C S NEWS: राजस्थान में “लाइसेंस राज” खत्म करने के लिये मुख्य सचिव ने केन्द्र को लिखा पत्र 

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मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शुक्रवार को केन्द्रीय केबिनेट सचिव  टी. वी. सोमनाथन को पत्र लिखकर राजस्थान में कम्पलायंस रिडक्शन एंड डीरेग्यूलेशन के दूसरे चरण की तैयारियों की जानकारी दी है। पत्र में मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य सरकार ने जिन 28 प्राथमिकता /वैकल्पिक प्राथमिकता क्षेत्रों की पहचान की है, उनमें निवेश प्रोत्साहन ब्यूरो (बीआईपी), उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, राजस्व, एलएसजी, यूडीएच, रीको तथा श्रम, उद्योग, पर्यटन, प्रशासनिक सुधार विभाग, ऊर्जा व खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के बिन्दु शामिल हैं। केन्द्रीय केबिनेट सचिवालय ने कम्पलायंस रिडक्शन एंड डीरेग्यूलेशन के फेज—2 के लिए 23 प्राथमिकता क्षेत्र और 5 वैकल्पिक प्राथमिकता क्षेत्र निर्धारित किए हैं।
मुख्य सचिव ने बताया कि लाइसेंस की जरूरत को कम से कम करना, विभिन्न विभागों के द्वारा जारी लाइसेंस को जहां तक हो सके, एकीकृत कर सिंगल विंडो के माध्यम से उपलब्ध करवाना, निरीक्षण को कम से कम करना, स्व-सत्यापन को बढ़ावा देना, डिजिटाइजेशन, कर-निश्चितता व निवेशकों की पहुँच बढ़ाना और मुकदमेबाजी में कमी पर ध्यान केंद्रित करते हुए व्यवसाय करने में सुगमता को बढ़ावा देना जैसे सुधार दूसरे फेज में शामिल हैं इससे विकास और प्रगति को नया आधार मिलेगा। इन सुधारों पर अध्ययन चल रहा है।
नये प्रस्तावित सुधारों में मुख्य जोर लैंड यूज से जुड़ी प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर दिया गया करना है जिससे औद्योगिक इकाई शुरू करने में आसानी होगी, अपनी भूमि पर मकान, दुकान बनाने के लिए विभिन्न विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, विभिन्न विभागों से विभिन्न स्तर की फायर सेफ्टी, बिल्डिंग निर्माण, बिजली, पेयजल, घरेलू गैस सप्लाई सम्बंधी लाइसेंस नहीं लेना होगा।
प्रस्तावित कदमों में राज्य में औद्योगिक विकास का माहौल बनाने के लिए व अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए बिल्डिंग की ऊंचाई, सेट बैक के नियमों में शिथिलन दिया जाएगा। ‘एवरीथिंग इज परमिटेड अनटिल प्रोहिबिटेड’ सिद्धान्त को मूल बिन्दु बनाने पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत यदि कृषि भूमि का प्रस्तावित उपयोग (गैर कृषि भूमि में) मास्टर प्लान में अनुमत है तो कन्वर्जन जरूरी नहीं रह जाएगा। शहरों के विभिन्न जोन का प्लान तैयार होगा जिसमें न्यूनतम नेगेटिव लिस्ट होगी यानी आवासीय क्षेत्र में वाणिज्यिक उपयोग और वाणिज्यिक क्षेत्र में आवासीय उपयोग की प्रक्रिया आसान होगी। इससे श्रम शक्ति को अपने कार्यस्थल के आसपास ही आवास उपलब्ध होगा, ट्रैफिक और प्रदूषण से निजात भी मिलेगी।

