C M NEWS: प्रभावी निगरानी के लिए गिरफ्तार व्यक्ति के लिए जाएं फिंगरप्रिंट्स -मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में बेहतर कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में आवश्यक संसाधनों की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। श्री शर्मा सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के प्रदेश में क्रियान्वयन के संबंध में गृह विभाग की उच्चस्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आमजन को सुरक्षा व त्वरित न्याय देना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है, जिसके क्रम में राज्य सरकार ने कई नीतिगत निर्णय लिए हैं। वहीं गृह विभाग को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए राज्य बजट 2025-26 में कई प्रावधान भी किए गए हैं। श्री शर्मा ने गृह विभाग में रिक्त पदों को शीघ्र भरने एवं पदोन्नति करने के निर्देश दिए ताकि पर्याप्त मानव संसाधन के नियोजन से प्रदेश के हर क्षेत्र में अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगे। उन्होंने कहा कि गृह विभाग आगामी वर्षों में रिक्त होने वाले पदों का भी पूर्ण विवरण तैयार करे ताकि कार्मिक के सेवानिवृत्त होते ही तुरंत भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि गृह विभाग से जुड़े शत प्रतिशत कार्मिकों को नए कानूनों के बारे में प्रशिक्षण देना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि आपराधिक गतिविधियों से संपत्तियां अर्जित करने वाले अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी संपत्तियां जब्त की जाए जिससे उनके हौंसले पस्त हों। उन्होंने प्रत्येक गिरफ्तार व्यक्ति के फिंगरप्रिंट लेने एवं ई-सम्मन की प्रभावी तामील कराने के निर्देश दिए ताकि अपराधियों पर सतत् निगरानी के साथ प्रभावी नियंत्रण भी रहे। उन्होंने कहा कि पहली बार अपराध करने वाले को नवीन कानूनों में एक तिहाई सजा पूर्ण होने पर रिहा करने का प्रावधान है। ऐसे मामलों में संवेदनशीलता रखते हुए शीघ्र निर्णय लिया जाए।

Education: मंत्रिमंडलीय उपसमिति में होगा महात्मा गाँधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों का निर्णय -शिक्षा मंत्री

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शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सोमवार को विधानसभा में आश्वस्त किया कि प्रदेश के महात्मा गाँधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों के संचालन के सम्बन्ध में उचित निर्णय लेकर विद्यार्थियों के हित में कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया गया है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा मंत्री प्रश्नकाल के दौरान सदस्य द्वारा इस सम्बन्ध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि गत सरकार द्वारा केवल नाम के लिए महात्मा गाँधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय खोल दिए गए। इन विद्यालयों में ना तो कक्षा- कक्षों की व्यवस्था की गई और न ही प्रशिक्षित अंग्रेजी माध्यम शिक्षक उपलब्ध करवाए गए। जिनका विद्यार्थियों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इस सम्बन्ध में गठित की गई मंत्रिमंडलीय उपसमिति की समय-समय पर बैठकें आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि समिति द्वारा निश्चित तौर पर शीघ्र ही इस दिशा में उचित निर्णय लेकर विद्यार्थियों के हित में कार्यवाही की जाएगी। विधायक ललित मीणा के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में शिक्षा मंत्री ने प्रदेश में संचालित 134 स्वामी विवेकानन्द राजकीय मॉडल स्कूल एवं 3737 महात्मा गांधी राजकीय (अंग्रेजी माध्यम) विद्यालयों का ब्लॉकवार व जिलेवार विवरण सदन के पटल पर रखा। श्री दिलावर ने स्वामी विवेकानन्द मॉडल स्कूल व महात्मा गांधी राजकीय (अंग्रेजी माध्यम) विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों का कक्षावार संख्यात्मक विवरण सदन के पटल पर रखा।

Politics: राज—शक्ति से प्रभावित होना या उससे भयभीत होना हमारी अज्ञानता, मूर्खता व कायरता की निशानी है

