Jaipur News: जयपुर में प्रतिबंधित प्लास्टिक पर की बड़ी कार्यवाही, 9000 किलो माल जब्त, फैक्ट्री सील

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गुलाबी नगरी को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में नगर निगम जयपुर और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है। निगम के स्वास्थ्य शाखा (चालान प्रकोष्ठ) की टीम ने सरना डूंगरी स्थित एक फैक्ट्री पर औचक छापेमारी कर करीब 9000 किलोग्राम (9 टन) प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक और अवैध कैरी बैग बरामद किए हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से इसे शहर की अब तक की सबसे बड़ी जब्ती माना जा रहा है। आयुक्त के निर्देश पर ‘जीरो टॉलरेंस’ कार्रवाई— नगर निगम आयुक्त डॉ. गौरव सैनी के सख्त निर्देशों के बाद विभाग ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहा है। डॉ. सैनी को सूचना मिली थी कि औद्योगिक क्षेत्र में चोरी-छिपे भारी मात्रा में प्रतिबंधित प्लास्टिक का भंडारण और विक्रय किया जा रहा है। इसी इनपुट के आधार पर नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। छापेमारी और भारी जुर्माना उपायुक्त (स्वास्थ्य) मृणाल कुमार के नेतृत्व में गठित चालान प्रकोष्ठ टीम ने जब सरना डूंगरी स्थित संबंधित फैक्ट्री और गोदामों पर दबिश दी, तो वहां का नजारा देख अधिकारी भी दंग रह गए। भारी मात्रा में सिंगल यूज प्लास्टिक के स्टॉक को अवैध रूप से बाजार में खपाने की तैयारी थी। टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 9000 किलो प्लास्टिक को अपने कब्जे में लिया और संबंधित व्यापारियों पर 1 लाख रुपये का भारी जुर्माना ठोंका। नियम तोड़ने वालों को सख्त चेतावनी— कार्रवाई के दौरान उपायुक्त मृणाल कुमार ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार और निगम प्रशासन द्वारा प्रतिबंधित प्लास्टिक के उपयोग, भंडारण और बिक्री पर पूर्णतः रोक लगाई जा चुकी है। उन्होंने कहा, “कुछ व्यापारी निजी स्वार्थ के लिए नियमों की लगातार अनदेखी कर रहे हैं और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हमारी टीम ऐसे हॉटस्पॉट्स पर नजर रखे हुए है और आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज किया जाएगा।” जनता और व्यापारियों से अपील— इस बड़ी कामयाबी के बाद निगम आयुक्त ने शहरवासियों और व्यापारिक संगठनों से भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि जयपुर को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने की जिम्मेदारी सिर्फ प्रशासन की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है। उन्होंने व्यापारियों को आगाह किया कि वे सिंगल यूज प्लास्टिक का मोह छोड़कर वैकल्पिक साधनों (कपड़े या जूट के बैग) को अपनाएं। डॉ. सैनी ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में भी इस तरह का अवैध भंडारण पाया गया, तो भारी जुर्माने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई और प्रतिष्ठान को स्थायी रूप से सील करने जैसे कदम उठाए जाएंगे। इस कार्रवाई से अवैध प्लास्टिक कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। नगर निगम की इस सक्रियता ने साफ कर दिया है कि पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

Rajasthan News: RGHS के तहत कैशलेस दवा वितरण ठप, 50 लाख लाभार्थी परेशान, सरकार की साख पर सवालिया निशान

