Rajasthan News: 1800 से अधिक चिकित्सा केंद्रों का औचक निरीक्षण, बेहतर सुविधाओं के लिए सरकार सख्त

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राजस्थान सरकार प्रदेश के पशुपालकों की खुशहाली और पशुधन के संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। पशुपालन, गोपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत के मार्गदर्शन में राज्य में पशु चिकित्सा सेवाओं को आधुनिक और प्रभावी बनाने की मुहिम तेज कर दी गई है। इसी क्रम में, शासन सचिव (पशुपालन) डॉ. समित शर्मा के निर्देशों पर प्रदेश भर के पशु चिकित्सा संस्थानों का एक व्यापक और गहन निरीक्षण अभियान चलाया गया, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली को नई गति प्रदान की है। सेक्स सॉर्टेड सीमन योजना पर विशेष ध्यान— मंत्री जोराराम कुमावत प्रदेश में सेक्स सॉर्टेड सीमन (Sex Sorted Semen) तकनीक के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत गंभीर हैं। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य पशुपालकों की आय में वृद्धि करना और उन्नत नस्ल की बछड़ियों की संख्या बढ़ाना है। हालिया निरीक्षण का मुख्य केंद्र यह आकलन करना था कि धरातल पर इस योजना का क्रियान्वयन कितनी प्रभावी ढंग से हो रहा है। एक दिन में 1804 संस्थानों का निरीक्षण— शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने बताया कि इस अभियान के तहत प्रदेश के 41 जिलों में कुल 1804 पशु चिकित्सा संस्थानों की औचक जांच की गई। विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा किए गए इस निरीक्षण के परिणाम उत्साहजनक रहे: उपलब्धता: निरीक्षण के दौरान 99% से अधिक संस्थान खुले पाए गए, जबकि केवल 16 संस्थान बंद मिले। सेवा गुणवत्ता: 98% से अधिक केंद्रों पर स्वास्थ्य सेवाएं ‘बहुत अच्छी’ या ‘संतोषजनक’ श्रेणी में पाई गईं। मानक: केवल 23 संस्थानों में व्यवस्थाएं असंतोषजनक मिलीं, जिनके खिलाफ सख्त सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। जमीनी हकीकत का आकलन— अधिकारियों ने केवल हाजिरी ही नहीं जांची, बल्कि अस्पतालों में साफ-सफाई, मानव संसाधन की उपलब्धता, जांच सुविधाओं, दवाओं के स्टॉक और उपचार की गुणवत्ता का भी बारीकी से विश्लेषण किया। डॉ. शर्मा के अनुसार, इन निरीक्षणों से प्राप्त रिपोर्ट का गहन डेटा विश्लेषण किया जाएगा। जहाँ कमियां पाई गई हैं, वहां जवाबदेही तय की जाएगी और जहां व्यवस्थाएं बेहतर हैं, उन्हें मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। पशुपालकों के लिए नई उम्मीद— राज्य सरकार का लक्ष्य पशुपालन सेवाओं को इतना सुदृढ़ करना है कि पशुपालकों को अपने द्वार पर ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सहायता मिल सके। सेक्स सॉर्टेड सीमन जैसी योजनाओं की सफलता से न केवल दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि आवारा पशुओं की समस्या के समाधान में भी मदद मिलेगी। पशुपालन विभाग की यह सक्रियता दर्शाती है कि राजस्थान सरकार केवल कागजों पर योजनाएं नहीं बना रही, बल्कि उनकी वास्तविक स्थिति (Ground Reality) को सुधारने के लिए संकल्पित है। आने वाले दिनों में इन निरीक्षणों के आधार पर राज्य की पशु चिकित्सा सेवाओं में और अधिक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

Rajasthan News: कोटा में 3 मंजिला अवैध रेस्टोरेंट की इमारत ढहने से हाहाकार, 2 छात्रों की मौत, 10 घायल