RGHS NEWS: आरजीएचएस में अनियमितताओं पर बड़ी कार्रवाई, सात चिकित्सक निलंबित

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशन में राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) को लगातार सुदृढ़ बनाया जा रहा है। योजना में अनियमितताएं करने वाले अस्पतालों, फार्मेसी स्टोर एवं कार्मिकों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। सरकार ने अनियमितता करने पर 7 चिकित्सकों को निलंबित कर दिया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने बताया कि आरजीएचएस योजना के सुचारू संचालन की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। योजना में आॅडिट के दौरान अनियमितताएं सामने आने पर सीकर जिले में पदस्थापित 7 चिकित्सकों को निलंबित किया गया है। मेडिकल कॉलेज सीकर में कार्यरत अस्थि रोग विभाग के सह आचार्य डॉ. कमल कुमार अग्रवाल, डॉ. सुनील कुमार ढाका, जनरल मेडिसिन विभाग के सह आचार्य डॉ. मुकेश वर्मा, सीएचसी किरवा के डॉ. राकेश कुमार, एसके अस्पताल के डॉ. गजराज सिंह, डॉ. एसएस राठौड़ और डॉ. सुनील शर्मा को निलंबित किया गया है। वहीं योजना में अनियमितता कर अनुचित लाभ लेने पर भरतपुर के भरतपुर नर्सिंग होम व बीकानेर के बोथरा डायग्नोस्टिक एण्ड इमेजिंग सेंटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है। संबंधित जिलों के मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारियों को इस संबंध में पत्र लिखा गया है।
 
लाभार्थियों के कार्ड का दुरूपयोग कर उठाए फर्जी क्लेम—
 राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने बताया कि जांच रिपोर्ट में यह तथ्य गंभीर रूप से उजागर हुआ है कि भरतपुर स्थित कशिश फार्मेसी एवं भरतपुर नर्सिंग होम द्वारा मिलीभगत कर आरजीएचएस में फर्जीवाड़ा कर राजकोष को भारी हानि पहुँचाई है। जांच में पाया गया कि अस्पताल की डॉक्टर संगीता अग्रवाल द्वारा आरजीएचएस में पूर्व में अनुमोदित ना होते हुए भी आरजीएचएस का बोर्ड लगाकर लाभार्थियों को आरजीएचएस से सुविधा देने का प्रलोभन दिया। अपने अस्पताल में आरजीएचएस कार्ड धारकों का इलाज किया एवं टीआईडी जनरेट करने के लिए उनके एसएसओ आईडी पासवर्ड लिए तथा उपचार उपरान्त अपने ही अस्पताल की कशिश फार्मेसी से जांचें एवं दवाइयों को फर्जी तरीके से आरजीएचएस पोर्टल पर एडजेस्ट कर भुगतान प्राप्त किया। दोनों संस्थानों ने मिलीभगत कर लाभार्थियों के नाम पर फर्जी बिल तैयार कर क्लेम स्वीकृत करवाने की कोशिश की, जिससे प्रत्यक्ष रूप से राजकोष को हानि पहुँची है। अस्पताल को आरजीएचएस योजना से पहले ही डी-एम्पेनल किया जा चुका है। अब एफआईआर की कार्रवाई की जा रही है।
बिना जरूरत के की गई जांचें—
मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि डॉ. बोथरा डायग्नोस्टिक एंड इमेजिंग सेंटर, बीकानेर द्वारा प्रस्तुत क्लेमों की जांच में पाया गया कि कई मामलों में मरीजों को आवश्यकता से अधिक जांचें लिखी गईं तथा परीक्षण रिपोर्टों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जांच में यह सामने आया कि कुछ मरीजों के लिए HbA1c, RA Factor, Procalcitonin जैसे परीक्षण दर्शाए गए, जबकि रिकॉर्ड में आवश्यक चिकित्सीय औचित्य स्पष्ट नहीं था। इसके अतिरिक्त कुछ मामलों में T2DM के लिए दर्शाए गए HbA1c टेस्ट की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं पाई गई तथा ओपीडी स्लिप पर भी संबंधित परामर्श का उल्लेख नहीं मिला।
चिकित्सकों के नाम एवं सील फर्जी—
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पीबीएम राजकीय चिकित्सालय, बीकानेर के वरिष्ठ चिकित्सकों से दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। संबंधित चिकित्सकों के बयानों में यह तथ्य सामने आया कि जिन पर्चियों पर उनके नाम एवं सील दर्शाए गए हैं, उनमें से कई पर हस्ताक्षर एवं लेखन उनके द्वारा किया जाना स्वीकार नहीं किया गया। कुछ चिकित्सकों ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अवधि में वे अवकाश पर थे अथवा उस दिन ओपीडी में कार्यरत नहीं थे, फिर भी उनके नाम से पर्चियां एवं जांचें दर्शाई गईं। जांच में यह भी पाया गया कि कुछ पर्चियों पर दर्शाए गए चिकित्सक उस समय पीबीएम अस्पताल में पदस्थापित ही नहीं थे या उनका पंजीयन बाद की तिथि का था।

