जिला उपायुक्त की आमजन से अपील मलबा निस्तारण के लिए नगर निगम से करें सम्पर्क

जिला पर्यावरण समिति की सभा जिला उपायुक्त डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी की अध्यक्षता में मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय के सभागार मे आयोजित हुई। इस दौरान उपायुक्त डॉ.सोनी ने सभी भवन निर्माण कर्ताओं और आमजन से अपील की है कि अपने पुराने भवन को तोड़ कर नवीन भवन का निर्माण कर रहे है तो भवन तोड़ने के पश्चात् शेष रहे मलबे के उचित निस्तारण के लिए नगर निगम ग्रेटर और नगर निगम हेरिटेज से अवश्य सम्पर्क करें। उन्होंने कहा कच्चे फुटपाथों को कंकरिट के स्थान पर इन्टरलाकिंग टाईल्स का प्रयोग करें ताकि बरसात के मौसम मे सड़को का पानी धरती में चला जाए और सड़को को बरसाती नाले बनने से बचाया जा सके। डॉ.सोनी ने एन्टी स्मॉक गन को उचित स्थान पर लगाने के निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने आमजन से कचरा, कचरा-पात्र में डालने या कचरा संग्रहण वाहन में करने की भी अपील की ताकि शहर को स्वच्छ बनाया जा सके। उपायुक्त ने सड़क किनारे कचरा डाला जा रहा है वहां उस कचरे को साफ कर धार्मिक महत्त्व के पौधे लगाकर शहर को हरा भरा बनाने के निर्देश नगर निगम के अधिकारियों को दिए है। उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंध की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि प्लास्टिक न सिर्फ मानव, पशु-पक्षियों के लिए ब्लकि प्रकृति के लिए भी घातक हैं। इससे नदी नाले अवरूद्ध हो जाते है जिससे शहर में जल भराव और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है इसलिए उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाने के लिए अवैध रूप से विक्रय हो रही प्लास्टिक के जप्ती की कार्यवाही करने के निर्देश नगर निगम के अधिकारियों को दिए है। श्री सोनी ने इलैक्ट्रिक वाहनाों के चार्जिंग पॉइन्ट लागाने हेतु पेट्रोलियम कम्पनियों से सम्पर्क करने के निर्देश परिवहन विभाग के अधिकारियों को दिए है। इस दौरान विभागो के अधिकारी उपस्थित रहे।

India-Pakistan: भारत-पाकिस्तान के तनाव से जीरा और सौंफ के भाव में गिरावट

भारत-पाक तनाव के चलते बिलाड़ा कृषि मंडी पड़ रहा है। निर्यात-उन्मुख फसलें जैसे जीरा और सौंफ की आवक और किसानों से खरीद में गिरावट आई है। व्यापारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात आदेशों में ठहराव आया हुआ है। इस कारण जीरा और सौंफ के भाव में गिरावट आई है। उन्होने बताया कि पिछले सप्ताह के जीरा का भाव में 4 हजार रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट आई है। वहीं सौंफ के भाव में भी 3 हजार रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई है। दुसरी ओर गुजरात के ऊंझा मंडी की बात करें तो वहां भी व्यापारियों ने उपज की खरीदारी में कमी की है। मंडी सूत्रों के अनुसार मई में रोजाना जीरा और सौंफ और अन्य कृषि जिंस की आवक लगभग 1000 बोरी भी। लेकिन अब मंडी में लगभग 200 बोरी के आसपास ही माल आ रहा है। वहीं ऊंझा मंडी से भी खरीदारी नहीं हो पा रही है। किसान अपना माल बेचने मंडी नहीं आ रहे है। केवल फोन पर हीं व्यापारियों से भाव मालूम कर रहे है। किसान भाव कम होने के कारणमाल नहीं बेच रहे है।  