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—अनिल यादव

‘न्यायपूर्ण व्यवस्था’ का भ्रम या न्यायपूर्ण व्यवस्था की आस दो ऐसे महत्वपूर्ण कारण है जिसके कारण स्वयं ‘जन—शक्ति’, राज—शक्ति को मान्यता यानी कार्य करने की शक्ति प्रदान करती है। यदि राज—शक्ति, ‘जन—शक्ति’ की सेवा एवं उसे न्यायपूर्ण व्यवस्था प्रदान करने की बजाय उस पर शासन करने का कुत्सित प्रयास करे तो जन—शक्ति को चाहिए कि वो ‘राज—शक्ति’ को मान्यता देना बंद कर दे और व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेहिता, जन सहभागिता एवं जन—हित सुनिश्चित करने के लिए स्वयं आगे आए और अपने ही द्वारा पैदा किए गए कृतघ्न प्रतिनिधियों पर लगाम लगाने में तनिक भी देरी ना करे। क्योंकि कर्तव्यविमुख एवं कृतघ्न प्रतिनिधियों की सहभागिता से बनाए जाने वाले कानून, हम मतदाताओं के हितों व अधिकारों को कुचलकर हमें पूंजीपतियों के अंतहीन शोषण के लिए लावारिस छोड़ देने की मंशा रखते हैं। याद रहे कृतघ्न प्रतिनिधियों पर लगाम लगाने में हम जितनी अधिक देरी करेगें, हमारी समस्याओं में उतनी ही अधिक वृद्धि होती चली जाएगी, अत: जल्द से जल्द हमें अपने अपने जनप्रतिनिधि पर ‘जन नियंत्रण’ स्थापित करने का आगाज़ करना ही होगा। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ये काम हम अपने वोट को ‘दान’ करने की बजाय उसे सशर्त बनाकर बेहद आसानी से कर सकते हैं, इसके लिए हमें सिर्फ दो काम करने हैं —1.बिना लिखित सर्विस एग्रीमेंट किसी भी प्रत्याशी को वोट ना देने का दृढ़ संकल्प, 2. जनप्रतिनिधि पर नियंत्रण एवं उसके मार्गदर्शन हेतु बूथ लेवल के जागरूक नागरिकों की सहभागिता युक्त समितियों का विषयवार गठन व उनका समन्वय। कभी कभी अहंकार एवं मूर्खतावश ‘राज—शक्ति’, ‘जन—शक्ति’ के दमन के लिए पुलिस एवं सेना की सहायता लेने लगती है और बल—प्रयोग से ‘जन—शक्ति’ को कुचलने का प्रयास करती है। वो ये भूल जाती है कि पुलिस व सेना का बल ‘जन—शक्ति’ के आगे ना सिर्फ नगण्य होता है वरन् पुलिस व सेना के लोग भी उसी जन—शक्ति का एक अभिन्न अंग होते हैं। ‘राज—शक्ति’ की ‘बल प्रयोग’ की ताकत सिर्फ तभी तक प्रभावी हो सकती है जब तक ‘जन—शक्ति’ बिखरी हुई हो। यदि ‘जन—शक्ति’ को भयमुक्त होकर ‘राज—शक्ति’ से वो काम कराने हैं, जिनके लिए ‘जन—शक्ति’ ने ‘राज—शक्ति’ को मान्यता दी थी तो ‘जन—शक्ति’ को दलबंदी या राज—शक्ति की बांटो और राज करो की नीति में फंसने की बजाए चुनाव मैदान में उतरने वाले हर उस प्रत्याशी की ‘वोटबंदी’ करनी होगी जो जनता को एक ‘लिखित सर्विस एग्रीमेंट’ साईन करके करके देने से इंकार कर दे। याद रहे देश में व्याप्त समस्त अव्यवस्थाओं व समस्याओं का मूल स्रोत ‘राजनीतिक निर्णय या कानून’ ही हैं । यदि हमने अपने प्रतिनिधियों पर नियंत्रण स्थापित करके देश में कानून निर्माण की प्रक्रिया को जनता के नियंत्रण में ले लिया और कानून जनमत संग्रह के माध्यम में बनने लग गए तो विकास की गति आज की तुलना में लगभग 90 गुना तेज़ हो जाएगी, ‘जन—हित’ राज्य की नीति यानी राजनीति का केन्द्रीय विषय बन जाएगा और हमारी लगभग सभी समस्याओं का अंत हो जाएगा। ‘जन संप्रभुता संघ’ के रूप में हम कदम बढ़ा चुके हैं, मिशन में जुट चुके हैं , क्या आप भी जन—नाद की इस आवाज को गुंजायमान करने में सहभागी बनना चाहते हैं? यदि हाँ तो अविलम्ब ‘जन संप्रभुता संघ’ से जुड़ें और समस्या मुक्त भारत के सपने को सच करने में अपने हिस्से का योगदान देने में पीछे ना रहें। लेखक:— संपादक,बैस्ट रिपोर्टर न्यूज -9414349467