पीएम सूर्यघर योजना में इस वर्ष इंस्टॉलेशन दोगुना करना डिस्कॉम्स का लक्ष्य, सुगमता से ऋण प्रदान कर बैंक निभाएं सहभागिता -चेयरमैन डिस्कॉम्स

चेयरमैन डिस्कॉम्स सुश्री आरती डोगरा ने पीएम सूर्य घर योजना के अन्तर्गत रूफ टॉप सौर ऊर्जा संयंत्रों के इंस्टॉलेशन में प्रदेश को अग्रणी बनाने के मिशन में बैंकर्स से सहभागिता निभाने का आग्रह किया है। सुश्री डोगरा ने कहा कि इस योजना में राजस्थान देश का 5वां अग्रणी राज्य है। प्रदेश में अब तक 1 लाख 42 हजार से अधिक रूफ टॉप सोलर स्थापित किए जा चुके हैं। फिलहाल प्रतिमाह औसतन लगभग 14 हजार रूफ टॉप सोलर लगाए जा रहे हैं। डिस्कॉम्स का लक्ष्य इस वर्ष इसे बढ़ाकर दोगुना करने का है। सुश्री डोगरा शुक्रवार को विद्युत भवन में विभिन्न बैंक प्रतिनिधियों के साथ पीएम सूर्यघर योजना में रूफ टॉप सोलर लगाने के इच्छुक आवेदकों को सुगमता से ऋण प्रदान करने के संबंध में चर्चा कर रही थीं। जोधपुर एवं अजमेर डिस्काम के प्रबंध निदेशक, सभी अधीक्षण अभियन्ता (ओ एण्ड एम) वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से इस बैठक से जुडे़।
चेयरमैन डिस्कॉम्स ने बैंकर्स से भारत सरकार की ओर से बैंकों को इस संबंध में समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों की पालना करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इन निर्देशों की निचले स्तर तक पालना सुनिश्चित की जाए। अनावश्यक दस्तावेज, गारंटर चैक, पट्टा, प्रक्रिया आदि के कारण आवेदनों को अटकाया नहीं जाए। उन्होंने सभी अधीक्षण अभियंताओं को जिला कलेक्टरों के स्तर पर होने वाली जिला स्तरीय बैंकर्स कमेटी की बैठक में भी आसान ऋण प्रक्रिया सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि पीएम सूर्यघर योजना के अन्तर्गत भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा योजना के पोर्टल में 30 बैंकों को ऋण प्रदान करने की प्रक्रिया से जोड़ा गया है। प्रदेश में कुल आवेदकों में से सर्वाधिक 47 प्रतिशत आवेदक ऋण के लिए भारतीय स्टेट बैंक के समक्ष आवेदन करते हैं। इसके पश्चात् पंजाब नेशनल बैंक से 12 प्रतिशत, बैंक ऑफ बड़ोदा से 11 प्रतिशत तथा राजस्थान ग्रामीण बैंक से 8 प्रतिशत आवेदक लोन के लिए आवेदन करते हैं। यह भी बताया गया कि रूफ टॉप सौर ऊर्जा संयंत्र की प्रोजेक्ट लागत का 90 प्रतिशत तक ऋण सुविधा देय है। जिस पर वर्तमान में 6 प्रतिशत की दर से ब्याज लिया जा रहा है। बैंक प्रतिनिधियों ने इंस्टॉलेशन में अपनी ओर से पूर्ण सहयोग के लिए डिस्कॉम्स को पूर्ण आश्वस्त किया।

