C M NEWS: मुख्यमंत्री ने पीपलोदी हादसे पर किया उच्चस्तरीय संवाद, दर्दनाक हादसे में मासूम बच्चों की मृत्यु से मन व्यथित है —मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पर झालावाड़ जिले के पीपलोदी ग्राम के सरकारी स्कूल में हुए दुखद हादसे को लेकर उच्च स्तरीय संवाद किया। उन्होंने सभी जिलों के जिला प्रशासन, सार्वजनिक निर्माण विभाग, कार्यकारी एजेंसी, समसा और आरएसआरडीसी सहित संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि सभी सरकारी भवनों, विशेष रूप से स्कूलों, अस्पतालों सहित अन्य सार्वजनिक भवनों का तत्काल निरीक्षण कर मरम्मत कार्य करवाए जाएं। इसके लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जाए, जो 5 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश के नागरिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पीपलोदी हादसे से हम सब दुखी हैं। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए भवनों के निरीक्षण, मरम्मत और रखरखाव पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। हाल ही में जिन भवनों की मरम्मत का काम किया गया है, उनकी भी जांच कर गुणवत्ता सुनिश्चित करें और कमी पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि जर्जर और उपयोग के लिए असुरक्षित पाए जाने पर भवनों को तुरंत खाली करवाया जाए और प्रभावितों का अन्यत्र सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास किया जाए। उन्होंने कहा कि जर्जर स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों के लिए वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित कर उनके लिए अस्थायी कक्षाओं का संचालन सामुदायिक भवनों या अन्य सुरक्षित स्थानों पर किया जाए। उन्होंने इसके लिए शिक्षा विभाग को तुरंत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने बजट 2024-25 में प्रदेश की राजकीय शिक्षण संस्थाओं और 750 विद्यालयों के भवनों की मरम्मत हेतु 250 करोड़ रूपये की बजट घोषणाएं की थी। साथ ही, बजट 2025-26 में भी भवनविहीन व जर्जर विद्यालयों के नवीन भवनों के निर्माण और मरम्मत कार्य के लिए 375 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया था। उन्होंने कहा कि हम प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र को विकास कार्यों के लिए 28 करोड़ रूपये दे रहे हैं। साथ ही डांग, मगरा, मेवात क्षेत्र विकास योजना, एमएलए लेड, एमपी लेड और जनजाति क्षेत्र विकास योजनाओं की राशि से भी ये कार्य करवाए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भवनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक सरकारी भवन की वार्षिक सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य की जाए। इसके लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन कर स्थायी तंत्र विकसित किया जाए, जिसमें विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधन समितियों और स्थानीय पंचायतों को भवन सुरक्षा एवं रखरखाव के लिए प्रशिक्षित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के आंगनबाड़ी केन्द्रों की मरम्मत और रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाए। सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों का अनिवार्य निरीक्षण किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बजट 2025-26 में 5 हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों के भवनों की मरम्मत के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि झालावाड़ के पीपलोदी में सरकारी विद्यालय की छत गिरने से हुआ हादसा दुखद और हृदय विदारक है। इस दर्दनाक हादसे में मासूम बच्चों की मृत्यु से मन व्यथित है। राज्य सरकार दुख की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी अधिकारियों और डॉक्टर्स के संपर्क में हैं और प्रशासन को हादसे में घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को हालात का जायजा लेने के लिए भेजा गया है। संवाद के दौरान पीपलोदी हादसे पर दो मिनट का मौन रखकर मृतक बच्चों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। इस दौरान मुख्य सचिव सुधांश पंत सहित विभिन्न विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे और वीसी के माध्यम से संभागीय आयुक्त, जिला कलक्टर्स व अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी जुड़े।