C M NEWS: मंत्री बजट घोषणाओं की समीक्षाकर राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर अपलोड करें —मुख्यमंत्री

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विधानसभा में बजट 2025-26 प्रस्तुत किए जाने के तुरंत बाद राज्य सरकार एक्शन मोड पर आ गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंत्रियों और सचिवों को बजट घोषणाओं का त्वरित और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार बजट घोषणाओं को समय पर पूरा करने के लिए प्रभारी सचिव और प्रभारी मंत्री 22 और 23 फरवरी को अपने प्रभार वाले जिलों का दौरा करेंगे। मंत्रीगण 23 फरवरी को अपने-अपने प्रभार वाले जिलों का दौरा कर बजट घोषणाओं का क्रियान्वयन एवं प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करेंगे। साथ ही, बजट घोषणा 2025-26 के संबंध में भूमि चिन्हीकरण और आवंटन की स्थिति के साथ ही वर्ष 2024-25 की बजट घोषणाओं की प्रगति व जिलों से संबंधित अन्य मुद्दों पर प्रभारी सचिव, जिला कलक्टर और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा करेंगे व इस संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित करेंगे। इसके पश्चात वे अपनी समीक्षा और निरीक्षण रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय भिजवाएंगे। जिलों के प्रभारी सचिव 22 व 23 फरवरी को जिलों के दौरे पर रहेंगे और अपनी रिपोर्ट 24 फरवरी तक राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर अपलोड करेंगे।

Albert Hall: अल्बर्ट हॉल पर कल्चर डायरीज के छठे एपिसोड का हुआ आयोजन

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राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और प्रचारित करने के उद्देश्य से जयपुर के अल्बर्ट हॉल पर में शुक्रवार को रंगारंग सांस्कृतिक संध्या कल्चर डायरीज के छठे एपिसोड का आयोजन हुआ। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के प्रयासों से ‘कल्चरल डायरीज’ के तहत हुए इस कार्यक्रम में हाड़ौती अंचल की पारंपरिक लोक कलाओं का भव्य मंचन हुआ। यह सुखद संयोग था कि आज अल्बर्ट हॉल का 139वां स्थापना दिवस भी था, जिससे इस आयोजन का महत्व और बढ़ गया। हाड़ौती के लोक कलाकारों ने अपने रंग में ढूंढ़ाढ को रंग दिया। देश-विदेश से आए पर्यटकों और स्थानीय दर्शकों ने बड़ी संख्या में शिरकत कर कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना की, जिससे पूरे आयोजन में उत्साह और उमंग की लहर दौड़ गई। गौरतलब है कि उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी की पहल पर राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा नवाचारों के क्रम में शुरू की गई ‘कल्चरल डायरीज’ पारंपरिक लोक कलाकारों को मंच प्रदान करते हुए राज्य की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने का कार्य कर रही है।

Assembly: प्रदेश में कामकाजी महिला हॉस्टल खोले जाएंगे -सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री