CS NEWS: 2027 तक राज्य की सभी सेवाएं होगी ऑनलाइन -मुख्य सचिव 

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मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा है कि सफल प्रशासनिक मॉडल की तर्ज पर प्रदेश में जन-केंद्रित सुशासन का ऐसा मॉडल विकसित किया जाएगा, जो फ्यूचर रेडी, भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस वाला, अधिक जवाबदेह और आमजन को सशक्त बनाने वाला हो।
मुख्य सचिव गुरुवार को शासन सचिवालय में ‘विकसित राजस्थान@2047’ के विज़न के प्रभावी क्रियान्वयन शासन  और प्रणाली को अधिक समन्वित एवं परिणामोन्मुख बनाने के उद्देश्य से गठित सेक्टोरल ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज के ग्रुप 6— ‘शासन एवं प्रोद्यौगिकी’ की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों की दिशा में आगामी तीन माह में कार्यालय प्रक्रिया नियमावली की व्यापक समीक्षा क रने के निर्देश दिए ताकि शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया जा सके। बैठक में वर्ष 2027 तक राज्य की सभी सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मुख्य सचिव ने कहा कि नेक्स्ट जनरेशन एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स के तहत केंद्र सरकार की तर्ज पर चिंतन शिविर आयोजित किए जाएं। इनमें न्यायालयीन प्रकरणों के त्वरित निस्तारण, फाइल मूवमेंट में अनावश्यक विलंब की रोकथाम  के लिए हर स्तर पर न्यूनतम समय में निष्पादन/फॉरवर्ड व्यवस्था, इस प्रक्रिया के चरणों को कम से कम करते हुए सुशासन के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं के सरलीकरण तथा सेवा वितरण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाए।
मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के सफल मॉडल का अनुसरण करते हुए राज्य स्तर पर सेक्टोरल ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज (SGoS) की अवधारणा लागू की है। यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रतिपादित जन-केंद्रित सुशासन की भावना से प्रेरित है, जिसमें शासन का केंद्र बिंदु आमजन की आवश्यकताएँ, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं दक्ष सेवा वितरण है।

Rajasthan News: गूगल सर्च के टॉप रिजल्ट में छुपा है ठगी का जाल—डीजीपी 

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यदि आप अपने वाहन के लिए NHAI FASTag का एनुअल पास बनवाने की सोच रहे हैं, तो जरा संभल जाइए। साइबर ठगों ने अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की हुबहू नकल कर लोगों को ठगने का नया तरीका ढूंढ निकाला है। महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम संजय अग्रवाल ने एडवाइजरी जारी करते हुए आमजन को इस नए फिशिंग स्कैम के प्रति आगाह किया है।
डीजीपी अग्रवाल ने बताया कि साइबर अपराधी अब तकनीक का सहारा लेकर बेहद शातिर हो गए हैं। ये ठग Google Ads और SEO का इस्तेमाल कर अपनी फर्जी वेबसाइटों को सर्च इंजन में सबसे ऊपर (Rank 1) दिखा रहे हैं। आम तौर पर लोग गूगल पर आने वाले पहले लिंक को असली मान लेते हैं, जबकि अपराधी पैसे देकर अपनी फर्जी साइट को Sponsored टैग के साथ ऊपर दिखाते हैं। इन वेबसाइटों का डिजाइन और लोगो असली NHAI पोर्टल जैसा ही होता है, जिससे पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
एडवाइजरी के अनुसार ये फर्जी वेबसाइटें वार्षिक पास के लिए करीब 3000 रुपये के भुगतान की मांग करती हैं। पेमेंट के लिए वहां एक क्यूआर कोड दिया जाता है। जैसे ही कोई व्यक्ति इसे स्कैन करता है, पैसा सरकारी खाते में जाने के बजाय अपराधियों के म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर हो जाता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भुगतान कभी भी किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर नहीं मांगे जाते।
 असली और नकली की पहचान: इन बातों का रखें खास ख्याल—
 —आधिकारिक प्लेटफॉर्म: पास खरीदने या रिन्यू करने के लिए केवल Rajmarg Yatra आधिकारिक ऐप या अधिकृत बैंक पोर्टल का ही उपयोग करें।
—URL को गौर से देखें: annualtollpass.com या annualtollpasss.com जैसे संदिग्ध लिंक से बचें।
—प्राप्तकर्ता का नाम जांचें: यदि स्कैन करते समय व्यक्तिगत नाम “सरिता देवी” या किसी अन्य व्यक्ति का नाम आए, तो तुरंत रुक जाएं।
—सजग रहे: ऑनलाइन भुगतान करते समय विशेष सावधानी बरते और किसी भी संदिग्ध लिंग के माध्यम से अपनी बैंकिंग जानकारी शेयर ना करें।
ठगी होने पर तुरंत यहाँ करें शिकायत—
यदि आप इस तरह के किसी स्कैम में फंस जाते हैं, तो समय गंवाए बिना तुरंत कार्रवाई करें। आप साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा राजस्थान पुलिस के विशेष हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 या 9257510100 पर भी सूचना दी जा सकती है। अपनी शिकायत आप भारत सरकार के पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी दर्ज करवा सकते हैं।