C M NEWS: भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध —मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार आमजन को संवेदनशील, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है, अधिकारी-कर्मचारी सरकार के शासन तंत्र की मुख्य धुरी हैं जिनकी जनकल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने में अहम भूमिका होती है। ऐसे में कार्मिक पूरे समर्पण भाव और सत्यनिष्ठा से काम करते हुए राज्यहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दें ताकि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को योजनाओं को पूरा लाभ मिल सके। श्री शर्मा गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास पर कार्मिक विभाग की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टोलरेंस की नीति अपनाते हुए आमजन को गुड गवर्नेन्स देने का कार्य प्राथमिकता से कर रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि विभागीय जांच के 16 सीसीए, 17 सीसीए सहित 17ए के लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण हो जिससे राजकीय कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि जिन विभागों में लंबित प्रकरणों की संख्या अधिक है, उनके सचिव ऐसे प्रकरणों की स्वयं प्रति सप्ताह समीक्षा करें। लंबित प्रकरणों का निस्तारण निर्धारित अवधि में पूरा हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारियों का अनुशासन और सेवा-भाव राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में अधिकारी-कर्मचारियों को नियमित ऑनलाइन व ऑफलाइन प्रशिक्षण दिया जाए जिससे उनकी क्षमता में संवर्धन और दक्षता में वृद्धि हो सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आवश्यकतानुसार नियमों में संशोधन कर सुसंगत बनाएं। श्री शर्मा ने कहा कि काम में लापरवाही और अनुशासनात्मक कार्यवाही के लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण किया जाए। लंबित प्रकरणों की अधिक संख्या वाले विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण इन प्रकरणों की समीक्षा करें और इनका समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग ऐसे प्रकरणों की रिपोर्ट नियमित भिजवाएं। साथ ही, मुख्य सचिव के स्तर पर ऐसे लंबित प्रकरणों के निस्तारण के लिए नियमित मॉनिटरिंग की जाए। इस दौरान विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।

जल संसाधन विभाग में 364 कनिष्ठ अभियंताओं की होगी भर्ती —मंत्री

जल संसाधन विभाग में कनिष्ठ अभियंता के 364 पदों पर शीघ्र भर्ती की जाएगी। विभाग में तकनीकी क्षमताओं को सुदृढ़ करने और युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए विभाग ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को अर्थना भेजी है। इसमें कनिष्ठ अभियंता डिग्री और डिप्लोमा धारकों के लिए गैर अनुसूचित क्षेत्र और अनुसूचित क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग पद आरक्षित किए गए हैं। जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत के प्रयासों से विभाग में नवाचार और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। कनिष्ठ अभियंताओं की भर्ती प्रक्रिया से युवाओं को रोजगार के अधिकाधिक अवसर मिलेंगे और विभागीय कार्यक्षमता में अभिवृद्धि होगी। इन पदों पर भर्ती :— गैर अनुसूचित क्षेत्र में कनिष्ठ अभियंता सिविल (डिग्री) के 165 पद, कनिष्ठ अभियंता सिविल (डिप्लोमा) के 97 पद, कनिष्ठ अभियंता मैकेनिकल (डिग्री) के 4 पद और कनिष्ठ अभियंता मैकेनिकल (डिप्लोमा) के 10 पदों पर भर्ती होगी। साथ ही, अनुसूचित क्षेत्र में कनिष्ठ अभियंता सिविल (डिग्री) के 28 पद और कनिष्ठ अभियंता सिविल (डिप्लोमा) के 60 पदों पर भर्ती के लिए भी अर्थना भिजवाई गई है। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध करा रही है। राज्य के जल संसाधन प्रबंधन को अधिक सुदृढ़ करने के लिए विभाग को तकनीकी रूप से सशक्त किया जा रहा है। अब विभाग में इन पदों पर भर्ती होने से राज्य की जल परियोजनाओं की गुणवत्ता अधिक मजबूत होगी।