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राजस्थान सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक, ‘राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम’, एक बार फिर बड़े संकट के मुहाने पर खड़ी है। प्रदेश के निजी अस्पतालों और फार्मेसी संचालकों ने आज, 25 मार्च से ओपीडी के तहत दी जाने वाली कैशलेस दवाओं का वितरण अस्थायी रूप से बंद करने का कड़ा निर्णय लिया है। इस हड़ताल के चलते राज्य के करीब 50 लाख लाभार्थियों, जिनमें पेंशनर्स और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज शामिल हैं, के सामने स्वास्थ्य सेवाओं का गंभीर संकट पैदा हो गया है। भुगतान के अभाव में चरमराई व्यवस्था— राजस्थान एलायंस ऑफ हॉस्पिटल एसोसिएशंस के अनुसार, यह कदम मजबूरी में उठाया गया है। पिछले आठ से नौ महीनों से सरकार की ओर से अस्पतालों और फार्मेसी इकाइयों के करोड़ों रुपये के क्लेम लंबित हैं। बकाया राशि का भुगतान न होने के कारण दवा आपूर्तिकर्ताओं ने अब फार्मेसी संचालकों को उधार में दवाएं देना बंद कर दिया है। स्टॉक खत्म होने और वर्किंग कैपिटल की भारी कमी के कारण संचालकों के पास सेवाएं रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। पेंशनर्स और गंभीर मरीजों पर दोहरी मार— इस गतिरोध का सबसे बुरा असर बुजुर्ग पेंशनर्स पर पड़ रहा है, जो अपनी नियमित दवाओं के लिए पूरी तरह आरजीएचएस पर निर्भर हैं। हृदय रोग, कैंसर और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए एक दिन भी दवा न मिलना जानलेवा साबित हो सकता है। लाभार्थियों का कहना है कि वे सालों से अपनी मेहनत की कमाई का हिस्सा इस योजना के लिए अंशदान के रूप में देते आए हैं, लेकिन सरकारी लापरवाही के कारण उन्हें निजी जेब से महंगी दवाएं खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। निजी अस्पतालों का कड़ा रुख— एसोसिएशंस के प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद केवल आश्वासन ही मिले हैं, धरातल पर भुगतान की प्रक्रिया बेहद सुस्त है। अस्पतालों का तर्क है कि वे पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और बिना भुगतान के दवाओं का वितरण जारी रखना अब उनके बस से बाहर हो चुका है। जब तक बकाया राशि का एक बड़ा हिस्सा जारी नहीं किया जाता, तब तक कैशलेस वितरण बहाल करना संभव नहीं होगा। सरकार के सामने चुनौती— यह संकट न केवल मरीजों के लिए परेशानी का सबब है, बल्कि राज्य सरकार की साख पर भी सवालिया निशान लगाता है। चुनावी साल या बजट सत्र के आसपास इस तरह की अव्यवस्था प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठाती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी फिलहाल मामले को सुलझाने और बीच का रास्ता निकालने की कोशिशों में जुटे हैं, लेकिन फार्मेसी संचालकों ने साफ कर दिया है कि इस बार वे केवल ठोस भुगतान के बाद ही हड़ताल वापस लेंगे। फिलहाल, प्रदेश भर के लाखों कर्मचारी और पेंशनर्स टकटकी लगाए सरकार की ओर देख रहे हैं कि कब इस गतिरोध का अंत होगा और उन्हें दोबारा बिना किसी बाधा के जीवनरक्षक दवाएं मिल सकेंगी।

