Rajasthan News: प्रदेश में सुदृढ़ होंगी अंगदान एवं प्रत्यारोपण की प्रक्रियाएं, लाइव पोर्टल से जुड़ेंगे सभी अस्पताल

प्रदेश में अंगदान एवं अंग प्रत्यारोपण सेवाओं को सुदृढ़ एवं पारदर्शी बनाने के लिए प्रक्रिया को पूरी तरह आॅनलाइन संचालित किया जाएगा। इसके लिए नव विकसित लाइव पोर्टल जल्द शुरू किया जाएगा।  अंगदान एवं प्रत्यारोपण करने वाले सभी अस्पतालों को इस पोर्टल से जोड़ा जाएगा, ताकि अंगदान एवं प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और सभी जानकारियां इस पर उपलब्ध हों। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने स्वास्थ्य भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में इस संबंध में निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अंगदान एवं अंग प्रत्यारोपण जीवन रक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। प्रदेश में इससे जुड़ी सेवाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए मानक प्रक्रियाओं को पूरी तरह आॅनलाइन करने के साथ ही विजिलेंस सिस्टम को सुदृढ़ बनाया जाएगा। श्रीमती राठौड़ ने कहा कि अंगदान एवं प्रत्यारोपण के कार्यों के लिए निदेशालय स्तर पर गठित प्रकोष्ठ को और सुदृढ़ किया जाएगा। यह प्रकोष्ठ नियमित रूप से अस्पतालों का निरीक्षण करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि सभी अस्पतालों में अंगदान एवं प्रत्यारोपण की प्रक्रियाएं एसओपी के अनुरूप हों और उन अस्पतालों में इन कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो। साथ ही,सभी महत्वपूर्ण जानकारियां पोर्टल पर अपडेट हों।

सीएचसी स्तर तक स्वास्थ्यकर्मियों को किया जाए प्रशिक्षित—

प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि अंगदान को प्रोत्साहित करने के लिए मेडिकल कॉलेज से लेकर ट्रोमा सेंटर एवं सीएचसी स्तर तक स्वास्थ्यकर्मियों एवं एम्बुलेंसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जाए। साथ ही, आमजन एवं स्वास्थ्यकर्मियों में इस पुनीत कार्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार—प्रसार किया जाए।

जनसमस्या निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें—

प्रमुख शासन सचिव ने अधिकारियों से कहा कि वे जनसमस्याओं के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। जनसुनवाई, सम्पर्क पोर्टल, 181 हेल्पलाइन, मुख्यमंत्री कार्यालय या अन्य माध्यमों से प्राप्त परिवेदनाओं का त्वरित एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें। साथ ही, शिकायतकर्ता से बात कर समस्या समाधान का फीडबैक भी प्राप्त करें। उन्होंने ग्रिवांस रिडरेसल सिस्टम को मजबूत बनाने और इसके लिए तकनीकी नवाचारों को अपनाने पर भी बल दिया।

बेहतर सर्विस डिलीवरी पर करें फोकस—

श्रीमती राठौड़ ने कहा कि अधिकारी स्वयं के स्टाफ की समस्याओं का भी समय पर निस्तारण कर उन्हें राहत प्रदान करें। कार्यालय परिसर में साफ—सफाई, रंग—रोगन एवं नियमित मेंटीनेंस के कार्यों पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी एवं कार्मिक बेहतर सर्विस डिलीवरी पर फोकस करते हुए आमजन को विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं एवं कार्यक्रमों का पूरा लाभ दिलाना सुनिश्चित करें।

बैठक में राष्ट्र्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. अमित यादव, अतिरिक्त मिशन निदेशक डॉ. टी. शुभमंगला, राजस्थान स्टेट हैल्थ एश्योरेंस एजेंसी की अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. निधि पटेल, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश गोयल, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Rajasthan News: राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं गुरुवार से