Jan Adhar: जन आधार की ई-केवाईसी हुई सरल

राज्य सरकार ने जन आधार की ई-केवाईसी प्रक्रिया का सरलीकरण किया है। आर्थिक और सांख्यिकी विभाग के सहायक निदेशक डॉ. सुदीप कुमावत ने बताया कि जिन लोगों के फिंगरप्रिंट, आईरिस नहीं आने व आधार में मोबाइल नंबर नहीं होने या अपडेट नहीं होने की स्थिति में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में विलम्ब होता था इसी को ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने आमजन को राहत प्रदान की है। उन्होंने बताया कि शासन सचिव, आयोजना एवं पदेन महानिदेशक जन आधार प्राधिकरण ने सभी जिला कलक्टर को पत्र लिखकर बताया है कि राज्य के उम्रदराज निवासियों की आधार में बायोमेट्रिक डेटा इनपुट अर्थात फिंगरप्रिंट/आईरिस नहीं आने और आधार में मोबाईल नम्बर नहीं होने की स्थिति में जन आधार में आधार से ऑनलाईन ईकेवाईसी नहीं हो पाती है ऐसे लोगों की समस्या के समाधान हेतु राज्य सरकार द्वारा ऑफलाईन ईकेवाईसी की व्यवस्था की गयी है। डॉ. कुमावत ने बताया कि ऑफलाइन ईकेवाईसी के लिए ग्रामीण क्षेत्र में ब्लॉक विकास अधिकारी और शहरी क्षेत्र में उपखण्ड अधिकारी (द्वितीय सत्यापक) की एसएसओ आई डी पर ऑफलाईन ईकेवाईसी का ऑप्शन उपलब्ध करवाया गया है जिसके माध्यम से फिंगरप्रिंट/आईरिस नहीं आने व आधार में मोबाईल नम्बर नहीं होने वाले व्यक्तियों की ईकेवाईसी की जा सकेगी। ऐसे उम्रदराज व्यक्ति जिनके बायोमेट्रिक डेटा इनपुट अर्थात फिंगरप्रिंट/आईरिस नहीं आने व आधार में मोबाईल नम्बर नहीं होने से सरकारी योजनाओं का लाभ लेने मे समस्याओं का सामना करना पड रहा था उन सभी को इस आदेश से राहत मिलेगी।

Home department: गृह विभाग ने आपदा प्रबन्धन के लिए जिला मजिस्ट्रेटों को जारी किए दिशा निर्देश

राज्य के गृह विभाग ने वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सभी जिला कलेक्टर और मजिस्ट्रेट को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनन्द कुमार द्वारा जारी दिशा-निर्देश के अनुसार समस्त अस्पतालों में सभी प्रकार की आवश्यक जीवन रक्षक दवा उपलब्ध रहे, डाक्टर मय स्टाफ उपस्थित रहे और ब्लड बैंक में सभी ग्रुपों के रक्त की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध रहे। चिन्हित अस्पतालों व स्कूलों में जहां पर अस्थाई अस्पताल और लोगों के रहने की व्यवस्था की जा सकती है, वहां जनरेटरों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। सोशल मीडिया पर पूर्ण निगरानी रखें और देश के विरुद्ध भड़काऊ पोस्ट अथवा सामग्री पर तुरन्त कानूनी कार्रवाई करें जिससे कि प्रदेश में माहौल खराब न हो। जिला कलेक्टर यह भी सुनिश्चित करें कि आपात स्थिति में जिले में पर्याप्त मात्रा में खाद्य सामग्री उपलब्ध रहे। लोग खाद्य सामग्री व अन्य आवश्यक वस्तुओ का अनावश्यक भंडारण न करें, उसके लिए लोगों को भी जागरूक करें। जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग सुनिश्चित करेगा कि आपात स्थिति में पेयजल की पूर्ण व्यवस्था आम जन के लिए उपलब्ध हो। सीमावर्ती जिलों के संभागीय आयुक्त, महानिरीक्षक पुलिस, जिला कलेक्टर और जिला पुलिस अधीक्षक सम्बन्धित सेना व अन्य केन्द्रीय एजेन्सियों के अधिकारियों से निरन्तर सम्पर्क में रहें और समन्वय के साथ कार्रवाई करें। सीमावर्ती जिलों में जो गांव सीमा पर स्थित है, वहां आपात स्थिति में निकास की योजना भी पूर्ण रूप से तैयार रखें। जिलों में अति संवेदनशील स्थलों की सूची को अपडेट कर उसमें अस्पताल, पावर प्लान्ट, तेल और गैस के डिपो/पाइपलाइन, धार्मिक स्थल की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की जाए। जारी दिशा-निर्देश के मुताबिक सुनिश्चित किया जाए कि पंचायत एवं ग्राम स्तर पर राज्य सरकार द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं की पूर्ण जानकारी हो और आम जन को यह विश्वास हो कि संकट की घड़ी में राज्य सरकार उनके साथ है। जिलों में अग्निशमन सेवाओं को एक्टिव मोड पर रखा जाए। जिले में संचार सेवाओं को सुचारू रखा जावे व पब्लिक एड्रेस सिस्टम पर्याप्त संख्या में चालू स्थिति में उपलब्ध रहे, जिले में समय- समय पर आपदा प्रबन्धन योजना की मॉक ड्रिल की जाए। आपदा की स्थिति में गैर सरकारी संगठन , राष्ट्रीय सेवा योजना,नेशनल कैडेट कोर की भागीदारी सुनिश्चित की जावे।