C M NEWS: धर्म के बिना कोई भी कार्य सार्थक नहीं —मुख्यमंत्री 

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जीवन के हर क्षेत्र में, चाहे वह राजनीति हो या कोई अन्य सामाजिक कार्य, धर्म का होना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म के अभाव में कोई भी कार्य सुचारु रूप से संपन्न नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री मंगलवार को बालोतरा जिले के कनाना श्रीमठ में आयोजित श्री ललिता महायज्ञ की पूर्णाहुति एवं मां सरस्वती मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। साधु-संतों के सानिध्य में सांस्कृतिक पुनर्जागरण— मुख्यमंत्री ने राजस्थान की पावन धरा को शौर्य, आस्था और भक्ति की त्रिवेणी बताते हुए कहा कि प्रदेश में साधु-संतों के आशीर्वाद से सनातन संस्कृति का पुनर्जागरण हो रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सनातन परंपरा हमें धर्म के मार्ग पर चलते हुए सामाजिक एकता के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने विश्वास जताया कि धर्मपरायण होने पर ही सिद्धियां प्राप्त होती हैं और इसी मार्ग पर चलकर एक उत्कृष्ट समाज व सशक्त राष्ट्र की स्थापना संभव है। विरासत से जुड़ाव और सामाजिक मजबूती— महोत्सव के दौरान उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए श्री शर्मा ने कहा कि इस प्रकार के वृहद धार्मिक आयोजन न केवल सामाजिक एकता को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ी को गौरवशाली विरासत और संस्कारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम भी बनते हैं। उन्होंने कनाना मठ की पवित्र भूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि यहाँ की मिट्टी में एक अलौकिक ऊर्जा का संचार होता है, जो भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है। बालोतरा गौरवशाली संस्कृति का सजग प्रहरी— मुख्यमंत्री ने बालोतरा के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यहाँ के तीर्थ स्थल हमारी समृद्ध संस्कृति के सजग प्रहरी हैं। कनाना श्रीमठ जैसे स्थान जन-आस्था के केंद्र होने के साथ-साथ लोक कल्याण के कार्यों में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मंच पर कई वरिष्ठ साधु-संत, स्थानीय जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। महोत्सव के दौरान समूचा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर नजर आया। मुख्यमंत्री के संबोधन ने न केवल आध्यात्मिक चेतना को जगाया, बल्कि सुशासन में धर्म और नीति के समावेश की आवश्यकता पर भी बल दिया।

NHI News: देश में टोल वसूली के नए नियम 17 मार्च 2026 से प्रभावी, टोल नहीं देने पर दोगुना जुर्माना

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केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने ‘राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण और संग्रह) नियम, 2026’ में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए एक नया डिजिटल ढांचा लागू किया है। यह नियम 17 मार्च 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो गया है, जिसका उद्देश्य मैन्युअल गलतियों को खत्म करना और राजस्व के नुकसान को रोकना है। क्या है नया डिजिटल ढांचा?— नए नियमों के तहत, नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा से गुजरने वाले हर वाहन का पूरा रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली में अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाएगा। अब केवल फास्टैग की स्कैनिंग ही काफी नहीं होगी, बल्कि तकनीक आधारित यह नया सिस्टम वाहन की पूरी यात्रा का डिजिटल पदचिह्न तैयार करेगा। इसमें यात्रा की तारीख, समय, स्थान और वाहन की श्रेणी जैसी सभी जानकारियां रियल-टाइम में अपडेट होंगी। ‘बकाया उपयोगकर्ता शुल्क’ और जुर्माना— संशोधित नियमों की सबसे अहम कड़ी ‘बकाया उपयोगकर्ता शुल्क’ की अवधारणा है। यदि किसी तकनीकी खराबी, फास्टैग में कम बैलेंस या किसी अन्य कारण से वाहन से टोल शुल्क नहीं काटा जा पाता है, तो उसे माफ नहीं किया जाएगा। इसे वाहन के खाते में ‘बकाया’ के रूप में दर्ज कर लिया जाएगा। सरकार ने इसके लिए सख्त प्रावधान किए हैं। यदि वाहन मालिक तय समय सीमा के भीतर इस बकाया शुल्क का भुगतान नहीं करता है, तो उससे दोगुना शुल्क वसूला जाएगा। यह कदम उन लोगों पर नकेल कसने के लिए उठाया गया है जो टोल भुगतान से बचने के लिए अवैध रास्तों या तकनीक का सहारा लेते हैं। ई-नोटिस प्रणाली: अब घर बैठे मिलेगी जानकारी— टोल चोरी रोकने के लिए सरकार ने पहली बार ई-नोटिस प्रणाली की शुरुआत की है। अब टोल प्लाजा पर रुककर विवाद करने की जरूरत नहीं होगी। यदि किसी वाहन का टोल बकाया है, तो सिस्टम स्वतः ही वाहन मालिक के पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी पर एक नोटिस भेजेगा। इस ई-नोटिस में यात्रा का पूरा विवरण होगा, जिसमें शामिल हैं:— यात्रा की सटीक तारीख और समय। वह टोल प्लाजा जहां से वाहन गुजरा। देय राशि और भुगतान की अंतिम तिथि। वाहन मालिक इस जानकारी को सरकार द्वारा जारी आधिकारिक पोर्टल पर भी देख सकेंगे। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि वाहन मालिकों को भी यह स्पष्ट रहेगा कि उनकी राशि कहां और क्यों बकाया है। पारदर्शिता और सुगम यात्रा— सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का मानना है कि इस डिजिटल सुधार से टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों में कमी आएगी। पूरी प्रक्रिया स्वचालित होने से मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम होगा, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होगी। यह नया ढांचा ‘पे-एज-यू-यूज़’ जैसी भविष्य की तकनीकों के लिए भी आधार तैयार करेगा, जहाँ जीपीएस आधारित टोलिंग को लागू करना आसान हो जाएगा। कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम नेशनल हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और आम नागरिक की यात्रा को बाधा मुक्त और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