Jhalawar News: पीपलोदी में चीत्कार के बीच उठी 6 बच्चों की अर्थियां

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झालावाड़ के पीपलोदी गांव में स्कूल हादसे में आज 7 बच्चों की अंत्येष्टि गमगीन माहौल कर दी गई। इनमें 6 बच्चों की अंत्येष्टि पिपलोदी गांव में की गई, वहीं एक बच्चे की अंत्येष्टि गांव चांदपुरा भीलान की गई। 6 बच्चों की अर्थियों को देख गांव चीख पुकार कर मच गई। मृतक बच्चों केसभी शव सुबह 5:00 बजे परिजनों को सौंपे गए थे। जिन्हें पुलिस ने अस्पताल से अलग-अलग गाड़ियों से घरों तक पहुंचाया था। शव पहुंचे ही पूरे गांव में चीत्कार मच गया। सथानिय प्रशासन की मौजूदगी में शव निकली गई। जानकारी के अनुसार दो सगे भाई-बहन कान्हा और मीना को एक ही अर्थी पर श्मशान घाट तक ले जाया गया था। वहीं ग्रमीणों ने पांच चिताओं पर छह बच्चों का एक साथ अंतिम संस्कार किया। हादसे के शिकार बच्चों की आयु औसतन 7 से 10 साल के बीच बताई गई है।

C M NEWS: बीसलपुर बांध का पूरा भरना अत्यंत हर्ष का विषय —मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि बीसलपुर बांध का पूरा भरना अत्यंत हर्ष का विषय है। यह पहली बार है जब जुलाई माह में बीसलपुर बांध का गेट खोला गया है। उन्होंने कहा कि राम जल सेतु लिंक परियोजना के घटक नवनेरा बांध (इटावा, कोटा) का भरना भी जलापूर्ति के साथ ही कृषि कार्यों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी अंचलों में पर्याप्त पानी की आपूर्ति के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राज्य सरकार ने राम जल सेतु लिंक परियोजना, यमुना जल समझौता, देवास परियोजना जैसी विभिन्न योजनाओं व इंदिरा गांधी नहर और गंगनहर के माध्यम से किसान सहित सभी वर्गों को पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि मानसून में अच्छी बारिश होने से निर्बाध और नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

दो वर्षों तक लगातार भरा बीसलपुर —

उल्लेखनीय है कि 24 जुलाई 2025 की तारीख ने प्रदेश में नया इतिहास रचा है। बीसलपुर बांध के कैचमेंट एरिया में अच्छी बारिश होने से बांध की भराव क्षमता 315.50 आरएल मीटर पर पहुंच गई। इसके बाद गेट नंबर 10 को 1 मीटर खोल दिया गया, जिससे लगभग 6000 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। ऐसा पहली बार हुआ है कि जुलाई में ही बीसलपुर बांध भर गया है। साथ ही, यह पहली बार है कि लगातार दो वर्षों (2024-2025) तक बीसलपुर बांध भरा है। गौरतलब है कि यह बांध परियोजना जयपुर, अजमेर और टोंक जिले की लगभग एक करोड़ आबादी को पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करती है। वहीं नवनेरा बांध भी गुरुवार को पूरा भर गया। इसका लेवल 214 आरएल मीटर पहुंच गया जिसके बाद इसके गेट नंबर 11, 12 व 13 को खोल दिए गए। इससे 600 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। इस निकासी से अपस्ट्रीम में कालीसिंध नदी के आस-पास कुंओं और भूजल के स्तर में वृद्धि होगी। उल्लेखनीय है कि बांध की कुल भराव क्षमता 226.65 मिलियन क्यूबिक मीटर है एवं बांध की वर्तमान भराव क्षमता 159.87 मिलियन क्यूबिक मीटर है। दुसरी ओर टोंक जिला कलेक्टर श्रीमती कल्पना अग्रवाल ने बटन दबाकर गुरूवार शाम 5 बजे बीसलपुर बांध के गेट नंबर 10 को 1 मीटर खोला जिससे 6000 क्यूबिक पानी प्रति सैकंड निकासी शुरू की गई। कैचमेंट एरिया में विगत दिनों में अच्छी बारिश होने के कारण निरंतर पानी की आवक होने से गुरुवार को बांध की भराव क्षमता 315.50 आरएल मीटर पर पहुंचने के बाद गुरूवार सायं 4 बजकर 56 मिनट पर बीसलपुर बांध के गेट नंबर 10 को 1 मीटर खोलकर 6000 क्यूसेक पानी की निकासी शुरू की गई। कलेक्टर ने आमजन से अपील की है कि वह नदी के बहाव क्षेत्र में नहीं जाएं। बीसलपुर बांध के अधीक्षण अभियंता प्रहलाद राय खोईवाल ने बताया कि बीसलपुर बांध के गेट नंबर 10 को एक मीटर खोलकर लगभग 6 हजार क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। यह निकासी बांध में पानी की आवक के अनुरूप ही की जा रही है। इसके बाद समय-समय पर पानी की आवक के आधार पर निकासी या गेट बंद करने का निर्णय लिया जाएगा।