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राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं गुरुवार 12 फरवरी से राज्यभर में प्रारंभ होंगी। इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं में कुल 19 लाख 90 हजार 57 विद्यार्थी पंजीकृत किए गए हैं। परीक्षाओं का आयोजन प्रदेशभर में 6 हजार 194 परीक्षा केंद्रों पर किया जाएगा। बोर्ड सचिव गजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि इस वर्ष सेकेंडरी परीक्षा में 10 लाख 68 हजार 109, सीनियर सेकेंडरी परीक्षा में 9 लाख 10 हजार 9, प्रवेशिका में 7 हजार 817 तथा वरिष्ठ उपाध्याय वर्ग में 4 हजार 122 विद्यार्थी पंजीकृत किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि परीक्षा के सफल संचालन के लिए सभी परीक्षा केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई हैं। नकल रहित परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानीउड़नदस्तों की तैनाती एवं विशेष दलों की नियुक्ति की गई है। इस साल जिलों में अभय कमांड सेन्टर से भी परीक्षाओं की मॉनिटरिंग की जाएगी।

     बोर्ड सचिव ने परीक्षार्थियों से समय से परीक्षा केंद्र पर पहुंचने तथा बोर्ड द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन करने की अपील की है। परीक्षाओं के सफल, निष्पक्ष एवं पारदर्शी आयोजन के लिए शिक्षक, केंद्राध्यक्ष एवं प्रशासनिक अधिकारी समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं।

Veterinary Officer Recruitment-2025, परीक्षा 19 अप्रैल को, भर्ती में न्यूनतम अंकों का प्रावधान नहीं

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राजस्थान लोक सेवा आयोग ने पशुपालन विभाग में पशु चिकित्सा अधिकारी के 1100 पदों पर होने वाली भर्ती परीक्षा में न्यूनतम प्राप्तांक के संबंध में उपजे भ्रम को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। उक्त परीक्षा का आयोजन 19 अप्रैल 2026 को किया जाना प्रस्तावित है।
न्यूनतम उत्तीर्णांक का प्रावधान नहीं—
आयोग सचिव ने बताया कि राजस्थान पशुपालन सेवा नियम, 1963 के दिनांक 23 मई 2022 को संशोधित नियम ’19’, के क्रम में साक्षात्कार द्वारा सीधी भर्ती के स्थान पर भर्ती को प्रतियोगी परीक्षा से किया गया है। इस संशोधित सेवा नियम में न्यूनतम प्राप्तांक के संबंध में कोई प्रावधान नहीं है।
परीक्षा स्कीम—
कुल प्रश्न: 150 (बहुविकल्पीय)
कुल अंक: 150
समय: 2 घंटे 30 मिनट
नेगेटिव मार्किंग: प्रत्येक गलत उत्तर पर 1/3 अंक काटा जाएगा।
परीक्षा दो भागों में होगी:—
भाग-ए: राजस्थान का सामान्य ज्ञान (40 प्रश्न, 40 अंक)
भाग-बी: संबंधित विषय (110 प्रश्न, 110 अंक)
फर्जी सूचनाओं से रहें सावधान—
इस संबंध में सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही एक कथित अपील निर्णय क्रमांक एफ.23(163) दिनांक 15 नवंबर 2025 पूरी तरह फर्जी है। इस भ्रामक सूचना को फैलाने वालों के खिलाफ अलग से कानूनी कार्यवाही की जा रही है। अभ्यर्थी केवल आयोग द्वारा आधिकारिक वेबसाइट पर जारी  सूचनाओं पर ही विश्वास करें।

Rajasthan News: प्रदेश के हर जिले में होगा आर्द्रभूमि संरक्षण एवं प्रबंधन– रामसर स्थल सिलिसेढ़ बनेगा मॉडल