Confed: राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ (कॉनफैड) की बेशकीमती जमीन कब्जा मुक्त

राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ (कॉनफैड) की बेशकीमती जमीन को कब्जा मुक्त करवाया गया है। माननीय न्यायालय का निर्णय कॉनफैड के पक्ष में आने के बाद नगर निगम ग्रेटर, जयपुर द्वारा यह कार्यवाही की गई है। कॉनफैड की प्रशासक एवं रजिस्ट्रार सहकारी समितियां श्रीमती मंजू राजपाल ने बताया कि राजापार्क के पंचवटी सर्किल स्थित राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ के भूखण्ड पर विगत कई वर्षों से कब्जा था और इस सम्बन्ध में वाद न्यायालय में विचाराधीन था। कुछ माह पूर्व हुई कॉनफैड की 39वीं वार्षिक आम सभा में प्रकरण की प्रभावी पैरवी कर निस्तारण करवाने व कब्जा हटवाने का निर्देश दिए गए थे। उन्होंने बताया कि कॉनफैड द्वारा प्रकरण की प्रभावी पैरवी करवाने के फलस्वरूप माननीय न्यायालय का निर्णय कॉनफैड के पक्ष में आया, जिसके बाद जमीन को कब्जा मुक्त करवाया गया। जयपुर शहर की प्राइम लोकेशन पर स्थित इस जमीन का उपयोग अब कॉनफैड द्वारा किया जा सकेगा।

Baglamukhi: बगलामुखी शक्तिपीठ में निकली शोभायात्रा, जयकारों से गूंजा वातावरण

0
जयपुर के कादेड़ा स्थित सुप्रसिद्ध बगलामुखी माता शक्तिपीठ मंदिर में माता बगलामुखी जयंती के शुभ अवसर पर धार्मिक उत्साह और भक्ति के साथ भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया। इस आयोजन की अगुवाई आशुतोष बगलामुखी पीठाधीश्वर महाराज के संरक्षण में की गई, जिनकी उपस्थिति ने श्रद्धालुओं में विशेष ऊर्जा और आस्था का संचार किया। शोभायात्रा की शुरुआत कादेड़ा कस्बे के ऐतिहासिक सीताराम जी मंदिर से हुई, जहाँ भक्तों ने माता के ध्वज लेकर जयकारों के साथ यात्रा का शुभारंभ किया। श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे “जय बगलामुखी माता” के नारों के साथ यात्रा में शामिल हुए। शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों—मुख्य बाजार, कल्याण मार्ग, मुख्य बस स्टैंड, मोहल्ला रैगरान और भोजियाड़ा मोड़—से होती हुई शक्तिपीठ मंदिर तक पहुँची। पूरे मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा और जलपान से स्वागत किया गया। मंदिर परिसर में विशेष पूजा, हवन और भजन संध्या का भी आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय भजन मंडलियों ने माँ की महिमा का गुणगान किया। पीठाधीश्वर ने अपने प्रवचन में श्रद्धालुओं को माँ बगलामुखी की उपासना से जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति और विजय प्राप्त होने का संदेश दिया। वहीं यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता का उदाहरण भी बना।