C M NEWS: प्रदेश में ईंधन और उर्वरकों की कोई कमी नहीं, कालाबाजारी करने पर होगी सख्त कार्रवाई —मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया है कि राजस्थान में पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस और उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने कहा कि आमजन को किसी भी प्रकार की घबराहट या पैनिक की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अवैध भंडारण और कालाबाजारी पर ज़ीरो टॉलरेंस— मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि ईंधन और गैस के अवैध भंडारण, रिफिलिंग और किसी भी प्रकार की अनियमितता के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कृत्रिम संकट पैदा करने वाले जमाखोरों को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि वे जिला प्रशासन, पुलिस और रसद विभाग के साथ समन्वय कर स्थिति की निरंतर मॉनिटरिंग करें। हेल्पलाइन नंबर जारी, 24 घंटे मिलेगी सहायता— आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री ने 181, 112 और 14435 हेल्पलाइन नंबरों को चौबीस घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं। इन नंबरों पर प्राप्त होने वाली शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निर्धारित अवधि के बाद रिफिलिंग के लिए आवेदन करने वाले उपभोक्ताओं को बिना किसी विलंब के सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही, शादी-ब्याह जैसे बड़े आयोजनों के लिए भी गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

Rajasthan News: केंद्रीय मंत्री की अधिकारियों को ‘धमकी’ भरा वीडियो वायरल, राजस्थान की सियासत में उबाल

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के एक कथित विवादित बयान ने राजस्थान के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। शनिवार को अपने संसदीय क्षेत्र के लोहावट और बापिणी कस्बे में जनसुनवाई के दौरान शेखावत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें वे अधिकारियों को बेहद तल्ख लहजे में चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। इस बयान के बाद कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है और भाजपा सरकार को घेरा है। क्या है पूरा मामला?— मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार को केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत लोहावट क्षेत्र के दौरे पर थे। बापिणी में आयोजित एक जनसुनवाई कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता और ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। इसी दौरान किसी मुद्दे पर चर्चा करते हुए शेखावत का पारा चढ़ गया। वायरल वीडियो में शेखावत अधिकारियों को संबोधित करते हुए कह रहे हैं— “अगर किसी कार्यकर्ता के साथ बदतमीजी से बिहेव करोगे, तो मैं उससे डबल बदतमीजी से बिहेव करूंगा। उसकी नौकरी और जिंदगी दोनों बर्बाद कर दूंगा।” मंत्री की इस सख्त और आक्रामक टिप्पणी का वीडियो जैसे ही सार्वजनिक हुआ, यह जंगल की आग की तरह फैल गया। देखते ही देखते इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई। कांग्रेस का तीखा पलटवार— शेखावत के इस बयान पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कड़ी आपत्ति जताई है। डोटासरा ने सोशल मीडिया के माध्यम से तंज कसते हुए कहा कि सत्ता के नशे में चूर होकर जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अब सरकारी कर्मचारियों को खुलेआम धमका रहे हैं। उन्होंने कहा कि “नौकरी और जिंदगी बर्बाद करने” जैसी भाषा एक केंद्रीय मंत्री को शोभा नहीं देती। यह अधिकारियों के मनोबल को गिराने वाला कृत्य है। वहीं, जोधपुर की पूर्व शहर विधायक मनीषा पंवार ने भी इस बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद की एक मर्यादा होती है। अधिकारियों को सार्वजनिक मंच से इस तरह डराना-धमकाना सरासर गलत है। पंवार ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेता जनता के काम करने के बजाय अधिकारियों को डराकर अपनी राजनीति चमकाना चाहते हैं। प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल— इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक हलकों में भी दबी जुबान में चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, अभी तक इस पर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक सफाई या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय समर्थकों का तर्क है कि मंत्री जी कार्यकर्ताओं की अनदेखी और अधिकारियों की कथित मनमानी से नाराज थे। राजस्थान की राजनीति में शेखावत का यह ‘तेवर’ नया नहीं है, लेकिन “जिंदगी बर्बाद करने” वाली टिप्पणी ने इसे एक गंभीर विवाद बना दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर सड़क तक गूंज सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और ‘अहंकार’ के रूप में पेश कर रहा है। अब देखना यह होगा कि इस सियासी घमासान के बीच क्या गजेंद्र सिंह शेखावत अपने बयान पर कायम रहते हैं या कोई स्पष्टीकरण देते हैं।