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राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की तकनीकी समिति की बैठक मंगलवार को सचिवालय में शासन सचिव पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग विजय एन की अध्यक्षता में आयोजित की गई। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में चरणबद्ध रूप से कम से कम एक आर्द्रभूमि विकसित की जाए। उन्होंने इसके लिए जिला-वार आर्द्रभूमियों की सूची तैयार कर उनका डिजिटलीकरण, नियमित मॉनिटरिंग और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने निर्देश दिये कि अलवर जिला स्थित सिलिसेढ़ झील को आदर्श आर्द्रभूमि (मॉडल वैटलैण्ड) के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने इस कार्य को मूर्त रूप देने के लिए स्थानीय प्रशासन, वन एवं पर्यावरण विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड  एवं पशुपालन विभाग आपसी सहभागिता से कार्य करने के लिए कहा। शासन सचिव ने कहा कि सिलिसेढ़ झील के विकास से प्रदेश की अन्य आर्द्रभूमियों के संरक्षण और प्रबंधन को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों से पर्यटन दबाव, जलग्रहण क्षेत्र का क्षरण, गाद जमाव, पारिस्थितिकी संतुलन को नुकसान पहुंचाने वाली प्रजातियों के प्रबंधन तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियों पर चर्चा की तथा आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किये। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें। उन्होंने प्रत्येक जिले में आर्द्रभूमि विकसित करने के एक्शन प्लान तथा आर्द्रभूमि के संरक्षण एवं प्रबंधन हेतु बजट के संबंध में भी अधिकारियों के साथ चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिये कि जिन जिलों में अब तक आर्द्रभूमियाँ अधिसूचित नहीं हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र भेजे जाएं। साथ ही जिलों में आर्द्रभूमियों की डिजिटल इन्वेंट्री समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए। बैठक में राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की नॉलेज पार्टनर संस्था डब्लूडब्लूएफ इंडिया द्वारा रामसर साइट सिलिसेढ़ झील (अलवर) के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट प्लान पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। प्रस्तुतीकरण में झील की भौगोलिक स्थिति, जलग्रहण क्षेत्र, जल प्रवाह व्यवस्था, जल गुणवत्ता, जलवायु आंकड़े, आर्द्रभूमि स्वास्थ्य, जैव विविधता तथा भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी दी गई। बैठक में बताया गया कि सिलिसेढ़ झील सरिस्का टाइगर रिज़र्व के बफर क्षेत्र में स्थित एक महत्वपूर्ण रामसर साइट है। यह क्षेत्र की जल सुरक्षा, जैव विविधता और स्थानीय आजीविका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। झील में 149 पक्षी प्रजातियाँ, विभिन्न मछली प्रजातियाँ, स्तनधारी एवं सरीसृप पाए जाते हैं। इस प्रारूप कार्ययोजना के अनुसार सिलीसेढ़ झील के संवर्धन एवं विकास हेतु सभी संबंधित विभागों एवं हित धारकों के समन्वय से नियमानुसार कार्य किए जाएंगे। बैठक में विशिष्ट शासन सचिव पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग बीजो जॉय, वन संरक्षक वन्य जीव वन विभाग सुश्री मोनाली सेन, सदस्य सचिव राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल कपिल चंद्रावल, सहित पशुपालन विभाग, भू जल विभाग, स्टेट रिमोट सेंसिंग सेंटर के प्रतिनिधि उपस्थित थे। साथ ही जिला प्रशासन- अलवर ने वीसी द्वारा भाग लिया ।

C M NEWS: मुख्यमंत्री ने गोविंददेव जी परिसर से विशाल कलश यात्रा का किया शुभारंभ 

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंगलवार को जयपुर के आराध्य श्री गोविंददेव जी मंदिर परिसर स्थित जय निवास उद्यान से विधिवत पूजा-अर्चना कर विशाल कलश यात्रा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि संत-महात्मा राष्ट्र को सही दिशा देकर सनातन संस्कृति को मजबूत कर रहे हैं तथा इनके विचार मानवता, सेवा एवं सद्भावना का संदेश देते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि संतों की शिक्षाओं और आदर्शों को आत्मसात करें तथा भारत की गौरवाशाली परम्परा को आगे बढ़ाने में योगदान दें।

श्री शर्मा ने कहा कि बाबा बालनाथ ने भारतीय धर्म एवं संस्कृति को आगे बढ़ाने में अद्वितीय योगदान दिया। इसी परंपरा का बाबा बस्तीनाथ जी महाराज भी अनुसरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की अवधारणा पर आधारित हैजो सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का संदेश देती है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने श्री बस्तीनाथ महाराज को दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस दौरान श्री शर्मा ने महाराज जी के आशीर्वचन भी सुनें। कलश यात्रा में हजारों की संख्या में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