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शिक्षा नगरी कोटा के इंद्रविहार इलाके में शनिवार रात एक भीषण हादसा हो गया, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। ओपेरा अस्पताल रोड पर स्थित ‘देहली नॉनवेज स्पाइसी रेस्टोरेंट’ की तीन मंजिला इमारत रात करीब 9 बजे अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस हादसे में मलबे में दबने से दो छात्रों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 10 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। चीख-पुकार के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन— प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब रेस्टोरेंट में कई ग्राहक खाना खा रहे थे। अचानक एक जोरदार धमाका हुआ और देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। चारों ओर धूल का गुबार और मलबे में दबे लोगों की चीखें सुनाई देने लगीं। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत कार्य शुरू किया। देर रात तक मलबे को हटाकर घायलों को निकालने की मशक्कत जारी रही। मृतकों और घायलों का विवरण— हादसे में जान गंवाने वाले दोनों मृतक छात्र बताए जा रहे हैं। इनमें से एक की पहचान 20 वर्षीय अरण्य के रूप में हुई है, जो कोटा में रहकर जेईई (JEE) की तैयारी कर रहा था। वहीं, दूसरे मृतक की उम्र करीब 14-15 वर्ष है, जिसकी शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं। घायलों में सुजिता (40), शालीन (25), पूर्व (24), नावेव (20), जहांगीर (30), कला (25), पूरण मीणा, मो. साबिर, भूपेंद्र, रॉकी और डेनियल शामिल हैं। गंभीर रूप से घायल जहांगीर को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि अन्य का उपचार न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है। घायलों में अधिकांश की उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच है। हादसे की संभावित वजह: बगल में चल रही खुदाई— स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस इमारत से सटा हुआ एक अन्य नॉनवेज रेस्टोरेंट है, जिसे पिछले कुछ दिनों से गिराया जा रहा था। शनिवार को भी वहां जेसीबी मशीन से तोड़फोड़ की गई थी। आशंका जताई जा रही है कि इसी तोड़फोड़ के कारण रेस्टोरेंट वाली इमारत की नींव कमजोर हो गई और वह लोड सहन नहीं कर पाने के कारण गिर गई। प्रशासनिक लापरवाही और अवैध संचालन— हादसे के बाद प्रशासन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह रेस्टोरेंट बिना किसी सुरक्षा मानकों और नगर निगम की एनओसी (NOC) के अवैध रूप से संचालित हो रहा था। रिहायशी इलाके में इस तरह के व्यावसायिक और निर्माण कार्यों को लेकर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जाहिर की है। जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने वाले रेस्टोरेंट संचालक और अवैध निर्माण में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, प्राथमिकता मलबे को पूरी तरह साफ करने और अस्पताल में भर्ती घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने की है। इस हृदयविदारक घटना ने कोटा में रह रहे हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों में सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी है।

Jaipur News: राजस्थान आवासन मंडल की नाक के नीचे लुटती रही 70 करोड़ की ज़मीन—सरकारी मिलीभगत या तंत्र की नाकामी?