Rajasthan News: पुलिस मुख्यालय में विशेष बैठक— पर्यटकों की सुरक्षा व सुविधा पर हुई चर्चा

राज्य में आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा व सुविधा के पुख्ता प्रबंधों को सुनिश्चित करने और पर्यटकों की यात्रा को सरल व सुगम बनाने की दृष्टि से गुरुवार को पुलिस मुख्यालय में गुरूवार को पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा की अध्यक्षता में पुलिस व पर्यटन विभाग के अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए पुलिस, प्रशासन व पर्यटन विभाग में समन्वय स्थापित करते हुए पर्यटकों की सुविधाओं के लिए बेहतर व्यवस्थाओं के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान किए गए। श्री शर्मा ने बैठक में राज्य के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की सुरक्षा व सुविधाओं की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए पर्यटन स्थलों पर स्थापित पर्यटक सहायता बल (टीएएफ) को और सुदृढ़ करने, पर्यटन थानों की संख्या बढ़ाने और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए अपेक्षित पुलिस बल लगाने और इन्हें उचित प्रशिक्षण प्रदान करने के निर्देश दिए।
उन्होंने हाल ही में पर्यटन विकास के लिए बजट में दी गई स्वीकृति पर कार्ययोजना तैयार करने व पर्यटन स्थलों पर विशेष त्यौहारों, मेलों के साथ—साथ सामयिक आयोजनों में भी पर्यटन विभाग की उपस्थिति सुनिश्चित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य भर के विभिन्न धार्मिक पर्यटन स्थलों यथा खाटू श्यामजी, मेहंदीपुर बालाजी, सालासर बालाजी, रामदेवरा, गोगामेड़ी, पुष्करजी, श्रीनाथद्वारा, सांवरियाजी आदि में कुशल प्रबंधन के लिए देवस्थान, पुलिस व प्रशासन मिलकर कार्य करें और पर्यटकों व श्रद्धालुओं के लिए उचित व्यवस्थाएं करें।
बैठक में डीजी (ट्रेफिक) अनिल पालीवाल ने पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की सुविधा के लिए की जाने वाली व्यवस्थाओं के साथ—साथ विभिन्न दूतावासों से संपर्क कर पर्यटन आमंत्रण की बात कही। आईजी अजयपाल लांबा ने डीजी—आईजी कांफ्रेंस में माननीय प्रधानमंत्री महोदय द्वारा पर्यटकों की सुविधा के लिए राज्य के पर्यटन स्थलों पर अन्य राज्यों के पुलिस अधिकारियों को नियोजित करने, एक ही स्थान पर समस्त सरकारी कार्मिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, पर्यटन स्थलों पर अधिकाधिक सीसीटीवी कवरेज करने, पांच डेस्टिनेशन जहां सबसे ज्यादा ट्यूरिस्ट आते हैं वहां पर्यटन थाना बनाने, ट्यूरिज्म के नेशनल पोर्टल पर राज्यों के पोर्टल को लिंक करने आदि के सुझावों की जानकारी दी।
बैठक के आरंभ में पर्यटन विभाग की ओर से पर्यटन आयुक्त श्रीमती रूकमणि रियाड ने पर्यटन स्थलों की वर्तमान स्थिति और यहां पर विभाग द्वारा पर्यटकों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने पर्यटकों की सुविधा को देखते हुए विभाग द्वारा तैयार की गई प्रचार सामग्री, बूथ डिजाइन, प्रशिक्षण इत्यादि के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गत बैठक की अनुपालना में दिए गए निर्देशों की अनुपालना में टीएएफ और पुलिस समन्वय के लिए कालिका पेट्रोलिंग यूनिट को अपनी रूटिन पेट्रोलिंग दौरान टूरिस्ट साइट को भी कवर करने के लिए कहा गया है।
पर्यटकों को मिले सभी बेहतर सुविधाएं—
डीजीपी श्री शर्मा ने पूर्व बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुरूप आमेर की केस स्टडी में आई अपेक्षाओं को समस्त पर्यटक स्थलों पर लागू करने की बात कही। उन्होंने सभी पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा के साथ-साथ पर्यटकों को स्वच्छ वातावरण और आवागमन हेतु व्यवस्थित सड़क सुविधा के साथ-साथ पर्यटकों के लिए अपेक्षित सूचनाओं की उपलब्धता के संबंध में उचित कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थलों के साथ-साथ रेल्वे स्टेशन, हवाई अड्डा और अन्य स्थानों पर पर्यटकों की सुविधा के लिए पर्यटक सहायता बूथ स्थापित हो जहां पर पर्यटक किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तत्काल संपर्क कर सकें। उन्होंने इस बूथ पर रोडमेप व समस्त सूचनाओं युक्त क्यूआर कोड व हेल्पलाईन नंबर स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अलग-अलग देशों से आने वाले पर्यटकों को पर्यटन स्थलों की जानकारी देने वाले विभिन्न भाषा वाले साईन बोर्ड लगाने के साथ-साथ विदेशी भाषाओं का कोर्स करने वाले युवक-युवतियों को बतौर लेग्वेज एक्सपर्ट्स नियुक्त करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने पर्यटकों की आकस्मिक चिकित्सा के लिए व्यवस्था भी उपलब्ध कराने व महिला पुलिसकार्मिकों व गाईड उपलब्ध कराने की बात कही।

