रैपिंग पॉलिसी’ के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह अभियान जयपुर को ‘स्मार्ट’ के साथ-साथ ‘साफ’ शहर बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है। अब देखना यह है कि 45 दिनों के इस ‘क्लीन एयर मिशन’ से जयपुर की फिजाओं में कितना बदलाव आता है।

Jaipur News: जेडीए किया कांड :सीकर रोड ट्रांसपोर्ट नगर के 18 भूखण्डों पर ‘डबल’ कब्जा, विधानसभा में गूंजा मामला 

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जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) की सीकर रोड स्थित बहुप्रतीक्षित ट्रांसपोर्ट नगर योजना गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं के चलते विवादों के घेरे में आ गई है। जेडीए की एक बड़ी मानवीय भूल के कारण योजना के 18 व्यावसायिक भूखण्डों को दो अलग-अलग व्यक्तियों या फर्मों को आवंटित कर दिया गया। इस ‘डबल अलॉटमेंट’ के खुलासे के बाद अब जेडीए प्रशासन बैकफुट पर है और अपनी गलती सुधारने की कवायद में जुटा है। विधानसभा में सरकार ने स्वीकारी गलती— यह मामला राजस्थान विधानसभा में उस समय चर्चा का विषय बना जब एक प्रश्न के लिखित जवाब में सरकार ने सार्वजनिक रूप से इस गड़बड़ी को स्वीकार किया। जवाब में बताया गया कि जेडीए द्वारा इन भूखण्डों के आवंटन में भारी चूक हुई है। अब विभाग ‘प्रथम आवंटी’ के अधिकार को सुरक्षित रखते हुए दूसरे आवंटी के आवंटन को निरस्त करने की कानूनी प्रक्रिया पर काम कर रहा है। आंकड़ों का खेल: हजारों आवंटन और लटके हुए पट्टे— सरकार द्वारा विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के लिए दो अलग-अलग चरणों में लॉटरी निकाली गई थी: अप्रैल 2007: प्रथम लॉटरी के माध्यम से 1146 व्यावसायिक भूखण्ड आवंटित किए गए। जनवरी 2018: दूसरी लॉटरी में 968 भूखण्डों का आवंटन हुआ। कुल आवंटियों में से अब तक 1601 लोगों को लीज डीड (पट्टा) जारी की जा चुकी है, जिन्होंने अपनी पूरी राशि समय पर जमा करा दी थी। हालांकि, 513 मामले अभी भी अधर में लटके हुए हैं। इन मामलों में पट्टे जारी न होने के मुख्य कारणों में भुगतान में देरी, अपूर्ण दस्तावेज या प्रशासनिक अड़चनें शामिल हैं। बैकफुट पर जेडीए, आवंटन निरस्तीकरण की तैयारी— एक ही भूखण्ड के दो दावेदार होने से न केवल कानूनी पेंच फंस गया है, बल्कि आवंटियों के बीच भी भारी रोष है। जेडीए के अधिकारियों का कहना है कि वे इन 18 विवादित मामलों का प्राथमिकता से निपटारा कर रहे हैं। नियमतः, जिस व्यक्ति को भूखण्ड का आवंटन पहले (कालक्रम के अनुसार) हुआ था, उसी का हक बरकरार रहेगा। दूसरे पक्ष को या तो जमा राशि रिफंड की जाएगी या वैकल्पिक समाधान तलाशा जाएगा। ट्रांसपोर्टर्स की नाराजगी और सुविधाएं— गौरतलब है कि सीकर रोड स्थित यह ‘न्यू ट्रांसपोर्ट नगर’ लगभग 494 एकड़ में फैला है और इसमें कुल 3245 प्लॉट सृजित किए गए हैं। व्यापारियों का आरोप है कि जेडीए ने सुविधाएं विकसित किए बिना ही आवंटन निरस्त करने के नोटिस जारी करना शुरू कर दिया था, जिस पर पहले भी काफी हंगामा हो चुका है। इस ताजा विवाद ने जेडीए की कार्यप्रणाली और डेटा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आवंटियों का कहना है कि प्राधिकरण की इस लापरवाही की सजा उन्हें मानसिक तनाव और कानूनी लड़ाई के रूप में भुगतनी पड़ रही है।

Rajasthan News: इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में दर्शकों को आकर्षित कर रहा ‘राजस्थान AI पवेलियन’