Kusum Yojana: प्रदेश में कुसुम योजना से किसान बन रहे हैं ऊर्जादाता

सूरज भले ही हर दिन पूरब से उदित होता हो लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सौर ऊर्जा का सूर्य निश्चित तौर पर देश के पश्चिमी राज्य राजस्थान में चमक रहा है। सूर्य भगवान की विशेष कृपा से प्रदेश की सुनहरी रेतीली धरती में सौर ऊर्जा उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं, जिनके दोहन के लिए मुख्यमंत्री पहले दिन से ही निरंतर प्रयासरत हैं। राजस्थान को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य की दिशा में पीएम-कुसुम योजना के माध्यम से एक बड़ी कामयाबी मिली है और राजस्थान ऐसा अग्रणी राज्य बन गया है जहां इस योजना के कम्पोनेंट-ए व कम्पोनेंट-सी के अन्तर्गत सौर ऊर्जा उत्पादन 1 हजार मेगावाट से अधिक हो गया है। सौर ऊर्जा का उपयोग कर किसानों को दिन में बिजली आपूर्ति की दिशा में भी राजस्थान तेजी से आगे बढ़ रहा है जिससे आज प्रदेश में 1 लाख 70 हजार से अधिक किसानों को दिन में बिजली सुलभ होने लगी है। पीएम कुसुम योजना के कम्पोनेंट-ए और कम्पोनेंट-सी के तहत ही 560 ग्रिड कनेक्टेड विकेन्द्रित सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर 70 हजार से अधिक कृषि उपभोक्ताओं को दिन में बिजली दी जा रही है। वहीं इस योजना के कम्पोनेंट-बी में लगभग 1 लाख किसानों के कृषि पम्पों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा चुका है। राज्य द्वारा योजना के सफल क्रियान्वयन को देखते हुए भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान कुसुम-ए में दो बार में कुल 6 हजार मेगावाट क्षमता के संयंत्रों के अतिरिक्त आवंटन को स्वीकृति दी है व कम्पोनेंट-सी में 2 लाख सोलर पम्पों का अतिरिक्त आवंटन किया है। इस प्रकार इस योजना में प्रदेश में लगभग 12 हजार मेगावाट क्षमता के प्लांट स्थापित किए जाने का लक्ष्य रख कार्य किया जा रहा है। योजना के तहत यह प्लांट मुख्यतः राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित हो रहे हैं जहां कृषि कनेक्शन अधिक संख्या में हैं। खेत के समीप भूमि पर लग रहे अधिकतम 5 मेगावाट क्षमता तक के इन सौर ऊर्जा संयंत्रों से किसानों को खेती से जुड़े कार्यों के लिए दिन में बिजली सुलभ होने लगी है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता के एक नए युग की शुरूआत हुई है। अपनी भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाकर किसान अन्नदाता के साथ-साथ ऊर्जादाता भी बन रहे हैं जिससे उन्हें आमदनी का एक अतिरिक्त जरिया भी मिला है। योजना में फीडर लेवल सोलराइजेशन के अन्तर्गत 33/11 केवी ग्रिड सब स्टेशन के लगभग 5 किलोमीटर के दायरे में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाने का प्रावधान है। कंपोनेंट-ए में अधिकतम 2 मेगावाट क्षमता तक तथा कंपोनेंट-सी में अधिकतम 5 मेगावाट क्षमता तक के ग्रिड कनेक्टेड सोलर प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। कंपोनेंट-सी में सौर संयंत्र की स्थापना पर भारत सरकार लागत का अधिकतम 30 प्रतिशत (अधिकतम 1 करोड़ 5 लाख रूपए प्रति मेगावाट) तक अनुदान देती है। मुख्यमंत्री ने वर्ष-2027 तक किसानों को कृषि कार्य के लिए दिन में बिजली उपलब्ध कराने का संकल्प व्यक्त किया है। इस संकल्प को साकार करने की दिशा में यह योजना महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार द्वारा इसे फ्लैगशिप योजना के रूप में भी सम्मिलित किया गया है।डिस्कॉम्स द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया तैयार कर सौर संयंत्रों की स्थापना में आने वाली बाधाओं को दूर किया गया। अवॉर्ड जारी होने के बाद पावर परचेज एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने, सौर संयंत्र को 11 केवी एवं 33 केवी प्रसारण लाइनों के माध्यम से ग्रिड से जोड़ने, ट्रांसफार्मर और मीटर से संबंधित स्वीकृतियों के कार्यों, सोलर प्लांट्स के निरीक्षण व साइट विजिट्स को विद्युत वितरण निगमों द्वारा निर्धारित समयावधि में पूर्ण किया जा रहा है। साथ ही जिला कलक्टरों को विद्युत लाइन बिछाने की राह में आ रही बाधाओं को दूर करने के दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। योजना के फलीभूत होने का फायदा विद्युत वितरण निगमों को हुआ है जिन्हें लगभग 3 रूपए प्रति यूनिट की सस्ती बिजली मिल रही है। स्थानीय स्तर पर उत्पादित बिजली का उपयोग स्थानीय स्तर पर ही होने से प्रसारण में होने वाली छीजत भी कम हुई है। साथ ही, कृषि की बढ़ती मांग की आपूर्ति के लिए विद्युत निगमों को अतिरिक्त विद्युत तंत्र विकसित करने की आवश्यकता में भी कमी आई है। डिस्कॉम्स को अब कृषि कार्य के लिए एक्सचेंज से महंगे दाम पर बिजली खरीदने की आवश्यकता नहीं होती। सबसे बड़ी बात यह है कि लगभग 1 हजार मेगावाट बिजली अतिरिक्त उत्पादन क्षमता विकसित करने में राज्य सरकार के बजट पर कोई अलग से भार नहीं आया है एवं साथ ही, कार्बन फुटप्रिंट में भी कमी आ रही है। वहीं योजना के कम्पोनेंट-बी का क्रियान्वयन उद्यानिकी विभाग के माध्यम से किया जा रहा है। इसके अन्तर्गत वर्तमान राज्य सरकार द्वारा 39 हजार से अधिक सौर ऊर्जा पम्प संयंत्रों की स्थापना की जा चुकी है एवं इस दृष्टि से राजस्थान देश में प्रथम तीन राज्यों में है। कम्पोनेंट-बी में किसानों को 3 से 7.5 हॉर्स पावर क्षमता के सौर ऊर्जा पम्प संयंत्र स्थापित करने पर 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है।