Jaipur News: मानसरोवर में पानी पीने के बहाने घर घुस गले से झपटी सोने की चेन

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राजस्थान की राजधानी के सुरक्षित माने जाने वाले पॉश इलाके शिप्रापथ (मानसरोवर) में मानवता को शर्मसार करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ एक शातिर बदमाश ने प्यास का बहाना बनाकर एक 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला को अपनी ठगी और लूट का शिकार बनाया। बदमाश ने बुजुर्ग महिला की ममता और सेवा भाव का फायदा उठाते हुए उनके गले से सोने की चेन झपट ली और फरार हो गया। मदद के बहाने विश्वासघात- पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मानसरोवर निवासी हरेश कुमार अग्निहोत्री ने शिप्रापथ थाने में इस संबंध में मामला दर्ज करवाया है। घटना 10 फरवरी की शाम करीब 4 बजे की है। उस समय हरेश की 90 वर्षीय वयोवृद्ध मां गंगा देवी घर पर अकेली थीं। तभी एक अज्ञात व्यक्ति कार में सवार होकर उनके गेट पर रुका। उसने बेहद शालीनता और विनम्रता का ढोंग करते हुए बुजुर्ग महिला से पीने के लिए पानी मांगा। पलक झपकते ही वारदात और फरार- 90 साल की गंगा देवी ने मानवता के नाते अनजान व्यक्ति की मदद करने का फैसला किया। जैसे ही वह घर के अंदर से पानी लेकर बाहर गेट तक आईं, बदमाश ने अपना असली चेहरा दिखा दिया। पानी का गिलास पकड़ने के बजाय बदमाश ने झपट्टा मारकर बुजुर्ग महिला के गले पर हमला किया और सोने की चेन तोड़ ली। अचानक हुए इस हमले से बुजुर्ग महिला हक्की-बक्की रह गईं। जब तक उन्होंने शोर मचाया और आसपास के लोग मदद के लिए दौड़ते, तब तक शातिर बदमाश अपनी कार में सवार होकर तेज रफ्तार के साथ रफूचक्कर हो गया। दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। पुलिस की कार्रवाई और सीसीटीवी (CCTV) जांच- घटना की सूचना मिलते ही शिप्रापथ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने पीड़ित परिवार की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि आरोपी की पहचान के लिए इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को गहनता से खंगाला जा रहा है।

BAJAT 2026-27: ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को चरितार्थ करने वाला है बजट -मुख्यमंत्री