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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने शु्क्रवार को विधानसभा में कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में चरणबद्ध तरीके से कामकाजी महिला हॉस्टल खोले जाएंगे। उन्होंने कहा कि कामकाजी महिला हॉस्टल के निर्माण के लिए 30 जिला मुख्यालयों पर भूमि का आवंटन हो चुका है और 11 जिला मुख्यालयों पर भूमि आवंटन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि कामकाजी महिला निवास योजना के भवन निर्माण के लिए भारत सरकार द्वारा मांगे जाने पर स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट 2024—25 के अन्तर्गत जारी गाइडलाइन पार्ट—एक्स (कंस्ट्रक्शन आफ वर्किंग वूमन हॉस्टल्स) के तहत राजस्थान राज्य के लिए 165.32 करोड़ रुपए की डीपीआर मय रिपोर्ट बजट मांग के लिए प्रस्ताव महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार को 24 जनवरी 2025 को भिजवाए गए हैं। उन्होंने बताया कि कामकाजी महिला निवास योजना के संचालन के लिए सभी संभाग मुख्यालयों (अजमेर, जोधपुर, जयपुर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा, भरतपुर) पर भवन निर्माण हेतु भूमि आवंटित करवाई जा चुकी है। उन्होंने उक्त बजट घोषणा की अनुपालना में कामकाजी महिला निवास योजना के संचालन के लिए दिशा—निर्देश भी सदन के पटल पर रखे। विधायक श्रीमती अनिता भदेल के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में मंत्री ने कहा कि 23 जिला मुख्यालयों (सीकर, पाली, चूरू, बून्दी, झालावाड़, चित्तोड़गढ, बारां, करौली, श्रीगंगानगर, सवाईमाधोपुर, अलवर, भीलवाड़ा, जालोर, डूंगरपुर, नागौर, जैसलमेर, झुन्झुनूं, टोंक, हनुमानगढ़, दौसा, सिरोही, ब्यावर, डीडवाना—कुचामन) पर भूमि आवंटित करवाई जा चुकी है। 11 जिला मुख्यालयों (बांसवाड़ा, बाड़मेर, राजसमन्द, प्रतापगढ़, धौलपुर, बालोतरा, डीग, खैरथल तिजारा, कोटपूतली बहरोड़, फलौदी, सलूम्बर) पर भूमि आवंटित की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। उन्होंने बताया कि राजसमंद में जिला स्तरीय कमेटी के माध्यम से यह प्रक्रियाधीन है। उन्होंने आश्वस्त करते हुए कहा कि इसी वित्तीय वर्ष में भूमि आवंटित कराने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि कामकाजी महिला निवास योजना के संचालन हेतु सभी जिला मुख्यालयों पर किराये के भवनों में संचालन के लिये अभिरूचि की अभिव्यक्ति 12 फरवरी 2025 को समाचार पत्रों में प्रकाशित करवा इच्छुक संचालनकर्ता संस्थाओं से दिनांक 10 मार्च 2025 तक प्रस्ताव जिला कार्यालयों में आमंत्रित किये गये हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने 2024—25 में संभाग स्तर पर बालिका सैनिक स्कूल स्थापित किए जाने के जवाब में कहा कि अजमेर जिले के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय हाथीखेड़ा में 15 एकड़ भूमि चयनित कर ली गई है। अजमेर विकास प्राधिकरण के पास यह प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है। उन्होंने संभाग मुख्यालय पर सैनिक स्कूल के लिए अब तक की गई कार्यवाही का विवरण भी सदन की मेज पर रखा।

Assembly: मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद होगें शिक्षकों के तबादले -शिक्षा मंत्री

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शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि प्रदेश में शिक्षकों के स्थानान्तरण के लिए नीति बनाये जाने की कार्यवाही विचाराधीन है। इस संबंध में सभी सम्बन्धित पक्षों, शिक्षाविद और शैक्षिक संगठनों के विचार व सुझाव आमंत्रित किये जाएंगे। शिक्षा मंत्री प्रश्नकाल के दौरान सदस्य द्वारा इस सम्बन्ध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने सदन को बताया कि तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण के संबंध में मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद कार्यवाही की जाएगी। विधायक कैलाश चंद वर्मा के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में शिक्षा मंत्री ने बताया कि वर्तमान में राज्य सरकार के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के स्थानान्तरण पर प्रतिबंध है। उन्होंने बताया कि प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत तृतीय श्रेणी शिक्षकों के वर्ष 2018 के बाद स्थानान्तरण नहीं किए गए हैं। उन्होंने वर्ष 2018 के बाद किये गए स्थानान्तरणों का विवरण सदन के पटल पर रखा।

Assembly: कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सहित 5 विधायकों को किया निलंबित

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शुक्रवार को राजस्थान विधानसभा में इंदिरा गांधी के बयान को लेकर हंगामा हुआ और सदन की कार्यवाही रोक दी गई। इसके बाद हंगामा करने वालों पर सदन में सत्ता पक्ष की ओर से बजट सत्र की कार्यवाही से निलंबित करने का प्रस्ताव रखा गया। अध्यक्ष वासु देवनानी द्वारा विधानसभा में पारित प्रस्ताव को मंजूर किया गया और कांग्रेस दल के छ: विधयकों को पूरे बजट सत्र से सस्पेंड कर दिया गया। छ: विधयकों में गोविंद सिंह डोटासरा, रामकेश मीणा, हाकम अली खान,अमीन कागजी, जाकिर हुसैन गैसावत और संजय कुमार के नाम शामिल है। ऐसा संभवतः इतिहास में पहला उदाहरण जब विधानसभा में किसी पार्टी के अध्यक्ष के खिलाफ निलंबन का सत्ता पक्ष के मुख्य सचेतक ने निलंबन का प्रस्ताव रखा। वहीं विधानसभा में देर रात तक हंगामा होता रहा। इस दौरान कांग्रेस विधायक रात को सदन में ही डटे रहे। विधायकों ने सदन में ही भोजन किया और रात गुजारी।