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भारत सरकार द्वारा 20 फरवरी तक नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में इंडिया आर्टफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इम्पैक्ट समिट 2026 आयोजित किया जा रहा है। समिट में राजस्थान सरकार के सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा ‘राजस्थान AI पवेलियन’ तैयार किया गया है, जो दर्शकों को काफी पसंद आ रहा है। ‘पीपल, प्लेनेट और प्रोग्रेस’ थीम के इर्द—गिर्द रचे गए इस समिट में वैश्विक स्तर पर एआई को विश्वसनीय, प्रभावी एवं समावेशी बनाए जाने पर मंथन किया जा रहा है।
सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग के आयुक्त  हिमांशु गुप्ता ने मंगलवार को ‘राजस्थान AI पवेलियन’ का दौरा किया। उन्होंने स्टार्टअप्स से जुड़े युवाओं का उत्साहवर्धन किया और विजिटर्स से संवाद किया। उन्होंने बताया कि ‘राजस्थान AI पवेलियन’ में लगभग 20 स्टॉल लगाई गई हैं। इनमें विभिन्न विभागीय और सरकारी पहलों के अतिरिक्त राज्य सरकार के ‘आईस्टार्ट’ पंजीकृत एआई स्टार्टअप्स को शामिल किया गया है। ये स्टार्टअप स्टॉल रोटेशन के आधार पर संचालित हो रहे हैं, जिससे राज्य के अधिक से अधिक नवाचार उद्यमों को भागीदारी का अवसर मिल सके।
पवेलियन में ‘राजकिसान’ के माध्यम से एआई आधारित फसल स्वास्थ्य प्रबंधन, राजस्थान जन आधार प्लेटफॉर्म द्वारा डेटा-संचालित लक्षित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, तथा ‘स्मार्ट’ (सर्विस मैनेजमेंट विद आर्टफिशियल इंटेलिजेंस एण्ड रियल टाइम सिस्टम) प्रणाली के जरिए 360-डिग्री नागरिक प्रोफाइलिंग और रीयल-टाइम योजना मॉनिटरिंग को प्रदर्शित किया गया है। इसके अतिरिक्त राजनिवेश के साथ ‘राज GPT’ आधारित निवेश सुविधा प्रणाली को भी प्रस्तुत किया गया है, जो निवेशकों को प्रोत्साहन, भूमि प्रक्रिया और अनुमोदन संबंधी मार्गदर्शन प्रदान करती है। साथ ही यहां प्रदेश की तीन प्रमुख नीतियां भी प्रदर्शित की जा रही हैं— राजस्थान एआइ/एमल पॉलिसी 2026, राजस्थान डेटा सेंटर पॉलिसी एवं राजस्थान एवीजीसी—एक्सआर पॉलिसी।
‘राजस्थान AI पवेलियन’ व्यापक मंच पर राज्य के एआई आधारित दृष्टिकोण और भविष्य की रूपरेखा को आमजन एवं वैश्विक निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत कर रहा है, जिससे राज्य सरकार के एआई से जुड़े तकनीकी प्रयासों को गति मिलेगी।

 Housing Board meeting: क्या ‘महा-स्कैम’ के दाग धो पाएंगी रश्मि शर्मा की कागजी हिदायतें?