Patients News: आरयूएचएस में रोगियों के लिये एसएमएस जैसी सुविधाएं शुरू, चिकित्सा मंत्री ने की समीक्षा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर आरयूएचएस अस्पताल को रिम्स के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने गुरूवार को राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में इस संबंध में समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। श्री खींवसर ने कहा कि आरयूएचएस अस्पताल को रिम्स के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकार ने 750 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया है। अधिकारी, राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप रिम्स के लिए आवश्यक वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृतियां शीघ्र जारी करवाएं व समयबद्ध रूप से निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर काम को गति दें। उन्होंने कहा कि आरयूएचएस के रिम्स के रूप में विकसित होने से न केवल जयपुरवासियों बल्कि प्रदेशभर के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक बेहतरीन विकल्प मिलेगा और चिकित्सा के क्षेत्र में शोध एवं अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि रिम्स के विकास से संबंधित कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए टाइमलाइन के साथ एक एक्शन प्लान बनाएं। किसी भी स्तर पर बाधा आने पर तत्काल अवगत कराएं। उन्होंने कहा कि आरयूएचएस अस्पताल में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं 24 घंटे उपलब्ध होना सराहनीय है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास किया जाए कि आसपास के क्षेत्रों और दूसरे जिलों से रेफर होने वाले केस आरयूएचएस में आएं। इससे यहां की विशेषज्ञ सेवाओं का समुचित उपयोग हो सकेगा। चिकित्सा शिक्षा सचिव अम्बरीष कुमार ने कहा कि रिम्स का विकास तीन चरणों में किया जाना प्रस्तावित है। पहले चरण में मौजूदा सुविधाओं को सुदृढ़ करने के साथ ही सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। दूसरे चरण में डेडीकेटेड सुपर स्पेशियलिटी विभाग स्थापित किए जाएगें और तृतीय चरण में शोध व अनुसंधान गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यहां ट्रोमा सेन्टर, जीरियाट्रिक्स हेल्थ केयर रिसोर्स एवं रिसर्च सेन्टर एवं डेडिकेटेड थैलेसिमिया यूनिट की स्थापना प्रक्रियाधीन है। क्रिटिकल केयर ब्लॉक तैयार हो चुका है, जिसका जल्द ही लोकार्पण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि डेडिकेटेड सुपर स्पेशियलिटी विंग की स्थापना के लिए प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा जाएगा। आरयूएचएस के अधीक्षक डॉ. महेश मंगल ने बताया कि अस्पताल में कैथलेब, प्लास्टिक सर्जरी, एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, स्पोटर्स इंजरी और लिगामेंट सर्जरी जैसी सुविधाएं प्रारम्भ कर दी गई हैं। अस्पताल में अब 13 ऑपरेशन थियेटर फंक्शनल हैं, जिनमें 11 ओटी और 2 आपातकालीन ओटी शामिल हैं। वर्तमान में लगभग 2200 से 2600 मरीज प्रतिदिन ओपीडी में चिकित्सा परामर्श के लिए आ रहे हैं। जुलाई माह में 1800 से अधिक मरीजों की विभिन्न प्रकार की सफल सर्जरी की गई हैं। पोस्ट मार्टम सेवाएं भी प्रारंभ कर दी गई हैं। अब अस्पताल में 24 घंटे लेबर रूम संचालित किया जा रहा है।