Rajasthan News: केन्द्र सरकार के 300 करोड़ से होगा प्रदेश के जर्जर विद्यालय भवनों का पुनर्निर्माण

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राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ी घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के जर्जर विद्यालय भवनों के पुनर्निर्माण और सुधार के लिए केंद्र सरकार के सहयोग से 300 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर विद्यार्थियों को एक सुरक्षित और आधुनिक शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि शिक्षा को बढ़ावा देना और स्कूलों में मजबूत आधारभूत संरचना तैयार करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य है कि प्रत्येक विद्यार्थी को सुरक्षित, आधुनिक और प्रेरणादायक वातावरण मिले, ताकि वे बिना किसी बाधा के अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ सकें।” इस योजना के तहत प्रदेश के उन विद्यालयों को चिन्हित किया जाएगा जिनकी इमारतें पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं। केंद्र सरकार के 300 करोड़ रुपये के वित्तीय सहयोग से इन भवनों का कायाकल्प किया जाएगा। इसमें नए क्लासरूम का निर्माण, जर्जर छतों की मरम्मत, पेयजल सुविधा और शौचालयों का आधुनिकीकरण शामिल होगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि बेहतर सुविधाओं से लैस स्कूल न केवल नामांकन बढ़ाने में मददगार साबित होंगे, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार लाएंगे। राज्य सरकार का मानना है कि जब विद्यार्थियों को एक बेहतर परिवेश मिलता है, तो उनकी सीखने की क्षमता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे इस निवेश को राज्य के भविष्य को संवारने वाला कदम माना जा रहा है। सरकार की इस सक्रियता से ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में स्थित जर्जर स्कूलों की स्थिति में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है, जिससे प्रदेश के हजारों छात्र लाभान्वित होंगे।

Rajasthan News: राजस्थान को एयरोस्पेस, सेमीकंडक्टर और इंडस्ट्रियल पार्क नीतियों को मिली मंजूरी 