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राजस्थान आवासन मण्डल में मंगलवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक को अगर ‘औपचारिकता का शिखर’ कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट मण्डल की जमीनों पर हुए कब्जों को ऊपर से नीचे तक की मिलीभगत वाला ‘एब्सोल्यूट रैंक स्कैम’ करार दे चुका है, वहीं आयुक्त डॉ. रश्मि शर्मा अधिकारियों को ‘स्वच्छता’ और ‘फाइल मेंटेनेंस’ का पाठ पढ़ा रही हैं। धरातल पर कब्जा, कागजों में योजना— आयुक्त ने जयपुर, झालावाड़, कोटपूतली और जोधपुर में नई योजनाओं को ‘अविलंब’ लाने का फरमान सुनाया है। लेकिन हकीकत यह है कि मण्डल की 86 अवैध कॉलोनियों पर राजस्थान हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद भी सिस्टम टस से मस नहीं हुआ है। जब मण्डल अपनी मौजूदा जमीनों को भू-माफियाओं से नहीं बचा पा रहा, तो नई योजनाओं में नागरिकों को ‘सुरक्षित परिवेश’ देने का वादा किसी जोक से कम नहीं लगता। डिजिटलाइजेशन या सिर्फ ध्यान भटकाने की कोशिश— बैठक में ‘डिजिटल सेवाओं’ और ‘ऑनलाइन बुकिंग’ पर बहुत जोर दिया गया। विडंबना देखिए, जिस विभाग के खिलाफ घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार की शिकायतें आम हैं, वह अब तकनीक के पीछे छिपने की कोशिश कर रहा है। क्या ऑनलाइन बुकिंग से उन मकानों की दीवारें मजबूत हो जाएंगी जिनमें साल भर के भीतर ही सीलन और प्लास्टर गिरने की खबरें आती रहती हैं? अधिकारियों की फौज और रस्म-अदायगी— बैठक में सचिव गोपाल सिंह और मुख्य अभियंता टीएस मीणा जैसे अधिकारियों की मौजूदगी केवल ‘यस मैम’ तक सीमित रही। जब तक मण्डल के भीतर बैठे उन ‘प्रभावशाली लोगों’ पर कार्रवाई नहीं होती जो अवैध कब्जों को संरक्षण देते हैं, तब तक ऐसी समीक्षा बैठकें केवल सरकारी बजट और चाय-नाश्ते की बर्बादी हैं। जनता को घर चाहिए, प्रवचन नहीं— प्रदेश का नागरिक अब इन लुभावने वादों और ‘आधुनिक मानकों’ वाली खोखली शब्दावली से ऊब चुका है। राजस्थान आवासन मण्डल को ‘सफाई’ दफ्तर के कोनों में नहीं, बल्कि अपनी कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार के दलदल में करने की जरूरत है। वरना, ये नवीन योजनाएं भी पुरानी फाइलों की तरह धूल ही फांकेंगी।

C S NEWS: वृहद स्तर पर मनाया जाए राजस्थान दिवस -मुख्य सचिव

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मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने कहा है कि इस बार राजस्थान दिवस (19 मार्च 2026) को पर्यटन और कला, साहित्य व संस्कृति और पुरातत्व विभाग के संयुक्त तत्वाधान में भव्य रूप से आयोजित किया जाए। जिसमें राज्य की विभिन्न कलाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले कलाकारों को मंच उपलब्ध करवाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि कला, साहित्य एवं संस्कृति विभाग द्वारा जयपुर में कला एवं संस्कृति आधारित एक दिवसीय चिंतन शिविर का बड़े स्तर पर आयोजन किया जावे। मुख्य सचिव सोमवार को सचिवालय में पर्यटन विभाग और कला, साहित्य एवं संस्कृति और पुरातत्व विभाग की समीक्षा कर रहे थे।

मुख्य सचिव ने राईजिंग राजस्थान में पर्यटन विभाग के प्रदर्शन की जानकारी ली और राजस्थान पर्यटन को आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में राजस्थान पर्यटन विभाग ने बेहतरीन उपलब्धियां हासिल की हैं। सोशल मीडिया पर राजस्थान पर्यटन की विजिबिलिटी अच्छी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान पर्यटन के साथ यहां की कला, साहित्य एवं संस्कृति अत्यंत महत्वपूर्ण है जो सम्पूर्ण विश्व को अपनी ओर आकर्षित करती है और  राज्य पर्यटन विभाग के अधिकारियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि राजस्थान पर्यटन विभाग के लिए कार्य किया जाना गर्व की बात है। आप सब इस पर गर्व करने के साथ ही और अधिक ऊर्जा से कार्य करें।

मुख्य सचिव ने राज्य के कला, साहित्य, संस्कृति और पुरातत्व विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि राजस्थान की संस्कृति बहुत समृद्ध है। इस राज्य के सांस्कृतिक वैभव और समृद्ध साहित्य और गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राज्य की भाषा, साहित्य, कला से सम्बंधित प्रत्येक अकादमी वर्ष में कम से कम एक बड़ा आयोजन करें। उन्होंने कहा कि हमारी समृद्ध कला संस्कृति और साहित्य के संरक्षण और बढ़ावा  दिया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि कला साहित्य एवं संस्कृति आधारित एक दिवसीय चिंतन शिविर जयपुर में बड़े स्तर पर आयोजित किया जावे, जिसमें वे उपस्थित रहेंगे।

Jaipur News: त्योहारों पर कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द से नहीं होगा कोई समझौता -जयपुर कलक्टर