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राजधानी के इंदिरा गांधी नगर में जो हुआ, वह केवल एक ‘अतिक्रमण’ नहीं, बल्कि राजस्थान आवासन मंडल के सुरक्षा तंत्र और सतर्कता के दावों की खुली पोल है। मंडल ने शुक्रवार को जिस 7000 वर्ग मीटर भूमि से अवैध निर्माण हटाया, वह कार्रवाई बहादुरी से ज्यादा विभाग की लापरवाही का स्मारक नजर आती है। दो महीने तक सोता रहा प्रशासन— हैरानी की बात यह है कि सेक्टर-1 जैसे महत्वपूर्ण इलाके में करीब 70 करोड़ रुपये की बेशकीमती व्यावसायिक जमीन पर भू-माफिया पिछले दो महीनों से नींव भर रहे थे, दीवारें खड़ी कर रहे थे, लेकिन मंडल के अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी जमीनों की रखवाली के लिए तैनात दस्ता दफ्तरों में बैठकर ‘सब चंगा है’ की रिपोर्ट बना रहा था? या फिर माफियाओं को विभाग के ही किसी ‘भीतरघाती’ का संरक्षण प्राप्त था? जनता के टैक्स की बर्बादी— जब पानी सिर से ऊपर गुजर गया, तब जेसीबी मशीनों का शोर सुनाई दिया। इस देरी की वजह से न केवल सरकारी संपत्ति का स्वरूप बिगड़ा, बल्कि अवैध निर्माण को ढहाने में लगने वाला भारी-भरकम खर्च भी अंततः जनता की जेब पर ही बोझ बनेगा। अगर मण्डल की नीयत और नजरें साफ होतीं, तो माफिया की पहली ईंट रखते ही उसे उखाड़ फेंका जाता। कागजी दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर— सचिव गोपाल सिंह का यह बयान कि “अतिक्रमण स्वीकार्य नहीं है,” सुनने में तो प्रभावी लगता है, लेकिन हकीकत यह है कि जब तक कार्रवाई का डंडा चला, तब तक माफियाओं ने सरकारी सिस्टम की धज्जियां उड़ा दी थीं। यह घटना विभाग के इंटेलिजेंस फेलियर का जीता-जागता सबूत है। निवेशकों में खौफ का माहौल— आवासन मंडल की इस सुस्ती ने उन आम नागरिकों और निवेशकों के मन में डर पैदा कर दिया है, जो मण्डल की योजनाओं पर भरोसा कर अपनी मेहनत की कमाई लगाते हैं। अगर 70 करोड़ की प्राइम लोकेशन वाली जमीन सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम आदमी के छोटे भूखंडों का क्या होगा? यह कार्रवाई केवल खानापूर्ति लगती है। असली कार्रवाई तो तब मानी जाएगी जब उन अधिकारियों पर गाज गिरेगी जिनकी नाक के नीचे दो महीने तक यह ‘अवैध साम्राज्य’ पनपता रहा।

Rajasthan News: राजस्व लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए ‘एक्शन मोड’ में माइंस विभाग

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राजस्थान के खान व भूविज्ञान विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष के राजस्व लक्ष्यों को शत-प्रतिशत अर्जित करने के लिए अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। विभाग अब ‘ठोस रणनीति’ और ‘डिजिटल निगरानी’ के दोहरे फॉर्मूले पर फोकस कर रहा है। शुक्रवार को उदयपुर स्थित खनिज भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में खान, भूविज्ञान एवं पेट्रोलियम विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी. रविकान्त ने फील्ड अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वित्तीय वर्ष के अंतिम समय में राजस्व संग्रहण की गति को और तेज किया जाए। राजस्व वसूली में 11 फीसदी की बढ़ोतरी— बैठक के दौरान सामने आया कि विभाग सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में माइंस विभाग 11 फीसदी की विकास दर के साथ पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में अधिक राजस्व वसूल चुका है। इस गति को बरकरार रखने के लिए प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को बकाया वसूली और वर्तमान देयकों पर पैनी नजर रखने को कहा है। तकनीक से रुकेगी लीकेज— विभागीय कामकाज में पारदर्शिता लाने और राजस्व चोरी रोकने के लिए तकनीकी नवाचारों पर जोर दिया गया है। श्री रविकान्त ने कहा कि तुलाई कांटों (वेब्रिज) का कम्प्यूटराइज मोड्यूल और व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम (VTS) न केवल विभाग के लिए बल्कि लीजधारकों के लिए भी गेम-चेंजर साबित होंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि कम्प्यूटराइज मोड्यूल के परीक्षण और इंस्टालेशन के काम में तेजी लाई जाए। व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू कर अवैध परिवहन पर लगाम कसी जाएगी। अवैध खनन पर कड़ाई और बकाया वसूली के निर्देश— बैठक में अवैध खनन गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों की भी समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध खनन के मामलों में जब्त वाहनों और सामग्री पर जुर्माना राशि की वसूली तुरंत सुनिश्चित की जाए। आरसीसी-ईआरसीसी ठेकों पर रॉयल्टी वसूली की नियमित निगरानी हो और पुराने बकाया (Old Arrears) की वसूली के लिए विशेष प्रयास किए जाएं और वर्तमान बकाया की शत-प्रतिशत वसूली की जाए। एसएमई (SME) स्तर पर राजस्व संग्रहण का नियमित विश्लेषण और मार्गदर्शन किया जाए। विभागीय तालमेल और मॉनिटरिंग— निदेशक माइंस महावीर प्रसाद मीणा ने बैठक में विश्वास दिलाया कि राजस्व लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए विभागीय मॉनिटरिंग व्यवस्था को बेहद मजबूत किया गया है। वित्त अधिकारियों को उन कार्यालयों के साथ समन्वय करने के निर्देश दिए गए हैं जहाँ राजस्व संग्रहण तुलनात्मक रूप से कम है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य न केवल सरकारी खजाने को भरना है, बल्कि खनन क्षेत्र में सुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा देना भी है। बैठक में विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने फील्ड स्तर की चुनौतियों और समाधानों पर अपने सुझाव साझा किए।