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सरकार ने राज्य को निवेश का ग्लोबल हब बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए तीन महत्वपूर्ण नीतियों— एयरोस्पेस एवं डिफेंस नीति, सेमीकंडक्टर नीति और इंडस्ट्रियल पार्क प्रमोशन पॉलिसी-2024 को लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में ली गई इस मंजूरी का उद्देश्य राज्य में उच्च तकनीक वाले उद्योगों को आकर्षित करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। सेमीकंडक्टर हब बनने की ओर बढ़ते कदम— भारत सरकार के ‘सेमीकॉन इंडिया’ मिशन के साथ तालमेल बिठाते हुए राजस्थान ने अपनी विशिष्ट सेमीकंडक्टर नीति पेश की है। इस नीति के तहत चिप मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन और असेंबली इकाइयों को भारी सब्सिडी, बिजली शुल्क में छूट और भूमि आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी। जोधपुर और पाली जैसे क्षेत्रों को विशेष रूप से इस उद्योग के लिए विकसित करने की योजना है। एयरोस्पेस और डिफेंस में आत्मनिर्भरता— नई एयरोस्पेस और डिफेंस नीति के जरिए राजस्थान अब रक्षा उपकरणों के निर्माण और विमानन क्षेत्र में अपनी पहचान बनाएगा। राज्य की भौगोलिक स्थिति और रणनीतिक महत्व को देखते हुए, एमआरओ सुविधाओं और रक्षा पुर्जों के निर्माण के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इससे न केवल स्थानीय एमएसएमई इकाइयों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि तकनीकी कौशल विकास में भी तेजी आएगी। इंडस्ट्रियल पार्क प्रमोशन पॉलिसी-2024— औद्योगिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लागू की गई नई पार्क प्रमोशन पॉलिसी निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करेगी। इसके तहत निजी डेवलपर्स को इंडस्ट्रियल पार्क बनाने के लिए स्टाम्प ड्यूटी में छूट और कन्वर्जन चार्ज में रियायतें दी जाएंगी। इससे राज्य में प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं वाले अत्याधुनिक औद्योगिक पार्कों का जाल बिछेगा। इन नीतियों के लागू होने से राजस्थान अब गुजरात और महाराष्ट्र जैसे औद्योगिक राज्यों के समकक्ष खड़ा होने की तैयारी में है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन दूरगामी नीतियों से आने वाले वर्षों में राजस्थान में अरबों रुपये का निवेश आएगा और लाखों युवाओं को तकनीकी क्षेत्र में रोजगार मिलेगा।

Jaipur News: गुलाबी नगरी में लोक संस्कृति का अनूठा संगम: आज निकलेगी ‘बूढ़ी गणगौर’ की शाही सवारी

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छोटी काशी के नाम से विख्यात जयपुर शहर इन दिनों पूरी तरह गणगौर के रंग में रंगा हुआ है। शनिवार को सिटी पैलेस से निकली गणगौर माता की भव्य सवारी के बाद अब रविवार शाम को पारंपरिक ‘बूढ़ी गणगौर’ की सवारी निकाली जाएगी। लोक मान्यताओं और दशकों पुरानी परंपरा को जीवंत रखते हुए यह सवारी भी उसी राजसी ठाट-बाट के साथ निकलेगी, जिसका गवाह बनने के लिए देशी-विदेशी पर्यटकों और स्थानीय लोगों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। परंपरा और आस्था का प्रतिबिंब— जयपुर की स्थापना के समय से ही गणगौर उत्सव का विशेष महत्व रहा है। शनिवार को चैत्र शुक्ल तृतीया के अवसर पर मुख्य गणगौर माता की सवारी निकाली गई थी, वहीं इसके अगले दिन यानी चतुर्थी को ‘बूढ़ी गणगौर’ की सवारी निकालने की विशिष्ट परंपरा है। जानकारों के अनुसार, बूढ़ी गणगौर की सवारी मुख्य रूप से उन लोगों के लिए एक और अवसर होती है जो पहले दिन दर्शन करने से चूक जाते हैं, साथ ही यह विदाई की बेला का प्रतीक भी है। शाही लवाजमा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ— रविवार शाम को ठीक 5:45 बजे सिटी पैलेस के त्रिपोलिया गेट से बूढ़ी गणगौर की सवारी रवाना होगी। सवारी में हाथी, घोड़े और ऊंटों का भव्य लवाजमा शामिल रहेगा। राजसी पोशाकों में सजे घुड़सवार और पचरंगा ध्वज लिए सिपाही इस शोभायात्रा की शोभा बढ़ाएंगे। पर्यटन विभाग के अनुसार, शनिवार की भांति रविवार को भी राजस्थान के विभिन्न अंचलों से आए लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। इसमें कच्छी घोड़ी, कालबेलिया नृत्य, और गैर नृत्य की टोलियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। शहनाई की मधुर धुनों और नगाड़ों की गूंज के साथ जब माता की पालकी त्रिपोलिया बाजार से छोटी चौपड़ की ओर बढ़ेगी, तो पूरा वातावरण ‘गौर माता की जय’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठेगा। पर्यटन और जनसैलाब— शनिवार को उमड़े भारी जनसैलाब को देखते हुए प्रशासन ने रविवार के लिए भी विशेष सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के प्रबंध किए हैं। शहर के परकोटा क्षेत्र में त्रिपोलिया बाजार, छोटी चौपड़ और गणगौरी बाजार तक के मार्ग को सजाया गया है। विदेशी पर्यटकों के बैठने के लिए विशेष दीर्घाएं बनाई गई हैं, जहाँ वे राजस्थान की इस अनुपम विरासत को अपने कैमरों में कैद कर सकेंगे। बूढ़ी गणगौर की सवारी के गणगौरी बाजार पहुंचकर संपन्न होने के साथ ही दो दिवसीय इस राजकीय गणगौर महोत्सव का विधिवत समापन होगा। इसके साथ ही सुहागिन महिलाएं और बालिकाएं अगले वर्ष माता के पुनः आगमन की कामना के साथ उन्हें विदाई देंगी।