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आगामी त्योहारों के मद्देनजर जिले में कानून व्यवस्था सुदृढ़ रखने और सांप्रदायिक सौहार्द व आपसी सद्भाव बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक स्तर पर समन्वय और संवाद कायम रखते हुए किसी भी प्रकार से कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले तत्वों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सोमवार को जिला कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला शांति समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला कलक्टर ने विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने होली, रमजान, चेटीचंड, नवरात्रि, रामनवमी व ईद जैसे आगामी पर्वों के दौरान शांति, सौहार्द और भाईचारे का वातावरण बनाए रखने की अपील की।
कलक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि क्षेत्र के मौजीज व्यक्तियों और धर्मगुरुओं के साथ निरंतर संवाद स्थापित रखा जाए। सभी पुलिस थानों में नियमित रूप से सीएलजी व शांति समिति की बैठकें आयोजित कर संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की जाए। संदिग्ध व्यक्तियों, स्थानों और भ्रामक व साम्प्रदायिक तनाव भड़काने वाले तत्वों पर पैनी नजर रखते हुए उनके विरुद्ध विधि अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
उन्होंने विशेष रूप से सोशल मीडिया की सतत् मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिये कि भ्रामक, अफवाह फैलाने वाले अथवा उत्तेजक पोस्ट करने वालों के विरुद्ध तत्काल प्रभाव से सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए। धार्मिक और  सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी अपील की गई कि वे आमजन को अफवाहों से सावधान रहने व सत्यापित जानकारी पर ही विश्वास करने के लिए जागरूक करें।
जिला कलक्टर ने पुलिस अधिकारियों को नाकाबंदी एवं गश्त व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य बाजारों, पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन तथा अन्य भीड़भाड़ एवं संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त पुलिस जाप्ता तैनात करने तथा संभावित तनावपूर्ण क्षेत्रों को चिन्हित कर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
साथ ही, पुलिस विभाग, नगर निगम, विद्युत विभाग, जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग, नागरिक सुरक्षा विभाग तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को त्योहारों के दौरान अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन अतिरिक्त सतर्कता एवं समन्वय के साथ करने के निर्देश दिए गए, ताकि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

Jaipur News: एसएमएस अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में लगी आग: सात वर्षीय बच्चा झुलसा

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राजस्थान के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल से लापरवाही और हादसे की एक डराने वाली खबर सामने आई है। अस्पताल के धनवंतरि ब्लॉक स्थित ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी के दौरान अचानक एक मशीन में शॉर्ट सर्किट हो गया, जिससे ऑपरेशन टेबल पर लेटा सात वर्षीय मासूम बच्चा झुलस गया। इस घटना के बाद ओटी में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में सर्जरी रोककर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला गया। ऑपरेशन के दौरान हुआ हादसा— जानकारी के अनुसार, यह घटना शनिवार दोपहर करीब तीन बजे की है। धनवंतरि ब्लॉक की तीसरी मंजिल पर स्थित ओटी में एक सात वर्षीय बच्चे के ट्यूमर को हटाने के लिए सर्जरी की जा रही थी। ऑपरेशन के दौरान अचानक वहां उपयोग में ली जा रही एक मेडिकल मशीन में शॉर्ट सर्किट के कारण चिंगारी उठी, जिसकी चपेट में आने से बच्चे का बायां पैर झुलस गया। अचानक हुए इस हादसे से डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया— मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल के कार्यवाहक अधीक्षक डॉ. राशिम कटारिया ने बताया कि घटना के तुरंत बाद बच्चे को प्राथमिक उपचार दिया गया। उन्होंने राहत की बात यह बताई कि बच्चा गंभीर रूप से नहीं झुलसा है और उसकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर है। डॉ. कटारिया के अनुसार, शॉर्ट सर्किट मशीन में तकनीकी खराबी के कारण हुआ था, जिसकी गहन जांच की जा रही है। सुरक्षा पर उठे सवाल— प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र के ऑपरेशन थिएटर में इस तरह की तकनीकी खराबी ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और उपकरणों के रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, डॉक्टरों की तत्परता से एक बड़ा हादसा होने से टल गया। अस्पताल प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सभी उपकरणों की जांच के निर्देश दिए गए हैं।

Rajasthan Assembly News: राजसथान विधानसभा की निजता भंग— लोकतंत्र के मंदिर में ‘रील-बाज़ी’