C M NEWS: सदन में पांच साल बनाम-दो साल की लाल किताब पर होगी चर्चा, मुख्यमंत्री ने स्वीकार की चुनौती

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विधानसभा में पांच साल बनाम-दो साल पर चर्चा करने के लिये विपक्ष की चुनौती स्वीकार की है। इस के लिये मुख्यमंत्री ने सदन में लाल किताब टेबल की और कहा कि भाजपा सरकार ने दो साल में इतने काम किए हैं, जितने कांग्रेस के पिछले पांच साल के कार्यकाल में भी नहीं हुए। इस मामले पर अध्यक्ष ने कहा कि कार्य सलाहकार समिति में विषय रखकर दिन और समय तय किया जाएगा। वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित कई विधायक खड़े हो गए और कहा कि पूरे पांच साल के कामकाज पर ही चर्चा करना, सिर्फ कांग्रेस सरकार के दो साल की तुलना नहीं करनी है। जूली ने कहा कि उन्हें भी मुख्यमंत्री की चुनौती स्वीकार है। मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नाम लिये बिना तंज कसते हुये कहा पिछली सरकार के नेता जो सदन में नहीं आ रहे और अपने आपको महात्मा गांधी का अनुयायी बताते हैं, लेकिन उन्होंने युवाओं का हक मारा। उनको फिर से महात्मा गांधी की किताब पढ़नी चाहिए। वहीं मुख्यमंत्री ने कांग्रेस सरकार पर घी पीने का आरोप लगाया है और कहा कि आज उपदेश दे रहे हैं। उन्होने कहा कि राम को अपना लो, फायदे में रहोगे, वरना नजर नहीं आओगे। राम के नाम से कटते रहोगे तो कट ही जाओगे। जबकि महात्मा गांधी खुद भी रामराज्य की स्थापना करना चाहते थे। दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार ने अब तक की 1727 बजट घोषणाओं में से केवल 754 ही पूरी की हैं। पिछले बजट की महज 18 प्रतिशत घोषणाओं पर अमल हुआ है। दो साल में एक भी नई भर्ती पूरी नहीं हुई और मेधावी छात्राओं की स्कूटी योजना का टेंडर निरस्त कर दिया। उन्होने कहा कि जनता की सुनवाई नहीं हो रही है। सरकार यह भूल रही है कि वह जनता की मालिक नहीं, बल्कि ट्रस्टी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिविल लाइंस में मंत्रियों के दरवाजे जनता के लिए बंद हैं।