High Court: ‘सरकार की आलोचना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा, न्यायपालिका की भी आलोचना की जा सकती है’: हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणी

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को एक बार फिर ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी पर रोक 19 फरवरी तक बढ़ा दी। यह रोक यति नरसिंहानंद के ‘अपमानजनक’ भाषण पर उनके कथित X पोस्ट (पूर्व में ट्विटर) को लेकर उनके खिलाफ दर्ज FIR के संबंध में लगाई गई। जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी की कि सरकार की किसी भी पहलू पर आलोचना की जा सकती है। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। खंडपीठ ने यह भी कहा कि एक संस्था के रूप में न्यायपालिका भी आलोचना के लिए खुली है। यह टिप्पणी एएजी मनीष गोयल की दलील के जवाब में की गई, जहां उन्होंने राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए सरकार की आलोचना और सरकार के फैसलों की आलोचना के बीच अंतर करने की मांग की। खंडपीठ ने मौखिक रूप से यह भी टिप्पणी की कि चूंकि धारा 124ए आईपीसी (राजद्रोह) असहमति को दबा रही थी, इसलिए संसद ने अपनी समझदारी से भारतीय न्याय संहिता के तहत एक समान प्रावधान शामिल न करके धारा 152 BNS [भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाला अधिनियम] पेश किया। खंडपीठ ने जुबैर की FIR रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं, जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि डासना मंदिर (गाजियाबाद) के मुख्य पुजारी यति नरसिंहानंद के ‘अपमानजनक’ भाषण वाले ‘X’ पोस्ट उनके पेशेवर दायित्व का हिस्सा थे और पुलिस तंत्र की निष्क्रियता को उजागर करने के लिए ऐसा किया गया। अपनी दलीलों के दौरान, राज्य के लिए एएजी गोयल ने यह भी तर्क दिया कि जुबैर द्वारा गढ़ी गई भ्रामक स्टोरी सरकार, न्यायपालिका और संविधान में जनता के विश्वास को खत्म करती हैं, जिससे गुस्सा और गलत सूचना को बढ़ावा मिलता है। कहा गया, “सरकार पर बिलकुल भी भरोसा न होना या इस हद तक नैरेटिव बनाना (जैसा कि जुबैर ने किया)। संविधान, न्यायपालिका और सरकार, सभी शाखाएं। आप किस तरह का नैरेटिव बनाना चाहते हैं। साथ ही इस तथ्य को भी कि आप किस तरह के दर्शकों को लक्षित कर रहे हैं? इससे जो गुस्सा फूटता है और इस गलत सूचना के बारे में जानकार लोगों के विश्वास में कमी आती है, जानकार लोग इस काटे गए संस्करण और गलत सूचना के आधार पर निर्णय लेंगे। सभी संस्थानों में विश्वास की कमी।” जैसा कि लाइव लॉ ने पहले बताया, एएजी मनीष गोयल के नेतृत्व वाली सरकार ने दृढ़ता से तर्क दिया कि यति नरसिंहानंद के संपादित भाषण के बारे में ‘X’ पर पोस्ट करके जुबैर ने अपने X पोस्ट के माध्यम से एक नैरेटिव बनाया और जनता को भड़काने का प्रयास किया। एएजी गोयल ने जुबैर के ‘X’ पोस्ट के समय पर भी सवाल उठाया, क्योंकि उन्होंने तर्क दिया कि तथ्य जाँचकर्ता ने आग में घी डालने का काम किया। एएजी गोयल ने यह भी प्रस्तुत किया कि महत्वपूर्ण प्रभाव वाले व्यक्ति होने के नाते, जुबैर के ट्वीट पढ़े और रीट्वीट किए जाते हैं, जिसका व्यापक प्रभाव पड़ता है। दूसरी ओर, जुबैर की ओर से दलील देते हुए सीनियर एडवोकेट दिलीप कुमार ने बुधवार को खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत किया कि उनके मुवक्किल यति नरसिंहानंद के कथित विवादास्पद भाषण का हवाला देकर और उनके आचरण को उजागर करके अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रयोग कर रहे थे, और न केवल उन्होंने, बल्कि कई नए लेखों और सोशल मीडिया अकाउंट्स ने उसी मुद्दे के बारे में पोस्ट किया। बता दें कि जुबैर पर गाजियाबाद पुलिस ने अक्टूबर 2024 में FIR दर्ज की, जिसमें उन पर विवादित पुजारी यति नरसिंहानंद के सहयोगी की शिकायत के बाद धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया। जुबैर ने FIR को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया, जिसके तहत बाद में धारा 152 BNS का अपराध जोड़ा गया। हाईकोर्ट के समक्ष उनके वकील ने जोरदार तरीके से तर्क दिया कि जुबैर के खिलाफ धारा 152 BNS सहित कोई भी धारा नहीं बनाई गई, क्योंकि उनके पोस्ट में इरादे की कमी थी, जैसा कि FIR में आरोप लगाया गया। उन्होंने यह भी प्रस्तुत किया कि उनके पोस्ट की कोई भी सामग्री उनके भाषण और अभिव्यक्ति के अधिकार से परे नहीं थी और वह केवल पुलिस अधिकारियों से पूछ रहे थे कि FIR दर्ज करने के बाद कथित ‘अपमानजनक’ भाषण देने वाले के खिलाफ क्या कार्रवाई की जानी चाहिए। जुबैर का कहना है कि 3 अक्टूबर को यति नरसिंहानंद की पैगंबर मोहम्मद के बारे में कथित ‘भड़काऊ’ टिप्पणियों वाले वीडियो की एक श्रृंखला पोस्ट करके और बाद में उनके विभिन्न विवादास्पद भाषणों के साथ अन्य ट्वीट साझा करके जुबैर ने नरसिंहानंद के भड़काऊ बयानों को उजागर करने और पुलिस अधिकारियों से उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया। दूसरी ओर, शिकायतकर्ता उदिता त्यागी ने मुसलमानों द्वारा हिंसा भड़काने के इरादे से यति के पुराने वीडियो क्लिप साझा करने के लिए जुबैर को दोषी ठहराया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जुबैर के ट्वीट के कारण गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए। इस मामले की सुनवाई गुरुवार को भी जारी रही। सौजन्य से —लाइव लॉ