इससे पहले श्री शर्मा ने गोविंददेव जी मंदिर में दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की। उन्होंने मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं से आत्मीयता के साथ मुलाकात की और उनका अभिवादन स्वीकार किया। इस दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में उपस्थित भक्तों ने भगवान गोविंददेव जी के जयघोष से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

इस अवसर पर विधायक श्री देवी सिंह शेखावत सहित गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

Rajasthan News: महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा

महाशिवरात्रि 2026: शिव कृपा पाने का महापर्व, जानें अभिषेक का महत्व और पूजा के शुभ मुहूर्त। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व शिव और शक्ति के मिलन के उत्सव के रूप में अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी, रविवार, 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन महादेव की विशेष आराधना करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। अभिषेक का महत्व: विभिन्न द्रव्यों से मिलता है अलग फल— शिव पुराण और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का विभिन्न पदार्थों से अभिषेक करने का विशेष विधान है। ज्योतिषाचार्य पंडित शिव लहरी शास्त्री के अनुसार, भक्त अपनी समस्याओं के निवारण हेतु निम्न द्रव्यों से शिव का अभिषेक कर सकते हैं: जल व गंगाजल: शुद्ध जल से अभिषेक करने पर रोगों से मुक्ति मिलती है, वहीं गंगाजल से अभिषेक मोक्ष प्रदायक माना गया है। दूध व घी: दूध में बूरा मिलाकर अभिषेक करने से बुद्धि प्रखर होती है। देसी घी से अभिषेक करने पर शारीरिक दुर्बलता और नपुंसकता समाप्त होती है। तेल व रस: शत्रु नाश के लिए सरसों के तेल से और घर में सुख-समृद्धि के लिए सुगंधित तेल से अभिषेक करना श्रेष्ठ है। आर्थिक तंगी दूर करने और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने का रस सबसे उत्तम माना गया है। पूजन सामग्री का विशेष फल— महादेव को अर्पित की जाने वाली सामग्री का भी अपना विशिष्ट महत्व है। अक्षत (चावल) चढ़ाने से धन लाभ होता है, तो तिल अर्पित करने से संचित पापों का नाश होता है। संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले जातकों को गेहूं से पूजन करना चाहिए। विशेष रूप से बिल्वपत्र का महत्व बताते हुए शास्त्री जी कहते हैं कि इसे अर्पित करने से तीन जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। बिल्व वृक्ष की सेवा मात्र से पितृ प्रसन्न होते हैं, लेकिन ध्यान रहे कि इस वृक्ष को काटना वंश की हानि का कारण बन सकता है। चार प्रहर की पूजा का समय— महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का विशेष विधान है। वर्ष 2026 के लिए पूजा के शुभ मुहूर्त इस प्रकार रहेंगे: प्रथम प्रहर: सायं 06:14 से रात्रि 09:27 तक। द्वितीय प्रहर: रात्रि 09:28 से मध्यरात्रि 12:41 तक। तृतीय प्रहर: मध्यरात्रि 12:42 से तड़के 03:54 तक। चतुर्थ प्रहर: मध्यरात्रि बाद 03:55 से अगले दिन प्रातः 07:07 तक। निशीथ काल: सर्वश्रेष्ठ पूजा का समय— महाशिवरात्रि की रात में निशीथ काल की पूजा को तंत्र और भक्ति मार्ग में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस वर्ष निशीथ काल का विशेष पूजन समय मध्यरात्रि 12:15 से 01:06 तक रहेगा। यह वह समय है जब ब्रह्मांडीय ऊर्जा अपने चरमोत्कर्ष पर होती है और शिव साधना तत्काल फलदायी सिद्ध होती है। यदि आप अपनी कुंडली के अनुसार विशेष ज्योतिषीय उपाय जानना चाहते हैं, तो विशेषज्ञ परामर्श के लिए पंडित से संपर्क कर सकते हैं।

C M NEWS: प्रदेश में खेजड़ी संरक्षण के लिए बनेगा नया कानून, बिश्नोई समाज ने मुख्यमंत्री का जताया आभार