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राजस्थान विधानसभा आज ‘लोकतंत्र का मंदिर’ कम और सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं का ‘शूटिंग स्टूडियो’ ज़्यादा लगने लगी है। जिस जगह की सुरक्षा के नाम पर परिंदा भी पर नहीं मार सकता, वहाँ एक गैर-संवैधानिक व्यक्ति (शंकर गोरा) अपने हुजूम के साथ ऐसे टहलता है जैसे अपने घर के ड्राइंग रूम में घूम रहा हो। यह न केवल सुरक्षा में सेंध है, बल्कि उन सभी कायदे-कानूनों के मुँह पर तमाचा है जिनका हवाला देकर आम जनता को गेट के बाहर रोक दिया जाता है। सुरक्षा का मखौल या वीआईपी सर्कस— विधानसभा की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी क्या केवल आम आदमी का गला पकड़ने के लिए हैं? जब एक रसूखदार नेता फोन लहराते हुए स्पीकर के ऑफिस तक घुस गया, तब सुरक्षा प्रोटोकॉल क्या सो रहा था? यह वीडियो चीख-चीख कर कह रहा है कि यहाँ ‘कानून का राज’ नहीं, बल्कि ‘पहुँच का राज’ चलता है। अगर कल को कोई इसी तरह बिना रोक-टोक संवेदनशील दस्तावेज तक पहुँच जाए, तो ज़िम्मेदारी किसकी होगी?
संविधान की किताब पर रसूख का जूता— अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) को इन नेताओं ने अपनी जागीर समझ लिया है। जब एक विधायक को भी सदन के भीतर फोन ले जाने पर टोक दिया जाता है, तो इस ‘रील-मंत्री’ को इतनी छूट कैसे मिली? मुख्यमंत्री जी, क्या आपका ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ केवल कागज़ों पर है? या फिर नियम सिर्फ उनके लिए हैं जिनके पास सत्ता का झंडा नहीं है? यह समानता नहीं, सरेआम संवैधानिक डकैती है। स्पीकर की कुर्सी की गिरती साख— वासुदेव देवनानी जी, आपकी नाक के नीचे विधानसभा अध्यक्ष के चैंबर का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर ‘भौकाल’ टाइट करने के लिए हो रहा है। यह आपकी नैतिक हार है। यदि आप अपने कार्यालय की गरिमा नहीं बचा सकते, तो पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था की उम्मीद करना बेमानी है। यह वीडियो एक चेतावनी है कि राजनीति ने संवैधानिक मर्यादाओं को निगल लिया है। जनता के साथ गद्दारी— आम आदमी जिस विधानसभा को अपनी आवाज़ का केंद्र मानता है, उसे आज कुछ छुटभैये नेताओं ने अपनी निजी संपत्ति बना लिया है। यह रील बनाना लोकतंत्र का सम्मान नहीं, बल्कि जनता के टैक्स से बने संस्थानों का अपमान है। यह ‘सत्ता का नशा’ है जो मर्यादा और कानून के बीच का फर्क भूल चुका है। यह वीडियो वायरल होना कोई उपलब्धि नहीं, बल्कि राजस्थान के प्रशासनिक और संवैधानिक तंत्र की बर्बादी का सबूत है। अगर आज इन ‘रील-बाजों’ पर एफआईआर नहीं होती, तो समझ लीजिए कि राजस्थान विधानसभा अब जनता की नहीं, बल्कि कुछ खास चेहरों की जागीर बन चुकी है।

C M NEWS: मुख्यमंत्री ने दी 46 हजार करोड़ की 10 बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी

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राजस्थान को औद्योगिक हब बनाने की दिशा में भजनलाल सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। शनिवार को मुख्यमंत्री निवास पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बोर्ड ऑफ इन्वेस्टमेंट की छठी बैठक में प्रदेश के विकास को नई रफ्तार देने वाले महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री ने राजस्थान में 46,000 करोड़ रुपये के निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों की 10 अल्ट्रा मेगा परियोजनाओं को कस्टमाइज्ड पैकेज देने की मंजूरी प्रदान की। इस निवेश से न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 12,000 से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इन सेक्टर्स को मिलेगा बढ़ावा— बैठक में स्वीकृत प्रस्तावों में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सोलर मॉड्यूल और सेल मैन्युफैक्चरिंग और नवीकरणीय ऊर्जा पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अतिरिक्त सीमेंट, माइंस, मिनरल्स, ऑटोमोबाइल, केमिकल, टैक्सटाइल और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबंधित परियोजनाओं को राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत विशेष रियायतें दी गई हैं। नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश— मुख्यमंत्री ने निवेश के धरातल पर क्रियान्वयन को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि जिन कंपनियों को कस्टमाइज्ड पैकेज और रिप्स परिलाभ दिए गए हैं, उनके निवेश की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल एमओयू करना नहीं, बल्कि परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से शुरू करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की राजस्व वृद्धि के साथ-साथ युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक में उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित कैबिनेट के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।