Rajasthan News: प्रदेश में अब 3 बच्चों वाले भी बन सकेंगे सरपंच-प्रधान

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सरकार ने विधानसभा में स्पष्ट किया है कि प्रदेश में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव में उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है वहीं दो से ज्यादा संतान वालों के चुनाव लड़ने पर लगी रोक हटाने की पत्रावली विधि विभाग में प्रक्रियाधीन है। सरकार ने कांग्रेस विधायक पूसाराम गोदारा के एक सवाल पर विधानसभा में स्पष्ट किया है कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम में उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर कोई शर्त नहीं है। विधि विभाग को संतान मामले को लेकर भेजे गए प्रस्ताव में यह लिखा गया है कि दो संतान होने की बाध्यता हो हटाना प्रस्तावित है और कहा गया कि सरकार का नगर निकाय चुनाव में उम्मीदवारों की योग्यता के संबंध में वर्तमान में राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 21 में प्रावधान हैं, जिनमें शैक्षणिक योग्यता के संबंध में कोई नियम नहीं है। शैक्षणिक योग्यता के लिए नियमों में संशोधन किए जाने का वर्तमान में कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। वहीं 2 से ज्यादा संतान वालों को चुनाव लड़ने की छूट देने वाले प्रावधान के सवाल के जवाब में लिखा कि राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 24 के प्रावधानों में संशोधन के लिए विधि विभाग को फाइल भेजी गई है, जो प्रक्रियाधीन है।

C M NEWS: नशे के कारोबार में लिप्त गिरोहों के विरूद्ध हो सख्त एक्शन, चलाएं विशेष अभियान -मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि नशे के कारोबार में लिप्त गिरोहों के विरूद्ध सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने पुलिस और प्रशासन को प्रदेश को नशामुक्त बनाने की दिशा में विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी दिए। वही, उन्होंने गैंगस्टर्स और हार्डकोर अपराधियों के विरूद्ध कठोर से कठोर कानूनी कार्रवाई करते हुए प्रभावी अंकुश लगाने के विशेष दिशा-निर्देश दिए। श्री शर्मा ने मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास पर गृह विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए कहा कि नशे की समस्या के उन्मूलन के लिए इससे जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला के रूट का चिन्हिकरण करते हुए विशेष निगरानी रखी जाए और सीमावर्ती क्षेत्रों में भी कड़ी निगरानी और सतर्कता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि नशे के कारोबार से जुड़े संगठित गिरोहों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए विशेष कार्ययोजना के तहत कार्रवाई की जाए तथा छोटे-बड़े सभी नेटवर्क को ध्वस्त किया जाए। इसके लिए पुलिस, ड्रग्स कंट्रोलर, स्वास्थ्य विभाग और अन्य एजेंसियां समन्वित प्रयास करें। साथ ही, उन्होंने नशे के प्रकरणों में गिरफ्तार व्यक्तियों के विरूद्ध प्रभावी कानूनी पैरवी के संबंध में निर्देशित किया। नशे के दुष्परिणामों के प्रति करें जागरूक- मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा अपराध की जड़ है और समाज व परिवारों पर इसके दूरगामी दुष्प्रभाव होते हैं। इसलिए नशे के दुष्परिणामों के संबंध में विद्यालयों और महाविद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस सामाजिक क्षेत्र की संस्थाओं के साथ जुड़कर पॉक्सो एक्ट एवं अन्य कानूनों के संबंध में आमजन को जागरूक करें।साइबर अपराध के खिलाफ चलाएं मुहिम- मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराध के विरूद्ध प्राथमिकता के साथ कार्रवाई होनी चाहिए। जिन क्षेत्रों में साइबर अपराध की घटनाएं घटित हो रही है, वहां इनसे जुड़े गिरोहों के विरूद्ध विशेष अभियान चलाया जाए। ये अभियान तब तक चले, जब तक संबंधित क्षेत्र में ऐसे अपराध जड़ से समाप्त नहीं हो जाए। प्रत्येक 10 दिन के अंतराल पर हो प्रगति की मॉनिटरिंग- श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से पिछले दो वर्षों में अपराधों में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा कि अपराधियों के विरूद्ध कार्रवाई की प्रगति की प्रत्येक 10 दिन के अंतराल पर मॉनिटरिंग की जाए। इन मामलों में कोताही बरतने पर जिम्मेदारी तय की जाए। पुलिसिंग में आधुनिक तकनीकों को अपनाएं- श्री शर्मा ने कहा कि डिजिटल युग में अपराध भी हाईटेक होने लगे हैं। ऐसे में पुलिस भी अपराधियों के विरूद्ध कार्रवाई में आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए मॉडर्न पुलिसिंग को अपनाएं। इस दौरान मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं, विभिन्न जिलों से पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक वीसी के माध्यम से जुड़े।