C M NEWS: बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान का होगा सर्वे, किसानों को जल्द मिलेगी राहत —मुख्यमंत्री

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और भारी ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की है। किसानों के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखाते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को तत्काल प्रभाव से खराबे का विशेष गिरदावरी (सर्वे) करवाकर विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजने के कड़े निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया और आधिकारिक बयान के माध्यम से प्रदेश के अन्नदाताओं को ढांढस बंधाते हुए कहा कि “किसानों की पीड़ा हमारी अपनी पीड़ा है। राजस्थान की खुशहाली और समृद्धि का असली आधार हमारे मेहनती किसान भाई-बहन हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार पूरी जिम्मेदारी के साथ किसानों के साथ खड़ी है और उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। प्रशासन को त्वरित कार्रवाई के निर्देश— मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सर्वे की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और त्वरित होनी चाहिए ताकि प्रभावित किसानों को बिना किसी देरी के उचित मुआवजा और सहायता राशि मिल सके। उन्होंने जिला प्रशासन को फील्ड में जाकर धरातल पर हुए नुकसान का आकलन करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि “प्रत्येक प्रभावित किसान को शीघ्र और समुचित सहायता उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध है।” किसानों के लिए संबल बनी सरकार— गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में प्रदेश के कई जिलों में अचानक आए मौसम के बदलाव, तेज हवाओं और ओलावृष्टि ने रबी की तैयार फसलों को काफी नुकसान पहुँचाया है। गेहूं, सरसों और चने की फसलें खेतों में बिछ गई हैं, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई थीं। ऐसे में मुख्यमंत्री के इस त्वरित संज्ञान और संवेदनशीलता ने प्रदेश के लाखों किसानों को संबल प्रदान किया है। अन्नदाता की खुशहाली के लिए प्रतिबद्धता— भजनलाल शर्मा ने अपने संबोधन में दोहराया कि उनकी सरकार ‘अंत्योदय’ के संकल्प के साथ काम कर रही है, जिसमें समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति और विशेष रूप से अन्नदाता का कल्याण सर्वोपरि है। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि आपदा राहत कोष (SDRF) और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से नियमानुसार जो भी अधिकतम संभव सहायता होगी, वह समयबद्ध तरीके से प्रत्येक पात्र किसान तक पहुँचाई जाएगी। मुख्यमंत्री के इन निर्देशों के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है और राजस्व विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान के आकलन के लिए जुटने की तैयारी कर रही हैं। सरकार का यह कदम दर्शाता है कि वर्तमान नेतृत्व किसानों की समस्याओं को लेकर न केवल गंभीर है, बल्कि उनके समाधान के लिए धरातल पर सक्रिय भी है।