TB NEWS: प्रदेश में “निक्षय पोषण किट वितरण अभियान” 27 से

मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की पहल और चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के मार्गदर्शन में प्रदेश में टीबी मुक्त राजस्थान की दिशा में प्रतिबद्धता से प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में राज्य स्तर पर 27 जुलाई से 31 जुलाई 2025 तक “निक्षय पोषण किट वितरण अभियान” आयोजित किया जाएगा। चिकित्सा विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने बताया कि टीबी रोगियों को जन सहयोग द्वारा पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने हेतु यह अभियान आयोजित किया जा रहा है। अभियान की तैयारियों के संदर्भ में आज निदेशक (जन स्वास्थ्य) डॉ. रवि प्रकाश शर्मा की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कार्यशाला का आयोजन स्वास्थ्य भवन, जयपुर से किया गया। इस अवसर पर समस्त संयुक्त निदेशक, सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला क्षय अधिकारी, टीबी कार्यक्रम स्टाफ एवं संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे। निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने निर्देश दिए कि राज्य के समस्त क्षय रोगियों को निक्षय पोषण किट का वितरण सुनिश्चित किया जाए। निक्षय मित्र” पोर्टल पर अधिकाधिक नए निक्षय मित्रों का पंजीकरण कर पोषण सहायता को बढ़ावा दिया जाए। जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन के सहयोग से वृहद प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक क्षय रोगियों को इस अभियान का लाभ मिल सके। चिकित्सा विभाग के अधिकारी एवं कार्मिकों को स्वेच्छा से निक्षय मित्र बनने हेतु प्रोत्साहित किया जाए और जन सहयोग के माध्यम से इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप दिया जाए। “हरियाळो राजस्थान” अभियान के अंतर्गत निदेशक द्वारा सभी अधिकारियों को अधिक से अधिक पौधारोपण करने और पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रेरित करने के निर्देश भी प्रदान किए गए।  

Election News: युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही स्वस्थ लोकतंत्र की परिकल्पना होगी साकार -मुख्य निर्वाचन

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा आगामी समय में प्रस्तावित फोटोयुक्त मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न, SIR) और अन्य निर्वाचन संबंधी कार्यों की तैयारियों को लेकर गुरुवार को शासन सचिवालय में मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन की अध्यक्षता में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान भरतपुर संभाग के संभागीय आयुक्त व सभी 5 जिला निर्वाचन अधिकारी सहित सिरोही जिले के जिला निर्वाचन अधिकारी और अधीनस्थ निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न) कार्यक्रम का उद्देश्य मतदाता सूचियों का शोधन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक अपने मताधिकार का सही तरीके से प्रयोग कर सके। उन्होंने निर्देश दिए कि नए निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम से संबंधित आमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित करवाया जाए। श्री महाजन ने निर्देश दिए कि ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक हेल्प डेस्क स्थापित कर सुनिश्चित किया जाए कि इन हेल्प डेस्क पर नियुक्त व्यक्ति एसआईआर कार्यक्रम और उसके दिशा-निर्देशों से पूरी तरह से अवगत हों। श्री महाजन ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि अभियान का मूल उद्देश्य प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित करना है। उन्होंने निर्देश दिए कि रैंडम चेकिंग के लिए विशेष निरीक्षण दलों का गठन किया जाए, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति मतदाता बनने से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि भारतीय निर्वाचन प्रणाली से संबंधित ऑनलाइन माध्यमों को युवाओं के मध्य अधिक लोकप्रिय बनाना है। युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही स्वस्थ लोकतंत्र की परिकल्पना साकार होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए आवश्यक मानव संसाधनों की समय रहते नियुक्ति कर उन्हें प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि कोई भी बीएलओ का पद रिक्त न रहे। श्री महाजन ने कहा कि नए बीएलओ को गहन प्रशिक्षण करावें औऱ उनके साथ अधिक संख्या में स्वयंसेवक लगाएं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि सभी संबंधित राजनीतिक दलों से समन्वय करते हुए बूथ लेवल एजेंट्स की नियुक्ति शीघ्र करवाई जाए। उन्होंने कहा कि पोलिंग स्टेशनों के रेशनलाइजेशन का कार्य मतदाताओं की संख्या, दूरी, पहुंच, सहूलियत और मूलभूत सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए पूरा किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि एसआईआर कार्यक्रम की जानकारी आम मतदाताओं तक सरल एवं प्रभावी रूप से पहुंचाने के लिए आईइसी गतिविधियों का व्यापक उपयोग किया जाए।

Animal Husbandry News: पशुपालन विभाग की राज्य स्तरीय समीक्षा हुई संपन्न, अधिकारियों को अच्छे कार्य पर प्रशस्ति पत्र और लापरवाही पर मिलेगी चार्ज शीट