Rajasthan News: राजस्थान आवासन मंडल की 254वीं बैठक में जनहित के बड़े दावों के बीच धरातल पर पुरानी सुस्ती और बढ़ते खर्च का साया

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राजस्थान आवासन मंडल (RHB) की मंगलवार को आयोजित 254वीं बोर्ड बैठक एक बार फिर घोषणाओं और प्रस्तावों की भेंट चढ़ गई। नगरीय विकास एवं आवासन विभाग के प्रमुख शासन सचिव देबाशीष पृष्टी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में करोड़ों के नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी तो दी गई, लेकिन आम आदमी के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ये योजनाएं फाइलों से बाहर निकल पाएंगी? घोषणाओं का अंबार, क्रियान्वयन पर सवाल- बैठक में सिटी पार्क में ‘अटल काव्य स्मारक’ और ‘अटल लोकतंत्र उपवन’ के लिए डीपीआर और वास्तुविद की नियुक्ति को मंजूरी दी गई। मंडल जहां एक ओर नई स्मारकों पर भारी-भरकम बजट खर्च करने की तैयारी में है, वहीं शहर की पुरानी आवासीय योजनाओं में मूलभूत सुविधाओं का अभाव आज भी बना हुआ है। आलोचकों का तर्क है कि मंडल का ध्यान अब आवासीय संपत्तियां उपलब्ध कराने के बजाय केवल पार्कों और स्मारकों के सौंदर्यीकरण पर केंद्रित हो गया है, जो इसके मूल उद्देश्य से भटकाव है। अधूरे प्रोजेक्ट्स और बढ़ती आवेदन तिथियां- बैठक में हनुमानगढ़ और भिवाड़ी की आवासीय योजनाओं के लिए आवेदन की अवधि 28 फरवरी तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया। प्रशासन इसे सकारात्मक प्रतिक्रिया बता रहा है, लेकिन हकीकत में यह इन योजनाओं के प्रति जनता की उदासीनता और कम होते रुझान को दर्शाता है। अगर ये योजनाएं वास्तव में आकर्षक होतीं, तो मंडल को बार-बार आवेदन की तारीखें बढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। पोर्टल और शिविरों का ‘डिजिटल’ झुनझुना नगरीय विकास मंत्री के मार्गदर्शन में लेआउट प्लान संशोधन और भू-उपयोग परिवर्तन के लिए विशेष पोर्टल और जिलावार शिविरों की घोषणा की गई है। हालांकि, पूर्व में भी मंडल के कई ऑनलाइन पोर्टल तकनीकी खामियों और सुस्त अपडेट के कारण विफल साबित हुए हैं। ऐसे में नए पोर्टल के माध्यम से पारदर्शिता का दावा केवल कागजी खानापूर्ति नजर आता है। आर्थिक बोझ और सुरक्षा की अनदेखी- बैठक में ड्रोन सर्वे और आरएफएसडीएल के माध्यम से लंबित संपत्तियों के निस्तारण की बात कही गई, जो सीधे तौर पर मंडल की प्रशासनिक विफलता को उजागर करती है। सवाल उठता है कि मंडल की संपत्तियां इतनी बड़ी संख्या में लंबित और विवादित क्यों हुईं? साथ ही, आयुक्त द्वारा संपत्तियों की सुरक्षा के लिए सीमांकन और फेंसिंग के निर्देश देना यह साबित करता है कि करोड़ों की बेशकीमती सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का खतरा मंडरा रहा है और अब तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे। कुल मिलाकर, 254वीं बोर्ड बैठक नई परियोजनाओं के नाम पर बजट खपाने का जरिया अधिक और आम जनता की आवासीय समस्याओं का समाधान कम नजर आती है। जब तक लंबित योजनाओं का कार्य पूर्ण नहीं होता, नए स्मारकों और उद्यानों पर जनता का पैसा खर्च करना मंडल की प्राथमिकता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