Assembly: विधायकों की हरकतों से विधानसभा अध्यक्ष परेशान

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विधान सभा में विधायकों की हरकतों से अध्यक्ष वासुदेव देवनानी परेशान नजर आये। उनके द्वारा बार—बार व्यवस्था देने के बाद भी माननीय बाज नहीं आते है। माननियों से परेशान होकर श्री देवनानी ने गुरूवार को सदन में व्‍यवस्‍था देते हुये कहा कि सभी विधायकगण की सीटों पर आईपैड लगाये गये हैं। उन्‍होंने पीड़ा व्यक्त करते हुये कहा कि बार-बार कहने के बावजूद भी इनका उपयोग सही तरीके से नहीं किया जा रहा। कुछ लोग तो इसे स्टैंड के रूप में काम में ले रहे हैं, इन पर कागज रखकर पढ़ने और दबाव रखने से चार सीटों पर लगे आईपैड को रिपेयर कराया गया है। उन्होने विधायकों से अनुरोध किया कि ये स्टैंड नहीं हैं, टैक्निकल उपकरण हैं, डिजिटल तरीके से उपयोग में लिया जाता हैं। अध्यक्ष ने कहा कि इन आईपैड का प्रशिक्षण में दिये गये तरीकों से उपयोग किया जायें। उन्होने विधायकगण से कहा कि इन आईपैड को लॉक करके न जाये, ना ही इनके साथ फोन कनेक्ट करे और स्टैंड के रूप में तो इनका बिल्‍कुल ही उपयोग न करे। ये नाजुक चीजें हैं। इन्‍हें अपना समझकर उपयोग करें। जब इन्हें हिलाएं-ढुलाएं, जैसे अपन घर की चीज को इस्‍तेमाल करते हैं उसी प्रकार इनका भी उपयोग करें। यह कोई सस्ती चीज नहीं है, बड़ी मुश्किल से 16-17 करोड़ रुपये खर्च करके इन्‍हें लगाया गया हैं।