शासन सचिव पशुपालन, गोपालन और मत्स्य डॉ. समित शर्मा ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट घोषणाओं के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए क्रियान्विति की गति बढाते हुए विभाग के अधिकारी काम करें। उन्होंने राज्य बजट घोषणाओं में विभाग की प्रगति और उपलब्धियों की समीक्षा की। शासन सचिव गुरुवार को सचिवालय स्थित सम्मेलन कक्ष में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित विभागीय योजनाओं की समीक्षा कर रहे थे। राज्य स्तरीय समीक्षा में पशुपालन निदेशक और आरएलडीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. आनंद सेजरा, पशुपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. सुरेश मीना, डॉ. प्रवीण सेन, डॉ. विकास शर्मा, डॉ. ओमप्रकाश बुनकर सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। संभाग के अतिरिक्त निदेशक, जिलों के संयुक्त निदेशक सहित वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी समीक्षा के दौरान वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। समीक्षा में मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना, मोबाइल वेटरीनरी यूनिट, कॉल सेंटर व चैटबॉट के संचालन और प्रभावी पर्यवेक्षण, लंपी स्किन डिजीज, अन्य टीकाकरण, दवाईयों की समय पर उपलब्धता, सेक्स सॉर्टेड सीमन और केपीआई सहित अन्य विभिन्न मुद्दों पर अधिकारियों ने पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुति दी और उन पर विस्तार से चर्चा हुई। डॉ. शर्मा ने कहा कि अनेक योजनाओं में अच्छा कार्य हुआ है लेकिन मंगला पशु बीमा योजना, टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम और अस्पतालों में आउटडोर व सर्जिकल प्रोसीजर्स की स्थिति अनेक जिलों में अत्यंत गंभीर है। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने अच्छा कार्य किया है उन्हें प्रशस्ति पत्र जारी करने के निर्देश शासन सचिव ने दिए। उन्होंने विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए कम प्रगति वाले जिलों को चिन्हित कर उनके उत्तरदायी अधिकारियों के विरूद्ध आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जिसके फलस्वरूप पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ आनंद सेजरा ने कृत्रिम गर्भाधान के क्षेत्र में 11 जिलों को, टीकाकरण के लिए 10 जिलों को, मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के लिए 9 जिलों को व 4 जिलों को मोबाइल वेटरिनरी यूनिट के क्षेत्र में निम्न प्रदर्शन के लिए तत्काल प्रभाव से नोटिस जारी कर दिए हैं। इस अवसर पर विभाग के निदेशक डॉ. आनंद सेजरा ने सभी जिलों के संयुक्त निदेशकों से मासिक प्रगति रिपोर्ट निर्धारित सॉफ्टवेयर मेें ही भिजवाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जिलों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए अधिकाधिक पशुपालकों को लाभान्वित करने के प्रयास किए जाएं।

Alwar News: अलवर के गांव बिचगांवा में हुआ एक बड़ा हादसा

अलवर के गांव बिचगांवा में एक बड़ा हादसा हुआ जिसमें में दो कांवड़ियों सुरेश चंद्र प्रजापत (35) और गोपाल प्रजापत (22) की मौत हो गई और 32 कांवड़िए झुलस गए। इनमें से 6 को अलवर रेफर किया गया है। जहां सभी की हालत खतरे से बाहर बताई गई है। देखें इस वीडियो में।  

Farmers News: बिजली टावर के उपयोग में लि गई भूमि पर किसानों को 60 प्रतिशत मुआवजा देगी सरकार