C M NEWS: वीबी जी राम जी से ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचनाएं होंगी मजबूत- मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सरपंच गांवों की लोकतांत्रिक शक्ति के प्रतीक हैं। वे विकास की धुरी हैं, जिनके समर्पण भाव से किए गए कार्यों से ग्रामीण परिवारों के जीवन में खुशहाली आती है। उन्होंने कहा कि सरकारें नीतियां और योजनाएं बनाती हैं लेकिन उन्हें ग्राम स्तर तक क्रियान्वित करने का सशक्त माध्यम सरपंच ही होते हैं। श्री शर्मा सोमवार को कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा में सरपंच संघ द्वारा आयोजित निवर्तमान सरपंच (प्रशासक) प्रदेश अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मूल मंत्र को ग्रामीण परिवेश में सरपंच धरातल पर उतारते हैं। सरपंच के दायित्व में जन अपेक्षाओं की पूर्ति और समस्याओं के समाधान का महत्वपूर्ण कार्य होता है, जिसे वे पूरी प्रतिबद्धता और समर्पण भाव से करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वीबी जी राम जी कानून ग्रामीण विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। इसके माध्यम से मनरेगा की अनियमितताओं को दूर किया गया है। इसके अंतर्गत स्थाई परिसंपत्तियों का निर्माण हो सकेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचनाओं को मजबूती मिलेगी। कानून में रोजगार की गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने केन्द्रीय बजट में वीबी जी राम जी योजना में 95 हजार 692 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया है। श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश की 8 करोड़ जनता के कल्याण और सभी विधानसभा क्षेत्रों के विकास का रोडमैप बनाया है। पानी जैसी बुनियादी सुविधा को प्राथमिकता देते हुए रामजल सेतु लिंक परियोजना, देवास परियोजना, यमुना जल समझौता, आईजीएनपी, गंगनहर, माही सहित परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में आज 22 जिलों में दिन में बिजली दी जा रही है, जो 2027 तक पूरे जिलों में कर दी जाएगी। इसके साथ ही सोलर, बैट्री एवं पंप स्टोरेज परियोजनाओं में प्रदेश में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं।

C M NEWS: हर शहर बने नागरिक-केन्द्रित विकास का मॉडल -मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि शहरी विकास से जुड़ी परियोजनाओं में भविष्य की आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाए ताकि राजस्थान का हर शहर सस्टेनेबल और नागरिक-केन्द्रित विकास का नया मॉडल बन सके। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता के साथ ही निर्धारित समय-सीमा का भी पूरा ध्यान रखा जाए ताकि आमजन को इन सुविधाओं का लाभ समय पर मिल सके। श्री शर्मा ने सोमवार को अधिकारियों को निर्देश दिए कि नगरीय क्षेत्रों में सड़क, सीवरेज, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता, पेयजल और आवास संबंधी प्रगतिरत परियोजनाओं में तेजी लाते हुए शीघ्र पूरा किया जाए। वहीं, शहरी क्षेत्रों में बस स्टैण्ड्स के निर्माण के लिए मॉडल बनाया जाए, जिसके अंतर्गत स्थानीय आवश्यकता के अनुसार विभिन्न श्रेणियों का निर्धारण किया जाए। मुख्यमंत्री ने लंबित न्यायिक मामलों के निस्तारण पर जोर देते हुए कहा कि इनके त्वरित निस्तारण के लिए विभागीय स्तर पर पूरी तैयारी की जाए और इसमें विभाग की ओर से देरी होने पर जिम्मेदारी तय की जाए। मुख्यमंत्री ने जयपुर शहर के मेट्रो फेज-2, विभिन्न फ्लाइओवर्स, आरयूबी एवं एलिवेटेड रोड के प्रगतिरत कार्यों के साथ ही विभिन्न शहरों के सड़क निर्माण कार्यों, सीवरेज लाईन, सीवरेज मास्टर प्लान एवं ड्रेनेज के कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने सीकर शहर में सुगम आवागमन एवं जल निकासी की व्यवस्था के लिए प्लान तैयार करने के भी निर्देश दिए।