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प्रराजस्थान की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत के संरक्षण की दिशा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक युगांतकारी पहल की है। रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर प्रदेशभर से आए पर्यावरण प्रेमी संतों और बिश्नोई समाज के प्रबुद्धजनों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर राज्य विधानसभा में खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून लाने की घोषणा पर उनका आत्मीय अभिनंदन किया। 70 वर्षों का इंतजार खत्म: संतों ने सराहा निर्णय— मुकाम पीठाधीश्वर रामानन्द जी महाराज ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश में पिछले 70 वर्षों से इस तरह के ठोस कानून की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। उन्होंने मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा खेजड़ी (राजस्थान का राज्य वृक्ष) की रक्षा के लिए की गई यह पहल न केवल सराहनीय है, बल्कि पूरे समाज में हर्ष की लहर पैदा करने वाली है। संतों ने मुख्यमंत्री के इस निर्णय को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया। कथनी और करनी में समानता: महन्त स्वामी सच्चिदानंद— महन्त स्वामी सच्चिदानंद जी ने मुख्यमंत्री की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम साझा किया। उन्होंने बताया कि 27 अगस्त 2024 को मुख्यमंत्री ने पर्यावरण प्रेमियों के साथ संवाद कर खेजड़ी संरक्षण पर सुझाव मांगे थे। उस समय मुख्यमंत्री ने जो आश्वासन दिया था, उसे 5 फरवरी को विधानसभा में आधिकारिक घोषणा के रूप में पूरा कर अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया है। संतों की मंशा का सम्मान करते हुए कानून बनाने की इस घोषणा ने सरकार के प्रति विश्वास को और सुदृढ़ किया है। सरकार की प्रतिबद्धता: मुख्यमंत्री का संबोधन— मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार पर्यावरण और विशेषकर खेजड़ी के वृक्षों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “हमने संतों और प्रतिनिधियों के सुझावों को गंभीरता से लिया है। विधानसभा में की गई घोषणा इसी दिशा में एक बड़ा कदम है और संतों की भावना के अनुरूप ही कानून की प्रक्रिया पर तेजी से काम चल रहा है।” मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि खेजड़ी की कटाई को रोकने और इसके संवर्धन के लिए शीघ्र ही एक प्रभावी कानून धरातल पर लाया जाएगा। खेजड़ी: राजस्थान का जीवन आधार— गौरतलब है कि खेजड़ी राजस्थान की अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी का मुख्य स्तंभ है। बिश्नोई समाज ने सदियों से इसके संरक्षण के लिए बलिदान दिए हैं। नया कानून बनने से इस वृक्ष को कानूनी कवच प्राप्त होगा, जिससे अवैध कटाई पर रोक लगेगी और मरुस्थलीकरण को रोकने में मदद मिलेगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में बिश्नोई समाज के प्रतिनिधि और पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे, जिन्होंने मुख्यमंत्री को साफा पहनाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

Rajasthan News: खान एवं भूविज्ञान विभाग और RSMM ने सरकारी पेवेलियन श्रेणी में जीता प्रथम पुरस्कार