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान में 400 केवी और उससे अधिक क्षमता की नवीन ट्रान्समिशन लाइनों के निर्माण पर पथाधिकार (आरओडब्ल्यू) से प्रभावित भूमि हेतु किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे की संशोधित नीति को स्वीकृति प्रदान की है। मुख्यमंत्री के किसानों के प्रति संवेदनशील निर्णय से अब 400 केवी और उससे अधिक ट्रान्समिशन लाइन के निर्माण में अतिरिक्त मुआवजा दिया जायेगा। उन्होंने किसानों की बरसों पुरानी मांग को स्वीकार किया है जिससे भविष्य में किसानों को ट्रान्समिशन लाइनों के पथाधिकार और टावर क्षेत्र में उपयोग में आने वाली भूमि का समुचित मुआवजा मिल सकेगा। राजस्थान में 8 नवम्बर, 2024 को लागू 132 केवी या उससे ज्यादा क्षमता की नई ट्रान्समिशन लाइन के निर्माण पर पथाधिकार (आरओडब्ल्यू) से प्रभावित भूमि के बदले मुआवजा नीति में 400 केवी एवं उससे अधिक वोल्टेज की ट्रान्समिशन लाइनों के लिए आंशिक संशोधन किया गया है। ऊर्जा राज्य मंत्री हीरालाल नागर ने बताया कि संशोधित नीति से किसानों को बड़े पैमाने पर लाभ प्राप्त होगा जिससे किसानों के खेत में 400 केवी और उससे अधिक ट्रान्समिशन लाइनों के निर्माण पर होने वाले नुकसान की समुचित भरपाई हो सकेगी। इससे प्रदेश में अधिक क्षमता की ट्रान्समिशन लाइनों के निर्माण कार्य तीव्र गति से संपादित हो सकेंगे, जिसका लाभ प्रदेश के आम उपभोक्ताओं को भी अच्छी गुणवत्ता की बिजली के रूप मे मिल सकेगा। पथाधिकार भूमि की एक पट्टी है, जहां ट्रान्समिशन लाइन का निर्माण, स्थापना, संचालन और रखरखाव किया जाता है। ट्रान्समिशन लाइन पथाधिकार (आरओडब्ल्यू) का केंद्र है। पथाधिकार उन सभी पेड़ों, संरचनाओं और निर्माण को हटाता है जो बिजली लाइनों में बाधा डालते हैं। इस संशोधित नीति के अनुसार इन लाइनों के टावर के आधार क्षेत्र के लिए डीएलसी दरों के अनुसार भूमि मूल्य पर पहले से देय 200 प्रतिशत के अतिरिक्त अब 200 प्रतिशत मुआवजा और दिया जायेगा। टावर का आधार क्षेत्र, भूतल पर टावर के चारों पैरों से घिरा हुआ क्षेत्र होगा, साथ ही प्रत्येक तरफ एक मीटर का अतिरिक्त विस्तार भी होगा। इसके अतिरिक्त पथाधिकार (आरओडब्ल्यू) कॉरिडोर के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि मूल्य का 30 प्रतिशत, नगर पालिका और अन्य सभी शहरी नियोजन क्षेत्रों के लिए भूमि मूल्य का 45 प्रतिशत और नगर निगमों और महानगरीय क्षेत्रों मेें भूमि मूल्य का 60 प्रतिशत मुआवजा राशि देय होगी। ये संशोधित पथाधिकार (आरओडब्ल्यू) मुआवजा नीति सभी कार्यान्वयन एजेन्सियों (पारेषण लाइसेंसधारी), पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन और सभी निजी कम्पनियों पर लागू होगी, जो कि 400 केवी ट्रान्समिशन लाइन व उससे अधिक क्षमता की ट्रान्समिशन लाइनों के निर्माण में संलग्न है। यह नीति अन्तः राज्यीय और अन्तर राज्यीय दोनों तरह की पारेषण लाइनों पर लागू होगी।

Civil Construction News: सरकार ने बढ़ाई रॉयल्टी, सिविल निर्माण हुआ महंगा

माइनर मिनरल यानि कि अप्रधान खनिज जो कि किसी भी सिविल निर्माण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके बिना निर्माण की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। प्रदेश में सरकार ने चार साल बाद रॉयल्टी की दरों में 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की है। इससे अब सिविल निर्माण करना महंगा हो जायेगा। सरकार के नियम—कनूनों के अनुसार प्रत्येक 3 साल में रॉयल्टी बढ़ाने का प्रावधान है। पिछली बार यह दर सरकार ने 2021 में बढ़ाई थी। रॉयल्टी बढ़ाने के लिये खान विभाग ने सरकार को पहले से ही प्रस्ताव भेज रखा था। सरकार ने अब इसकी स्वीकृति जारी कर दी और विभाग द्वारा भी अधिसूचना जारी कर दी गई है। जिन अप्रधान खनिजों की रॉयल्टी बढ़ी है उनके प्रमुख नामों में सैण्डस्टोन, लाइम स्टोन, लाइम स्टोनएण्ड लाइम, लाइम कंकर, मार्बल, ग्रेनाइट, मेसनरी स्टोन, बजरी, ब्रिक अर्थ, स्लेट स्टोन, ब्रिक्स अर्थ और अगाटे शामिल है।