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के राज्य बजट को ‘विकसित राजस्थान’ के संकल्प को सिद्ध करने वाला एक ऐतिहासिक दस्तावेज करार दिया है। बुधवार को विधानसभा में उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी द्वारा बजट पेश किए जाने के बाद, मुख्यमंत्री ने मीडिया से रूबरू होते हुए इसे 8 करोड़ प्रदेशवासियों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब बताया। विकसित भारत के विजन को गति- मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047’ के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बजट का मुख्य ध्येय तेज आर्थिक विकास, जन-आकांक्षाओं की पूर्ति और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को चरितार्थ करना है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह बजट केवल वित्तीय आवंटन का ब्योरा नहीं, बल्कि प्रदेश की उन्नति के प्रति सरकार के कर्तव्यों का जीवंत दस्तावेज है। अंत्योदय और समावेशी विकास पर जोर- विशेष रूप से पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि के अवसर पर प्रस्तुत इस बजट को मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण, युवा रोजगार, किसान कल्याण और वंचितों की सेवा को समर्पित बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति यानी ‘अंत्योदय’ के कल्याण को प्राथमिकता दी है। शिक्षा, चिकित्सा, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए बजट में किए गए भारी प्रावधान राजस्थान को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध होंगे। बजट के आकार में भारी बढ़ोतरी- मुख्यमंत्री ने बजट के आंकड़ों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 2026-27 के बजट का कुल आकार 6 लाख 10 हजार 956 करोड़ रुपये है। यह आंकड़ा पूर्ववर्ती सरकार के वर्ष 2023-24 के बजट की तुलना में 41 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि राज्य की मजबूत होती अर्थव्यवस्था और विकास के प्रति सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाती है। बुनियादी ढांचे का कायाकल्प- बजट में आधारभूत संरचना (Infrastructure) के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सड़कों के जाल, औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार और निवेश अनुकूल नीतियों से प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए सुधारों से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार आएगा। मुख्यमंत्री ने इस बजट को राज्य की खुशहाली का रोडमैप बताते हुए कहा कि उनकी सरकार राजस्थान को देश के सबसे अग्रणी और समृद्ध राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह बजट आगामी वर्षों में प्रदेश की प्रगति की नई इबारत लिखेगा।

BAJAT 2026-27: बोर बजट और बोर प्रस्तुतिकरण :-फाइलों में दफन विज़न और ‘प्रेस नोट’ बन गया राजस्थान का बजट

-महेश झालानी वरिष्ठ पत्रकार राजस्थान की विधानसभा में आज जो वित्तीय लेखा-जोखा पेश हुआ, वह केवल आंकड़ों का मायाजाल था, जिसमें न तो राज्य की चुनौतियों से लड़ने की ‘धार’ थी और न ही भविष्य को संवारने का कोई ‘विज़न’। वित्त मंत्री दिया कुमारी का बजट भाषण सुनकर ऐसा महसूस हुआ मानो वे राज्य की तकदीर नहीं, बल्कि सचिवालय के गलियारों में अफसरों द्वारा तैयार किया गया एक ‘नीरस प्रेस नोट’ पढ़ रही हों। बजट का यह स्वरूप बताता है कि जब सत्ता का अनुभवहीन नेतृत्व पूरी तरह ‘अफ़सरशाही’ के रहम-ओ-करम पर निर्भर हो जाता है, तो नतीजे कितने सतही हो सकते हैं। ​अफ़सरशाही का वर्चस्व, नेतृत्व का सरेंडर ​। बजट के पन्नों को पलटें तो स्पष्ट दिखता है कि वित्त सचिव वैभव गैलेरिया और उनकी टीम ने इसे एक ‘बैलेंस शीट’ की तरह तैयार किया है, जिसमें मानवीय संवेदनाओं और जनता की चीखों के लिए कोई जगह नहीं है। वित्त मंत्री के प्रस्तुतिकरण में वह आत्मविश्वास और राजनीतिक पकड़ पूरी तरह नदारद रही, जो कभी वसुंधरा राजे के भाषणों की पहचान हुआ करती थी। मार्गदर्शन के अभाव में बजट का यह जहाज बिना किसी पतवार के कागजी समंदर में हिचकोले खाता नजर आया। यदि अनुभव के लिए शांति धारीवाल जैसे नेताओं के विकासवादी मॉडल को ही खंगाल लिया जाता, तो शायद राजस्थान को ‘ठहराव’ के बजाय ‘रफ़्तार’ मिलती। ​अंधेरे में मध्यम वर्ग और उपेक्षित पत्रकारिता- ​बजट में गृह निर्माण सहकारी समितियों में व्याप्त गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार पर जो चुप्पी साधी गई है, वह संदेह पैदा करती है। क्या सरकार इन भू-माफियाओं के रसूख के आगे बेबस है? एक तरफ आम आदमी अपने खून-पसीने की कमाई इन समितियों में फंसाए बैठा है, और दूसरी तरफ बजट में उन्हें इस ‘सिस्टम’ से निजात दिलाने का कोई जिक्र तक नहीं है। यही हाल पत्रकारों का रहा, जिन्हें लोकतंत्र का प्रहरी बताने वाली सरकार ने पूरी तरह हाशिए पर धकेल दिया। ​बजट में उन मुद्दों पर कोई ‘रोडमैप’ नहीं दिखा जो आम जनजीवन को प्रभावित करते हैं । बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने के लिए बजट में कोई कठोर वित्तीय प्रावधान या आधुनिक पुलिसिंग का ढांचा नहीं दिखा। सरकारी अस्पतालों की बदहाली और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के नाम पर केवल पुरानी योजनाओं की जुगाली की गई। मरीजों की बढ़ती भीड़ और सुविधाओं के अभाव पर बजट पूरी तरह मौन रहा। शहरों में ट्रैफिक जाम और सार्वजनिक शौचालयों जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए कोई दूरदर्शी नीति न होना यह बताता है कि सरकार जमीनी हकीकत से कितनी दूर है। कुल मिलाकर, यह बजट न तो बेरोजगारों के काम आया, न महिलाओं को सुरक्षा का अहसास दिला पाया और न ही दिव्यांगों को संबल दे सका। यह केवल अनावश्यक खर्चों को ढोने वाला एक पारंपरिक दस्तावेज बनकर रह गया। जब किसी प्रदेश के बजट में ‘विजन’ की जगह ‘वैक्यूम’ (शून्यता) पैदा हो जाए, तो समझ लेना चाहिए कि शासन की कमान अनुभवी हाथों के बजाय फाइलों में उलझे अफसरों के पास चली गई है। राजस्थान को इस वक्त एक ‘स्टेट्समैन’ की जरूरत थी, लेकिन उसे मिला केवल एक ‘प्रेस नोट’।