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जयपुर के प्रदर्शनी और कन्वेंशन सेंटर (JECC) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पत्थर उद्योग प्रदर्शनी ‘इंडिया स्टोन मार्ट-2026’ का समापन समारोह उपलब्धियों भरा रहा। राजस्थान की समृद्ध खनिज संपदा को प्रदर्शित करने में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राजस्थान खान एवं भूविज्ञान विभाग और राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम (RSMM) को ‘सरकारी पेवेलियन श्रेणी’ में सर्वश्रेष्ठ चुना गया। राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष ने किया सम्मानित— समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और विशिष्ट अतिथि विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विभाग की इस उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने खान एवं भूविज्ञान विभाग और RSMM के प्रतिनिधियों को संयुक्त रूप से स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति पत्र प्रदान कर पुरस्कृत किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि राजस्थान की खनिज संपदा वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही है और इस तरह के प्रदर्शन नवाचारों को बढ़ावा देते हैं। प्रभावी प्रदर्शन और खनिज संपदा का चित्रण— प्रमुख शासन सचिव (माइंस एवं पेट्रोलियम) टी. रविकांत के कुशल निर्देशन में तैयार किए गए इस पेवेलियन में राजस्थान के प्रमुख और गौण खनिजों का विस्तृत प्रदर्शन किया गया। विभाग की ओर से नोडल अधिकारी संजय सक्सेना, RSMM के वरिष्ठ प्रबंधक असीम अग्रवाल और पीआरओ राजेंद्र शर्मा ने मंच पर यह सम्मान प्राप्त किया। पेवेलियन की मुख्य विशेषताएं— विभागीय पेवेलियन इस बार आगंतुकों और निवेशकों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। पेवेलियन में न केवल राजस्थान के प्रसिद्ध मार्बल, ग्रेनाइट और सैंडस्टोन को प्रदर्शित किया गया, बल्कि राज्य में उपलब्ध अन्य महत्वपूर्ण खनिज संपदा की जानकारी भी डिजिटल और भौतिक माध्यमों से दी गई। प्रदर्शनी के दौरान विशेषज्ञों ने आगंतुकों को राजस्थान की खनिज नीतियों, निवेश की संभावनाओं और खनन क्षेत्र में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों से अवगत कराया। खनिज क्षेत्र में खुशी की लहर— इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की घोषणा के साथ ही राजस्थान के खनिज सेक्टर और विभागीय कर्मचारियों में खुशी की लहर है। अधिकारियों का मानना है कि इस पुरस्कार से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान के पत्थरों और खनिजों की ब्रांडिंग मजबूत होगी। ‘इंडिया स्टोन मार्ट’ जैसे मंच पर विभाग का यह प्रदर्शन राज्य में भविष्य के औद्योगिक निवेश के लिए नए द्वार खोलने में सहायक सिद्ध होगा। प्रदर्शनी में देश-विदेश के पत्थर उद्यमियों ने हिस्सा लिया, जहां राजस्थान के माइंस विभाग ने अपनी तकनीकी क्षमता और विपुल भंडार का लोहा मनवाया।

C M NEWS: मुख्यमंत्री की बड़ी सौगात: अलवर को मिली 152 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की भेंट

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राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को अलवर जिले के रामगढ़ स्थित ग्राम बहाला में आयोजित ‘ग्राम उत्थान शिविर’ को संबोधित करते हुए प्रदेश के विकास और ग्रामीण सशक्तीकरण की दिशा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अलवर शहर के कायाकल्प के लिए 152 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास कर जिलेवासियों को बड़ी सौगात दी। अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंच रही सरकार— मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में ग्राम उत्थान शिविरों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य सरकार का मुख्य ध्येय किसान, श्रमिक, पशुपालक और समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा, “अब जनता को दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है, बल्कि सरकार स्वयं चलकर पात्र लाभार्थियों के पास पहुंच रही है।” प्रदेश के हर गिरदावर सर्किल पर इन शिविरों का आयोजन किया जा रहा है ताकि स्थानीय स्तर पर ही समस्याओं का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित हो सके। अलवर के बुनियादी ढांचे को मिली मजबूती— मुख्यमंत्री द्वारा दी गई 152 करोड़ रुपये की सौगातों में शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे से जुड़े विभिन्न कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं से अलवर शहर में नागरिक सुविधाओं का विस्तार होगा और स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ ऊर्जा आपूर्ति में भी सुधार आएगा। उन्होंने विश्वास दिलाया कि इन विकास कार्यों से अलवर की तस्वीर बदलेगी और स्थानीय युवाओं व नागरिकों के लिए बेहतर अवसर पैदा होंगे। आत्मनिर्भर और सशक्त गांवों का विजन— गांवों की महत्ता पर जोर देते हुए श्री शर्मा ने कहा कि ‘गांवों में ही देश की आत्मा बसती है’। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए बताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। स्वच्छ भारत अभियान: गांवों को खुले में शौच से मुक्ति मिली है। करोड़ों परिवारों को अपनी छत और पक्के मकान का सपना पूरा हुआ है। जल जीवन मिशन: हर घर तक नल से स्वच्छ जल पहुंचाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। शिविरों का लाभ उठाने का आह्वान— मुख्यमंत्री ने उपस्थित ग्रामीणों से अपील की कि वे ग्राम उत्थान शिविरों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। इन शिविरों में राजस्व, कृषि और सामाजिक न्याय विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन को निर्देशित किया कि कोई भी पात्र व्यक्ति योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। इस कार्यक्रम के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने मुख्यमंत्री का जोरदार स्वागत किया।