RHB NEWS: हाउसिंग बोर्ड 4 लाख रुपये में देगा फ्लैट, आमजन शिविर के माध्यम से करे आवेदन

अपने आवास का सपना देख रहे लोगों के लिए ख़ुशख़बरी है। राजस्थान आवासन मण्डल मंगलवार से 28 मई तक जयपुर, कोटा, बाड़मेर, जोधपुर, भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में कैंप लगाकर निर्मित आवास और फ्लैट का बेचान 50 प्रतिशत तक की छूट के साथ करेगा। आवासन आयुक्त डॉ रश्मि शर्मा ने बताया की शिविर में उपलब्ध संपत्तियों की खरीद पर 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। उन्होंने बताया की जयपुर में जोबनेर रोड़ स्थित महला आवासीय योजना में 6 और 7 मई को शिविर लगाकर विभिन्न आय वर्ग के लिए फ्लैट्स उपलब्ध करवाए जा रहे हैं जिनकी शुरुआती कीमत 4 लाख 70 हज़ार 500 रुपये है। डॉ. शर्मा ने बताया की जयपुर में महला आवासीय योजना के अलावा विभिन्न आय वर्ग के लिए बाड़मेर में मगरा आवासीय योजना और कोटा में चोमहेला आवासीय योजना के लिए 6 और 7 मई को शिविर का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 13 और 14 मई को जोधपुर की विवेक विहार आवासीय योजना, कूड़ी भगतासनी योजना के साथ ही कोटा की छीपाबड़ौद योजना के लिए 20 व 21 मई को कोटा की आवासीय योजना छबड़ा और आवासीय योजना मांगरोल तो वहीं भीलवाड़ा के सुवाना आवासीय योजना और प्रतापगढ़ की आवासीय योजना के लिए शिविर का आयोजन किया जाएगा। 27 मई और 28 मई को परतापुर आवासीय योजना और आवासीय योजना नैनवा के लिए शिविर का आयोजन होगा। डॉ शर्मा ने कहा की राज्य सरकार की मंशानुसार राजस्थान आवासन मण्डल आमजन के आवास के सपने को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है ।