Jaipur News:13 फरवरी को होगा जिला स्तरीय आंवला क्रेता–विक्रेता सम्मेलन का आयोजन 

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशानुसार पंच गौरव योजना के अंतर्गत एक जिला–एक उपज आंवला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जयपुर जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न गति​विधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में 13 फरवरी को जयपुर के दुर्गापुरा स्थित राज्य कृषि प्रबंधन संस्थान में जिला स्तरीय आंवला क्रेता–विक्रेता सम्मेलन एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। मुख्य आयोजना अधिकारी डॉ. सुदीप कुमावत ने बताया कि जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के निर्देशों की अनुपालना में आयोजित होने वाले सम्मेलन में जयपुर जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से लगभग 700 से अधिक आंवला उत्पादक किसान, क्रेता, व्यापारी, एफपीओ एवं उद्यमी भाग लेंगे। कार्यक्रम की विशेषता के रूप में जयपुर जिले की सभी पंच गौरव उपजों की पृथक-पृथक स्टॉल लगाई जाएंगी, जिनके माध्यम से किसानों द्वारा उत्पादित स्थानीय विशिष्ट कृषि उपज, उनके मूल्यवर्धित उत्पादों तथा पारंपरिक विशेषताओं का प्रदर्शन किया जाएगा। इससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक पहचान मिलने के साथ-साथ विपणन के नए अवसर सृजित होंगे।
उद्यानिकी विभाग के उपनिदेशक हरलाल सिंह बिजारनियां ने बताया कि जिला स्तरीय आंवला क्रेता–विक्रेता सम्मेलन में आंवला से निर्मित विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पादों जैसे मुरब्बा, कैंडी, जूस, चूर्ण एवं औषधीय उत्पादों की विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी। उद्यानिकी विभाग द्वारा आधुनिक कृषि उपकरणों, प्रसंस्करण तकनीकों, पैकेजिंग एवं भंडारण से संबंधित नवाचारों का भी प्रदर्शन किया जाएगा। सभी प्रदर्शनियां SIAM ऑडिटोरियम परिसर के बाहर आयोजित की जाएंगी।
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों द्वारा किसानों को आंवला उत्पादन, गुणवत्ता सुधार, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग एवं विपणन से संबंधित तकनीकी जानकारी प्रदान की जाएगी। यह आयोजन जिले में पंच गौरव उपजों के संरक्षण, संवर्धन एवं बाजार विस्तार के साथ-साथ किसानों की आय वृद्धि और कृषि आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।