C M NEWS: सभी कार्मिक जनगणना कार्य को राष्ट्रीय कर्तव्य मानकर पूरी निष्ठा से संपन्न करें —मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सटीक जनगणना विकास योजनाओं का एक महत्वपूर्ण आधार है। जनगणना के समय संकलित आंकड़ों से ही केन्द्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का निर्धारण एवं क्रियान्वयन प्रभावशीलता के साथ संभव हो पाता है। इसलिए सभी कार्मिक जनगणना कार्य को राष्ट्रीय कर्तव्य मानकर पूरी निष्ठा से संपन्न करें। श्री शर्मा शनिवार को जनगणना-2027 पर वर्चुअली आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनगणना के पहले चरण अर्थात मकानों का सूचीकरण और मकानों की गणना का काम जितना सटीक होगा, व्यक्तियों की गणना का अगला चरण उतना ही त्रुटि रहित और सही होगा। उन्होंने कहा कि जनगणना हमारा संवैधानिक दायित्व है। इससे प्राप्त आंकड़े हमें विकास के स्तर और अपने लक्ष्यों तक पहुंचने की जरूरतों के बारे में बताते हैं। पुख्ता आंकड़ों से ही गांव-शहरों के व्यक्तियों और परिवारों की स्थिति, बिजली, पानी, सड़क, शौचालय, स्कूल, चिकित्सालय, घरेलू गैस कनेक्शन आदि की उपलब्धता और आवश्यकता के बारे में जानकारी मिलती है। आंकड़े सही नहीं होंगे तो ना तो योजनाएं अच्छे से बन पाएंगी और ना ही इनका क्रियान्वयन लक्ष्यों के अनुरूप हो पाएगा। श्री शर्मा ने कहा कि निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन भी जनगणना आंकड़ों के आधार पर होता है। राष्ट्रीय संसाधनों का यथोचित बंटवारा और आवश्यकतानुसार देय अनुदान एवं सहायता का वितरण भी इन्हीं आंकड़ों पर टिका है। उन्होंने कहा कि देश में पहली बार डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग करते हुए जनगणना कार्य किया जाएगा। साथ ही, मकान सूचीकरण संबंधी प्रथम चरण में दिनांक 1 मई से 15 मई 2026 तक समस्त नागरिकों को स्वगणना का विकल्प भी पहली बार उपलब्ध हो रहा है। इसलिए इससे जुड़ने वाले सभी कार्मिकों का बेहतर एवं गहन प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए, ताकि आंकड़ों का पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण संकलन किया जा सके। साथ ही, आमजन में भी व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए लोगों को इस कार्य में सक्रिय भागीदारी और सहयोग देने हेतु प्रेरित किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी अधिकारी इस राष्ट्रीय महत्व के काम में अच्छी तरह से निगरानी करें, नियमित समीक्षा बैठकें करें और अपनी टीमों को प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि राजस्थान में जनगणना के प्रथम चरण के अंतर्गत आगामी 1 मई से 15 मई तक स्वगणना के विकल्प का प्रयोग एवं 16 मई से 14 जून तक मकान सूचीकरण का कार्य किया जाएगा। राजस्थान की विषम भौगोलिक परिस्थितियों एवं गर्मी के मौसम को देखते हुए कार्मिकों के प्रति संवेदनशीलता रखी जाए। उन्होंने संतुलित कार्यभार सुनिश्चित करने के साथ ही कार्य की गुणवत्ता का भी विशेष ध्यान देने हेतु संभागीय आयुक्त, जिला कलक्टर्स एवं अन्य समस्त अधिकारियों को निर्देशित किया।